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                <title>Water Crisis - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Water Crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>मध्यप्रदेश में अल्पवर्षा की आशंका पर सरकार अलर्ट, हर जिले में बनेगी जल संकट आकस्मिक योजना</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संभावित कम बारिश से निपटने के लिए सभी विभागों के साथ समीक्षा बैठक की। जल डैशबोर्ड, कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान, जल संरक्षण अभियान और किसानों के लिए वैज्ञानिक खेती पर विशेष जोर दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/government-alert-on-possibility-of-short-rainfall-in-madhya-pradesh/article-57709"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में संभावित अल्पवर्षा की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जल संकट, कृषि, सिंचाई और पेयजल प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने तय किया है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही राज्य स्तर पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग और पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए आधुनिक जल डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा, जिससे जलाशयों, भूजल और पेयजल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। सरकार का कहना है कि समय रहते वैज्ञानिक योजना और विभागों के बेहतर समन्वय से संभावित अल्पवर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संभावित कम बारिश को केवल संकट के रूप में नहीं बल्कि बेहतर योजना और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि किसानों तक समय पर सही जानकारी और तकनीकी सलाह पहुंचाई जाए ताकि मौसम की चुनौती के बावजूद कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर न्यूनतम असर पड़े। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित कई विभागों की तैयारियों की समीक्षा की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर, कोदो और कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती हैं और किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो सकती हैं। इसके साथ ही किसानों से जल्दबाजी में बुआई नहीं करने की अपील करने के निर्देश भी दिए गए। सरकार चाहती है कि खेतों में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुआई की जाए ताकि फसलों को शुरुआती नुकसान से बचाया जा सके। बैठक में आधुनिक कृषि तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर भी बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह गांव-गांव तक पहुंचाई जाए ताकि किसान अपने क्षेत्र की जल उपलब्धता और मौसम के अनुसार उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाने की योजना तैयार की गई है। साथ ही कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत बीज किस्मों के उपयोग को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जल प्रबंधन को लेकर सरकार ने कई दीर्घकालिक योजनाओं पर भी काम शुरू करने का फैसला किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव की समीक्षा की जाएगी और बंद या अधूरी नल-जल योजनाओं की मरम्मत के लिए 90 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा। वहीं शहरी निकायों में वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान कर टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 योजना के तहत लंबित जल प्रदाय परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने "जलाभिषेक 2.0" अभियान के तहत प्रदेश के पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं और अन्य पारंपरिक जल संरचनाओं का सर्वे और पुनर्जीवन करने की योजना बनाई है। मनरेगा के समन्वय से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं को अगले दो वर्षों में पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके अलावा भूजल पुनर्भरण अभियान के अंतर्गत रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब निर्माण को मिशन मोड में पूरा किया जाएगा। सरकार "खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में" की अवधारणा को भी व्यापक स्तर पर लागू करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रदेश के सभी प्रमुख जलाशयों जैसे इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर और गांधीसागर में जल उपयोग के लिए स्पष्ट प्राथमिकता तय की जाएगी। सरकार ने पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसके बाद सिंचाई और फिर जलविद्युत उत्पादन के लिए जल उपयोग किया जाएगा। साथ ही नहरों की सफाई और मरम्मत रबी सीजन से पहले पूरी करने तथा अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों को सौंपी जाएगी। कृषि क्षेत्र के लिए प्रत्येक जिले में कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जाएगा। कम जल मांग वाली फसलों, दलहन, तिलहन और श्रीअन्न को बढ़ावा देने के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। धान उत्पादक क्षेत्रों में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और वैकल्पिक गीला-सूखा (AWD) तकनीक को बढ़ावा देने की भी योजना बनाई गई है। साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी आधारित फसल क्षति आकलन और फसल बीमा दावों के त्वरित निपटारे के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच सरकार की तैयारियों को लेकर विपक्ष ने भी सवाल उठाए हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यदि संभावित अल्पवर्षा के संकेत पहले से मौजूद थे तो अप्रैल और मई में ही तैयारी क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समय रहते प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है और अब समीक्षा बैठकों के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने और किसानों के लिए जमीनी स्तर पर तत्काल राहत उपाय लागू करने की मांग की। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि सभी विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं और संभावित जल संकट से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां तेजी से आगे बढ़ाई जा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:07:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मानसून से पहले भोपाल निगम परिषद की बैठक, जलभराव और पानी के मुद्दे पर हंगामे के आसार</title>
                                    <description><![CDATA[विशेष बैठक में केवल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एजेंडा शामिल, जबकि कांग्रेस पार्षद शहर की सड़कों, जलभराव और पेयजल संकट पर चर्चा की मांग करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/bhopal-corporation-council-meeting-before-monsoon-chances-of-uproar-over/article-55387"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-nagar-nigam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल नगर निगम परिषद की विशेष बैठक मंगलवार को होने जा रही है, लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही इसके राजनीतिक और प्रशासनिक मायने चर्चा में आ गए हैं। नगर निगम की ओर से जारी एजेंडे में केवल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और उससे जुड़े नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन का विषय शामिल किया गया है। दूसरी तरफ विपक्षी कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि मानसून सिर पर है और ऐसे समय में शहर के सबसे बड़े और सीधे जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होना ज्यादा जरूरी है। इसी वजह से परिषद की बैठक के दौरान तीखी बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में पिछले कुछ दिनों से पेयजल आपूर्ति की समस्या लगातार सामने आ रही है। शहर के कई हिस्सों में नर्मदा और कोलार परियोजना की पाइप लाइनों में लीकेज की शिकायतें मिल रही हैं। कई इलाकों के लोगों को पानी की सप्लाई बाधित होने के कारण एक-दो दिन नहीं बल्कि कई-कई दिन तक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत पहले ही बड़ी समस्या बनी हुई है और मानसून आने से पहले इसका स्थायी समाधान तलाशना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस पार्षदों का आरोप है कि परिषद की बैठक में ऐसे मुद्दों को एजेंडे से बाहर रखा गया है, जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी से है। उनका कहना है कि थोड़ी सी बारिश होते ही भोपाल के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। कुछ दिन पहले हुई तेज बारिश के दौरान कई क्षेत्रों में नालों के चोक होने की शिकायतें सामने आई थीं। महामाई का बाग क्षेत्र में जल निकासी प्रभावित होने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी थी। ऐसे में विपक्ष का तर्क है कि मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिर्फ जलभराव ही नहीं, शहर की सड़कों की हालत भी परिषद की बैठक में उठने वाला प्रमुख मुद्दा बन सकती है। कई वार्डों में सड़कें उखड़ी हुई हैं और गड्ढों की समस्या लगातार बनी हुई है। बरसात शुरू होने के बाद ये परेशानी और बढ़ सकती है। पार्षदों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और रखरखाव का काम नहीं हुआ तो लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। यही वजह है कि विपक्ष मानसून पूर्व तैयारियों का पूरा ब्योरा परिषद के सामने रखने की मांग कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बैठक की एक और खास बात यह है कि नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी इसमें शामिल नहीं हो पाएंगी। पारिवारिक कारणों से उनके मुंबई में होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने नगर निगम अध्यक्ष को पत्र लिखकर बैठक में अनुपस्थित रहने की सूचना दी है और अपनी जगह वार्ड-16 के पार्षद मो. सरवर को प्रतिनिधि के रूप में नामित करने का अनुरोध किया था। अनुमति मिलने के बाद अब परिषद की बैठक में विपक्ष की ओर से मो. सरवर मुख्य भूमिका निभाएंगे। इसके साथ उन मुद्दों को भी उठाया जाना चाहिए जो सीधे जनता से जुड़े हुए हैं। उनके मुताबिक पानी, जलभराव और सड़कों की स्थिति फिलहाल शहर के सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि विपक्ष इन मामलों को मजबूती से परिषद के सामने रखेगा और नगर निगम प्रशासन से जवाब मांगेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर नगर निगम प्रशासन का कहना है कि यह विशेष बैठक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के निर्देशों के तहत आयोजित की जा रही है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विभाग ने सभी नगरीय निकायों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विशेष अभियान चलाने और बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए थे। भोपाल नगर निगम में यह बैठक 9 जून को आयोजित की जा रही है, जिसमें कचरा प्रबंधन व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर चर्चा की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:57:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर में गहराया जल संकट, 125 अतिरिक्त टैंकरों से हो रही पानी सप्लाई</title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी और सूखते बोरवेल के बीच नगर निगम अलर्ट मोड में, निर्माण कार्यों में रीयूज वाटर अनिवार्य करने की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a167c8e6f889/article-54279"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/indore-water-crisis-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इंदौर में लगातार बढ़ती गर्मी के बीच जल संकट गहराता जा रहा है। शहर के कई इलाकों में लोगों को पेयजल की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि नियमित सप्लाई व्यवस्था प्रभावित होने के बाद नगर निगम को करीब 125 अतिरिक्त टैंकर चलाने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में लोगों को तय समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम अब इस स्थिति से निपटने के लिए अभियान मोड में काम कर रहा है। निगम प्रशासन ने साफ किया है कि निर्माण कार्यों में रीयूज वाटर का उपयोग नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर भी सख्ती बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बताया कि इस बार गर्मी अधिक होने और प्री-मानसून बारिश नहीं होने के कारण पानी की समस्या तेजी से बढ़ी है। शहर के कई बोरवेल सूख चुके हैं, जिससे जलापूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में यदि बारिश नहीं होती है तो हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कमिश्नर ने बताया कि फिलहाल शहर में तीन अलग-अलग माध्यमों से पानी की सप्लाई की जा रही है। सबसे पहले नर्मदा परियोजना के जरिए पानी को टंकियों तक पहुंचाकर पंपिंग के माध्यम से घरों तक सप्लाई किया जाता है। जिन क्षेत्रों में नर्मदा लाइन नहीं पहुंची है, वहां बोरवेल कनेक्शन के जरिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं जिन इलाकों में दोनों सुविधाएं नहीं हैं, वहां टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम के मुताबिक जिन क्षेत्रों में पानी की अधिक किल्लत है, वहां अतिरिक्त टैंकर भेजे जा रहे हैं। कई कॉलोनियों और बाहरी इलाकों में सुबह से शाम तक टैंकरों के जरिए पानी वितरित किया जा रहा है। इसके चलते निगम के संसाधनों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पिछले साल से ज्यादा संकट</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार ज्यादा टैंकर चलाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में करीब सवा सौ अतिरिक्त टैंकर लगातार शहर के विभिन्न हिस्सों में पानी सप्लाई कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार कई इलाकों में भूमिगत जल स्तर काफी नीचे चला गया है। इससे बोरवेल की क्षमता प्रभावित हुई है और कुछ क्षेत्रों में मोटर भी काम नहीं कर रही हैं। नगर निगम की तकनीकी टीमें खराब बोरवेल और पंपिंग सिस्टम को सुधारने में लगी हुई हैं। कमिश्नर ने कहा कि नगर निगम की टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो। अधिकारियों और कर्मचारियों को जलापूर्ति व्यवस्था पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इंदौर के कई रहवासी क्षेत्रों में लोग सुबह से पानी का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ इलाकों में टैंकर पहुंचने पर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ती गर्मी में पानी की समस्या ने रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>रीयूज वाटर पर सख्ती</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">जल संकट को देखते हुए नगर निगम अब पानी बचाने पर भी जोर दे रहा है। कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने कहा कि निर्माण कार्यों में पीने योग्य पानी का उपयोग रोकने के लिए अभियान चलाया जाएगा। निर्माण स्थलों पर रीयूज वाटर का उपयोग अनिवार्य किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई निर्माण एजेंसी या व्यक्ति रीयूज पानी का इस्तेमाल नहीं करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम की टीमें निर्माण स्थलों का निरीक्षण भी करेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा शहर में रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर भी सख्ती बढ़ाई जा रही है। भवन निर्माण नियमों के तहत यह व्यवस्था अनिवार्य है, लेकिन कई भवन मालिक अभी भी इसका पालन नहीं कर रहे हैं। कमिश्नर ने कहा कि लोगों से कई बार अपील की जा चुकी है कि बारिश के पानी को सहेजने के लिए रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाएं। इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं करने वालों पर नियमानुसार पेनाल्टी लगाई जाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पानी बचाने पर जोर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तेजी से बढ़ते शहरीकरण और घटते भूजल स्तर के कारण बड़े शहरों में जल संकट गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इंदौर जैसे शहरों में पानी की बढ़ती मांग और सीमित संसाधनों के कारण स्थिति लगातार कठिन हो रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, रीयूज वाटर और जल संरक्षण के उपायों को बड़े स्तर पर लागू करना जरूरी है। इससे भविष्य में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नगर निगम आने वाले मानसून से पहले जल संरक्षण अभियान को तेज करने की तैयारी में है। शहर में पानी बचाने और वैकल्पिक संसाधनों के उपयोग को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 10:59:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रीवा के धुरकुच में बिजली संकट से गहराया जल संकट, ग्रामीण परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के धुरकुच गांव में एक महीने से बिजली गुल, पानी के लिए 2 किमी दूर जाना पड़ रहा भीषण गर्मी के बीच पानी के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीणों की स्थिति गंभीर होती जा रही है।प्रशासन के आश्वासन के बावजूद राहत अभी तक जमीन पर नहीं दिखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/water-crisis-deepens-due-to-electricity-crisis-in-dhurkuch-of/article-52418"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rewa-news-(15).jpg" alt=""></a><br /><p>रीवा जिले के नगर परिषद डभौरा अंतर्गत वार्ड क्रमांक 7 के ग्राम धुरकुच में बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण उत्पन्न जल संकट ने ग्रामीणों के सामने गंभीर स्थिति खड़ी कर दी है। करीब एक महीने से बिजली न होने के चलते गांव के सरकारी बोरवेल बंद पड़े हैं, जिससे पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई है। आदिवासी बहुल इस गांव के लोग भीषण गर्मी में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाने को मजबूर हैं और करीब दो किलोमीटर दूर जंगल में जाकर गड्ढा खोदकर गंदा पानी निकाल रहे हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य के लिहाज से भी चिंताजनक मानी जा रही है।</p>
<p>ग्रामीणों के मुताबिक, एक महीने पहले अज्ञात चोरों ने गांव की विद्युत केबल काट ली थी। इसके बाद से बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित है। स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग और सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। अधिकारियों की अनदेखी के कारण गांव में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है।</p>
<h5><strong>बिजली संकट गहराया</strong></h5>
<p>गांव में लगे सरकारी बोरवेल और मोटर बिजली के अभाव में बेकार हो गए हैं। इससे जल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नगर परिषद की ओर से भी नियमित टैंकर नहीं भेजे जा रहे, जिससे समस्या और बढ़ गई है।वार्ड क्रमांक 7 की पार्षद आसमा देवी ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। उन्होंने आरोप लगाया कि समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।</p>
<h5><strong>स्वास्थ्य पर खतरा</strong></h5>
<p>गंदा पानी पीने के कारण ग्रामीणों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मजबूरी में वे असुरक्षित जल स्रोतों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका है।सूत्रों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और जल्द बिजली आपूर्ति बहाल कर जल संकट दूर करने का आश्वासन दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 16:38:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर जल संकट: 60% वार्ड प्रभावित, पानी की समस्या गहराई</title>
                                    <description><![CDATA[शिवनगर, रायपुरा और डंगनिया समेत कई इलाकों में पानी की किल्लत, गर्मी के बीच सप्लाई व्यवस्था चरमराई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur-water-crisis-affects-60-wards-depth-of-water-problem/article-52155"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(41).jpg" alt=""></a><br />
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<p>भीषण गर्मी के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जल संकट गंभीर होता जा रहा है। शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं। हालात यह हैं कि 70 में से करीब 60 प्रतिशत वार्डों में जलापूर्ति प्रभावित है, जिससे दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है।</p>
<p>शिवनगर, रायपुरा और डंगनिया जैसे प्रमुख इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। शिवनगर में बोरवेल जल जाने से लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है और कई परिवार पहले से पानी स्टोर कर रहे हैं। वहीं रायपुरा में पाइपलाइन लीकेज के कारण नियमित सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे कई घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। डंगनिया में सप्लाई तो हो रही है, लेकिन कम प्रेशर के कारण लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा।</p>
<p>इससे पहले भी शहर के कई अन्य इलाकों—जैसे पुरानी बस्ती, चंगोराभाठा, गुढ़ियारी और भनपुरी—में पानी की समस्या सामने आ चुकी है। नगर निगम के पास इन क्षेत्रों से पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत अभी सीमित है।</p>
<p>जल संकट की एक बड़ी वजह भूजल स्तर का तेजी से गिरना और बोरवेल का फेल होना माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार शहर में बड़ी संख्या में बोरवेल खराब हो चुके हैं, जिससे वैकल्पिक स्रोतों पर दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा पाइपलाइन नेटवर्क में लीकेज और रखरखाव की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है।</p>
<p> रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होना भी संकट को गहरा रहा है। नियमों के बावजूद बड़ी संख्या में मकानों में यह सिस्टम नहीं लगाया गया है। हर साल लाखों लीटर बारिश का पानी बिना उपयोग के बह जाता है, जबकि इसका संरक्षण किया जाए तो जल संकट काफी हद तक कम हो सकता है।</p>
<p>नगर निगम ने इस दिशा में योजनाएं तो बनाई थीं, लेकिन वे अब तक धरातल पर पूरी तरह लागू नहीं हो सकी हैं। कई मामलों में फंड जमा होने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ, जिससे लोगों में नाराजगी भी है।</p>
<p>गर्मी बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जल प्रबंधन, बुनियादी ढांचे के सुधार और जनभागीदारी को लेकर ठोस कदम उठाना जरूरी माना जा रहा है, ताकि शहर को लंबे समय तक पानी की समस्या से राहत मिल सके।</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:18:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुर्ग के गांवों में जल संकट गहराया, अवैध शराब पर भी उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[दुर्ग जल संकट के बीच ग्रामीणों का आरोप—पानी की कमी, अवैध शराब से बिगड़ रहा माहौल गांवों में पानी की किल्लत ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/water-crisis-deepens-in-durg-villages-questions-raised-on-illegal/article-51934"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(33).jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कई गांव इन दिनों गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं, जहां लोगों को पीने के पानी के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर अंजोरा (ढाबा) गांव में हालात सबसे अधिक खराब बताए जा रहे हैं। यहां लगभग 3000 की आबादी के लिए सिर्फ एक बोरवेल ही पानी का सहारा है, जिससे बेहद कम क्षमता में पानी निकलता है। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह 4 बजे से ही पानी भरने के लिए कतार लग जाती है, जो देर रात तक जारी रहती है। इसी बीच गांव में अवैध शराब की खुलेआम बिक्री ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है।</p>
<p>ग्रामीणों के मुताबिक, पानी की कमी के कारण उनका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं तक पानी के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। रोजगार और बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि दिन का बड़ा हिस्सा पानी जुटाने में ही निकल जाता है।</p>
<h5><strong>पानी के लिए जंग</strong></h5>
<p>गांव में जल संकट इतना गंभीर है कि एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल 31 लाख रुपए की लागत से शिवनाथ नदी से पानी लाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन समय पर काम शुरू नहीं हुआ।</p>
<p>ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का लाभ उन्हें नहीं मिला और पैसा बेकार चला गया। कुछ लोगों का कहना है कि नदी का पानी केवल डेम में जमा किया जा रहा है, जो पीने योग्य नहीं है।</p>
<h5><strong>अवैध शराब पर नाराजगी</strong></h5>
<p>जल संकट के साथ-साथ गांव में अवैध शराब की बिक्री भी बड़ा मुद्दा बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां पानी के लिए तरसना पड़ रहा है, वहीं शराब आसानी से उपलब्ध है।</p>
<p>पूर्व सरपंच और अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में 8–10 लोग अवैध शराब के कारोबार से जुड़े हैं और इस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही। उनका कहना है कि इससे गांव का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है और युवा पीढ़ी पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।</p>
<p>पुलिस और प्रशासन ने हालांकि इन आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों के अनुसार, अवैध शराब के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जा रही है और गश्त बढ़ाई गई है।</p>
<p>दुर्ग जिले के अन्य गांवों—जैसे पाटन क्षेत्र के औरी, उतई के मुड़पार, मर्रा, चुनकट्टा और आसपास के इलाकों में भी पानी की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। गर्मी बढ़ने के साथ यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं जनप्रतिनिधियों ने जल संरक्षण और जल प्रबंधन को लेकर योजनाओं में तेजी लाने की बात कही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:53:31 +0530</pubDate>
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