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                <title>Rural Development - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Rural Development RSS Feed</description>
                
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                <title>आज से लागू हुआ VB-G RAM G कानून, अब 125 दिन रोजगार की गारंटी और बढ़ी मजदूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मनरेगा की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) लागू, दिहाड़ी बढ़कर ₹327.40 प्रतिदिन हुई, नए रोजगार गारंटी कार्ड भी जारी होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vb-gram-g-law-came-into-effect-from-today-now/article-57523"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/vb-g-ram-g.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देशभर के ग्रामीण श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए बुधवार से एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025 यानी VB-G RAM G को लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही मजदूरी की औसत दर में भी वृद्धि की गई है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों की आय बढ़ने की उम्मीद है। नई योजना लागू होने के साथ ही देशभर में औसत दैनिक मजदूरी लगभग 299 रुपये से बढ़ाकर 327.40 रुपये कर दी गई है। यानी प्रत्येक कार्य दिवस पर औसतन करीब 28 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, आजीविका को मजबूत करना और गांवों में विकास कार्यों को गति देना है। इससे लाखों परिवारों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार नई योजना के सफल संचालन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लगभग 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई गई है। इस धनराशि का उपयोग मजदूरी भुगतान, विकास कार्यों और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में किया जाएगा ताकि श्रमिकों को समय पर भुगतान मिल सके और किसी भी स्तर पर काम प्रभावित न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लाभार्थियों के पुराने जॉब कार्ड का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, वे नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड मिलने तक पुराने कार्ड के आधार पर ही काम कर सकेंगे। इससे योजना के लागू होने के दौरान किसी भी श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं होना पड़ेगा। नए कार्ड चरणबद्ध तरीके से वितरित किए जाएंगे और सभी पात्र परिवारों को इसमें शामिल किया जाएगा। नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों की भूमिका पहले की तरह महत्वपूर्ण रहेगी। गांवों में कौन-कौन से विकास कार्य किए जाएंगे, उनकी प्राथमिकता तय करना, श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना और कार्यों की निगरानी करना पंचायतों की जिम्मेदारी होगी। सरकार ने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, खेत तालाब निर्माण, ग्रामीण सड़कें, कृषि विकास, महिला सशक्तीकरण और सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण जैसे कार्यों को विशेष प्राथमिकता देने की बात कही है।</p>
<p style="text-align:justify;">रोजगार के दिनों में 25 दिन की बढ़ोतरी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। जिन परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत मजदूरी है, उनके लिए अतिरिक्त रोजगार का अवसर आर्थिक स्थिरता लाने में मददगार साबित हो सकता है। साथ ही गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से कृषि क्षेत्र को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। योजना के वित्तीय प्रावधानों में भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। सामान्य राज्यों में योजना का 60 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी। वहीं हिमालयी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। इससे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी योजना के प्रभावी संचालन का रास्ता आसान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">नई व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी रखा गया है कि बुवाई और कटाई जैसे कृषि के व्यस्त मौसम में राज्य सरकारें अधिकतम 60 दिनों तक योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले कार्यों को सीमित कर सकेंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों को मजदूरों की उपलब्धता बनी रहे और कृषि कार्य प्रभावित न हों। हालांकि अन्य समय में रोजगार की कानूनी गारंटी पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार लागू रहेगी। ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया तो इसका लाभ केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार, जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, महिला भागीदारी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के स्थायी अवसर भी बढ़ सकते हैं। मजदूरी में वृद्धि से ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के अनुसार देश के अधिकांश राज्यों ने नई योजना के लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान कर दिए हैं और बड़ी संख्या में राज्यों ने अपनी राज्य स्तरीय कार्ययोजना भी तैयार कर ली है। राष्ट्रीय स्तर पर इसका औपचारिक शुभारंभ आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले से किया जा रहा है, जहां लाभार्थियों को नए रोजगार गारंटी कार्ड वितरित किए जाएंगे और योजना की विस्तृत जानकारी भी दी जाएगी। VB-G RAM G कानून का उद्देश्य ग्रामीण भारत में रोजगार सुरक्षा को मजबूत करना, मजदूरी बढ़ाना और विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है। 125 दिन की रोजगार गारंटी और बढ़ी हुई मजदूरी से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:14:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सीएम मोहन यादव का बैतूल दौरा, कुकरु में विकास और पर्यटन पर रहेगा फोकस</title>
                                    <description><![CDATA[दो दिवसीय प्रवास में ग्रामीणों से करेंगे संवाद, पर्यटन विकास योजनाओं पर होगी चर्चा, कांग्रेस ने मुलाकात नहीं मिलने पर घेराव की चेतावनी दी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadavs-betul-visit-will-focus-on-development-and/article-57123"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-mohan-yadav-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बैतूल जिले के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरु का दो दिवसीय दौरा प्रशासन और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। 27 और 28 जून को प्रस्तावित इस दौरे को क्षेत्र के पर्यटन विकास और ग्रामीण अंचल के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन ने मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय संगठन भी कार्यक्रमों को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी इस दौरे को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर ली है और मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांगा है। पार्टी का कहना है कि यदि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। मुख्यमंत्री के शुक्रवार शाम तक कुकरु पहुंचने की संभावना जताई गई है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार वे गांव में रात्रि चौपाल लगाएंगे और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनेंगे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री किसी स्थानीय ग्रामीण परिवार के घर भोजन भी करेंगे। इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित करना और योजनाओं की जमीनी स्थिति को समझना माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। चौपाल के दौरान क्षेत्र की सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं पर चर्चा होने की संभावना है। दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री का कार्यक्रम पर्यटन विकास पर केंद्रित रहेगा। फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में पर्यटन विभाग के अधिकारियों की ओर से कुकरु के विकास को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया जा सकता है। इसमें होम स्टे मॉडल, एडवेंचर टूरिज्म, इको टूरिज्म, कॉफी टूरिज्म और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसे विषय शामिल रहेंगे। अधिकारियों का मानना है कि यदि इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो कुकरु मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है। मुख्यमंत्री स्थानीय कृषि उत्पाद कोदो-कुटकी की ब्रांडिंग और पेटेंट को लेकर भी चर्चा कर सकते हैं। लंबे समय से किसान इन उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की मांग करते रहे हैं। यदि इस दिशा में कोई पहल होती है तो क्षेत्र के किसानों को बेहतर बाजार और आय के नए अवसर मिल सकते हैं। इसके अलावा पेयजल संकट से जूझ रहे गांवों के लिए दो नई जल प्रदाय योजनाओं की घोषणा की भी संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन प्रस्तावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए कुकरु में विशेष तैयारियां की गई हैं। हेलीपैड का निर्माण पूरा कर लिया गया है और चौपाल स्थल से लेकर फॉरेस्ट रेस्ट हाउस तक सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी समीक्षा की गई है। चूंकि इस क्षेत्र में मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क की समस्या रहती है, इसलिए 'मन की बात' कार्यक्रम के प्रसारण के लिए बेहतर नेटवर्क वाले स्थानों का परीक्षण भी किया गया है। प्रशासन का प्रयास है कि मुख्यमंत्री के सभी कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के संपन्न हों। समुद्र तल से करीब 1137 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कुकरु अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, ठंडे मौसम और कॉफी बागानों के लिए जाना जाता है। यहां लगभग 44 हेक्टेयर क्षेत्र में पारंपरिक कॉफी की खेती की जाती है। पिछले कुछ वर्षों में यहां एडवेंचर स्पोर्ट्स और प्रकृति आधारित पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। अब सरकार इस क्षेत्र को होम स्टे, ट्रैकिंग, इको टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पर्यटन सुविधाओं का विस्तार हुआ तो रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बताया जा रहा है कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल लंबे समय से कुकरु को प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि प्रस्तावित विकास योजनाओं पर तेजी से काम शुरू होता है तो इसका सीधा लाभ स्थानीय युवाओं, किसानों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को मिल सकता है। इधर कांग्रेस ने भी मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर अपनी तैयारी पूरी कर ली है। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष पंकज रानू ठाकुर ने बताया कि किसानों और आम नागरिकों की समस्याओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए प्रशासन के माध्यम से मुलाकात का समय मांगा गया है। कांग्रेस का कहना है कि क्षेत्र में पेयजल, सड़क, किसानों की समस्याएं और अन्य विकास कार्य लंबे समय से लंबित हैं। यदि मुख्यमंत्री से मिलने का अवसर नहीं मिला तो पार्टी कार्यकर्ता लोकतांत्रिक तरीके से उनका घेराव करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार क्षेत्र की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही है। मुख्यमंत्री का यह दौरा विकास, पर्यटन और राजनीति—तीनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर सरकार कुकरु को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, वहीं विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 13:28:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ग्रामीणों की शिकायत पर एक्शन, डिप्टी CM के निर्देश के बाद दो EE को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[बस्तर दौरे में पेयजल संकट की शिकायत सामने आने पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सख्त, दंतेवाड़ा और कोंडागांव के अधिकारियों से सात दिन में मांगा जवाब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/action-on-villagers-complaint-notice-to-two-ees-after-instructions/article-55734"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/arun-sao.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बस्तर संभाग के ग्रामीण इलाकों में नल-जल योजनाओं के संचालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बस्तर दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उनके सामने ही पेयजल संकट की समस्या रखी थी। लोगों का कहना था कि गांवों में करोड़ों रुपए खर्च कर नल-जल योजनाएं बनाई गई हैं, लेकिन इसके बावजूद नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है। शिकायत मिलने के बाद उप मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई थी और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब इसी मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने दंतेवाड़ा और कोंडागांव जिले के कार्यपालन अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। मामला उस समय सामने आया जब उप मुख्यमंत्री अरुण साव जल अर्पण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बस्तर क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे थे। कोंडागांव जिले के बेड़मा गांव और दंतेवाड़ा जिले के टेकनार गांव में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी परेशानी बताई। लोगों का कहना था कि जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पाइपलाइन बिछाई गई, टंकियां बनाई गईं और घर-घर नल कनेक्शन भी दिए गए, लेकिन पानी की आपूर्ति नियमित नहीं हो रही है। कई परिवारों को आज भी पुराने स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने योजनाओं के संचालन और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद उप मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का निर्माण कराना नहीं है, बल्कि लोगों तक उसका लाभ पहुंचाना भी है। यदि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की समीक्षा की गई और प्रमुख अभियंता के.के. मरकाम की ओर से दोनों जिलों के कार्यपालन अभियंताओं को नोटिस जारी किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नोटिस में कहा गया है कि कोंडागांव जिले के बेड़मा गांव में जल जीवन मिशन के अंतर्गत तैयार की गई नल-जल योजना का संचालन और संधारण संतोषजनक नहीं पाया गया है। इसके कारण ग्रामीणों को नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही। विभाग ने माना है कि यह स्थिति शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही को दर्शाती है। साथ ही योजना के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करती है। विभाग का कहना है कि यदि योजना पूरी तरह तैयार है तो फिर ग्रामीणों को पानी क्यों नहीं मिल रहा, इसका जवाब संबंधित अधिकारियों को देना होगा। दूसरी ओर दंतेवाड़ा जिले के टेकनार गांव में भी स्थिति कुछ ऐसी ही पाई गई। जल अर्पण कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि गांव के एक मोहल्ले में कई घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। गर्मी के मौसम में लोगों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। विभाग के अनुसार तकनीकी मानकों के अनुरूप जलापूर्ति नहीं होना इस बात का संकेत है कि योजना के संचालन और निगरानी में कहीं न कहीं कमी रही है। यही वजह है कि दंतेवाड़ा के कार्यपालन अभियंता से भी जवाब तलब किया गया है। अधिकारियों को जारी नोटिस में सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने साफ किया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे संबंधित अधिकारियों में भी हलचल देखी जा रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सरकार अब जल जीवन मिशन और अन्य पेयजल योजनाओं के संचालन को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन देने का अभियान चलाया गया है। बस्तर जैसे दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में भी इस योजना के माध्यम से लोगों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की गई है। हालांकि कई स्थानों पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी संचालन और रखरखाव की चुनौतियां सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केवल पाइपलाइन बिछा देने या टंकी बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक पानी नियमित रूप से घरों तक नहीं पहुंचेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पंचायत सचिवों के तबादलों पर नई सख्त गाइडलाइन जारी, गृहग्राम में पोस्टिंग पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिवों के लिए नई स्थानांतरण नीति लागू, 10 साल से अधिक पदस्थ कर्मचारियों का प्राथमिकता से होगा ट्रांसफर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-strict-guidelines-issued-on-transfers-of-panchayat-secretaries-ban/article-55559"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/panchayat-secretary-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई और सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है। तबादला सीजन के बीच जारी इस आदेश के बाद अब राज्य की हजारों पंचायतों में कार्यरत सचिवों की तैनाती व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नई नीति के अनुसार अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इसके साथ ही यदि किसी सचिव के रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच चुने जाते हैं तो ऐसी स्थिति में संबंधित सचिव का तबादला अनिवार्य रूप से किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रदेश में यह निर्णय सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के आधार पर लिया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि स्थानांतरण प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाए। राज्य में वर्तमान में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिव कार्यरत हैं, जिन पर इस नई नीति का सीधा असर पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">जारी आदेश के अनुसार 15 जून तक केवल जिले के भीतर ही पंचायत सचिवों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद ही लागू होंगे। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया 1 जून से प्रभावी मानी जाएगी। सभी स्थानांतरण आदेश जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही जिला और अंतरजिला स्तर पर स्थानांतरण की विस्तृत प्रक्रिया भी तय कर दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार के इस निर्णय के पीछे लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक और स्थानीय स्तर की समस्याएं प्रमुख कारण बताई जा रही हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 1994 से 1996 के बीच पंचायत कर्मियों की नियुक्ति ग्राम सभा के अनुमोदन से की गई थी, जो आज पंचायत सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उस समय कई मामलों में सरपंच, उपसरपंच या प्रभावशाली व्यक्तियों के रिश्तेदारों को ही नियुक्त किया गया था। इसके कारण कई जगहों पर हितों के टकराव और प्रशासनिक गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आती रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशासन का मानना है कि कई मामलों में जनप्रतिनिधि और सचिवों के बीच पारिवारिक संबंधों या व्यक्तिगत समीकरणों के कारण कार्य निष्पक्ष तरीके से प्रभावित हुआ है। जांचों में भी कई बार यह पाया गया कि कुछ स्थानों पर सरपंच, उपसरपंच और सचिवों की मिलीभगत से वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं हुई हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने यह सख्त नीति लागू करने का निर्णय लिया है ताकि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई गाइडलाइन के अनुसार कुछ परिस्थितियों में स्थानांतरण को अनिवार्य किया गया है। यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव का कोई रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बन जाता है, तो वहां से तत्काल स्थानांतरण किया जाएगा। इसके अलावा किसी भी सचिव को उसके गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रखा जाएगा। साथ ही जो सचिव 10 वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही पंचायत में कार्यरत हैं, उनका प्राथमिकता के आधार पर तबादला किया जाएगा। यदि स्थानांतरण की सीमा से अधिक ऐसे सचिव पाए जाते हैं जो लंबे समय से एक ही जगह कार्यरत हैं, तो सबसे अधिक अवधि से पदस्थ सचिव का पहले स्थानांतरण किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक स्थिरता के साथ-साथ निष्पक्ष कार्य प्रणाली को बढ़ावा देना बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि के दौरान भी स्थानांतरण संभव होगा। इनमें भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या गंभीर शिकायतों से जुड़े मामले शामिल हैं। इसके अलावा अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने, लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू जैसी जांच एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़े मामलों में भी सचिवों का स्थानांतरण किया जा सकेगा। उच्च प्राथमिकता वाले प्रशासनिक मामलों में शासन स्तर से निर्देश मिलने पर भी तबादला किया जा सकता है। ऐसे सभी मामलों में विभागीय मंत्री की स्वीकृति के बाद आयुक्त या पंचायत राज संचालनालय द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गंभीर मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई में कोई देरी न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">अंतरजिला स्थानांतरण को लेकर नीति में स्पष्ट किया गया है कि यह केवल स्वैच्छिक आधार पर ही किया जाएगा। महिला पंचायत सचिवों को विशेष सुविधा दी गई है, जिसके तहत विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाएं अपने पति, ससुराल या माता-पिता के जिले में स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकती हैं। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त सचिव भी अपने मूल जिले में स्थानांतरण के लिए पात्र होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानांतरण के लिए आवेदन वर्तमान पदस्थ जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को देना होगा। इसके बाद रिक्त पदों की उपलब्धता की जांच की जाएगी। यदि संबंधित जिले में पद खाली होता है तो प्रस्ताव पंचायत राज संचालनालय भोपाल भेजा जाएगा। प्रशासनिक स्वीकृति के बाद अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे। स्थानांतरण के बाद संबंधित सचिव को वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा और यह सुविधा केवल एक बार ही दी जाएगी। नई नीति के लागू होने के बाद पंचायत स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर होने वाली अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 09:58:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांकेर में 56 सरपंचों ने दिया सामूहिक इस्तीफा, चक्काजाम करने की चेतावनी दी</title>
                                    <description><![CDATA[कांकेर के अंतागढ़ ब्लॉक में 56 सरपंचों ने फंड और विकास कार्यों की मांग को लेकर इस्तीफा दिया, धरना जारी, चक्काजाम की चेतावनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/56-sarpanches-in-kanker-gave-mass-resignation-and-warned-of/article-53862"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kanker-antagarh-sarpanch-association-protest-demonstration.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में पंचायत व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विरोध देखने को मिला है। अंतागढ़ ब्लॉक की 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने सामूहिक इस्तीफा देकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला है। फंड की कमी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">महीनों से मानदेय न मिलना और विकास कार्यों का ठप होना सरपंचों की नाराज़गी की वजह बनी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके चलते वे पिछले कुछ दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। गुरुवार को स्थिति और बिगड़ गई जब सरपंच संघ ने चक्काजाम की चेतावनी दे दी। इस पूरे घटनाक्रम के चलते इलाके में हलचल मच गई है और प्रशासनिक स्तर पर भी बेचैनी देखी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतागढ़ ब्लॉक के गोल्डन चौक पर सरपंच 18 मई से अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। धरने में शामिल जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पिछले साल से पंचायतों में किसी भी नए विकास कार्य को मंजूरी नहीं मिली है। कई योजनाएं अधूरी पड़ी हैं और गांवों में सड़क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। सरपंचों का कहना है कि वे प्रशासन को लगातार ज्ञापन और पत्र भेजते रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। हालात यह हैं कि ग्रामीण अब पंचायत प्रतिनिधियों से सवाल पूछ रहे हैं और उनके पास जवाब नहीं है। कुछ सरपंचों ने यहां तक कहा है कि बिना बजट और स्वीकृति के गांवों का काम चलाना मुश्किल हो गया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धरने के दौरान सरपंचों ने प्रशासन पर पंचायतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर जल्द फंड जारी नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। सामूहिक इस्तीफे के बाद स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया है। सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारियों ने सरपंच संघ से बातचीत की कोशिशें शुरू कर दी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीणों में भी इस मुद्दे पर नाराज़गी बढ़ती जा रही है। कई गांवों में विकास कार्य अधूरे पड़े हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरपंच संघ का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन की योजना बना सकते हैं और सड़क पर उतरकर चक्काजाम भी कर सकते हैं। इस समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांकेर का अंतागढ़ इलाका राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/56-sarpanches-in-kanker-gave-mass-resignation-and-warned-of/article-53862</link>
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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:15:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MP गेहूं उपार्जन 2026: मंडियों में किसानों को हर सुविधा देने के सख्त निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश; उपार्जन केंद्रों पर पानी, छाया, तौल और भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mp-wheat-procurement-2026-strict-instructions-to-provide-every-facility/article-52139"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mohan-yadav-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन प्रक्रिया को सुचारु और किसान अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mohan Yadav</span></span> ने स्पष्ट किया है कि मंडियों में उपज बेचने आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी उपार्जन केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं और खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से संचालित हो।</p>
<p><strong>क्या है सरकार का निर्देश</strong><br />मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित समीक्षा बैठक में जिला कलेक्टरों से कहा कि उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटे, हम्माल, छाया और पीने के पानी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही गेहूं खरीदी, परिवहन, भंडारण और किसानों के भुगतान की प्रतिदिन निगरानी की जाए।</p>
<p>यह बैठक मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर के कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी जुड़े। बैठक में गेहूं, चना और मसूर की खरीदी व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई।</p>
<p><strong>कैसे बढ़ेगी खरीदी क्षमता</strong><br />सरकार ने उपार्जन केंद्रों की क्षमता 1000 क्विंटल प्रतिदिन से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दी है। साथ ही, स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है। अब छोटे, सीमांत, मध्यम और बड़े सभी वर्गों के किसान स्लॉट बुक कर अपनी उपज बेच सकेंगे।</p>
<p><strong>किसानों को क्या मिलेगा लाभ</strong><br />प्रदेश में वर्तमान में 3516 उपार्जन केंद्र संचालित हैं। अब तक 8.55 लाख किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराई है, जिनमें से करीब 3.96 लाख किसानों से 16.60 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसके एवज में 2527 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर उपज बेच सकते हैं।</p>
<p><strong>अन्य फैसले और व्यवस्थाएं</strong><br />मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक केंद्र पर कम से कम 6 इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे उपलब्ध हों और सात दिन की खरीदी के लिए पर्याप्त बारदान (बोरी) उपलब्ध रखा जाए। चना और मसूर की खरीदी मंडी के शेड के अंदर करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि असमय बारिश से नुकसान न हो।</p>
<p>इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा गेहूं की गुणवत्ता मानकों में कुछ राहत दी गई है। चमक विहीन गेहूं की सीमा में 50% तक छूट और अल्प विकसित दानों की सीमा 6% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है।</p>
<p><strong>क्यों अहम है यह पहल</strong><br /> इन कदमों से किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा होगी और भुगतान में पारदर्शिता आएगी। इससे मंडियों में भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा और किसानों का समय बचेगा।</p>
<p>सरकार ने स्पष्ट किया है कि खरीदी प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टरों को नियमित समीक्षा और फील्ड विजिट के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mp-wheat-procurement-2026-strict-instructions-to-provide-every-facility/article-52139</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 14:47:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MP किसान योजनाएं: किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा प्लान</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘किसान कल्याण वर्ष’ में नई योजनाओं का ऐलान किया; MSP, बोनस, बिजली और सिंचाई पर फोकस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mp-farmer-schemes-governments-big-plan-to-increase-the-income/article-52130"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mohan-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई अहम योजनाओं और फैसलों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mohan Yadav</span></span> ने कहा कि प्रदेश के विकास की आधारशिला किसान हैं और उनकी समृद्धि के बिना आर्थिक प्रगति संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से राज्य में ‘किसान कल्याण वर्ष’ के तहत नई पहलें लागू की जा रही हैं।</p>
<p><strong>क्या हैं प्रमुख घोषणाएं</strong><br />सरकार ने इस वर्ष गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। यह वृद्धि किसानों की उपज को बेहतर मूल्य दिलाने और उनकी आय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की अवधि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।</p>
<p><strong>किसानों को कैसे मिलेगा फायदा</strong><br />राज्य सरकार ने दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाए हैं। उड़द की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाएगी, साथ ही किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जाएगा। सरसों के लिए भावांतर योजना लागू करने से बाजार में बेहतर दाम मिलने लगे हैं।</p>
<p><strong>बिजली और सिंचाई पर फोकस</strong><br />सरकार ने किसानों को सस्ती और सुगम बिजली उपलब्ध कराने के लिए नई योजनाएं शुरू की हैं। किसानों को मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन देने की पहल की गई है। वहीं ‘कृषक मित्र योजना’ के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर पंप दिए जा रहे हैं, जिससे किसान ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेंगे।</p>
<p><strong>भू-अर्जन और मुआवजा नीति</strong><br />भूमि अधिग्रहण के मामलों में भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब किसानों को उनकी जमीन के बदले चार गुना तक मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। यह कदम किसानों के अधिकारों की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।</p>
<p><strong>क्यों है यह योजना अहम</strong><br />इन योजनाओं से किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि उत्पादन में भी वृद्धि होगी। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से खेती अधिक लाभकारी बनने की संभावना है।</p>
<p><strong>डेयरी और उर्वरक क्षेत्र में पहल</strong><br />सरकार प्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। अब तक 1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया जा चुका है और प्रतिदिन 10 लाख किलोग्राम से अधिक दूध संकलन हो रहा है। किसानों को 1600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भी किया गया है।</p>
<p>उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त भंडारण किया गया है और वितरण प्रणाली को डिजिटल बनाया जा रहा है, जिससे किसानों को आसानी से खाद मिल सके।</p>
<p>सरकार का लक्ष्य कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि इन योजनाओं से प्रदेश के किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 13:58:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>भोपाल में CM मोहन यादव की बैठक, किसान योजनाओं पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल बैठक में किसान हितैषी योजनाओं पर चर्चा, कलेक्टरों से भी करेंगे समीक्षा किसान कल्याण वर्ष को लेकर सरकार ने तेज की तैयारी। बैठक के बाद फैसलों को जमीन पर उतारने की रणनीति बनेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/cm-mohan-yadavs-meeting-in-bhopal-brainstorming-on-farmer-schemes/article-52104"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cm-farmer-schemes.jpg" alt=""></a><br /><p>राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मोहन यादव</span></span> ने शनिवार को अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन और नीति विश्लेषण स्कूल में वरिष्ठ अधिकारियों की एक अहम बैठक बुलाई। इस बैठक का फोकस किसान कल्याण वर्ष के तहत लागू की जा रही योजनाओं की समीक्षा और नई घोषणाओं पर रहा। बैठक में कृषि, सहकारिता, पशुपालन, राजस्व, वित्त और ग्रामीण विकास सहित कई विभागों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। सरकार का उद्देश्य किसानों के लिए योजनाओं को और प्रभावी बनाना और उनके क्रियान्वयन की गति तेज करना है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा करेंगे, ताकि लिए गए निर्णयों को तुरंत लागू किया जा सके।</p>
<p>बैठक में विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों ने अपनी-अपनी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पेश की। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत घटाने और सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। इसमें सिंचाई, बिजली, फसल खरीदी और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।</p>
<h5><strong>योजनाओं पर फोकस</strong></h5>
<p>बैठक के दौरान किसान हित में नई योजनाओं और मौजूदा योजनाओं के विस्तार पर मंथन किया गया। अधिकारियों ने सुझाव दिए कि कैसे किसानों को बेहतर बाजार, तकनीकी सहायता और वित्तीय लाभ दिया जा सकता है। बता दें,सरकार खेती को लाभकारी बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ समय पर किसानों तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। इसके साथ ही जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।</p>
<h5><strong>गेहूं खरीदी बढ़ी</strong></h5>
<p>बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने जानकारी दी थी कि प्रदेश में रिकॉर्ड उत्पादन को देखते हुए गेहूं खरीदी का लक्ष्य बढ़ाया गया है। पहले यह लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, जिसे अब बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।</p>
<p>इसके अलावा, सरकार ने गेहूं खरीदी प्रक्रिया को भी आसान बनाया है। अब खरीदी सप्ताह में छह दिन होगी और स्लॉट बुकिंग की तारीख 9 मई तक बढ़ा दी गई है। उड़द की खरीदी पर बोनस देने और किसानों को सस्ते दर पर कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध कराने जैसे फैसले भी चर्चा में रहे।</p>
<p>साथ ही किसानों को अब दिन के समय सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही, दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई समितियों का गठन किया गया है।</p>
<p>इस बैठक का सीधा असर राज्य के किसानों पर पड़ने की उम्मीद है। योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से कृषि क्षेत्र में स्थिरता और आय में वृद्धि संभव मानी जा रही है। </p>
<p>बैठक के बाद मुख्यमंत्री कलेक्टरों के साथ समीक्षा करेंगे, जहां उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि सभी योजनाएं समयबद्ध तरीके से लागू हों। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नीति स्तर पर लिए गए फैसले जमीनी स्तर पर भी असर दिखाएं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 16:23:42 +0530</pubDate>
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