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                <title>padma shri - दैनिक जागरण</title>
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                <title>हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस होने के दावे पर बोलीं हेमा मालिनी, पैसों के लिए कभी काम नहीं किया</title>
                                    <description><![CDATA[दिग्गज अभिनेत्री ने कहा कि उनके दौर में कलाकारों को आज जैसी भारी-भरकम फीस नहीं मिलती थी। फिल्मों से मिलने वाला सम्मान और दर्शकों का प्यार ही उनके लिए सबसे बड़ी कमाई रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/on-the-claim-of-being-the-highest-paid-actress-hema/article-58194"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/hema-malini.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी ने एक बार फिर अपने लंबे फिल्मी करियर को लेकर खुलकर बात की है। 1970 और 80 के दशक की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार रहीं हेमा मालिनी ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि वह अपने दौर की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्री थीं। उन्होंने कहा कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री का माहौल आज से बिल्कुल अलग था और कलाकारों को मौजूदा दौर जैसी करोड़ों रुपये की फीस नहीं मिलती थी। उनके मुताबिक, उन्होंने कभी भी पैसों को प्राथमिकता देकर फिल्में नहीं कीं। उनके लिए अभिनय, दर्शकों का प्यार और फिल्मों से मिलने वाला सम्मान ही सबसे ज्यादा मायने रखता था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बातचीत के दौरान हेमा मालिनी से जब पूछा गया कि क्या वह अपने समय की सबसे महंगी अभिनेत्री थीं, तो उन्होंने इस दावे पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि आखिर यह बात किसने फैलाई कि वह सबसे ज्यादा फीस लेने वाली स्टार थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके दौर में कलाकारों को बहुत सीमित मेहनताना मिलता था और आज के बड़े सितारों की तुलना में उन्हें उसका छोटा-सा हिस्सा भी नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह फिल्मों के लिए करोड़ों रुपये की फीस चर्चा का विषय बनती है, उस समय ऐसी स्थिति बिल्कुल नहीं थी। हेमा मालिनी ने बताया कि उनकी लोकप्रियता बढ़ने के साथ उनकी फीस में जरूर कुछ बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन यह बढ़ोतरी बहुत मामूली होती थी। निर्माता और निर्देशक उनके काम से खुश होकर अपनी इच्छा से मेहनताना थोड़ा बढ़ा देते थे। उन्होंने कभी किसी फिल्म के लिए पहले से बड़ी रकम की मांग नहीं रखी और न ही फीस को लेकर किसी तरह की शर्तें रखीं। उनका मानना था कि यदि दर्शक किसी कलाकार को पसंद करते हैं तो वही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों का भी जिक्र किया और बताया कि उनके सभी पेशेवर फैसलों की जिम्मेदारी उनकी मां संभालती थीं। फिल्मों की बातचीत से लेकर आर्थिक मामलों तक हर चीज उनकी मां देखती थीं। हेमा मालिनी ने कहा कि उनकी मां का स्वभाव बेहद सरल और उदार था। अगर कोई निर्माता आर्थिक परेशानी का हवाला देते हुए कम फीस देने की बात कहता था, तो उनकी मां बिना किसी विवाद के उसकी बात मान लेती थीं। उन्होंने कभी भी किसी निर्माता पर ज्यादा भुगतान का दबाव नहीं बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">दिग्गज अभिनेत्री ने कहा कि कई बार निर्माता एक लिफाफे में जो भी मेहनताना देते थे, वह उसे खुशी-खुशी स्वीकार कर लेती थीं। उनके लिए वह केवल भुगतान नहीं, बल्कि उनके काम का सम्मान होता था। उन्होंने कहा कि फिल्मों में काम करने का उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं था, बल्कि अच्छा सिनेमा करना और लोगों के दिलों में जगह बनाना था। यही वजह है कि उन्होंने अपने पूरे करियर में कभी फीस को लेकर विवाद या प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बनने की कोशिश नहीं की।</p>
<p style="text-align:justify;">हेमा मालिनी का फिल्मी सफर वर्ष 1968 में फिल्म 'सपनों का सौदागर' से शुरू हुआ था। पहली ही फिल्म से उन्होंने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसके बाद 1970 और 1980 का दशक उनके नाम रहा। उन्होंने एक के बाद एक कई सफल फिल्मों में काम किया और जल्द ही हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। 'सीता और गीता', 'शोले', 'ड्रीम गर्ल', 'सत्ते पे सत्ता' और 'बागबान' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, अभिनय शैली और नृत्य कौशल ने उन्हें दर्शकों के बीच अलग पहचान दिलाई। इसी लोकप्रियता के कारण उन्हें बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' का नाम मिला, जो आज भी उनकी पहचान बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिल्मों के अलावा हेमा मालिनी ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य, खासकर भरतनाट्यम में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने देश और विदेश में कई मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दीं और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अभिनय और नृत्य दोनों क्षेत्रों में उनके योगदान की लगातार सराहना होती रही है। बाद के वर्षों में उन्होंने निर्देशन और फिल्म निर्माण में भी कदम रखा। वर्ष 1992 में उन्होंने फिल्म 'दिल आशना है' का निर्देशन और निर्माण किया। इस फिल्म में शाहरुख खान और दिव्या भारती मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। इसके बाद 1995 में उन्होंने फिल्म 'मोहिनी' का निर्माण किया, जिसमें उनकी भतीजी मधू और अभिनेता सुदेश बेरी प्रमुख भूमिकाओं में थे। हालांकि निर्देशन के क्षेत्र में उन्होंने ज्यादा फिल्में नहीं बनाईं, लेकिन इस अनुभव को भी उन्होंने अपने करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना।</p>
<p style="text-align:justify;">समय के साथ हेमा मालिनी ने फिल्मों में काम कम कर दिया और राजनीति की ओर सक्रिय हो गईं। वर्तमान में वह लोकसभा सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। इसके साथ ही वह सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी लगातार भाग लेती हैं। भारतीय सिनेमा में उनके लंबे और उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2000 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया। बाद में वर्ष 2012 में उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी प्रदान की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">हेमा मालिनी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की फीस को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहती हैं। बड़े सितारों की करोड़ों रुपये की फीस अक्सर सुर्खियां बनती है, लेकिन हेमा मालिनी का कहना है कि उनके दौर में फिल्मों की सफलता का पैमाना केवल पैसा नहीं था। उनके अनुसार, कलाकार की सबसे बड़ी कमाई दर्शकों का विश्वास, सम्मान और वर्षों तक मिलने वाला प्यार होता है। यही सोच उन्हें आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे सम्मानित और प्रेरणादायक अभिनेत्रियों में शामिल करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:51:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कंगना रनोट की डेब्यू फिल्म पर माता-पिता की नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[गैंगस्टर फिल्म देखकर परिवार की प्रतिक्रिया पर बोलीं कंगना, बाद में मिला नेशनल अवॉर्ड]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/parents-displeasure-over-kangana-ranauts-debut-film/article-54788"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kangana-ranaut.jpg" alt=""></a><br /><p>बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनोट ने अपनी शुरुआती फिल्म ‘गैंगस्टर’ से जुड़ा एक पुराना अनुभव साझा किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि फिल्म देखने के बाद उनके माता-पिता खुश नहीं थे। हाल ही में अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के प्रमोशन के दौरान कंगना ने इस घटना को याद करते हुए कहा कि उनके परिवार ने उनकी पहली फिल्म को उस नजरिए से देखा, जो एक आम मध्यमवर्गीय परिवार में अपेक्षित होता है।</p>
<p>कंगना के मुताबिक, जब ‘गैंगस्टर’ रिलीज हुई थी, तब उनके पिता ने फिल्म पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी थी। लेकिन उनकी मां ने फिल्म देखने के बाद चिंता जताई थी। कंगना ने बताया कि उनकी मां को फिल्म के कुछ दृश्य असहज लगे थे और उन्होंने इस बात पर चिंता जताई थी कि उनकी बेटी इतनी छोटी उम्र में इस तरह के सीन कैसे कर रही है। परिवार को यह भी चिंता थी कि समाज उनके काम को किस नजर से देखेगा। एक्ट्रेस ने बातचीत में कहा कि उस समय उन्हें काफी बुरा लगा था क्योंकि उन्हें लगा कि उनका परिवार फिल्म की कहानी और उनके अभिनय के बजाय सिर्फ कुछ दृश्यों को ही देख रहा है। कंगना ने बताया कि उस अनुभव ने उन्हें यह समझा दिया कि फिल्म इंडस्ट्री और परिवार की सोच में बड़ा अंतर होता है, खासकर तब जब परिवार फिल्मी दुनिया से जुड़ा न हो।</p>
<p>कंगना ने कहा कि इसके बाद उन्होंने यह तय कर लिया था कि वे अपने माता-पिता से अपनी फिल्मों पर किसी खास प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं रखेंगी। उनके अनुसार, यह स्वाभाविक है कि एक सामान्य परिवार कला और अभिनय की बारीकियों को उसी तरह नहीं समझ पाता जैसा कि इंडस्ट्री से जुड़े लोग समझते हैं। कंगना ने अपने करियर के एक और महत्वपूर्ण पल को याद करते हुए बताया कि जब उनकी फिल्म ‘क्वीन’ रिलीज हुई थी, तब उन्हें दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन की ओर से एक पत्र मिला था, जिसमें उन्होंने उनकी परफॉर्मेंस की तारीफ की थी। कंगना ने कहा कि उस समय उन्हें महसूस हुआ कि उनके काम को समझने वाले लोग इंडस्ट्री में मौजूद हैं और यह उनके लिए एक बड़ा उत्साहवर्धक क्षण था।</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि धीरे-धीरे समय के साथ उनके माता-पिता की सोच में बदलाव आया। जब उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला, तब उनके परिवार को पहली बार लगा कि उनकी बेटी को देश के सर्वोच्च मंच पर सम्मान मिला है। इसके बाद जब उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला, तो यह उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण बन गया और उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। कंगना के अनुसार, इस बदलाव ने उनके परिवार को यह समझने में मदद की कि फिल्म इंडस्ट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि इसमें गंभीर कला, मेहनत और सम्मान भी शामिल है। इसके बाद उनके माता-पिता ने उनके काम को एक अलग दृष्टिकोण से देखना शुरू किया और उनके करियर को लेकर उनकी चिंता भी कम हो गई।</p>
<p>अपनी आने वाली फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के बारे में बात करते हुए कंगना ने बताया कि यह फिल्म वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। फिल्म एक ऐसे सरकारी अस्पताल की कहानी पर आधारित है, जहां संकट की स्थिति में कर्मचारियों द्वारा दिखाई गई हिम्मत और मानवता को दिखाया गया है। यह कहानी कठिन परिस्थितियों में भी लोगों की सेवा भावना को उजागर करती है। फिल्म का निर्देशन मनोज तापड़िया ने किया है। इसमें कंगना रनोट के साथ गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, अमृता नामदेव, ईशा डे, प्रिया बेर्डे और आशा शेलार जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। कंगना का यह बयान एक बार फिर उनके करियर की शुरुआती चुनौतियों और पारिवारिक प्रतिक्रिया को लेकर चर्चा में है। साथ ही यह भी दिखाता है कि समय के साथ कलाकारों और उनके परिवारों के बीच समझ कैसे विकसित होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:44:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फोटो के बहाने बुलाकर किया पद्मश्री फूलबासन बाई का अपहरण, पुलिस ने चेकिंग में पकड़े किडनैपर</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ में पद्मश्री फूलबासन बाई के अपहरण की कोशिश नाकाम, पुलिस ने चेकिंग में कार रोकी और 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जांच जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/padmashree-phoolbasan-bai-was-kidnapped-by-calling-her-on-the/article-52754"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(55).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में मंगलवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब पद्मश्री सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता फूलबासन बाई यादव के अपहरण की कोशिश की गई। घटना सुकुलदैहान चौकी क्षेत्र की है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां कुछ लोगों ने पहले उन्हें बातचीत और फोटो खिंचवाने के बहाने घर से बाहर बुलाया और फिर अचानक उनका हाथ-पैर बांधकर कार में बैठा लिया। मामला सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह करीब 10 बजे एक महिला समेत तीन लोग बेमेतरा से राजनांदगांव पहुंचे थे। इनमें मुख्य आरोपी बताई जा रही खुशबू साहू भी शामिल थी। आरोप है कि सभी ने फूलबासन बाई के घर पहुंचकर उनसे </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">जरूरी चर्चा</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">फोटो शूट</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">की बात कही। शुरुआत में माहौल सामान्य लगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जैसे ही फूलबासन बाई घर से बाहर आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें कार में बैठा लिया गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कार कुछ दूर निकलते ही उनके हाथ-पैर बांध दिए गए और मुंह पर गमछा डाल दिया गया ताकि वे किसी को आवाज न दे सकें।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके बाद आरोपी खैरागढ़ की तरफ भागने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन चिखली पुलिस चौकी के पास नियमित चेकिंग के दौरान उनकी कार रोक ली गई। यहां स्थिति अचानक बदल गई। पुलिस को देखकर आरोपियों ने कहा कि महिला को मिर्गी का दौरा पड़ा है और वे उसे अस्पताल ले जा रहे हैं। शुरुआत में यह बात सामान्य लगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मौके पर मौजूद एक पुलिसकर्मी ने फूलबासन बाई को पहचान लिया। यहीं से शक गहरा गया और पूरी गाड़ी की जांच शुरू कर दी गई। कुछ ही देर में साजिश की परतें खुलती चली गईं और सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">खुशबू साहू पिछले कुछ महीनों से फूलबासन बाई के संपर्क में थी। बताया जा रहा है कि वह स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई है और उस पर पहले भी महिलाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों में अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस पूरे मामले के पीछे कोई आर्थिक लेन-देन या दबाव बनाने की कोशिश थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फूलबासन बाई यादव का नाम छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जाना जाता है। ऐसे में उनके साथ हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी पैदा कर दी है। कई लोग इसे सुनियोजित साजिश मानकर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस अपहरण प्रयास में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं और इसका असली मकसद क्या था। मामला गंभीर होने के चलते जांच को कई एंगल से आगे बढ़ाया जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 13:27:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>मशहूर फोटोग्राफर रघु राय का निधन, 83 साल की उम्र में ली अंतिम सांस</title>
                                    <description><![CDATA[रघु राय निधन से फोटोजर्नलिज्म जगत में शोक, ऐतिहासिक पलों को कैमरे में कैद करने वाले महान फोटोग्राफर को श्रद्धांजलि]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/famous-photographer-raghu-rai-passes-away-breathed-his-last-at/article-52145"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/raghu-rai-death.jpg" alt=""></a><br /><p>देश के वरिष्ठ फोटो पत्रकार <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">रघु राय</span></span> का रविवार को 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से कैंसर और उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे। एक निजी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। </p>
<p>परिवार के अनुसार, रघु राय को कुछ वर्ष पहले प्रोस्टेट कैंसर हुआ था, जो बाद में शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल गया। हाल के समय में उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी। उनके बेटे नितिन राय ने बताया कि बीमारी के बावजूद उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया। उनका अंतिम संस्कार रविवार शाम नई दिल्ली के लोधी श्मशान घाट पर किया जाएगा।</p>
<p>रघु राय को भारत के सबसे प्रतिष्ठित फोटो जर्नलिस्ट्स में गिना जाता है। उन्होंने अपने कैमरे के जरिए देश के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन के कई अहम क्षणों को दर्ज किया। उनकी तस्वीरें केवल दृश्य नहीं बल्कि इतिहास का जीवंत दस्तावेज मानी जाती हैं।</p>
<p>उन्होंने 1965 में अपने करियर की शुरुआत की और 1966 में <em>The Statesman</em> अखबार से जुड़कर पहचान बनाई। 1971 के भारत-पाक युद्ध और बांग्लादेश शरणार्थी संकट की उनकी तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें प्रसिद्धि दिलाई। उनकी प्रतिभा को विश्वप्रसिद्ध फोटोग्राफर <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Henri Cartier-Bresson</span></span> ने पहचाना और उन्हें प्रतिष्ठित संस्था <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Magnum Photos</span></span> के लिए नामांकित किया।</p>
<p>उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1972 में ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले। 1992 में उन्हें अमेरिका में ‘फोटोग्राफर ऑफ द ईयर’ का सम्मान मिला, जबकि 2009 में फ्रांस सरकार ने उन्हें ‘ऑफिसियर डेस आर्ट्स एट लेटर्स’ से नवाजा।</p>
<p>1980 के दशक में उन्होंने <em>India Today</em> पत्रिका के साथ काम करते हुए कई प्रभावशाली फोटो निबंध तैयार किए, जो आज भी पत्रकारिता और फोटोग्राफी के छात्रों के लिए अध्ययन का विषय हैं। उनकी तस्वीरें <em>Time</em>, <em>Life</em>, <em>The New York Times</em> सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में प्रकाशित हुईं, जिससे भारतीय समाज की झलक वैश्विक मंच तक पहुंची।</p>
<p>रघु राय ने फोटो पत्रकारिता को एक नई संवेदनशीलता और गहराई दी। उन्होंने कैमरे को केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि समाज की सच्चाई को दिखाने का माध्यम बनाया।</p>
<p>उनके निधन के बाद मीडिया, कला और सांस्कृतिक जगत में शोक व्यक्त किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग उनके कार्यों को याद कर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 15:37:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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