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                <title>Mahakal Temple - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Mahakal Temple RSS Feed</description>
                
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                <title>मंदिरों में डिजिटल डोनेशन सिस्टम लागू करने की तैयारी, पारदर्शिता बढ़ाने पर सरकार का जोर</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या विवाद के बाद मध्य प्रदेश में बनेगी एक्सपर्ट कमेटी, बड़े देवस्थानों की दान व्यवस्था की होगी समीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/governments-emphasis-on-increasing-transparency-preparation-to-implement-digital-donation/article-56634"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/digital-donation-system.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चंदे और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सामने आए विवाद के बाद मध्य प्रदेश सरकार अब प्रदेश के प्रमुख मंदिरों की दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकार बड़े देवस्थानों में डिजिटल डोनेशन सिस्टम को व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है, ताकि नकद लेन-देन पर निर्भरता कम हो और दान राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, संस्कृति तथा पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने संकेत दिए हैं कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, खंडवा के ओंकारेश्वर मंदिर सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों में क्यूआर कोड आधारित डिजिटल दान व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से न केवल दान प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि मंदिरों की आय और खर्च का रिकॉर्ड भी अधिक व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखा जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए राज्य सरकार एक विशेषज्ञ समिति का गठन करने जा रही है। यह समिति देश के उन प्रमुख मंदिरों का अध्ययन करेगी जहां दान और चढ़ावे के प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। समिति विभिन्न राज्यों के प्रसिद्ध मंदिरों का दौरा कर वहां लागू व्यवस्थाओं को समझेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश के मंदिरों में नई व्यवस्थाएं लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब मंदिरों में दान राशि और संपत्ति के प्रबंधन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में नकद दान करते हैं, ऐसे में रिकॉर्ड रखने और निगरानी की मजबूत व्यवस्था जरूरी हो जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में पहले भी मंदिरों की वित्तीय व्यवस्था को लेकर गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। सबसे चर्चित मामला रामराजा मंदिर से जुड़ा रहा है, जहां वर्ष 2017 में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने प्रशासन को भी चौंका दिया था। उस समय मंदिर के खजाने, दान राशि, आभूषणों और विभिन्न अभिलेखों में कथित गड़बड़ियों की बात सामने आई थी। प्रारंभिक जांच में कई तरह की विसंगतियां उजागर होने के बाद प्रशासन ने मामला दर्ज कराया था। बताया जाता है कि तत्कालीन जांच में मंदिर की नकद राशि, गहनों और स्टॉक रजिस्टर से जुड़ी कई अनियमितताओं के संकेत मिले थे। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। हालांकि मामला वर्षों तक जांच के स्तर पर ही उलझा रहा। नौ साल बीत जाने के बावजूद कथित रूप से गायब हुई संपत्ति और नकदी के संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आ सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लंबे समय तक जांच लंबित रहने का मुद्दा भी चर्चा में रहा। हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकल पीठ ने मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि अत्यधिक लंबी अवधि तक विवेचना लंबित रखना त्वरित न्याय के सिद्धांत के अनुरूप नहीं माना जा सकता। अदालत की टिप्पणी के बाद यह मामला फिर चर्चा में आया। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में देरी के पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण रहे हैं और इस फैसले को उच्च स्तर पर चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। मंदिरों में डिजिटल डोनेशन सिस्टम लागू होने से ऐसी कई समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। डिजिटल भुगतान का हर लेन-देन रिकॉर्ड में दर्ज होता है, जिससे हिसाब-किताब की निगरानी आसान हो जाती है। साथ ही दानदाताओं को भी यह भरोसा मिलता है कि उनकी ओर से दी गई राशि का सही उपयोग किया जा रहा है। कई बड़े धार्मिक संस्थानों ने पहले ही डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन दान की सुविधा शुरू कर दी है, जिसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है।  सरकार की प्रस्तावित समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में डिजिटल दान व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>महाकाल मंदिर में युवक से मारपीट, पहचान जांच पर विवाद बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में भस्मारती कतार के दौरान हुई घटना, सोशल मीडिया वीडियो से मामला गरमाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/youth-assaulted-in-mahakal-temple-controversy-over-identity-check-increases/article-56164"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ujjain-murder-case-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में देर रात हुई एक घटना ने धार्मिक नगरी में तनाव और चर्चा दोनों को बढ़ा दिया है। भस्मारती की चलित कतार में खड़े एक युवक के साथ मारपीट का आरोप सामने आया है, जिसके बाद मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और पुलिस को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। घटना 16 और 17 जून की दरमियानी रात करीब 2 बजे की बताई जा रही है, जब मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी और कतार धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान अचानक हुए विवाद ने माहौल को असहज बना दिया और कुछ देर के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।</p>
<p style="text-align:justify;"> महाराष्ट्र के पुणे क्षेत्र का रहने वाला एक 26 वर्षीय युवक अपनी एक महिला मित्र के साथ उज्जैन दर्शन के लिए आया था। दोनों ने महाकाल मंदिर में भस्मारती में शामिल होने की योजना बनाई थी और इसी वजह से वे देर रात हरसिद्धि चौराहे के पास लगी कतार में खड़े थे। बताया गया है कि युवक ने अपने माथे पर चंदन का त्रिपुंड लगाया हुआ था और “महाकाल” नाम भी अंकित किया हुआ था, ताकि वह धार्मिक वातावरण के अनुसार दर्शन में शामिल हो सके। लेकिन कतार के दौरान कुछ लोगों को उस पर संदेह हुआ और पहचान को लेकर सवाल उठने लगे। शुरुआती बातचीत के बाद स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती चली गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद तब बढ़ा जब कुछ लोगों ने युवक से उसका पहचान पत्र दिखाने की मांग की। आधार कार्ड देखने के बाद यह बात सामने आई कि युवक किसी अन्य समुदाय से है, जिसके बाद वहां मौजूद कुछ लोगों के बीच बहस और आक्रोश की स्थिति बन गई। आरोप है कि इसके बाद भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने युवक के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान युवक लगातार खुद को बचाने और स्थिति को शांत करने की कोशिश करता रहा, लेकिन भीड़ के बीच हालात बिगड़ते गए। कतार में मौजूद अन्य श्रद्धालु भी अचानक हुई इस घटना से हैरान रह गए और कुछ देर के लिए वहां अव्यवस्था फैल गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरी घटना के दौरान कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया और विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रिया शुरू हो गई। कुछ लोग इसे सुरक्षा और संदेह से जुड़ा मामला बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे भीड़ के हाथों कानून अपने हाथ में लेने की घटना के रूप में देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस चल रही है और अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने घटना के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए युवक को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उससे पूरी घटना की जानकारी ली। स्थानीय थाना प्रभारी के अनुसार, अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन पुलिस ने अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है। वायरल वीडियो और मौके पर मौजूद लोगों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि घटना के समय मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण स्थिति को तुरंत नियंत्रित करने में कुछ कठिनाई आई। प्रशासन अब यह भी समीक्षा कर रहा है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से कैसे निपटा जाए ताकि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनी रहे। घटना के बाद मंदिर क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। स्थानीय स्तर पर इस घटना ने लोगों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। कुछ लोग इसे एक गलतफहमी का परिणाम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे गंभीर सामाजिक मुद्दा मान रहे हैं। धार्मिक स्थलों पर पहचान और सुरक्षा को लेकर पहले भी बहस होती रही है, और यह घटना उस चर्चा को एक बार फिर सामने ले आई है। वहीं, युवक के साथ आई महिला मित्र और उसके परिजनों को भी सूचना दी गई है, और पुलिस सभी पक्षों से बातचीत कर स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:36:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाकाल मंदिर में ‘पुष्पा’ गेटअप में VIP एंट्री, वीडियो वायरल</title>
                                    <description><![CDATA[साड़ी-ब्लाउज पहनकर पहुंचे युवक को मिली विशेष प्रवेश सुविधा, मंदिर परिसर में वीडियो और फोटो सामने आने के बाद कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vip-entry-video-in-pushpa-getup-in-mahakal-temple-goes/article-55431"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-temple-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में एक युवक की एंट्री और उससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में युवक फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार से प्रेरित वेशभूषा में नजर आ रहा है। उसने साड़ी-ब्लाउज पहन रखा था, पैरों में पायल, हाथों में चूड़ियां, कानों में टॉप्स और नाक में नथनी भी दिखाई दे रही थी। गले में नींबू की माला और अन्य आभूषण पहनकर वह मंदिर परिसर में घूमता नजर आया। मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब वीडियो में उसे सामान्य श्रद्धालुओं की तरह नहीं बल्कि विशेष सुविधा के साथ मंदिर में प्रवेश करते देखा गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">महाकाल मंदिर में हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर कई नियम लागू हैं। मंदिर परिसर में मोबाइल से फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर भी प्रतिबंध है। इसके बावजूद वायरल वीडियो में युवक न केवल मंदिर परिसर के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देता है बल्कि उसके साथ मंदिर समिति के कुछ कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी नजर आते हैं। कई तस्वीरों और वीडियो क्लिप्स में कर्मचारी उसके साथ फोटो खिंचवाते दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि युवक को विशेष प्रोटोकॉल के साथ मंदिर में प्रवेश दिया गया था। वायरल वीडियो में वह गणेश मंडपम तक पहुंचता दिखाई देता है। सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर दर्शन करते हैं, ऐसे में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर युवक को यह सुविधा किस आधार पर दी गई। कुछ लोगों ने इसे नियमों के उल्लंघन का मामला बताया तो कुछ ने सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई। वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद यह मुद्दा शहर में चर्चा का विषय बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अपलोड की गई थीं। दावा किया गया कि इन्हें एक ऐसे अकाउंट से साझा किया गया, जहां इसी वेशभूषा में बने अन्य वीडियो भी मौजूद हैं। वीडियो सामने आने के बाद कई श्रद्धालुओं ने नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि जब आम लोगों के लिए सख्त नियम लागू हैं तो फिर किसी व्यक्ति को विशेष छूट कैसे दी जा सकती है। सोशल मीडिया पर लोगों ने मंदिर प्रशासन से जवाब भी मांगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले ने तूल पकड़ा तो मंदिर प्रशासन को भी सफाई देनी पड़ी। महाकाल मंदिर प्रशासन के अनुसार वायरल वीडियो हाल का नहीं बल्कि फरवरी महीने का बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि वीडियो सामने आने के बाद तत्काल जांच कराई गई थी। जांच के दौरान यह पाया गया कि निर्धारित व्यवस्था का पालन नहीं किया गया था। इसके बाद संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे उसके पद से हटा दिया गया। प्रशासन का कहना है कि मंदिर की मर्यादा और नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों के अनुसार मंदिर परिसर में किसी को विशेष अनुमति देना या प्रतिबंधित क्षेत्रों में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी होने देना नियमों के खिलाफ है। यही कारण है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की गई। हालांकि इस पूरे मामले में यह भी चर्चा रही कि वीडियो काफी समय बाद सार्वजनिक क्यों हुआ और अब जाकर इस पर बहस क्यों शुरू हुई। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है। महाकाल मंदिर देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की घटना तुरंत लोगों का ध्यान खींच लेती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 16:53:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मंगलवार भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल</title>
                                    <description><![CDATA[चंदन, त्रिपुंड, भांग और रजत मुकुट से हुआ दिव्य श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/baba-mahakal-dressed-as-a-king-in-bhasma-aarti-on/article-54702"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दिव्य और मनमोहक स्वरूप के दर्शन हुए। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रतिदिन की तरह भस्म आरती से पहले पुजारियों ने प्रथम घंटानाद के साथ गर्भगृह में प्रवेश किया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान का ध्यान किया गया और हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हुए। आरती के पश्चात बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार प्रारंभ हुआ। जटाधारी स्वरूप में भगवान के मस्तक पर चंदन, तिलक, त्रिपुंड और भांग अर्पित की गई। इसके साथ ही उन्हें रजत मुकुट धारण कराया गया और राजा स्वरूप में सजाया गया। यह दिव्य स्वरूप देखते ही श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भक्ति से भर उठीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित किया गया और पारंपरिक रीति से भस्म रमाई गई। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी विशेष पहचान रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान महाकाल ही ऐसे देव हैं जिनकी आरती भस्म से की जाती है। यही कारण है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अद्भुत और दुर्लभ आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया। गर्भगृह में फूलों की सुगंध और मंत्रोच्चार के बीच भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ। विशेष श्रृंगार के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भक्तों के कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंगलवार होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक देखी गई। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कई श्रद्धालु देर रात ही मंदिर परिसर पहुंच गए थे ताकि वे भस्म आरती के दिव्य दर्शन कर सकें। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती की ख्याति विश्वभर में है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों का उत्साह कम नहीं होता। मंगलवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल का अलौकिक रूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">भक्तों का मानना है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करने से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और मन को शांति प्राप्त होती है। मंगलवार की भस्म आरती के दौरान भी मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल की आराधना में लीन दिखाई दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:25:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समर सीजन में उज्जैन ट्रिप का बनाएं परफेक्ट प्लान, घूमिए मंदिर और चखिए स्वादिष्ट फूड</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी की छुट्टियों में उज्जैन घूमने जा रहे हैं तो जानिए कौन-कौन सी जगहें देखें, क्या खाएं और कैसे बनाएं यादगार ट्रिप।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/make-a-perfect-plan-for-ujjain-trip-in-summer-season/article-54290"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ujjain-trip.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश का धार्मिक और ऐतिहासिक शहर उज्जैन देशभर में अपनी आध्यात्मिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है। भगवान महाकाल की नगरी कहलाने वाला यह शहर हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। गर्मी की छुट्टियों में अगर आप किसी शांत, धार्मिक और सांस्कृतिक जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो उज्जैन आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यहां मंदिरों के साथ-साथ स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड और ऐतिहासिक स्थान भी पर्यटकों को खास अनुभव देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन जाने से पहले ट्रिप की सही प्लानिंग करना जरूरी है, खासकर समर सीजन में। गर्मी के मौसम में यहां दिन का तापमान काफी बढ़ जाता है, इसलिए सुबह और शाम का समय घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। अगर आप महाकाल मंदिर में भस्म आरती देखना चाहते हैं तो पहले से ऑनलाइन या ऑफलाइन बुकिंग की जानकारी जरूर लें। सुबह जल्दी उठकर दर्शन करना ज्यादा सुविधाजनक रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन पहुंचने के बाद सबसे पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन जरूर करें। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक मान्यता पूरे देश में है। सुबह की भस्म आरती यहां का सबसे खास आकर्षण होती है। मंदिर परिसर का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को अलग ही शांति का अनुभव कराता है। महाकाल लोक बनने के बाद यहां की सुंदरता और भी बढ़ गई है। विशाल कॉरिडोर, भव्य मूर्तियां और आकर्षक लाइटिंग पर्यटकों को बेहद पसंद आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">महाकाल मंदिर के अलावा उज्जैन में काल भैरव मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। यहां भगवान भैरव को मदिरा चढ़ाने की परंपरा अनोखी मानी जाती है। इसके अलावा हरसिद्धि मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, चिंतामण गणेश मंदिर और गढ़कालिका मंदिर भी दर्शनीय स्थल हैं। धार्मिक महत्व के साथ-साथ इन मंदिरों की वास्तुकला भी लोगों को आकर्षित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर आप शाम के समय घूमना चाहते हैं तो रामघाट जरूर जाएं। क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित यह घाट शाम की आरती के दौरान बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। नदी किनारे बैठकर शांति और सुकून का अनुभव किया जा सकता है। गर्मी के मौसम में शाम की ठंडी हवा पर्यटकों को राहत देती है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह जगह शानदार मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन सिर्फ धार्मिक स्थलों के लिए ही नहीं बल्कि अपने स्वादिष्ट खाने के लिए भी मशहूर है। यहां का स्ट्रीट फूड लोगों को खूब पसंद आता है। सुबह के नाश्ते में पोहा-जलेबी का स्वाद जरूर लेना चाहिए। गर्मागरम पोहा पर सेव और नींबू डालकर परोसा जाता है, जबकि ताजी जलेबी इसका स्वाद दोगुना कर देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा उज्जैन की कचौरी और समोसे भी काफी प्रसिद्ध हैं। शहर के कई पुराने दुकानों पर मिलने वाली दाल कचौरी और आलू समोसा लोगों की पहली पसंद माने जाते हैं। अगर आपको मीठा पसंद है तो यहां की रबड़ी, मालपुआ और मावा बाटी जरूर ट्राय करें। गर्मी के मौसम में लस्सी और शिकंजी भी लोगों को खूब पसंद आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रीट फूड पसंद करने वालों के लिए फ्रीगंज और टॉवर चौक इलाके खास माने जाते हैं। यहां शाम के समय खाने-पीने की दुकानों पर काफी भीड़ रहती है। चाट, दही बड़ा, भेलपुरी और पाव भाजी जैसी चीजें भी आसानी से मिल जाती हैं। स्थानीय स्वाद का आनंद लेने के लिए छोटे फूड स्टॉल्स पर जाना अच्छा विकल्प हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">समर ट्रिप के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। गर्मी से बचने के लिए हल्के कपड़े पहनें और पानी की बोतल हमेशा साथ रखें। दोपहर के समय ज्यादा घूमने से बचें और सुबह-शाम यात्रा करें। मंदिरों में दर्शन के दौरान नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन में रहने के लिए बजट होटल से लेकर अच्छे रिसॉर्ट तक आसानी से मिल जाते हैं। महाकाल मंदिर के आसपास कई धर्मशालाएं और होटल उपलब्ध हैं, जहां श्रद्धालु आराम से रुक सकते हैं। ट्रांसपोर्ट के लिए ऑटो और ई-रिक्शा सबसे सुविधाजनक माने जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गर्मी की छुट्टियों में उज्जैन की यात्रा धार्मिक आस्था, संस्कृति और स्वादिष्ट खाने का शानदार अनुभव देती है। यहां की आध्यात्मिक शांति, मंदिरों की भव्यता और स्थानीय भोजन हर पर्यटक को खास यादें देकर जाता है। अगर आप इस समर सीजन में एक यादगार ट्रिप प्लान करना चाहते हैं तो उज्जैन आपके लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 11:52:17 +0530</pubDate>
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                <title>बाबा महाकाल की भस्म आरती में पंचामृत पूजन, दिव्य श्रृंगार के दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकाल मंदिर में तड़के हुई भस्म आरती, भांग-चंदन और रजत आभूषणों से सजे बाबा महाकाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a1688937fb88/article-54288"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के होने वाली भस्म आरती के दौरान भक्तिभाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह मंदिर के कपाट खुलते ही बाबा महाकाल के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्ति वाचन किया गया। इसके बाद विधिवत अनुमति लेकर चांदी द्वार खोला गया और गर्भगृह के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले गए। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, घंटियों और डमरू की ध्वनि से पूरा वातावरण शिवमय हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">भस्म आरती की शुरुआत बाबा महाकाल के अभिषेक से हुई। मंदिर के पुजारियों ने भगवान का पूर्व श्रृंगार उतारकर जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष पूजन संपन्न कराया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचामृत पूजन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है और इससे भक्तों को सुख-समृद्धि तथा आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। पूजन के दौरान गर्भगृह में मौजूद पुजारी वैदिक मंत्रों के साथ विधिविधान से अनुष्ठान करते रहे, जबकि नंदी हाल और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु ‘हर हर महादेव’ के जयकारे लगाते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकाल की कर्पूर आरती की गई। आरती के समय मंदिर परिसर का दृश्य अत्यंत मनोहारी दिखाई दिया। जलती हुई कर्पूर की लौ और शिव स्तुति के स्वर ने भक्तों को आध्यात्मिक भाव से भर दिया। इसके बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग, चंदन और सुगंधित इत्र से अलंकृत किया गया। साथ ही शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष माला धारण कराई गई। विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों से बाबा का अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती में बाबा महाकाल को अलग-अलग स्वरूपों में सजाया जाता है। बुधवार की आरती में पारंपरिक शिव स्वरूप के साथ विशेष भस्म श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहा। नंदी हाल में भी विशेष पूजन किया गया। यहां नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन विधिवत संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं ने नंदी जी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की प्रार्थना की।</p>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देश और दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यह भारत की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में शामिल मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा महाकाल को अर्पित की जाने वाली भस्म जीवन और मृत्यु के सनातन सत्य का प्रतीक है। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु हर दिन तड़के होने वाली इस आरती में शामिल होने उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महाकाल मंदिर की भस्म आरती का उल्लेख कई धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में मिलता है। कहा जाता है कि भगवान शिव श्मशानवासी और विरक्त स्वरूप में पूजे जाते हैं, इसलिए उन्हें भस्म अर्पित की जाती है। इस परंपरा को देखने और अनुभव करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु महीनों पहले ऑनलाइन बुकिंग कराते हैं। मंदिर प्रशासन के मुताबिक भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को ड्रायफ्रूट, फल और मिष्ठान का भोग भी लगाया गया। इसके बाद महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से पारंपरिक विधि से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। पुजारियों ने बताया कि भस्म अर्पण की यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे विशेष नियमों के साथ संपन्न कराया जाता है। आरती के दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ अनुष्ठान में शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार की भस्म आरती में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल और मंदिर प्रशासन के कर्मचारी तैनात रहे। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर अपने परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि भस्म आरती के दर्शन मात्र से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार सामान्य दिनों की तुलना में इन दिनों श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। सावन, महाशिवरात्रि और विशेष धार्मिक अवसरों पर यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि मध्यप्रदेश के धार्मिक पर्यटन का भी बड़ा आकर्षण माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 11:51:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>26 मई महाकाल भस्म आरती: चंद्र-त्रिपुंड और बिल्वपत्र से सजे बाबा महाकाल</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकाल मंदिर में 26 मई की भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का चंद्र-त्रिपुंड और बिल्वपत्र से विशेष श्रृंगार किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/26th-may-mahakal-bhasma-aarti-baba-mahakal-decorated-with-chandra-tripund/article-54207"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंगलवार तड़के उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का बेहद खूबसूरत और दिव्य श्रृंगार देखने को मिला। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। मंदिर परिसर में रात से ही भक्तों की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। जैसे ही गर्भगृह के पट खुले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, “</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के जयकारे गूंज उठे। इस बार महाकाल की भस्म आरती के दौरान बाबा को चंद्र-त्रिपुंड</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिल्वपत्र और सुगंधित फूलों से खास तरीके से सजाया गया। दर्शन के लिए आए श्रद्धालु लंबे समय तक नंदी हॉल और बैरिकेड्स में खड़े नज़र आए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रारंभिक पूजा के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं की पूजा की और फिर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया गया। बताया जा रहा है कि भस्म आरती से पहले हरिओम जल पूरे विधि-विधान के साथ अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रों के बीच भगवान का ध्यान किया गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु लगातार मंत्रों का उच्चारण सुनते रहे। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। यह पल देखने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कई लोग मोबाइल में तस्वीरें कैद करने की कोशिश कर रहे थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि सुरक्षा कर्मी गर्भगृह के नियमों के बारे में उन्हें समझाते रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान को रजत का शेषनाग मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत मुण्डमाल और ताजे पुष्प अर्पित किए गए। चंदन और भांग से तैयार त्रिपुंड ने श्रृंगार को और भी आकर्षक बना दिया। सुबह होते-होते मंदिर परिसर भक्तों से पूरी तरह भर चुका था। कई श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना बताते हुए नज़र आए। अधिकारियों का कहना था कि सुबह की आरती शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और दर्शन की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रखी गई थी। ऐसा लग रहा था कि गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन आए हैं और आने वाले दिनों में भी भीड़ बढ़ सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 10:15:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल भस्म आरती में दिखा अद्भुत श्रृंगार, चंद्र-त्रिपुंड से सजे बाबा</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकाल मंदिर में 24 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार हुआ। श्रद्धालुओं ने सुबह आरती में शामिल होकर दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/amazing-makeup-seen-in-mahakal-bhasma-aarti-baba-adorned-with/article-54090"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष और आकर्षक श्रृंगार किया गया। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसके बाद गर्भगृह में पूजा-अर्चना की प्रक्रिया शुरू हुई। भस्म आरती में शामिल होने के लिए देर रात से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में पहुंचने लगी थी। सुबह होते-होते पूरा परिसर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के जयकारों से गूंज उठा। बताया जा रहा है कि छुट्टी का दिन होने के कारण बाहर से आने वाले भक्तों की संख्या भी सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा रही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। फिर दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार लगातार चलता रहा। भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित द्रव्यों से बाबा का श्रृंगार किया गया। इस बार मस्तक पर चंद्र और त्रिपुंड अर्पित किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसने श्रृंगार को और दिव्य स्वरूप दे दिया। गर्भगृह में मौजूद श्रद्धालु लगातार भगवान के दर्शन करने की कोशिश करते नजर आए। कई लोग मोबाइल में इस पल को कैद करते भी दिखाई दिए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंदिर प्रशासन लगातार निगरानी करता रहा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रों के बीच ध्यान पूजन हुआ। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर परंपरा अनुसार भस्म रमाई गई। मंदिर के अंदर उस समय का माहौल काफी आध्यात्मिक दिखाई दिया। आरती पूरी होने के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की मालाएं और पुष्प अर्पित किए गए। सुगंधित फूलों से पूरा गर्भगृह महक उठा था। श्रद्धालु नंदी महाराज के दर्शन के लिए भी लंबी कतार में लगे दिखाई दिए। कई भक्त नंदी के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। अधिकारियों के अनुसार सुबह की भस्म आरती शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और दर्शन व्यवस्था भी सामान्य बनी रही। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए गए थे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 11:15:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल मंदिर पहुंचे रेमो, अंकिता और विक्की जैन, शयन आरती में दिखी भक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकाल मंदिर में रेमो डिसूजा, अंकिता लोखंडे और विक्की जैन ने शयन आरती में हिस्सा लिया। नंदी हॉल में बैठकर बाबा महाकाल के दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/remo-ankita-and-vicky-jain-reach-mahakal-temple-devotion-seen/article-54044"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ujjain-mahakal-temple-remo-d-souza--ankita-lokhande-vicky-jain.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुक्रवार रात उज्जैन के </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Shri Mahakaleshwar Temple <span lang="hi" xml:lang="hi">में भक्ति और आस्था का एक खास माहौल देखने को मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के कई जाने-माने चेहरे बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आए। मशहूर कोरियोग्राफर </span>Remo D'Souza <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी पत्नी के साथ मंदिर पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि टीवी अभिनेत्री </span>Ankita Lokhande <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने पति </span>Vicky Jain <span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ शयन आरती में शामिल हुईं। रात करीब 10 बजे होने वाली इस आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ मौजूद थी। जैसे ही आरती शुरू हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरा नंदी हॉल </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">हर हर महादेव</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">के जयकारों से गूंज उठा। कलाकार भी आम श्रद्धालुओं की तरह शांत होकर आरती में शामिल होते हुए दिखे। इन मशहूर चेहरों पर लोगों की नजरें कुछ वक्त के लिए टिकी रहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी माहौल पूरी तरह से धार्मिक बना रहा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों का कहना है कि सभी कलाकार सीधे नंदी हॉल पहुंचे और वहां बैठकर बाबा महाकाल की शयन आरती देखी। आरती के दौरान मंदिर का वातावरण अत्यंत दिव्य लग रहा था। घंटों और शंख की आवाज के बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाकार भक्ति में डूबे हुए थे। कई श्रद्धालुओं ने मोबाइल से तस्वीरें लेने की कोशिश की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के चलते मंदिर प्रशासन ने लगातार व्यवस्था संभाली। आरती खत्म होने के बाद</span>, Remo D'Souza, Ankita Lokhande <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Vicky Jain <span lang="hi" xml:lang="hi">ने नंदी महाराज का पूजन किया। महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार सभी ने नंदी के कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहीं। इस दौरान उनके चेहरे पर श्रद्धा और शांति साफ झलक रही थी। कुछ श्रद्धालुओं ने इस पर टिप्पणी की कि बड़े कलाकारों को इस तरह भक्ति में लीन देखकर अच्छा लगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सिर्फ यही नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये पहली बार नहीं है जब ये कलाकार बाबा महाकाल की शरण में पहुंचे हैं। </span>Remo D'Souza <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले भी कई बार उज्जैन आ चुके हैं और अपनी धार्मिक आस्था को लेकर चर्चित रहते हैं। वहीं</span>, Ankita Lokhande <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Vicky Jain <span lang="hi" xml:lang="hi">भी समय-समय पर महाकाल मंदिर में दर्शन करते नजर आते हैं। हाल के महीनों में कई फिल्म और टीवी कलाकार उज्जैन पहुंच चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे महाकाल मंदिर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। शुक्रवार रात भी मंदिर में देर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और शयन आरती के बाद पूरा परिसर भक्ति में डूबा नजर आया।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 14:57:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल भस्म आरती 22 मई: चांदी का बेलपत्र और त्रिशूल से सजा बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकाल मंदिर में 22 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का चांदी के बेलपत्र और त्रिशूल से विशेष श्रृंगार किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mahakal-bhasma-aarti-22nd-may-divine-adornment-of-baba-mahakal/article-53937"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती बड़े अदब से पूरी की गई। ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर सुबह करीब </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे मंदिर के दरवाजे खोले गए और इसके बाद गर्भगृह में पूजा-अर्चना शुरू हुई। इस दौरान भगवान महाकालेश्वर को चांदी का बेलपत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्रिशूल और कई आभूषणों से सजाया गया। मंदिर के परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं। कहा जा रहा है कि आरती शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंच चुके थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। शुरुआती जानकारी से पता चला है कि जलाभिषेक के बाद पंचामृत से अभिषेक हुआ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहद और फलों का रस शामिल था। फिर भांग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित फूलों से बाबा का श्रंगार किया गया। भस्म आरती के दौरान पूरे मंदिर में मंत्रोच्चार और घंटियों की आवाज गूंजती रही। बताया जा रहा है कि आरती के समय का माहौल बहुत भक्ति से भरा और शांत था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और श्रद्धालु लगातार </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के नारे लगाते रहे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण से पहले पहली घंटाल बजाई गई और हरिओम का जल अर्पित करके विधिवत पूजा की गई। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म लगाई गई। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत का शेषनाग मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">रजत मुण्डमाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस सुबह की आरती में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कई भक्त नंदी महाराज के पास जाकर कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहते नजर आए। सुबह होते-होते पूरा मंदिर भक्तों की भीड़ और जयकारों से गूंज उठा। उज्जैन में महाकाल आरती का ये नजारा देखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर ज्येष्ठ माह में श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 10:35:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल भस्म आरती में दिव्य श्रृंगार, त्रिनेत्र-त्रिपुंड से सजा बाबा का स्वरूप</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकाल मंदिर में 20 मई की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/babas-form-decorated-with-divine-makeup-trinetra-tripund-in-mahakal-bhasma/article-53809"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती श्रद्धा और परंपरा के साथ संपन्न हुई। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। उसके बाद गर्भगृह में विशेष पूजा शुरू हुई। सुबह-सुबह ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर के बाहर देखी गईं। भक्त दूर-दूर से बाबा महाकाल के दर्शन के लिए रात से ही मंदिर परिसर में जुटने लगे थे। इस बार की भस्म आरती में भगवान महाकाल को आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर के पुजारियों ने पहले गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। फिर भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ। इसके बाद उन्हें दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था के तहत भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित द्रव्यों से बाबा का श्रृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिनेत्र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">त्रिपुंड और चंद्र अर्पित किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसने श्रृंगार को और भी दिव्य बना दिया। ऐसा कहा जा रहा है कि आरती के दौरान गर्भगृह का दृश्य बेहद अलौकिक था। श्रद्धालु लगातार हाथ जोड़कर दर्शन करते रहे। कई लोग इस पल को अपने मोबाइल में कैद करने की कोशिश कर रहे थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन गर्भगृह के भीतर नियमों का पालन कराया गया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले मंदिर में प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित कर मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढक कर भस्म लगाई गई। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित फूलों और आभूषणों से किया गया अलंकरण श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करता रहा। सुबह होते-होते मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में बदल गया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कही। अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म आरती का आयोजन शांतिपूर्वक हुआ। मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए अतिरिक्त इंतजाम भी किए थे। उज्जैन में इस समय श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है और महाकाल मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 10:01:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>19 मई महाकाल भस्म आरती में हुआ दिव्य श्रृंगार, भस्म, चंदन और रजत मुकुट से सजे बाबा महाकालेश्वर</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकाल मंदिर में 19 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार हुआ। श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/baba-mahakaleshwar-adorned-with-ashes-sandalwood-and-silver-crown-was/article-53727"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Mahakal Bhasma Aarti: </strong>विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार 19 मई की सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के दरवाजे खोले गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और उसके बाद श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। भस्म आरती में भाग लेने के लिए भक्त देर रात से ही लाइन में खड़े दिखे। मंदिर के गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की प्रक्रिया शुरू हुई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे पूरा माहौल शिवमय हो गया। खबर है कि इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने भी आरती में भाग लेकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर के दरवाजे खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। फिर पंचामृत से अभिषेक हुआ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसमें दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों का रस शामिल था। इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बाबा का विशेष श्रृंगार भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित द्रव्यों से किया गया। आरती से पहले पहले घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढककर परंपरा के अनुसार भस्म अर्पित की गई। फिर शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और फूलों की माला भगवान को अर्पित की गई। गर्भगृह का दृश्य उस समय बेहद भव्य नजर आ रहा था। कई श्रद्धालु मोबाइल में इस पल को कैद करने की कोशिश में थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के चलते गर्भगृह में खास नजर रखी गई।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह होते-होते मंदिर का परिसर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूब गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और सभा मंडप से बाबा महाकाल के दर्शन किए। श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं बताते हुए नजर आए। मंदिर परिसर में लगातार </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के नारों की गूंज सुनाई देती रही। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर खास इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। उज्जैन में इन दिनों श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और सुबह की भस्म आरती में शामिल होने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बड़ी संख्या में बुकिंग हो रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 09:30:52 +0530</pubDate>
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