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                <title>Government Action - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Government Action RSS Feed</description>
                
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                <title>नकटी गांव में विधायक कॉलोनी के लिए 80 घरों पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों का हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[सुबह से तैनात रही भारी पुलिस फोर्स, महिलाओं की पुलिस से धक्का-मुक्की, प्रशासन बोला- प्रभावित परिवारों को नया रायपुर में मिलेगा आवास]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ruckus-by-villagers-over-bulldozer-on-80-houses-for-mla/article-57300"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nakti-village-demolition.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायपुर के माना इलाके स्थित नकटी गांव में सोमवार सुबह उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रशासन ने करीब 80 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। सुबह से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद थे। जैसे ही जेसीबी मशीनें गांव में पहुंचीं, ग्रामीण अपने घरों के सामने जमा हो गए और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और पुलिस व ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। प्रशासन के अनुसार जिन मकानों को हटाया गया, उनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने 32 मकान भी शामिल हैं। कार्रवाई को देखते हुए रविवार देर रात से ही गांव और आसपास के इलाके में एक हजार से अधिक पुलिस जवान तैनात कर दिए गए थे। सुबह प्रशासनिक टीम ने सुरक्षा घेरे के बीच कार्रवाई शुरू की। कई लोगों ने जेसीबी मशीनों के सामने खड़े होकर विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटाकर अभियान जारी रखा।<img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd"> </p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के दौरान गांव का माहौल बेहद भावुक नजर आया। कई परिवार अपने घरों का सामान बाहर निकालते दिखाई दिए। महिलाएं रोती-बिलखती रहीं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे मलबे के बीच खड़े होकर अपने टूटते घरों को देखते रहे। इस बीच एक छोटी बच्ची ने रोते हुए कहा कि उसने सुबह से कुछ नहीं खाया, क्योंकि घर में खाना बनाने का मौका ही नहीं मिला। बच्ची की यह बात सुनकर मौके पर मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि फिलहाल उनके मकान नहीं तोड़े जाएंगे। उनका आरोप है कि दो दिन पहले ही क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ग्रामीणों से मुलाकात के दौरान भरोसा दिलाया था कि बारिश के मौसम में किसी का घर नहीं हटाया जाएगा। इसी आश्वासन के कारण लोगों ने तत्काल किसी वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी भी नहीं की थी। ऐसे में सोमवार सुबह अचानक हुई कार्रवाई से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। कार्रवाई के दौरान कई जगह महिलाओं ने पुलिस के सामने बैठकर विरोध करने की कोशिश की। कुछ लोगों ने जेसीबी मशीनों को रोकने का भी प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की और सुरक्षा घेरे में कार्रवाई जारी रखी। हालांकि पूरे अभियान के दौरान कई बार तनावपूर्ण माहौल बना रहा और ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पहले से तय योजना के तहत की गई है। अधिकारियों के मुताबिक विधायक कॉलोनी परियोजना के लिए जमीन खाली कराई जा रही है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की पूरी व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने दावा किया कि सभी पात्र परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आवंटन की कार्रवाई भी जारी है और लोगों को नियमानुसार नए मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने से पहले मकान तोड़ना उचित नहीं था। उनका आरोप है कि कई परिवारों को अब भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है कि उन्हें नया मकान कब मिलेगा और वहां तक पहुंचने की व्यवस्था कैसे होगी। लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में बेघर होने से उनके सामने रहने, खाने और बच्चों की पढ़ाई जैसी कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार नकटी गांव में कई परिवार वर्षों से रह रहे थे और उन्होंने अपने घरों को धीरे-धीरे बनाकर तैयार किया था। अचानक हुई इस कार्रवाई से उनका सामान खुले में आ गया है। कई लोग अपने घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश करते नजर आए, जबकि कुछ परिवार मलबे के बीच ही बैठे रहे। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। पूरे घटनाक्रम के बाद नकटी गांव में माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है और इलाके में पुलिस बल की तैनाती जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:28:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्रामीणों की शिकायत पर एक्शन, डिप्टी CM के निर्देश के बाद दो EE को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[बस्तर दौरे में पेयजल संकट की शिकायत सामने आने पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सख्त, दंतेवाड़ा और कोंडागांव के अधिकारियों से सात दिन में मांगा जवाब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/action-on-villagers-complaint-notice-to-two-ees-after-instructions/article-55734"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/arun-sao.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बस्तर संभाग के ग्रामीण इलाकों में नल-जल योजनाओं के संचालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बस्तर दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उनके सामने ही पेयजल संकट की समस्या रखी थी। लोगों का कहना था कि गांवों में करोड़ों रुपए खर्च कर नल-जल योजनाएं बनाई गई हैं, लेकिन इसके बावजूद नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है। शिकायत मिलने के बाद उप मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई थी और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब इसी मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने दंतेवाड़ा और कोंडागांव जिले के कार्यपालन अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। मामला उस समय सामने आया जब उप मुख्यमंत्री अरुण साव जल अर्पण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बस्तर क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे थे। कोंडागांव जिले के बेड़मा गांव और दंतेवाड़ा जिले के टेकनार गांव में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी परेशानी बताई। लोगों का कहना था कि जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पाइपलाइन बिछाई गई, टंकियां बनाई गईं और घर-घर नल कनेक्शन भी दिए गए, लेकिन पानी की आपूर्ति नियमित नहीं हो रही है। कई परिवारों को आज भी पुराने स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने योजनाओं के संचालन और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद उप मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का निर्माण कराना नहीं है, बल्कि लोगों तक उसका लाभ पहुंचाना भी है। यदि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की समीक्षा की गई और प्रमुख अभियंता के.के. मरकाम की ओर से दोनों जिलों के कार्यपालन अभियंताओं को नोटिस जारी किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नोटिस में कहा गया है कि कोंडागांव जिले के बेड़मा गांव में जल जीवन मिशन के अंतर्गत तैयार की गई नल-जल योजना का संचालन और संधारण संतोषजनक नहीं पाया गया है। इसके कारण ग्रामीणों को नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही। विभाग ने माना है कि यह स्थिति शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही को दर्शाती है। साथ ही योजना के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करती है। विभाग का कहना है कि यदि योजना पूरी तरह तैयार है तो फिर ग्रामीणों को पानी क्यों नहीं मिल रहा, इसका जवाब संबंधित अधिकारियों को देना होगा। दूसरी ओर दंतेवाड़ा जिले के टेकनार गांव में भी स्थिति कुछ ऐसी ही पाई गई। जल अर्पण कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि गांव के एक मोहल्ले में कई घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। गर्मी के मौसम में लोगों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। विभाग के अनुसार तकनीकी मानकों के अनुरूप जलापूर्ति नहीं होना इस बात का संकेत है कि योजना के संचालन और निगरानी में कहीं न कहीं कमी रही है। यही वजह है कि दंतेवाड़ा के कार्यपालन अभियंता से भी जवाब तलब किया गया है। अधिकारियों को जारी नोटिस में सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने साफ किया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे संबंधित अधिकारियों में भी हलचल देखी जा रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सरकार अब जल जीवन मिशन और अन्य पेयजल योजनाओं के संचालन को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन देने का अभियान चलाया गया है। बस्तर जैसे दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में भी इस योजना के माध्यम से लोगों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की गई है। हालांकि कई स्थानों पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी संचालन और रखरखाव की चुनौतियां सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केवल पाइपलाइन बिछा देने या टंकी बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक पानी नियमित रूप से घरों तक नहीं पहुंचेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंजीनियरों का कमाल... गारंटी वाली सड़कों को फिर बनाने का भेज दिया प्रस्ताव, 9 अफसरों को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[परफॉर्मेंस गारंटी में शामिल सड़कों पर दोबारा निर्माण की मांग, 140 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर विभाग सख्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/amazing-work-of-engineers-proposal-to-reconstruct-roads-with-guarantee/article-54714"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pwd-road-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन सड़कों की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी अभी भी संबंधित ठेकेदारों के पास थी, उन्हीं सड़कों को दोबारा बनाने के लिए करोड़ों रुपए के प्रस्ताव शासन को भेज दिए गए। मामला सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए नौ इंजीनियरों को नोटिस जारी कर दिया है और उनसे 15 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसी 19 सड़कें चिन्हित हुई हैं जो अभी परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में हैं। नियमों के अनुसार इस अवधि के दौरान सड़क की गुणवत्ता बनाए रखने, मरम्मत करने और किसी भी प्रकार की खराबी दूर करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। इसके बावजूद कुछ अधिकारियों ने इन सड़कों के लिए नए निर्माण और पुनर्निर्माण के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिए। इन प्रस्तावों की कुल लागत लगभग 140 करोड़ रुपए बताई गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की गई तो पता चला कि भोपाल, रायसेन, ग्वालियर, नर्मदापुरम, मंदसौर और मुरैना जिलों की सड़कों के लिए यह प्रस्ताव तैयार किए गए थे। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अधिकारियों ने नियमों के विपरीत कार्य करते हुए परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में ही नई लागत का आकलन कर प्रशासकीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेज दिए। यह प्रक्रिया विभागीय नियमों और वित्तीय अनुशासन के खिलाफ मानी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबसे बड़ा प्रस्ताव भोपाल और रायसेन क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां कार्यपालन यंत्री योगेंद्र कुमार ने आठ सड़कों पर व्हाइट टॉपिंग के लिए करीब 51.65 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिन सड़कों के लिए यह प्रस्ताव बनाया गया, उनमें से कई सड़कें अभी गारंटी अवधि में थीं। ऐसे में नए निर्माण का प्रस्ताव भेजना सवालों के घेरे में आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी तरह राकेश निगम ने तीन सड़कों के लिए 27.50 करोड़ रुपए की मांग की थी। वहीं एसआर परते ने तीन सड़कों को दोबारा बनाने के लिए 19.03 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया। ग्वालियर क्षेत्र में एके जैन ने गांधी रोड के निर्माण के लिए 13.56 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा था। दिलचस्प बात यह रही कि इसी सड़क के लिए ओमहरि शर्मा द्वारा भी प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। इससे विभागीय स्तर पर समन्वय और प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदसौर जिले में आदित्य सोनी ने दो सड़कों के लिए 5.20 करोड़ रुपए की लागत का प्रस्ताव तैयार किया था। वहीं रायसेन जिले में पीके झा ने छींद मार्ग के लिए 5.12 करोड़ रुपए की मांग रखी। नर्मदापुरम क्षेत्र में सुभाष पाटिल और संजय रायकवार ने चार सड़कों की मरम्मत के लिए 2.23 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन को भेजा था। अब इन सभी प्रस्तावों की जांच की जा रही है और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विभागीय सूत्रों का कहना है कि परफॉर्मेंस गारंटी अवधि का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना होता है कि सड़क निर्माण के बाद यदि कोई तकनीकी कमी सामने आती है तो उसका खर्च सरकारी खजाने पर न पड़े। ठेकेदार निर्धारित अवधि तक सड़क की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बाध्य रहता है। ऐसे में यदि उसी अवधि के दौरान सड़क को दोबारा बनाने या मरम्मत कराने के लिए सरकारी धन की मांग की जाती है तो यह नियमों की मूल भावना के विपरीत माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले ने विभाग के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रस्तावों को समय रहते नहीं रोका जाता तो करोड़ों रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ सरकार पर पड़ सकता था। यही वजह है कि अब पूरे मामले की गहन समीक्षा की जा रही है। संबंधित फाइलों, तकनीकी स्वीकृतियों और प्रस्तावों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस तरह के मामलों में जवाबदेही तय होना जरूरी है ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। सभी नौ इंजीनियरों को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:36:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में 5 राइस मिलर्स पर बड़ी कार्रवाई, 11.50 करोड़ की बैंक गारंटी जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[कस्टम मिलिंग चावल जमा न करने पर मार्कफेड का सख्त कदम, अन्य मिलर्स पर भी कार्रवाई की चेतावनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/big-action-against-5-rice-millers-in-raipur-bank-guarantee/article-54311"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/raipur-rice-millers.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर में कस्टम मिलिंग के तहत चावल जमा नहीं करने वाले राइस मिलर्स पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) ने जिले के पांच राइस मिलर्स की करीब 11.50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जब्त कर ली है। इस कार्रवाई के बाद राइस मिलर सेक्टर में हड़कंप मच गया है।</p>
<p>यह मामला उन मिलर्स से जुड़ा है जिन्होंने सरकारी अनुबंध के तहत धान उठाने के बाद तय समय सीमा में कस्टम मिलिंग का चावल जमा नहीं किया। बार-बार नोटिस और समय देने के बावजूद चावल जमा न करने पर मार्कफेड ने यह सख्त कदम उठाया है।  बैंक गारंटी जब्त करने के आदेश के बाद संबंधित बैंकों ने मिलर्स की सुरक्षा राशि को सीधे सरकारी खाते में ट्रांसफर कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई नियमों और अनुबंध की शर्तों के तहत की गई है।</p>
<h5><strong>तय समय सीमा में नहीं हुआ चावल जमा</strong></h5>
<p>सरकारी अनुबंध के अनुसार सभी राइस मिलर्स को 30 अप्रैल तक उपार्जन केंद्रों से उठाए गए धान के बदले कस्टम मिलिंग का चावल जमा करना अनिवार्य था। लेकिन कई मिलर्स ने तय समय सीमा के बावजूद चावल जमा नहीं किया। मार्कफेड की ओर से कई बार नोटिस जारी कर समय भी बढ़ाया गया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसी कारण विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए बैंक गारंटी जब्त करने का फैसला लिया।</p>
<h5><strong>32 मिलर्स अब भी जांच के घेरे में</strong></h5>
<p>जानकारी के अनुसार जिले में अभी भी करीब 32 राइस मिलर्स ऐसे हैं जिन्होंने पूरी तरह चावल जमा नहीं किया है। इन पर खाद्य विभाग और मार्कफेड की निगरानी जारी है। प्रशासन का कहना है कि यदि बाकी मिलर्स भी तय समय में चावल जमा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<h5><strong>सार्वजनिक वितरण व्यवस्था पर असर</strong></h5>
<p>कस्टम मिलिंग के तहत तैयार चावल सीधे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन दुकानों में भेजा जाता है। लेकिन मिलर्स द्वारा समय पर चावल जमा न करने के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में स्टॉक की कमी की स्थिति बन रही है, जिससे कई इलाकों में राशन वितरण समय पर नहीं हो पा रहा है।</p>
<h5><strong>मिलर एसोसिएशन ने जताया विरोध</strong></h5>
<p>इस कार्रवाई के बाद राइस मिलर एसोसिएशन ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि कई मामलों में तकनीकी और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के कारण समय पर चावल जमा नहीं हो पाया। हालांकि प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि अनुबंध की शर्तें सभी मिलर्स के लिए समान हैं और समय सीमा का पालन करना अनिवार्य है।</p>
<p>मार्कफेड ने संकेत दिए हैं कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है तो आने वाले दिनों में अन्य मिलर्स पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है। विभाग अब पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है और सभी डिफॉल्टर मिलर्स की सूची तैयार की जा रही है। इस कार्रवाई को सरकार की सप्लाई सिस्टम को मजबूत करने और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 13:43:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा के गोविंदगढ़ जंगलों में आग, मानवीय लापरवाही की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा जंगल आग पर काबू, वन विभाग और फायर ब्रिगेड की संयुक्त कार्रवाई जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-action-on-cattle-smuggling-in-durg-4-accused-arrested/article-52084"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rewa-news-(9)-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र में स्थित छुहिया घाटी और विंध्य पर्वत श्रृंखला के जंगलों में आग लगने की घटना सामने आई है। रीवा जंगल आग की इस घटना ने वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी, जहां आग को बुझाने में टीमों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। जानकारी के मुताबिक, एक दिन पहले आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन बाद में यह दोबारा भड़क उठी। अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में मानवीय लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल वन विभाग, नगर परिषद की फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों के सहयोग से आग पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है और स्थिति सामान्य बताई जा रही है।</p>
<p>घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया गया। स्थानीय समाजसेवियों की मदद से आग को फैलने से रोकने के प्रयास किए गए। प्रशासन ने बताया कि फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि आग दोबारा न भड़के।</p>
<h5><strong>राहत कार्य में चुनौती</strong></h5>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, जंगल का दुर्गम भूगोल और तेज हवा राहत कार्यों में बड़ी बाधा बनी। आग धीरे-धीरे पहाड़ी इलाकों में फैल रही थी, जिससे उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा था।</p>
<p>गोविंदगढ़ नगर परिषद की फायर ब्रिगेड टीम और स्थानीय स्वयंसेवकों ने लगातार प्रयास कर शिकारघा पहाड़ी के पास के हिस्से को सुरक्षित कर लिया। इसके बाद अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी आग को काबू करने का काम तेज किया गया।</p>
<h5><strong>धुएं का असर</strong></h5>
<p>वनाग्नि के चलते लंबे समय तक जंगल से धुआं उठता रहा, जिससे आसपास के क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई गई। हालांकि अधिकारियों के अनुसार किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें सतर्क हैं।</p>
<h5><strong>जांच जारी</strong></h5>
<p>इस मामले में डीएफओ लवकेश निरापुरे ने बताया कि पहले आग बुझा दी गई थी, लेकिन बाद में उसी क्षेत्र में दोबारा आग लगने की सूचना मिली। इसके बाद टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया।</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक, प्रारंभिक तौर पर मानवीय लापरवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले की जांच की जा रही है और कारणों का पता लगाने का प्रयास जारी है।</p>
<h5><strong>बढ़ती वनाग्नि चिंता</strong></h5>
<p>गर्मियों के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सूखी घास, तेज तापमान और मानवीय गतिविधियां ऐसे मामलों की प्रमुख वजह बनती हैं।</p>
<p>रीवा जंगल आग जैसी घटनाएं पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं, हालांकि इस बार समय रहते नियंत्रण पा लेने से बड़े नुकसान से बचाव हो गया।</p>
<p>वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में लगातार गश्त बढ़ा दी है और निगरानी तेज कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।रीवा जंगल आग की इस घटना के बाद प्रशासन सतर्क है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 12:43:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल गैस एजेंसी घोटाला: हजारों सिलेंडर गायब, FIR की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल गैस एजेंसी जांच में भारी गड़बड़ी उजागर, खाद्य विभाग की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई तेज भोपाल में गैस एजेंसियों की जांच ने चौंकाने वाली सच्चाई सामने ला दी है। हजारों सिलेंडर गायब, फर्जी बिलिंग और उपभोक्ताओं से ठगी के आरोपों ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal-gas-agency-scam-thousands-of-cylinders-missing-preparation-to/article-51823"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(55).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश की राजधानी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भोपाल</span></span> में गैस एजेंसियों से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां खाद्य विभाग की जांच में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जेके रोड स्थित फीनिक्स एचपीसीएल और कोटरा सुल्तानाबाद की बीएस एचपी गैस एजेंसी में सिलेंडर स्टॉक, सप्लाई और बिलिंग में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट एडीएम प्रकाश नायक को सौंप दी गई है, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की तैयारी शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हजारों गैस सिलेंडर गायब पाए गए हैं और उपभोक्ताओं को बिना डिलीवरी के ही ‘डिलीवर्ड’ दिखाया गया। अधिकारियों के अनुसार यह मामला बड़े स्तर की वित्तीय अनियमितता और उपभोक्ता ठगी से जुड़ा हो सकता है।</p>
<p><strong>मुख्य विवरण</strong><br />जांच में सामने आया कि फीनिक्स एजेंसी से 350 घरेलू, 350 कमर्शियल और करीब 2 हजार छोटे सिलेंडर गायब हैं। वहीं बीएस एजेंसी के गोदाम से भी 254 भरे सिलेंडर कम पाए गए।रिपोर्ट्स के अनुसार कई उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन गैस बुकिंग की, लेकिन उन्हें सिलेंडर कभी नहीं मिला। इसके बावजूद सिस्टम में डिलीवरी पूरी दिखा दी गई। जांच में यह भी पाया गया कि ऐसे सिलेंडर ज्यादा कीमत लेकर अन्य ग्राहकों को बेच दिए गए।</p>
<p><strong>मिड हेडिंग: फर्जी बिलिंग का खेल</strong><br />जांच में फर्जी बिलिंग और अतिरिक्त वसूली का मामला भी सामने आया है।एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं से होम डिलीवरी चार्ज लेने के बावजूद उन्हें खुद आकर सिलेंडर लेने पर मजबूर किया गया।बताया गया कि ‘कैश एंड कैरी’ के नाम पर हर महीने लाखों रुपए की अवैध वसूली की जा रही थी। इसके अलावा 238 रुपए का फर्जी ‘सुरक्षा निरीक्षण शुल्क’ लेकर करीब 10 लाख रुपए तक की वसूली का मामला भी उजागर हुआ है।</p>
<p>खाद्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गैस सिलेंडर की सप्लाई में गड़बड़ी हो रही है। इसके बाद फूड कंट्रोलर ने टीम गठित कर जांच शुरू कराई।जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दोनों एजेंसियों का साझा गोदाम करीब 36 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बना है और संचालन में पारदर्शिता की कमी है। एक एजेंसी रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी बताई जा रही है।</p>
<p><strong>मिड हेडिंग: सप्लाई में हेरफेर</strong><br />ट्रांसपोर्ट और सप्लाई सिस्टम में भी गड़बड़ी मिली है।रिपोर्ट के अनुसार गैस सिलेंडर लेकर आने वाले ट्रक तय समय से कई घंटे देरी से पहुंचे, जिससे बीच में हेरफेर की आशंका जताई गई है।इसके अलावा एजेंसी द्वारा बताए गए 9 डिलीवरी वाहनों में से केवल 5 ही सक्रिय पाए गए, जिससे वितरण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।</p>
<p><strong>आधिकारिक बयान</strong><br />अधिकारियों के अनुसार यह मामला गंभीर है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।सूत्रों के मुताबिक 10 से 12 मामलों की जांच रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी गई है और जल्द ही FIR दर्ज हो सकती है।जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव भी भेजा जाएगा।</p>
<p><strong>प्रभाव / विश्लेषण</strong><br />इस मामले ने शहर के हजारों गैस उपभोक्ताओं को प्रभावित किया है।बिना डिलीवरी के भुगतान, फर्जी बिलिंग और अवैध वसूली जैसी गतिविधियों से लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला गैस वितरण प्रणाली में निगरानी की कमी को उजागर करता है और इससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं।</p>
<p>प्रशासन अब इस मामले में सख्त कार्रवाई के मूड में है।FIR दर्ज होने के बाद संबंधित एजेंसियों के संचालकों पर कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने की संभावना है। आने वाले दिनों में अन्य गैस एजेंसियों की भी जांच तेज हो सकती है, ताकि इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके। </p>
<hr />
<h3> </h3>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:22:02 +0530</pubDate>
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