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                <title>Online Safety - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Online Safety RSS Feed</description>
                
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                <title>बाल यौन शोषण कंटेंट पर सरकार सख्त, इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta को भेजा नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[7 दिन में मांगा जवाब, विवादित विज्ञापन तुरंत हटाने और ऐसे कंटेंट की पहुंच रोकने के निर्देश; सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर बढ़ी सख्ती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/government-strict-on-child-sexual-abuse-content-sent-notice-to/article-57915"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/instagram-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material) से जुड़े विज्ञापनों के प्रसार को गंभीरता से लेते हुए उसकी पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी से सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है और निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापनों और संबंधित कंटेंट को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक और हटाया जाए। यह कार्रवाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry) ने 4 जुलाई को जारी नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी प्रकार का ऐसा कंटेंट या विज्ञापन बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देता है या उपयोगकर्ताओं को ऐसे अवैध कंटेंट तक पहुंचने में मदद करता है, तो उसे तत्काल हटाया जाना चाहिए। सरकार ने Meta से यह भी पूछा है कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे दिखाई दिए और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए कंपनी क्या कदम उठाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>BBC की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन चल रहे थे जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया गया। रिपोर्ट के अनुसार इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ताओं को दूसरे प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से टेलीग्राम चैनलों की ओर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर अवैध सामग्री बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही थी। ऐसे विज्ञापन Meta के मॉडरेशन सिस्टम से स्वीकृति मिलने के बाद ही प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहे थे। जब इस संबंध में शिकायत की गई तो शुरुआती स्तर पर संबंधित विज्ञापन को कंपनी की कम्युनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं माना गया। बाद में मामला सार्वजनिक होने के बाद Meta ने कई विज्ञापन हटाने, संबंधित अकाउंट निलंबित करने और संदिग्ध लिंक हटाने की बात स्वीकार की।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सरकार ने मांगा विस्तृत स्पष्टीकरण</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने Meta से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में ऐसी चूक कैसे हुई। साथ ही यह भी पूछा गया है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से तकनीकी और प्रशासनिक उपाय किए जाएंगे। सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उनके प्लेटफॉर्म का उपयोग किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों के लिए न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस जारी किया हो। इससे पहले 1 जुलाई को सरकार ने WhatsApp के यूजरनेम फीचर को लेकर भी कंपनी से जवाब मांगा था। लगातार दूसरी बार नोटिस जारी होने से स्पष्ट है कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर अधिक सतर्क और सख्त रुख अपना रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में क्या कहता है कानून</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कानून के अनुसार बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी किसी भी प्रकार की सामग्री का निर्माण, संग्रह, डाउनलोड, खरीद, बिक्री, प्रसारण या साझा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67B के तहत ऐसे मामलों में कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। पहली बार दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष तक की कैद और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। दोबारा अपराध करने पर सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा अन्य संबंधित कानूनों के तहत भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों पर यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वे अवैध और आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर त्वरित कार्रवाई करें। इन नियमों के अनुसार कंपनियों को जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना और शिकायत मिलने पर समयबद्ध तरीके से सामग्री हटाना अनिवार्य है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>यदि ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों की सलाह है कि यदि किसी उपयोगकर्ता को इस प्रकार का कोई भी संदिग्ध या अवैध कंटेंट दिखाई देता है तो उसे किसी भी स्थिति में डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल प्लेटफॉर्म के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। इंटरनेट और सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है कि इन प्लेटफॉर्म पर मौजूद अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए।  केवल सरकार या सोशल मीडिया कंपनियां ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और समाज की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में जागरूक करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों को दें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ेगी निगरानी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार की इस कार्रवाई को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन, विज्ञापन स्वीकृति प्रक्रिया और सुरक्षा तंत्र की अधिक सख्ती से निगरानी की जाएगी। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ आईटी कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाना और बच्चों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 13:31:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ब्रिटेन में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का बड़ा ऐलान, TikTok से Instagram तक कई प्लेटफॉर्म होंगे प्रतिबंधित; बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को बताया प्राथमिकता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/social-media-ban-on-children-under-16-years-of-age/article-56071"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/uk-social-media-ban.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ब्रिटेन ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि देश में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों को ऑनलाइन खतरों, साइबर बुलिंग, हानिकारक कंटेंट और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उठाया जा रहा है। इस घोषणा के बाद ब्रिटेन उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जो बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए सख्त कानून बना रहे हैं। डाउनिंग स्ट्रीट में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री स्टार्मर ने साफ कहा कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी व्यावसायिक हित से ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का विरोध करती हैं तो सरकार पीछे हटने वाली नहीं है। उनके मुताबिक डिजिटल दुनिया ने बच्चों को नई संभावनाएं जरूर दी हैं, लेकिन इसके साथ कई गंभीर जोखिम भी सामने आए हैं। सरकार का मानना है कि लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम, ऑनलाइन उत्पीड़न और एल्गोरिदम आधारित कंटेंट बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर रहा है। नई व्यवस्था के तहत ब्रिटेन में सोशल मीडिया अकाउंट बनाने की न्यूनतम आयु 13 साल से बढ़ाकर 16 साल की जाएगी। इसका असर TikTok, Instagram, Facebook, Snapchat, X, YouTube, Reddit, Threads, Twitch और Kick जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे अकाउंट न बना सकें। हालांकि WhatsApp और Signal जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को फिलहाल इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है क्योंकि इन्हें मुख्य रूप से निजी संचार का माध्यम माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार केवल आयु सीमा बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। अधिकारियों के अनुसार नए कानून को प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। बच्चों द्वारा गलत उम्र बताकर अकाउंट बनाने की समस्या को देखते हुए एज-वेरीफिकेशन सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके लिए फेस स्कैनिंग तकनीक, डिजिटल आईडी और अन्य सत्यापन उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार का दावा है कि इससे उम्र छिपाकर अकाउंट बनाने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। ब्रिटिश सरकार कुछ और सख्त कदमों पर भी विचार कर रही है। इनमें 16 और 17 साल के किशोरों के लिए रात के समय सोशल मीडिया उपयोग पर सीमाएं लगाने और कुछ एआई चैटबॉट्स तक पहुंच नियंत्रित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि देर रात तक सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों की नींद, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है। इसी वजह से डिजिटल कर्फ्यू जैसे विकल्पों पर चर्चा हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में बच्चों और किशोरों के बीच सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही अवसाद, चिंता, आत्मविश्वास की कमी और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी समस्याओं के मामले भी सामने आए हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि लंबे समय तक सोशल मीडिया पर रहने वाले बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां अधिक देखी गई हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई देश इस दिशा में नए कानून बना रहे हैं। ब्रिटेन का यह फैसला ऑस्ट्रेलिया के मॉडल से प्रेरित माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2024 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू कर दुनिया का पहला ऐसा देश बनने का दावा किया था। अब ब्रिटेन ने न केवल उसी दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि कुछ मामलों में उससे भी अधिक सख्त नियम लागू करने की तैयारी दिखाई है। कनाडा, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नए नियमों पर काम चल रहा है। हालांकि इस फैसले को लेकर बहस भी शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन प्रतिबंध के साथ डिजिटल शिक्षा और जागरूकता पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि केवल प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। बच्चों और अभिभावकों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की जानकारी देना भी जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:25:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अक्षय कुमार की बेटी से आपत्तिजनक मांग करने वाला आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[ऑनलाइन गेम के दौरान अक्षय कुमार की बेटी से न्यूड फोटो मांगने का मामला, महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने की कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/accused-who-made-objectionable-demands-from-akshay-kumars-daughter-arrested/article-52096"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/bollywood---2026-04-25t151226.216.jpg" alt=""></a><br /><p>बॉलीवुड अभिनेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Akshay Kumar</span></span> की बेटी से ऑनलाइन आपत्तिजनक मांग करने वाले आरोपी को महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला साल 2025 का है, जब एक ऑनलाइन गेम के दौरान आरोपी ने नाबालिग से अनुचित तस्वीरें भेजने की मांग की थी। घटना की जानकारी खुद अक्षय कुमार ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में साझा की थी, जिसके बाद मामला सुर्खियों में आया था।  पीड़िता ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत परिवार को इसकी जानकारी दी, जिससे समय रहते पुलिस तक मामला पहुंच सका। साइबर पुलिस ने जांच के बाद आरोपी की पहचान कर उसे हिरासत में लिया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बच्चों के बीच ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।</p>
<p>महाराष्ट्र साइबर पुलिस के ADGP यशस्वी यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान इस गिरफ्तारी की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है, हालांकि गिरफ्तारी की सटीक तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है।</p>
<h5><strong>कैसे हुआ मामला</strong></h5>
<p>यह घटना उस समय हुई जब अक्षय कुमार की बेटी एक ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेम खेल रही थी। उसी दौरान एक अनजान व्यक्ति ने चैट के जरिए बातचीत शुरू की और बाद में अनुचित मांग रखी।</p>
<p>अक्षय कुमार ने अक्टूबर 2025 में आयोजित एक साइबर अवेयरनेस कार्यक्रम में इस घटना का जिक्र करते हुए बताया था कि उनकी बेटी ने तुरंत गेम बंद कर दिया और अपनी मां को इसकी जानकारी दी। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।</p>
<p>शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने डिजिटल ट्रैकिंग और तकनीकी जांच के जरिए आरोपी तक पहुंच बनाई। शुरुआती जांच में यह मामला साइबर अपराध की श्रेणी में पाया गया।पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। </p>
<p>अक्षय कुमार ने भी अपने संबोधन में सुझाव दिया था कि स्कूलों में बच्चों के लिए नियमित रूप से साइबर सुरक्षा से जुड़े सत्र आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि वे इस तरह के खतरों को पहचान सकें और सही कदम उठा सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 15:19:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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