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                <title>Ayurveda - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Ayurveda RSS Feed</description>
                
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                <title>मटके का पानी रहेगा बर्फ जैसा ठंडा, गर्मी में अपनाएं ये आसान देसी उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी में मटके का पानी भी हो रहा गर्म? जानिए ऐसे आसान देसी जुगाड़ जिनसे 24 घंटे तक पानी रहेगा ठंडा और ताजा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/the-water-in-the-pot-will-remain-as-cold-as/article-53902"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/simple-traditional-methods-to-keep-water-cool-in-an-earthen-pot.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गर्मी के मौसम में ठंडा पानी लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा बन जाता है। कई शहरों में तापमान 45 डिग्री से भी ऊपर पहुंच रहा है और ऐसे में घर में रखा पानी जल्दी ही गुनगुना हो जाता है। ज्यादातर लोग फ्रिज का पानी पीना पसंद करते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लगातार बहुत ठंडा पानी पीना सेहत के लिए उतना अच्छा नहीं माना जाता। इसी वजह से अब मटके का पानी फिर से लोगों की पसंद बन रहा है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब गर्मी बहुत ज्यादा होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मटके का पानी भी जल्दी ठंडा नहीं रहता। इस समस्या का हल पाने के लिए गांवों में कुछ पुराने देसी तरीके फिर से चर्चा में आ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनसे मटके का पानी लंबे समय तक ठंडा रखा जा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बुजुर्गों का कहना है कि पहले बिना फ्रिज के भी लोग मटके का पानी घंटों तक ठंडा रखते थे। इसके लिए सबसे आसान तरीका यह है कि मटके पर मोटा सूती कपड़ा लपेटा जाए। कपड़े को ऊपर से नीचे तक अच्छे से ढंकना ज़रूरी है और फिर उसे पानी से भिगोया जाता है। कहा जाता है कि कपड़े की नमी धीरे-धीरे मटके की सतह को ठंडा रखती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भीतर का पानी भी ठंडा रहता है। कई जगह सूती कपड़े की जगह टाट या बोरे का भी इस्तेमाल किया जाता है। गांवों में आज भी यह तरीका खूब अपनाया जाता है। खास बात यह है कि इसके लिए बिजली की जरूरत नहीं होती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुरुआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मटके को रखने का स्थान भी पानी की ठंडक पर असर डालता है। अगर मटके को सीधे गर्म फर्श या धूप में रखा जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पानी जल्दी गर्म हो जाता है। इस स्थिति में लोग रेत या मिट्टी का सहारा लेते हैं। एक बड़े बर्तन में हल्की गीली रेत भरकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके बीच में मटका रखा जाता है। इससे मटके को बाहर से ठंडक मिलती रहती है। यह भी बताया जा रहा है कि मटके की सतह पर मौजूद छोटे-छोटे छिद्र नमी को सोख लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे अंदर का पानी लंबे समय तक ठंडा बना रहता है। कुछ लोग बालू की जगह साधारण मिट्टी का भी उपयोग करते हैं।</span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इधर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई इलाकों में सेंधा नमक का उपाय भी चर्चा में है। घरेलू जानकारों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नया मटका इस्तेमाल करने से पहले उसमें एक चम्मच सेंधा नमक डालकर कुछ घंटों के लिए पानी भरकर छोड़ दिया जाता है। फिर उस पानी को निकालकर साफ पानी भरा जाता है। ऐसा कहा जा रहा है कि इससे मटके की कूलिंग क्षमता बढ़ जाती है और पानी लंबे समय तक ठंडा रहता है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञ बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से बचने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि मटके का प्राकृतिक ठंडा पानी शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर गर्मी और लू के मौसम में। इसी वजह से अब शहरों में भी लोग पुराने देसी तरीकों की ओर लौटते हुए नजर आ रहे हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 15:23:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>गर्मी में रामबाण घरेलू ड्रिंक: किशमिश-सौंफ पानी पीने से मिलते हैं गजब के फायदे, जानें कैसे आजमाएं</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मियों में किशमिश और सौंफ का पानी शरीर को ठंडक देने, पाचन सुधारने और एनर्जी बढ़ाने में मदद कर सकता है। जानें इसके फायदे और उपयोग का तरीका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/drinking-raisin-fennel-water-a-panacea-home-drink-in-summer-gives/article-53275"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t152405.626.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Raisin Fennel And Water Benefits:</strong> गर्मियों में अपने शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि तेज धूप और उमस की वजह से डिहाइड्रेशन की समस्या जल्दी बढ़ जाती है। इसीलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग घरेलू नुस्खों की ओर बढ़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इनमें से एक है किशमिश और सौंफ का पानी। कई लोग इसे सुबह खाली पेट पीना पसंद करते हैं। ये एक सरल सा पेय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो ना सिर्फ शरीर को ठंडक देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पाचन और ऊर्जा स्तर को भी संतुलित रखने में मदद करता है। गर्मियों में यह नुस्खा खासकर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">किशमिश और सौंफ का पानी गर्मियों में स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। दोनों की तासीर ठंडी होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर का तापमान संतुलित रहने में मदद मिलती है। बताया जाता है कि रात को एक गिलास पानी में लगभग एक चम्मच सौंफ और </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> किशमिश भिगोकर रख दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सुबह इसे छानकर पिएं। कुछ लोग किशमिश को चबाकर भी खाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आसान सी प्रक्रिया शरीर को डिटॉक्स करने और पूरे दिन हल्का महसूस कराने में मददगार हो सकती है। यह दवा तो नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन एक सहायक स्वास्थ्य पेय के रूप में देखा जा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गर्मियों में किशमिश और सौंफ का पानी पीने से शरीर को ठंडक मिलती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लू लगने का जोखिम कुछ हद तक कम हो सकता है। सौंफ पाचन तंत्र को शांत रखने में मदद करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे गैस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किशमिश में प्राकृतिक शुगर और फाइबर होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शरीर को हल्की ऊर्जा देने के साथ-साथ कब्ज में भी राहत पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। कई लोग बताते हैं कि इसे नियमित रूप से लेने से सुबह पेट साफ रहता है और दिन भर भारीपन महसूस नहीं होता।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी कहा जाता है कि यह पेय त्वचा पर भी अच्छा असर डाल सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे त्वचा पर नैचुरल ग्लो आ सकता है। गर्मियों में होने वाले पिंपल्स और रूखापन जैसी समस्याओं में भी कुछ लोग इसे फायदेमंद मानते हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका असर व्यक्ति की लाइफस्टाइल और डाइट पर भी निर्भर करता है। डॉक्टरों की सलाह है कि किसी भी घरेलू नुस्खे को संतुलित खानपान और पर्याप्त पानी के साथ ही अपनाना चाहिए।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:49:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>ब्रह्म मुहूर्त में जागने के लाभ: जीवन में शांति और सफलता के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[सुबह 4 से 5:30 के बीच उठना क्यों माना जाता है खास]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/benefits-of-waking-up-in-brahma-muhurta-signs-of-peace/article-51867"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/dharm---2026-04-22t162541.878.jpg" alt=""></a><br /><p>ब्रह्म मुहूर्त में जागने को भारतीय परंपरा में बेहद शुभ और फलदायी माना गया है। यह समय सूर्योदय से करीब डेढ़ घंटे पहले का होता है, जब वातावरण सबसे शांत, स्वच्छ और सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है। माना जाता है कि इस समय नींद खुलना केवल एक सामान्य दिनचर्या नहीं, बल्कि शरीर, मन और जीवन में बदलाव का संकेत हो सकता है।<br />आयुर्वेद और योग विज्ञान में भी इस समय को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए सबसे उत्तम बताया गया है। हाल के समय में लाइफस्टाइल विशेषज्ञ भी इसे दिन की सबसे प्रभावी शुरुआत मानते हैं।</p>
<h5><strong>सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव</strong></h5>
<p>ब्रह्म मुहूर्त को “सात्विक काल” कहा जाता है, जब वातावरण में प्रदूषण और शोर सबसे कम होता है। इस दौरान उठने से व्यक्ति को मानसिक शांति और एकाग्रता मिलती है।<br />विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह जल्दी उठने वाले लोगों में तनाव का स्तर कम और निर्णय लेने की क्षमता अधिक देखी जाती है। यह समय ध्यान, योग और आत्म-चिंतन के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।</p>
<h5><strong>आध्यात्मिक मान्यताएं और संकेत</strong></h5>
<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से ब्रह्म मुहूर्त में बिना अलार्म के जाग जाता है, तो इसे आध्यात्मिक प्रगति का संकेत माना जाता है।<br />कई परंपराओं में इसे ईश्वर की कृपा और जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। यह भी माना जाता है कि इस समय किया गया ध्यान और पूजा अधिक फलदायी होता है।</p>
<h5><strong>स्वास्थ्य और जीवनशैली पर असर</strong></h5>
<p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय हवा में ऑक्सीजन का स्तर बेहतर होता है, जिससे शरीर को अधिक प्राणवायु मिलती है। इसका सीधा असर इम्यूनिटी और ऊर्जा स्तर पर पड़ता है।<br />नियमित रूप से ब्रह्म मुहूर्त में उठने से नींद का चक्र बेहतर होता है, पाचन सुधरता है और दिनभर थकान कम महसूस होती है। यह आदत मानसिक स्पष्टता और याददाश्त को भी मजबूत बनाती है।</p>
<h5><strong>दिनचर्या में बदलाव के संकेत</strong></h5>
<p>अगर किसी व्यक्ति को अचानक या नियमित रूप से इस समय नींद खुलने लगती है, तो इसे कई लोग जीवनशैली में बदलाव का संकेत मानते हैं। यह संकेत हो सकता है कि शरीर अब अधिक अनुशासित और प्राकृतिक दिनचर्या की ओर बढ़ रहा है।<br />विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस समय को मोबाइल या अन्य डिस्ट्रैक्शन में न गंवाकर ध्यान, हल्का व्यायाम या पढ़ाई में लगाया जाए।</p>
<h5><strong>क्या करें ब्रह्म मुहूर्त में</strong></h5>
<p>इस समय उठने के बाद हल्का ध्यान या प्राणायाम करना सबसे उपयोगी माना जाता है। कुछ मिनट की शांति और गहरी सांस लेने की प्रक्रिया पूरे दिन को बेहतर बना सकती है।<br />इसके बाद दिन की योजना बनाना या सकारात्मक विचारों पर ध्यान देना मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।</p>
<p>कुल मिलाकर ब्रह्म मुहूर्त में जागना सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक रूप से भी लाभकारी आदत है, जो जीवन में अनुशासन, स्वास्थ्य और मानसिक शांति लाने में मदद करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 16:26:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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