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                <title>Political Protest - दैनिक जागरण</title>
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                <title>PoK में भड़का विरोध, पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन तेज</title>
                                    <description><![CDATA[महंगाई और प्रशासनिक मुद्दों से शुरू हुआ प्रदर्शन अब राजनीतिक टकराव में बदला, हजारों लोग सड़कों पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pok-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7--%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%9C/article-57486"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pok-protest-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
<div class="min-h-8 text-message relative flex w-full flex-col items-end gap-2 text-start break-words whitespace-normal outline-none keyboard-focused:focus-ring [.text-message+&amp;]:mt-1">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और कई इलाकों में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। मंगलवार को रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में हजारों की संख्या में लोग जमा हुए और उन्होंने पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ खुलकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और लंबे समय से उन्हें बुनियादी सुविधाओं, आर्थिक राहत और राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। भीड़ में शामिल लोगों का कहना था कि महंगाई और प्रशासनिक लापरवाही ने जीवन को मुश्किल बना दिया है और अब स्थिति असहनीय होती जा रही है। कई जगहों पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जबकि स्थानीय लोगों के बीच नाराजगी और गहरी होती जा रही है।</p>
<p>यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (<span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Jammu Kashmir Awami Action Committee</span></span>) के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संगठन के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर (<span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Shaukat Nawaz Mir</span></span>) को उनके दो साथियों के साथ धीरकोट क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है, जिसके बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार ने उनके बारे में जानकारी देने वाले के लिए 1 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की थी, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है। इसके साथ ही JAAC के 600 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग इलाकों से हिरासत में लिए जाने की खबरें हैं। कई जगहों पर छापेमारी और गिरफ्तारी के बाद स्थानीय स्तर पर गुस्सा फैल गया है और छोटे शहरों से लेकर कस्बों तक विरोध की लहर देखी जा रही है। सरकार पर आरोप है कि वह आंदोलन को दबाने के लिए सख्त कानूनों का इस्तेमाल कर रही है, जिसमें आतंकवाद विरोधी धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए ये कदम जरूरी थे, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव कम होने की बजाय और बढ़ता दिख रहा है।</p>
<p>प्रदर्शन की शुरुआत भले ही महंगाई, खाद्य संकट और स्थानीय प्रशासनिक समस्याओं से हुई थी, लेकिन अब यह पूरी तरह राजनीतिक रूप ले चुका है और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष का रूप बन गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जरूरी सामान की सप्लाई बाधित की जा रही है और लोगों पर दबाव बनाने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगाई गई है, जिससे बाहरी दुनिया तक जानकारी नहीं पहुंच पा रही है। कई इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित होने से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि हाल के दिनों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कुछ लोगों की मौतें हुई हैं, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसी बीच राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है क्योंकि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बयान में रावलकोट और मीरपुर के लोगों को लेकर टिप्पणी की गई थी, जिसके बाद विरोध और तेज हो गया। आने वाले दिनों में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में राजनीतिक हलचल और बढ़ने की संभावना है। इस समय PoK में स्थिति बेहद अस्थिर बनी हुई है और हर तरफ अनिश्चितता का माहौल देखा जा रहा है।</p>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 11:03:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत में ‘कॉकरोच पार्टी’ के नेतृत्व में प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[NEET-UG विवाद और पेपर लीक आरोपों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/protests-under-the-leadership-of-%E2%80%98cockroach-party%E2%80%99-in-india-continue/article-56666"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/neet-protest-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर चल रहा प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए सैकड़ों छात्र, युवा पेशेवर और नौकरी तलाशने वाले लोग इस धरने में शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। यह विरोध उस मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर है, जिसे पेपर लीक के आरोपों के बाद विवादों के केंद्र में देखा जा रहा है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व एक नए और अनोखे समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ द्वारा किया जा रहा है, जिसने सोशल मीडिया पर अपनी व्यंग्यात्मक राजनीति शैली के कारण तेजी से ध्यान आकर्षित किया है। इस समूह का प्रतीक ‘कॉकरोच’ है और यह नाम भारत की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के संदर्भ में व्यंग्यात्मक तरीके से रखा गया बताया जाता है। संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि NEET-UG जैसी अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षा में कथित पेपर लीक ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने परीक्षा परिणाम रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। रविवार को देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच दोबारा परीक्षा दी, जिसमें बायोमेट्रिक जांच और निगरानी के विशेष इंतजाम किए गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बाद में बयान जारी कर कहा था कि री-एग्जाम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ है और किसी भी प्रकार की पेपर लीक की शिकायत नहीं मिली है। हालांकि जंतर-मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों के लिए यह जवाब पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि समस्या सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा सिस्टम की जवाबदेही का सवाल है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिषेक दीपके ने रविवार को समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन सिर्फ परीक्षा विवाद का नहीं बल्कि सिस्टम में सुधार का है। उन्होंने कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक छात्र इसी तरह सड़कों पर आवाज उठाते रहेंगे। दीपके अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी में छात्र हैं और हाल ही में भारत आकर उन्होंने इस आंदोलन की शुरुआत की थी। 19 जून को शुरू हुआ यह धरना प्रशासन की अनुमति के साथ तय समय तक चलना था, लेकिन 20 जून को समय समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने जगह नहीं छोड़ी। उनका कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी दौरान कई प्रदर्शनकारी रात भर जंतर-मंतर पर ही रुके रहे और सड़कों पर सोते नजर आए।</p>
<p style="text-align:justify;">धरना स्थल पर हालात भी लगातार चर्चा में बने रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अनुमति समाप्त होने के बाद पुलिस ने लाइटें बंद कर दीं और पानी तथा शौचालय की सुविधा सीमित कर दी गई। हालांकि बाद में ये सुविधाएं बहाल कर दी गईं। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस आंदोलन में सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि आम नागरिक भी शामिल हो रहे हैं। दिल्ली के एक स्टोरकीपर ज्योति ठाकुर ने कहा कि वह इस आंदोलन में इसलिए शामिल हुईं क्योंकि उनका मानना है कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था ही बेहतर समाज की नींव है। वहीं 39 वर्षीय वकील गौरव जैन ने कहा कि वे जवाबदेही के मुद्दे पर समर्थन देने पहुंचे हैं और शिक्षा प्रणाली में सुधार जरूरी है। कॉकरोच जनता पार्टी का उदय भी एक विवादित टिप्पणी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं पर की गई टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी फैल गई थी। बाद में स्पष्ट किया गया कि टिप्पणी का संदर्भ फर्जी डिग्री रखने वालों से जुड़ा था, लेकिन तब तक विरोध की लहर फैल चुकी थी।  शिक्षा मंत्रालय और सत्ताधारी पार्टी की ओर से इस आंदोलन और इस्तीफे की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और छात्र लगातार नारेबाजी कर रहे हैं कि यह लड़ाई सिर्फ परीक्षा की नहीं बल्कि सिस्टम की जिम्मेदारी तय करने की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर बढ़े विरोध के स्वर, सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके गए</title>
                                    <description><![CDATA[धनुरहाट की सरपंच मंदिरा गेन का माफी मांगते वीडियो वायरल, कुछ ही दिनों में तृणमूल नेताओं को निशाना बनाने की कई घटनाएं सामने आईं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/voice-of-protest-against-tmc-leaders-increased-in-west-bengal/article-56123"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घटनाएं लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले तृणमूल युवा नेता सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके जाने और कथित मारपीट की घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ सप्ताह के दौरान राज्य के कई हिस्सों में टीएमसी नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा है। वहीं दूसरी ओर धनुरहाट ग्राम पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह लोगों के बीच हाथ जोड़कर माफी मांगती और भावुक नजर आ रही हैं। सौमित्र बनर्जी को पुलिस सुरक्षा के बीच रानीगंज कोर्ट ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भीड़ ने उन पर अंडे फेंके और धक्का-मुक्की भी की। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और उन्हें सुरक्षित तरीके से अदालत तक पहुंचाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हुआ, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। सौमित्र बनर्जी की गिरफ्तारी बीजेपी नेता रवि केशरी की शिकायत के आधार पर हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बनर्जी ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया था। इसी मामले में उन्हें अदालत में पेश किया जाना था। हालांकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है, जबकि विपक्षी दल इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, दक्षिण 24 परगना जिले के धनुरहाट ग्राम पंचायत क्षेत्र से भी एक अलग लेकिन चर्चित घटना सामने आई है। पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह अपने घर के बाहर जमा लोगों के सामने हाथ जोड़कर खड़ी दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह कान पकड़कर माफी मांगती और भावुक होकर रोती नजर आती हैं। कुछ दृश्य ऐसे भी हैं जिनमें वह घुटनों के बल बैठी हुई दिखाई देती हैं। बताया जा रहा है कि पंचायत से जुड़े किसी स्थानीय विवाद के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके घर के बाहर पहुंच गए थे और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि इस मामले को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन वीडियो ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इसे जनता के बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा है, जबकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि कई घटनाओं को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सोमवार को टीएमसी विधायक और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष भी विरोध का सामना कर चुके हैं। कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान किसी व्यक्ति ने उन पर अंडा फेंक दिया था। घटना के बाद कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि हमलावर भाजपा समर्थक थे। उन्होंने दावा किया कि अंडा उनकी आंख के बेहद करीब से गुजरा और यदि वह समय रहते बचाव नहीं करते तो गंभीर चोट लग सकती थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। राज्य में हाल के दिनों में टीएमसी नेताओं को निशाना बनाने की घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। 28 मई को पार्टी सांसद सौगत रॉय पर उत्तर 24 परगना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अंडे फेंके गए थे। इसके दो दिन बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दौरे के दौरान भी विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां उन पर अंडे और पत्थर फेंके जाने की खबर सामने आई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद जून के पहले सप्ताह से लेकर अब तक कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ इसी तरह की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पूर्व विधायक सनत डे, विधायक मदन मित्रा, पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता, नेता मोहम्मद जसीमुद्दीन और सुजय हाजरा जैसे कई नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में अंडों के साथ टमाटर और अन्य वस्तुएं भी फेंकी गईं। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं राज्य की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और जनता की नाराजगी को दर्शाती हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि चुनावी माहौल और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण विरोध प्रदर्शनों को अधिक आक्रामक रूप मिल रहा है। दूसरी ओर कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नेताओं की सुरक्षा के बावजूद ऐसी घटनाएं बार-बार कैसे हो रही हैं। टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी दल सुनियोजित तरीके से पार्टी नेताओं को बदनाम करने और माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि जनता अपनी नाराजगी लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त कर रही है और इसके लिए सत्तारूढ़ दल को आत्ममंथन करना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:45:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस आक्रामक, हाईकोर्ट और सड़क दोनों मोर्चों पर लड़ाई की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा चुनाव में नामांकन खारिज होने के खिलाफ कांग्रेस 15 से 17 जून तक प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी, वहीं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी भी तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/if-meenakshi-natarajans-nomination-is-rejected-congress-is-preparing-to/article-55924"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद अब यह मामला केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है और इसके खिलाफ सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष करेगी। पार्टी ने एक ओर जहां मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति भी तैयार कर ली है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस नेताओं के अनुसार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है और पार्टी इसे न्यायिक मंच पर चुनौती देगी। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों के साथ बैठकों का दौर चल रहा है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं की राय ली जा रही है और चुनाव याचिका का मसौदा तैयार किया जा रहा है। मीनाक्षी नटराजन भी इन दिनों दिल्ली में हैं और कानूनी प्रक्रिया को लेकर पार्टी नेतृत्व के संपर्क में बनी हुई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस की रणनीति केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है। पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच भी ले जाने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में 15 जून से 17 जून तक प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया गया है। कांग्रेस का मानना है कि इस मुद्दे को व्यापक जनसमर्थन दिलाने के लिए जनता के बीच जाना आवश्यक है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नामांकन निरस्त होने की कार्रवाई ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े किए हैं और इसी कारण विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आंदोलन की शुरुआत 15 जून को यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन से होगी। पार्टी के युवा कार्यकर्ता प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसके अगले दिन 16 जून को कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई मैदान में उतरेगी। छात्र संगठन के कार्यकर्ता इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करेंगे और सरकार तथा चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाएंगे। 17 जून को महिला कांग्रेस आंदोलन की कमान संभालेगी। महिला कार्यकर्ता भी इस मामले को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताएंगी। कांग्रेस इस मुद्दे को केवल कानूनी विवाद के रूप में नहीं बल्कि राजनीतिक संघर्ष के रूप में भी प्रस्तुत करना चाहती है। पार्टी को उम्मीद है कि इस मुद्दे के जरिए वह कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सकेगी और राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवाद को जनचर्चा का विषय बना पाएगी। दूसरी ओर भाजपा इस पूरे मामले को चुनावी प्रक्रिया के तहत लिया गया वैधानिक निर्णय बता रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस विवाद के बीच कांग्रेस की नजर अब हाईकोर्ट पर टिकी हुई है। पार्टी का प्रयास है कि अगले सप्ताह के भीतर चुनाव याचिका दायर कर दी जाए। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस चाहती है कि 21 जून से पहले इस मामले में किसी प्रकार की राहत मिल जाए। इसका कारण यह है कि इसके बाद राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित भाजपा उम्मीदवारों के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। भाजपा के तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस की चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि समय रहते कानूनी हस्तक्षेप नहीं हुआ तो मामला और जटिल हो सकता है। पार्टी इसीलिए हर कानूनी पहलू का गहन अध्ययन कर रही है। चुनाव कानून के जानकारों से सलाह ली जा रही है ताकि याचिका को मजबूत आधार पर अदालत में पेश किया जा सके। पार्टी नेताओं का कहना है कि नियमानुसार चुनाव की घोषणा के 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर की जा सकती है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी के बजाय पूरी तैयारी की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था। हालांकि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका को निरस्त कर दिया था। इसके अलावा निर्वाचन आयोग से भी कांग्रेस को कोई राहत नहीं मिली। इन घटनाक्रमों के बाद अब पार्टी की उम्मीदें हाईकोर्ट पर टिक गई हैं। कांग्रेस का मानना है कि अदालत में पूरे मामले की विस्तार से सुनवाई होने पर उसे न्याय मिल सकता है। एक ओर कांग्रेस इसे लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक चर्चा में रह सकता है क्योंकि सड़क पर आंदोलन और अदालत में कानूनी चुनौती दोनों एक साथ आगे बढ़ने वाले हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 17:25:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, मध्य प्रदेश में बढ़ी राजनीतिक हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस ने फैसले पर जताई आपत्ति, चुनाव आयोग से विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/6a2901e8ed034/article-55470"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-nomination.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की सियासत में मंगलवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। यह फैसला सामने आते ही राजधानी भोपाल से लेकर चुनाव आयोग कार्यालय तक राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। सुबह से ही कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाजाही बढ़ने लगी और बाद में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला। कुछ समय के लिए माहौल गर्म रहा, हालांकि प्रशासन की मौजूदगी में स्थिति सामान्य बनी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय कई सवाल खड़े करता है और इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। कांग्रेस नेताओं के अनुसार राज्यसभा चुनाव के दौरान यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है और इससे राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। मीनाक्षी नटराजन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक कानूनी शिकायत के आधार पर उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि जब पार्टी एकजुट होकर चुनावी प्रक्रिया में भाग ले रही थी, तभी यह स्थिति सामने आई। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से नामांकन निरस्त किए जाने के कारणों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार पार्टी इस मुद्दे को संवैधानिक और कानूनी तरीके से आगे बढ़ाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ता और विधायक चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बात रखने के लिए विरोध कार्यक्रम आयोजित करेंगे। पटवारी ने कहा कि पार्टी इस मामले में उपलब्ध सभी लोकतांत्रिक विकल्पों का उपयोग करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटनास्थल पर मौजूद नेताओं के मुताबिक सुबह करीब 11 बजे से कांग्रेस कार्यकर्ता चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर जुटने लगे थे। नामांकन निरस्त होने की जानकारी सामने आने के बाद विरोध का स्वर तेज हो गया। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। कई वरिष्ठ नेता भी मौके पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा लगातार जारी है। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े जानकारों का कहना है कि नामांकन पत्रों की जांच के दौरान नियमों और कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाता है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित चुनाव अधिकारी द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों और नियमों के आधार पर लिया जाता है। इसी वजह से अब सभी की नजर चुनाव आयोग की ओर से आने वाली विस्तृत जानकारी पर टिकी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया का प्रमुख मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गतिविधियां बढ़ सकती हैं। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस विषय को लेकर अपनी आवाज उठाती रहेगी, जबकि राजनीतिक पर्यवेक्षक पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। चुनाव आयोग की ओर से यदि विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उससे स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:03:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर छावनी में तोड़फोड़ विरोध, आज ‘न्याय रैली’ का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[सड़क चौड़ीकरण कार्रवाई पर जनहित पार्टी का आरोप—बिना मुआवजा और बिना सहमति तोड़े गए घर-दुकान, शाम 7 बजे रैली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/announcement-of-nyaya-rally-today-against-demolition-in-indore-cantonment/article-54543"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/indore-chhawani-controversy-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हाल ही में हुई तोड़फोड़ और कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जनहित पार्टी ने नगर निगम और प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर तीखा विरोध दर्ज करते हुए शनिवार शाम 7 बजे ‘न्याय रैली’ निकालने का ऐलान किया है। पार्टी का आरोप है कि बिना सहमति और बिना पर्याप्त मुआवजा दिए कई परिवारों के घर और दुकानें अचानक ढहा दी गईं, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह के समय अचानक भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनें पहुंचीं और कुछ ही घंटों में कई निर्माण ढहा दिए गए। कई लोगों को अपना सामान निकालने तक का समय नहीं मिला। इस पूरी कार्रवाई को लेकर विपक्षी स्वर भी तेज हो गए हैं और इसे विकास के नाम पर अन्याय बताया जा रहा है। जनहित पार्टी के नेताओं का कहना है कि छावनी क्षेत्र की 136 साल पुरानी बसाहट को इस तरह से उजाड़ देना सही नहीं है। वहीं प्रशासन का पक्ष है कि कार्रवाई सड़क चौड़ीकरण और जनहित के कार्य के तहत की गई है, लेकिन विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में कई दुकानों ने दिनभर बंद रखा और यातायात भी प्रभावित हुआ। लोग पूरे घटनाक्रम पर लगातार चर्चा करते नजर आए।</p>
<p>पार्टी और स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि नियमों के अनुसार प्रभावित लोगों को कम से कम सात दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए था, लेकिन केवल दो दिन पहले सूचना देकर कार्रवाई शुरू कर दी गई। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बिना बातचीत के ही मकानों पर बुलडोजर चला दिए गए। कई लोगों ने दावा किया है कि उनके पास संपत्तियों की वैध रजिस्ट्री और पुराने दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद निर्माण गिरा दिए गए। कुछ स्थानों पर जहां केवल दस फीट तक निर्माण हटाने की बात कही गई थी, वहां कथित तौर पर बीस फीट तक मकान तोड़ दिए गए, जिससे नुकसान और बढ़ गया। बियाबानी, गणेशगंज, खजूरी बाजार और शीतला माता बाजार जैसे पुराने और घने बसे इलाके पहले ही विकास परियोजनाओं की वजह से प्रभावित हो चुके हैं, और अब छावनी क्षेत्र की यह कार्रवाई लोगों में डर और असंतोष पैदा कर रही है। स्थानीय व्यापारी वर्ग का कहना है कि लगातार हो रही तोड़फोड़ से उनका रोजगार भी प्रभावित हो रहा है और बाजारों की रौनक खत्म होती जा रही है। कई लोग इसे शहर के पुराने स्वरूप को खत्म करने जैसा कदम बता रहे हैं। कई प्रभावित परिवारों का यह भी कहना है कि उन्हें मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।</p>
<p>पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर कई मांगें रखी हैं जिनमें एफएआर और टीडीआर जैसे प्रावधानों को समाप्त करने की मांग प्रमुख है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जिन लोगों के पुश्तैनी मकान या रजिस्ट्री आधारित संपत्तियां प्रभावित हुई हैं उन्हें बाजार मूल्य से कम से कम दोगुना मुआवजा दिया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि सरकार की मनमानी और दमनात्मक कार्रवाई पर रोक लगनी चाहिए और किसी भी विकास योजना को लागू करने से पहले स्थानीय लोगों की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए। इसके अलावा शहर में हरियाली, स्वच्छ हवा और जल संरक्षण जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की भी बात कही गई है। छोटे व्यापारियों, ठेले और फेरी वालों के रोजगार को सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई गई है, क्योंकि लगातार कार्रवाई से उनकी आजीविका पर असर पड़ रहा है। इसी के साथ यह भी कहा गया है कि बस स्टैंड, आरटीओ और न्यायालय जैसी जनसुविधाओं को शहर के भीतर ही सुचारू रूप से संचालित किया जाए ताकि आम नागरिकों को परेशानी न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:55:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल में महिला आरक्षण पर कांग्रेस का पैदल मार्च, सियासत तेज</title>
                                    <description><![CDATA[33% आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर प्लेटिनम प्लाजा से रोशनपुरा तक रैली, सरकार और विपक्ष आमने-सामने]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/congresss-foot-march-on-womens-reservation-in-bhopal-politics-intensifies/article-52161"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-bhopal-news-(1).jpg" alt=""></a><br />
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<p>मध्यप्रदेश की राजधानी में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को तत्काल लागू करने की मांग के साथ शहर में पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं की मौजूदगी ने इसे  राजनीतिक घटनाक्रम बना दिया।</p>
<p>प्लेटिनम प्लाजा से शुरू हुआ यह मार्च रोशनपुरा चौराहे तक निकाला जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता “महिलाओं को आरक्षण लागू करो” जैसे नारों के साथ आगे बढ़ते दिखे।</p>
<p>कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है। पार्टी का कहना है कि मौजूदा लोकसभा सीटों पर बिना किसी देरी के आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर सरकार की नीयत स्पष्ट नहीं है।</p>
<p>इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने महिलाओं को उनका अधिकार नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की कई पीढ़ियों ने नारी सशक्तिकरण को गंभीरता से नहीं लिया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों पर विधेयक को बाधित करने का आरोप भी लगाया।</p>
<p>वहीं, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संसद में विधेयक से जुड़ी हालिया स्थिति के बाद अब सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने में देर नहीं होनी चाहिए।</p>
<p>प्रदर्शन के दौरान भोपाल के कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ और पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर रूट डायवर्जन भी लागू किए हैं।</p>
<p>महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में इस पर संसद और सड़कों दोनों जगह बहस तेज होने के संकेत हैं। फिलहाल, भोपाल का यह मार्च इस बहस को और धार देता नजर आ रहा है।</p>
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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:27:56 +0530</pubDate>
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