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                <title>Mallikarjun Kharge - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Mallikarjun Kharge RSS Feed</description>
                
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                <title>INDIA ब्लॉक की बैठक में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, SIR पर CJI को पत्र लिखेगा गठबंधन</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में दो साल बाद हुई विपक्षी गठबंधन की बैठक में पांच प्रमुख मुद्दों पर बनी सहमति, NEET-CBSE विवाद, चुनावी पारदर्शिता और महंगाई पर सरकार को घेरने की रणनीति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/alliance-will-write-letter-to-cji-demanding-resignation-of-education/article-55315"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-bloc-meeting-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली में सोमवार को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। करीब दो साल बाद हुई इस बैठक को विपक्षी राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत कई दलों के नेता शामिल हुए। कुछ नेता ऑनलाइन माध्यम से जुड़े, जबकि कई वरिष्ठ नेताओं ने बैठक में प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। लगभग दो घंटे से अधिक समय तक चली चर्चा में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया और आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर सहमति बनाने की कोशिश की गई।</p>
<p>बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि गठबंधन के नेताओं ने पांच प्रमुख मुद्दों पर एकमत होकर निर्णय लिया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे NEET और CBSE से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। खड़गे ने कहा कि इन मामलों में सामने आई गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को प्रभावित किया है। उनका आरोप था कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही समस्याओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई और कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में गंभीरता और पारदर्शिता आवश्यक है।</p>
<p>बैठक में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। विपक्षी नेताओं ने SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चिंता व्यक्त की। खड़गे ने कहा कि विपक्ष इस विषय को गंभीरता से उठा रहा है और चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने का निर्णय लिया गया है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा होना बेहद जरूरी है और इस विषय पर गठबंधन एकजुट होकर आगे बढ़ेगा।</p>
<p>बैठक के दौरान महंगाई, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था की स्थिति भी चर्चा के केंद्र में रही। विपक्षी नेताओं का मानना है कि ये ऐसे मुद्दे हैं जिनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में खड़गे ने कहा कि गठबंधन ने फैसला किया है कि इन विषयों पर नियमित रूप से चर्चा और रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि हर दो महीने में इस तरह की बैठक आयोजित की जाएगी ताकि राष्ट्रीय मुद्दों पर संयुक्त रुख तैयार किया जा सके और सरकार को जवाबदेह बनाया जा सके।</p>
<p>बैठक में शामिल नेताओं ने आगामी संसद सत्र को लेकर भी विचार-विमर्श किया। सूत्रों के अनुसार विपक्ष संसद के भीतर और बाहर कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। नेताओं का मानना है कि संसद लोकतांत्रिक संवाद का सबसे बड़ा मंच है और जनता से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से मानसून सत्र के दौरान भी विपक्षी दलों के बीच समन्वय बनाए रखने पर सहमति बनी है।</p>
<p>राजनीतिक गतिविधियों के बीच दिल्ली में सोमवार को एक और घटनाक्रम चर्चा में रहा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के खिलाफ लगाए गए कुछ पोस्टरों को लेकर विवाद सामने आया। राजधानी के अकबर रोड क्षेत्र में लगे इन पोस्टरों में कांग्रेस और राहुल गांधी को लेकर टिप्पणियां की गई थीं। बाद में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और पोस्टरों को हटा दिया। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि पोस्टर लगाने वालों की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी।</p>
<p>बैठक के दौरान विपक्षी दलों के बीच एकता बनाए रखने के मुद्दे पर भी जोर दिया गया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि मौजूदा समय में गठबंधन की मजबूती सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने माना कि विभिन्न दलों के बीच समय-समय पर मतभेद सामने आते हैं, लेकिन संवाद के माध्यम से उनका समाधान निकाला जा सकता है। पवार ने कहा कि गठबंधन में शामिल वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा कर सभी मुद्दों का रास्ता निकाला जाएगा। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में विपक्षी दलों के लिए एकजुट रहना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा।</p>
<p>इस बैठक का एक बड़ा उद्देश्य विपक्षी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करना भी था। पिछले कुछ वर्षों में गठबंधन से कुछ दलों की दूरी बढ़ी है, जिससे विपक्षी एकता पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में दिल्ली में आयोजित यह बैठक विपक्षी दलों के लिए शक्ति प्रदर्शन और संगठनात्मक मजबूती का अवसर भी मानी जा रही है। नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह संदेश देने की कोशिश की कि राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष एक साथ खड़ा है और आने वाले समय में भी साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा।</p>
<p>बैठक में यह भी तय किया गया कि अगली बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित होगी। इस दौरान विभिन्न राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों, आगामी चुनावी रणनीतियों और राष्ट्रीय मुद्दों पर फिर से चर्चा की जाएगी। नियमित संवाद से गठबंधन की एकजुटता मजबूत होगी और जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा।</p>
<p>दो साल बाद हुई इस बैठक ने यह संकेत दिया है कि विपक्ष आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने में जुट गया है। NEET और CBSE विवाद से लेकर चुनावी पारदर्शिता, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने संयुक्त रुख अपनाने की कोशिश की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:06:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कर्नाटक में सत्ता बदलाव तय, डीके शिवकुमार बन सकते हैं नए मुख्यमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद दिल्ली में तेज हुई हलचल, कांग्रेस 4 डिप्टी सीएम फॉर्मूले पर कर रही मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/change-of-power-fixed-in-karnataka-dk-shivakumar-may-become/article-54495"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-cm-change.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में पिछले तीन दिनों से चल रही हलचल अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद ही सिद्धारमैया शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। करीब आधे घंटे चली इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान अब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को अंतिम रूप देने में जुटा है और अगले हफ्ते डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;"> दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान सिद्धारमैया ने हाईकमान के सामने अपनी कई राजनीतिक मांगें रखीं। इनमें उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को नई कैबिनेट में अहम मंत्रालय देने की मांग भी शामिल बताई जा रही है। चर्चा यह भी है कि नई सरकार में सिद्धारमैया गुट का प्रभाव बरकरार रहेगा और कैबिनेट गठन में उनकी राय को अहमियत दी जाएगी। यही वजह है कि इस्तीफे के तुरंत बाद उनका दिल्ली पहुंचना काफी अहम माना जा रहा है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">उधर कांग्रेस पार्टी के भीतर अब 4 डिप्टी सीएम बनाने का फॉर्मूला तेजी से चर्चा में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए यह रणनीति तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि डीके शिवकुमार के साथ अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और मौजूदा मंत्री प्रियंक खड़गे का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">नई कैबिनेट में बड़े फेरबदल की भी संभावना जताई जा रही है। खबरें हैं कि मौजूदा सरकार के करीब 10 मंत्रियों को हटाया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नई टीम के जरिए सरकार के खिलाफ बन रही नाराजगी को कम किया जाए। पिछले कुछ महीनों में वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाले जैसे मामलों ने सरकार को घेरा था। कांग्रेस हाईकमान को लग रहा है कि समय रहते नेतृत्व बदलने से एंटी-इंकम्बेंसी का असर कम किया जा सकता है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दिल्ली में बैठकों के समानांतर बेंगलुरु में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। इस्तीफे से पहले सिद्धारमैया ने अपने आवास पर मंत्रियों की ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई थी। इस दौरान एक तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चा में रही, जिसमें डीके शिवकुमार सिद्धारमैया के पैर छूते नजर आए। बाद में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया और साथ बैठकर नाश्ता किया। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन और समझौते का संकेत मान रहे हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दरअसल कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलें नई नहीं हैं। 2023 विधानसभा चुनाव के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में लंबी खींचतान चली थी। चुनाव में कांग्रेस ने AHINDA फॉर्मूले के सहारे बड़ी जीत हासिल की थी। AHINDA यानी अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित वोट बैंक। सिद्धारमैया खुद कुरुबा समुदाय से आते हैं, जिसका असर चुनावी नतीजों में भी दिखाई दिया था। दूसरी तरफ डीके शिवकुमार ने दावा किया था कि उन्होंने पार्टी को मुश्किल दौर से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दोनों नेताओं की दावेदारी के चलते कांग्रेस हाईकमान को मुख्यमंत्री तय करने में करीब एक हफ्ता लग गया था। उस समय यह चर्चा भी चली कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री रहने का फॉर्मूला तय हुआ है, हालांकि कांग्रेस ने इसे कभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया। अब तीन साल बाद वही फॉर्मूला फिर चर्चा में है और सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि समझौते का दूसरा चरण लागू किया जा रहा है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">26 मई को कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों को दिल्ली बुलाया था। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। सूत्रों के मुताबिक शुरुआती दौर में सिद्धारमैया पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। यहां तक कि उन्होंने समर्थक विधायकों के साथ अलग रुख अपनाने के संकेत भी दिए थे। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठन में बड़ी भूमिका और सम्मानजनक राजनीतिक स्पेस देने का भरोसा दिया।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">इधर डीके शिवकुमार का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए लगभग तय माना जा रहा है। कर्नाटक कांग्रेस में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले डीके की पहचान संकटमोचक नेता के तौर पर रही है। पार्टी विधायकों को टूटने से बचाने से लेकर चुनाव प्रबंधन तक में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। हालांकि उनके खिलाफ कई आपराधिक और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच भी चल रही है। 2019 में उन्हें ईडी ने गिरफ्तार भी किया था और उन्हें करीब 50 दिन तिहाड़ जेल में बिताने पड़े थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:20:07 +0530</pubDate>
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                <title>कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन तय, सिद्धारमैया आज 3 बजे इस्तीफा देंगे</title>
                                    <description><![CDATA[डीके शिवकुमार होंगे नए मुख्यमंत्री, कांग्रेस में लंबे विवाद के बाद फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a17e9ebebac8/article-54404"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-cm.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रहा नेतृत्व परिवर्तन का विवाद अब लगभग खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज दोपहर 3 बजे अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। बेंगलुरु स्थित उनके सरकारी आवास पर गुरुवार सुबह हुई अहम बैठक में इस फैसले की जानकारी मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को दी गई। कांग्रेस हाईकमान की सहमति के बाद अब डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी तेज हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुबह हुई बैठक में उस समय भावुक माहौल देखने को मिला जब डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मिलने पहुंचे। बैठक के दौरान शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और दोनों नेता एक-दूसरे से गले मिले। इस दृश्य को कांग्रेस के भीतर सत्ता हस्तांतरण और राजनीतिक संतुलन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में मौजूद कर्नाटक सरकार के मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बना ली है और वही अगले मुख्यमंत्री होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन राज्यपाल फिलहाल पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से बाहर बताए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा राजभवन कार्यालय को सौंप सकते हैं। संवैधानिक नियमों के मुताबिक मुख्यमंत्री राज्यपाल की अनुपस्थिति में भी लिखित इस्तीफा ई-मेल या राजभवन कार्यालय के माध्यम से भेज सकते हैं। इस्तीफा स्वीकार होने तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा पिछले कई महीनों से चल रही थी। मई 2023 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान सामने आई थी। उस समय पार्टी नेतृत्व ने समझौते के तहत रोटेशनल मुख्यमंत्री फार्मूला तय किया था। सूत्रों के मुताबिक समझौते में ढाई-ढाई साल तक दोनों नेताओं को मौका देने की बात कही गई थी। अब सरकार के ढाई साल पूरे होने के करीब हैं, ऐसे में शिवकुमार समर्थक लगातार नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई बैठकों के बाद स्थिति तेजी से बदली। 26 मई को सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ लंबी बैठक की थी। करीब छह घंटे चली इस बैठक में सत्ता हस्तांतरण, संगठनात्मक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि समय रहते नेतृत्व परिवर्तन करने से सरकार के खिलाफ बन रही एंटी-इंकम्बेंसी को कम किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस इस बदलाव के जरिए राज्य में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं और दक्षिण कर्नाटक में उनकी मजबूत पकड़ है। वहीं सिद्धारमैया को ओबीसी वर्ग का प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। कांग्रेस नेतृत्व दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाकर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> केवल मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि पूरे मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल भी हो सकता है। मौजूदा 35 मंत्रियों में से बड़ी संख्या में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। पार्टी नए चेहरों को मौका देकर सरकार की छवि सुधारने की कोशिश कर सकती है। साथ ही दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की भी चर्चा है, जिनमें एक दलित और दूसरा लिंगायत या ओबीसी समुदाय से हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस के भीतर यह बदलाव केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं बल्कि संगठनात्मक अनुशासन का संदेश भी माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान, पंजाब और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में नेतृत्व विवादों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में कर्नाटक में हाईकमान समय रहते स्थिति संभालने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच डीके शिवकुमार के समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। बेंगलुरु में उनके आवास के बाहर सुबह से ही समर्थकों की भीड़ जमा रही। कई समर्थक फूलों के गुलदस्ते और मिठाइयों के साथ पहुंचे। घर के बाहर टेंट और स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो गईं। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी जाहिर की और डीके शिवकुमार के समर्थन में नारे लगाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर सिद्धारमैया समर्थकों में भावुक माहौल देखा गया। कई नेताओं ने कहा कि सिद्धारमैया ने राज्य में कई जनहित योजनाएं लागू कीं और कांग्रेस सरकार को मजबूत नेतृत्व दिया। हालांकि पार्टी नेतृत्व के फैसले को सभी नेताओं ने स्वीकार करने की बात कही है। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात पर नजर है कि डीके शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार किस तरह काम करेगी और कैबिनेट में किन चेहरों को जगह मिलेगी। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाकर औपचारिक रूप से डीके शिवकुमार को नेता चुना जाएगा। इसके बाद राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:47:22 +0530</pubDate>
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                <title>राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि पर वीरभूमि पहुंचे सोनिया-राहुल, दी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस नेताओं ने वीरभूमि पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/sonia-rahul-reached-veerbhoomi-on-rajiv-gandhis-35th-death-anniversary-and/article-53859"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rajiv-gandhi-death-anniversary.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि पर बुधवार सुबह दिल्ली के वीरभूमि में कांग्रेस नेताओं का एकत्र होना देखा गया। सुबह से ही श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू हो चुका था। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने वीरभूमि जाकर राजीव गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस मौके पर प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा और बेटी मिराया वाड्रा भी मौजूद रहे। श्रद्धांजलि कार्यक्रम का माहौल काफी शांत और भावुक था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या भी वहां उपस्थित थी। कई कार्यकर्ताओं ने राजीव गांधी की तस्वीरें और पार्टी के झंडे अपने हाथों में लिए हुए थे। बताया गया कि सुबह से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों की टीमें भी तैनात थीं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी वीरभूमि जाकर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी। उनके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम समेत कई प्रमुख नेता भी कार्यक्रम में शामिल हुए। पार्टी के नेताओं ने राजीव गांधी के कार्यकाल और उनके देश के लिए योगदान को याद किया। कांग्रेस की तरफ से सोशल मीडिया पर भी कई पोस्ट साझा किए गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें राजीव गांधी को आधुनिक भारत के विचार रखने वाला नेता बताया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देशभर में भी कांग्रेस की राज्य इकाइयों द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कई जगहों पर रक्तदान शिविर और पौधारोपण जैसे कार्यक्रम भी शामिल थे। दिल्ली में वीरभूमि के बाहर सुबह से कांग्रेस समर्थकों की आवाजाही रही। कुछ लोग फूल लेकर आए और कुछ कार्यकर्ता नारेबाजी करते नजर आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदुर में एक चुनावी सभा के दौरान हुई थी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलटीटीई से जुड़ी एक महिला आत्मघाती हमलावर धनु उनके करीब आई थी। वह माला पहनाने के बहाने आगे बढ़ी और पैर छूने के दौरान विस्फोट कर दिया। यह विस्फोट इतना भयानक था कि मौके पर ही राजीव गांधी सहित कई लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। उस समय राजीव गांधी कांग्रेस के प्रमुख चेहरे थे और चुनाव प्रचार में जुटे थे। उनकी हत्या के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई थी। आज भी कांग्रेस पार्टी हर साल 21 मई को उन्हें श्रद्धांजलि देती है और उनके राजनीतिक योगदान को याद करती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:15:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल में वीडी सतीशन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, राहुल, प्रियंका और खरगे समेत कई बड़े कांग्रेस नेता हुए शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[तिरुवनंतपुरम में वीडी सतीशन ने केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और खरगे समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/in-kerala-vd-satheesan-took-oath-as-chief-minister-many/article-53663"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kerala-v.d.-satheesan-congress-rahul-gandhi-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल की नई सरकार ने सोमवार को आधिकारिक रूप से अपने कार्यभार संभाल लिया। तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में हुए शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस समारोह में कई प्रमुख कांग्रेस नेता भी शामिल हुए। राहुल गांधी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रियंका गांधी वाड्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उपस्थिति ने इसे राजनीतिक तौर पर खास बना दिया। सुबह से ही स्टेडियम के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह साफ नजर आ रहा था। वीडी सतीशन के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच काफी समय से चल रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब नई सरकार के गठन के साथ यह वास्तविकता में बदल गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने वीडी सतीशन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और शपथ लेने के बाद राज्यपाल ने उन्हें बधाई भी दी। सिर्फ मुख्यमंत्री ने ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने भी शपथ ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">के मुरलीधरन और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गठबंधन सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेताओं को भी सरकार में जगह मिली। पीके कुन्हालीकुट्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीके बशीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एन समसुद्दीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केएम शाजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और वीई अब्दुल गफूर ने मंत्री पद की शपथ ली। मंत्रिमंडल गठन को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार बैठकों का दौर चल रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और क्षेत्रीय व सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नाम तय किए गए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस समारोह के दौरान मॉन्स जोसेफ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिबू बेबी जॉन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनूप जैकब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीपी जॉन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपी अनिल कुमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टी सिद्दीकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीसी विष्णुनाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजी एम जॉन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिंदू कृष्णा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एम लिजू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केए थुलसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ओ जे जनीश ने भी मंत्री पद की शपथ ली। समारोह में कार्यकर्ताओं ने कई बार नारेबाजी की। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की उपस्थिति के कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा। ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी दक्षिण भारत में अपने संगठन को मजबूत करने का संदेश देने के लिए इस कार्यक्रम को देख रही है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडी सतीशन ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया था कि वरिष्ठ नेता थिरुवनचूर राधाकृष्णन विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि शनिमोल उस्मान उपाध्यक्ष के पद पर होंगे। विधायक अपू जॉन जोसेफ को मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है। नई सरकार के सामने महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और राज्य की वित्तीय स्थिति जैसे मुद्दों पर तेजी से फैसले लेने की चुनौती होगी। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस समर्थकों में नई सरकार को लेकर खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 11:51:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>‘जनता ने नई आवाज चुनी’ विजय के CM बनते ही राहुल गांधी ने दिया बड़ा संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेता से नेता बने थलपति विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राहुल गांधी और खरगे ने नई सरकार को शुभकामनाएं दीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/the-public-chose-a-new-voice-rahul-gandhi-gave-a/article-53068"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-10t163216.613.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चेन्नई में रविवार को तमिलनाडु की राजनीति का बड़ा दिन देखने को मिला</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब अभिनेता से नेता बने सी जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लंबे समय से चल रही सियासी चर्चाओं और जोड़तोड़ के बीच आखिरकार तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने बहुमत का आंकड़ा हासिल कर सरकार बना ली। शपथ ग्रहण समारोह चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां कई राजनीतिक और फिल्मी हस्तियां मौजूद रहीं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी समारोह में पहुंचे और मंच पर विजय के साथ नजर आए। दोनों नेताओं की बातचीत और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय को बधाई देते हुए राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि तमिलनाडु ने एक नई पीढ़ी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई आवाज और नई कल्पना को चुना है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि विजय राज्य की जनता की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने समारोह की तस्वीरें भी साझा कीं। उधर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी विजय और उनकी पार्टी टीवीके को बधाई दी। खरगे ने कहा कि तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से आत्मसम्मान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक न्याय और तर्कसंगत सोच जैसे मूल्यों पर खड़ी रही है और उम्मीद है कि नई सरकार इन्हीं आदर्शों के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के युवाओं ने टीवीके पर भरोसा जताया है और विजय के नेतृत्व से नई उम्मीदें जुड़ी हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तमिलनाडु में करीब 70 साल बाद ऐसा मौका आया है जब गैर-द्रमुक और गैर-अन्ना द्रमुक दल सरकार बनाने में सफल हुआ है। बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से सहयोगी दलों और निर्दलीय विधायकों के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। आखिरकार विजय को वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के विधायकों का समर्थन मिल गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद सरकार गठन का रास्ता साफ हुआ। कांग्रेस ने भी चुनाव नतीजों के तुरंत बाद टीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था। शनिवार को राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया और रविवार को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अपने पहले संबोधन में विजय ने कहा कि वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते और जनता ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार लोगों से झूठे वादे नहीं करेगी और जमीन पर काम करने की कोशिश करेगी। विजय के मंत्रिमंडल में युवा चेहरों के साथ कुछ अनुभवी नेताओं को भी जगह दी गई है। समारोह में उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर और मां शोभा भी मौजूद रहे। अभिनेत्री तृषा समेत तमिल फिल्म इंडस्ट्री की कई जानी-मानी हस्तियां भी कार्यक्रम में पहुंचीं। शपथ समारोह के दौरान स्टेडियम के बाहर भारी भीड़ देखने को मिली और समर्थक विजय के समर्थन में नारे लगाते नजर आए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 10:15:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल में किसे मिलेगी कमान? कांग्रेस में CM के लिए इन 3 नेताओं की सबसे ज्यादा चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[केरल कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला और वीडी सतीशन के नाम चर्चा में हैं। विधायकों की राय पर रिपोर्ट सौंपी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/who-will-get-the-command-in-kerala-these-3-leaders/article-52930"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t153354.370.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरखाने चर्चा अब खुलकर सामने आने लगी है। शुक्रवार को पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को सौंप दी। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट तैयार करने से पहले पर्यवेक्षकों ने राज्य के कांग्रेस विधायकों से अलग-अलग बातचीत की और उनकी राय जानी। इस पूरी कवायद के बाद अब पार्टी नेतृत्व के सामने तीन बड़े नाम उभरकर आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा केसी वेणुगोपाल की हो रही है। सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">करीब 40 से ज्यादा विधायक उनके पक्ष में बताए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर उन्हें संगठन और दिल्ली नेतृत्व दोनों के बीच मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है। हालांकि मामला इतना सीधा भी नहीं दिख रहा। वे राहुल गांधी के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं और यही वजह है कि पार्टी हाईकमान उन्हें राज्य की राजनीति में भेजने को लेकर सावधानी बरत सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व इस बार ऐसा चेहरा सामने लाना चाहता है जो संगठन और गठबंधन दोनों को साथ लेकर चल सके। इसी कारण दूसरे विकल्पों पर भी गंभीरता से चर्चा हो रही है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमेश चेन्निथला का नाम भी दौड़ में बना हुआ है। उनके समर्थन में 20 से ज्यादा विधायकों का झुकाव बताया जा रहा है। चेन्निथला लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पार्टी के पुराने तथा अनुभवी नेताओं में उनकी गिनती होती है। वहीं विपक्ष के नेता वीडी सतीशन को लेकर भी कांग्रेस और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">UDF <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोगी दलों के बीच सकारात्मक माहौल बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार </span>IUML, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल कांग्रेस (जोसेफ गुट) और </span>RSP <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे सहयोगी दल सतीशन के नाम पर सहमति जता रहे हैं। उनका मानना है कि उन्होंने विपक्ष के नेता के तौर पर सरकार के खिलाफ आक्रामक भूमिका निभाई और जमीनी मुद्दों पर सक्रियता दिखाई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व किसी जल्दबाजी में नजर नहीं आ रहा। पार्टी पहले विधायकों की राय</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गठबंधन सहयोगियों का रुख और आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहती है। ऐसा कहा जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली में और बैठकों का दौर चल सकता है। केरल में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस इस बार ऐसा चेहरा चुनना चाहती है जो पार्टी को सीधे सत्ता की लड़ाई में मजबूत स्थिति में ला सके। इसी वजह से मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन लगातार जारी है और अंतिम फैसला हाईकमान के स्तर पर ही होने की संभावना मानी जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:43:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>खड़गे के बयान पर सियासी घमासान, CM मोहन यादव ने मांगी माफी</title>
                                    <description><![CDATA[PM मोदी पर टिप्पणी को लेकर विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दी सफाई पीएम मोदी पर बयान को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। बयान के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और माफी की मांग उठने लगी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/political-turmoil-over-kharges-statement-cm-mohan-yadav-apologized/article-51847"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(58).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश की राजधानी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भोपाल</span></span> से सामने आए घटनाक्रम में मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मोहन यादव</span></span> ने कांग्रेस अध्यक्ष <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मल्लिकार्जुन खड़गे</span></span> के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> को लेकर दिए गए कथित बयान को लेकर विवाद बढ़ गया है। सीएम ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है।</p>
<p>मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए इस तरह की टिप्पणी निंदनीय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए और जनता से माफी मांगनी चाहिए। उनके मुताबिक, इस तरह के बयान राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ हैं और इससे लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा प्रभावित होती है।</p>
<p>विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेन्नई में एक सभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को लेकर विवादित टिप्पणी की। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। हालांकि, मामला बढ़ने पर खड़गे ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है।</p>
<p>खड़गे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर आतंकवादी नहीं कहा, बल्कि उनका आशय यह था कि सरकार का रवैया विरोधियों के प्रति कठोर और डराने वाला है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर देखा जा रहा है।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और इसे प्रधानमंत्री के पद का अपमान बताया है। वहीं, कांग्रेस की ओर से इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बताया जा रहा है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी माहौल में इस तरह के बयान अक्सर विवाद का कारण बनते हैं और इसका सीधा असर जनमत पर पड़ता है। खासकर जब बात देश के शीर्ष नेतृत्व से जुड़ी हो, तो प्रतिक्रिया और भी तीखी हो जाती है।</p>
<p>इस विवाद के बीच अब नजर इस बात पर है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया देता है या मामला राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहता है। वहीं भाजपा इस मुद्दे को आगे भी उठाने के संकेत दे रही है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी बहस और तेज हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 14:21:19 +0530</pubDate>
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