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                <title>healthcare news - दैनिक जागरण</title>
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                <title>मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पांच मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई। याचिका में भर्ती नियमों के उल्लंघन का दावा किया गया है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया और पूर्व की गई भर्तियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/high-court-bans-direct-recruitment-of-deans-in-medical-colleges/article-57740"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-medical-college-dean.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों में डीन पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने 18 मई 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश 30 जून को जस्टिस विशाल धागत की एकलपीठ ने सुनाया। अदालत के इस अंतरिम फैसले के बाद संबंधित भर्ती प्रक्रिया फिलहाल स्थगित हो गई है और अब सरकार को भर्ती नियमों के अनुरूप अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। यह मामला रीवा के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. मनोज इंदुलकर द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिका में दावा किया गया कि मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा भर्ती नियम, 2023 के अनुसार डीन का पद शत-प्रतिशत पदोन्नति से भरा जाना निर्धारित है। ऐसे में इन पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करना नियमों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एल.सी. पाटनी ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि जब सेवा नियम स्पष्ट रूप से पदोन्नति का प्रावधान करते हैं, तब प्रत्यक्ष भर्ती की प्रक्रिया शुरू करना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। इन दलीलों पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत ने भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला सुनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट के इस आदेश का सीधा असर प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों पर पड़ेगा। इनमें नए मेडिकल कॉलेज बुधनी, छतरपुर और दमोह के अलावा दो अन्य कॉलेज भी शामिल हैं, जहां डीन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी। इन संस्थानों में प्रशासनिक नेतृत्व की नियुक्ति अब न्यायालय के अंतिम निर्णय तक प्रभावित रह सकती है। नए मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए डीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया रुकने से विभाग को वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखनी पड़ सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर एसोसिएशन (पीएमटीए) ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का स्वागत किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीया ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा सेवा भर्ती नियमों में डीन का पद पूरी तरह पदोन्नति का पद निर्धारित किया गया है। इसके बावजूद सरकार ने सीधी भर्ती का रास्ता अपनाया, जो नियमों की भावना के अनुरूप नहीं था। उनका कहना है कि वरिष्ठ शिक्षकों को उनके अनुभव और सेवा के आधार पर पदोन्नति का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतिम सुनवाई में भी अदालत सेवा नियमों को ध्यान में रखते हुए निर्णय देगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले को और दिलचस्प बनाने वाली बात यह है कि इसी बीच सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 30 जून को सभी विभागों को पदोन्नति प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन के विधिक अभिमत के आधार पर जारी किए गए। विधिक राय में कहा गया कि पदोन्नति नियम-2025 पर किसी भी न्यायालय द्वारा अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है। इसलिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित कर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि ऐसी सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। ऐसे में एक ओर सरकार पदोन्नति प्रक्रिया जारी रखने की बात कर रही है, जबकि दूसरी ओर चिकित्सा शिक्षा विभाग में डीन पदों पर सीधी भर्ती को लेकर न्यायिक विवाद खड़ा हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद वर्ष 2024 में हुई डीन की सीधी नियुक्तियां भी चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। प्रदेश के 13 ऑटोनॉमस मेडिकल कॉलेजों में डीन के पदों को दो वर्ष पहले वैधानिक कारणों का हवाला देकर शासकीय घोषित किया गया था। इसके बाद नए मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए कुल 19 डीन पदों पर सीधी भर्ती की गई थी। वर्तमान में इनमें से दो पद रिक्त बताए जा रहे हैं, जबकि तीन नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने वाले हैं। इन्हीं पांच रिक्त पदों को भरने के लिए 18 मई 2026 को नया भर्ती विज्ञापन जारी किया गया था। अब अदालत द्वारा इस विज्ञापन पर रोक लगाए जाने के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि यदि सेवा नियमों में वास्तव में पदोन्नति का ही प्रावधान है, तो पहले की गई सीधी नियुक्तियों की वैधानिक स्थिति क्या होगी। हालांकि इस संबंध में अभी अदालत ने कोई टिप्पणी नहीं की है और यह विषय भविष्य की सुनवाई में सामने आ सकता है। अब इस मामले में राज्य सरकार को निर्धारित समय सीमा के भीतर हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना होगा। सरकार यह स्पष्ट करेगी कि किन परिस्थितियों और कानूनी आधार पर डीन पदों के लिए सीधी भर्ती का निर्णय लिया गया। इसके बाद अदालत दोनों पक्षों की दलीलों और सेवा भर्ती नियमों का परीक्षण करेगी। यदि अदालत यह मानती है कि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो भर्ती प्रक्रिया में व्यापक बदलाव संभव हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 09:58:09 +0530</pubDate>
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                <title>धूप में तड़पता रहा बीमार बेटा, स्ट्रेचर धकेलते रहे माता-पिता</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर के एमवाय और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के बीच करीब एक किलोमीटर तक बीमार बच्चे को खुद ले गए परिजन, वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/sick-son-kept-suffering-in-the-sun-parents-kept-pushing/article-55178"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-hospital-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">इंदौर के सरकारी अस्पताल परिसर से सामने आई एक तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार दोपहर भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच एक बीमार बच्चे को उसके माता-पिता खुद स्ट्रेचर पर धकेलते हुए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक ले जाते दिखाई दिए। करीब एक किलोमीटर लंबे रास्ते में मां अपने बेटे को धूप से बचाने के लिए बार-बार पानी से चुन्नी भिगोकर उसके ऊपर डालती रही, जबकि पिता स्ट्रेचर को आगे बढ़ाते रहे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन और मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर बहस शुरू हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामला 12 वर्षीय आदर्श नामक बच्चे का बताया जा रहा है, जो रीढ़ की हड्डी से जुड़ी एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है। परिजनों के अनुसार बच्चे का पिछले लगभग 15 दिनों से इलाज चल रहा है। पहले उसे न्यू चेस्ट वार्ड में भर्ती किया गया था, जिसके बाद उसे एमवाय अस्पताल में उपचार के लिए रखा गया। शनिवार को चिकित्सकों ने उसे आगे की जांच और सलाह के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल रेफर किया। परिवार को उम्मीद थी कि अस्पताल प्रशासन मरीज को वहां तक पहुंचाने की व्यवस्था करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मजबूरी में माता-पिता को खुद ही स्ट्रेचर संभालना पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd">दोपहर की तेज धूप में अस्पताल परिसर का रास्ता तय करना परिवार के लिए बेहद कठिन साबित हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बच्चा दर्द और गर्मी से परेशान दिखाई दे रहा था। मां लगातार पानी की मदद से अपनी चुन्नी भिगोती और उसे बेटे के शरीर पर डाल देती ताकि धूप का असर कम हो सके। वहीं पिता स्ट्रेचर को धक्का देते हुए अस्पताल से अस्पताल तक का सफर पूरा करने की कोशिश करते रहे। इस दौरान उन्होंने कई बार आसपास मौजूद लोगों और कर्मचारियों से मदद की उम्मीद भी की, लेकिन तत्काल कोई सहायता नहीं मिल सकी।</p>
<p class="isSelectedEnd">परिजनों का आरोप है कि जब वे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंचे तो वहां उन्हें बताया गया कि बच्चे को भर्ती करने की जरूरत नहीं है। केवल मेडिकल रिकॉर्ड और फाइल देखने के लिए बुलाया गया था। यह जानकारी मिलने के बाद परिवार को एक बार फिर उसी बच्चे को स्ट्रेचर पर लेकर वापस लौटना पड़ा। परिजनों का कहना है कि यदि केवल दस्तावेज देखने थे तो उन्हें पहले ही इसकी जानकारी दी जा सकती थी। इससे बच्चे और परिवार को अनावश्यक परेशानी नहीं उठानी पड़ती।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना के बाद अस्पताल परिसर में मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आरोप है कि अस्पतालों में मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड या एक भवन से दूसरे भवन तक पहुंचाने के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद जरूरत पड़ने पर स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और सहायक कर्मचारी उपलब्ध नहीं हो पाते। कई मरीजों और उनके परिजनों को मजबूरी में खुद ही व्यवस्था संभालनी पड़ती है। स्वास्थ्य सेवाओं पर हर महीने बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद ऐसी घटनाएं सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के मुताबिक जिस आउटसोर्स कंपनी को अस्पताल परिसर में कई सेवाओं की जिम्मेदारी दी गई है, वह पहले भी विवादों में रह चुकी है। हाल के महीनों में सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक मामलों को लेकर भी कंपनी की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए थे। कुछ अन्य मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में यह नया मामला एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वायरल वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जानकारी जुटाने की बात कही है। एमवाय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जा रही है। उनके अनुसार यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चे को किस अस्पताल से रेफर किया गया था और किन परिस्थितियों में परिजनों को स्वयं स्ट्रेचर लेकर जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी एकत्र करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के प्रभारी अधिकारियों ने भी मामले की जानकारी लेने की बात कही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्चे की स्थिति, उसकी बीमारी और रेफरल प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि व्यवस्था में किस स्तर पर चूक हुई। यह घटना केवल एक परिवार की परेशानी तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो ने लोगों को झकझोर दिया है। कई लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के साथ-साथ मरीजों को सम्मानजनक और मानवीय सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 13:37:13 +0530</pubDate>
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