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                <title>Legal Update - दैनिक जागरण</title>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा, अभद्र व्यवहार पर याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[सुनवाई के दौरान वकील ने कोर्ट की गरिमा का उल्लंघन किया, सुरक्षा कर्मियों ने बाहर निकाला; अदालत ने अवमानना की कार्रवाई से परहेज करते हुए याचिका खारिज की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/uproar-during-hearing-in-supreme-court-petition-on-indecent-behavior/article-58413"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/supreme-court-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश की सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला जिसने कुछ समय के लिए कोर्ट रूम का माहौल पूरी तरह बदल दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने अदालत में अभद्र व्यवहार किया। सुनवाई के दौरान उन्होंने न केवल आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया बल्कि अदालत की कार्यवाही के बीच फाइल भी उछाल दी। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा और संबंधित वकील को कोर्ट रूम से बाहर ले जाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ के समक्ष आया जिसमें जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे सुनवाई कर रहे थे। याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर की गई थी और याचिकाकर्ता स्वयं अधिवक्ता के रूप में अपना पक्ष रख रहे थे। शुरुआत से ही उनका रवैया आक्रामक बताया गया। अदालत की कार्यवाही के दौरान उन्होंने लगातार ऊंची आवाज में अपनी बात रखी और न्यायालय की प्रक्रिया पर असंतोष जताया। सुनवाई के दौरान स्थिति तब गंभीर हो गई जब उन्होंने अदालत में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया और गुस्से में केस से जुड़े दस्तावेज हवा में उछाल दिए। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से कुछ क्षणों के लिए कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह गए। न्यायिक कार्यवाही के दौरान इस तरह के व्यवहार को देखते हुए सुरक्षा कर्मी तुरंत सक्रिय हुए और संबंधित वकील को अदालत कक्ष से बाहर ले गए, जिससे आगे की कार्यवाही शांतिपूर्वक जारी रह सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वकील ने सुनवाई के दौरान न्यायालय से एक विशेष आदेश जारी करने की मांग की थी। उन्होंने कथित रूप से कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। इस पर पीठ ने उनसे सवाल किया कि क्या वे अदालत को आदेश दे रहे हैं। इसके बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। वकील ने अपनी बात दोहराने के बाद दस्तावेज फेंक दिए और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। घटना के दौरान कोर्ट रूम में मौजूद कई अधिवक्ता और अन्य लोग कुछ समय के लिए असहज हो गए। अचानक हुए इस घटनाक्रम के कारण कार्यवाही कुछ देर के लिए प्रभावित हुई, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय रहने से स्थिति जल्द सामान्य हो गई। अदालत ने शांति बनाए रखते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद जस्टिस के. वी. विश्वनाथन ने कहा कि संबंधित व्यक्ति स्पष्ट रूप से मानसिक और भावनात्मक दबाव में दिखाई दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अदालत को उनके प्रति सहानुभूति है और इस पूरे घटनाक्रम को हताशा के रूप में देखा जाना चाहिए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से दंडित करना नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को निष्पक्ष और संतुलित बनाए रखना है। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने इस मामले में वकील के खिलाफ तत्काल अवमानना की कार्रवाई करने का निर्णय नहीं लिया। हालांकि, पीठ ने याचिका के गुण-दोष पर विचार करने के बाद स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया। इसी कारण विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सलमान खान फायरिंग केस में अनमोल बिश्नोई ने किया सरेंडर का आवेदन</title>
                                    <description><![CDATA[तिहाड़ जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के भाई ने मुंबई की विशेष अदालत से प्रोडक्शन वारंट जारी करने की मांग की, कहा- निष्पक्ष ट्रायल में शामिल होना चाहता हूं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/anmol-bishnoi-applied-for-surrender-in-salman-khan-firing-case/article-57775"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/salman-khan-firing-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर वर्ष 2024 में हुई फायरिंग के मामले में नया कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई ने मुंबई की विशेष एमसीओसीए (MCOCA) अदालत में सरेंडर के लिए आवेदन दाखिल किया है। फिलहाल वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के एक अलग मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। अदालत में दायर याचिका में उसने कहा है कि वह इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई का हिस्सा बनना चाहता है, लेकिन कानूनी हिरासत में होने के कारण अदालत के आदेश के बिना व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हो सकता। अनमोल बिश्नोई की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया है कि तिहाड़ जेल प्रशासन के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी किया जाए, ताकि उसे मुंबई की अदालत में पेश किया जा सके। उसके वकील का कहना है कि इस प्रक्रिया से मामले की सुनवाई में तेजी आएगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई पूरी की जा सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">याचिका में अनमोल बिश्नोई ने स्पष्ट किया है कि वह पहले से ही एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में है। ऐसे में वह स्वयं अदालत में उपस्थित नहीं हो सकता। उसने अदालत से कहा है कि यदि प्रोडक्शन वारंट जारी किया जाता है तो वह संबंधित मामले में औपचारिक रूप से पेश होकर कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगा। याचिका में यह भी कहा गया है कि अदालत में उसकी मौजूदगी से अभियोजन पक्ष को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। इसके विपरीत, इससे मुकदमे की सुनवाई अधिक व्यवस्थित और तेज हो सकेगी। उसने यह भी तर्क दिया कि कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग रोकने के लिए उसका अदालत में उपस्थित होना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान अब तक तीन गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अनमोल बिश्नोई की ओर से दायर आवेदन में कहा गया है कि उसकी अनुपस्थिति में ट्रायल आगे बढ़ रहा है। इसलिए उसे भी अदालत में अपना पक्ष रखने और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर मिलना चाहिए। किसी भी आरोपी की अदालत में औपचारिक पेशी और गिरफ्तारी की प्रक्रिया न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसी कारण अनमोल ने अदालत से आवश्यक आदेश जारी करने का अनुरोध किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रोडक्शन वारंट एक न्यायिक आदेश होता है, जिसके माध्यम से किसी जेल में बंद आरोपी को दूसरी अदालत या किसी अन्य मामले की सुनवाई के लिए पेश किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी अन्य मामले में हिरासत में है तो संबंधित अदालत उसके लिए प्रोडक्शन वारंट जारी करती है। अनमोल बिश्नोई वर्तमान में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। ऐसे में वह सीधे मुंबई नहीं आ सकता। अदालत यदि प्रोडक्शन वारंट जारी करती है तो जेल प्रशासन उसे निर्धारित तारीख पर मुंबई की अदालत में पेश करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अनमोल बिश्नोई को पिछले वर्ष अमेरिका से भारत लाया गया था। प्रत्यर्पण और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उसे आतंकवादी-गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था। एनआईए की जांच में उसका नाम संगठित अपराध और आपराधिक साजिश से जुड़े मामलों में सामने आया था। वर्तमान में वह उसी मामले में न्यायिक हिरासत में है और तिहाड़ जेल में बंद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">14 अप्रैल 2024 की सुबह मुंबई के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर दो बाइक सवार हमलावरों ने कई राउंड फायरिंग की थी। उस समय अभिनेता सलमान खान अपने घर में मौजूद थे। घटना के बाद मुंबई पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की थी।जांच के दौरान पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें विक्की गुप्ता, सागर पाल, सोनू कुमार बिश्नोई, मोहम्मद रफीक चौधरी और हरपाल सिंह शामिल हैं। एक अन्य आरोपी अनुज कुमार थापन की पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरी साजिश के तार लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े हुए हैं। घटना के बाद सोशल मीडिया पर अनमोल बिश्नोई के नाम से एक पोस्ट भी सामने आई थी, जिसमें फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। हालांकि जांच एजेंसियां उस पोस्ट की भी अलग से जांच कर चुकी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फायरिंग की घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सलमान खान की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी थी। अभिनेता को पहले से ही वाई प्लस (Y+) श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। उनके साथ हर समय सुरक्षा कर्मियों की तैनाती रहती है। इसके अलावा गैलेक्सी अपार्टमेंट की सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह बदली गई। इमारत के बाहर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, प्रवेश व्यवस्था को और सख्त किया गया तथा सलमान खान की बालकनी को बुलेटप्रूफ कराया गया। उनकी निजी गाड़ी भी पहले से बुलेटप्रूफ सुरक्षा से लैस है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 16:58:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोनम रघुवंशी की जमानत पर फैसला सुरक्षित, हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी</title>
                                    <description><![CDATA[राजा रघुवंशी हत्याकांड में मेघालय सरकार ने जमानत रद्द करने की मांग की, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शिलांग हाई कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/decision-on-sonam-raghuvanshis-bail-reserved-hearing-completed-in-high/article-55612"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sonam-raghuvanshi-bail.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर निवासी राजा रघुवंशी की मेघालय में हुई चर्चित हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। शिलांग उच्च न्यायालय ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की नजर अदालत के अंतिम आदेश पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि सोनम रघुवंशी को मिली जमानत बरकरार रहेगी या फिर उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला पिछले कई महीनों से लगातार चर्चा में बना हुआ है। राजा रघुवंशी की हत्या के बाद मेघालय पुलिस ने जांच शुरू की थी और जांच के दौरान सोनम रघुवंशी को मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया। मामले की गंभीरता और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं के कारण यह केस लगातार सुर्खियों में बना रहा। बाद में जब मामला अदालत पहुंचा तो शिलांग की जिला अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और प्रस्तुत तर्कों के आधार पर सोनम रघुवंशी को जमानत दे दी थी। जिला अदालत के इस फैसले के बाद सोनम रघुवंशी को जेल से रिहा कर दिया गया था। हालांकि यह फैसला मेघालय सरकार को स्वीकार नहीं था। सरकार का मानना था कि मामले की प्रकृति और जांच से जुड़े तथ्यों को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर जिला अदालत के आदेश को चुनौती दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि हत्या जैसे गंभीर मामले में आरोपों की प्रकृति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं और मामले की पूरी पड़ताल अभी भी महत्वपूर्ण है। सरकार का तर्क था कि ऐसे मामलों में आरोपी को जमानत पर रहने देना जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, सोनम रघुवंशी की ओर से पेश वकीलों ने जिला अदालत के फैसले का समर्थन किया। बचाव पक्ष का कहना था कि निचली अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों का अध्ययन करने के बाद ही जमानत देने का निर्णय लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि जमानत किसी व्यक्ति को दोषमुक्त घोषित नहीं करती, बल्कि यह केवल मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक दी गई एक कानूनी राहत है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान अदालत में जांच से जुड़े दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और विभिन्न कानूनी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्कों को मजबूती से रखा। अदालत ने कई महत्वपूर्ण सवाल भी पूछे और जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों का अवलोकन किया। बताया जा रहा है कि 5 जून से इस मामले में लगातार सुनवाई चल रही थी। हर सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले के विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयास किया। अदालत का फैसला इस केस की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजा रघुवंशी हत्याकांड पहले ही काफी संवेदनशील माना जा रहा है। मामले से जुड़े घटनाक्रमों पर लगातार लोगों की नजर बनी हुई है। इंदौर और मेघालय दोनों जगह इस केस को लेकर चर्चा होती रही है। मृतक के परिजनों ने भी पहले कई बार निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की थी। जमानत रद्द करने के मामलों में अदालत केवल आरोपों की गंभीरता ही नहीं देखती, बल्कि यह भी परखती है कि क्या आरोपी के बाहर रहने से जांच, गवाहों या न्यायिक प्रक्रिया पर कोई प्रभाव पड़ सकता है। इसी आधार पर अदालत अपना निर्णय देती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच अदालत के फैसले का इंतजार बढ़ गया है। यदि हाई कोर्ट मेघालय सरकार की अपील स्वीकार कर लेता है तो सोनम रघुवंशी की जमानत निरस्त हो सकती है और उन्हें दोबारा हिरासत में जाना पड़ सकता है। वहीं यदि अदालत जिला अदालत के आदेश को सही मानती है तो उनकी जमानत बरकरार रहेगी। मामले में किसी भी तरह की अटकलों से बचने की सलाह दी जा रही है। सभी पक्ष अब उच्च न्यायालय के अंतिम आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अदालत का फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 13:10:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम की जमानत के खिलाफ परिवार हाईकोर्ट जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम को मिली जमानत के खिलाफ परिवार ने कानूनी लड़ाई तेज की, हाईकोर्ट में अपील की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/raja-raghuvanshi-murder-case-family-will-go-to-high-court/article-52383"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(73).jpg" alt=""></a><br /><p>राजा रघुवंशी मर्डर केस में  एक नया मोड़ सामने आया है। बता दें, राजा के मर्डर की मास्टरमाइंड मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल गई है जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवार ने इस फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है। राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने बताया कि वे शिलॉन्ग हाईकोर्ट में जमानत रद्द कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। इसके लिए स्थानीय वकील से संपर्क किया गया है और जरूरी दस्तावेजों पर काम चल रहा है। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है, लेकिन वे इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और न्याय के लिए आगे भी लड़ाई जारी रखेंगे।</p>
<p>इस घटनाक्रम ने एक बार फिर इस सनसनीखेज मामले को चर्चा में ला दिया है, जिसमें शादी के कुछ ही दिनों बाद पति की हत्या का आरोप पत्नी पर लगा था। अधिकारियों के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट में अपील दाखिल होने में लगभग एक सप्ताह का समय लग सकता है।</p>
<h5><strong>क्या है मामला</strong></h5>
<p>राजा रघुवंशी, जो इंदौर के एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी थे, की शादी 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद, 21 मई को दोनों हनीमून के लिए मेघालय के शिलॉन्ग पहुंचे। 23 मई को राजा अचानक लापता हो गए। करीब 10 दिन बाद पुलिस ने उनका शव एक गहरी खाई से बरामद किया, जिस पर धारदार हथियार से हमले के निशान थे।जांच के दौरान पुलिस ने सोनम सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले में यह भी सामने आया कि हत्या की साजिश पहले से रची गई थी और इसमें अन्य लोगों की भूमिका भी थी।</p>
<h5><strong>परिवार का विरोध</strong></h5>
<p>जमानत मिलने के बाद से ही राजा रघुवंशी का परिवार आक्रोश में है। राजा की मां ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले पर सवाल उठाए और कहा कि वे अपनी बहू से जवाब मांगेंगी।विपिन रघुवंशी ने बताया कि उन्होंने शिलॉन्ग के वकील से बातचीत कर ली है और सभी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। “हम कानूनी तरीके से जमानत रद्द कराने की पूरी कोशिश करेंगे,” उन्होंने कहा। परिवार का मानना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 11:10:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>मालेगांव ब्लास्ट केस में हाईकोर्ट ने ट्रायल रोका, 4 आरोपियों को राहत</title>
                                    <description><![CDATA[मालेगांव ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ठोस सबूत के अभाव में ट्रायल पर रोक हाईकोर्ट के इस फैसले ने लंबे समय से चल रहे इस संवेदनशील मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/high-court-stops-trial-in-malegaon-blast-case-relief-to/article-51901"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(62).jpg" alt=""></a><br /><p>मालेगांव ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। यह फैसला उन चार आरोपियों के लिए राहत लेकर आया है, जिन पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आरोप तय किए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के किसी भी आपराधिक मामले को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। कोर्ट ने माना कि जिस बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया था, वह बाद में वापस ले लिया गया था, ऐसे में उस पर आधारित आरोपों की वैधता पर गंभीर सवाल उठते हैं। इस आदेश के बाद फिलहाल मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई है, जिससे जांच एजेंसियों की प्रक्रिया और साक्ष्यों की गुणवत्ता पर बहस तेज हो गई है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, यह मामला 2006 के मालेगांव धमाकों से जुड़ा है, जिसमें चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। इन आरोपियों में मध्यप्रदेश के महू और देपालपुर के निवासी भी शामिल हैं।</p>
<p>राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आधार एक कथित स्वीकारोक्ति बयान को बताया था। यह बयान 2010 में सामने आया था, जिसमें कुछ लोगों की संलिप्तता का जिक्र किया गया था।हालांकि, बाद में संबंधित व्यक्ति ने अदालत में यह बयान वापस लेते हुए कहा था कि इसे दबाव में दिलवाया गया था।</p>
<h5><strong>सबूतों पर सवाल</strong></h5>
<p>सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है और न ही ऐसे ठोस साक्ष्य हैं, जो आरोपियों को सीधे तौर पर घटना से जोड़ते हों।</p>
<p>कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही आगे बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p>8 सितंबर 2006 को महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। ये धमाके धार्मिक स्थलों के पास हुए, जिससे देशभर में तनाव का माहौल बन गया था। इस घटना में 31 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।</p>
<p>शुरुआत में जांच एजेंसियों ने अलग दिशा में कार्रवाई की थी, लेकिन बाद में जांच कई बार अलग-अलग एजेंसियों को सौंपी गई। अंततः यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी के पास पहुंचा।</p>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपियों को 2013 में गिरफ्तार किया गया था और वे कई वर्षों तक जेल में रहे। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।सितंबर 2025 में विशेष अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय किए थे, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।</p>
<p>इस फैसले का असर न केवल इस मामले पर पड़ेगा, बल्कि अन्य मामलों में भी जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो सकते हैं।अब इस मामले में आगे की सुनवाई हाईकोर्ट के अगले आदेशों पर निर्भर करेगी। जांच एजेंसियों को अपने साक्ष्यों को मजबूत करने या नए सिरे से समीक्षा करने की आवश्यकता पड़ सकती है।</p>
<p>मालेगांव ब्लास्ट केस से जुड़ा यह फैसला आने वाले समय में न्यायिक प्रक्रिया और जांच प्रणाली दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 11:57:53 +0530</pubDate>
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