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                <title>Congress Party - दैनिक जागरण</title>
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                <title>पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी हलचल, चन्नी की नाराजगी की चर्चा; संगठन में नई जिम्मेदारियों पर मंथन तेज</title>
                                    <description><![CDATA[2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठनात्मक जिम्मेदारियां बांटीं, चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने प्रदेश नेतृत्व की मांग उठाई, पार्टी में अंदरूनी समीकरणों पर चर्चा तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-turmoil-increased-in-punjab-congress-discussion-of-channis-displeasure/article-57866"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/punjab-congress.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पंजाब कांग्रेस में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच संगठनात्मक बदलावों के बाद नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। कांग्रेस नेतृत्व ने राज्य संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का बंटवारा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। हालांकि, इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर अलग-अलग तरह की राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। चन्नी के समर्थकों ने उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग उठाई है, जिससे राज्य की राजनीति में संगठनात्मक समीकरणों को लेकर नया विमर्श शुरू हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस हाईकमान ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन में संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। इसी क्रम में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है। साथ ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी प्रताप सिंह बाजवा के पास ही रहने दी गई है। इसके अलावा पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा को पार्टी की कोर समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी का उद्देश्य सभी वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर चुनावी तैयारियों को मजबूत करना बताया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई नियुक्तियों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के आवास पर बड़ी संख्या में समर्थक और कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता पहुंचे। इस दौरान समर्थकों ने खुलकर मांग की कि चन्नी को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी जानी चाहिए। उनका कहना था कि चन्नी का व्यापक जनाधार और प्रशासनिक अनुभव आगामी चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर अलग-अलग राय मौजूद है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी तरह के मतभेद या नाराजगी की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन बड़े नेताओं के समर्थकों की सक्रियता चुनावी तैयारियों के दौरान स्वाभाविक मानी जाती है। पार्टी नेतृत्व फिलहाल सभी नेताओं को साथ लेकर चुनावी रणनीति तैयार करने पर जोर दे रहा है ताकि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस मजबूत स्थिति में उतर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने को भी संगठन में एक अहम जिम्मेदारी माना जा रहा है। चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष पूरे चुनाव अभियान की रणनीति तैयार करने, प्रचार कार्यक्रमों का समन्वय करने और विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी की चुनावी गतिविधियों को गति देने का कार्य करता है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि चन्नी के अनुभव का लाभ पूरे राज्य में चुनाव प्रचार के दौरान मिलेगा। बताया जा रहा है कि नई जिम्मेदारियों की घोषणा के बाद चन्नी के समर्थकों ने अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त कीं। कई नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि कांग्रेस को भविष्य में राज्य की सत्ता में वापसी करनी है तो संगठनात्मक नेतृत्व में भी बदलाव पर विचार किया जा सकता है। हालांकि यह मांग समर्थकों की ओर से सामने आई है और पार्टी ने इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया है। इस बीच सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हुईं। हालांकि रंधावा ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात पहले से तय कार्यक्रम के तहत हुई थी और इसका पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक फैसलों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"> पंजाब जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में चुनाव से पहले संगठनात्मक गतिविधियां तेज होना सामान्य प्रक्रिया है। कांग्रेस इस समय राज्य में अपनी चुनावी रणनीति को मजबूत करने और सभी वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि विभिन्न गुटों के बीच समन्वय बनाकर चुनावी अभियान को प्रभावी बनाया जाए। चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री रहे हैं और राज्य के कई इलाकों में उनका प्रभाव माना जाता है। यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें संगठन में और बड़ी भूमिका दिए जाने की मांग कर रहे हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सभी वरिष्ठ नेताओं को उनकी क्षमता और अनुभव के आधार पर जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:39:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डीके शिवकुमार आज लेंगे कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने डीके शिवकुमार को सौंपी कमान, जी परमेश्वर होंगे उपमुख्यमंत्री]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/dk-shivakumar-will-take-oath-as-the-chief-minister-of/article-54879"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/dk-shivakumar.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में आज एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। बेंगलुरु के लोक भवन में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में वे मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ विधायक और नेता भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। यह सत्ता परिवर्तन लंबे समय से चल रही राजनीतिक चर्चाओं और कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों का परिणाम माना जा रहा है। डीके शिवकुमार को 30 मई को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नेता चुना गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री पद की औपचारिक घोषणा हुई। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 28 मई को अपने पद से इस्तीफा दिया था। उनके लगभग तीन वर्ष के कार्यकाल के बाद अब राज्य की कमान शिवकुमार के हाथों में होगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>शपथ से पहले धार्मिक आस्था और पारिवारिक आशीर्वाद</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले डीके शिवकुमार ने अपने परिवार और धार्मिक गुरुओं का आशीर्वाद लिया। शपथ ग्रहण समारोह के लिए लोक भवन पहुंचने से पहले उन्होंने अपनी मां गौरम्मा के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा उन्होंने संत-महात्माओं से भी मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। शिवकुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा से भी मुलाकात की। इस मुलाकात को राजनीतिक शिष्टाचार के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी शिवकुमार से मुलाकात कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>जी परमेश्वर बनेंगे उपमुख्यमंत्री</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई सरकार में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाया जा रहा है। उनके अलावा कई अन्य नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने जा रही है। शुरुआती चरण में कुल 13 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया का नाम भी शामिल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे कांग्रेस नेतृत्व ने विभिन्न गुटों और सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>चार उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए चार उपमुख्यमंत्री बनाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान लिया जा सकता है। बताया जा रहा है कि वर्तमान मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है, जबकि नए चेहरों को मौका मिलेगा। कांग्रेस नेतृत्व राज्य में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>18 जून के बाद होगा मंत्रिमंडल का विस्तार</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस विधायक टीबी जयचंद्र के अनुसार अभी केवल कुछ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 18 जून तक जारी रहने के कारण पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन बाद में किया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि जून के दूसरे पखवाड़े में सरकार का बड़ा विस्तार होगा और सभी विभागों का अंतिम आवंटन किया जाएगा। इससे कांग्रेस को विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने का अवसर मिलेगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>राहुल गांधी और कई राज्यों के मुख्यमंत्री होंगे शामिल</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शपथ ग्रहण समारोह को कांग्रेस शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देख रही है। कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। केरल, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस मुख्यमंत्री समारोह में मौजूद रहेंगे। इसके अलावा तमिलनाडु और झारखंड के मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में भाग लेने वाले हैं। इससे कांग्रेस एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती का संदेश देना चाहती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>देश के सबसे अमीर नेताओं में गिने जाते हैं डीके शिवकुमार</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डीके शिवकुमार देश के सबसे संपन्न राजनेताओं में शामिल हैं। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास 1400 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति है। वे रियल एस्टेट, होटल और खनन व्यवसाय से जुड़े रहे हैं। हालांकि उनके ऊपर लगभग 263 करोड़ रुपए की देनदारियां भी दर्ज हैं। राजनीतिक जीवन के दौरान वे कई बार विवादों में भी रहे हैं और विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मनी लॉन्ड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति मामलों में जांच</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डीके शिवकुमार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच कर चुका है। वर्ष 2017 में आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। वर्ष 2019 में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था और लगभग 50 दिन तिहाड़ जेल में बिताने पड़े थे। इसके अलावा सीबीआई भी आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों की जांच कर रही है। हालांकि शिवकुमार लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते रहे हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कांग्रेस के संकटमोचक नेता की पहचान</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस पार्टी में डीके शिवकुमार की पहचान एक प्रभावशाली संगठनकर्ता और संकटमोचक नेता के रूप में है। जब भी पार्टी को विधायकों को एकजुट रखने या राजनीतिक रणनीति तैयार करने की जरूरत पड़ी, शिवकुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी संगठन क्षमता और राजनीतिक प्रबंधन कौशल के कारण ही उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में पार्टी राज्य में अपनी स्थिति और मजबूत करेगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सत्ता हस्तांतरण के पीछे ढाई-ढाई साल का फार्मूला</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">2023 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच प्रतिस्पर्धा थी। तब पार्टी नेतृत्व ने समझौते के तहत ढाई-ढाई साल का फार्मूला तैयार किया था। इस फार्मूले के अनुसार पहले सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने और बाद में शिवकुमार को जिम्मेदारी सौंपी जानी थी। अब सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद यह फार्मूला लागू हो गया है और शिवकुमार मुख्यमंत्री पद संभालने जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:00:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन तय, सिद्धारमैया आज 3 बजे इस्तीफा देंगे</title>
                                    <description><![CDATA[डीके शिवकुमार होंगे नए मुख्यमंत्री, कांग्रेस में लंबे विवाद के बाद फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a17e9ebebac8/article-54404"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-cm.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रहा नेतृत्व परिवर्तन का विवाद अब लगभग खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज दोपहर 3 बजे अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। बेंगलुरु स्थित उनके सरकारी आवास पर गुरुवार सुबह हुई अहम बैठक में इस फैसले की जानकारी मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को दी गई। कांग्रेस हाईकमान की सहमति के बाद अब डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी तेज हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुबह हुई बैठक में उस समय भावुक माहौल देखने को मिला जब डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मिलने पहुंचे। बैठक के दौरान शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और दोनों नेता एक-दूसरे से गले मिले। इस दृश्य को कांग्रेस के भीतर सत्ता हस्तांतरण और राजनीतिक संतुलन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में मौजूद कर्नाटक सरकार के मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बना ली है और वही अगले मुख्यमंत्री होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन राज्यपाल फिलहाल पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से बाहर बताए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा राजभवन कार्यालय को सौंप सकते हैं। संवैधानिक नियमों के मुताबिक मुख्यमंत्री राज्यपाल की अनुपस्थिति में भी लिखित इस्तीफा ई-मेल या राजभवन कार्यालय के माध्यम से भेज सकते हैं। इस्तीफा स्वीकार होने तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा पिछले कई महीनों से चल रही थी। मई 2023 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान सामने आई थी। उस समय पार्टी नेतृत्व ने समझौते के तहत रोटेशनल मुख्यमंत्री फार्मूला तय किया था। सूत्रों के मुताबिक समझौते में ढाई-ढाई साल तक दोनों नेताओं को मौका देने की बात कही गई थी। अब सरकार के ढाई साल पूरे होने के करीब हैं, ऐसे में शिवकुमार समर्थक लगातार नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई बैठकों के बाद स्थिति तेजी से बदली। 26 मई को सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ लंबी बैठक की थी। करीब छह घंटे चली इस बैठक में सत्ता हस्तांतरण, संगठनात्मक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि समय रहते नेतृत्व परिवर्तन करने से सरकार के खिलाफ बन रही एंटी-इंकम्बेंसी को कम किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस इस बदलाव के जरिए राज्य में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं और दक्षिण कर्नाटक में उनकी मजबूत पकड़ है। वहीं सिद्धारमैया को ओबीसी वर्ग का प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। कांग्रेस नेतृत्व दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाकर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> केवल मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि पूरे मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल भी हो सकता है। मौजूदा 35 मंत्रियों में से बड़ी संख्या में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। पार्टी नए चेहरों को मौका देकर सरकार की छवि सुधारने की कोशिश कर सकती है। साथ ही दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की भी चर्चा है, जिनमें एक दलित और दूसरा लिंगायत या ओबीसी समुदाय से हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस के भीतर यह बदलाव केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं बल्कि संगठनात्मक अनुशासन का संदेश भी माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान, पंजाब और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में नेतृत्व विवादों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में कर्नाटक में हाईकमान समय रहते स्थिति संभालने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच डीके शिवकुमार के समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। बेंगलुरु में उनके आवास के बाहर सुबह से ही समर्थकों की भीड़ जमा रही। कई समर्थक फूलों के गुलदस्ते और मिठाइयों के साथ पहुंचे। घर के बाहर टेंट और स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो गईं। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी जाहिर की और डीके शिवकुमार के समर्थन में नारे लगाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर सिद्धारमैया समर्थकों में भावुक माहौल देखा गया। कई नेताओं ने कहा कि सिद्धारमैया ने राज्य में कई जनहित योजनाएं लागू कीं और कांग्रेस सरकार को मजबूत नेतृत्व दिया। हालांकि पार्टी नेतृत्व के फैसले को सभी नेताओं ने स्वीकार करने की बात कही है। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात पर नजर है कि डीके शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार किस तरह काम करेगी और कैबिनेट में किन चेहरों को जगह मिलेगी। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाकर औपचारिक रूप से डीके शिवकुमार को नेता चुना जाएगा। इसके बाद राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:47:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिद्दारमैया के इस्तीफे की तैयारी, कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन लगभग तय</title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी की बैठकों के बाद बनी सहमति, डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/preparations-for-siddaramaiahs-resignation-change-of-power-in-karnataka-almost/article-54397"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/siddaramaiah-resignation.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक कांग्रेस में पिछले कई महीनों से चल रहा नेतृत्व संकट अब खत्म होता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने आखिरकार पद छोड़ने का मन बना लिया है और माना जा रहा है कि वह जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ लगातार चली बैठकों और राजनीतिक मंथन के बाद यह फैसला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व ने सत्ता साझेदारी के पुराने फार्मूले को लागू करने का संकेत साफ तौर पर दे दिया है, जिसके बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं तेज हो गई हैं।</p>
<p>कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं, जिनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी ने हिस्सा लिया। इन बैठकों में कर्नाटक के मौजूदा राजनीतिक हालात, सरकार के भीतर बढ़ती खींचतान और नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार दोनों के साथ अलग-अलग और संयुक्त बैठकें कीं।</p>
<p>पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान ने सिद्दारमैया को 2023 विधानसभा चुनाव के बाद हुए सत्ता साझेदारी समझौते की याद दिलाई। उस समय कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद यह तय हुआ था कि मुख्यमंत्री पद को लेकर ढाई-ढाई साल का फार्मूला लागू किया जाएगा। शुरुआती कार्यकाल सिद्दारमैया को दिया गया था, जबकि बाद में नेतृत्व परिवर्तन कर डीके शिवकुमार को मौका देने की बात कही गई थी।</p>
<p>बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में कुछ और समय मांगा था। उनका तर्क था कि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश करने और कुछ लंबित योजनाओं को पूरा करने के बाद पद छोड़ना चाहते हैं। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व तत्काल बदलाव के पक्ष में दिखाई दिया। पार्टी हाईकमान का मानना था कि अगर तय समझौते को लागू नहीं किया गया तो इससे पार्टी की विश्वसनीयता और संगठनात्मक अनुशासन पर असर पड़ सकता है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान राहुल गांधी ने साफ कहा कि पार्टी को अपने वादों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी और अनुशासित तरीके से लागू करना जरूरी है। इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी दोनों नेताओं से पार्टी एकता बनाए रखने की अपील की।</p>
<p>राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में यह तर्क दिया कि 2025 या 2026 में पद छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक लिखित समझौता नहीं हुआ था। लेकिन पार्टी नेतृत्व अपने फैसले पर कायम रहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझाया कि संगठन और सरकार दोनों के संतुलन के लिए अब बदलाव जरूरी है।</p>
<p>दिल्ली में बैठकों के बाद सिद्दारमैया ने अपने करीबी नेताओं और समर्थक मंत्रियों से भी चर्चा की। बताया जाता है कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर अपने विश्वस्त सहयोगियों के साथ लंबी बैठक की। कुछ नेताओं ने उन्हें जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी, लेकिन अंत में उन्होंने हाईकमान के निर्णय को स्वीकार करने का संकेत दे दिया।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार सिद्दारमैया ने अपने समर्थकों से कहा कि वह हमेशा से यह कहते रहे हैं कि राहुल गांधी जब भी कहेंगे, वह इस्तीफा दे देंगे। अब जब पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दे दिया है, तो वह और इंतजार नहीं करेंगे। इसके बाद कर्नाटक कांग्रेस में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई।</p>
<p>इस घटनाक्रम के बीच डीके शिवकुमार की सक्रियता भी बढ़ गई है। पार्टी कार्यालय और विधानसभा के भीतर उनके समर्थक लगातार उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठा रहे हैं। कई नेताओं का मानना है कि शिवकुमार ने 2023 चुनाव में संगठन को मजबूत करने और कांग्रेस को सत्ता में लाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री पद देना राजनीतिक रूप से संतुलित कदम माना जा रहा है।</p>
<p>हालांकि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल किसी भी तरह के सार्वजनिक विवाद से बचना चाहता है। पार्टी नहीं चाहती कि नेतृत्व परिवर्तन के दौरान राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसी स्थिति बने, जहां अंदरूनी खींचतान लंबे समय तक सुर्खियों में रही थी। इसी वजह से कांग्रेस हाईकमान लगातार दोनों नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p>कर्नाटक में यह बदलाव कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। 2014 के बाद कई राज्यों में पार्टी को क्षेत्रीय नेताओं और संगठन के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई हुई है। ऐसे में कर्नाटक में सत्ता हस्तांतरण सफलतापूर्वक होने पर कांग्रेस इसे अनुशासित संगठन की मिसाल के रूप में पेश कर सकती है।</p>
<p>अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सिद्दारमैया औपचारिक रूप से कब इस्तीफा देते हैं और कांग्रेस विधायक दल की अगली बैठक में किसे नया नेता चुना जाता है। फिलहाल कर्नाटक की राजनीति में सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है और आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 11:54:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सिद्धारमैया को राष्ट्रीय भूमिका का ऑफर, कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की चर्चा तेज</title>
                                    <description><![CDATA[सीएम पद छोड़ने के बदले राज्यसभा और 2029 लोकसभा चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी की पेशकश, दिल्ली में हाईलेवल मीटिंग के बाद अटकलें बढ़ीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/siddaramaiah-offered-national-role-discussion-on-change-of-power-in/article-54302"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-politics.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। दिल्ली में मंगलवार को कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई लंबी बैठकों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सीएम पद छोड़ने के बदले राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका का प्रस्ताव दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व उन्हें राज्यसभा भेजकर 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों का दावा है कि दिल्ली में करीब सात घंटे चली हाईलेवल मीटिंग के दौरान सत्ता परिवर्तन और संगठनात्मक बदलावों पर गंभीर चर्चा हुई। हालांकि सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस नेताओं ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि बातचीत केवल राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर थी, लेकिन अंदरखाने से निकल रही जानकारी कुछ और ही संकेत दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया को यह समझाने की कोशिश की गई है कि पार्टी को अब राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत ओबीसी नेतृत्व की जरूरत है। खासकर ऐसे समय में जब कांग्रेस सामाजिक न्याय और जाति जनगणना जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय एजेंडे में आगे बढ़ा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>राज्यसभा और दिल्ली भूमिका का ऑफर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया से कहा है कि यदि वे मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा के रास्ते दिल्ली आते हैं तो उन्हें केंद्र में एक बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसमें 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति में अहम भूमिका शामिल हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रस्ताव को एक “सम्मानजनक एग्जिट फॉर्मूला” के रूप में देखा जा रहा है, ताकि सिद्धारमैया का राजनीतिक कद भी बना रहे और कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन भी सहज तरीके से पूरा हो सके। इसी बीच यह भी चर्चा है कि पार्टी उन्हें ओबीसी चेहरे के तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट करना चाहती है, जिससे कांग्रेस की सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूती मिल सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक हलकों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन हो सकता है। चर्चा है कि सिद्धारमैया 28 मई के आसपास मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं, जबकि उनके स्थान पर डीके शिवकुमार के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के भीतर पिछले काफी समय से नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही थी, जो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया को पार्टी की ओर से यह संकेत दे दिया गया है कि उन्हें राष्ट्रीय भूमिका स्वीकार करनी चाहिए। बताया जा रहा है कि गुरुवार को सिद्धारमैया अपने आवास पर राज्य कैबिनेट के मंत्रियों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग भी करने वाले हैं, जिसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली में हुई अहम बैठकें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ सिद्धारमैया की सीधी बातचीत हुई, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की भूमिका पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक इसी बैठक में उन्हें संकेत दिए गए कि पार्टी चाहती है कि वे मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करते हुए राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाएं। हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक बयान में इन सभी दावों को खारिज किया है और कहा है कि अभी केवल संगठनात्मक चुनावों और राज्यसभा नामांकन पर चर्चा हो रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>परिवार और राजनीतिक समीकरण</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">एक राजनीतिक फॉर्मूले के तहत सिद्धारमैया के बेटे को कर्नाटक में डिप्टी सीएम बनाए जाने की भी चर्चा है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही उनके करीबी नेताओं को सरकार में महत्वपूर्ण विभाग दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। राज्यसभा नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून होने के कारण कांग्रेस नेतृत्व के पास इस फैसले को टालने का ज्यादा समय नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में बड़ा फैसला देखने को मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 13:05:24 +0530</pubDate>
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                <title>भोपाल में महिला आरक्षण पर कांग्रेस का पैदल मार्च, सियासत तेज</title>
                                    <description><![CDATA[33% आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर प्लेटिनम प्लाजा से रोशनपुरा तक रैली, सरकार और विपक्ष आमने-सामने]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/congresss-foot-march-on-womens-reservation-in-bhopal-politics-intensifies/article-52161"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-bhopal-news-(1).jpg" alt=""></a><br />
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<p>मध्यप्रदेश की राजधानी में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को तत्काल लागू करने की मांग के साथ शहर में पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं की मौजूदगी ने इसे  राजनीतिक घटनाक्रम बना दिया।</p>
<p>प्लेटिनम प्लाजा से शुरू हुआ यह मार्च रोशनपुरा चौराहे तक निकाला जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता “महिलाओं को आरक्षण लागू करो” जैसे नारों के साथ आगे बढ़ते दिखे।</p>
<p>कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है। पार्टी का कहना है कि मौजूदा लोकसभा सीटों पर बिना किसी देरी के आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर सरकार की नीयत स्पष्ट नहीं है।</p>
<p>इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने महिलाओं को उनका अधिकार नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की कई पीढ़ियों ने नारी सशक्तिकरण को गंभीरता से नहीं लिया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों पर विधेयक को बाधित करने का आरोप भी लगाया।</p>
<p>वहीं, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संसद में विधेयक से जुड़ी हालिया स्थिति के बाद अब सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने में देर नहीं होनी चाहिए।</p>
<p>प्रदर्शन के दौरान भोपाल के कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ और पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर रूट डायवर्जन भी लागू किए हैं।</p>
<p>महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में इस पर संसद और सड़कों दोनों जगह बहस तेज होने के संकेत हैं। फिलहाल, भोपाल का यह मार्च इस बहस को और धार देता नजर आ रहा है।</p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:27:56 +0530</pubDate>
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