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                <title>Hospital News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Hospital News RSS Feed</description>
                
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                <title>मझगवां अस्पताल के डॉक्टर कक्ष में घुसा जहरीला सांप, वन विभाग ने रेस्क्यू कर टाला बड़ा हादसा</title>
                                    <description><![CDATA[सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सांप दिखते ही मरीजों और स्टाफ में मची अफरातफरी, वन विभाग की टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/a-poisonous-snake-entered-the-doctors-room-of-majhgawan-hospital/article-58333"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/majhgawan-hospital.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जिले के मझगवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उस समय अफरातफरी का माहौल बन गया, जब अस्पताल के डॉक्टर कक्ष के भीतर एक जहरीला सांप दिखाई दिया। सांप को देखते ही अस्पताल में मौजूद मरीज, उनके परिजन और स्वास्थ्य कर्मियों में दहशत फैल गई। कुछ देर के लिए अस्पताल परिसर में हड़कंप जैसी स्थिति बन गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर हटने लगे। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक सांप को पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया। समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह अस्पताल की नियमित गतिविधियां चल रही थीं। मरीज उपचार के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, जबकि डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी अपने कार्य में व्यस्त थे। इसी दौरान डॉक्टर कक्ष में अचानक एक जहरीला सांप दिखाई दिया। जैसे ही इसकी जानकारी अस्पताल के कर्मचारियों को मिली, उन्होंने तत्काल कमरे को खाली कराया और मरीजों को भी सुरक्षित दूरी पर रहने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ ही मिनटों में यह खबर पूरे अस्पताल परिसर में फैल गई। कई मरीज और उनके परिजन घबराकर अस्पताल के बाहर निकल आए। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को शांत बनाए रखने की कोशिश की और किसी भी प्रकार की अफवाह फैलने से रोका। इसके बाद तुरंत वन विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की रेस्क्यू टीम बिना देर किए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। टीम के सदस्य विनोद पाण्डेय और लखन यादव ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया और सांप की गतिविधियों पर नजर रखी। काफी सावधानी और अनुभव के साथ उन्होंने सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। रेस्क्यू के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि न तो किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचे और न ही सांप को किसी प्रकार की चोट आए।</p>
<p style="text-align:justify;">रेस्क्यू टीम ने बताया कि सांप जहरीली प्रजाति का था। यदि समय रहते उसे नहीं पकड़ा जाता तो अस्पताल में मौजूद लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता था। सांप को पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित कंटेनर में रखा गया और वन क्षेत्र में ले जाकर प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बरसात के मौसम में इस तरह की घटनाएं बढ़ जाती हैं। लगातार बारिश के कारण बिलों और झाड़ियों में रहने वाले सांप सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी वाले इलाकों, मकानों, स्कूलों और सरकारी भवनों तक पहुंच जाते हैं। अस्पताल, जहां हर समय बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं, वहां इस प्रकार की घटनाओं को गंभीरता से लेना जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल प्रशासन ने वन विभाग की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि यदि रेस्क्यू टीम समय पर नहीं पहुंचती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। कर्मचारियों ने भी राहत की सांस ली कि बिना किसी नुकसान के पूरे घटनाक्रम का सफलतापूर्वक समाधान हो गया। घटना के बाद अस्पताल परिसर की साफ-सफाई और निरीक्षण भी कराया गया। अधिकारियों ने भवन के आसपास झाड़ियों और घास की सफाई कराने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की संभावना कम हो सके। साथ ही अस्पताल परिसर में मौजूद पुराने सामान और अनुपयोगी वस्तुओं को हटाने की भी योजना बनाई गई है, क्योंकि ऐसे स्थानों पर अक्सर सांप और अन्य जीव छिप जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:08:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर ने रचा नया रिकॉर्ड, 99 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को मिला NQAS प्रमाणन</title>
                                    <description><![CDATA[इलाज, जांच, स्वच्छता और मरीजों की सुरक्षा के मानकों पर खरे उतरे अस्पताल; छत्तीसगढ़ का पहला जिला बना रायपुर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/6a4f3c907401d/article-58260"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-health.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रायपुर जिले ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले की 99 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) यानी नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के साथ रायपुर छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन गया है, जहां सबसे अधिक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को यह राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि लगातार मॉनिटरिंग, बेहतर प्रबंधन और स्वास्थ्य कर्मियों की टीमवर्क का परिणाम है। अभी जिले की दो स्वास्थ्य संस्थाओं के मूल्यांकन का परिणाम भारत सरकार से आना बाकी है, जबकि तीन अन्य संस्थानों का राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन होना शेष है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण गुणवत्ता मूल्यांकन कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और मानक आधारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं का कई स्तरों पर विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। इनमें मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, इलाज और जांच की गुणवत्ता, दवाओं की उपलब्धता, अस्पताल की स्वच्छता, रिकॉर्ड प्रबंधन, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, मरीजों की सुविधा और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे अनेक मानकों को परखा जाता है। निर्धारित मानकों पर सफल होने के बाद ही किसी स्वास्थ्य संस्था को NQAS प्रमाणपत्र दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रायपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे थे। अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, चिकित्सकीय सेवाओं में सुधार, नियमित निरीक्षण और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। इसी का परिणाम है कि बड़ी संख्या में स्वास्थ्य संस्थाएं राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरी उतर सकीं। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रमाणन केवल एक उपलब्धि नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार की जिम्मेदारी भी है। रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार स्वास्थ्य संस्थाओं में नियमित मॉनिटरिंग, समय-समय पर समीक्षा बैठकें और टीमवर्क के कारण यह सफलता हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी गुणवत्ता के इन मानकों को बनाए रखने और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने कहा कि NQAS प्रमाणन किसी भी स्वास्थ्य संस्था के लिए गुणवत्ता और विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण प्रमाण होता है। उन्होंने बताया कि मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, अस्पतालों की स्वच्छता और सेवा व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। यही कारण है कि रायपुर जिले ने प्रदेश में सबसे अधिक NQAS प्रमाणित स्वास्थ्य संस्थाओं वाला पहला जिला बनने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन संस्थानों का मूल्यांकन अभी बाकी है, उन्हें भी आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">NQAS प्रमाणन का सबसे बड़ा लाभ आम मरीजों को मिलता है। इससे अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बेहतर होती है, मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिलता है और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ती है। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था होने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। साथ ही रिकॉर्ड प्रबंधन और दवा वितरण प्रणाली में सुधार आने से सेवाएं अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनती हैं। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता सुधार का सीधा असर मरीजों के भरोसे पर भी पड़ता है। जब अस्पताल राष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हैं, तो लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक विश्वास जताते हैं। इससे निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है। रायपुर जिले में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य संस्थाओं को NQAS प्रमाणन मिलने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश के अन्य जिले भी इसी दिशा में तेजी से काम करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के तहत प्रमाणित संस्थाओं का समय-समय पर दोबारा मूल्यांकन भी किया जाता है। इसलिए प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी अस्पतालों को लगातार गुणवत्ता बनाए रखनी होती है। यदि किसी संस्था में निर्धारित मानकों का पालन नहीं होता है तो उसका प्रमाणन प्रभावित हो सकता है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी और सुधार की प्रक्रिया को जारी रखता है। रायपुर की इस उपलब्धि को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। साथ ही यह उपलब्धि अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगी। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में शेष स्वास्थ्य संस्थाओं को भी NQAS प्रमाणन दिलाया जाए और पूरे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:13:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जिंदा है या मर गया देखने महिला बनकर अस्पताल पहुंचा आरोपी, पत्नी ने पहचानकर पकड़वाया</title>
                                    <description><![CDATA[घायल मजदूर पर चाकू से जानलेवा हमला करने के बाद हाल जानने पहुंचा था आरोपी, अस्पताल में मची अफरा-तफरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-accused-reached-the-hospital-posing-as-a-woman-to/article-56637"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-crime.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) परिसर स्थित हजार बिस्तर अस्पताल में रविवार को उस समय अजीब स्थिति बन गई, जब एक युवक महिला का भेष बनाकर सर्जिकल वार्ड में पहुंच गया। शुरुआत में अस्पताल में मौजूद लोगों को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन थोड़ी ही देर बाद उसकी पहचान ऐसे आरोपी के रूप में हुई जिसने एक मजदूर पर चाकू से जानलेवा हमला किया था। घायल मजदूर की पत्नी ने उसकी चाल-ढाल और हावभाव देखकर उसे पहचान लिया। इसके बाद वार्ड में हंगामा मच गया और लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस के अनुसार मामला कंपू थाना क्षेत्र से जुड़ा है। हजीरा के चार शहर का नाका इलाके में रहने वाला 32 वर्षीय देवेन्द्र मौर्य मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात वह अपनी पत्नी रचना मौर्य और अन्य मजदूरों के साथ गुढ़ा-गुढ़ी नाका क्षेत्र में वॉल पुट्टी से भरे ट्रक को खाली करने गया था। देर रात तक काम चलता रहा और काम पूरा होने के बाद देवेन्द्र अपने कुछ साथियों के साथ वहां से निकल गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देवेन्द्र अपने परिचित पप्पू भदौरिया और धर्मेन्द्र भदौरिया के साथ शराब पीने बैठा था। इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि दोनों आरोपी नशे में थे और गाली-गलौज कर रहे थे। देवेन्द्र ने जब इसका विरोध किया तो बात तेजी से बढ़ गई। कुछ ही देर में विवाद इतना गंभीर हो गया कि आरोपियों ने चाकू निकाल लिया और उस पर हमला कर दिया। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार आरोपियों ने देवेन्द्र के सीने, पेट, गर्दन और हाथ पर कई वार किए। अचानक हुए हमले से वह संभल नहीं पाया और खून से लथपथ होकर सड़क पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे बचाया और तत्काल अस्पताल पहुंचाया। गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जेएएच के हजार बिस्तर अस्पताल में भर्ती कर लिया, जहां उसका इलाज जारी है। उसकी हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है और डॉक्टर लगातार निगरानी कर रहे हैं। घटना के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए थे। पुलिस ने घायल की पत्नी रचना मौर्य की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। इसी बीच रविवार को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया। बताया जा रहा है कि वारदात के बाद आरोपी धर्मेन्द्र भदौरिया को यह डर सताने लगा कि कहीं घायल देवेन्द्र की मौत न हो जाए। उसे आशंका थी कि यदि ऐसा हुआ तो उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हो सकता है। इसी वजह से वह घायल की स्थिति जानने अस्पताल पहुंच गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस से बचने और पहचान छिपाने के लिए उसने महिला का भेष धारण किया। आरोपी सलवार-सूट पहनकर अस्पताल पहुंचा और सीधे उस सर्जिकल वार्ड तक जा पहुंचा जहां देवेन्द्र का इलाज चल रहा था। वार्ड में मौजूद लोगों को शुरू में उस पर कोई शक नहीं हुआ, लेकिन देवेन्द्र की पत्नी रचना की नजर जैसे ही उस पर पड़ी, उसे कुछ अजीब लगा। उसने आरोपी की कद-काठी, चलने के तरीके और चेहरे के हावभाव को ध्यान से देखा और तुरंत पहचान लिया कि यह वही व्यक्ति है जिसने उसके पति पर हमला किया था। रचना ने बिना देर किए शोर मचाना शुरू कर दिया। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर अस्पताल में मौजूद अन्य लोग और सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंच गए। खुद को घिरता देख आरोपी वहां से भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन लोगों ने उसका पीछा किया और कुछ ही दूरी पर पकड़ लिया। इसके बाद उसे अस्पताल सुरक्षा कर्मियों की निगरानी में रखा गया और पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही कंपू थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और आरोपी धर्मेन्द्र भदौरिया को हिरासत में ले लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना के सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके। वहीं दूसरा आरोपी पप्पू भदौरिया अभी भी फरार है। उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कंपू थाना प्रभारी अमर सिंह सिकरवार ने बताया कि शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। घायल का इलाज जारी है और उसकी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों को भी हैरान कर दिया। लोगों के बीच चर्चा का विषय यह रहा कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए महिला का भेष बनाकर अस्पताल तक पहुंच गया, लेकिन घायल की पत्नी की सतर्कता के कारण वह पुलिस के शिकंजे से बच नहीं सका।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:08:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गुना में दूषित पानी पीने से 18 बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[टूटी पाइपलाइन से घरों में पहुंचा गंदा पानी, उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/18-children-admitted-to-hospital-after-drinking-contaminated-water-in/article-55283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guna-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के गुना शहर में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के बूढ़े बालाजी, पुरानी छावनी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्र में गंदा पानी सप्लाई होने के बाद करीब 18 बच्चे बीमार पड़ गए। सभी बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई स्थानों पर टूटी हुई पाइपलाइनों के कारण पेयजल में गंदगी और दूषित तत्व मिल गए, जिससे यह स्थिति बनी। जानकारी के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने पिछले कुछ दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत की थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी का रंग भी सामान्य नहीं था, लेकिन शुरुआत में लोगों ने इसे अस्थायी समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया। बाद में जब बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी तो मामला गंभीर हो गया। एक-एक कर कई बच्चों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं सामने आने लगीं। कुछ बच्चों में पीलिया के शुरुआती लक्षण भी दिखाई दिए, जिसके बाद परिजन घबरा गए और उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल में भर्ती बच्चों की उम्र 5 से 11 वर्ष के बीच बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश बच्चों में डायरिया और डिहाइड्रेशन की शिकायत थी। लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो रही थी, जिसके चलते उन्हें तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। राहत की बात यह है कि समय पर उपचार मिलने से सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है और किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई गई है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि दूषित पानी पीने से इस तरह के संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। गर्मी और बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण वे जल्दी प्रभावित होते हैं। अस्पताल प्रशासन लगातार बच्चों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जल जीवन मिशन की टीम सक्रिय हो गई। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और लोगों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त पाई गई। माना जा रहा है कि टूटी पाइपलाइन के जरिए नालियों और आसपास जमा गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे पानी दूषित हो गया। प्रशासन ने मुख्य वाटर टैंक और संबंधित पाइपलाइन क्षेत्रों से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद पानी की गुणवत्ता और संक्रमण के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। साथ ही जिन स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हैं, वहां मरम्मत कार्य भी शुरू कर दिया गया है ताकि आगे ऐसी स्थिति न बने।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत की जाती तो बच्चों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होता। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, वहां लोग पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही उपयोग करें। इसके अलावा क्लोरीन टैबलेट का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उबालने से पानी में मौजूद अधिकांश हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉक्टरों ने अभिभावकों को भी सतर्क रहने को कहा है। यदि बच्चों में उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में देरी करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों ने ओआरएस घोल और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने की भी सलाह दी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। गुना में सामने आया यह मामला एक बार फिर शहरी जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। पेयजल की गुणवत्ता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है और छोटी सी लापरवाही भी बड़े संकट का कारण बन सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:04:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भिलाई में फर्जी जांच के नाम पर ब्लैकमेलिंग, मंत्री की फोटो दिखाकर 20 लाख की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[निजी अस्पतालों को धमकाने वाला आरोपी फिर घिरा, दूसरी FIR दर्ज; खुद को मैग्जीन एडिटर बताकर बनाता था दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/blackmailing-in-the-name-of-fake-investigation-in-bhilai-by/article-52151"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(39).jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ के <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भिलाई</span></span> में निजी अस्पतालों से कथित उगाही के मामले ने तूल पकड़ लिया है। गुरमीत सिंह वाधवा नामक व्यक्ति के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि वह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">जेपी नड्डा</span></span> के साथ अपनी तस्वीर दिखाकर अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बनाता था और भारी रकम की मांग करता था।</p>
<p>सुपेला थाना क्षेत्र में दर्ज ताजा शिकायत स्पर्श अस्पताल के महाप्रबंधक द्वारा की गई है। आरोप के मुताबिक, वाधवा खुद को एक प्रतिष्ठित मैग्जीन का मैनेजिंग एडिटर बताता था और सरकारी जांच से जुड़ा होने का दावा करता था। वह अस्पताल पहुंचकर विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक खामियों का हवाला देता और कार्रवाई की चेतावनी देता था।</p>
<p>अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आरोपी ने ऑक्सीजन प्लांट, पर्यावरण मानकों और भवन निर्माण से जुड़ी कमियों का मुद्दा उठाते हुए रिपोर्ट तैयार करने की बात कही। इसके साथ ही उसने अस्पताल बंद कराने की धमकी दी और कथित तौर पर 20 लाख रुपये की मांग की। रकम देने से इनकार करने पर उसने फोन पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।</p>
<p>शिकायत में यह भी उल्लेख है कि आरोपी लगातार अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क करता रहा। उसने कुछ मामलों में सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए अस्पताल की छवि खराब करने का प्रयास भी किया। प्रबंधन का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम सुनियोजित तरीके से दबाव बनाकर धन उगाही करने के उद्देश्य से किया गया।</p>
<p>इससे पहले भी छावनी थाना क्षेत्र में एक अन्य निजी अस्पताल की शिकायत पर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है, जहां उसने कथित तौर पर 5 लाख रुपये की मांग की थी। दोनों मामलों में समान तौर-तरीकों का इस्तेमाल सामने आया है, जिससे पुलिस को उगाही के एक पैटर्न की आशंका है।</p>
<p>पुलिस के अनुसार, आरोपी ने विभिन्न सरकारी कार्यालयों में अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें और आरटीआई आवेदन भी किए, जिसके चलते संबंधित विभागों की जांच टीमें मौके पर पहुंचीं। इससे अस्पताल प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव बना। हालांकि, जांच के दौरान ही उसके दावों पर संदेह गहराया और मामला पुलिस तक पहुंचा।</p>
<p>सुपेला थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।आरोपी की गतिविधियों और संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि उसने किन-किन संस्थानों को निशाना बनाया और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:46:26 +0530</pubDate>
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