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                <title>Policy Update - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Policy Update RSS Feed</description>
                
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                <title>गुटखा-तंबाकू पैकेजिंग में बदलाव, प्लास्टिक पाउच पर रोक की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[गुटखा-तंबाकू पैकेजिंग में प्लास्टिक हटाने का प्रस्ताव, FSSAI ने इको-फ्रेंडली मटेरियल अनिवार्य करने का ड्राफ्ट जारी किया देश में गुटखा और पान मसाला की पैकिंग बदलने वाली है।सरकार प्लास्टिक पाउच खत्म कर पर्यावरण अनुकूल विकल्प लागू करने की दिशा में बढ़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/changes-in-gutkha-tobacco-packaging-preparation-to-ban-plastic-pouches/article-52306"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/gutkha-tobacco-packaging.jpg" alt=""></a><br /><p>देश में गुटखा-तंबाकू पैकेजिंग को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों के लिए प्लास्टिक पाउच के उपयोग पर रोक लगाने का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। प्रस्ताव के तहत किसी भी प्रकार के प्लास्टिक या विनाइल आधारित मटेरियल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद किया जा सकता है। इसकी जगह कागज, पेपरबोर्ड और सेल्युलोज जैसे इको-फ्रेंडली मटेरियल को अनिवार्य करने की तैयारी है। यह कदम प्लास्टिक कचरे को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। ड्राफ्ट पर 30 दिनों तक उद्योग, कंपनियों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे। यह प्रस्ताव लागू होने पर देशभर में गुटखा-तंबाकू पैकेजिंग के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।</p>
<p>ड्राफ्ट के मुताबिक, गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की पैकिंग में प्लास्टिक का किसी भी रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसमें विनाइल एसीटेट और अन्य केमिकल युक्त मटेरियल भी शामिल हैं, जिन पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।FSSAI का मानना है कि इन छोटे प्लास्टिक पाउच से बड़े पैमाने पर पर्यावरण प्रदूषण होता है और इन्हें रीसायकल करना भी मुश्किल होता है।</p>
<p><strong>क्या होंगे विकल्प</strong><br />प्रस्ताव के तहत कंपनियों को कागज, गत्ता (पेपरबोर्ड) और सेल्युलोज जैसे प्राकृतिक मटेरियल अपनाने होंगे।ये विकल्प पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।रेगुलेटर के अनुसार, उद्योग इन विकल्पों को आसानी से अपना सकता है और इससे उत्पादन प्रक्रिया पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।</p>
<p>भारत में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पहले भी कई स्तरों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। गुटखा और पान मसाला के छोटे पाउच प्लास्टिक कचरे का बड़ा स्रोत माने जाते हैं, जो सड़कों, नालियों और जल स्रोतों में बड़ी मात्रा में जमा होते हैं।सरकार लगातार प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए नीतिगत बदलाव कर रही है और यह कदम उसी दिशा में एक और पहल माना जा रहा है।</p>
<p>स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, जो कंपनियां पहले से टीन या कांच के कंटेनर्स का उपयोग कर रही हैं, वे उन्हें जारी रख सकती हैं।सूत्रों के मुताबिक, इससे उद्योग को आवश्यक लचीलापन मिलेगा और वे अपने व्यावसायिक मॉडल के अनुसार विकल्प चुन सकेंगे।</p>
<p><strong>उद्योग पर असर</strong><br />इस प्रस्ताव का असर गुटखा और पान मसाला उद्योग पर सीधे तौर पर पड़ सकता है।कंपनियों को नई पैकेजिंग व्यवस्था अपनाने के लिए निवेश और तकनीकी बदलाव करने होंगे हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय में यह बदलाव पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित होगा।</p>
<p>ड्राफ्ट पर 30 दिनों तक सुझाव और आपत्तियां ली जाएंगी। इसके बाद FSSAI अंतिम नियम अधिसूचित करेगा। यदि यह लागू होता है, तो देश में गुटखा-तंबाकू पैकेजिंग पूरी तरह बदल जाएगी और प्लास्टिक पाउच इतिहास बन सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>भोपाल में CM मोहन यादव की बैठक, किसान योजनाओं पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल बैठक में किसान हितैषी योजनाओं पर चर्चा, कलेक्टरों से भी करेंगे समीक्षा किसान कल्याण वर्ष को लेकर सरकार ने तेज की तैयारी। बैठक के बाद फैसलों को जमीन पर उतारने की रणनीति बनेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/cm-mohan-yadavs-meeting-in-bhopal-brainstorming-on-farmer-schemes/article-52104"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cm-farmer-schemes.jpg" alt=""></a><br /><p>राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मोहन यादव</span></span> ने शनिवार को अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन और नीति विश्लेषण स्कूल में वरिष्ठ अधिकारियों की एक अहम बैठक बुलाई। इस बैठक का फोकस किसान कल्याण वर्ष के तहत लागू की जा रही योजनाओं की समीक्षा और नई घोषणाओं पर रहा। बैठक में कृषि, सहकारिता, पशुपालन, राजस्व, वित्त और ग्रामीण विकास सहित कई विभागों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। सरकार का उद्देश्य किसानों के लिए योजनाओं को और प्रभावी बनाना और उनके क्रियान्वयन की गति तेज करना है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा करेंगे, ताकि लिए गए निर्णयों को तुरंत लागू किया जा सके।</p>
<p>बैठक में विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों ने अपनी-अपनी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पेश की। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत घटाने और सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। इसमें सिंचाई, बिजली, फसल खरीदी और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।</p>
<h5><strong>योजनाओं पर फोकस</strong></h5>
<p>बैठक के दौरान किसान हित में नई योजनाओं और मौजूदा योजनाओं के विस्तार पर मंथन किया गया। अधिकारियों ने सुझाव दिए कि कैसे किसानों को बेहतर बाजार, तकनीकी सहायता और वित्तीय लाभ दिया जा सकता है। बता दें,सरकार खेती को लाभकारी बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ समय पर किसानों तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। इसके साथ ही जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।</p>
<h5><strong>गेहूं खरीदी बढ़ी</strong></h5>
<p>बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने जानकारी दी थी कि प्रदेश में रिकॉर्ड उत्पादन को देखते हुए गेहूं खरीदी का लक्ष्य बढ़ाया गया है। पहले यह लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, जिसे अब बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।</p>
<p>इसके अलावा, सरकार ने गेहूं खरीदी प्रक्रिया को भी आसान बनाया है। अब खरीदी सप्ताह में छह दिन होगी और स्लॉट बुकिंग की तारीख 9 मई तक बढ़ा दी गई है। उड़द की खरीदी पर बोनस देने और किसानों को सस्ते दर पर कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध कराने जैसे फैसले भी चर्चा में रहे।</p>
<p>साथ ही किसानों को अब दिन के समय सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही, दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई समितियों का गठन किया गया है।</p>
<p>इस बैठक का सीधा असर राज्य के किसानों पर पड़ने की उम्मीद है। योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से कृषि क्षेत्र में स्थिरता और आय में वृद्धि संभव मानी जा रही है। </p>
<p>बैठक के बाद मुख्यमंत्री कलेक्टरों के साथ समीक्षा करेंगे, जहां उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि सभी योजनाएं समयबद्ध तरीके से लागू हों। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नीति स्तर पर लिए गए फैसले जमीनी स्तर पर भी असर दिखाएं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 16:23:42 +0530</pubDate>
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