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                <title>Online Scam - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Online Scam RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बीमा रिफंड के नाम पर 1.60 करोड़ की साइबर ठगी, दिल्ली से तीन आरोपी गिरफ्तार; नाइजीरियन नेटवर्क से जुड़े तार</title>
                                    <description><![CDATA[खुद को बीमा लोकपाल अधिकारी बताकर पीड़ित से कई किश्तों में रकम वसूली, बैंक खातों के जरिए संचालित हो रहा था अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क; दुर्ग पुलिस ने मोबाइल, पासबुक और चेकबुक समेत अहम साक्ष्य किए जब्त।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cyber-fraud-of-rs-160-crore-in-the-name-of/article-57787"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/maharashtra-government-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी कर ली गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का इस्तेमाल एक नाइजीरियन साइबर नेटवर्क कर रहा था, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन-देन किए गए।</p>
<p>दुर्ग रेंज साइबर थाना में दर्ज इस मामले की जांच कई दिनों से चल रही थी। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने खुद को बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) का अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि उसकी पुरानी बीमा पॉलिसी का रिफंड मंजूर हो गया है और राशि प्राप्त करने के लिए कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसी बहाने पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में कई बार रकम जमा कराई गई।</p>
<p>पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि जमा की गई राशि प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस कर दी जाएगी और बीमा क्लेम भी जारी हो जाएगा। लेकिन हर बार नई वजह बताकर अतिरिक्त रकम मांगी जाती रही। इस तरह आरोपी लगातार पीड़ित को झांसे में रखते हुए उससे कुल करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी करने में सफल रहे।</p>
<p>जब लंबे समय तक न तो रिफंड मिला और न ही कोई भुगतान हुआ, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने दुर्ग रेंज साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और बैंक खातों, मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल लेन-देन का विश्लेषण किया।</p>
<p>जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले एक बैंक खाताधारक की पहचान की, जिसके खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई थी। उससे पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिनके आधार पर पुलिस की विशेष टीम दिल्ली रवाना हुई। वहां से मनमीत सिंह, ईशांत माहे उर्फ ईशु और अमनदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p>पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने नाम से बैंक खाते खुलवाए थे और पैसों के लालच में इन्हें साइबर ठगों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था। पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए ठगी की रकम अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर की जाती थी, ताकि वास्तविक मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।</p>
<p>जांच में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क का संचालन एक नाइजीरियन साइबर गिरोह द्वारा किया जा रहा था। यही गिरोह बैंक खातों का उपयोग कर देशभर में लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के प्रमाण भी मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में कई साइबर अपराधों में शामिल हो सकता है।</p>
<p>दिल्ली से गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को 1 जुलाई को हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें तीस हजारी कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दुर्ग लाया गया, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा ठगी की रकम आखिर किन-किन खातों तक पहुंची।</p>
<p>तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, छह बैंक पासबुक, चार चेकबुक और कई सिम कार्ड जब्त किए हैं। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। साथ ही यह भी जानकारी मिली है कि अलग-अलग राज्यों में इन आरोपियों के खिलाफ साइबर ठगी से जुड़े मामले दर्ज हैं।</p>
<p>एएसपी सिटी सुखनंदन राठौर ने बताया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाते थे। पहले वे बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का भरोसा दिलाते, फिर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, दस्तावेज सत्यापन, बीमा क्लियरेंस और अन्य शुल्क के नाम पर किस्तों में रकम जमा कराते थे। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास होता, तब तक रकम कई बैंक खातों के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को धोखा देने का प्रयास कर रहे हैं। बीमा रिफंड, केवाईसी अपडेट, निवेश योजना, लॉटरी, इनाम और सरकारी योजना के नाम पर आने वाले कॉल, मैसेज या ईमेल पर बिना पुष्टि किए भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।</p>
<p>दुर्ग पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में पैसे जमा न करें और अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराए या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से सूचना दे। समय पर शिकायत दर्ज होने से ठगी की गई रकम को रोकने या रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ZIP फाइल खोलते ही फोन हो सकता है हैक, 'बॉस फ्रॉड' से बढ़ा साइबर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[सीईओ या कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी बनकर भेजे जा रहे फर्जी मैसेज और ZIP फाइलों के जरिए साइबर अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। गृह मंत्रालय और साइबर विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/phone-can-be-hacked-as-soon-as-zip-file-is/article-57430"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/boss-zip-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अब अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया है, जिसे ‘बॉस ZIP फ्रॉड’ या ‘CEO इम्पर्सनेशन स्कैम’ कहा जा रहा है। इस साइबर ठगी में अपराधी किसी कंपनी के सीईओ, डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करते हैं और कर्मचारियों को व्हाट्सएप, ई-मेल या दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संदेश भेजते हैं। इन संदेशों के साथ एक ZIP फाइल भी भेजी जाती है, जिसे जरूरी दस्तावेज, सिक्योरिटी अपडेट या तत्काल कार्रवाई से जुड़ी फाइल बताकर डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही कर्मचारी इस फाइल को डाउनलोड या खोलता है, उसका मोबाइल या सिस्टम मैलवेयर की चपेट में आ सकता है। इसके बाद साइबर ठग डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। गृह मंत्रालय ने भी लोगों को इस तरह के साइबर हमलों से सतर्क रहने की सलाह दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले 30 महीनों के दौरान केवल छत्तीसगढ़ में ही साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से करीब 791 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने तौर-तरीकों में बदलाव किया है। पहले जहां फर्जी कॉल और ओटीपी फ्रॉड अधिक देखने को मिलते थे, वहीं अब सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को मनोवैज्ञानिक दबाव में लाकर उनसे गलत कदम उठवाए जा रहे हैं। अपराधी अक्सर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला बिना सोचे-समझे ZIP फाइल डाउनलोड कर ले। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन ZIP फाइलों के अंदर कई बार EXE, DLL या अन्य हानिकारक फाइलें छिपी होती हैं। जैसे ही ऐसी फाइल सक्रिय होती है, डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इसके बाद अपराधी मोबाइल या कंप्यूटर की कई जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में बैंकिंग ऐप, सेव किए गए पासवर्ड, मैसेज, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी भी खतरे में पड़ सकती है। कुछ मामलों में अपराधी डिवाइस का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते हैं और उपयोगकर्ता को इसकी भनक तक नहीं लगती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस तरह की ठगी का एक और खतरनाक पहलू यह है कि साइबर अपराधी मोबाइल में सेव संपर्कों के साथ भी छेड़छाड़ कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कई मामलों में असली अधिकारी या बॉस का नंबर हटाकर ठग अपना नंबर सेव कर देते हैं। इसके बाद कर्मचारी को लगता है कि वह अपने वरिष्ठ अधिकारी से ही बात कर रहा है। फिर तत्काल भुगतान, गोपनीय दस्तावेज भेजने या किसी खाते में रकम ट्रांसफर करने जैसे निर्देश दिए जाते हैं। जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाकर अपराधी बड़ी रकम की ठगी कर लेते हैं।  किसी भी अनजान ZIP फाइल, EXE फाइल या DLL फाइल को बिना जांचे डाउनलोड नहीं करना चाहिए। यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से अचानक कोई संदिग्ध संदेश आए और उसमें तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाए तो पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है। फोन कॉल, वीडियो कॉल या सीधे संबंधित अधिकारी से संपर्क करके जानकारी की पुष्टि की जा सकती है। केवल व्हाट्सएप मैसेज या ई-मेल के आधार पर कोई आर्थिक लेनदेन करना या फाइल डाउनलोड करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा अपडेटेड सुरक्षा प्रणाली का उपयोग किया जाए। व्हाट्सएप सहित अन्य जरूरी ऐप्स में टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय रखना चाहिए। मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और समय-समय पर उन्हें बदलते रहें। किसी भी अज्ञात लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करने से पहले उसके स्रोत की जांच जरूर करें। यदि कंपनी में काम करते हैं तो साइबर सुरक्षा से जुड़े आंतरिक दिशा-निर्देशों का पालन करना भी आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर अपराधों पर कार्रवाई के लिए पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। रायपुर पुलिस ने हाल ही में 101 म्यूल अकाउंट होल्डर्स को गिरफ्तार किया था। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में करीब 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लिए किया गया था। इसके अलावा पुलिस ने ऐसे गिरोह का भी खुलासा किया, जो अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहा था। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस लगातार संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने और समय रहते पीड़ितों की रकम रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन बढ़ते मामलों के कारण चुनौती भी लगातार बढ़ रही है। अगर कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे समय गंवाए बिना अपने बैंक और यूपीआई सेवा प्रदाता को सूचना देनी चाहिए ताकि लेनदेन रोका जा सके। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत संपर्क करना चाहिए और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। स्क्रीनशॉट, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना भी जांच में मददगार साबित होता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रायगढ़ में एल्युमिनियम व्यापारी से 50 हजार की ठगी, सस्ता माल देने का झांसा देकर आरोपी फरार</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर की फर्जी फर्म बताकर लिया ऑर्डर, एडवांस राशि लेने के बाद न माल पहुंचाया और न लौटाए पैसे, लैलूंगा थाने में मामला दर्ज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-raigarh-the-accused-cheated-an-aluminum-trader-of-rs/article-56396"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एल्युमिनियम कारोबारी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। लैलूंगा थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यापारी से आरोपी ने खुद को रायपुर का एल्युमिनियम सप्लायर बताकर 50 हजार रुपए की ठगी कर ली। बताया जा रहा है कि आरोपी ने बाजार से कम कीमत पर एल्युमिनियम सेक्शन उपलब्ध कराने का दावा किया था। सस्ते दाम और जल्दी डिलीवरी का भरोसा देकर उसने व्यापारी से ऑर्डर लिया और एडवांस भुगतान हासिल कर लिया। रकम मिलने के बाद आरोपी ने संपर्क बंद कर दिया। मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांधी नगर वार्ड क्रमांक 7 निवासी विजय राणा एल्युमिनियम सेक्शन और ग्लास का कारोबार करते हैं। उनकी दुकान विजय एल्युमिनियम एंड ग्लास शॉप के नाम से संचालित होती है। 29 मई को उनके मोबाइल पर एक कॉल आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को एल्युमिनियम सेक्शन का व्यापारी बताते हुए अपना नाम मुकेश शर्मा बताया। उसने दावा किया कि उसकी फर्म रायपुर के भनपुरी स्थित बंजारी माता मंदिर के पास संचालित होती है और वह लंबे समय से एल्युमिनियम व्यापार से जुड़ा हुआ है। बातचीत के दौरान आरोपी ने बाजार की तुलना में कम कीमत पर माल उपलब्ध कराने की बात कही। व्यापारी को सौदा लाभदायक लगा और दोनों के बीच माल सप्लाई को लेकर चर्चा आगे बढ़ी। बताया गया कि आरोपी ने पांच बंडल एल्युमिनियम सेक्शन का ऑर्डर बुक किया, जिसकी कुल कीमत 1 लाख 23 हजार 843 रुपए तय हुई। सौदा तय होने के बाद आरोपी ने भुगतान के लिए एक क्यूआर कोड और मोबाइल नंबर भेजा। यह क्यूआर कोड शिवम कुमार नाम के व्यक्ति के नाम पर बताया गया। आरोपी ने माल भेजने से पहले 50 हजार रुपए एडवांस जमा करने की मांग की। कारोबारी ने भरोसा करते हुए उसी दिन बताए गए खाते में ऑनलाइन माध्यम से 50 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। आरोपी ने कहा कि दो दिनों के भीतर पूरा माल निर्धारित पते पर पहुंच जाएगा और बाकी भुगतान डिलीवरी के समय लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि तय समय गुजरने के बाद भी सामान नहीं पहुंचा। शुरुआत में व्यापारी ने सोचा कि परिवहन में देरी हो सकती है, लेकिन जब लगातार दो दिन और बीत गए तो उन्हें शक होने लगा। उन्होंने आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मोबाइल नंबर पर बात नहीं हो सकी। कई बार कॉल करने और संदेश भेजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इस बीच व्यापारी ने अपने स्तर पर आरोपी और उसकी बताई गई फर्म के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि जिस नाम और पते का उपयोग कर सौदा किया गया था, वह संदिग्ध है। कथित फर्म का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला और व्यापारी को एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद विजय राणा ने पूरे मामले की शिकायत लैलूंगा थाना पहुंचकर दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने भुगतान की रसीद, मोबाइल नंबर और अन्य उपलब्ध जानकारी पुलिस को सौंपी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार ऑनलाइन लेनदेन और मोबाइल नंबर से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। संबंधित बैंक खातों और डिजिटल भुगतान की जानकारी भी खंगाली जा रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके।पुलिस का कहना है कि वर्तमान समय में व्यापारियों को इस तरह के फर्जी सौदों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। कई मामलों में आरोपी खुद को बड़े सप्लायर या प्रतिष्ठित कारोबारी बताकर कम कीमत का लालच देते हैं और एडवांस राशि लेकर गायब हो जाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी नए सप्लायर की पहचान, फर्म का पंजीकरण और व्यवसायिक रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है। केवल मोबाइल पर हुई बातचीत या सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर आर्थिक लेनदेन करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:12:44 +0530</pubDate>
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                <title>दुर्ग में साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ा एक्शन, 6 आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेन-देन, 30 संदिग्ध खाताधारकों की जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-action-on-cyber-fraud-network-in-durg-6-accused/article-56298"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/durg-cyber-fraud-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुर्ग जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उतई पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने ऐसे छह लोगों को गिरफ्तार किया है जो कथित तौर पर साइबर ठगी से जुड़े पैसों के लेन-देन के लिए अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता था। मामले का खुलासा तब हुआ जब भारत सरकार के गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से कुछ संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी स्थानीय पुलिस को मिली। इसके बाद जांच शुरू की गई और धीरे-धीरे एक ऐसे नेटवर्क का पता चला, जो लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान उतई क्षेत्र में संचालित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के कुछ खातों को चिन्हित किया गया। इन खातों के लेन-देन की पड़ताल करने पर कई संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। बताया जा रहा है कि खातों में बड़ी मात्रा में ऐसी रकम जमा की गई थी, जिसका संबंध साइबर ठगी के मामलों से था। खाते में पैसा आने के बाद उसे तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या फिर नकद निकाल लिया जाता था। साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अवैध धन को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है। पुलिस ने जांच के आधार पर इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में चिह्नित किया और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 2024 से लेकर 2026 तक इन खातों में लगातार संदिग्ध ट्रांजेक्शन होती रही। बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों के विश्लेषण के बाद पुलिस को यह आशंका हुई कि यह कोई सामान्य बैंकिंग गतिविधि नहीं बल्कि संगठित तरीके से चलाया जा रहा नेटवर्क है। अधिकारियों ने बैंकिंग दस्तावेज, खातों की केवाईसी जानकारी और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच की। इसके आधार पर छह खाताधारकों की पहचान की गई, जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम कार्ड अन्य लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दिए थे। पुलिस के अनुसार आरोपी इसके बदले आर्थिक लाभ प्राप्त करते थे। उन्हें खाते उपलब्ध कराने के एवज में कुछ राशि दी जाती थी। साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों या शहरों में की गई ऑनलाइन ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए करते थे। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधियों के लिए ऐसे खाते बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके जरिए ठगी के पैसों का स्रोत और अंतिम गंतव्य छिपाने में मदद मिलती है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई को साइबर अपराध नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भूपेन्द्र हिरवानी (23), नवलेश्वर पाटले (35), पवन सिंह (32), आकाश चंद्राकर (37), अर्पण शुक्ला (23) और मुकेश सिंह (23) शामिल हैं। सभी आरोपी भिलाई के सेक्टर-7 क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम कार्ड और बैंक खातों से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। जब्त सामग्री की फोरेंसिक और तकनीकी जांच भी कराई जा रही है ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआती चरण है और मामले की जांच अभी जारी है। अब तक कुल 30 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन खातों का इस्तेमाल करने वाले मुख्य साइबर अपराधी कौन हैं और उनका नेटवर्क किन राज्यों तक फैला हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। साइबर अपराध लगातार बदलते स्वरूप में सामने आ रहे हैं और अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील कर रही है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक या सिम कार्ड किसी अन्य के उपयोग के लिए नहीं देना चाहिए। ऐसा करना न केवल वित्तीय जोखिम पैदा करता है बल्कि व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:06:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गूगल अपडेट के नाम पर ठगी, दुर्ग के ठेकेदार के खाते से उड़े 1.99 लाख रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल हैक कर साइबर अपराधियों ने तीन बार में निकाली रकम, पुलिस जांच में जुटी
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-the-name-of-google-update-rs-199-lakh-was/article-54454"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/durg-cyber-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार साइबर अपराधियों ने ‘गूगल अपडेट’ के नाम पर एक ठेकेदार का मोबाइल फोन हैक कर उसके बैंक खाते से करीब दो लाख रुपए पार कर दिए। मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ठगों ने एक फर्जी अपडेट मैसेज भेजकर मोबाइल का एक्सेस हासिल किया और फिर बैंक खाते से तीन बार में रकम निकाल ली।</p>
<p dir="ltr">जानकारी के अनुसार शंकर नगर दुर्ग निवासी महेंद्र कुमार देशलहरा ठेकेदारी का काम करते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 22 मई 2026 की सुबह उनके मोबाइल पर गूगल अपडेट से जुड़ा एक मैसेज आया था। सामान्य सिस्टम अपडेट समझकर उन्होंने उस लिंक को खोल दिया। बताया जा रहा है कि लिंक ओपन करते ही मोबाइल की स्क्रीन कुछ देर के लिए फ्रीज हो गई। इसके बाद फोन असामान्य तरीके से काम करने लगा। कई ऐप अपने आप बंद होने लगे और मोबाइल बार-बार हैंग हो रहा था।</p>
<p dir="ltr">महेंद्र कुमार ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद फोन में तकनीकी दिक्कत आ गई है, लेकिन थोड़ी ही देर बाद बैंक खाते से रकम कटने के मैसेज आने लगे। सुबह करीब 11 बजकर 30 मिनट पर उनके बंधन बैंक खाते से 94 हजार 999 रुपए ट्रांसफर हो गए। इसके एक मिनट बाद ही 5 हजार 1 रुपए फिर खाते से निकल गए। लगातार दो ट्रांजेक्शन होने के बाद वे कुछ समझ पाते, उससे पहले अगले दिन 23 मई को शाम करीब 4 बजे फिर 99 हजार 500 रुपए खाते से निकाल लिए गए। इस तरह कुल 1 लाख 99 हजार 500 रुपए की ठगी हो गई।</p>
<p dir="ltr">पीड़ित का कहना है कि ठगी के दौरान उनका मोबाइल पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुका था। फोन में कोई भी कमांड सही तरीके से काम नहीं कर रही थी। बैंकिंग ऐप खुल नहीं रहा था और कई सिस्टम अपने आप एक्टिव और बंद हो रहे थे। ऐसा कहा जा रहा है कि साइबर ठगों ने किसी रिमोट एक्सेस एप या मालवेयर के जरिए मोबाइल का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था। इसी का फायदा उठाकर बैंक खाते तक पहुंच बनाई गई।</p>
<p dir="ltr">लगातार रकम कटने के बाद महेंद्र कुमार ने सबसे पहले बैंक से संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। बाद में मोहन नगर थाना पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत दी। शिकायत के साथ बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल, साइबर कंप्लेन की कॉपी और मोबाइल से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे गए हैं। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है।</p>
<p dir="ltr">पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में इस तरह के मामलों में तेजी आई है। साइबर अपराधी अब लोगों को सीधे फोन कर ठगी करने के बजाय मोबाइल हैकिंग के जरिए वारदात को अंजाम दे रहे हैं। फर्जी अपडेट लिंक, APK फाइल और स्क्रीन शेयरिंग ऐप इसके लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एक बार अगर यूजर गलती से लिंक खोल देता है तो मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप, पासवर्ड, OTP और निजी जानकारी तक ठगों की पहुंच बन जाती है।</p>
<p dir="ltr">कई लोग फोन में आने वाले अपडेट मैसेज को असली समझकर तुरंत क्लिक कर देते हैं। यही जल्दबाजी भारी पड़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी अनजान लिंक, एप या अपडेट को बिना जांचे-परखे डाउनलोड नहीं करना चाहिए। खासकर बैंकिंग से जुड़े काम करने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। अगर फोन अचानक हैंग होने लगे, अपने आप ऐप खुलने लगें या बैंकिंग गतिविधियां संदिग्ध दिखें तो तुरंत इंटरनेट बंद कर बैंक और साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए।</p>
<p dir="ltr">दुर्ग पुलिस अब ट्रांजेक्शन डिटेल और मोबाइल डेटा के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर सेल की टीम बैंकिंग ट्रेल और जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जानकारी जुटा रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि रकम अलग-अलग खातों में भेजी गई है ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो सके। पुलिस का कहना है कि मामले की तकनीकी जांच जारी है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 11:41:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंस्टाग्राम पर लोन एप डाउनलोड करना पड़ा भारी, व्यापारी से 1.36 लाख की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर में ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग का मामला, फोटो वायरल करने की धमकी देकर वसूले रुपए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/had-to-download-loan-app-on-instagram-cheated-businessman-of/article-54392"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/indore-cyber-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर में ऑनलाइन लोन एप के जरिए ब्लैकमेलिंग और साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है। शहर के एक फुटकर व्यापारी ने इंस्टाग्राम पर दिखाई दिए लोन एप के विज्ञापन पर भरोसा कर छोटा लोन लिया था, लेकिन बाद में यही फैसला उसके लिए बड़ी परेशानी बन गया। आरोपियों ने व्यापारी को फोटो और निजी जानकारी वायरल करने की धमकी देकर करीब 1 लाख 36 हजार रुपए वसूल लिए। मामले में बाणगंगा थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक पीड़ित राहुल गिरी बुधवार को शिकायत लेकर थाने पहुंचे थे। राहुल ने बताया कि फरवरी महीने में उन्हें निजी जरूरत के लिए पैसों की आवश्यकता थी। इसी दौरान इंस्टाग्राम चलाते समय उन्हें “स्वीट मनी” नाम के एक ऑनलाइन लोन एप का विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में आसान प्रक्रिया और तुरंत लोन देने का दावा किया गया था। जरूरत के चलते उन्होंने लिंक पर क्लिक कर एप डाउनलोड कर ली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल ने पुलिस को बताया कि एप डाउनलोड करने के बाद उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मांगी गई। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह सामान्य प्रक्रिया है, इसलिए उन्होंने सभी दस्तावेज और जरूरी जानकारी साझा कर दी। इसके बाद कुछ ही समय में उनके खाते में करीब 4 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। शुरुआत में उन्हें लगा कि प्रक्रिया सही है और उन्हें राहत मिल गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लेकिन कुछ दिनों बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वॉट्सएप कॉल और मैसेज आने लगे। कॉल करने वाले लोग खुद को लोन कंपनी का कर्मचारी बताते थे। उन्होंने राहुल से कहा कि अब उन्हें लोन की रकम ब्याज सहित तुरंत लौटानी होगी। राहुल के मुताबिक आरोपियों ने कुछ ही दिनों में रकम कई गुना बढ़ाकर मांगना शुरू कर दिया। जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें धमकियां मिलने लगीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल ने बताया कि आरोपियों ने कहा कि उनके मोबाइल फोन का डाटा और फोटो उनके पास मौजूद है। पैसे नहीं देने पर फोटो एडिट कर रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों को भेजने की धमकी दी गई। लगातार आने वाले कॉल और धमकियों से राहुल घबरा गए। बदनामी के डर से उन्होंने आरोपियों द्वारा बताई गई अलग-अलग यूपीआई आईडी पर रुपए ट्रांसफर करना शुरू कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीड़ित के मुताबिक आरोपियों ने धीरे-धीरे उनसे करीब 1 लाख 36 हजार रुपए वसूल लिए। इसके बावजूद ब्लैकमेलिंग बंद नहीं हुई। आरोपी लगातार और पैसों की मांग करते रहे। जब राहुल ने आगे रकम देने से मना किया तो आरोपियों ने उनके रिश्तेदारों और परिचितों को एडिट किए गए फोटो भेज दिए। इससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लगातार धमकियों और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर राहुल ने बाद में अपना मोबाइल फोन भी फॉर्मेट कर दिया। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत क्राइम ब्रांच की साइबर यूनिट में की। शुरुआती जांच के बाद मामला बाणगंगा थाना पुलिस को भेजा गया, जहां एफआईआर दर्ज कर ली गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार पीड़ित ने आधा दर्जन से ज्यादा यूपीआई आईडी और कई मोबाइल नंबरों की जानकारी जांच एजेंसियों को दी है। इन्हीं खातों और नंबरों के जरिए रकम ट्रांसफर करवाई गई थी। साइबर टीम अब इन यूपीआई खातों और बैंक डिटेल्स के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पुलिस का कहना है कि कई मामलों में ऐसे गिरोह दूसरे राज्यों से ऑपरेट करते हैं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खोलते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ समय में इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी लोन एप के विज्ञापन तेजी से बढ़े हैं। ये एप कम समय में आसान लोन देने का लालच देकर लोगों से निजी जानकारी हासिल करते हैं। एप डाउनलोड करते ही कई बार मोबाइल का डाटा, कॉन्टैक्ट लिस्ट और फोटो तक एक्सेस कर लिया जाता है। बाद में इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लोन एप या लिंक पर भरोसा न करें। केवल रिजर्व बैंक से मान्यता प्राप्त और विश्वसनीय संस्थाओं से ही ऑनलाइन लोन लें। साथ ही मोबाइल एप डाउनलोड करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को इस तरह की धमकी मिलती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इंदौर में सामने आया यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन लोन एप के बढ़ते खतरे को दिखाता है। छोटी रकम के लालच में लोग निजी जानकारी साझा कर देते हैं और बाद में साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं। पुलिस अब मामले में तकनीकी जांच कर रही है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने का दावा कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 11:43:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>दुर्ग डिजिटल अरेस्ट ठगी: बुजुर्ग महिला से 7 लाख की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[दुर्ग डिजिटल अरेस्ट  ठगी में फर्जी क्राइम ब्रांच अफसर बनकर वीडियो कॉल से डराया, कई दिन तक दबाव डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का नया तरीका सामने आया है।बुजुर्ग महिला को लगातार डराकर लाखों रुपए ठग लिए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/durg-digital-arrest-fraud-elderly-woman-cheated-of-rs-7/article-51932"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(32).jpg" alt=""></a><br /><p>दुर्ग डिजिटल अरेस्ट ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें भिलाई की 62 वर्षीय महिला से करीब 7 लाख रुपए की साइबर ठगी की गई। आरोपियों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए महिला को कई दिनों तक मानसिक दबाव में रखा। घटना मार्च 2026 में हुई, लेकिन पीड़िता ने 22 अप्रैल को स्मृति नगर चौकी में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, ठगों ने महिला को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर यह विश्वास दिलाया कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और जांच के नाम पर रकम ट्रांसफर कराई गई।</p>
<p>महिला निर्मला चौबे, जो आर्य नगर कोहका क्षेत्र में अकेली रहती हैं, ने बताया कि 13 मार्च को उनके मोबाइल पर वीडियो कॉल आया। कॉल पर 5-7 लोग पुलिस वर्दी में दिखाई दिए। एक व्यक्ति ने खुद को संदीप राव, मुंबई क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर बताया। आरोपियों ने दावा किया कि महिला के नाम से बैंक खाते में करोड़ों का अवैध लेन-देन हुआ है और जल्द ही उनके घर पर छापा पड़ेगा।</p>
<h5><strong>ठगी का तरीका</strong></h5>
<p>इसके बाद आरोपियों ने महिला को लगातार कॉल और मैसेज कर डराया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि किसी को जानकारी दी तो उन्हें जेल जाना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक, ठगों ने मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए दिन में कई बार संपर्क किया और ‘गुड मॉर्निंग’ व ‘गुड नाइट’ जैसे मैसेज भेजकर भरोसा भी कायम किया।</p>
<p>डर के कारण महिला ने 16 मार्च को अपने एसबीआई खाते से 3 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कर दिए। अगले दिन दो युवक और एक युवती उनके घर पहुंचे और 4 लाख रुपए की और मांग की। पैसे की कमी बताने पर उन्होंने सोना गिरवी रखने की सलाह दी।</p>
<h5><strong>फर्जी दस्तावेज दिखाए</strong></h5>
<p>आरोपियों ने महिला को फर्जी एफआईआर और सुप्रीम कोर्ट के कथित आदेश भी दिखाए, जिससे वह पूरी तरह उनके झांसे में आ गईं। रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला ने मुथुट फाइनेंस में सोना गिरवी रखकर 4 लाख रुपए और ट्रांसफर कर दिए।</p>
<p>ठगों ने भरोसा दिलाया था कि 15 अप्रैल के बाद जांच पूरी होने पर पूरा पैसा लौटा दिया जाएगा। इसी भरोसे में महिला ने परिवार को भी जानकारी नहीं दी।</p>
<h5><strong>पुलिस की कार्रवाई</strong></h5>
<p>अधिकारियों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद सुपेला थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस साइबर सेल की मदद से कॉल डिटेल्स और बैंक खातों की जांच कर रही है।</p>
<p>पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने अलग-अलग नंबरों से 30 से अधिक कॉल और करीब 20 वीडियो कॉल किए। मामले में अंतरराज्यीय गिरोह की आशंका जताई जा रही है।</p>
<h5><strong>बढ़ते साइबर अपराध</strong></h5>
<p>यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब क्षेत्र में साइबर ठगी के मामलों में तेजी आई है। एक दिन पहले ही भिलाई में दो अन्य मामलों में भी लाखों रुपए की धोखाधड़ी दर्ज की गई थी।</p>
<p>पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर खुद को अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों पर भरोसा न करें। किसी भी जांच या गिरफ्तारी की प्रक्रिया केवल आधिकारिक माध्यम से ही होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:40:08 +0530</pubDate>
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