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                <title>Government News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Government News RSS Feed</description>
                
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                <title>रायपुर कलेक्टर निवास में देर रात लगी आग, शॉर्ट-सर्किट की आशंका; एक घंटे की मशक्कत के बाद पाया गया काबू</title>
                                    <description><![CDATA[फायर ब्रिगेड की टीम ने समय रहते आग बुझाई, कोई जनहानि नहीं; पार्किंग शेड, फर्नीचर और विद्युत उपकरणों को नुकसान, प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/fire-broke-out-late-night-in-raipur-collectors-residence-suspicion/article-57951"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-collector-residence.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रायपुर के कलेक्टर गौरव सिंह के सरकारी निवास परिसर में रविवार देर रात अचानक आग लगने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पार्किंग शेड, फर्नीचर, विद्युत उपकरण और अन्य सामान को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार आग शनिवार और रविवार की दरमियानी रात लगभग दो से ढाई बजे के बीच लगी। उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक परिसर से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई देने पर वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड और पुलिस कंट्रोल रूम को भी जानकारी दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। आग तेजी से फैल रही थी, लेकिन दमकल कर्मियों ने समय रहते मोर्चा संभाल लिया। करीब एक घंटे तक लगातार पानी की बौछारें और अन्य अग्निशमन उपकरणों का उपयोग कर आग को नियंत्रित किया गया। इसके बाद यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं दोबारा आग भड़कने की संभावना न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में आग लगने का संभावित कारण शॉर्ट-सर्किट माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि विद्युत प्रणाली में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण आग लगी हो सकती है। हालांकि आग लगने की वास्तविक वजह का पता विस्तृत तकनीकी जांच और फॉरेंसिक निरीक्षण के बाद ही चल सकेगा। जांच पूरी होने तक किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आग की चपेट में आने से कलेक्टर निवास परिसर का पार्किंग शेड सबसे अधिक प्रभावित हुआ। इसके अलावा वहां रखे कुछ फर्नीचर, विद्युत उपकरण, वायरिंग और अन्य सामग्री भी जल गई। नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए संबंधित विभागों की टीम को निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि सभी क्षतिग्रस्त वस्तुओं का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर बिजली आपूर्ति कुछ समय के लिए बंद कर दी गई थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि बिजली चालू रहती तो आग और अधिक फैल सकती थी या किसी अन्य दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती थी। बिजली विभाग की टीम ने बाद में पूरे परिसर की वायरिंग और विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आग बुझाने के कार्य का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। अधिकारियों ने फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण पाने से बड़ा हादसा टल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार आग लगने के बाद सबसे पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि परिसर में मौजूद सभी लोग सुरक्षित हों। इसके बाद आग को आसपास के हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए व्यवस्थित तरीके से अभियान चलाया गया। दमकल कर्मियों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए आग बुझाने का कार्य पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने भी बताया कि देर रात अचानक दमकल वाहनों के सायरन सुनाई दिए, जिसके बाद आसपास के क्षेत्र में हलचल बढ़ गई। कुछ ही देर में पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। सरकारी भवनों और आवासीय परिसरों में नियमित रूप से विद्युत वायरिंग, फायर सेफ्टी सिस्टम और अग्निशमन उपकरणों की जांच बेहद आवश्यक होती है। समय-समय पर फायर ऑडिट कराने से इस प्रकार की घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। साथ ही आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए कर्मचारियों को भी नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही या सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">रायपुर कलेक्टर निवास में लगी आग भले ही समय रहते नियंत्रित कर ली गई, लेकिन इस घटना ने सरकारी परिसरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक फायर अलार्म सिस्टम, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर, नियमित फायर ऑडिट और विद्युत उपकरणों के रखरखाव पर विशेष ध्यान देकर इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:40:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के अगले आर्मी चीफ, 30 जून से संभालेंगे कमान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने नियुक्ति को दी मंजूरी, मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद संभालेंगे भारतीय सेना की जिम्मेदारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lieutenant-general-dheeraj-seth-will-be-the-next-army-chief/article-55856"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/dhiraj-seth.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय सेना को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है और उसी दिन लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। इस घोषणा के बाद सैन्य और रणनीतिक हलकों में उनकी नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। धीरज सेठ फिलहाल उप सेना प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने इसी वर्ष 1 अप्रैल को यह जिम्मेदारी संभाली थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय सेना में उप सेना प्रमुख का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सेना प्रमुख के बाद दूसरा सबसे वरिष्ठ पद होता है। इस पद पर रहते हुए धीरज सेठ सेना के संचालन, रणनीतिक योजनाओं, सैन्य तैयारियों और आधुनिक तकनीकों को सेना में शामिल करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना तेजी से आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ी है और धीरज सेठ इस प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में उनके नेतृत्व में सेना की कई मौजूदा योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर लगभग 40 वर्षों का रहा है। उन्हें दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था। इसके बाद उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालीं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों से लेकर पश्चिमी सीमा और रेगिस्तानी इलाकों में सैन्य तैनाती तक, उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम किया है। लंबे अनुभव और विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने करियर के दौरान धीरज सेठ ने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी सेवाएं दी हैं। सेना के भीतर यह जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इन कमानों के तहत बड़े सैन्य क्षेत्र और रणनीतिक संचालन आते हैं। वे उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने पश्चिमी मोर्चे से जुड़ी दो प्रमुख ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व किया है। इसके अलावा उन्होंने सेना मुख्यालय में कई अहम पदों पर कार्य किया और सेना की क्षमता वृद्धि तथा भविष्य की रणनीतिक जरूरतों से जुड़े कार्यक्रमों में भी योगदान दिया। धीरज सेठ का अनुभव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत अंगोला में भी सेवाएं दी हैं। अंतरराष्ट्रीय मिशन में काम करने का अनुभव किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे विभिन्न देशों की सेनाओं के साथ समन्वय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को समझने का अवसर मिलता है। यही अनुभव उन्हें एक व्यापक दृष्टिकोण वाला सैन्य अधिकारी बनाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शैक्षणिक दृष्टि से भी धीरज सेठ का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है। उन्होंने पुणे के खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी और देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी से सैन्य शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने देश और विदेश के कई प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों में उच्च प्रशिक्षण हासिल किया। वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, महू के आर्मी वॉर कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज में उन्होंने अध्ययन किया। इसके अलावा फ्रांस के कॉलेज इंटरआर्मे डी डिफेंस में जनरल स्टाफ कोर्स और अमेरिका के नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स भी पूरा किया। उनकी उपलब्धियों की सूची भी काफी लंबी है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें कई बार उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। यंग ऑफिसर्स कोर्स में उन्हें प्रतिष्ठित ‘सिल्वर सेंचुरियन’ सम्मान मिला था। जूनियर कमांड कोर्स सहित कई सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2006 में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में उन्हें अपने कोर्स का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड स्टूडेंट ऑफिसर मेडल भी प्रदान किया गया था। यह उपलब्धियां उनके पेशेवर कौशल और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धीरज सेठ सेना की परंपरा वाले परिवार से आते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना में एडजुटेंट जनरल के पद से वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने सेना की दो प्रमुख और महत्वपूर्ण संरचनाओं XXI स्ट्राइक कोर तथा III कोर की कमान संभाली थी। ऐसे में सैन्य वातावरण और अनुशासन धीरज सेठ के जीवन का हिस्सा बचपन से ही रहा है। माना जाता है कि परिवार की इसी पृष्ठभूमि ने उन्हें सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। सैन्य जिम्मेदारियों के अलावा धीरज सेठ खेलों में भी विशेष रुचि रखते हैं। उन्हें टेनिस और गोल्फ खेलना पसंद है। उनके सहयोगियों के अनुसार वे अनुशासित जीवनशैली और संतुलित नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्नी कोमल सेठ विभिन्न सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। भारतीय सेना ऐसे समय में नए नेतृत्व का स्वागत करने जा रही है जब देश की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। सीमा सुरक्षा, आधुनिक युद्ध तकनीक, साइबर सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे सेना के सामने हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:42:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MP विधानसभा विशेष सत्र में महिला आरक्षण पर प्रस्ताव, सरकार-विपक्ष आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव, पक्ष-विपक्ष आमने-सामने]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/government-opposition-face-to-face-on-proposal-on-womens-reservation-in/article-52186"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-vidhansabha.png" alt=""></a><br /><p>मध्यप्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र सोमवार को आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हुई। सत्र की कार्यवाही सुबह 11 बजे आरंभ हुई और शुरुआत दिवंगत पूर्व विधायकों, सांसदों व अन्य गणमान्य व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देने के साथ की गई। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में महिला सशक्तिकरण से जुड़ा शासकीय संकल्प प्रस्तुत किया।</p>
<p>इस संकल्प में संसद और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने और परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे प्रभावी बनाने की बात शामिल है। सरकार का कहना है कि यह कदम देश की आधी आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।</p>
<p>सत्र के दौरान महिला आरक्षण के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न महिला कल्याण योजनाओं और उपलब्धियों पर भी चर्चा हुई। सत्तापक्ष की ओर से मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बहस की शुरुआत करते हुए महिला सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है।</p>
<p>वहीं विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर अपनी रणनीति स्पष्ट की। कांग्रेस ने मांग की कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं। विपक्षी दलों ने यह भी कहा कि आरक्षण के क्रियान्वयन में देरी नहीं होनी चाहिए और इसे जल्द लागू किया जाए।</p>
<p>राजनीतिक बयानबाजी भी सत्र का प्रमुख हिस्सा रही। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर उदासीनता का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। इससे सदन में बहस का माहौल तीखा बना रहा।</p>
<p>विशेष सत्र को लेकर सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। सत्र से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ने विधायक दल की बैठकें कर अपनी-अपनी रणनीति तय की। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि महिला आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी अहम बना हुआ है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 11:13:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर पर FIR के आदेश, 500 की शर्त बनी विवाद का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर पर कबड्डी मैच में ₹500 की शर्त को लेकर कोर्ट सख्त, FIR दर्ज करने का निर्देश ₹500 की एक कथित दोस्ताना शर्त ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मामला अब कानूनी दायरे में पहुंच चुका है और जांच के आदेश दिए जा चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/order-of-fir-against-karnataka-home-minister-g-parameshwara-became/article-51832"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/g-parameshwara-fir.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक के गृह मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">जी. परमेश्वर</span></span> एक मामूली दिखने वाले मामले में कानूनी विवाद में घिर गए हैं। बेंगलुरु की एक अदालत ने कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान ₹500 की कथित शर्त लगाने के मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह घटना तुमकुरु में आयोजित एक राज्य स्तरीय प्री-यूनिवर्सिटी कबड्डी प्रतियोगिता से जुड़ी बताई जा रही है, जहां मंत्री ने कथित तौर पर जिला कलेक्टर के साथ मैच के परिणाम को लेकर शर्त लगाई थी। हालांकि मंत्री ने इसे महज मजाक बताया है, लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि मामला एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा है। अधिकारियों के अनुसार अब पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट पेश करनी होगी।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br />रिपोर्ट्स के अनुसार, तुमकुरु में आयोजित कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान मंत्री ने एक टीम की जीत पर ₹500 की शर्त लगाई थी। बाद में सार्वजनिक मंच से उन्होंने खुद इस शर्त का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें यह रकम हारनी पड़ी।इस बयान के सामने आने के बाद एचआर नागभूषण नामक व्यक्ति ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई। उनका तर्क था कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की शर्त लगाना कानून के दायरे में आता है और इसे बढ़ावा देना गलत संदेश देता है।</p>
<p><strong>कोर्ट का रुख सख्त</strong><br /><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">बेंगलुरु कोर्ट</span></span> ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए पुलिस को FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने माना कि आरोपों की जांच जरूरी है, चाहे मामला छोटा ही क्यों न हो।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, आदेश में कहा गया है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के आचरण की जांच पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। यह भी ध्यान देने योग्य है कि पुलिस विभाग स्वयं गृह मंत्रालय के अधीन आता है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।</p>
<p>इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">जी. परमेश्वर</span></span> ने कहा कि यह कोई गंभीर सट्टेबाजी नहीं थी, बल्कि खेल के दौरान हुआ हल्का-फुल्का मजाक था।उन्होंने कहा, “क्या एक गृह मंत्री इस स्तर की सट्टेबाजी करेगा? इसे अनावश्यक रूप से बढ़ाया जा रहा है।” हालांकि, उनकी सफाई के बावजूद मामला कानूनी प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है।</p>
<p>अब पुलिस को अदालत के निर्देश के अनुसार FIR दर्ज कर जांच शुरू करनी होगी। जांच में यह देखा जाएगा कि मामला केवल मजाक तक सीमित था या इसमें किसी नियम का उल्लंघन हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:34:35 +0530</pubDate>
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