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                <title>Terrorism - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Terrorism RSS Feed</description>
                
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                <title>शोपियां एनकाउंटर में लश्कर कमांडर जाकिर अहमद ढेर, पांच दिन बाद मिली बड़ी सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[पहलगाम आतंकी हमले के बाद जारी हिट लिस्ट में था शामिल, शोपियां के चनापोरा इलाके में सेना, पुलिस और CRPF का संयुक्त ऑपरेशन जारी, एक अन्य आतंकी की तलाश तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lashkar-commander-zakir-ahmed-killed-in-shopian-encounter-big-success/article-58166"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/shopian-encounter.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे बड़े अभियान के बीच सुरक्षाबलों को अहम सफलता मिली है। पांच दिनों से लगातार चल रहे संयुक्त ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर जाकिर अहमद गनी को मार गिराया गया। बुधवार को चनापोरा इलाके से उसका शव बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, जाकिर उन 14 स्थानीय आतंकियों की सूची में शामिल था, जिसे पहलगाम आतंकी हमले के बाद तैयार किया गया था। इस कार्रवाई को दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। हालांकि ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि सुरक्षाबलों को आशंका है कि लश्कर का एक और आतंकी लतीफ भट अब भी इलाके में छिपा हो सकता है। इसी वजह से पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान लगातार जारी है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है। शनिवार शाम खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि चनापोरा क्षेत्र में कुछ आतंकवादी छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। शुरुआती दौर में आतंकियों की ओर से बीच-बीच में फायरिंग की गई, जिसके बाद ऑपरेशन को और व्यापक बनाया गया। घने जंगलों, बागानों और आसपास के पहाड़ी इलाकों में लगातार तलाशी चलती रही। सुरक्षाबलों ने संभावित भागने के सभी रास्तों पर अतिरिक्त जवान तैनात किए और रात के समय निगरानी के लिए विशेष उपकरणों तथा रोशनी की व्यवस्था भी की गई। कई दिनों की सघन तलाश के बाद बुधवार को जाकिर अहमद गनी का शव बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार शव की पहचान और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त अभियान में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की कई इकाइयों के अलावा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और सीआरपीएफ की बटालियनें शामिल रहीं। आतंकवाद विरोधी अभियानों में विशेषज्ञ मानी जाने वाली सेना की विक्टर फोर्स ने भी इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरक्षाबलों ने गांवों, बागानों और आसपास के इलाकों में लगातार तलाशी लेते हुए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर बनाए रखी। अधिकारियों के मुताबिक ऑपरेशन पूरी तरह खुफिया इनपुट के आधार पर संचालित किया गया और नागरिकों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया। फिलहाल पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि कोई आतंकी बचकर निकल न सके। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जाकिर अहमद गनी कुलगाम जिले के मतलहामा गांव का रहने वाला था। वह पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण कश्मीर और पीर पंजाल क्षेत्र में सक्रिय था। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसका संबंध पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क से भी रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पहले भी उसके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी थी और अक्टूबर 2025 में अदालत के माध्यम से नोटिस जारी किया गया था। हाल के महीनों में उसका नाम पहलगाम आतंकी हमले की जांच के दौरान भी सामने आया था। यही कारण था कि पहलगाम हमले के बाद जिन 14 स्थानीय आतंकियों की सूची सुरक्षा एजेंसियों ने तैयार की थी, उनमें जाकिर का नाम प्रमुखता से शामिल था।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक जाकिर के मारे जाने से दक्षिण कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार वह वर्ष 2024 से संगठन के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा था। वहीं लतीफ भट पिछले वर्ष संगठन में शामिल हुआ था और उसके भी इलाके में छिपे होने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण सुरक्षाबल पूरे क्षेत्र में अभियान जारी रखे हुए हैं। पुलिस और सेना का कहना है कि जब तक क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक तलाशी अभियान जारी रहेगा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ लगातार बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान विभिन्न अभियानों में कई शीर्ष आतंकवादी मारे गए हैं और उनके ठिकानों को ध्वस्त किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों के साथ-साथ उनके सहयोगियों और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर भी लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर आतंकवाद को समर्थन देने वाले तंत्र को भी चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। यही वजह है कि कई इलाकों में आतंकियों के मददगारों के खिलाफ भी अभियान चलाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जाकिर अहमद गनी के मारे जाने के बाद पहलगाम हमले के बाद तैयार की गई 14 आतंकियों की सूची में शामिल अब तक नौ आतंकवादी ढेर किए जा चुके हैं। बाकी बचे आतंकियों की तलाश के लिए अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और किसी भी आतंकी संगठन को घाटी में दोबारा मजबूत होने का मौका नहीं दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 12:06:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों का दावा, 36 नागरिकों की मौत; सीमा पर फिर बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान सरकार ने महिलाओं और बच्चों समेत 36 लोगों के मारे जाने का दावा किया, पाकिस्तान बोला- हालिया आतंकी हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a423786ad3d6/article-57312"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/afghanistan-pakistan-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर एक बार फिर तनाव गहरा गया है। तालिबान सरकार ने सोमवार को आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ओर से किए गए सीमा-पार हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 36 नागरिकों की मौत हो गई, जबकि 163 लोग घायल हुए हैं। तालिबान प्रशासन का कहना है कि पक्तिया, पक्तिका और कुनर प्रांतों में कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे भारी जनहानि और संपत्ति का नुकसान हुआ। दूसरी ओर पाकिस्तान ने इन आरोपों के बीच अपनी कार्रवाई को हाल के आतंकी हमलों के जवाब में चलाया गया खुफिया-आधारित सैन्य अभियान बताया है। तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार बीती रात हुए हमलों में 36 नागरिकों की मौत हुई है और 163 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि हमलों में तीन रिहायशी मकान पूरी तरह नष्ट हो गए। उनके मुताबिक मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। अफगान प्रशासन ने इस घटना को नागरिक आबादी पर सीधा हमला बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।<br /><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">फितरत ने आरोप लगाया कि पक्तिया प्रांत के चमकनी जिले के मंडोखेल गांव में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने एक नागरिक के घर को निशाना बनाया। इस हमले में एक बुजुर्ग और एक बच्चे की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि जब गांव के लोग घायलों की मदद के लिए मौके पर पहुंचे तो उसी स्थान पर दूसरी बार भी बमबारी की गई। तालिबान प्रशासन का दावा है कि इस दूसरी कार्रवाई में 28 ग्रामीणों की मौत हो गई और 158 लोग घायल हो गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। तालिबान सरकार ने यह भी कहा कि पक्तिका प्रांत के गियान जिले के वालुस्त गांव में भी एक घर पर हमला किया गया। इस घटना में छह लोगों की मौत होने का दावा किया गया है, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे बताए गए हैं। वहीं कुनर प्रांत के मनोगई जिले के बारोलो गांव में भी एक रिहायशी मकान को नुकसान पहुंचा। इस हमले में किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन मकान पूरी तरह तबाह हो गया और परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा। दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय आतंकी समूहों के खिलाफ की गई। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर सीमावर्ती क्षेत्र में सुनियोजित सैन्य अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और कराची में हुए आतंकी हमलों के बाद यह कार्रवाई आवश्यक हो गई थी। पाकिस्तान का दावा है कि उसका निशाना केवल आतंकी ठिकाने थे, न कि आम नागरिक।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">सीमा पर बढ़े तनाव की एक बड़ी वजह हाल में पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ हमला भी माना जा रहा है। कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित सिंध रेंजर्स के प्रांतीय मुख्यालय पर शनिवार रात हमला हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार हमलावरों ने एक वाहन से मुख्य द्वार को टक्कर मारी, जिसके बाद गोलीबारी और विस्फोट हुए। इस हमले में तीन अर्द्धसैनिक जवान और तीन हमलावर मारे गए थे। पाकिस्तान ने इस हमले को गंभीर सुरक्षा चुनौती बताया था। कराची हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से अलग हुए एक संगठन ने ली है। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की सीमा से संचालित आतंकी संगठन उसके भीतर हमलों को अंजाम दे रहे हैं। वहीं तालिबान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है और कहती है कि वह किसी भी देश के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगी। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद, आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कई बार सीमा पार गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसी घटनाओं का सबसे अधिक असर सीमावर्ती गांवों में रहने वाले आम नागरिकों पर पड़ता है, जिन्हें बार-बार विस्थापन और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। यदि दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया मजबूत नहीं हुई तो सीमा पर हालात और जटिल हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पहले कई मौकों पर दोनों पक्षों से संयम बरतने और विवादों का समाधान बातचीत के जरिए निकालने की अपील कर चुका है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से अपने-अपने दावों पर कायम रहने के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अफगानिस्तान में हुए इन हमलों ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तालिबान सरकार नागरिकों के मारे जाने की बात कह रही है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:55:12 +0530</pubDate>
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                <title>पाकिस्तान का अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक दावा, 29 आतंकी ढेर</title>
                                    <description><![CDATA[कराची हमले के बाद पाकिस्तान का जवाबी ऑपरेशन, TTP और जमात-उल-अहरार के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistan-airstrike-in-afghanistan-claims-29-terrorists-killed/article-57256"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pakistan-afghanistan-strike.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान के भीतर तीन अलग-अलग ठिकानों पर एयरस्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई की है, जिसमें कुल 29 आतंकियों के मारे जाने की बात कही गई है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही कराची में सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जिसमें चार जवानों की मौत हो गई थी और जवाबी कार्रवाई में छह हमलावरों को मार गिराया गया था। सुरक्षा हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर फिर तेज हो गया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन हाल के आतंकी हमलों के जवाब में किया गया है। शुरुआती कार्रवाई खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में की गई, जहां खुफिया जानकारी के आधार पर एक जमीनी ऑपरेशन चलाया गया। इस ऑपरेशन में चार आतंकियों को मार गिराया गया, जिनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का एक कमांडर खान फरोश भी शामिल था। बताया गया कि इस इलाके में आतंकियों की गतिविधियों को लेकर लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे और हालात अचानक बिगड़ते जा रहे थे। इसके बाद पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने अफगानिस्तान के भीतर पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में स्थित तीन अलग-अलग आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में 25 और आतंकियों के मारे जाने की बात कही गई है। इस तरह कुल मिलाकर 29 आतंकियों के ढेर होने का दावा किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि इन ठिकानों पर मौजूद हथियारों और गोला-बारूद के बड़े जखीरे को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। हालांकि अफगानिस्तान की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कराची में इससे ठीक एक दिन पहले शनिवार रात करीब 8.30 बजे सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर आतंकी हमला हुआ था। हथियारों और विस्फोटकों से लैस आतंकियों ने अचानक परिसर में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी थी। इस हमले में चार रेंजर्स जवान शहीद हो गए थे। वहीं सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में छह हमलावर भी मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली थी, जो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़ा एक गुट माना जाता है। इस घटना ने पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र को एक बार फिर गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img alt="2Q=="></img></p>
<p style="text-align:justify;">कराची हमले के बाद ही सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार मौजूद आतंकी नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की योजना बनाई थी। खुफिया रिपोर्टों में यह संकेत मिला था कि अफगानिस्तान सीमा के अंदर कई ऐसे ठिकाने सक्रिय हैं, जहां से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाई जाती है। इसी आधार पर यह संयुक्त जमीनी और हवाई कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान कई स्थानों पर भारी विस्फोट हुए और इलाके में काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि देश में हाल के महीनों में आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है और इसके पीछे सीमा पार से संचालित नेटवर्क जिम्मेदार हैं। सूचना मंत्री तरार ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नागरिक सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की कोशिश करता रहा है, लेकिन हालात उसे मजबूर कर रहे हैं कि वह कठोर कदम उठाए। पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बीच संघर्ष कोई नया नहीं है। इसकी जड़ें 2001 के बाद शुरू हुए अफगानिस्तान युद्ध और पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा नीतियों से जुड़ी हुई हैं। समय के साथ टीटीपी ने पाकिस्तान के खिलाफ कई बड़े हमले किए हैं और उसका नेटवर्क खासकर खैबर पख्तूनख्वा और अफगान सीमा के पास सक्रिय माना जाता है। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और जटिल हो गई है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान टीटीपी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराता है, जबकि अफगानिस्तान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है। इसी विवाद के चलते दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव समय-समय पर बढ़ता रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 10:33:47 +0530</pubDate>
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                <title>पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा खुलासा, आतंकियों के मोबाइल कराची और लाहौर तक पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[एनआईए की जांच में सामने आए नए तथ्य, मोबाइल में बैसरन घाटी की लोकेशन और स्क्रीनशॉट मिले, सप्लाई चेन के जरिए पाकिस्तान पहुंचाए गए थे फोन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-revelation-in-the-investigation-of-pahalgam-terrorist-attack-terrorists/article-54751"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pahalgam-terror-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को मामले में एक महत्वपूर्ण सुराग मिला है। जांच के दौरान मारे गए आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। एजेंसी के अनुसार आतंकियों के कब्जे से मिले दोनों मोबाइल फोन चीन की एक कंपनी की सप्लाई चेन के माध्यम से पाकिस्तान पहुंचे थे और बाद में इन्हें कराची तथा लाहौर के पतों पर डिलीवर किया गया था। जांच एजेंसी का मानना है कि यह जानकारी हमले की पूरी साजिश और आतंकियों के नेटवर्क को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनआईए के अनुसार पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को पिछले वर्ष जुलाई में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। मुठभेड़ के बाद उनके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। इनमें एक रेडमी 9टी और दूसरा रेडमी नोट 12 मॉडल का फोन था। जब इन उपकरणों की डिजिटल और फोरेंसिक जांच की गई तो इनके इस्तेमाल और वितरण से जुड़े कई तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि दोनों मोबाइल पाकिस्तान के कराची और लाहौर क्षेत्रों तक पहुंचाए गए थे। एजेंसी ने तकनीकी माध्यमों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर इनकी सप्लाई चेन का पता लगाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान मोबाइल फोन में मौजूद डाटा ने भी कई महत्वपूर्ण संकेत दिए। अधिकारियों के मुताबिक मोबाइल के नेविगेशन एप में बैसरन घाटी की लोकेशन पहले से सेव थी। इसके अलावा बैसरन क्षेत्र के कई स्क्रीनशॉट भी फोन में मिले, जिन्हें हमले से कुछ दिन पहले लिया गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि हमले की तैयारी पहले से की जा रही थी और लक्ष्य स्थल की रेकी तथा डिजिटल निगरानी भी की गई थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हमले की योजना किस स्तर पर बनाई गई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले में पर्यटकों को निशाना बनाया गया था और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार यह एक सुनियोजित आतंकी हमला था, जिसमें आतंकियों ने पहले से तय रणनीति के तहत कार्रवाई की थी। फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों ने अब इस बात को और मजबूत किया है कि हमले की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो चुकी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले जांच एजेंसी ने एक अन्य खुलासा भी किया था, जिसमें बताया गया था कि आतंकियों के पास से एक हाई-टेक एक्शन कैमरा भी बरामद हुआ था। जांच में यह जानकारी सामने आई कि कैमरा अंतरराष्ट्रीय वितरण नेटवर्क के जरिए चीन पहुंचा और वहां से किसी माध्यम से आतंकियों तक पहुंचा। एजेंसी का मानना है कि ऐसे उपकरणों का उपयोग आतंकी घटनाओं की रिकॉर्डिंग, प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए किया जाता है। यही कारण है कि इन उपकरणों की सप्लाई और उपयोग से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों द्वारा आधुनिक तकनीक और डिजिटल उपकरणों के उपयोग में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। मोबाइल फोन, जीपीएस आधारित एप्लीकेशन, एक्शन कैमरे और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों का इस्तेमाल अब आतंकवादी गतिविधियों का हिस्सा बन चुका है। इससे जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं, हालांकि डिजिटल फोरेंसिक तकनीकों की मदद से कई महत्वपूर्ण सुराग भी प्राप्त हो रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनआईए द्वारा दाखिल चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तान में बैठा एक आतंकी संचालक था, जो लगातार हमलावरों के संपर्क में था। जांच में यह दावा किया गया है कि हमले के दौरान आतंकियों को रियल टाइम निर्देश दिए जा रहे थे और लक्ष्य क्षेत्र की जानकारी भी पहले से साझा की गई थी। एजेंसी ने हमले से जुड़े कई डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिनका विश्लेषण अभी भी जारी है। जांच में दो स्थानीय टूरिस्ट गाइडों की भूमिका भी सामने आई थी। एजेंसी के अनुसार दोनों ने कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी थीं, लेकिन समय रहते इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक नहीं पहुंचाई। इस संबंध में कानूनी कार्रवाई की गई और दोनों को गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि यदि समय पर सूचना मिल जाती तो संभव है कि हमले को रोका जा सकता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस मामले की जांच अभी भी जारी है और कई अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की पड़ताल की जा रही है। मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, संचार नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का उद्देश्य केवल हमले के दोषियों तक पहुंचना नहीं, बल्कि उन नेटवर्कों को भी उजागर करना है जो सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को समर्थन और संसाधन उपलब्ध कराते हैं। एनआईए का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों से मिले नए सुराग इस मामले में आगे की जांच को नई दिशा देंगे। आने वाले समय में जांच के दौरान और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जो इस पूरे आतंकी नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली को समझने में मदद करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बलूचिस्तान में ट्रेन के पास हुआ आत्मघाती धमाका, जाफर एक्सप्रेस हादसे में 30 की मौत, 82 लोग घायल</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के बलूचिस्तान में रेलवे ट्रैक के पास आत्मघाती हमला हुआ। जाफर एक्सप्रेस के कई डिब्बे पटरी से उतरे, 30 लोगों की मौत हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/suicide-attack-in-balochistan-30-killed-82-injured-in-jafar/article-54117"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/balochistan-pakistan-jaffar-express-suicide-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रविवार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक भयंकर आत्मघाती हमला हुआ। ये धमाका क्वेटा शहर के चमन फाटक के नजदीक रेलवे ट्रैक के पास हुआ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें जाफर एक्सप्रेस ट्रेन शामिल थी। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस त्रासदी में कम से कम 30 लोगों की जान गई है और 82 से अधिक लोग घायल हुए हैं। धमाका इतना तेज था कि कई ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतर गए और आसपास अफरा-तफरी मच गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थानीय मीडिया के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये घटना तब हुई जब जाफर एक्सप्रेस क्वेटा कैंट की ओर बढ़ रही थी। धमाके के तुरंत बाद रेलवे ट्रैक के आस-पास आग लग गई। कुछ डिब्बे पलटे भी और कई को नुकसान हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने तेज आवाज के बाद चीखें सुनीं और धुएं का गुबार उठते देखा। सोशल मीडिया पर भी इस घटना के कई वीडियो सामने आए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें ट्रेन के डिब्बों से आग और धुआं निकलते हुए नजर आ रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना के बाद पुलिस</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">फायर ब्रिगेड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेस्क्यू टीम और सुरक्षा बल वहां पहुंचे। घायलों को अस्पताल भेजा गया और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि धमाके के कारण आसपास की इमारतों के शीशे तक टूट गए। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है और जांच चल रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार सभी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और लोगों से अपील की गई है कि वे घटना स्थल के आसपास भीड़ न लगाएं। इस हमले की कोई जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसे आतंकी हमला मानते हुए जांच कर रही हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया गया है कि जाफर एक्सप्रेस पहले भी कई बार हमलों का शिकार हो चुकी है। यह ट्रेन बलूचिस्तान के संवेदनशील क्षेत्र से गुजरती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियां और आतंकी हमले होते रहे हैं। इन क्षेत्रों में बलूच लिबरेशन आर्मी का प्रभाव है। पिछले साल भी इस ट्रेन को हाईजैक करने की घटना सामने आई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कई यात्रियों को बंधक बनाए जाने का दावा किया गया था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बलूचिस्तान में अलगाववाद और हिंसा की घटनाएं लंबे समय से जारी हैं। यहां कई संगठन पाकिस्तान सरकार के खिलाफ सक्रिय हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ट्रैक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा बलों और सरकारी ठिकानों पर लगातार हमले हुए हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल ही में जारी ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान को दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश बताया गया है। रिपोर्ट में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां आतंकी घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 13:50:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बलूचिस्तान में बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने 35 आतंकियों का किया खात्मा, 3 कमांडर भी किए गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों ने बड़ा अभियान चलाकर 35 आतंकियों को मार गिराया और 3 वरिष्ठ कमांडरों को गिरफ्तार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/major-action-in-balochistan-35-terrorists-eliminated-3-commanders-arrested/article-53677"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/pakistan-counter-terrorism-action-balochistan-operation.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों ने एक बड़े सैन्य अभियान में 35 आतंकियों को मार गिराने और 3 वरिष्ठ कमांडरों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। यह कार्रवाई मंगला जरघून घर इलाके में की गई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां पिछले कुछ दिनों से लगातार ऑपरेशन चल रहा था। इस पूरे ऑपरेशन ने इलाके में तनाव और सख्ती की स्थिति बनाई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सुरक्षा इंतजाम भी कड़े कर दिए गए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह अभियान 13 मई को शुरू हुआ था और पिछले चार दिनों में लगातार कार्रवाई चलती रही। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि इस ऑपरेशन का लक्ष्य प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और उनके सहयोगी नेटवर्क थे। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने क्वेटा में मीडिया को बताया कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पहले से पकड़े गए आतंकियों से मिली जानकारी भी शामिल थी। उनके अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पकड़े गए तीनों कमांडर काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने कई ठिकानों को भी निशाना बनाया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां आतंकी बेस कैंप सक्रिय थे। अधिकारियों का दावा है कि इन कैंपों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी तक पाकिस्तानी सेना की ओर से इस ऑपरेशन पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है। स्थानीय स्तर पर स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कई इलाकों में सर्च ऑपरेशन जारी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाल ही में बलूचिस्तान में हुए एक अन्य सैन्य अभियान का भी उल्लेख किया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें एक मेजर समेत पांच सैनिकों की मौत हुई थी। उस घटना में भी सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए सात आतंकियों को मार गिराने का दावा किया था। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बलूचिस्तान लंबे समय से उग्रवाद और आतंकी गतिविधियों से प्रभावित रहा है। पाकिस्तान सरकार और सेना समय-समय पर बड़े अभियानों का दावा करती रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी स्थिति अभी भी पूरी तरह से स्थिर नहीं मानी जाती। इस हालिया कार्रवाई को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के अभियानों से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर जब पहले से ही स्थानीय स्तर पर असंतोष की स्थिति हो।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर रखा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों या कार्रवाइयों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 13:28:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पूर्व DGMO का दावा, पाकिस्तान ने खुद लगाई थी युद्ध रोकने की गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पूर्व DGMO राजीव घई ने कहा कि पाकिस्तान ने कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/on-the-anniversary-of-operation-sindoor-former-dgmo-claimed-that/article-52853"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t152330.898.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की पहली बरसी पर पूर्व </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस सैन्य अभियान ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और रणनीति दोनों को बदलकर रख दिया। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान पूरी तरह दबाव में आ गया था और आखिर में उसी ने भारत से कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जवाबी हमला नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की सैन्य क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समन्वय और तकनीकी ताकत का बड़ा प्रदर्शन था। बताया जा रहा है कि इस अभियान के दौरान पाकिस्तान के 11 एयरफील्ड और 9 बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। सेना की तरफ से दावा किया गया कि कार्रवाई इतनी सटीक थी कि भारतीय सेना के किसी बड़े सैन्य संसाधन को नुकसान नहीं पहुंचा। ऑपरेशन सिंदूर अब एक साल बाद भी सुरक्षा और रणनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूर्व </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने कहा कि इस पूरे अभियान में भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर 9 स्टैंडऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक की थीं। इनमें 7 कार्रवाई सेना और 2 एयरफोर्स की ओर से की गईं। उन्होंने खास तौर पर स्वदेशी रक्षा तकनीक का जिक्र किया और कहा कि ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइल प्रणालियों ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और निगरानी सिस्टम ने भी ऑपरेशन को सफल बनाने में मदद की। उनके मुताबिक यह पहली बार था जब जमीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हवा और समुद्र तीनों मोर्चों पर इतनी समन्वित रणनीति देखने को मिली। उन्होंने कहा कि </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मनिर्भर भारत</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि युद्ध क्षमता का हिस्सा बन चुका है। अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान खुफिया एजेंसियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर यूनिट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमा सुरक्षा बल और दूसरे सुरक्षा संगठन लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। इसी वजह से कार्रवाई तेज और सटीक बनी रही।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से उस दौरान ड्रोन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिसाइल और भारी गोलाबारी की कोशिश हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन भारतीय सेना ने तुरंत जवाब दिया। सूत्रों के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई रडार सिस्टम और सैन्य ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा था। </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में पाकिस्तान और </span>POK <span lang="hi" xml:lang="hi">में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। दावा किया गया कि इस दौरान 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। पूर्व </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने यह भी कहा कि 10 मई को पाकिस्तान के </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सीधे संपर्क कर संघर्ष खत्म करने की बात कही थी। उनके मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर अब दुनिया में सैन्य और रणनीतिक योजना के एक </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">गोल्ड स्टैंडर्ड</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरह देखा जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि यह अभियान खत्म नहीं हुआ है और भारत भविष्य में भी अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए इसी तरह जवाब देता रहेगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पहलगाम हमले की बरसी पर पीएम मोदी का संदेश, आतंक के खिलाफ सख्त रुख</title>
                                    <description><![CDATA[पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा—भारत कभी नहीं झुकेगा पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर देश ने एक बार फिर उस दर्द को याद किया। प्रधानमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए आतंकवाद के खिलाफ संकल्प दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modis-message-on-the-anniversary-of-pahalgam-attack-strict/article-51821"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/pm-modi-(10).jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली में पहलगाम आतंकी हमले की बरसी पर <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> ने हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि इस दर्दनाक घटना को कभी भुलाया नहीं जा सकता और देश पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह संदेश देते हुए स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे झुकने वाला नहीं है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घटना न केवल पीड़ित परिवारों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गहरी पीड़ा का कारण रही है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्र इस कठिन समय में एकजुट है और आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/narendramodi/status/2046770966685163989?s=20">https://twitter.com/narendramodi/status/2046770966685163989?s=20</a></blockquote>
<h5><strong>

बरसी पर श्रद्धांजलि</strong></h5>
<p>प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले नागरिकों को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि आतंकवादियों के मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे और देश की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।अधिकारियों के अनुसार, इस अवसर पर देशभर में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां लोगों ने पीड़ितों को याद किया और शांति की कामना की।</p>
<p>22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">पहलगाम</span></span> के बैसरन घाटी में आतंकवादियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावरों ने लोगों की पहचान पूछकर उन्हें निशाना बनाया, जिससे देशभर में आक्रोश फैल गया था।इस घटना के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कई कदम उठाए। सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए व्यापक अभियान चलाए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:10:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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