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                <title>surya dev - दैनिक जागरण</title>
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                <title>8 जून 2026: सोमवार को सूर्य पूजा का विशेष संयोग, जानिए क्यों करें उपासना और किन राशियों को मिलेगा लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान शिव के प्रिय दिन सोमवार पर सूर्य देव की आराधना का भी विशेष महत्व माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार कुछ राशियों के लिए यह दिन सफलता, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आ सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/special-coincidence-of-surya-puja-on-monday-june-8-2026/article-55275"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/surya-puja.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">8 जून 2026 का सोमवार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। आमतौर पर सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित माना जाता है, लेकिन इस बार सूर्य देव की उपासना को लेकर भी श्रद्धालुओं के बीच उत्साह दिखाई दे रहा है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि सप्ताह के पहले दिन सूर्य देव को अर्घ्य देकर शुरुआत करने से पूरे सप्ताह सकारात्मक ऊर्जा बनी रह सकती है। यही कारण है कि कई मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर सुबह से श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता का दर्जा प्राप्त है। वे ऐसे देव हैं जिनके दर्शन प्रतिदिन किए जा सकते हैं। धार्मिक ग्रंथों में सूर्य को जीवन, ऊर्जा, आत्मबल और स्वास्थ्य का आधार बताया गया है। माना जाता है कि सूर्य की कृपा से व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान मिलता है और उसके जीवन में प्रगति के रास्ते खुलते हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह को आत्मा का कारक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में हो तो उसे नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक सफलता और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य पूजा केवल आध्यात्मिक लाभ ही नहीं देती बल्कि व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है। सुबह उगते सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा सदियों पुरानी है। कहा जाता है कि सूर्य की पहली किरणों के संपर्क में आने से मन में उत्साह और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। कई लोग अपने दिन की शुरुआत सूर्य नमस्कार और सूर्य मंत्रों के जाप से करते हैं। योग विशेषज्ञ भी इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सूर्य पूजा की विधि काफी सरल मानी जाती है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। इसके बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें और उसमें लाल फूल, अक्षत तथा थोड़ा सा कुमकुम डाल सकते हैं। फिर पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु गायत्री मंत्र का जाप भी करते हैं। मान्यता है कि नियमित रूप से सूर्य पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 8 जून 2026 को कुछ राशियों के लिए सूर्य पूजा विशेष फलदायी मानी जा रही है। मेष राशि के जातकों को करियर और व्यवसाय में नए अवसर मिलने की संभावना है। सिंह राशि वालों के लिए यह पूजा आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। धनु राशि के लोगों को भाग्य का साथ मिलने और महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता मिलने के संकेत बताए जा रहे हैं। इसके अलावा मिथुन और तुला राशि के जातकों को भी सूर्य देव की उपासना से लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। इन राशियों के लोगों को निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक स्पष्टता में सुधार महसूस हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर माना जाता है या जो लंबे समय से आत्मविश्वास की कमी महसूस कर रहे हैं, उनके लिए भी सूर्य पूजा लाभकारी बताई जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नियमित अर्घ्य देने से व्यक्ति के व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि इसे धार्मिक आस्था का विषय माना जाता है और इसके परिणाम व्यक्ति की श्रद्धा और विश्वास पर भी निर्भर करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">धार्मिक परंपराओं में सूर्य पूजा का महत्व केवल धन और सफलता तक सीमित नहीं है। इसे अनुशासन, समय पालन और सकारात्मक जीवनशैली से भी जोड़ा जाता है। सुबह जल्दी उठना, प्रकृति के संपर्क में आना और ध्यान लगाना व्यक्ति के मानसिक संतुलन को बेहतर बना सकता है। यही वजह है कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच भी बड़ी संख्या में लोग सूर्य उपासना की परंपरा को निभा रहे हैं। 8 जून 2026 के इस सोमवार को श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा के साथ सूर्य देव को अर्घ्य देकर दिन की शुरुआत कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा और नियमित साधना से व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन का प्रतीक माना गया है, इसलिए उनकी उपासना जीवन में नई प्रेरणा और उत्साह का संचार करने वाली मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 13:40:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सूर्य को जल चढ़ाने का सही समय और तरीका क्या है? जानें मंत्र, नियम और लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[सूर्य को जल चढ़ाने का सही समय, सही तरीका, मंत्र और लाभ जानें। ज्योतिष अनुसार सूर्य को अर्घ्य देने से यश, स्वास्थ्य और समृद्धि बढ़ती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/rules-for-offering-water-to-the-sun-what-is-the/article-52442"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/surya-ko-jal-chadhane-ka-sahi-samay.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"><strong>Surya Ko Jal Arpit karne Ke Niyam:</strong> हिंदू धर्म में सूर्य को अर्घ्य देने का बड़ा महत्व बताया गया है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य को यश, तेज, प्रसिद्धि, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। अब अगर आप नियमित रूप से सूर्य को जल चढ़ाते हैं तो जीवन में सूर्य की कृपा बनी रहती है। इससे जातक की समृद्धि और प्रसिद्धि में बढ़ौतरी होती है। हालांकि ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य को अर्घ्य देते समय कुछ मंत्रो का ध्यान रखना जरूरी होता है। अगर आप गलत तरीके से जल चढ़ाते हैं तो पूजा का फल नहीं मिलता है। आइए आपको इस बारे पूरी जानकारी देते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सूर्य देवे को जल चढ़ाने का सही समय क्या है?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ज्योतिषचार्य के अनुसार, सूर्य को सही समय पर अर्घ्य देना जरूरी होता है। वरना इसका कम फल मिलता है। माना जाता है कि सूर्य देव को जल अर्पित करने का सबसे सही समय सुबह 5 से 8 बजे के बीच होता है। इस दौरान सूर्य पूर्व दिशा में होते हैं और 8 बजे के बाद दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर चले जाते हैं। ज्योतिषशास्त्र में कहा जाता है कि जब सूर्य खुद की दिशा में हो तभी सूर्य को अर्घ्य देने से ज्यादा महत्व मिलता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">क्या है सूर्य देव को अर्घ्य देने का सही तरीका</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मान्यता के अनुसार सबसे पहले सुबह सूरज उगने के पहले उठना अच्छा माना जाता है। इसलिए सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद साफ कपडे पहनने चहिए। इसके बड़ा एक तांबे के लोटे में जल लेकर दोनों से हाथों से पकड़कर अपने सर के ऊपर से नीचे जल डालें। सूर्य को जल अर्पित करते समय हाथ हमेशा सर के ऊपर होने चाहिए। इस तरीके से सूर्य को जल अर्पित करना सही और शुभ माना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सूर्य को जल अर्पित करते समय किन बातों का ध्यान रखें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सूर्य को जल करते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना होता है। जैसे कि जब जल की धारा नीचे गिरे तो एक धार में गिरनी चाहिए। यानी जल की धारा कभी भी बीच से नहीं टूटनी चाहिए। मान्यता है कि जल की एक धारा गिरने से उसकी ऊर्जा इंसान के अंदर समाहित होती है। इसके साथ हमेशा साफ स्थान पर ही सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। जल को किसी गंदे नाले या किसी गंदे स्थान पर नहीं देना चाहिए। जल को किसी पौधे, नदी या किसी ऐसे स्थान पर देना चाहिए, जहां पर पानी को धरती सोख लें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सूर्य को जल अर्पित करते समयँम इन मंत्रों का जाप करें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य देव को जल अर्पित करते समय कुछ जाप करने से बहुत शुभ माना जाता है। जा सूर्य को जल अर्पित करें तो उसी स्थान पर खड़े रहकर 'ओम घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके आलावा आदित्य हृदय स्तोत्र और गायत्री मंत्र का जाप करना भी काफी शुभ माना जाता है। सूर्य को जल अर्पति करते समय इन मंत्रों का जाप करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सूर्य देव को जल अर्पित करने से लाभ</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य देव को विधि-विधान से जल देने से काफी शुभ फल की प्राप्ति होती है। इससे सेहत अच्छी रहती है। सूर्य को प्रसिद्धि को प्रतीक माना जाता है, इसलिए जातक की प्रसिद्धि और समृद्धि बढ़ती है। सूर्य को नियम से जल अर्पित करने से कई तरह की बिमारियों का नाश होता है। इसका वैज्ञानिक कारण भी माना गया है। वैज्ञानिक कारणों के अनुसार, सुबह 5 से 8 क बीच सूर्य से निकलने वाली किरणों और ऊर्जा को काफी अच्छा माना जाता है। सूर्य की किरणों से विटामिन डी की भी कमी पूरी होती है। इसके साथ ही कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी खत्म होती हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 11:50:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रविवार के उपाय : जानें पूजा विधि, मंत्र जाप और शुभ टोटके जो बढ़ाते हैं मान-सम्मान और सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[सूर्य उपासना से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रगति के संकेत; जानें सरल धार्मिक उपाय और सावधानियां]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/sundays-surya-remedies-2026-know-the-puja-method-mantra-chanting/article-52114"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/ravivaar-ke-upaye-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p>रविवार का दिन हिंदू धर्म में सूर्य देव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इस दिन की गई पूजा और साधना व्यक्ति के जीवन में मान-सम्मान, उत्तम स्वास्थ्य और कार्यक्षेत्र में सफलता के योग को मजबूत करती है। धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं में रविवार को सूर्य उपासना को विशेष फलदायी बताया गया है।</p>
<p><strong>इस दिन का महत्व</strong><br />रविवार को सूर्य देव को सृष्टि की ऊर्जा और आत्मबल का स्रोत माना जाता है। इसी कारण इस दिन सूर्य आराधना को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला माना गया है। विशेष रूप से वे लोग जो करियर या व्यापार में प्रगति चाहते हैं, उनके लिए यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p><strong>कैसे करें सूर्य देव की पूजा</strong><br />धार्मिक परंपराओं के अनुसार रविवार की सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल फूल, रोली और चावल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। अर्घ्य देते समय “ॐ घृणि सूर्याय नमः” या “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करने की परंपरा है। इससे मानसिक स्थिरता और आत्मबल में वृद्धि होने की मान्यता है।</p>
<p><strong>दान और व्रत का महत्व</strong><br />रविवार के दिन गुड़, गेहूं, तांबे के बर्तन और लाल या नारंगी वस्त्रों का दान करने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। कई लोग रविवार का व्रत रखकर संयम और साधना का पालन करते हैं।</p>
<p><strong>विशेष टोटके और लोक मान्यताएं</strong><br />लोक परंपराओं में रविवार को घर के मुख्य द्वार पर देसी घी का दीपक जलाना शुभ माना गया है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। आर्थिक समृद्धि के लिए कुछ लोग तिजोरी में बरगद का पत्ता रखने या जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा निभाते हैं। वहीं, बुरी नजर से बचाव के लिए नींबू और काले तिल से किए जाने वाले उपाय भी प्रचलित हैं।</p>
<p><strong>क्या न करें रविवार को</strong><br />मान्यताओं के अनुसार रविवार को नमक का अधिक सेवन, मांसाहार और नशे से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। साथ ही बाल और नाखून काटने से भी परहेज करने की परंपरा बताई जाती है, हालांकि यह पूर्णतः धार्मिक विश्वासों पर आधारित है।</p>
<p>धार्मिक दृष्टि से सूर्य देव को स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मबल का कारक माना गया है। इसी कारण रविवार की पूजा को जीवन में अनुशासन और सकारात्मकता लाने वाला माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि नियमित सूर्य उपासना से जीवन में स्थिरता और सफलता के मार्ग खुलते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/sundays-surya-remedies-2026-know-the-puja-method-mantra-chanting/article-52114</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 08:20:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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