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                <title>Agriculture News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Agriculture News RSS Feed</description>
                
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                <title>MP के 81 लाख किसानों को 1,634 करोड़ की सौगात की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[शिवराज सिंह चौहान ने पीएम किसान की 23वीं किस्त की जानकारी दी, किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर होंगे करोड़ों रुपये]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a34d1b9e3a3d/article-56365"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pm-kisan-yojana-23rd-installment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 1,634 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जाएगी। यह राशि राज्य के करीब 81.67 लाख किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह भुगतान 20 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से जारी होने वाली 23वीं किस्त के साथ जुड़ा हुआ है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले यह सहायता किसानों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। उन्होंने बताया कि देशभर के करीब 9 करोड़ किसानों के खातों में इस किस्त के तहत लगभग 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जाएगी। इससे पहले अब तक 22 किस्तों के माध्यम से किसानों को करीब 4.28 लाख करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने इसे सरकार की किसान हितैषी नीतियों का हिस्सा बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान मीडिया से बातचीत में जब मीनाक्षी नटराजन के सत्याग्रह से जुड़े सवाल पूछे गए, तो शिवराज सिंह चौहान ने हल्के अंदाज में कहा कि “अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।” उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा पैदा कर दी है। हालांकि उन्होंने आगे किसी विवाद में न पड़ते हुए बातचीत को किसानों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रखा।केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत देश के किसानों को लगातार आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के किसानों को भी अब पूरी तरह इस योजना का लाभ मिल रहा है और राज्य के करीब 44 लाख से अधिक किसान इससे जुड़े हैं। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम को और व्यापक बनाने के लिए सरकार ने 20 जून को पीएम किसान उत्सव दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों, 113 आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और पंचायत स्तर तक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अनुमान है कि करीब 4 करोड़ किसान इन आयोजनों से जुड़कर प्रधानमंत्री का संबोधन सुनेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार मानसून और अल नीनो की स्थिति पर भी लगातार नजर बनाए हुए है। मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए राज्यों के साथ मिलकर कंटीजेंसी प्लान तैयार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के 16 जिलों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां कम वर्षा की संभावना जताई गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में कम पानी वाली फसलों, वैकल्पिक खेती और बेहतर बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। साथ ही यदि बारिश में कमी या अंतराल होता है, तो किसानों को तुरंत राहत देने के लिए जिला स्तर पर योजनाएं लागू की जाएंगी।पराली प्रबंधन को लेकर भी केंद्र सरकार ने राज्यों को सख्त और प्रभावी कदम उठाने की सलाह दी है। विशेषकर धान उत्पादक राज्यों में फसल अवशेष प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है ताकि पर्यावरण प्रदूषण को कम किया जा सके और कृषि व्यवस्था को संतुलित रखा जा सके। सरकार का फोकस किसानों की आय बढ़ाने, जोखिम कम करने और कृषि क्षेत्र को अधिक स्थिर बनाने पर है। पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त इसी दिशा में एक और बड़ा कदम मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 11:15:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रीवा का सुंदरजा आम बना ग्लोबल ब्रांड, अबूधाबी जाएगी बड़ी खेप</title>
                                    <description><![CDATA[जीआई टैग से मिली नई पहचान, बेमिसाल मिठास और खुशबू के दम पर विदेशों में बढ़ी मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/rewas-sundarja-mango-becomes-global-brand-large-consignment-will-go/article-55991"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sundarja-mango-rewa.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के रीवा जिले का विश्व प्रसिद्ध सुंदरजा आम अब देश की सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी खास पहचान बना रहा है। अपनी अनोखी मिठास, मनमोहक खुशबू और रेशा-मुक्त बनावट के कारण यह आम लगातार लोकप्रिय होता जा रहा है। रीवा की धरती पर पैदा होने वाला यह खास आम अब वैश्विक बाजार में एक प्रीमियम उत्पाद के रूप में देखा जा रहा है। इस साल इसकी एक बड़ी खेप अबूधाबी भेजी जाने की तैयारी है, जिसकी अग्रिम बुकिंग पहले ही हो चुकी है। इससे न केवल रीवा के किसानों और बाग मालिकों में उत्साह है, बल्कि पूरे क्षेत्र को आर्थिक रूप से भी फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। सुंदरजा आम का इतिहास रीवा की रियासतकालीन विरासत से जुड़ा हुआ है। कभी यह आम केवल गोविंदगढ़ किले के शाही बगीचों तक सीमित था और राजघरानों की पसंद माना जाता था। समय के साथ इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई और अब यह आम देश के कई बड़े शहरों के साथ विदेशों तक पहुंच चुका है। दिल्ली, मुंबई, गुजरात, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से हर साल बड़ी संख्या में लोग सुंदरजा आम की अग्रिम बुकिंग कराते हैं। इसके अलावा फ्रांस, इंग्लैंड, अमेरिका और खाड़ी देशों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा स्थित कुठुलिया फल अनुसंधान केंद्र में आम की लगभग 237 प्रजातियों पर शोध कार्य किया जाता है। इन सभी प्रजातियों में सुंदरजा आम को विशेष महत्व प्राप्त है। इसकी गुणवत्ता और विशिष्ट पहचान को देखते हुए इसे भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग भी मिल चुका है। जीआई टैग मिलने के बाद इस आम की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग से न केवल उत्पाद की विश्वसनीयता बढ़ती है, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य भी मिलता है। सुंदरजा आम की सबसे बड़ी खासियत इसकी रेशा-मुक्त बनावट है। आमतौर पर कई आमों में रेशे अधिक होते हैं, लेकिन सुंदरजा पूरी तरह मुलायम गूदे वाला होता है। इसके अलावा इसमें मिठास का स्तर संतुलित माना जाता है। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जाता है कि मधुमेह के मरीज सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं, हालांकि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी सलाह के लिए विशेषज्ञ की राय जरूरी होती है। इसकी सुगंध इतनी खास होती है कि आम खाने के बाद लंबे समय तक हाथों में इसकी खुशबू महसूस की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गोविंदगढ़ और कुठुलिया अनुसंधान केंद्र में उगाए जाने वाले सुंदरजा आमों के रंग में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। गोविंदगढ़ का सुंदरजा आम हल्की सफेद आभा लिए होता है, जबकि अनुसंधान केंद्र में उगने वाला आम हल्के हरे रंग का दिखाई देता है। हालांकि स्वाद और सुगंध दोनों ही जगहों के आमों की सबसे बड़ी पहचान हैं। फल वैज्ञानिकों का मानना है कि गोविंदगढ़ क्षेत्र की मिट्टी और वहां की जलवायु इस आम को विशिष्ट स्वाद प्रदान करती है। बाजार में बढ़ती मांग का असर बगीचों की नीलामी पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जिन बगीचों की बोली कुछ साल पहले एक लाख रुपये के आसपास लगती थी, उनकी कीमत अब कई गुना बढ़ चुकी है। इस वर्ष कुछ बगीचों की नीलामी 20 लाख रुपये से अधिक में हुई है। ठेकेदारों और व्यापारियों का कहना है कि सुंदरजा आम की मांग इतनी अधिक है कि उपलब्ध उत्पादन उसकी तुलना में कम पड़ रहा है। यही वजह है कि हर साल इसकी कीमत और लोकप्रियता दोनों बढ़ रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाल ही में इंदौर में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी सुंदरजा आम की चर्चा हुई थी। वहां मौजूद कई विदेशी प्रतिनिधियों ने इसके स्वाद और गुणवत्ता की सराहना की। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की रुचि और बढ़ी है। अबूधाबी भेजी जा रही खेप को इसी बढ़ती मांग का परिणाम माना जा रहा है। व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में सुंदरजा आम की पहुंच और अधिक देशों तक होगी। फल अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि उत्पादन और निर्यात को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया जाए तो सुंदरजा आम रीवा की पहचान को वैश्विक स्तर पर और मजबूत कर सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नया आधार मिलेगा। फिलहाल सुंदरजा आम की सफलता यह साबित कर रही है कि स्थानीय उत्पाद भी गुणवत्ता और पहचान के दम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग जगह बना सकते हैं। रीवा का यह खास आम अब केवल एक फल नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और कृषि विरासत का प्रतीक बन चुका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:05:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मौसम की मार से एशियाई चावल बाजार में हलचल, भारत में कीमतें फिलहाल स्थिर</title>
                                    <description><![CDATA[अल नीनो और खराब मौसम से वियतनाम-बांग्लादेश प्रभावित, भारत के मजबूत भंडार ने दी राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/asian-rice-market-disrupted-due-to-weather-prices-in-india/article-55170"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-rice-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एशिया के कई देशों में मौसम की अनिश्चितता और अल नीनो के संभावित असर ने चावल बाजार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। वियतनाम में चावल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जबकि बांग्लादेश में भारी बारिश, बाढ़ और हीटवेव के कारण फसल को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इसके विपरीत भारत में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में दिखाई दे रही है। पर्याप्त उत्पादन, सरकारी भंडार और घरेलू आपूर्ति मजबूत रहने के कारण चावल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग के बावजूद भारतीय बाजार पर फिलहाल किसी बड़े दबाव के संकेत नहीं मिले हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चावल दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी का प्रमुख खाद्यान्न है और एशिया इसके उत्पादन और खपत का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में जब किसी बड़े उत्पादक देश में मौसम संबंधी संकट पैदा होता है तो उसका असर वैश्विक बाजार पर भी देखने को मिलता है। इस समय वियतनाम और बांग्लादेश में सामने आई चुनौतियों ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा और कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वियतनाम, जो दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में शामिल है, वहां चावल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार वियतनाम के 5 प्रतिशत ब्रोकन चावल की निर्यात कीमत बढ़कर 415 से 420 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। एक सप्ताह पहले यही कीमत 405 से 410 डॉलर प्रति टन के बीच थी। व्यापारियों का कहना है कि अल नीनो के संभावित प्रभाव और भविष्य में उत्पादन घटने की आशंकाओं ने बाजार को प्रभावित किया है। निर्यातकों और खरीदारों दोनों के बीच सतर्कता बढ़ी है, जिससे कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वियतनाम ने मई महीने में करीब 9.25 लाख टन चावल का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है। वहीं इस साल जनवरी से मई के बीच कुल निर्यात 43 लाख टन तक पहुंच गया। निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद भविष्य की फसल को लेकर चिंता बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की स्थिति सामान्य नहीं रही तो आने वाले महीनों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसका असर कीमतों पर और अधिक दिखाई दे सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर बांग्लादेश की स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक और उपभोक्ता देश होने के बावजूद बांग्लादेश इस समय मौसम की मार झेल रहा है। वहां प्री-मानसून की भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और लगातार बढ़ते तापमान ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 2 लाख टन से अधिक चावल की फसल को नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में खेतों में पानी भर गया, जिससे तैयार फसल बर्बाद हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बांग्लादेश के किसानों का कहना है कि इस बार हीटवेव ने भी उत्पादन पर असर डाला है। अधिक तापमान के कारण धान के पौधों में नमी तेजी से कम हुई और कई क्षेत्रों में पैदावार प्रभावित हुई। धान कटाई का काम भी धीमा पड़ गया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि मौसम की ऐसी स्थिति बनी रहती है तो घरेलू आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि बांग्लादेश को आने वाले समय में अतिरिक्त आयात की जरूरत पड़ सकती है। पहले भी कई मौकों पर बांग्लादेश अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारत से चावल आयात करता रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इन परिस्थितियों के बीच भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दे रही है। दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देशों में शामिल भारत के पास इस समय पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। बाजार में भारतीय 5 प्रतिशत ब्रोकन परबॉयल्ड चावल की कीमत 337 से 345 डॉलर प्रति टन के बीच स्थिर बनी हुई है। वहीं 5 प्रतिशत ब्रोकन व्हाइट राइस का भाव 338 से 344 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया है। व्यापारिक हलकों का कहना है कि भारत में अच्छी पैदावार और पर्याप्त उपलब्धता के कारण कीमतों में किसी बड़ी उथल-पुथल की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई दिल्ली के निर्यात क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य प्रमुख निर्यातक देशों के पास अतिरिक्त स्टॉक सीमित है और वे भविष्य में उत्पादन घटने की आशंका को देखते हुए कीमतें बढ़ा रहे हैं। इसके उलट भारत में मजबूत उत्पादन और सरकारी खरीद व्यवस्था बाजार को संतुलित बनाए हुए है। यह भी कह रहे हैं कि वैश्विक मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि जलवायु से जुड़ी घटनाएं तेजी से बदल रही हैं और उनका असर कृषि क्षेत्र पर सीधे पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एशियाई चावल बाजार में भारत राहत की स्थिति में नजर आ रहा है, लेकिन वियतनाम और बांग्लादेश में सामने आई चुनौतियां इस बात का संकेत हैं कि मौसम की अनिश्चितता आने वाले समय में खाद्यान्न बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है और प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन प्रभावित होता है तो वैश्विक स्तर पर कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में किसानों, व्यापारियों और नीति निर्माताओं की नजर अब आने वाले मानसून और मौसम के रुख पर टिकी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 13:05:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल में CM मोहन यादव की बैठक, किसान योजनाओं पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल बैठक में किसान हितैषी योजनाओं पर चर्चा, कलेक्टरों से भी करेंगे समीक्षा किसान कल्याण वर्ष को लेकर सरकार ने तेज की तैयारी। बैठक के बाद फैसलों को जमीन पर उतारने की रणनीति बनेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/cm-mohan-yadavs-meeting-in-bhopal-brainstorming-on-farmer-schemes/article-52104"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cm-farmer-schemes.jpg" alt=""></a><br /><p>राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मोहन यादव</span></span> ने शनिवार को अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन और नीति विश्लेषण स्कूल में वरिष्ठ अधिकारियों की एक अहम बैठक बुलाई। इस बैठक का फोकस किसान कल्याण वर्ष के तहत लागू की जा रही योजनाओं की समीक्षा और नई घोषणाओं पर रहा। बैठक में कृषि, सहकारिता, पशुपालन, राजस्व, वित्त और ग्रामीण विकास सहित कई विभागों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। सरकार का उद्देश्य किसानों के लिए योजनाओं को और प्रभावी बनाना और उनके क्रियान्वयन की गति तेज करना है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा करेंगे, ताकि लिए गए निर्णयों को तुरंत लागू किया जा सके।</p>
<p>बैठक में विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों ने अपनी-अपनी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पेश की। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत घटाने और सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। इसमें सिंचाई, बिजली, फसल खरीदी और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।</p>
<h5><strong>योजनाओं पर फोकस</strong></h5>
<p>बैठक के दौरान किसान हित में नई योजनाओं और मौजूदा योजनाओं के विस्तार पर मंथन किया गया। अधिकारियों ने सुझाव दिए कि कैसे किसानों को बेहतर बाजार, तकनीकी सहायता और वित्तीय लाभ दिया जा सकता है। बता दें,सरकार खेती को लाभकारी बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ समय पर किसानों तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। इसके साथ ही जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।</p>
<h5><strong>गेहूं खरीदी बढ़ी</strong></h5>
<p>बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने जानकारी दी थी कि प्रदेश में रिकॉर्ड उत्पादन को देखते हुए गेहूं खरीदी का लक्ष्य बढ़ाया गया है। पहले यह लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, जिसे अब बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।</p>
<p>इसके अलावा, सरकार ने गेहूं खरीदी प्रक्रिया को भी आसान बनाया है। अब खरीदी सप्ताह में छह दिन होगी और स्लॉट बुकिंग की तारीख 9 मई तक बढ़ा दी गई है। उड़द की खरीदी पर बोनस देने और किसानों को सस्ते दर पर कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध कराने जैसे फैसले भी चर्चा में रहे।</p>
<p>साथ ही किसानों को अब दिन के समय सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही, दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई समितियों का गठन किया गया है।</p>
<p>इस बैठक का सीधा असर राज्य के किसानों पर पड़ने की उम्मीद है। योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से कृषि क्षेत्र में स्थिरता और आय में वृद्धि संभव मानी जा रही है। </p>
<p>बैठक के बाद मुख्यमंत्री कलेक्टरों के साथ समीक्षा करेंगे, जहां उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि सभी योजनाएं समयबद्ध तरीके से लागू हों। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नीति स्तर पर लिए गए फैसले जमीनी स्तर पर भी असर दिखाएं।</p>
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                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 16:23:42 +0530</pubDate>
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