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                <title>Women Rights - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Women Rights RSS Feed</description>
                
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                <title>10 साल की शादी, जंजीरों में कैद और अत्याचार; पुलिस पहुंची तो मिली आजादी</title>
                                    <description><![CDATA[राजगढ़ जिले के खिलचीपुर थाना क्षेत्र में महिला ने पति पर जंजीर से बांधकर मारपीट और गर्म सरिए से दागने का आरोप लगाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/10-years-of-marriage-imprisonment-in-chains-and-torture-got/article-57568"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/khilchipur-police.jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में घरेलू हिंसा का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस से लेकर पूरे इलाके को झकझोर दिया। खिलचीपुर थाना क्षेत्र के छीपीपुरा गांव की रहने वाली 30 वर्षीय मांगीबाई तंवर 12 जून की रात गले में लोहे की जंजीर और ताला लटकाए किसी तरह थाने पहुंचीं। उनके शरीर पर चोटों के निशान थे, कमर, कूल्हे और जांघ पर जलने के घाव दिखाई दे रहे थे, जबकि पैरों के तलवे भी बुरी तरह जख्मी थे। महिला ने पुलिस को बताया कि उसके पति ने उसे घर में खंभे से जंजीर से बांध रखा था ताकि वह शिकायत करने बाहर न जा सके। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपी पति सरदार सिंह तंवर को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मांगीबाई की शादी करीब दस वर्ष पहले राजस्थान के मनोहर थाना क्षेत्र के बिरजीपुरा गांव निवासी सरदार सिंह तंवर से हुई थी। महिला का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही पति शराब पीकर उसके साथ मारपीट करने लगा था। शुरुआत में उसने परिवार बचाने की कोशिश में सब कुछ सहन किया, लेकिन समय के साथ अत्याचार बढ़ते गए। महिला के अनुसार 10 जून की दोपहर पति नशे की हालत में घर पहुंचा और खाना मांगने लगा। खाना देने में थोड़ी देर होने पर उसने गाली-गलौज शुरू कर दी और विरोध करने पर डंडे से बेरहमी से पीटा। इसके बाद कथित तौर पर महिला के गले में भारी लोहे की जंजीर डालकर उसे घर के आंगन में बने खंभे से ताला लगाकर बांध दिया गया। पीड़िता का आरोप है कि पति ने गैस चूल्हे पर लोहे का सरिया गर्म कर उसके शरीर के कई हिस्सों को दाग दिया। महिला ने यह भी बताया कि उसे करीब 24 घंटे तक न खाना दिया गया और न ही पानी। इस दौरान लगातार धमकाया गया कि यदि उसने पुलिस में शिकायत की तो अंजाम और भी बुरा होगा।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/domestic-violence.jpg" alt="Domestic Violence" width="1366" height="1273"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">पीड़िता के अनुसार जब आरोपी पंचायत बुलाने के लिए घर से बाहर गया तो उसने मौके का फायदा उठाया। पास में पड़े पत्थर से काफी देर तक ताले पर वार करने के बाद वह खंभे से खुद को छुड़ाने में सफल रही। हालांकि जंजीर उसके गले में ही लटकी रही। वह जंगल और खेतों के रास्ते पैदल निकल पड़ी, लेकिन रास्ता भटक गई। महिला का आरोप है कि रास्ते में उसका पति फिर मिल गया और उसे वापस घर ले जाकर दोबारा बांध दिया। इसके बाद रात में जब आरोपी शराब के नशे में सो गया तो उसने एक बार फिर पत्थर की मदद से ताला तोड़ा और सीधे खिलचीपुर थाने की ओर निकल गई। कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद रात करीब दस बजे वह थाने पहुंची। वहां मौजूद पुलिसकर्मी उसकी हालत देखकर हैरान रह गए। पुलिस ने सबसे पहले उसके गले से जंजीर हटवाई, भोजन और पानी उपलब्ध कराया तथा मेडिकल परीक्षण कराया। जांच में शरीर पर चोट और जलने के निशानों का परीक्षण कराया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/khilchipur-police.jpg" alt="Khilchipur Police" width="1366" height="1010"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों के अनुसार महिला के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर तत्काल कार्रवाई की गई। थाना प्रभारी कमल सिंह गेहलोत के निर्देशन में पुलिस टीम गांव पहुंची और आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास, गलत तरीके से बंधक बनाने, मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाने, आपराधिक धमकी और वैवाहिक क्रूरता सहित भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। महिला को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। मांगीबाई ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि शादी के पांच साल बाद उनका एक बच्चा हुआ था, जिसकी तीन महीने की उम्र में बीमारी के कारण मौत हो गई। इसके बाद उनकी कोई संतान नहीं हुई। महिला का आरोप है कि इसके बाद पति का व्यवहार और अधिक हिंसक हो गया तथा वह आए दिन शराब पीकर मारपीट करता था। इस बार उसने तय किया कि वह चुप नहीं रहेगी और किसी भी तरह पुलिस तक पहुंचेगी। गांव के कुछ लोगों ने भी पुलिस को बताया कि आरोपी अक्सर शराब के नशे में विवाद करता था और गाली-गलौज करता था। हालांकि पुलिस का कहना है कि गांव में फैली अन्य चर्चाओं की अलग से जांच की जाएगी और फिलहाल कार्रवाई महिला की शिकायत तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि घरेलू हिंसा के मामलों को गंभीरता से लिया जाता है और किसी भी पीड़ित को डरने की जरूरत नहीं है। यदि किसी महिला के साथ इस तरह की घटना होती है तो वह तत्काल पुलिस या महिला हेल्पलाइन से संपर्क करे। इस मामले में भी महिला के साहस और समय पर पुलिस तक पहुंचने से कार्रवाई संभव हो सकी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 00:36:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वायरल वीडियो के बाद प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा पर FIR</title>
                                    <description><![CDATA[गुरुग्राम में वायरल वीडियो के बाद कार्रवाई, महिलाओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे और वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ एफआईआर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/fir-against-pranit-more-and-himanshu-jangra-after-viral-video/article-56231"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pranit-more.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरुग्राम में आयोजित एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान महिलाओं को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर पुलिस ने स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे और वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के नोटिस के बाद की गई है। मामले ने सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक व्यापक बहस छेड़ दी है, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और महिलाओं के सम्मान के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह घटना 12 अप्रैल को गुरुग्राम के सेक्टर-24 स्थित डीएलएफ साइबर हब में आयोजित एक कॉमेडी शो के दौरान हुई थी। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों में मौजूद एक व्यक्ति द्वारा महिलाओं को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। आरोप है कि इस टिप्पणी को मंच पर मौजूद कॉमेडियन ने न केवल आगे बढ़ाया बल्कि उस पर प्रतिक्रिया देकर माहौल को और बढ़ावा दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों की हंसी और तालियों के बीच यह पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हो गया, जिसका वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताया। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इस पर आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की। बढ़ते विवाद के बीच राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए हरियाणा पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया। आयोग ने अपने नोटिस में कहा कि महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियों को मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत करना गंभीर चिंता का विषय है। महिला आयोग ने पूरे घटनाक्रम को महिलाओं की मर्यादा और सम्मान के खिलाफ बताया। आयोग के अनुसार किसी महिला के संदर्भ में की गई कथित टिप्पणी, उस पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया और पूरे माहौल को मनोरंजन के रूप में पेश करना सामाजिक दृष्टि से गलत संदेश देता है। आयोग ने मामले में कानूनी कार्रवाई करने और जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गुरुग्राम पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक राज्य पुलिस मुख्यालय से महिला आयोग का नोटिस मिलने के बाद कार्रवाई की गई। जांच के दौरान वायरल वीडियो को साक्ष्य के रूप में जब्त किया गया है। साथ ही कार्यक्रम स्थल से सीसीटीवी फुटेज भी एकत्र किए गए हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें यौन उत्पीड़न, यौन रंग वाली टिप्पणियां, अश्लील सामग्री के प्रसार और सार्वजनिक शरारत को बढ़ावा देने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करने और उसके प्रचार-प्रसार में किसकी क्या भूमिका रही। मामले के तूल पकड़ने के बाद दोनों आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है। प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा ने अपने बयान में कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था और यदि उनकी बातों से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका खेद है। हालांकि पुलिस का स्पष्ट कहना है कि सार्वजनिक माफी का कानूनी प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और जांच नियमानुसार जारी रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस विवाद का असर हिमांशु जांगड़ा के पेशेवर जीवन पर भी पड़ा है। जिस निजी कंपनी में वह कार्यरत थे, वहां से उन्हें नौकरी से हटा दिया गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कंपनी पर भी प्रतिक्रिया आई थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि कंपनी की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया के दौर में सार्वजनिक मंचों पर कही गई बातें तेजी से व्यापक दर्शकों तक पहुंचती हैं। ऐसे में किसी भी टिप्पणी के सामाजिक और कानूनी परिणाम पहले की तुलना में कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं। विशेषकर जब मामला महिलाओं की गरिमा और सम्मान से जुड़ा हो, तब कानून प्रवर्तन एजेंसियां अधिक संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करती हैं। दूसरी ओर, कुछ लोग यह भी तर्क दे रहे हैं कि कॉमेडी और व्यंग्य की दुनिया में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी महत्व है। हालांकि अधिकांश विशेषज्ञों का कहना है कि हास्य और मनोरंजन के नाम पर किसी वर्ग, समुदाय या व्यक्ति के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस ने दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं। जांच एजेंसियां वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:41:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>370 रुपये की बिरयानी वाले बयान पर बढ़ा विवाद, मुंबई पुलिस भी कूदी मैदान में</title>
                                    <description><![CDATA[कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो में की गई एक टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ी, मुंबई पुलिस ने ‘सहमति’ पर जागरूकता संदेश जारी कर विवाद को नया मोड़ दे दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/controversy-increased-over-the-statement-of-rs-370-biryani-mumbai/article-55697"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pranit-more-controversy-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कॉमेडियन प्रणित मोरे के एक स्टैंड-अप शो से जुड़ा ‘370 रुपये की बिरयानी’ वाला विवाद अब सोशल मीडिया की बहस से निकलकर आधिकारिक संस्थाओं तक पहुंच गया है। इस मामले में मुंबई पुलिस ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो क्लिप के बाद शुरू हुई चर्चा अब सहमति, महिलाओं के सम्मान और सार्वजनिक मंचों पर कही जाने वाली बातों की जिम्मेदारी जैसे बड़े मुद्दों तक पहुंच चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद की शुरुआत प्रणित मोरे के एक स्टैंड-अप शो के दौरान हुई। शो में ‘क्राउड वर्क’ सेगमेंट के दौरान दर्शकों में मौजूद वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा से बातचीत की गई थी। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने कथित तौर पर एक महिला के साथ बाहर जाने और उस पर 370 रुपये की बिरयानी खर्च करने का जिक्र किया। इसके बाद उन्होंने ऐसा बयान दिया, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने महिलाओं के प्रति अपमानजनक और सहमति की अवधारणा के खिलाफ बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई यूजर्स ने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा किसी महिला पर पैसा खर्च करने का मतलब यह नहीं होता कि उसे बदले में किसी तरह की निजी या शारीरिक अपेक्षा रखने का अधिकार मिल जाता है। आलोचकों का कहना था कि यह सोच महिलाओं को एक स्वतंत्र व्यक्ति की बजाय लेन-देन का हिस्सा मानने जैसी मानसिकता को बढ़ावा देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब मुंबई पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक जागरूकता पोस्ट साझा किया। पोस्ट में बड़े अक्षरों में ₹370 लिखा गया था, जिसमें शून्य की जगह बिरयानी की प्लेट दिखाई गई थी। इसके साथ लिखा गया था कि “₹370 में आपको बिरयानी की एक प्लेट मिलती है। हमारे लॉक-अप में ज्यादा समय बिताने पर मुफ्त खाना मिलता है।” पोस्ट के अंत में #BiryaniIsNotConsent हैशटैग का इस्तेमाल किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई पुलिस का यह संदेश सीधे तौर पर सहमति यानी ‘कंसेंट’ के महत्व को रेखांकित करने वाला माना गया। हालांकि पोस्ट में किसी व्यक्ति या घटना का नाम नहीं लिया गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे सीधे इसी विवाद से जोड़कर देखा। कुछ यूजर्स ने पुलिस के इस रचनात्मक अंदाज की सराहना की और कहा कि गंभीर सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का यह प्रभावी तरीका है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर कुछ लोगों ने मुंबई पुलिस की आलोचना भी की। उनका कहना था कि कानून-व्यवस्था संभालने वाली संस्था को सोशल मीडिया ट्रेंड्स पर इस तरह की प्रतिक्रियाओं से बचना चाहिए। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस को हर वायरल मुद्दे पर टिप्पणी करनी चाहिए। हालांकि इसके बावजूद पोस्ट को बड़ी संख्या में लोगों ने साझा किया और यह तेजी से वायरल हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया पर चल रही बहस के दौरान कई लोगों ने महिलाओं की सहमति और व्यक्तिगत अधिकारों को लेकर अपने विचार रखे। कुछ यूजर्स ने कहा कि किसी भी रिश्ते, दोस्ती, डेट या मुलाकात में सहमति सबसे महत्वपूर्ण होती है और इसे किसी आर्थिक खर्च या उपहार से नहीं जोड़ा जा सकता। कई महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने भी इस विषय पर अपनी राय व्यक्त की।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद बढ़ने के बाद कॉमेडियन प्रणित मोरे ने भी सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में स्वीकार किया कि उस समय उन्हें संबंधित टिप्पणी पर तुरंत प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह से महिलाओं का अपमान करना नहीं था और यदि किसी को ठेस पहुंची है तो इसके लिए वह खेद व्यक्त करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">माफी के बावजूद विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ। कई लोगों ने सवाल उठाया कि यदि टिप्पणी आपत्तिजनक थी तो उस क्लिप को सोशल मीडिया पर प्रमोट क्यों किया गया। कुछ इन्फ्लुएंसर्स और सोशल मीडिया हस्तियों ने भी इस मामले में अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि सार्वजनिक मंचों पर कही गई बातों के प्रभाव को समझना जरूरी है। इसी बीच कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि वीडियो वायरल होने के बाद हिमांशु जांगड़ा को उनकी नौकरी से हटा दिया गया। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर कोई विस्तृत पुष्टि सामने नहीं आई है। वहीं विवाद बढ़ने के बाद प्रणित मोरे ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी डीएक्टिवेट कर दिया, जिससे मामले को लेकर और चर्चाएं शुरू हो गईं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:19:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भरण-पोषण मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी जहां रहेगी वहीं होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी जहां वर्तमान में रह रही है, वहीं की फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण का मामला दायर करने का अधिकार रखती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-decision-of-high-court-in-maintenance-case-hearing-will/article-55091"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐसा फैसला सुनाया है, जिसका असर भविष्य में इसी तरह के कई मामलों पर पड़ सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई महिला अपने वर्तमान निवास स्थान पर रह रही है, तो उसे वहीं की सक्षम अदालत में भरण-पोषण का दावा पेश करने का अधिकार है। केवल इस आधार पर कि उसका स्थायी पता या पैतृक घर किसी दूसरे जिले में है, अदालत के अधिकार क्षेत्र को चुनौती नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ ही एक डॉक्टर पति की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के एक डॉक्टर और उनकी पत्नी से जुड़ा है। दोनों का विवाह 16 मई 2019 को हुआ था। विवाह के बाद उनके परिवार में दो बेटियों का जन्म हुआ। कुछ समय बाद पति-पत्नी के संबंधों में विवाद शुरू हो गया। पत्नी ने आरोप लगाया कि विवाह के बाद उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया। इसके अलावा उसने अपने पति पर गंभीर व्यक्तिगत आरोप भी लगाए। इन परिस्थितियों के बाद दोनों अलग-अलग रहने लगे और मामला कानूनी विवाद तक पहुंच गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पत्नी ने बिलासपुर स्थित फैमिली कोर्ट में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 के तहत भरण-पोषण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। अपने आवेदन में उसने कहा कि उसके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं है और दोनों नाबालिग बेटियां उसकी देखरेख में रह रही हैं। उसने अदालत से अपने लिए एक लाख रुपए प्रतिमाह तथा दोनों बेटियों के लिए 20-20 हजार रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण राशि देने की मांग की। इस प्रकार कुल 1 लाख 40 हजार रुपए मासिक भरण-पोषण की मांग अदालत के समक्ष रखी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर डॉक्टर पति ने इस आवेदन का विरोध किया। उन्होंने फैमिली कोर्ट में क्षेत्राधिकार को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि विवाह सारंगढ़ में हुआ था और पत्नी का स्थायी निवास भी वहीं है। इसलिए बिलासपुर की फैमिली कोर्ट को इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है। पति ने यह भी तर्क दिया कि आवेदन दाखिल किए जाने के समय दोनों बच्चियां सारंगढ़ में पढ़ाई कर रही थीं और केवल किरायानामा प्रस्तुत कर बिलासपुर में मामला दर्ज कराया गया है। उन्होंने स्वयं को पोलियो से प्रभावित दिव्यांग बताते हुए यह भी कहा कि पत्नी उन्हें परेशान करने की नीयत से बिलासपुर में मामला चला रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पत्नी ने इन आरोपों का अदालत में विरोध किया। उसने कहा कि वह वर्तमान में बिलासपुर जिले के लगरा क्षेत्र में किराए के मकान में रह रही है। इसके समर्थन में उसने आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। पत्नी ने यह भी बताया कि उसकी दोनों बेटियां अब बिलासपुर के एक निजी विद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं और उनका पूरा जीवन वर्तमान में बिलासपुर से जुड़ा हुआ है। उसके अनुसार उसने किसी भी प्रकार का फर्जी दस्तावेज अदालत के सामने प्रस्तुत नहीं किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पति की क्षेत्राधिकार संबंधी आपत्ति को खारिज कर दिया था। इसके बाद डॉक्टर पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बीडी गुरु ने पूरे रिकॉर्ड और दस्तावेजों का अवलोकन किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी ने स्पष्ट रूप से बिलासपुर के लगरा क्षेत्र को अपना वर्तमान निवास बताया है और उसके समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज भी पेश किए हैं। अदालत ने माना कि यदि कोई व्यक्ति किसी स्थान पर वास्तविक रूप से निवास कर रहा है, तो उसे उस क्षेत्र की सक्षम अदालत में कानूनी राहत मांगने का अधिकार है। केवल इस वजह से कि उसका स्थायी पता किसी अन्य जिले में है, वर्तमान निवास वाले क्षेत्र की अदालत का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता। अदालत ने यह भी कहा कि फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश में कोई कानूनी त्रुटि या प्रक्रिया संबंधी खामी नजर नहीं आती। इसलिए हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने डॉक्टर पति की पुनरीक्षण याचिका प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दी और फैमिली कोर्ट की कार्यवाही को जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह फैसला महिलाओं और बच्चों से जुड़े भरण-पोषण मामलों में महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है। कई बार पति-पत्नी अलग-अलग स्थानों पर रहने लगते हैं और क्षेत्राधिकार को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाता है। ऐसे मामलों में हाईकोर्ट की यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि वर्तमान निवास स्थान भी न्यायिक अधिकार क्षेत्र तय करने का महत्वपूर्ण आधार हो सकता है। इस फैसले के बाद बिलासपुर फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। वहीं यह आदेश उन महिलाओं के लिए भी राहत का संदेश माना जा रहा है जो अलग रहने की स्थिति में अपने वर्तमान निवास स्थान से न्याय पाने की कोशिश करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:13:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा मनगवां में दूषित पानी संकट, बदबूदार सप्लाई से लोग परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के मनगवां में गंदा पानी, बच्चों में बीमारियों की शिकायत, जांच शुरू नलों से आ रहा बदबूदार पानी अब स्वास्थ्य संकट का रूप लेता दिख रहा है। स्थानीय लोग लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान की मांग कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/contaminated-water-crisis-in-rewa-mangawan-people-troubled-by-smelly/article-51927"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rewa-news-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्यप्रदेश के रीवा जिले के मनगवां क्षेत्र में इन दिनों पेयजल संकट गहराता जा रहा है। आज की ताज़ा ख़बरें बताती हैं कि पिछले 3 से 4 दिनों से यहां के कई वार्डों में नलों से पीला, मटमैला और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि पानी में कीचड़ जैसे कण भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे इसका उपयोग पीने के साथ-साथ घरेलू कामों में भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति इंदौर के भागीरथपुरा में सामने आए जल संकट जैसी है। दूषित पानी के कारण खासतौर पर बच्चों में पेट दर्द और उल्टी जैसी स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने लगी हैं, जिससे क्षेत्र में चिंता का माहौल है।</p>
<p>स्थानीय निवासियों के अनुसार, जल प्रदाय विभाग को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन समस्या का समाधान समय पर नहीं हुआ। मजबूरी में कई परिवार निजी टैंकरों या अन्य स्रोतों से पानी खरीदने को विवश हैं। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।</p>
<h5><strong>स्वास्थ्य पर असर</strong></h5>
<p>मनगवां के विभिन्न वार्डों में रह रहे लोगों ने बताया कि पानी की दुर्गंध इतनी तेज है कि खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है। कई घरों में छोटे बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और अन्य संक्रमण की शिकायत हो रही है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है, जिससे स्वास्थ्य विभाग पर भी दबाव बढ़ेगा।</p>
<h5><strong>जांच और कार्रवाई</strong></h5>
<p>शिकायतों के बढ़ते दबाव के बाद नगर परिषद की टीम ने मौके पर पहुंचकर पाइपलाइन की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, पाइपलाइन में लीकेज या बाहरी गंदगी के प्रवेश की संभावना को देखते हुए निरीक्षण किया जा रहा है।</p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि समस्या की पहचान होते ही मरम्मत कार्य किया जाएगा और जल सप्लाई को सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p>पृष्ठभूमि के तौर पर, स्थानीय निवासियों का कहना है कि गर्मियों में हर साल इस तरह की समस्या सामने आती है। पुराने पाइपलाइन नेटवर्क और घटते जलस्तर के कारण स्थिति और बिगड़ जाती है। इस बार समस्या अधिक गंभीर बताई जा रही है।</p>
<p>आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन कितनी तेजी से समस्या का स्थायी समाधान करता है। फिलहाल स्थानीय लोग साफ पेयजल की मांग कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द राहत मिलेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:31:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सबरीमाला केस सुनवाई: SC में ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ पर टिप्पणी</title>
                                    <description><![CDATA[सबरीमाला केस सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा- बिना ठोस स्रोत जानकारी स्वीकार नहींसुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान टिप्पणियों ने बहस को नया मोड़ दे दिया। धार्मिक परंपरा बनाम संवैधानिक अधिकार पर फिर से गहन चर्चा तेज हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/comment-on-whatsapp-university-in-sabarimala-case-hearing-sc/article-51928"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/sabarimala-case-hearing.jpg" alt=""></a><br /><p>सबरीमाला केस सुनवाई के दौरान गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण टिप्पणियां सामने आईं, जब जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने स्पष्ट कहा कि “व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी” से मिली जानकारी को अदालत स्वीकार नहीं कर सकती। यह टिप्पणी उस समय आई, जब दलीलों के दौरान विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी को स्वीकार करने पर बहस चल रही थी। अदालत ने यह भी साफ किया कि निजी लेख या विचार, जैसे कि किसी नेता का लेख, कानूनी आधार नहीं बन सकते।</p>
<p>सबरीमाला केस सुनवाई इस समय देश में धार्मिक स्वतंत्रता और लैंगिक समानता से जुड़े बड़े संवैधानिक प्रश्नों के केंद्र में है। 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के मंदिर प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नौ जजों की संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि किसी भी धार्मिक प्रथा की वैधता का परीक्षण ठोस सबूत और संवैधानिक कसौटियों के आधार पर ही किया जाएगा।</p>
<h5><strong>दलीलों में टकराव</strong></h5>
<p>सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने तर्क दिया कि ज्ञान और जानकारी किसी भी स्रोत से मिले, उसे खारिज नहीं किया जाना चाहिए। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत को प्रमाणिक और सत्यापित स्रोतों पर ही भरोसा करना होगा।</p>
<p>इसी दौरान चीफ जस्टिस ने भी स्पष्ट किया कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति का लेख, चाहे वह कितना ही प्रतिष्ठित क्यों न हो, व्यक्तिगत राय ही माना जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, अदालत का यह रुख इस बात को रेखांकित करता है कि न्यायिक प्रक्रिया में केवल प्रमाणिक और कानूनी रूप से स्वीकार्य सामग्री ही अहम होती है।</p>
<h5><strong>संवैधानिक बहस</strong></h5>
<p>धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार को लेकर सुनवाई में अनुच्छेद 25 और 26 की व्याख्या पर भी गहन चर्चा हुई। अदालत ने पूछा कि किसी प्रथा को “आवश्यक धार्मिक प्रथा” मानने का आधार क्या होना चाहिए।</p>
<p>एडवोकेट्स ने अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि हर धार्मिक प्रथा को अनिवार्य नहीं माना जा सकता, खासकर जब वह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य के खिलाफ हो। रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत इस बात पर विचार कर रही है कि क्या धार्मिक परंपराओं के नाम पर भेदभाव को वैध ठहराया जा सकता है।</p>
<h5><strong>क्या है विवाद</strong></h5>
<p>सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी, लेकिन इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं।</p>
<p>इसके बाद मामला बड़ी संविधान पीठ को सौंपा गया, जहां अब व्यापक स्तर पर यह तय किया जा रहा है कि धार्मिक संस्थाओं के अधिकार और व्यक्तिगत मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार ने पहले भी अपनी दलीलों में कहा है कि धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं, याचिकाकर्ताओं का पक्ष है कि संविधान के तहत समानता और गैर-भेदभाव का अधिकार सर्वोपरि है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, अदालत इस पूरे मामले को केवल एक मंदिर विवाद के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक संवैधानिक सिद्धांतों के संदर्भ में देख रही है।</p>
<p>यह मामला केवल सबरीमाला तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के अन्य धार्मिक स्थलों पर लागू हो सकता है। यदि अदालत स्पष्ट दिशा-निर्देश देती है, तो यह कई परंपराओं और व्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है।</p>
<p>आगे की सुनवाई में विभिन्न पक्ष अपनी दलीलें जारी रखेंगे और अदालत सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अंतिम फैसला सुनाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:17:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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