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                <title>Water Supply - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Water Supply RSS Feed</description>
                
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                <title>जबलपुर में पेयजल संकट: नलों से निकला काला और बदबूदार पानी, लोगों में दहशत</title>
                                    <description><![CDATA[राजीव गांधी वार्ड में दूषित पेयजल से मचा हड़कंप, दर्जनों लोगों के बीमार होने का दावा; नगर निगम से तत्काल जांच और सुरक्षित जलापूर्ति की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/drinking-water-crisis-in-jabalpur-black-and-smelly-water-comes/article-58178"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/jabalpur-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों की घटना के बाद अब जबलपुर में भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के उत्तर मध्य विधानसभा क्षेत्र के राजीव गांधी वार्ड में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब लोगों के घरों में नलों से काला, बदबूदार और गंदगी से भरा पानी आने लगा। अचानक बदले पानी के रंग और तेज दुर्गंध ने लोगों को दहशत में डाल दिया। स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल जांच, पाइपलाइन की मरम्मत और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। बुधवार सुबह रोज की तरह लोगों ने घरेलू उपयोग और पीने के लिए नल खोले, लेकिन पानी की जगह काले रंग का गंदा और बदबूदार पानी निकलने लगा। कई लोगों ने शुरुआत में इसे बारिश का असर समझकर कुछ देर इंतजार किया, लेकिन 10 से 15 मिनट तक लगातार गंदा पानी आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई। इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने आसपास की जलापूर्ति लाइन का निरीक्षण किया और आरोप लगाया कि पेयजल पाइपलाइन का एक हिस्सा नाले के भीतर से होकर गुजर रहा है। लोगों का कहना है कि पाइपलाइन में कहीं लीकेज होने के कारण नाले का दूषित पानी सीधे पेयजल लाइन में मिल रहा है, जिससे घरों तक गंदा पानी पहुंच रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय नागरिकों ने इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि वे नियमित रूप से टैक्स और जलकर का भुगतान करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं मिल रही है। नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों और नगर निगम अधिकारियों से स्वयं मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने और समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। क्षेत्र के निवासियों का दावा है कि पिछले कुछ दिनों से वार्ड में बड़ी संख्या में लोग पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बुखार जैसी समस्याओं से परेशान हैं। पहले लोगों को बीमारी का कारण समझ में नहीं आ रहा था, लेकिन अब नलों से दूषित पानी निकलने के बाद आशंका जताई जा रही है कि जलजनित संक्रमण इसके पीछे की एक बड़ी वजह हो सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। राजीव गांधी वार्ड निवासी विजय नायडू ने बताया कि उन्होंने सुबह मोटर चलाकर घर की टंकी में पानी भर लिया था। बाद में जब पीने के लिए पानी निकाला गया तो उसमें कीचड़ और गंदगी साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि अब पूरी टंकी का पानी अनुपयोगी हो गया है और उसे खाली कर साफ कराना पड़ेगा। उनका कहना है कि इस तरह की स्थिति में परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। </p>
<p style="text-align:justify;">दूषित पानी की आपूर्ति का असर केवल पीने तक सीमित नहीं रहा। जिन लोगों ने सुबह पानी की टंकियां भर ली थीं, अब उन्हें पूरी टंकी की सफाई कराने की चिंता सता रही है। इसके अलावा घरों में लगे वाटर फिल्टर, आरओ सिस्टम और वाटर कूलर भी प्रभावित होने की आशंका है। कई लोगों ने एहतियात के तौर पर फिलहाल इन उपकरणों का उपयोग बंद कर दिया है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि वास्तव में पेयजल पाइपलाइन नाले के भीतर या उसके संपर्क में होकर गुजर रही है तो यह लंबे समय से बनी एक गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही है। उनका कहना है कि पाइपलाइन की नियमित जांच और समय-समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। नागरिकों ने मांग की है कि पूरे क्षेत्र की जलापूर्ति लाइन की तकनीकी जांच कराई जाए और जहां भी लीकेज या क्षति हो, उसे तत्काल ठीक किया जाए। स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र में तुरंत स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। साथ ही पाइपलाइन की जांच, लीकेज की मरम्मत, पानी के नमूनों की प्रयोगशाला में जांच और जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में जलजनित बीमारियों का बड़ा प्रकोप फैल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:20:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>13 जुलाई से शुरू होगा छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र, 1033 सवालों के साथ सरकार को घेरेगा विपक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिवसीय सत्र में कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट और मानसून की तैयारियों जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/monsoon-session-of-chhattisgarh-assembly-will-start-from-july-13/article-58083"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से पहले ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार अब तक विधायकों की ओर से 1033 प्रश्न लगाए जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में प्रश्न विपक्षी कांग्रेस की ओर से हैं। कांग्रेस ने इस बार कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट, सड़कों की स्थिति और मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है। वहीं सत्ता पक्ष भी विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने और अपनी योजनाओं तथा उपलब्धियों को सदन के सामने रखने की तैयारी में जुटा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान सदन में कई मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे की स्थिति देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधानसभा का यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब प्रदेश में कई स्थानीय और राज्य स्तरीय मुद्दे चर्चा में हैं। प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के दौरान विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में अपराध की घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। हत्या, चाकूबाजी, महिलाओं के खिलाफ अपराध, नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। विपक्ष का आरोप है कि कई मामलों में प्रशासन समय पर प्रभावी कार्रवाई करने में सफल नहीं रहा, इसलिए इन विषयों पर विस्तृत चर्चा की जरूरत है। माना जा रहा है कि इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मानसून सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठने वाले हैं। खरीफ सीजन के बीच खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, धान खरीदी की तैयारियां और कृषि विभाग की योजनाओं को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस का कहना है कि कई क्षेत्रों से किसानों को समय पर उर्वरक और अन्य जरूरी संसाधन नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं सरकार का दावा है कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सदन में इन दावों और आरोपों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। कृषि से जुड़े सवालों की संख्या भी इस बार अधिक बताई जा रही है, जिससे यह मुद्दा सत्र के दौरान प्रमुख बना रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के नकटी गांव का भूमि विवाद भी इस बार विधानसभा में राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बनने की संभावना है। अतिक्रमण हटाने, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद बना हुआ है। इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार हो रही है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए कई सवाल उठाने की तैयारी में है। वहीं सरकार की ओर से पूरे मामले में अपना पक्ष रखने की तैयारी की गई है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी सदन में काफी देर तक बहस हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती, पेयजल संकट और खराब सड़कें भी विपक्ष के एजेंडे में शामिल हैं। कई जिलों से लगातार बिजली आपूर्ति बाधित होने और पेयजल की समस्या की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके अलावा बारिश के दौरान सड़कों की खराब स्थिति, जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए जाएंगे। विपक्ष का कहना है कि मानसून शुरू होने से पहले जिन तैयारियों का दावा किया गया था, उनकी वास्तविक स्थिति की समीक्षा जरूरी है। हालिया बारिश के दौरान राहत और बचाव कार्यों की स्थिति भी चर्चा का विषय बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास से जुड़े मामलों पर भी प्रश्न लगाए गए हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन, बजट खर्च और विकास कार्यों की प्रगति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विधानसभा सचिवालय के अनुसार प्रश्नों की संख्या को देखते हुए इस बार प्रश्नकाल काफी व्यस्त रहने की संभावना है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य कार्यवाही के दौरान भी कई महत्वपूर्ण विषय सदन में उठ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर सरकार ने भी मानसून सत्र को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है ताकि विपक्ष के सवालों का तथ्यात्मक जवाब दिया जा सके। मंत्रियों और अधिकारियों के स्तर पर भी विभागवार समीक्षा की जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में विकास कार्य लगातार जारी हैं और विपक्ष के सवालों का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाएगा। सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों को भी सदन में प्रमुखता से रखने की रणनीति बना रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ग्रामीणों की शिकायत पर एक्शन, डिप्टी CM के निर्देश के बाद दो EE को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[बस्तर दौरे में पेयजल संकट की शिकायत सामने आने पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सख्त, दंतेवाड़ा और कोंडागांव के अधिकारियों से सात दिन में मांगा जवाब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/action-on-villagers-complaint-notice-to-two-ees-after-instructions/article-55734"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/arun-sao.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बस्तर संभाग के ग्रामीण इलाकों में नल-जल योजनाओं के संचालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बस्तर दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उनके सामने ही पेयजल संकट की समस्या रखी थी। लोगों का कहना था कि गांवों में करोड़ों रुपए खर्च कर नल-जल योजनाएं बनाई गई हैं, लेकिन इसके बावजूद नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है। शिकायत मिलने के बाद उप मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई थी और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब इसी मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने दंतेवाड़ा और कोंडागांव जिले के कार्यपालन अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। मामला उस समय सामने आया जब उप मुख्यमंत्री अरुण साव जल अर्पण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बस्तर क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे थे। कोंडागांव जिले के बेड़मा गांव और दंतेवाड़ा जिले के टेकनार गांव में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी परेशानी बताई। लोगों का कहना था कि जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पाइपलाइन बिछाई गई, टंकियां बनाई गईं और घर-घर नल कनेक्शन भी दिए गए, लेकिन पानी की आपूर्ति नियमित नहीं हो रही है। कई परिवारों को आज भी पुराने स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने योजनाओं के संचालन और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद उप मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का निर्माण कराना नहीं है, बल्कि लोगों तक उसका लाभ पहुंचाना भी है। यदि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की समीक्षा की गई और प्रमुख अभियंता के.के. मरकाम की ओर से दोनों जिलों के कार्यपालन अभियंताओं को नोटिस जारी किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नोटिस में कहा गया है कि कोंडागांव जिले के बेड़मा गांव में जल जीवन मिशन के अंतर्गत तैयार की गई नल-जल योजना का संचालन और संधारण संतोषजनक नहीं पाया गया है। इसके कारण ग्रामीणों को नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही। विभाग ने माना है कि यह स्थिति शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही को दर्शाती है। साथ ही योजना के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करती है। विभाग का कहना है कि यदि योजना पूरी तरह तैयार है तो फिर ग्रामीणों को पानी क्यों नहीं मिल रहा, इसका जवाब संबंधित अधिकारियों को देना होगा। दूसरी ओर दंतेवाड़ा जिले के टेकनार गांव में भी स्थिति कुछ ऐसी ही पाई गई। जल अर्पण कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि गांव के एक मोहल्ले में कई घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। गर्मी के मौसम में लोगों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। विभाग के अनुसार तकनीकी मानकों के अनुरूप जलापूर्ति नहीं होना इस बात का संकेत है कि योजना के संचालन और निगरानी में कहीं न कहीं कमी रही है। यही वजह है कि दंतेवाड़ा के कार्यपालन अभियंता से भी जवाब तलब किया गया है। अधिकारियों को जारी नोटिस में सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने साफ किया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे संबंधित अधिकारियों में भी हलचल देखी जा रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सरकार अब जल जीवन मिशन और अन्य पेयजल योजनाओं के संचालन को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन देने का अभियान चलाया गया है। बस्तर जैसे दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में भी इस योजना के माध्यम से लोगों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की गई है। हालांकि कई स्थानों पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी संचालन और रखरखाव की चुनौतियां सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केवल पाइपलाइन बिछा देने या टंकी बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक पानी नियमित रूप से घरों तक नहीं पहुंचेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:28 +0530</pubDate>
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                <title>गुना में दूषित पानी पीने से 18 बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[टूटी पाइपलाइन से घरों में पहुंचा गंदा पानी, उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/18-children-admitted-to-hospital-after-drinking-contaminated-water-in/article-55283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guna-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के गुना शहर में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के बूढ़े बालाजी, पुरानी छावनी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्र में गंदा पानी सप्लाई होने के बाद करीब 18 बच्चे बीमार पड़ गए। सभी बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई स्थानों पर टूटी हुई पाइपलाइनों के कारण पेयजल में गंदगी और दूषित तत्व मिल गए, जिससे यह स्थिति बनी। जानकारी के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने पिछले कुछ दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत की थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी का रंग भी सामान्य नहीं था, लेकिन शुरुआत में लोगों ने इसे अस्थायी समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया। बाद में जब बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी तो मामला गंभीर हो गया। एक-एक कर कई बच्चों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं सामने आने लगीं। कुछ बच्चों में पीलिया के शुरुआती लक्षण भी दिखाई दिए, जिसके बाद परिजन घबरा गए और उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल में भर्ती बच्चों की उम्र 5 से 11 वर्ष के बीच बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश बच्चों में डायरिया और डिहाइड्रेशन की शिकायत थी। लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो रही थी, जिसके चलते उन्हें तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। राहत की बात यह है कि समय पर उपचार मिलने से सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है और किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई गई है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि दूषित पानी पीने से इस तरह के संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। गर्मी और बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण वे जल्दी प्रभावित होते हैं। अस्पताल प्रशासन लगातार बच्चों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जल जीवन मिशन की टीम सक्रिय हो गई। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और लोगों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त पाई गई। माना जा रहा है कि टूटी पाइपलाइन के जरिए नालियों और आसपास जमा गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे पानी दूषित हो गया। प्रशासन ने मुख्य वाटर टैंक और संबंधित पाइपलाइन क्षेत्रों से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद पानी की गुणवत्ता और संक्रमण के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। साथ ही जिन स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हैं, वहां मरम्मत कार्य भी शुरू कर दिया गया है ताकि आगे ऐसी स्थिति न बने।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत की जाती तो बच्चों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होता। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, वहां लोग पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही उपयोग करें। इसके अलावा क्लोरीन टैबलेट का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उबालने से पानी में मौजूद अधिकांश हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉक्टरों ने अभिभावकों को भी सतर्क रहने को कहा है। यदि बच्चों में उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में देरी करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों ने ओआरएस घोल और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने की भी सलाह दी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। गुना में सामने आया यह मामला एक बार फिर शहरी जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। पेयजल की गुणवत्ता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है और छोटी सी लापरवाही भी बड़े संकट का कारण बन सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:04:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रायपुर जल संकट: 60% वार्ड प्रभावित, पानी की समस्या गहराई</title>
                                    <description><![CDATA[शिवनगर, रायपुरा और डंगनिया समेत कई इलाकों में पानी की किल्लत, गर्मी के बीच सप्लाई व्यवस्था चरमराई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur-water-crisis-affects-60-wards-depth-of-water-problem/article-52155"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(41).jpg" alt=""></a><br />
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<p>भीषण गर्मी के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जल संकट गंभीर होता जा रहा है। शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं। हालात यह हैं कि 70 में से करीब 60 प्रतिशत वार्डों में जलापूर्ति प्रभावित है, जिससे दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है।</p>
<p>शिवनगर, रायपुरा और डंगनिया जैसे प्रमुख इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। शिवनगर में बोरवेल जल जाने से लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है और कई परिवार पहले से पानी स्टोर कर रहे हैं। वहीं रायपुरा में पाइपलाइन लीकेज के कारण नियमित सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे कई घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। डंगनिया में सप्लाई तो हो रही है, लेकिन कम प्रेशर के कारण लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा।</p>
<p>इससे पहले भी शहर के कई अन्य इलाकों—जैसे पुरानी बस्ती, चंगोराभाठा, गुढ़ियारी और भनपुरी—में पानी की समस्या सामने आ चुकी है। नगर निगम के पास इन क्षेत्रों से पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत अभी सीमित है।</p>
<p>जल संकट की एक बड़ी वजह भूजल स्तर का तेजी से गिरना और बोरवेल का फेल होना माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार शहर में बड़ी संख्या में बोरवेल खराब हो चुके हैं, जिससे वैकल्पिक स्रोतों पर दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा पाइपलाइन नेटवर्क में लीकेज और रखरखाव की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है।</p>
<p> रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होना भी संकट को गहरा रहा है। नियमों के बावजूद बड़ी संख्या में मकानों में यह सिस्टम नहीं लगाया गया है। हर साल लाखों लीटर बारिश का पानी बिना उपयोग के बह जाता है, जबकि इसका संरक्षण किया जाए तो जल संकट काफी हद तक कम हो सकता है।</p>
<p>नगर निगम ने इस दिशा में योजनाएं तो बनाई थीं, लेकिन वे अब तक धरातल पर पूरी तरह लागू नहीं हो सकी हैं। कई मामलों में फंड जमा होने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ, जिससे लोगों में नाराजगी भी है।</p>
<p>गर्मी बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जल प्रबंधन, बुनियादी ढांचे के सुधार और जनभागीदारी को लेकर ठोस कदम उठाना जरूरी माना जा रहा है, ताकि शहर को लंबे समय तक पानी की समस्या से राहत मिल सके।</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:18:54 +0530</pubDate>
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