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                <title>संजय कपूर की संपत्ति विवाद में नया मोड़, EPF से पैसे निकालने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[करिश्मा कपूर के बच्चों की फीस संकट के बीच प्रिया सचदेव पहुंचीं कोर्ट, संपत्ति फ्रीज मामले में नोटिस जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/new-twist-in-sanjay-kapoors-property-dispute-demand-to-withdraw/article-54338"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/sanjay-kapur-case.jpg" alt=""></a><br /><p>करिश्मा कपूर के पूर्व पति और बिजनेसमैन संजय कपूर के निधन के बाद उनकी संपत्ति और वसीयत को लेकर शुरू हुआ कानूनी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मामले में करिश्मा कपूर के बच्चों और संजय कपूर की वर्तमान पत्नी प्रिया सचदेव के बीच संपत्ति के अधिकारों को लेकर अदालत में सुनवाई जारी है। इसी बीच अब प्रिया कपूर ने कोर्ट में एक नई याचिका दायर करते हुए संजय कपूर के EPF (Employee Provident Fund) खाते से पैसे निकालने की अनुमति मांगी है, ताकि बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा किया जा सके।</p>
<p>यह पूरा मामला तब और गंभीर हो गया जब अदालत ने संजय कपूर की सभी संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश जारी कर दिया। इसमें बैंक खाते, शेयर, निवेश, और अन्य वित्तीय संपत्तियां शामिल हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद किसी भी प्रकार की निकासी या ट्रांसफर पर रोक लग गई है।</p>
<p>प्रिया सचदेव की याचिका पर 26 मई को सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने कोर्ट से 30 अप्रैल के आदेश में आंशिक संशोधन की मांग की। उनके वकीलों ने दलील दी कि EPF खाते से निकाले जाने वाले धन का उपयोग केवल करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा की शिक्षा और आवश्यक खर्चों के लिए किया जाएगा। वकीलों के अनुसार, यह कदम बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए जरूरी है।</p>
<p>लाइव एंड लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिया कपूर ने कोर्ट के अंतरिम आदेश के कुछ हिस्सों में बदलाव की मांग की है। विशेष रूप से अनुच्छेद 79 के खंड B और D में संशोधन का अनुरोध किया गया है। इन खंडों में संपत्ति और वित्तीय नियंत्रण से जुड़े प्रतिबंध शामिल हैं।</p>
<p>इस बीच करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने पहले ही अदालत में याचिका दाखिल कर अपने पिता संजय कपूर की वसीयत को चुनौती दी है। उनका दावा है कि वसीयत में उनके अधिकारों को ठीक से शामिल नहीं किया गया है और दस्तावेज में कई विसंगतियां हैं। बच्चों ने आरोप लगाया है कि वसीयत में उनके नाम गलत तरीके से लिखे गए हैं, जिससे दस्तावेज की वैधता पर सवाल उठता है।</p>
<p>वहीं दूसरी ओर, प्रिया सचदेव ने अदालत में एक वसीयत पेश की है, जिसमें दावा किया गया है कि संजय कपूर ने अपनी अधिकांश संपत्ति उनके नाम छोड़ी है। इस दावे के बाद विवाद और गहरा गया है, क्योंकि करिश्मा कपूर के बच्चे इसे फर्जी बता रहे हैं।</p>
<p>कोर्ट ने पहले सुनवाई के दौरान संजय कपूर की सभी संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश दिया था। इसके तहत न केवल बैंक खातों बल्कि कंपनी शेयर, कीमती संपत्तियों जैसे घड़ियां, आभूषण, पेंटिंग और यहां तक कि विदेशी खातों और क्रिप्टो संपत्तियों पर भी रोक लगा दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि किसी भी संपत्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही ट्रांसफर किया जा सकता है।</p>
<p>हालांकि कोर्ट ने बच्चों की शिक्षा और आवश्यक जीवन-यापन खर्चों के लिए सीमित राहत देने की बात कही थी। इसी वजह से अब प्रिया कपूर EPF से पैसे निकालने की अनुमति मांग रही हैं, ताकि बच्चों की फीस समय पर भरी जा सके। मामले की पृष्ठभूमि भी काफी जटिल है। करिश्मा कपूर और संजय कपूर की शादी 2003 में हुई थी और दोनों के दो बच्चे कियान और समायरा हैं। 13 साल बाद दोनों का तलाक हो गया था। इसके बाद संजय कपूर ने प्रिया सचदेव से शादी की थी। संजय कपूर का निधन 12 जून 2025 को लंदन में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था।</p>
<p>तलाक के समय संजय कपूर ने लिखित रूप में बच्चों की शिक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी ली थी। इसी आधार पर करिश्मा कपूर के बच्चे अब अपनी शिक्षा खर्चों की जिम्मेदारी को लेकर कोर्ट पहुंचे हैं। समायरा, जो अमेरिका में पढ़ाई कर रही हैं, ने भी अदालत में कहा था कि पिछले कुछ महीनों से उनकी कॉलेज फीस नहीं भरी गई है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।</p>
<p>इस पर पहले की सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों को फटकार भी लगाई थी और कहा था कि बच्चों के भविष्य से जुड़े मामलों में देरी नहीं होनी चाहिए। उस समय प्रिया सचदेव के वकीलों ने आश्वासन दिया था कि बच्चों की फीस समय पर दी जाएगी, लेकिन संपत्ति फ्रीज होने के कारण अब भुगतान में अड़चन आ रही है। अब कोर्ट ने इस नई याचिका को स्वीकार करते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है। अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की गई है, जिसमें यह तय होगा कि EPF से पैसे निकालने की अनुमति दी जाएगी या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 15:44:11 +0530</pubDate>
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                <title>ग्वालियर तलाक मामला: ननद को ‘सौतन’ बताकर लिया एकतरफा तलाक, हाईकोर्ट में पहुंचा विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[फैमिली फोटो को दूसरी शादी का सबूत बताकर मिली डिक्री; पति ने कोर्ट को गुमराह करने का लगाया आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/gwalior-divorce-case-one-sided-divorce-by-calling-sister-in-law-as-sautan/article-52141"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/gwalior-divorce-case.jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश के <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Gwalior</span></span> में तलाक से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला ने पति से अलग होने के लिए कथित तौर पर अदालत को गलत जानकारी दी। महिला ने अपनी ही ननद (पति की बहन) को ‘सौतन’ बताकर फैमिली कोर्ट से एकतरफा तलाक की डिक्री हासिल कर ली। अब इस मामले को पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिससे यह विवाद कानूनी बहस का विषय बन गया है।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br />जानकारी के मुताबिक, दंपति की शादी वर्ष 1998 में हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। पति एक निजी कंपनी में कार्यरत है और काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहता था। इसी कारण दोनों के संबंधों में दूरी बढ़ती गई और वर्ष 2015 में महिला अलग रहने लगी। महिला तलाक चाहती थी, जबकि पति इसके लिए तैयार नहीं था।</p>
<p><strong>कैसे मिला एकतरफा तलाक</strong><br />वर्ष 2021 में महिला ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है। सबूत के तौर पर उसने एक पारिवारिक फोटो पेश किया, जिसमें पति अपनी बहन और अन्य रिश्तेदारों के साथ खड़ा था। महिला ने इस फोटो में दिख रही अपनी ननद को ही पति की दूसरी पत्नी बताते हुए अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।</p>
<p>अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर पति को एकपक्षीय घोषित कर दिया, जिससे वह अपनी ओर से सफाई पेश नहीं कर सका। इसके बाद महिला को तलाक की डिक्री मिल गई।</p>
<p><strong>पति का आरोप और हाईकोर्ट की शरण</strong><br />पति का कहना है कि तलाक की प्रक्रिया के दौरान उसकी मां का निधन हो गया था, जिसका फायदा उठाकर उसे मामले से अनभिज्ञ रखा गया। हाल ही में जब उसने अदालत के रिकॉर्ड की जांच की, तब उसे इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी मिली। उसने आरोप लगाया कि पत्नी ने जानबूझकर अदालत को गुमराह किया और गलत साक्ष्य पेश किए।इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एकतरफा तलाक की डिक्री को रद्द करने की मांग की है।</p>
<p>यदि अदालत में गलत साक्ष्य प्रस्तुत कर निर्णय हासिल किया गया है, तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है। इससे न केवल न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की संभावना भी बनती है।</p>
<p>अब मामला हाईकोर्ट के समक्ष है, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या तलाक की डिक्री वैध है या इसे निरस्त किया जाना चाहिए। इस केस ने पारिवारिक विवादों और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 15:02:26 +0530</pubDate>
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