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                <title>Summer Crisis - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Summer Crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>रीवा में पूरी रात गुल रही बिजली, भीषण गर्मी में लोग बेहाल</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम अध्यक्ष के इलाके में भी अंधेरा, MPEB दफ्तर पर ताला मिलने से बढ़ा लोगों का गुस्सा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/electricity-cut-off-all-night-in-rewa-people-are-suffering/article-54475"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/_rewa-power-cut.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">रीवा शहर में गुरुवार रात बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। नौतपा की भीषण गर्मी और करीब 44 डिग्री तापमान के बीच शहर के कई इलाकों में पूरी रात बिजली गुल रही। हालात ऐसे बन गए कि लोग घरों से निकलकर सड़कों, छतों और गलियों में रात बिताने को मजबूर हो गए। शहर में मौसम पूरी तरह साफ था, न आंधी आई और न ही बारिश हुई, इसके बावजूद घंटों बिजली सप्लाई बंद रही। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पांडेय के बंगले और उनके पूरे इलाके में भी रात 10 बजे के बाद बिजली नहीं लौटी।</p>
<p dir="ltr">रीवा के पड़रा, समान, ढेकहा, अमहिया, सिरमौर चौराहा, बिछिया, विश्वविद्यालय रोड और पुरानी बस्ती समेत कई इलाकों में या तो लगातार ट्रिपिंग होती रही या पूरी रात सप्लाई बंद रही। लोग पहले इन्वर्टर के भरोसे बैठे रहे, लेकिन देर रात तक बिजली नहीं आने से इन्वर्टर भी जवाब दे गए। इसके बाद घरों में पंखे और कूलर बंद हो गए। उमस इतनी ज्यादा थी कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों का घर के अंदर रहना मुश्किल हो गया।</p>
<p dir="ltr">रात बढ़ने के साथ लोगों की परेशानी भी बढ़ती गई। कई मोहल्लों में लोग हाथ वाले पंखे लेकर बैठे नजर आए। कुछ परिवार अपने घरों की छतों पर चादर बिछाकर लेट गए। वहीं कुछ लोग सड़क किनारे टहलते दिखे ताकि गर्मी से थोड़ी राहत मिल सके। अमहिया की रहने वाली पूजा मिश्रा ने बताया कि उनके छोटे बच्चे पूरी रात रोते रहे। गर्मी के कारण घर में सांस लेना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग की तरफ से कोई सूचना भी नहीं दी गई थी कि सप्लाई कब तक बंद रहेगी।</p>
<p dir="ltr">समान इलाके के राजेश तिवारी ने बताया कि पूरी रात परिवार के साथ छत पर बैठना पड़ा। बिजली आने का इंतजार करते-करते सुबह हो गई लेकिन सप्लाई सामान्य नहीं हो सकी। ढेकहा निवासी मोहम्मद आरिफ का कहना है कि नौतपा के दौरान इस तरह की लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब पहले से पता है कि गर्मी ज्यादा पड़ेगी तो बिजली विभाग को तैयारी भी पहले से करनी चाहिए थी।</p>
<p dir="ltr">बिजली संकट का असर सिर्फ गर्मी तक सीमित नहीं रहा। सुबह तक कई इलाकों में पानी की समस्या भी खड़ी हो गई। घरों की मोटरें नहीं चल पाने के कारण टंकियां खाली हो गईं। बिछिया की संगीता पटेल ने बताया कि सुबह पानी तक नहीं मिला। लोगों को आसपास के हैंडपंप और दूसरे मोहल्लों से पानी लाना पड़ा। कुछ इलाकों में लोग सुबह-सुबह पानी भरने के लिए लाइन में खड़े दिखाई दिए।</p>
<p dir="ltr">सबसे ज्यादा नाराजगी बिजली विभाग के रवैये को लेकर देखने को मिली। उपभोक्ता लगातार हेल्पलाइन नंबर पर फोन करते रहे लेकिन वहां से सिर्फ संबंधित जेई से संपर्क करने की बात कही जाती रही। लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों के मोबाइल बंद थे और कोई भी जवाब देने को तैयार नहीं था। रात करीब 12 बजे जब मीडिया टीम MPEB कार्यालय पहुंची तो वहां ताला लगा मिला। मौके पर कोई कर्मचारी या अधिकारी मौजूद नहीं था। दफ्तर के बाहर खड़े लोग बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते रहे।</p>
<p dir="ltr">स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नगर निगम अध्यक्ष के इलाके में भी पूरी रात अंधेरा रहा तो बाकी शहर की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर भी बिजली विभाग को लेकर नाराजगी जताई। कुछ लोगों ने लिखा कि हर साल गर्मी में यही हाल होता है लेकिन विभाग कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पा रहा।</p>
<p dir="ltr">हालांकि देर रात तक बिजली विभाग की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। यह साफ नहीं हो सका कि आखिर इतनी लंबी कटौती किस वजह से हुई। कुछ लोग तकनीकी खराबी की बात कह रहे हैं, जबकि कई नागरिकों का आरोप है कि विभाग की लापरवाही और कमजोर व्यवस्था इसकी मुख्य वजह है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मेंटेनेंस और लोड मैनेजमेंट पर ध्यान दिया जाता तो हालात इतने खराब नहीं होते।</p>
<p dir="ltr">रीवा शहर में लगातार बढ़ती बिजली कटौती अब बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। नौतपा के दौरान पड़ रही भीषण गर्मी में लोग पहले ही परेशान हैं, ऐसे में घंटों बिजली बंद रहने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। नागरिकों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 14:00:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रीवा के धुरकुच में बिजली संकट से गहराया जल संकट, ग्रामीण परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के धुरकुच गांव में एक महीने से बिजली गुल, पानी के लिए 2 किमी दूर जाना पड़ रहा भीषण गर्मी के बीच पानी के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीणों की स्थिति गंभीर होती जा रही है।प्रशासन के आश्वासन के बावजूद राहत अभी तक जमीन पर नहीं दिखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/water-crisis-deepens-due-to-electricity-crisis-in-dhurkuch-of/article-52418"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rewa-news-(15).jpg" alt=""></a><br /><p>रीवा जिले के नगर परिषद डभौरा अंतर्गत वार्ड क्रमांक 7 के ग्राम धुरकुच में बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण उत्पन्न जल संकट ने ग्रामीणों के सामने गंभीर स्थिति खड़ी कर दी है। करीब एक महीने से बिजली न होने के चलते गांव के सरकारी बोरवेल बंद पड़े हैं, जिससे पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई है। आदिवासी बहुल इस गांव के लोग भीषण गर्मी में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाने को मजबूर हैं और करीब दो किलोमीटर दूर जंगल में जाकर गड्ढा खोदकर गंदा पानी निकाल रहे हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य के लिहाज से भी चिंताजनक मानी जा रही है।</p>
<p>ग्रामीणों के मुताबिक, एक महीने पहले अज्ञात चोरों ने गांव की विद्युत केबल काट ली थी। इसके बाद से बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित है। स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग और सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। अधिकारियों की अनदेखी के कारण गांव में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है।</p>
<h5><strong>बिजली संकट गहराया</strong></h5>
<p>गांव में लगे सरकारी बोरवेल और मोटर बिजली के अभाव में बेकार हो गए हैं। इससे जल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नगर परिषद की ओर से भी नियमित टैंकर नहीं भेजे जा रहे, जिससे समस्या और बढ़ गई है।वार्ड क्रमांक 7 की पार्षद आसमा देवी ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। उन्होंने आरोप लगाया कि समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।</p>
<h5><strong>स्वास्थ्य पर खतरा</strong></h5>
<p>गंदा पानी पीने के कारण ग्रामीणों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मजबूरी में वे असुरक्षित जल स्रोतों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका है।सूत्रों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और जल्द बिजली आपूर्ति बहाल कर जल संकट दूर करने का आश्वासन दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 16:38:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर जल संकट: 60% वार्ड प्रभावित, पानी की समस्या गहराई</title>
                                    <description><![CDATA[शिवनगर, रायपुरा और डंगनिया समेत कई इलाकों में पानी की किल्लत, गर्मी के बीच सप्लाई व्यवस्था चरमराई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur-water-crisis-affects-60-wards-depth-of-water-problem/article-52155"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(41).jpg" alt=""></a><br />
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<div class="markdown prose dark:prose-invert w-full wrap-break-word light markdown-new-styling">
<p>भीषण गर्मी के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जल संकट गंभीर होता जा रहा है। शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं। हालात यह हैं कि 70 में से करीब 60 प्रतिशत वार्डों में जलापूर्ति प्रभावित है, जिससे दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है।</p>
<p>शिवनगर, रायपुरा और डंगनिया जैसे प्रमुख इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। शिवनगर में बोरवेल जल जाने से लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है और कई परिवार पहले से पानी स्टोर कर रहे हैं। वहीं रायपुरा में पाइपलाइन लीकेज के कारण नियमित सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे कई घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। डंगनिया में सप्लाई तो हो रही है, लेकिन कम प्रेशर के कारण लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा।</p>
<p>इससे पहले भी शहर के कई अन्य इलाकों—जैसे पुरानी बस्ती, चंगोराभाठा, गुढ़ियारी और भनपुरी—में पानी की समस्या सामने आ चुकी है। नगर निगम के पास इन क्षेत्रों से पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत अभी सीमित है।</p>
<p>जल संकट की एक बड़ी वजह भूजल स्तर का तेजी से गिरना और बोरवेल का फेल होना माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार शहर में बड़ी संख्या में बोरवेल खराब हो चुके हैं, जिससे वैकल्पिक स्रोतों पर दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा पाइपलाइन नेटवर्क में लीकेज और रखरखाव की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है।</p>
<p> रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होना भी संकट को गहरा रहा है। नियमों के बावजूद बड़ी संख्या में मकानों में यह सिस्टम नहीं लगाया गया है। हर साल लाखों लीटर बारिश का पानी बिना उपयोग के बह जाता है, जबकि इसका संरक्षण किया जाए तो जल संकट काफी हद तक कम हो सकता है।</p>
<p>नगर निगम ने इस दिशा में योजनाएं तो बनाई थीं, लेकिन वे अब तक धरातल पर पूरी तरह लागू नहीं हो सकी हैं। कई मामलों में फंड जमा होने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ, जिससे लोगों में नाराजगी भी है।</p>
<p>गर्मी बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जल प्रबंधन, बुनियादी ढांचे के सुधार और जनभागीदारी को लेकर ठोस कदम उठाना जरूरी माना जा रहा है, ताकि शहर को लंबे समय तक पानी की समस्या से राहत मिल सके।</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:18:54 +0530</pubDate>
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