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                <title>Satna News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>8 साल बाद विंध्य विकास प्राधिकरण में नई नियुक्तियां, संसाधनों के बिना विकास की बड़ी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व विधायक पंचू लाल प्रजापति बने अध्यक्ष, 10 जिलों के विकास की जिम्मेदारी; कांग्रेस ने नियुक्तियों को बताया राजनीतिक डैमेज कंट्रोल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/new-appointments-in-vindhya-development-authority-after-8-years-big/article-56290"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/vindhya-vikas-pradhikaran.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार ने करीब आठ साल बाद विंध्य विकास प्राधिकरण को नई नेतृत्व टीम सौंपते हुए क्षेत्रीय विकास को लेकर एक नई शुरुआत का संकेत दिया है। सरकार ने पूर्व विधायक पंचू लाल प्रजापति को प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि रीवा के डॉ. अजय सिंह और सतना के संजय तीर्थनी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। लंबे समय से निष्क्रिय पड़े इस प्राधिकरण में हुई इन नियुक्तियों के बाद विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि नियुक्तियों के साथ ही कई सवाल भी सामने आए हैं, क्योंकि प्राधिकरण के पास फिलहाल न तो स्थायी कार्यालय है और न ही कोई अलग बजट निर्धारित किया गया है। विंध्य विकास प्राधिकरण का गठन क्षेत्र के समग्र और संतुलित विकास के उद्देश्य से किया गया था। इसके अंतर्गत रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, मैहर, मऊगंज और डिंडोरी जैसे दस जिले आते हैं। यह पूरा इलाका लंबे समय से विकास के कई मानकों पर प्रदेश के अन्य हिस्सों से पीछे माना जाता रहा है। सड़क, उद्योग, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं होने की शिकायतें लगातार उठती रही हैं। ऐसे में सरकार की ओर से प्राधिकरण को फिर से सक्रिय करने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि नियुक्तियों के तुरंत बाद सबसे बड़ा सवाल संसाधनों को लेकर खड़ा हो गया है। प्राधिकरण के पास वर्तमान में अपना कोई स्थायी कार्यालय नहीं है। बताया जा रहा है कि पहले जिस भवन से इसका संचालन होता था, वहां अब आईटी पार्क का निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे में नए अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के लिए अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही प्राधिकरण के लिए अलग से किसी बजट की घोषणा भी अब तक नहीं की गई है। जानकारों का कहना है कि बिना वित्तीय संसाधनों और प्रशासनिक ढांचे के विकास योजनाओं को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। विंध्य क्षेत्र के लोग भी इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि आखिर प्राधिकरण की भूमिका आने वाले समय में कितनी प्रभावी होगी। क्षेत्र में लंबे समय से रोजगार के अवसर बढ़ाने, औद्योगिक निवेश आकर्षित करने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की मांग उठती रही है। कई परियोजनाएं कागजों में बनीं लेकिन उन्हें अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। ऐसे में लोगों की उम्मीद है कि नई टीम केवल औपचारिक नियुक्तियों तक सीमित न रहकर वास्तविक विकास योजनाओं पर काम करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर, कांग्रेस ने इन नियुक्तियों को लेकर सरकार को घेरा है। रीवा जिला कांग्रेस अध्यक्ष इंजीनियर राजेंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास की बजाय राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि जिन नेताओं को संगठन या सत्ता में स्थान नहीं मिल पाया, उन्हें समायोजित करने के लिए ऐसे पदों का उपयोग किया जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि यदि सरकार वास्तव में विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर होती तो पहले कार्यालय, बजट और कार्ययोजना की स्पष्ट व्यवस्था करती। वहीं, प्राधिकरण के नव नियुक्त पदाधिकारियों ने इन आशंकाओं को खारिज किया है। उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री स्वयं विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर हैं और जल्द ही कार्यालय तथा अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल रीवा के सिविल लाइन क्षेत्र में अस्थायी कार्यालय की व्यवस्था की जा रही है। आवश्यकता के अनुसार बजट भी उपलब्ध कराया जाएगा। अध्यक्ष पंचू लाल प्रजापति ने भी कहा कि विंध्य के लिए नई विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी और क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकताएं तय होंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विंध्य विकास प्राधिकरण का इतिहास भी क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा रहा है। वर्ष 1948 में विंध्य प्रदेश एक अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में अस्तित्व में था और उसकी राजधानी रीवा हुआ करती थी। बाद में राज्य पुनर्गठन के साथ यह क्षेत्र मध्य प्रदेश का हिस्सा बन गया। क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और विकास को गति देने के उद्देश्य से 27 सितंबर 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विंध्य विकास प्राधिकरण की स्थापना की थी। अजय प्रताप सिंह इसके पहले अध्यक्ष बने थे, जबकि वर्ष 2017 में सुभाष सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पिछले आठ वर्षों से प्राधिकरण लगभग निष्क्रिय स्थिति में था और समय-समय पर इसके भविष्य को लेकर अटकलें भी लगती रहीं। कई बार इसके समाप्त किए जाने की चर्चाएं भी सामने आईं। अब नई नियुक्तियों के बाद एक बार फिर उम्मीदें जागी हैं। हालांकि असली परीक्षा आने वाले महीनों में होगी, जब यह देखा जाएगा कि प्राधिकरण केवल राजनीतिक नियुक्तियों तक सीमित रहता है या वास्तव में विंध्य क्षेत्र के विकास का प्रभावी माध्यम बन पाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:04:26 +0530</pubDate>
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                <title>MP के सतना में पागल कुत्ते से मचा हाहाकार! 40 से ज्यादा लोग हुए अस्पताल में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[सतना में पागल कुत्ते के हमले में 40 से अधिक लोग घायल। सभी को अस्पताल में भर्ती कर एंटी-रेबीज टीका लगाया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mad-dog-creates-chaos-in-mps-satna-more-than-40/article-51948"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/satna-dog-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मध्य प्रदेश के सतना में गुरुवार शाम एक पागल कुत्ते के हमले ने शहर को दहशत में डाल दिया। व्यस्त बाजार और रिहायशी इलाकों में अचानक आक्रामक हुए कुत्ते ने एक के बाद एक करीब 40 से अधिक लोगों को काट लिया। घायलों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागना शुरू कर दिया। सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है और एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को गंभीर मानते हुए अतिरिक्त स्टाफ तैनात कर दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">घटना शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में हुई, जहां अचानक कुत्ते ने राह चलते लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, कुत्ता बेहद आक्रामक था और वह लोगों के हाथ-पैर पर झपट रहा था। कई लोग सड़क पर ही गिर पड़े, जबकि अन्य लोग जान बचाने के लिए आसपास की दुकानों और घरों में घुस गए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">घायल सुंदर लाल साकेत ने बताया कि वह बाजार जा रहे थे, तभी पीछे से कुत्ते ने हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक वह संभलते, कुत्ते ने उनके पैर में गहरा घाव कर दिया। आसपास कई अन्य लोग भी घायल अवस्था में पड़े थे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अस्पताल में हड़कंप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">जिला अस्पताल में एक साथ बड़ी संख्या में मरीज पहुंचने से इमरजेंसी वार्ड में हड़कंप मच गया। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत इलाज शुरू किया और घायलों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">जिला चिकित्सालय के प्रशासक डॉ. शरद दुबे ने बताया कि एक ही कुत्ते द्वारा इतने लोगों को काटने की घटना गंभीर है। उनके अनुसार, सभी मरीजों को प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है और उन्हें निगरानी में रखा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है और समय पर इलाज बेहद जरूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">नगर निगम पर सवाल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">लोगों का कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन नगर निगम ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते आवारा और आक्रामक कुत्तों को पकड़ने की व्यवस्था की गई होती, तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था। फिलहाल नगर निगम की टीम हमलावर कुत्ते को पकड़ने के प्रयास में जुटी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पृष्ठभूमि की बात करें तो सतना समेत कई शहरों में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार बढ़ रही है। पहले भी कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने का मामला चिंता बढ़ाने वाला है। यह घटना सार्वजनिक सुरक्षा और शहरी प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े करती है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">प्रशासन के सामने अब चुनौती है कि वह न सिर्फ हमलावर कुत्ते को जल्द पकड़ सके, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस रणनीति भी बनाए। विशेषज्ञों का मानना है कि रेबीज नियंत्रण, टीकाकरण और आवारा पशुओं के प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 18:17:28 +0530</pubDate>
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