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                <title>NIA - दैनिक जागरण</title>
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                <title>सलमान खान फायरिंग केस में अनमोल बिश्नोई ने किया सरेंडर का आवेदन</title>
                                    <description><![CDATA[तिहाड़ जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के भाई ने मुंबई की विशेष अदालत से प्रोडक्शन वारंट जारी करने की मांग की, कहा- निष्पक्ष ट्रायल में शामिल होना चाहता हूं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/anmol-bishnoi-applied-for-surrender-in-salman-khan-firing-case/article-57775"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/salman-khan-firing-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर वर्ष 2024 में हुई फायरिंग के मामले में नया कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई ने मुंबई की विशेष एमसीओसीए (MCOCA) अदालत में सरेंडर के लिए आवेदन दाखिल किया है। फिलहाल वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के एक अलग मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। अदालत में दायर याचिका में उसने कहा है कि वह इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई का हिस्सा बनना चाहता है, लेकिन कानूनी हिरासत में होने के कारण अदालत के आदेश के बिना व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हो सकता। अनमोल बिश्नोई की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया है कि तिहाड़ जेल प्रशासन के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी किया जाए, ताकि उसे मुंबई की अदालत में पेश किया जा सके। उसके वकील का कहना है कि इस प्रक्रिया से मामले की सुनवाई में तेजी आएगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई पूरी की जा सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">याचिका में अनमोल बिश्नोई ने स्पष्ट किया है कि वह पहले से ही एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में है। ऐसे में वह स्वयं अदालत में उपस्थित नहीं हो सकता। उसने अदालत से कहा है कि यदि प्रोडक्शन वारंट जारी किया जाता है तो वह संबंधित मामले में औपचारिक रूप से पेश होकर कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगा। याचिका में यह भी कहा गया है कि अदालत में उसकी मौजूदगी से अभियोजन पक्ष को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। इसके विपरीत, इससे मुकदमे की सुनवाई अधिक व्यवस्थित और तेज हो सकेगी। उसने यह भी तर्क दिया कि कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग रोकने के लिए उसका अदालत में उपस्थित होना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान अब तक तीन गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अनमोल बिश्नोई की ओर से दायर आवेदन में कहा गया है कि उसकी अनुपस्थिति में ट्रायल आगे बढ़ रहा है। इसलिए उसे भी अदालत में अपना पक्ष रखने और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर मिलना चाहिए। किसी भी आरोपी की अदालत में औपचारिक पेशी और गिरफ्तारी की प्रक्रिया न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसी कारण अनमोल ने अदालत से आवश्यक आदेश जारी करने का अनुरोध किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रोडक्शन वारंट एक न्यायिक आदेश होता है, जिसके माध्यम से किसी जेल में बंद आरोपी को दूसरी अदालत या किसी अन्य मामले की सुनवाई के लिए पेश किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी अन्य मामले में हिरासत में है तो संबंधित अदालत उसके लिए प्रोडक्शन वारंट जारी करती है। अनमोल बिश्नोई वर्तमान में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। ऐसे में वह सीधे मुंबई नहीं आ सकता। अदालत यदि प्रोडक्शन वारंट जारी करती है तो जेल प्रशासन उसे निर्धारित तारीख पर मुंबई की अदालत में पेश करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अनमोल बिश्नोई को पिछले वर्ष अमेरिका से भारत लाया गया था। प्रत्यर्पण और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उसे आतंकवादी-गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था। एनआईए की जांच में उसका नाम संगठित अपराध और आपराधिक साजिश से जुड़े मामलों में सामने आया था। वर्तमान में वह उसी मामले में न्यायिक हिरासत में है और तिहाड़ जेल में बंद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">14 अप्रैल 2024 की सुबह मुंबई के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर दो बाइक सवार हमलावरों ने कई राउंड फायरिंग की थी। उस समय अभिनेता सलमान खान अपने घर में मौजूद थे। घटना के बाद मुंबई पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की थी।जांच के दौरान पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें विक्की गुप्ता, सागर पाल, सोनू कुमार बिश्नोई, मोहम्मद रफीक चौधरी और हरपाल सिंह शामिल हैं। एक अन्य आरोपी अनुज कुमार थापन की पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरी साजिश के तार लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े हुए हैं। घटना के बाद सोशल मीडिया पर अनमोल बिश्नोई के नाम से एक पोस्ट भी सामने आई थी, जिसमें फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। हालांकि जांच एजेंसियां उस पोस्ट की भी अलग से जांच कर चुकी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फायरिंग की घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सलमान खान की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी थी। अभिनेता को पहले से ही वाई प्लस (Y+) श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। उनके साथ हर समय सुरक्षा कर्मियों की तैनाती रहती है। इसके अलावा गैलेक्सी अपार्टमेंट की सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह बदली गई। इमारत के बाहर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, प्रवेश व्यवस्था को और सख्त किया गया तथा सलमान खान की बालकनी को बुलेटप्रूफ कराया गया। उनकी निजी गाड़ी भी पहले से बुलेटप्रूफ सुरक्षा से लैस है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 16:58:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा खुलासा, आतंकियों के मोबाइल कराची और लाहौर तक पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[एनआईए की जांच में सामने आए नए तथ्य, मोबाइल में बैसरन घाटी की लोकेशन और स्क्रीनशॉट मिले, सप्लाई चेन के जरिए पाकिस्तान पहुंचाए गए थे फोन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-revelation-in-the-investigation-of-pahalgam-terrorist-attack-terrorists/article-54751"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pahalgam-terror-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को मामले में एक महत्वपूर्ण सुराग मिला है। जांच के दौरान मारे गए आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। एजेंसी के अनुसार आतंकियों के कब्जे से मिले दोनों मोबाइल फोन चीन की एक कंपनी की सप्लाई चेन के माध्यम से पाकिस्तान पहुंचे थे और बाद में इन्हें कराची तथा लाहौर के पतों पर डिलीवर किया गया था। जांच एजेंसी का मानना है कि यह जानकारी हमले की पूरी साजिश और आतंकियों के नेटवर्क को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनआईए के अनुसार पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को पिछले वर्ष जुलाई में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। मुठभेड़ के बाद उनके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। इनमें एक रेडमी 9टी और दूसरा रेडमी नोट 12 मॉडल का फोन था। जब इन उपकरणों की डिजिटल और फोरेंसिक जांच की गई तो इनके इस्तेमाल और वितरण से जुड़े कई तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि दोनों मोबाइल पाकिस्तान के कराची और लाहौर क्षेत्रों तक पहुंचाए गए थे। एजेंसी ने तकनीकी माध्यमों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर इनकी सप्लाई चेन का पता लगाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान मोबाइल फोन में मौजूद डाटा ने भी कई महत्वपूर्ण संकेत दिए। अधिकारियों के मुताबिक मोबाइल के नेविगेशन एप में बैसरन घाटी की लोकेशन पहले से सेव थी। इसके अलावा बैसरन क्षेत्र के कई स्क्रीनशॉट भी फोन में मिले, जिन्हें हमले से कुछ दिन पहले लिया गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि हमले की तैयारी पहले से की जा रही थी और लक्ष्य स्थल की रेकी तथा डिजिटल निगरानी भी की गई थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हमले की योजना किस स्तर पर बनाई गई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले में पर्यटकों को निशाना बनाया गया था और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार यह एक सुनियोजित आतंकी हमला था, जिसमें आतंकियों ने पहले से तय रणनीति के तहत कार्रवाई की थी। फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों ने अब इस बात को और मजबूत किया है कि हमले की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो चुकी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले जांच एजेंसी ने एक अन्य खुलासा भी किया था, जिसमें बताया गया था कि आतंकियों के पास से एक हाई-टेक एक्शन कैमरा भी बरामद हुआ था। जांच में यह जानकारी सामने आई कि कैमरा अंतरराष्ट्रीय वितरण नेटवर्क के जरिए चीन पहुंचा और वहां से किसी माध्यम से आतंकियों तक पहुंचा। एजेंसी का मानना है कि ऐसे उपकरणों का उपयोग आतंकी घटनाओं की रिकॉर्डिंग, प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए किया जाता है। यही कारण है कि इन उपकरणों की सप्लाई और उपयोग से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों द्वारा आधुनिक तकनीक और डिजिटल उपकरणों के उपयोग में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। मोबाइल फोन, जीपीएस आधारित एप्लीकेशन, एक्शन कैमरे और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों का इस्तेमाल अब आतंकवादी गतिविधियों का हिस्सा बन चुका है। इससे जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं, हालांकि डिजिटल फोरेंसिक तकनीकों की मदद से कई महत्वपूर्ण सुराग भी प्राप्त हो रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनआईए द्वारा दाखिल चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तान में बैठा एक आतंकी संचालक था, जो लगातार हमलावरों के संपर्क में था। जांच में यह दावा किया गया है कि हमले के दौरान आतंकियों को रियल टाइम निर्देश दिए जा रहे थे और लक्ष्य क्षेत्र की जानकारी भी पहले से साझा की गई थी। एजेंसी ने हमले से जुड़े कई डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिनका विश्लेषण अभी भी जारी है। जांच में दो स्थानीय टूरिस्ट गाइडों की भूमिका भी सामने आई थी। एजेंसी के अनुसार दोनों ने कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी थीं, लेकिन समय रहते इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक नहीं पहुंचाई। इस संबंध में कानूनी कार्रवाई की गई और दोनों को गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि यदि समय पर सूचना मिल जाती तो संभव है कि हमले को रोका जा सकता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस मामले की जांच अभी भी जारी है और कई अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की पड़ताल की जा रही है। मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, संचार नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का उद्देश्य केवल हमले के दोषियों तक पहुंचना नहीं, बल्कि उन नेटवर्कों को भी उजागर करना है जो सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को समर्थन और संसाधन उपलब्ध कराते हैं। एनआईए का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों से मिले नए सुराग इस मामले में आगे की जांच को नई दिशा देंगे। आने वाले समय में जांच के दौरान और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जो इस पूरे आतंकी नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली को समझने में मदद करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मालेगांव ब्लास्ट केस में हाईकोर्ट ने ट्रायल रोका, 4 आरोपियों को राहत</title>
                                    <description><![CDATA[मालेगांव ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ठोस सबूत के अभाव में ट्रायल पर रोक हाईकोर्ट के इस फैसले ने लंबे समय से चल रहे इस संवेदनशील मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/high-court-stops-trial-in-malegaon-blast-case-relief-to/article-51901"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(62).jpg" alt=""></a><br /><p>मालेगांव ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। यह फैसला उन चार आरोपियों के लिए राहत लेकर आया है, जिन पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आरोप तय किए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के किसी भी आपराधिक मामले को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। कोर्ट ने माना कि जिस बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया था, वह बाद में वापस ले लिया गया था, ऐसे में उस पर आधारित आरोपों की वैधता पर गंभीर सवाल उठते हैं। इस आदेश के बाद फिलहाल मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई है, जिससे जांच एजेंसियों की प्रक्रिया और साक्ष्यों की गुणवत्ता पर बहस तेज हो गई है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, यह मामला 2006 के मालेगांव धमाकों से जुड़ा है, जिसमें चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। इन आरोपियों में मध्यप्रदेश के महू और देपालपुर के निवासी भी शामिल हैं।</p>
<p>राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आधार एक कथित स्वीकारोक्ति बयान को बताया था। यह बयान 2010 में सामने आया था, जिसमें कुछ लोगों की संलिप्तता का जिक्र किया गया था।हालांकि, बाद में संबंधित व्यक्ति ने अदालत में यह बयान वापस लेते हुए कहा था कि इसे दबाव में दिलवाया गया था।</p>
<h5><strong>सबूतों पर सवाल</strong></h5>
<p>सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है और न ही ऐसे ठोस साक्ष्य हैं, जो आरोपियों को सीधे तौर पर घटना से जोड़ते हों।</p>
<p>कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही आगे बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p>8 सितंबर 2006 को महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। ये धमाके धार्मिक स्थलों के पास हुए, जिससे देशभर में तनाव का माहौल बन गया था। इस घटना में 31 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।</p>
<p>शुरुआत में जांच एजेंसियों ने अलग दिशा में कार्रवाई की थी, लेकिन बाद में जांच कई बार अलग-अलग एजेंसियों को सौंपी गई। अंततः यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी के पास पहुंचा।</p>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपियों को 2013 में गिरफ्तार किया गया था और वे कई वर्षों तक जेल में रहे। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।सितंबर 2025 में विशेष अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय किए थे, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।</p>
<p>इस फैसले का असर न केवल इस मामले पर पड़ेगा, बल्कि अन्य मामलों में भी जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो सकते हैं।अब इस मामले में आगे की सुनवाई हाईकोर्ट के अगले आदेशों पर निर्भर करेगी। जांच एजेंसियों को अपने साक्ष्यों को मजबूत करने या नए सिरे से समीक्षा करने की आवश्यकता पड़ सकती है।</p>
<p>मालेगांव ब्लास्ट केस से जुड़ा यह फैसला आने वाले समय में न्यायिक प्रक्रिया और जांच प्रणाली दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 11:57:53 +0530</pubDate>
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