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                <title>Global Markets - दैनिक जागरण</title>
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                <title>सेंसेक्स में हल्की गिरावट, IT और मीडिया शेयर दबाव में</title>
                                    <description><![CDATA[निफ्टी भी फिसला, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों के मिश्रित संकेतों का असर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/slight-fall-in-sensex-and-media-shares-under-pressure/article-56249"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nifty-fall-2026.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<div class="text-base my-auto mx-auto pb-10 [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
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<p style="text-align:justify;">आज यानी 18 जून को घरेलू शेयर बाजार में हल्की कमजोरी देखने को मिली और कारोबार के दौरान बाजार सीमित दायरे में ही घूमता नजर आया। सुबह की शुरुआत से ही निवेशकों में सतर्कता का माहौल था और इसका असर सीधे इंडेक्स पर दिखा। सेंसेक्स करीब 50 अंक की गिरावट के साथ 77,100 के आसपास कारोबार करता रहा, जबकि निफ्टी भी लगभग 20 अंक टूटकर 24,050 के स्तर पर आ गया। पूरे सत्र में बाजार में बड़ी हलचल नहीं दिखी लेकिन IT और मीडिया सेक्टर में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे कुल मिलाकर सेंटीमेंट कमजोर रहा। कारोबार के दौरान देखा गया कि शुरुआती मिनटों में बाजार स्थिर था लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। खासकर टेक और मीडिया कंपनियों के शेयरों में दबाव ज्यादा रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में तेज़ी के बाद निवेशक अब थोड़ा मुनाफा निकाल रहे हैं, जिससे इंडेक्स पर असर पड़ रहा है। इसके साथ ही वैश्विक संकेतों में अनिश्चितता भी बाजार को ऊपर जाने से रोक रही है। कई ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि फिलहाल बाजार में “वेट एंड वॉच” की स्थिति बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेशी निवेशकों की गतिविधियों ने भी बाजार पर असर डाला है। पिछले कुछ दिनों से FIIs लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार में दबाव बढ़ा है। बीते 7 दिनों में विदेशी निवेशकों ने लगभग 1,530 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगातार खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार को कुछ हद तक सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन यह सपोर्ट उतना मजबूत नहीं है कि पूरे बाजार को ऊपर खींच सके। यही कारण है कि बाजार बार-बार ऊपर जाने की कोशिश करता है लेकिन फिर सीमित दायरे में लौट आता है। वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई बाजारों में आज मिला-जुला रुख देखने को मिला। साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मजबूती के साथ ऊपर रहा और इसमें करीब 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। वहीं जापान का निक्केई इंडेक्स भी मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ। लेकिन दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स दबाव में रहा और इसमें करीब 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि एशियाई बाजारों में भी निवेशकों की धारणा एक जैसी नहीं है और अलग-अलग संकेतों के चलते अस्थिरता बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&amp;P 500 तीनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए थे। इसका असर आज भारतीय बाजार पर भी दिखा क्योंकि ग्लोबल निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। यही वजह है कि दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। घरेलू स्तर पर देखें तो पिछले कारोबारी दिन यानी 17 जून को बाजार में तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 347 अंक की बढ़त के साथ 77,156 पर बंद हुआ था और निफ्टी भी 97 अंक चढ़कर 24,086 पर पहुंचा था। लेकिन एक दिन बाद ही बाजार उस तेजी को कायम नहीं रख सका और हल्की गिरावट में आ गया। यह दिखाता है कि बाजार फिलहाल किसी एक दिशा में मजबूत ट्रेंड नहीं बना पा रहा है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी निवेशकों के रुख, ग्लोबल संकेतों और कॉरपोरेट अर्निंग्स पर निर्भर करेगी। अगर FII की बिकवाली कम होती है और वैश्विक बाजारों में स्थिरता आती है तो बाजार फिर से ऊपर की ओर जा सकता है। लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि बाजार एक सीमित दायरे में फंसा हुआ है और किसी बड़े ट्रिगर का इंतजार कर रहा है। 18 जून का दिन शेयर बाजार के लिए हल्की सुस्ती और सावधानी भरा रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में मामूली गिरावट दर्ज हुई और सेक्टोरल दबाव खासकर IT और मीडिया में देखने को मिला। </p>
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:35:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>US-ईरान समझौते से क्रूड ऑयल 4.8% टूटा, बाजारों में तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक शांति संकेतों से तेल कीमतों में गिरावट, शेयर बाजारों में जोरदार उछाल, निवेशकों का भरोसा मजबूत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-prices-fall-by-48-due-to-us-iran-agreement/article-56049"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-deal-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">US-ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में संभावित शांति समझौते की खबर के बाद वैश्विक बाजारों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक तेज गिरावट दर्ज की गई है और इसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 4.8 प्रतिशत गिरकर 83.18 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। कुछ ही हफ्ते पहले यह कीमत 100 डॉलर के आसपास पहुंच गई थी, जबकि युद्ध जैसे हालात में यह 120 डॉलर प्रति बैरल तक भी चला गया था। अब समझौते की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता कम हुई है, जिससे बाजार में राहत का माहौल बन गया है और निवेशकों की धारणा में सुधार देखा जा रहा है। वैश्विक शेयर बाजारों में इस खबर का असर तेजी के रूप में सामने आया है। अमेरिका के वॉल स्ट्रीट पर डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 650 अंक की बढ़त के साथ मजबूत हुआ, जबकि S&amp;P 500 में 1.5 प्रतिशत और नैस्डैक में 2.3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। एयरलाइंस सेक्टर में सबसे ज्यादा हलचल देखी गई क्योंकि ईंधन लागत में कमी की उम्मीद से यूनाइटेड एयरलाइंस में 5.2 प्रतिशत और अमेरिकन एयरलाइंस में करीब 7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। क्रूज ऑपरेटर कंपनियों के शेयर भी मजबूत हुए। दूसरी ओर टेक्नोलॉजी और एआई सेक्टर में भी खरीदारी देखने को मिली, जहां माइक्रोन टेक्नोलॉजी 7.8 प्रतिशत और AMD करीब 7 प्रतिशत चढ़ गए। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल एनवीडिया के शेयर में भी करीब 2.7 प्रतिशत की तेजी आई, जिससे पूरे टेक इंडेक्स को सपोर्ट मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच बाजार में एक और बड़ी खबर इलॉन मस्क की स्पेसएक्स को लेकर रही, जिसकी वैल्यूएशन लिस्टिंग के बाद तेजी से बढ़कर 2.1 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गई है। निवेशकों का एआई और स्पेस टेक्नोलॉजी में भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है, जिससे इस सेक्टर में लगातार निवेश आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति को लेकर भी बाजार में हलचल बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक US-ईरान समझौते के बाद ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना घटकर 55 प्रतिशत रह गई है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि फेड इस बार दरों को स्थिर रख सकता है। भारतीय शेयर बाजारों पर भी इस वैश्विक घटनाक्रम का सकारात्मक असर देखा गया। सेंसेक्स सोमवार को 736 अंकों की बढ़त के साथ 76,264 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 231 अंक चढ़कर 23,853 पर बंद हुआ। एशियाई बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली, जहां साउथ कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई इंडेक्स बड़ी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। हांगकांग का हैंगसेंग भी हल्की तेजी के साथ बंद हुआ। कुल मिलाकर वैश्विक बाजारों में यह तेजी ऊर्जा कीमतों में गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों का सीधा परिणाम मानी जा रही है। हालांकि यह समझौता अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है और आने वाले हफ्तों में बातचीत और हस्ताक्षर प्रक्रिया पर बाजार की नजर बनी रहेगी। अगर यह समझौता सफल रहता है तो ऊर्जा क्षेत्र में और स्थिरता आ सकती है, लेकिन किसी भी तरह की देरी या रुकावट से बाजार में फिर से अस्थिरता बढ़ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:58:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती, 58 पैसे की तेज बढ़त</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल में गिरावट और शेयर बाजार की मजबूती से रुपये ने शुरुआती कारोबार में 94.60 का स्तर छुआ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-strengthened-by-58-paise-against-dollar/article-55956"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indian-rupee-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">15 जून 2026, सोमवार की सुबह विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने मजबूत शुरुआत की और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 58 पैसे की तेजी दर्ज की। शुरुआती कारोबार में रुपया 94.70 पर खुला और थोड़ी ही देर में बढ़त दिखाते हुए 94.60 के स्तर पर पहुंच गया। यह मजबूती पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले उल्लेखनीय मानी जा रही है और इसे वैश्विक बाजारों में बने सकारात्मक माहौल का परिणाम बताया जा रहा है। मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, रुपये की इस तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट मानी जा रही है, जो अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद देखने को मिली। लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के खत्म होने की खबर ने वैश्विक बाजारों में स्थिरता लाई है, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को फायदा मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू स्तर पर भी बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत शुरुआत की, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ा। विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी बढ़ने और फंड फ्लो में सुधार होने से डॉलर की मांग में थोड़ी कमी आई, जिससे भारतीय मुद्रा को सहारा मिला। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में खरीदारी के चलते बाजार में भरोसा बढ़ा और इसका असर मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दिया। फॉरेक्स डीलरों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स में कमजोरी भी रुपये की मजबूती का एक प्रमुख कारण है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई है और सुरक्षित निवेश की मांग घट गई है। ऐसे में निवेशक जोखिम वाले बाजारों की ओर लौट रहे हैं, जिससे एशियाई मुद्राओं को मजबूती मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में नरमी से आयात बिल कम होता है और चालू खाते के घाटे पर दबाव घटता है। इससे रुपये पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और उसकी स्थिरता बढ़ती है। यही कारण है कि तेल बाजार में गिरावट के साथ रुपये में तेजी देखी जा रही है। आने वाले दिनों में रुपये की दिशा वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं और विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है, तो रुपये में और मजबूती देखी जा सकती है। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वैश्विक आर्थिक संकेतक भी रुपये की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुद्रा बाजार में कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों की भावना सकारात्मक बनी हुई है। वैश्विक शांति संकेतों के कारण जोखिम का माहौल कम हुआ है और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह बढ़ा है। इससे रुपये को मजबूती मिल रही है और अल्पकालिक रूप से यह रुझान जारी रह सकता है। यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि मुद्रा बाजार में अस्थिरता हमेशा बनी रहती है। किसी भी अप्रत्याशित अंतरराष्ट्रीय घटना या आर्थिक डेटा के कारण रुपये में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। 15 जून 2026 का दिन भारतीय रुपये के लिए सकारात्मक शुरुआत लेकर आया है। वैश्विक बाजारों में सुधार, कच्चे तेल की गिरती कीमतें और घरेलू शेयर बाजारों की मजबूती ने मिलकर रुपये को समर्थन दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:41:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद बाजार में जबरदस्त उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक रैली और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सेंसेक्स 1100 अंक उछला, निफ्टी ने भी मजबूत शुरुआत की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a2f910dcfeae/article-55952"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/stock-market-news-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">15 जून 2026, सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद मजबूत शुरुआत लेकर आई। वैश्विक स्तर पर बने सकारात्मक माहौल और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट का सीधा असर घरेलू बाजारों पर देखने को मिला। सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव का खत्म होना और 107 दिन चले संघर्ष के बाद शांति समझौता माना जा रहा है। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेशकों का भरोसा बढ़ा और इसका असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुबह के शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स ने जोरदार छलांग लगाई और 1,112.70 अंकों की बढ़त के साथ 76,648.74 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं एनएसई का निफ्टी भी मजबूती के साथ खुला और 335.55 अंकों की तेजी के साथ 23,956.40 पर कारोबार करता देखा गया। शुरुआती मिनटों में ही बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली और लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स हरे निशान में दिखाई दिए। बैंकिंग, आईटी, ऑटो और एनर्जी शेयरों में खास तौर पर मजबूत खरीदारी का रुझान रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान शांति समझौते ने वैश्विक स्तर पर जोखिम की धारणा को कम किया है। लंबे समय से चले आ रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब स्थिति में सुधार के संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा वापस लौटा है। इसका असर सीधे तौर पर एशियाई बाजारों पर पड़ा और भारतीय बाजार ने भी उसी रफ्तार को पकड़ लिया। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए राहत की बड़ी खबर मानी जा रही है, जिससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विदेशी बाजारों की बात करें तो एशिया के प्रमुख सूचकांक भी मजबूत बढ़त के साथ खुले। जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के बाजारों में सकारात्मक रुझान देखा गया। अमेरिकी फ्यूचर्स में भी तेजी का माहौल रहा, जिससे वैश्विक निवेशकों की धारणा और मजबूत हुई। इस वैश्विक रैली का सीधा फायदा भारतीय बाजारों को मिला और निवेशकों ने शुरुआती कारोबार में आक्रामक खरीदारी की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू स्तर पर भी बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। निवेशकों का रुझान खासकर लार्जकैप शेयरों की ओर देखने को मिला, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। बैंकिंग सेक्टर में सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के बैंकों के शेयरों में खरीदारी देखी गई। आईटी सेक्टर में भी विदेशी मांग की उम्मीद के चलते तेजी रही। ऑटो और एनर्जी सेक्टर में भी निवेशकों की रुचि बनी रही, जिससे पूरे बाजार को सपोर्ट मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को इस तेजी का एक अहम कारण माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड में नरमी आने से तेल आयात बिल पर दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे न केवल कंपनियों की लागत घटेगी, बल्कि महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और बाजार में नई पूंजी का प्रवाह देखने को मिल रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि, कुछ बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह तेजी पूरी तरह स्थायी नहीं मानी जा सकती। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं और किसी भी तरह के नए तनाव से बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद, फिलहाल निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना हुआ है और बाजार में खरीदारी का माहौल हावी है। देखा जाए तो 15 जून 2026 का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद मजबूत शुरुआत लेकर आया है। वैश्विक शांति संकेत, तेल की कीमतों में गिरावट और निवेशकों की मजबूत धारणा ने मिलकर बाजार को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो बाजार में और तेजी की संभावना जताई जा रही है</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:41:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से शेयर बाजार में गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में लुढ़के, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी महंगाई ने बढ़ाई चिंता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/stock-market-falls-due-to-us-iran-tension-and-crude-oil/article-55589"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/stock-market-india-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार गुरुवार, 11 जून 2026 को शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आया, जब वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला। सुबह के सत्र में बीएसई सेंसेक्स 358.54 अंक गिरकर 73,624.64 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 117 अंक टूटकर 23,098.30 पर कारोबार करता दिखा। बाजार में यह गिरावट लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ग्लोबल आर्थिक संकेतों की कमजोरी के कारण देखने को मिली।</p>
<p>विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है। बुधवार को ही FIIs ने करीब 2,124 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी बेच दी थी, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। अमेरिका की तरफ से ईरान से जुड़े ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की खबरों ने वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है। इससे कच्चे तेल के बाजार में तेजी देखी गई है और ब्रेंट क्रूड 1.70 प्रतिशत बढ़कर 94.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।</p>
<p>शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। HCL Tech, Infosys, Tech Mahindra, TCS, Eternal और Trent जैसे प्रमुख शेयर गिरावट में रहे। वहीं दूसरी ओर कुछ बैंकिंग और एविएशन स्टॉक्स में हल्की खरीदारी देखने को मिली, जिनमें ICICI Bank, Bharti Airtel और InterGlobe Aviation शामिल रहे। वैश्विक बाजारों में भी इसी तरह का कमजोर रुख देखा गया। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग सभी में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार पहले ही बुधवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए थे, जहां डॉव जोंस 950 अंकों से ज्यादा गिर गया था।</p>
<p>भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का मिश्रित असर निवेशकों के मूड को प्रभावित कर रहा है। अमेरिकी महंगाई दर में बढ़ोतरी ने यह संकेत दिया है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे वैश्विक निवेश प्रवाह प्रभावित हो रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। इससे न केवल महंगाई बढ़ने का खतरा है, बल्कि रुपये पर दबाव, कंपनियों के मुनाफे में गिरावट और राजकोषीय घाटे पर भी असर पड़ सकता है।</p>
<p>बुधवार को बाजार ने अंत में कुछ रिकवरी दिखाई थी और सेंसेक्स 64 अंक की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ था, लेकिन गुरुवार की शुरुआत ने फिर से निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। निफ्टी भी हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिससे बाजार की अनिश्चितता साफ दिखाई देती है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। खासकर तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:51:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-इजरायल तनाव से शेयर बाजार में हड़कंप, सेंसेक्स 900 अंक टूटा</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारतीय बाजार दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a265aa8a5d71/article-55252"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 8 जून 2026 को कारोबार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच एक बार फिर बढ़े सैन्य तनाव ने दुनिया भर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 900 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 23,113 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि बाद में कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार ने अपने नुकसान का एक हिस्सा कम किया, लेकिन पूरे दिन निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा।</p>
<p>ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक निवेशकों को जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में ईरान की मिसाइल कार्रवाई ने पहले से संवेदनशील वैश्विक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। ऐसे हालात में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और शेयर बाजारों से पैसा निकालने लगते हैं। यही वजह रही कि भारतीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव बढ़ गया।</p>
<p>सेंसेक्स में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और इटरनल जैसे शेयर शुरुआती कारोबार में प्रमुख नुकसान झेलने वालों में शामिल रहे। आईटी, ऑटो, वित्तीय सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़े शेयरों पर दबाव अधिक दिखाई दिया। निवेशकों को डर है कि यदि मध्य पूर्व का संकट लंबा खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर इसका असर पड़ सकता है।</p>
<p>सेक्टोरल स्तर पर भी अधिकांश सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। रियल्टी सेक्टर में सबसे अधिक कमजोरी देखने को मिली और यह करीब दो प्रतिशत तक नीचे फिसल गया। इसके अलावा मेटल, ऑटो, आईटी और एफएमसीजी सेक्टरों में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि फार्मा, हेल्थकेयर और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली। बाजार जानकारों के अनुसार अनिश्चित परिस्थितियों में निवेशक अक्सर डिफेंसिव सेक्टरों की ओर रुख करते हैं, इसलिए स्वास्थ्य और दवा कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए।</p>
<p>इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक माना जाता है और वहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। इसी आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल दर्ज किया गया और यह 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई और व्यापार घाटे को प्रभावित कर सकती है, इसलिए बाजार ने इस खबर पर भी नकारात्मक प्रतिक्रिया दी।</p>
<p>भारतीय बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर भी साफ दिखाई दिया। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार भारतीय शेयरों में बिकवाली की है। 5 जून को भी विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने का काम किया, लेकिन विदेशी पूंजी की निकासी का दबाव अभी भी बना हुआ है। जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती, विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना रह सकता है।</p>
<p>एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई भी भारी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। हांगकांग के हैंगसेंग सूचकांक में भी गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में भी सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बड़ी गिरावट देखी गई थी। नैस्डैक, डॉव जोंस और एसएंडपी 500 जैसे प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी ने वैश्विक निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।</p>
<p>विदेशी मुद्रा बाजार में भी तनाव का असर दिखाई दिया। सोमवार सुबह रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे कमजोर होकर 95.35 के स्तर पर पहुंच गया। जानकारों के अनुसार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रही हैं। आने वाले दिनों में यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो रुपये में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर मध्य पूर्व से आने वाली खबरों और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:58:59 +0530</pubDate>
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                <title>साउथ कोरिया ने भारतीय शेयर बाजार को पछाड़ा, AI बूम से बढ़ा मूल्यांकन</title>
                                    <description><![CDATA[आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी और चिप सेक्टर की मजबूती से कोरिया का मार्केट कैप भारत से आगे, निवेश प्रवाह में बड़ा बदलाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/south-korea-beats-indian-stock-market-valuation-increases-due-to/article-54769"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक शेयर बाजारों में इस समय बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। साउथ कोरिया का शेयर बाजार भारत को पीछे छोड़कर दुनिया का छठा सबसे बड़ा इक्विटी मार्केट बन गया है। इसकी मुख्य वजह वहां की चिप बनाने वाली बड़ी कंपनियों में आई तेज उछाल है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के चलते रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं। इस तेजी ने कोरियाई बाजार की कुल वैल्यू को नई ऊंचाई दे दी है, जबकि भारतीय बाजार इस रेस में थोड़ा पीछे खिसक गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, साउथ कोरिया की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप इस साल करीब 86 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 475 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 4.8 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 456 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इस बदलाव ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान एक बार फिर एशियाई बाजारों की तरफ खींचा है और यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किन वजहों से यह रैंकिंग बदल गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साउथ कोरिया की इस तेज छलांग के पीछे सबसे बड़ा कारण सेमीकंडक्टर और चिप इंडस्ट्री का मजबूत प्रदर्शन है। AI तकनीक के विस्तार के साथ-साथ डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग के लिए चिप्स की मांग तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिला है जो मेमोरी चिप और एडवांस सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन में ग्लोबल लीडर हैं। यही वजह है कि कोरियाई इंडेक्स में लगातार मजबूती देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं भारतीय बाजार में इस दौरान कई दबाव देखने को मिले। सबसे पहले रुपये में डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोरी का असर बाजार की डॉलर वैल्यू पर पड़ा। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। कई हफ्तों तक भारी निकासी के कारण बाजार की कुल वैल्यूएशन पर असर दिखा। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि भारत में अभी तक ऐसी बड़ी लिस्टेड कंपनियों की कमी है जो सीधे तौर पर ग्लोबल AI इकोसिस्टम या चिप मैन्युफैक्चरिंग से गहराई से जुड़ी हों।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि मार्केट कैप के मामले में साउथ कोरिया से पीछे होने के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी काफी मजबूत बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसके मुकाबले साउथ कोरिया की GDP लगभग 1.93 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है, जो भारत की तुलना में आधे से भी कम है। इससे साफ है कि आर्थिक उत्पादन के मामले में भारत अभी भी काफी आगे है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मार्केट कैप और GDP दोनों अलग-अलग संकेतक होते हैं। मार्केट कैप का सीधा संबंध शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के मूल्यांकन से होता है, जबकि GDP किसी देश की कुल आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। कई बार ऐसा होता है कि किसी देश का स्टॉक मार्केट बहुत तेजी से बढ़ता है लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था उतनी तेजी से नहीं बढ़ती, या इसके विपरीत भी हो सकता है। इसी वजह से दोनों की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जाती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साउथ कोरिया में हाल के महीनों में टेक सेक्टर, खासकर AI और चिप इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। ग्लोबल टेक कंपनियों के साथ सप्लाई चेन जुड़ाव और एआई आधारित प्रोडक्ट्स की मांग ने वहां के बाजार को मजबूती दी है। दूसरी तरफ भारत में बैंकिंग, एनर्जी और आईटी सेक्टर का दबदबा ज्यादा है, लेकिन AI हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में अभी शुरुआती विकास चरण देखने को मिल रहा है। आने वाले समय में भारत में भी AI और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने पर स्थिति बदल सकती है। सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाएं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता फोकस आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार को नई दिशा दे सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:57:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर फिसला, क्रूड 110 डॉलर पार, शेयर बाजार में भारी दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर पहुंचा, क्रूड 110 डॉलर पार। सेंसेक्स-निफ्टी दबाव में, FIIs की भारी बिकवाली जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rupee-slips-to-record-9618-against-dollar-crude-crosses-110/article-53683"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rupee-weakness-share-market-today-crude-oil-rates-update.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">18 मई को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता के चलते भारतीय रुपये में भारी गिरावट आई। डॉलर के मुकाबले रु 96.18 तक पहुंच गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। शुरुआती कारोबार में ही रुपये ने करीब 20 पैसे की गिरावट के साथ शुरुआत की और बाद में लगातार दबाव में रहा। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रूड ऑयल 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और सप्लाई की चिंता ने तेल की कीमतों को और बढ़ा दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे वैश्विक स्तर पर असर साफ दिख रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बना रहा। सेंसेक्स सुबह के सत्र में एक समय 1000 अंक से ज्यादा गिरकर 74,180 तक चला गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ गई। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर कुछ रिकवरी देखने को मिली और अंत में सेंसेक्स करीब 250 अंक की गिरावट के साथ 75,000 के आसपास कारोबार करता नजर आया। निफ्टी भी दबाव में रहा और लगभग 90 अंक गिरकर 23,550 के पास आ गया। बाजार में उठापटक के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं। पिछले 30 दिनों में </span>FII <span lang="hi" xml:lang="hi">ने करीब 55 हजार करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (</span>DII) <span lang="hi" xml:lang="hi">थोड़ी बहुत खरीदारी करते नजर आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे दबाव को पूरा संभाल नहीं पाए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार अभी बेहद संवेदनशील स्थिति में है। सेंसेक्स फिलहाल 75,200 से 75,300 के बीच संघर्ष कर रहा है और अगर ऊपर की ओर ब्रेकआउट नहीं होता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दबाव बना रह सकता है। नीचे की ओर 74,500 से 74,200 का जोन मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। निफ्टी के लिए 24,000 और 24,250 महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि नीचे 23,250 और 23,000 पर सपोर्ट देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय में कोई बड़ा ब्रेकआउट आने तक ट्रेडिंग में सावधानी बरतनी चाहिए और स्टॉप-लॉस का पालन करना बेहतर रणनीति होगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उधर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत मिले हैं। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां डाउ जोन्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नैस्डैक और </span>S&amp;P <span lang="hi" xml:lang="hi">500 सभी लाल निशान में रहे। एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं हल्की तेजी तो कहीं गिरावट नजर आई। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के पीछे मिडिल ईस्ट का तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता विवाद भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों और कच्चे तेल की गतिविधियों पर निर्भर रहने की संभावना है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 14:39:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाजार में हड़कंप: सोना 11 हजार महंगा हुआ, चांदी ने पार किया 3 लाख का स्तर</title>
                                    <description><![CDATA[इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने और वैश्विक संकेतों से सोना 11 हजार रुपये उछला, चांदी 3 लाख के पार पहुंची। MCX में तेज उतार-चढ़ाव जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/panic-in-the-market-gold-became-costlier-by-rs-11/article-53261"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t125417.192.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में काफी उछाल देखने को मिला। इसमें इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों ने अहम भूमिका निभाई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">MCX) <span lang="hi" xml:lang="hi">पर सोने की कीमत में करीब </span>11,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम तक की तेजी आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं चांदी ने फिर से </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर लिया। सुबह के समय में ही बाजार में हलचल तेज थी और निवेशक लगातार रेट्स पर नजर रखे हुए थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कारोबार की शुरुआत में सोना </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">154,851<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम पर खुला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि एक दिन पहले ये </span>153,442<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये पर बंद हुआ था। जैसे-जैसे दिन बढ़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खरीदारी बढ़ती गई और सोने ने तेज छलांग लगाई। सुबह करीब </span>9:35<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे यह </span>161,742<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद तेजी और बढ़ी और यह </span>164,497<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्राम तक पहुंच गया। यह उछाल सीधे तौर पर इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव और वैश्विक बाजारों से मिले संकेतों से जुड़ा हुआ है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चांदी की स्थिति भी कुछ अलग नहीं रही। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">MCX <span lang="hi" xml:lang="hi">पर चांदी </span>290,224<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये पर खुली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पिछले कारोबारी दिन यह </span>279,062<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये पर बंद हुई थी। शुरुआती कारोबार में तेजी आई और कुछ ही समय में चांदी ने </span>301,429<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति किलो का उच्चतम स्तर छू लिया। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाद में थोड़ा मुनाफा वसूली भी देखने को मिली और चांदी लगभग </span>296,597<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये के आसपास कारोबार करती नजर आई। बाजार में चांदी के इस तेज उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को चौंका दिया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर इंपोर्ट टैरिफ को </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी से बढ़ाकर </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीसदी कर दिया है। इसमें </span>10%<span lang="hi" xml:lang="hi"> बेसिक कस्टम ड्यूटी और </span>5%<span lang="hi" xml:lang="hi"> एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस शामिल है। इसी फैसले के बाद घरेलू बाजार में कीमतों को नया सपोर्ट मिला और अचानक उछाल देखने को मिला। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अस्थिरता का माहौल बना हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर अमेरिका-ईरान तनाव और अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों के कारण।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती को लेकर अनिश्चितता ने भी सोने को सपोर्ट दिया है। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश या </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">सेफ हेवन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मानते हैं। यही वजह है कि इंटरनेशनल मार्केट में भी कीमतों में हलचल बनी हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालाँकि वहां हल्की गिरावट और स्थिरता के संकेत भी दिख रहे हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब बाजार की नजर इस बात पर है कि सरकार की ड्यूटी बढ़ोतरी का असर आगे मांग पर कितनी पड़ेगा। क्या आयात घटेगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या घरेलू बाजार में डिमांड कम होगी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या आने वाले दिनों में कीमतों में करेक्शन देखने को मिलेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इन सवालों का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल ड्यूटी के चलते तेजी बनी रहेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव और संभावित गिरावट भी देखने को मिल सकती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 12:56:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स 583 अंक टूटा, निफ्टी 23,998 पर</title>
                                    <description><![CDATA[शेयर बाजार में गिरावट के बीच आईटी शेयरों में खरीदारी, मेटल और बैंकिंग सेक्टर दबाव में वैश्विक संकेतों और जियोपॉलिटिकल तनाव ने बाजार की दिशा बदल दी है। तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी बाजारों की कमजोरी ने निवेशकों को सतर्क किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/fall-in-stock-market-sensex-fell-by-583-points-nifty/article-52423"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-30t171653.486.jpg" alt=""></a><br /><p>आज  भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली है। जहां सेंसेक्स 583 अंक यानी 0.75% टूटकर 76,913 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी 180 अंकों की गिरावट के साथ 23,998 पर आ गया। दिनभर के कारोबार में बाजार पर दबाव बना रहा, हालांकि आईटी सेक्टर में कुछ खरीदारी देखने को मिली। मेटल और सरकारी बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई, जिससे बाजार का संतुलन बिगड़ गया।</p>
<p>वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुक रहे हैं, जिससे बाजार में गिरावट आई।</p>
<h5><strong>गिरावट के कारण</strong></h5>
<p>बाजार में गिरावट की मुख्य वजहों में पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव शामिल है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते टकराव से सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका जताई जा रही है। इससे वैश्विक स्तर पर व्यापार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>दूसरी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो 2022 के बाद पहली बार हुआ है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है।</p>
<p>तीसरी वजह अमेरिकी और एशियाई बाजारों में आई कमजोरी है। साउथ कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं, अमेरिका में डाउ जोन्स और S&amp;P 500 में कमजोरी देखने को मिली, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा।</p>
<h5><strong>सेक्टर का हाल</strong></h5>
<p>आज के कारोबार में आईटी सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत रहा और इसमें खरीदारी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में आईटी कंपनियां अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन देती हैं, इसलिए निवेशक इस सेक्टर की ओर रुख करते हैं।</p>
<p>वहीं, मेटल और सरकारी बैंकिंग शेयरों में दबाव बना रहा। इन सेक्टर्स पर वैश्विक मांग में कमी और आर्थिक अनिश्चितता का असर देखने को मिला। एक दिन पहले यानी 29 अप्रैल को बाजार में तेजी रही थी। उस दिन सेंसेक्स 609 अंक चढ़कर 77,496 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 24,178 के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, यह तेजी टिक नहीं पाई और अगले ही दिन बाजार में गिरावट आ गई।</p>
<p>बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा समय में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाओं पर निर्भर है। विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतें और जियोपॉलिटिकल हालात निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं।इस गिरावट का असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर भी पड़ा है। छोटे निवेशकों में चिंता बढ़ी है, जबकि संस्थागत निवेशक सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:17:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>सेंसेक्स 852 अंक गिरकर 77,664 पर बंद, निफ्टी 24,173 पर</title>
                                    <description><![CDATA[शेयर बाजार गिरावट में ऑटो और बैंकिंग सेक्टर दबाव में, सेंसेक्स में भारी बिकवाली शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ग्लोबल तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार दबाव में दिखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-fell-852-points-and-closed-at-77664-nifty-closed/article-51936"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-23t155915.807.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 23 अप्रैल को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">BSE Sensex</span></span> 852 अंकों यानी 1.09% की गिरावट के साथ 77,664 पर बंद हुआ, जबकि <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Nifty 50</span></span> 205 अंक फिसलकर 24,173 के स्तर पर आ गया। दिनभर के कारोबार में बाजार पर दबाव बना रहा, जिसमें खासकर ऑटो और सरकारी बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।</p>
<p>विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है। हालांकि फार्मा और मीडिया सेक्टर में सीमित खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक थामने की कोशिश की।</p>
<h5><strong>ग्लोबल असर बढ़ा</strong></h5>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> द्वारा सीजफायर की समयसीमा बढ़ाने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। अमेरिकी नौसेना की ओर से ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी है, जबकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों को कब्जे में लिया है।</p>
<p>इस घटनाक्रम से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता घटी है और वे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।</p>
<h5><strong>सेक्टरवार स्थिति</strong></h5>
<p>आज के कारोबार में ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव रहा, जबकि सरकारी बैंकिंग शेयर भी गिरावट में रहे। इसके उलट फार्मा और मीडिया शेयरों में हल्की खरीदारी देखी गई, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला।</p>
<p>एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा, जहां कुछ इंडेक्स में तेजी और कुछ में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, 22 अप्रैल को अमेरिकी बाजारों में बढ़त देखने को मिली थी, लेकिन उसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर नहीं दिखा।</p>
<p>बुधवार, 22 अप्रैल को भी बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 757 अंक और निफ्टी 199 अंक नीचे बंद हुए थे। लगातार दो दिन की गिरावट ने बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 22 अप्रैल को करीब 2,000 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। वहीं इस महीने अब तक कुल 44,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिकवाली हो चुकी है।विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी बाजार के लिए चिंता का विषय है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे महंगाई और आयात लागत बढ़ने की आशंका है। इसका असर आने वाले दिनों में कॉर्पोरेट मुनाफे और बाजार की चाल पर पड़ सकता है।</p>
<p>विश्लेषकों के मुताबिक, जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती नहीं है, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:01:04 +0530</pubDate>
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