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                <title>Dantewada - दैनिक जागरण</title>
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                <title>35 साल तक पैदल पहुंचीं 545 गांव, समाज सेवा के लिए मिली पद्मश्री</title>
                                    <description><![CDATA[बस्तर की डॉ. बुधरी ताती ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए समर्पित किया जीवन, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/reached-545-villages-on-foot-for-35-years-received-padmashree/article-56924"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/budhri-tati.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल से निकलकर देशभर में अपनी पहचान बनाने वाली समाज सेविका डॉ. बुधरी ताती को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में 35 वर्षों तक लगातार समाज सेवा करने वाली बुधरी ताती का यह सफर संघर्ष, समर्पण और सेवा की मिसाल माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय आदिवासी समाज के उत्थान, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित किया। यही कारण है कि आज बस्तर के सैकड़ों गांवों में लोग उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं और प्यार से 'बुआ' तथा 'बड़ी दीदी' कहकर बुलाते हैं। राष्ट्रपति भवन में जब डॉ. बुधरी ताती ने पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया तो उनकी सादगी और पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आधुनिक परिधानों की जगह उन्होंने अपनी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाला पारंपरिक पहनावा चुना। यह केवल एक वेशभूषा नहीं थी, बल्कि अपनी जड़ों, पहचान और आदिवासी संस्कृति के प्रति सम्मान का संदेश भी था। समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डॉ. बुधरी ताती ने एक-दूसरे का अभिवादन किया। यह क्षण उनके लिए ही नहीं बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉ. बुधरी ताती की समाज सेवा की यात्रा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। करीब 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने तय कर लिया था कि उनका जीवन समाज के लिए समर्पित होगा। वर्ष 1984-85 के दौरान गुरमगुंडा आश्रम के लखमू बाबा से प्रेरित होकर उन्होंने सेवा का मार्ग चुना। इसके बाद उन्होंने नागपुर स्थित अखिल भारतीय राष्ट्रीय सेवा समिति में प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे रायपुर होते हुए वापस बस्तर लौटीं और समाज सेवा की शुरुआत की। उस दौर में आदिवासी इलाकों में महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी आसान नहीं था। सामाजिक बंदिशें, अशिक्षा और अंधविश्वास गहराई तक फैले हुए थे। ऐसे माहौल में एक युवा महिला का गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करना किसी चुनौती से कम नहीं था। बीते 35 वर्षों में डॉ. बुधरी ताती ने 545 से अधिक गांवों तक पैदल पहुंचकर लोगों की समस्याओं को समझा और समाधान की दिशा में काम किया। कई ऐसे गांव भी थे जहां सड़क, बिजली और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। कठिन रास्तों, जंगलों और पहाड़ी इलाकों को पार करते हुए उन्होंने लोगों तक पहुंच बनाई। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। सिलाई, कढ़ाई, हस्तशिल्प और छोटे स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से 500 से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में योगदान दिया। उनका मानना रहा कि जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, तभी परिवार और समाज दोनों मजबूत होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने दूरस्थ गांवों में जाकर लोगों को स्वच्छता, पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बीमारियों से बचाव के बारे में जागरूक किया। कई गांवों में उन्होंने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए परिवारों को प्रेरित किया। शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार अभियान चलाए गए। इसके अलावा उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी अपने मिशन का हिस्सा बनाया। गांवों में पौधरोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक किया गया। समाज में व्याप्त नशाखोरी के खिलाफ भी डॉ. बुधरी ताती ने लंबे समय तक अभियान चलाया। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को शराब और अन्य नशे के दुष्प्रभावों के बारे में समझाया। उनके प्रयासों का असर कई इलाकों में देखने को मिला, जहां लोगों ने नशे की आदत छोड़कर नया जीवन शुरू किया। समाज सुधार के इस कार्य में उन्हें कई बार विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उनकी संघर्षगाथा केवल सामाजिक चुनौतियों तक सीमित नहीं रही। डॉ. बुधरी ताती ने बताया कि एक बार अबूझमाड़ क्षेत्र के एक गांव में काम के दौरान उनकी जान पर बन आई थी। ग्रामीणों के विरोध के बीच उन्हें धारदार हथियारों के साथ दौड़ाया गया। हालात बेहद गंभीर थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनका कहना है कि यदि वे उस समय डरकर पीछे हट जातीं तो शायद कई गांव आज भी विकास और जागरूकता से दूर होते। यही साहस और दृढ़ता उन्हें अन्य समाज सेवकों से अलग पहचान दिलाती है। समाज सेवा को उन्होंने केवल एक कार्य नहीं बल्कि जीवन का उद्देश्य माना। इसी कारण उन्होंने विवाह नहीं करने का निर्णय लिया और अपना पूरा जीवन समाज के नाम कर दिया। आज भी वे बेसहारा बुजुर्गों, गरीब परिवारों और अनाथ बच्चों के लिए काम कर रही हैं। दंतेवाड़ा के हिरानार में उन्होंने एक वृद्धाश्रम की स्थापना की है, जहां जरूरतमंद बुजुर्गों को आश्रय और सम्मान मिल रहा है। साथ ही वे आदिवासी बच्चों की शिक्षा और भविष्य निर्माण की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। पद्मश्री सम्मान उनके जीवन का 23वां सम्मान है। इससे पहले उन्हें 22 पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें तीन राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी शामिल हैं। हालांकि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान लोगों का विश्वास और प्यार है। बस्तर के गांवों में आज भी लोग उन्हें अपने परिवार की तरह मानते हैं। पद्मश्री सम्मान ने न केवल उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि समर्पण, सेवा और समाज के प्रति सच्ची निष्ठा किसी भी व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 15:14:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ग्रामीणों की शिकायत पर एक्शन, डिप्टी CM के निर्देश के बाद दो EE को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[बस्तर दौरे में पेयजल संकट की शिकायत सामने आने पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सख्त, दंतेवाड़ा और कोंडागांव के अधिकारियों से सात दिन में मांगा जवाब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/action-on-villagers-complaint-notice-to-two-ees-after-instructions/article-55734"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/arun-sao.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बस्तर संभाग के ग्रामीण इलाकों में नल-जल योजनाओं के संचालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बस्तर दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उनके सामने ही पेयजल संकट की समस्या रखी थी। लोगों का कहना था कि गांवों में करोड़ों रुपए खर्च कर नल-जल योजनाएं बनाई गई हैं, लेकिन इसके बावजूद नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है। शिकायत मिलने के बाद उप मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई थी और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब इसी मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने दंतेवाड़ा और कोंडागांव जिले के कार्यपालन अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। मामला उस समय सामने आया जब उप मुख्यमंत्री अरुण साव जल अर्पण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बस्तर क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे थे। कोंडागांव जिले के बेड़मा गांव और दंतेवाड़ा जिले के टेकनार गांव में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी परेशानी बताई। लोगों का कहना था कि जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पाइपलाइन बिछाई गई, टंकियां बनाई गईं और घर-घर नल कनेक्शन भी दिए गए, लेकिन पानी की आपूर्ति नियमित नहीं हो रही है। कई परिवारों को आज भी पुराने स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने योजनाओं के संचालन और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद उप मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का निर्माण कराना नहीं है, बल्कि लोगों तक उसका लाभ पहुंचाना भी है। यदि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की समीक्षा की गई और प्रमुख अभियंता के.के. मरकाम की ओर से दोनों जिलों के कार्यपालन अभियंताओं को नोटिस जारी किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नोटिस में कहा गया है कि कोंडागांव जिले के बेड़मा गांव में जल जीवन मिशन के अंतर्गत तैयार की गई नल-जल योजना का संचालन और संधारण संतोषजनक नहीं पाया गया है। इसके कारण ग्रामीणों को नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही। विभाग ने माना है कि यह स्थिति शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही को दर्शाती है। साथ ही योजना के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करती है। विभाग का कहना है कि यदि योजना पूरी तरह तैयार है तो फिर ग्रामीणों को पानी क्यों नहीं मिल रहा, इसका जवाब संबंधित अधिकारियों को देना होगा। दूसरी ओर दंतेवाड़ा जिले के टेकनार गांव में भी स्थिति कुछ ऐसी ही पाई गई। जल अर्पण कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि गांव के एक मोहल्ले में कई घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। गर्मी के मौसम में लोगों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। विभाग के अनुसार तकनीकी मानकों के अनुरूप जलापूर्ति नहीं होना इस बात का संकेत है कि योजना के संचालन और निगरानी में कहीं न कहीं कमी रही है। यही वजह है कि दंतेवाड़ा के कार्यपालन अभियंता से भी जवाब तलब किया गया है। अधिकारियों को जारी नोटिस में सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने साफ किया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे संबंधित अधिकारियों में भी हलचल देखी जा रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सरकार अब जल जीवन मिशन और अन्य पेयजल योजनाओं के संचालन को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन देने का अभियान चलाया गया है। बस्तर जैसे दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में भी इस योजना के माध्यम से लोगों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की गई है। हालांकि कई स्थानों पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी संचालन और रखरखाव की चुनौतियां सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केवल पाइपलाइन बिछा देने या टंकी बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक पानी नियमित रूप से घरों तक नहीं पहुंचेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:28 +0530</pubDate>
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                <title>बस्तर में NIA की विशेष अदालत शुरू, नक्सल मामलों की सुनवाई होगी तेज</title>
                                    <description><![CDATA[जगदलपुर को मिला विशेष अधिकार क्षेत्र, लंबे समय से लंबित संवेदनशील मामलों के निपटारे की बढ़ी उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/nia-special-court-started-in-bastar-hearing-of-naxal-cases/article-55529"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bastar-nia-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">बस्तर संभाग में नक्सल मामलों की सुनवाई को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग आखिरकार पूरी हो गई है। केंद्र सरकार ने जगदलपुर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत की स्थापना को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद जगदलपुर स्थित नामित अपर सत्र न्यायालय को अब एनआईए के विशेष न्यायालय के रूप में अधिसूचित किया गया है। इस फैसले को बस्तर के न्यायिक ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर ही की जा सकेगी, जिससे वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बस्तर क्षेत्र लंबे समय से नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है। यहां हुए कई बड़े हमले और संवेदनशील घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनीं। ऐसे मामलों की जांच अक्सर एनआईए को सौंपी जाती रही है, लेकिन सुनवाई के लिए अलग-अलग अदालतों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे न्यायिक प्रक्रिया में समय अधिक लगता था और कई बार गवाहों, जांच अधिकारियों तथा पक्षकारों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन चुनौतियों में काफी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक यह फैसला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और राज्य सरकार से परामर्श के बाद लिया गया है। विशेष अदालत का अधिकार क्षेत्र बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों तक रहेगा। इनमें दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर और बस्तर जिले सहित अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्र शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि अदालत केवल एनआईए द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई करेगी। इससे मामलों के संचालन में विशेषज्ञता भी बढ़ेगी और प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">बस्तर में कई ऐसे मामले हैं जो वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित हैं। झीरम घाटी हमला, भाजपा नेता भीमा मंडावी की हत्या, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के कई नक्सली हमले जैसे मामलों को देश के सबसे संवेदनशील मामलों में गिना जाता है। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी और इनके राजनीतिक तथा सुरक्षा संबंधी प्रभाव भी काफी व्यापक रहे हैं। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। एनआईए भी समय-समय पर इस संबंध में अपनी जरूरत जाहिर कर चुकी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय स्तर पर अदालत स्थापित होने से सबसे अधिक राहत गवाहों और जांच अधिकारियों को मिलने की उम्मीद है। अब उन्हें सुनवाई के लिए दूर-दराज के शहरों की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। कई मामलों में गवाहों की अनुपस्थिति या समय पर पेशी नहीं हो पाने के कारण सुनवाई प्रभावित होती थी। नई अदालत के गठन से दस्तावेजों की उपलब्धता, केस डायरी की प्रस्तुति और अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं भी पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएंगी। इससे मामलों के शीघ्र निपटारे की संभावना मजबूत हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में न्यायिक संस्थाओं की मजबूत मौजूदगी लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करती है। जब गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा होता है तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है। बस्तर जैसे क्षेत्र में, जहां लंबे समय तक सुरक्षा चुनौतियां बनी रही हैं, वहां इस तरह की विशेष अदालत का गठन प्रशासनिक और न्यायिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय लोगों के बीच भी इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि इससे न केवल लंबित मामलों को गति मिलेगी बल्कि पीड़ित परिवारों को भी न्याय मिलने की प्रक्रिया तेज होगी। वहीं सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि विशेष अदालत के माध्यम से जांच और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा। जगदलपुर में स्थापित यह विशेष अदालत बस्तर के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में यह अदालत नक्सल हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई में कितनी तेजी ला पाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:08:58 +0530</pubDate>
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                <title>DRG जवान की पत्नी ने पति से अफेयर के शक में छात्रा को मरवाया, एक साल बाद खुला मामला</title>
                                    <description><![CDATA[दंतेवाड़ा में DRG जवान की पत्नी ने पति के अफेयर के शक में कॉलेज छात्रा की हत्या करवा दी। पुलिस ने कंकाल बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/drg-jawans-wife-killed-student-on-suspicion-of-having-an/article-53953"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/drg-jawan-dantewada-murder-case-student&#039;s-murder.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में कॉलेज की एक छात्रा की हत्या की खबर से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। शुरुआत में ये मामला गुमशुदगी समझा जा रहा था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लगभग एक साल बाद पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो सबको आश्चर्यचकित कर दिया। पुलिस के मुताबिक</span>, DRG <span lang="hi" xml:lang="hi">जवान की पत्नी ने अपने पति के कथित अफेयर के शक में 22 साल की छात्रा की सुपारी देकर हत्या करवा दी। आरोप है कि उसने अपने रिश्तेदार को 50 हजार रुपए देकर इस साजिश को अंजाम दिया। इस मामले में पुलिस ने आरोपी महिला और उसकी सौतेली बेटी को गिरफ्तार कर लिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। पुलिस उसकी तलाश के लिए लगातार दबिश दे रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दंतेवाड़ा के तोयलंका गांव में रहने वाला </span>DRG <span lang="hi" xml:lang="hi">जवान पांडू करटम अपनी पहली पत्नी को खो चुका था और फिर उसने कमली करटम से दूसरी शादी की थी। कहा जा रहा है कि कमली को लंबे समय से शक था कि उसके पति के कॉलेज की छात्रा रामदई कश्यप से संबंध हैं। इसी कारण घर में अक्सर विवाद होता था। जून 2024 में रामदई अचानक गायब हो गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद उसके परिवार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उस समय पुलिस को कोई ठोस सबूत नहीं मिला और मामला ठंडा पड़ गया। लेकिन बाद में जब जांच दोबारा शुरू हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पुलिस ने कॉल डिटेल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांव वालों से पूछताछ और परिवार से जुड़े लोगों के बयान जुटाए। इसी दौरान मामला पूरी तरह पलट गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुरुआती जांच में पता चला कि कमली करटम अपने पति और छात्रा की नजदीकियों से नाराज थी। जब पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सवाल किए तो उसने कई महत्वपूर्ण बातें कबूल कर लीं। अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमली ने अपने रिश्तेदार हुंगाराम उर्फ बुटू करटम को 50 हजार रुपए देकर रामदई की हत्या का आदेश दिया था। हत्या के समय पांडू करटम गांव में बीज त्यौहार में शामिल था। इसी दौरान कमली ने अपनी सौतेली बेटी लक्ष्मी को दंतेवाड़ा भेजा। रात के समय फोन पर छात्रा की मौजूदगी की जानकारी ली गई और फिर आरोपी हुंगाराम को पिकअप वाहन से वहां पहुँचाया गया। आरोप है कि उसने घर में घुसकर रामदई का मुंह और गला दबा दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उसकी मौत हो गई। इस वारदात को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हत्या के बाद शव को सफेद प्लास्टिक की बोरी में भरकर पिकअप वाहन से तोयलंका गांव लाया गया। कहा जा रहा है कि घर के पीछे नाले के पास गड्ढा खोदकर शव को दफना दिया गया था। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर दंडाधिकारी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">फोरेंसिक टीम और गवाहों की मौजूदगी में वहां खुदाई करवाई। मौके से बोरी में बंद कंकाल बरामद किया गया। अवशेषों को पोस्टमॉर्टम और डीएनए जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। इस मामले में कमली करटम और लक्ष्मी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य आरोपी हुंगाराम उर्फ बुटू करटम अभी भी फरार है। पुलिस का कहना है कि उसे भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं और लोग इस वारदात को लेकर हैरान हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 12:25:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>Sachin Tendulkar Bastar Visit: बस्तर में बच्चों संग क्रिकेट खेलेंगे सचिन</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ दौरे पर दंतेवाड़ा पहुंचेंगे, खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की पहल क्रिकेट के दिग्गज आज पहली बार बस्तर क्षेत्र का दौरा करेंगे। स्थानीय बच्चों के साथ मैदान में उतरकर खेल प्रतिभाओं को प्रेरित करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/sachin-tendulkar-visit-bastar-sachin-will-play-cricket-with-children/article-51811"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-sachin.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत के महान क्रिकेटर <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Sachin Tendulkar</span></span> आज छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के दौरे पर पहुंच रहे हैं, जहां वे दंतेवाड़ा में बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते नजर आएंगे। यह उनका पहला बस्तर दौरा है, जिसे स्थानीय प्रशासन और खेल संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्र में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देना और युवाओं को नई दिशा देना है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, तेंदुलकर अपने इस दौरे के दौरान छिंदनार, पनेड़ा और जावंगा जैसे गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वे न केवल बच्चों के साथ क्रिकेट खेलेंगे, बल्कि खेल के प्रति रुचि बढ़ाने और प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए भी प्रेरित करेंगे।</p>
<h5><span><strong>खेल से बदलाव की पहल</strong></span></h5>
<p>बस्तर क्षेत्र में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए यह पहल लंबे समय से चल रही है।सूत्रों के मुताबिक, तेंदुलकर से जुड़ी संस्था और सहयोगी संगठनों द्वारा यहां खेल मैदान विकसित करने और स्थानीय शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का काम किया जा रहा है।पनेड़ा में एक नए स्टेडियम का उद्घाटन भी कार्यक्रम का हिस्सा है, जिससे क्षेत्र में खेल ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।</p>
<h5><span><strong>स्कूलों में खेल का विस्तार</strong></span></h5>
<p>जानकारी के अनुसार, दंतेवाड़ा जिले के करीब 25 स्कूलों और आश्रमों में खेल गतिविधियां शुरू की जा चुकी हैं। गीदम ब्लॉक के कई स्कूलों में छोटे-छोटे मैदान तैयार किए गए हैं, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद विभिन्न खेलों का अभ्यास कराया जा रहा है।महाराष्ट्र की मानदेशी फाउंडेशन ने इस दिशा में अहम भूमिका निभाई है और अब तक 15 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर उन्हें कोचिंग के लिए तैयार किया गया है।</p>
<h5><span><strong>स्थानीय बच्चों पर असर</strong></span></h5>
<p>इस पहल का सबसे बड़ा असर स्थानीय बच्चों और युवाओं पर देखा जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि खेल गतिविधियों के जरिए न केवल शारीरिक विकास होता है, बल्कि आत्मविश्वास और अनुशासन भी बढ़ता है।बस्तर जैसे क्षेत्रों में, जहां लंबे समय तक विकास की गति प्रभावित रही, वहां इस तरह के प्रयास सामाजिक बदलाव का माध्यम बन सकते हैं।</p>
<p>प्रशासन और आयोजकों को उम्मीद है कि इस दौरे के बाद क्षेत्र में खेल गतिविधियों को और गति मिलेगी।स्थानीय स्तर पर नई प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में भी काम तेज किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 10:16:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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