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                <title>छत्तीसगढ़ में कारोबार को नई उड़ान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्रिपरिषद ने विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा विधेयक के प्रारूप को दी स्वीकृति, निवेशकों को मिलेगी आसान प्रक्रिया, उद्योगों और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/new-udaan-for-business-in-chhattisgarh-ease-of-doing-business/article-58383"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-ease-of-doing-business-bill-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में निवेश, उद्योग और कारोबार को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक-2026 के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां कारोबार को आसान बनाने के लिए इस तरह का व्यापक और आधुनिक विधेयक लागू होगा। इस पहल का उद्देश्य व्यापार और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध बनाना है, जिससे निवेशकों को बेहतर कारोबारी माहौल मिल सके। सरकार का मानना है कि किसी भी राज्य के आर्थिक विकास में उद्योग और निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया आसान होगी, तो घरेलू और बाहरी निवेशक राज्य में निवेश करने के लिए अधिक उत्साहित होंगे। इसी सोच के साथ तैयार किए गए इस विधेयक में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनसे उद्योग लगाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक होगी और सरकारी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय भी कम होगा। विधेयक का सबसे बड़ा उद्देश्य अनावश्यक नियमों और जटिल प्रक्रियाओं को कम करना है। कई बार उद्योग स्थापित करने के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनुमति लेने में लंबा समय लग जाता है। इससे निवेशक परेशान होते हैं और कई परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पातीं। नए कानून के लागू होने के बाद ऐसी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा ताकि कारोबार शुरू करने में अनावश्यक बाधाएं न आएं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने इस विधेयक में डीम्ड परमिशन की व्यवस्था भी शामिल की है। इसका अर्थ यह है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित विभाग किसी आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है, तो कुछ मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जा सकेगी। इससे फाइलों के लंबित रहने की समस्या कम होगी और उद्योगों को समय पर मंजूरी मिलने का रास्ता आसान होगा। विधेयक में स्व-प्रमाणीकरण (Self Certification) और तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third Party Verification) जैसे आधुनिक प्रावधान भी जोड़े गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य उद्योगों पर अनावश्यक निरीक्षण और कागजी औपचारिकताओं का बोझ कम करना है। इससे उद्योगों को नियमों का पालन करते हुए भी अधिक सुविधा मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।इसके अलावा, जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली (Risk-Based Inspection) को भी लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत हर उद्योग का बार-बार निरीक्षण करने के बजाय केवल जोखिम के आधार पर जांच की जाएगी। इससे ईमानदारी से काम करने वाले उद्योगों को अनावश्यक निरीक्षण से राहत मिलेगी, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर प्रभावी निगरानी बनी रहेगी। सरकार ने विधेयक में दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों को समाप्त करने का भी प्रावधान किया है। कई मामलों में एक ही कार्य के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी जटिलताओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:15:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा; आईटी और मेटल शेयरों में दिखी मजबूत खरीदारी</title>
                                    <description><![CDATA[टीसीएस के बेहतर तिमाही नतीजों से बाजार को मिला सहारा, निफ्टी 24,150 के पार पहुंचा; एशियाई बाजारों की तेजी और निवेशकों की खरीदारी से बढ़ा उत्साह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/strong-surge-in-stock-market-sensex-rises-700-points-strong/article-58361"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tcs-q1-results.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत कर दिया। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 700 अंकों की बढ़त के साथ 77,500 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी लगभग 200 अंक चढ़कर 24,150 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में जोरदार खरीदारी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना रहा। बड़ी कंपनियों के शेयरों में लगातार खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार का माहौल उत्साहपूर्ण रहा। खासतौर पर आईटी कंपनियों ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के बेहतर तिमाही नतीजों के बाद उसके शेयरों में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसका असर पूरे आईटी सेक्टर पर दिखाई दिया और अन्य टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">टीसीएस ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी का शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 13,349 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, कंपनी की आय भी सालाना आधार पर करीब 14 प्रतिशत बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये दर्ज की गई। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ कंपनी ने प्रति शेयर 12 रुपये के अंतरिम लाभांश (डिविडेंड) की भी घोषणा की है। इस घोषणा ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया तथा शेयर में तेजी देखने को मिली। हालांकि पिछले छह महीनों में टीसीएस के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी और एक वर्ष के दौरान भी इसमें उल्लेखनीय कमजोरी रही, लेकिन ताजा नतीजों के बाद निवेशकों ने इसे सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाली तिमाहियों में भी कंपनी इसी तरह का प्रदर्शन बनाए रखती है तो आईटी सेक्टर में निवेशकों का विश्वास और बढ़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईटी के अलावा मेटल सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर धातुओं की मांग में सुधार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक संकेतों के कारण इस क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में तेजी बनी रही। स्टील और धातु क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में निवेशकों ने सक्रिय रुचि दिखाई, जिससे बाजार को अतिरिक्त मजबूती मिली। घरेलू बाजार को विदेशी संकेतों का भी समर्थन मिला। एशियाई शेयर बाजारों में शुक्रवार को अच्छी बढ़त दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक उछला, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। एशियाई बाजारों में इस सकारात्मक माहौल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों का मनोबल मजबूत हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी शेयर बाजारों से भी अच्छे संकेत मिले। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों में तेजी ने वैश्विक निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया, जिसका असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी देखने को मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने पिछले कारोबारी सत्र में करीब 533 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी कर बाजार को संतुलन प्रदान किया। पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति, कंपनियों के बेहतर वित्तीय नतीजे और वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेत फिलहाल भारतीय बाजार को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि निवेशकों को आने वाले दिनों में महंगाई, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर भी नजर बनाए रखनी होगी क्योंकि इनका असर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेगा। कॉरपोरेट आय के मौजूदा सीजन में यदि बड़ी कंपनियां उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश करती हैं तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की वापसी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं में कमी भी बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:56:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोने की कीमत ₹1.43 लाख के पार, एक दिन में ₹1,022 की तेजी; चांदी भी महंगी</title>
                                    <description><![CDATA[24 कैरेट सोना नए स्तर पर पहुंचा, चांदी में भी ₹1,752 प्रति किलो की बढ़त; विशेषज्ञों ने खरीदारी से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/raipur-created-a-new-record-99-government-health-institutions-got/article-58277"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gold-price-today-(10).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को एक बार फिर तेज उछाल दर्ज किया गया। लगातार बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल और निवेशकों की बढ़ती रुचि के बीच घरेलू सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम मजबूत बने हुए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में 10 ग्राम पर 1,022 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस तेजी के बाद 10 ग्राम सोने का भाव बढ़कर 1.43 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं चांदी की कीमत में भी मजबूती देखने को मिली और एक किलो चांदी 1,752 रुपये महंगी होकर करीब 2.23 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। पिछले कुछ समय से सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों का रुझान घरेलू बाजार की कीमतों को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में हर कारोबारी दिन सोने और चांदी के दाम नए स्तर पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। गुरुवार को आई तेजी ने एक बार फिर निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में लगभग 10 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोना करीब 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था। इसके बाद से लगातार बढ़ोतरी का दौर जारी रहा और अब इसका भाव 1.43 लाख रुपये के स्तर तक पहुंच गया है। इससे यह साफ है कि साल के शुरुआती महीनों में सोने ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। हालांकि चांदी की कीमतों का रुख सोने से कुछ अलग रहा है। मौजूदा तेजी के बावजूद वर्ष 2025 के अंतिम कारोबारी दिन की तुलना में चांदी अभी भी करीब 7 हजार रुपये प्रति किलो सस्ती है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी का भाव लगभग 2.30 लाख रुपये प्रति किलो था, जबकि वर्तमान में इसकी कीमत करीब 2.23 लाख रुपये प्रति किलो है। हालांकि हाल के दिनों में चांदी में भी लगातार तेजी देखने को मिल रही है, जिससे बाजार में इसकी मांग बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड स्तर भी छुए हैं। आंकड़ों के अनुसार 29 जनवरी 2026 को सोने की कीमत ने लगभग 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑलटाइम हाई बनाया था। वहीं चांदी भी उसी अवधि में करीब 3.86 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। इसके बाद दोनों धातुओं में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रहा और कीमतों में कई बार गिरावट और तेजी देखने को मिली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी आर्थिक या भू-राजनीतिक तनाव का असर सबसे पहले सोने की कीमतों पर दिखाई देता है। इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की नीतियां, ब्याज दरों में बदलाव और विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियां भी सोने और चांदी के भाव तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि वैश्विक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि निवेशकों को किसी भी तरह का निवेश करने से पहले बाजार की स्थिति और विशेषज्ञों की राय पर ध्यान देना चाहिए। केवल कीमतों में तेजी देखकर जल्दबाजी में निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता। ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए भी विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी है। सबसे पहले हमेशा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की हॉलमार्किंग वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि खरीदा गया सोना निर्धारित शुद्धता का है। प्रत्येक हॉलमार्क वाले आभूषण पर एक विशिष्ट अल्फान्यूमेरिक कोड अंकित होता है, जिससे उसकी प्रमाणिकता की जांच की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि खरीदारी से पहले सोने और चांदी की कीमतों का विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों से मिलान जरूर कर लेना चाहिए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन सहित अन्य मान्यता प्राप्त स्रोतों पर प्रतिदिन जारी होने वाले भाव देखकर ग्राहक सही कीमत का अनुमान लगा सकते हैं। इसके अलावा यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत अलग-अलग होती है। इसलिए आभूषण खरीदते समय उसकी शुद्धता और कैरेट की जानकारी अवश्य जांचनी चाहिए। त्योहारी सीजन और शादी-विवाह के मौसम में सोने और चांदी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है। ऐसे समय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे ग्राहकों के बजट पर पड़ता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:13:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी बोले- भारत और ऑस्ट्रेलिया की मजबूत साझेदारी दोनों देशों के भविष्य के लिए जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मेलबर्न में भारत-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने निवेश, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर, आज 40 हजार से अधिक भारतवंशियों से करेंगे मुलाकात।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pm-modi-said-in-australia-strong-partnership-between-india/article-58242"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/_narendra-modi-australia-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के तहत इन दिनों ऑस्ट्रेलिया में हैं। गुरुवार को उन्होंने मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और ऑस्ट्रेलिया का भरोसेमंद साझेदार के रूप में साथ आगे बढ़ना दोनों देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। वैश्विक अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट, ऊर्जा संकट और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच भरोसेमंद साझेदारों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में भारत और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग दोनों देशों को नए अवसरों तक पहुंचाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने विश्वास और सहयोग के आधार पर मजबूत साझेदारी की नींव रखी है, जिसे अब और आगे बढ़ाने का समय है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने और वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रहा है। इस दिशा में ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, खनिज संसाधन और विशेष रूप से यूरेनियम की उपलब्धता दोनों देशों के सहयोग को नई मजबूती दे सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने निवेश के क्षेत्र में भी ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत को भारत आने का न्योता दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में बंदरगाह, हवाई अड्डे, सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। इन क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए निवेश के बड़े अवसर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत लगातार व्यापार और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है, जिसका लाभ वैश्विक निवेशकों को मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के राज्यों, विश्वविद्यालयों, छोटे शहरों और उद्योगों के बीच प्रत्यक्ष साझेदारी बढ़ाने का भी सुझाव दिया। उनका कहना था कि यदि राज्य-से-राज्य और सेक्टर-से-सेक्टर सहयोग को बढ़ावा दिया जाए तो इसका सीधा फायदा व्यापार, शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर भी आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के लागू होने के बाद ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात लगभग दोगुना हो गया है। यह दोनों देशों के मजबूत आर्थिक संबंधों का प्रमाण है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने से दोनों देशों के कारोबारियों और निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। कार्यक्रम के बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आत्मीय मुलाकात की। दोनों नेताओं ने एक साथ सेल्फी भी खिंचवाई, जिसकी तस्वीरें चर्चा का विषय बनीं। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर अनौपचारिक बातचीत भी हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित भारतीय समुदाय का कार्यक्रम माना जा रहा है। यहां करीब 40 हजार से अधिक भारतवंशियों के शामिल होने की संभावना है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम को संबोधित करेंगे और भारतीय समुदाय से संवाद करेंगे। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों के बीच इस कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक भी होगी। इस बैठक में व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, शिक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। इसके अलावा दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों और कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ भी बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री के स्वागत के दौरान मेलबर्न में भारतीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। भारतीय समुदाय की ओर से पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कथक नृत्य, तबला वादन और ऑर्केस्ट्रा के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में "वंदे मातरम्" की प्रस्तुति ने विशेष आकर्षण पैदा किया। प्रधानमंत्री ने भी भारतीय समुदाय की गर्मजोशी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में इस यात्रा से व्यापार, निवेश, रक्षा और ऊर्जा जैसे कई क्षेत्रों में नए समझौतों और साझेदारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री अपने विदेश दौरे के अगले चरण में न्यूजीलैंड रवाना होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:04:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोना ₹177 चढ़कर ₹1.44 लाख पहुंचा, चांदी ₹2.27 लाख किलो हुई</title>
                                    <description><![CDATA[आईबीजेए के ताजा आंकड़ों में सोने-चांदी दोनों में बढ़त दर्ज, 2026 में अब तक सोना करीब ₹11 हजार महंगा जबकि चांदी अभी भी साल की शुरुआत के स्तर से नीचे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-rose-by-%E2%82%B9-177-to-%E2%82%B9-144-lakh-silver/article-58184"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gold-price-today-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार, 8 जुलाई को फिर हलचल देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत 177 रुपए बढ़कर करीब 1.44 लाख रुपए पर पहुंच गई। वहीं एक किलो चांदी का भाव 150 रुपए की तेजी के साथ 2.27 लाख रुपए हो गया। पिछले कुछ महीनों से कीमती धातुओं के दाम लगातार ऊपर-नीचे हो रहे हैं और इसका असर आम खरीदारों से लेकर निवेशकों तक पर साफ दिखाई दे रहा है। बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों, डॉलर की चाल, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और निवेशकों की खरीदारी का असर घरेलू बाजार में भी लगातार देखने को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">साल 2026 की शुरुआत से अब तक सोने ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपए थी, जो अब बढ़कर 1.44 लाख रुपए के आसपास पहुंच चुकी है। यानी महज कुछ महीनों में सोना करीब 11 हजार रुपए महंगा हो चुका है। हालांकि इस दौरान कीमतों में कई बार उतार-चढ़ाव भी आया। कुछ दिनों तक गिरावट देखने को मिली तो कई कारोबारी सत्रों में तेजी लौट आई। बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित निवेश की तलाश में लोग अब भी सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चांदी की बात करें तो आज इसमें हल्की तेजी जरूर दर्ज हुई, लेकिन साल की शुरुआत के मुकाबले इसकी कीमत अब भी नीचे बनी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को एक किलो चांदी का भाव करीब 2.30 लाख रुपए था, जबकि अब यह 2.27 लाख रुपए के आसपास कारोबार कर रही है। यानी इस अवधि में करीब 3 हजार रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। कारोबारियों का कहना है कि औद्योगिक मांग, अंतरराष्ट्रीय बाजार और निवेशकों की गतिविधियों के कारण चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल कीमती धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर भी छुआ। 29 जनवरी 2026 को सोने ने करीब 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम का ऑलटाइम हाई बनाया था। वहीं चांदी ने भी लगभग 3.86 लाख रुपए प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। उसके बाद बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के चलते दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट आई। अब एक बार फिर बाजार में हलचल बढ़ने से निवेशकों की नजर अगले कुछ महीनों की चाल पर टिकी हुई है। कई निवेशक मानते हैं कि लंबी अवधि में सोना अब भी सुरक्षित निवेश का विकल्प बना हुआ है, जबकि चांदी में जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न की संभावना भी रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी विशेषज्ञ कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं। सबसे पहले हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि खरीदा गया सोना तय शुद्धता का है। इसके अलावा खरीदारी से पहले उस दिन का ताजा बाजार भाव जरूर जांच लेना चाहिए। अलग-अलग कैरेट के सोने की कीमत अलग होती है, इसलिए बिल में दर्ज जानकारी और वजन को भी ध्यान से देखना जरूरी है। कई ग्राहक केवल डिजाइन देखकर खरीदारी कर लेते हैं, लेकिन मेकिंग चार्ज, टैक्स और शुद्धता की जानकारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">चांदी खरीदते समय भी सतर्क रहना जरूरी है। बाजार में असली और नकली दोनों तरह के उत्पाद उपलब्ध रहते हैं। असली चांदी की पहचान के लिए कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं। मैग्नेट टेस्ट में असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती। आइस टेस्ट में चांदी पर रखी बर्फ तेजी से पिघलती है क्योंकि इसकी तापीय चालकता अधिक होती है। इसके अलावा असली चांदी में किसी तरह की गंध नहीं होती, जबकि मिलावटी धातु में तांबे जैसी गंध महसूस हो सकती है। सफेद कपड़े से रगड़ने पर हल्का काला निशान आना भी शुद्ध चांदी की एक सामान्य पहचान माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:55:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रधानमंत्री मोदी अगले सप्ताह करेंगे न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई गति</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह पहली बार आधिकारिक दौरे पर न्यूजीलैंड जाएंगे। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के क्रियान्वयन और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने पर व्यापक चर्चा होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/prime-minister-modi-will-make-his-first-official-visit-to/article-57766"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pm-modi-new-zealand-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह अपनी पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा पर जाएंगे। इस यात्रा की घोषणा न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि भारतीय प्रधानमंत्री पहली बार आधिकारिक दौरे पर न्यूजीलैंड आ रहे हैं। उन्होंने इस यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और मजबूत होते सहयोग का प्रतीक बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा अप्रैल 2026 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) के बाद पहला बड़ा उच्चस्तरीय दौरा होगी। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सेवा क्षेत्र, कृषि, शिक्षा, पर्यटन और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देना है। दोनों देशों की सरकारों का मानना है कि इस समझौते से व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। साथ ही निवेश बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की भी उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और न्यूजीलैंड की आर्थिक समृद्धि के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से न्यूजीलैंड के उत्पादों और सेवाओं को 1.4 अरब से अधिक आबादी वाले भारतीय बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे निर्यात बढ़ेगा, नए रोजगार पैदा होंगे और न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यूजीलैंड सरकार ने अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर तक का निवेश बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस निवेश को सुगम बनाने के लिए भारत सरकार ने न्यूजीलैंड के निवेशकों के लिए विशेष "सिंगल डेस्क" या "वन-स्टॉप सुविधा" स्थापित करने पर सहमति दी है। इस व्यवस्था के तहत निवेश से जुड़े अनुमोदनों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज़ी से पूरा किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के निवेशकों को आसानी होगी। न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने पहले भी कहा था कि भारत में निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार हो रहा है और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। इसमें कृषि उत्पादकता, निवेश, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME), महिला उद्यमिता, खेल, पर्यटन, शिक्षा, कौशल विकास और प्रतिभा आदान-प्रदान जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसके अलावा दोनों देश छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल पेशेवरों के लिए भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। इससे दोनों देशों के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिलने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दोनों देशों के बीच होने वाला सहयोग कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा। न्यूजीलैंड डेयरी, पशुपालन और आधुनिक कृषि तकनीकों के लिए विश्वभर में जाना जाता है, जबकि भारत कृषि उत्पादन और विशाल उपभोक्ता बाजार के कारण एक महत्वपूर्ण साझेदार है। सेवा क्षेत्र, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, पर्यटन और खेल सहयोग भी इस यात्रा के प्रमुख एजेंडों में शामिल रहने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत और न्यूजीलैंड के बीच पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, मुक्त व्यापार और वैश्विक आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भी साझा दृष्टिकोण रखते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के साथ चर्चा और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर आगे की कार्ययोजना तय होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। मुक्त व्यापार समझौते के बाद यह दौरा आर्थिक सहयोग, निवेश, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को नई गति देने का अवसर प्रदान करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/prime-minister-modi-will-make-his-first-official-visit-to/article-57766</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 12:30:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ढाई साल का रिपोर्ट कार्ड: 45 सूत्रीय एजेंडे पर मंत्रियों से जवाब मांगेंगे सीएम मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश सरकार के ढाई वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विभागवार समीक्षा बैठकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, निवेश, पर्यटन, कृषि, हवाई सेवाओं और प्रशासनिक सुधार सहित 45 बिंदुओं पर मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट लेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-will-seek-answers-from-ministers-on-45-point/article-57747"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-yadav-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने कार्यकाल के ढाई वर्ष पूरे होने के बाद सरकार की प्राथमिकताओं और विभागीय कार्यों की व्यापक समीक्षा करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय ने इसके लिए 45 सूत्रीय एजेंडा तैयार कर सभी विभागों को भेज दिया है। समीक्षा बैठकों में मंत्रियों के साथ अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। प्रत्येक विभाग से अब तक हुए कार्यों का लेखा-जोखा लिया जाएगा और अगले ढाई वर्षों के लिए कार्ययोजना भी तय की जाएगी। पहले इन बैठकों का आयोजन 8 मई से प्रस्तावित था, लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था। अब नई तारीख जल्द जारी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि आगामी वर्षों के लिए विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय करना भी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री सभी विभागों के कार्यों की अलग-अलग समीक्षा करेंगे। प्रत्येक विभाग से योजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग, लंबित परियोजनाओं और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुति मांगी जाएगी। समीक्षा के दौरान समय-सीमा में काम पूरा करने और जनता से जुड़े मामलों के त्वरित समाधान पर विशेष जोर रहेगा। सरकार चाहती है कि विकास योजनाओं का लाभ तय समय में लोगों तक पहुंचे और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो। इसी उद्देश्य से सभी विभागों के लिए अलग-अलग एजेंडा तैयार किया गया है। राजस्व एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा में स्वामित्व योजना प्रमुख विषय रहेगा। मुख्यमंत्री ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के नाम पर निशुल्क रजिस्ट्री, प्रधानमंत्री के माध्यम से 50 लाख पट्टों के सिंगल क्लिक वितरण और नई आबादी भूमि के चिन्हांकन की प्रगति की समीक्षा करेंगे। ग्राम पंचायतों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रक्रिया को तेज करने और ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में भी विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद कम करना और संपत्ति के अधिकारों को स्पष्ट करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की समीक्षा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव प्रस्तावित है। सरकार राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों में विभाजित करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में नए विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव समीक्षा बैठक में प्रमुख विषय रहेगा। इसी तरह मेडिकल यूनिवर्सिटी को भी तीन भागों में विभाजित करने की योजना पर चर्चा होगी। सरकार सांदीपनि विद्यालयों के भवनों का दोपहर की पाली में महाविद्यालयों, कोचिंग सेंटर और स्किल डेवलपमेंट सेंटर के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर भी रिपोर्ट लेगी। इसके अलावा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन लाने की नीति पर भी विचार किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था, सीवेज प्रबंधन और नई फायर सेफ्टी नीति समीक्षा बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। सरकार शहरी निकायों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के साथ अग्निशमन सेवाओं की एनओसी प्रक्रिया को सरल बनाने की तैयारी कर रही है। स्वास्थ्य विभाग से प्रदेश में कैंसर अस्पतालों के विस्तार की कार्ययोजना मांगी जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। सरकार जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की तैयारियां अभी से शुरू कर रही है। औद्योगिक निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग को निवेश आकर्षित करने के लिए नई रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में आईटी नॉलेज सिटी और उज्जैन में डीप टेक पार्क विकसित करने की योजना पर विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया जाएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक उद्योगों में निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष नीतियों पर भी चर्चा होगी। सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश को उभरते हुए औद्योगिक और तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करना है। पर्यटन विभाग की समीक्षा में राम वन पथ गमन और कृष्ण पाथेय परियोजनाओं की प्रगति प्रमुख विषय होगी। मुख्यमंत्री इन परियोजनाओं की समय-सीमा तय करने और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर विभाग से रिपोर्ट लेंगे। विमानन विभाग को उज्जैन के दताना-मताना क्षेत्र में नए हवाई अड्डे के निर्माण, भूमि अधिग्रहण और पीपीपी मॉडल पर परियोजना आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रदेश के छोटे शहरों में हवाई सेवाओं के विस्तार और एयर कनेक्टिविटी मजबूत करने पर भी चर्चा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। समीक्षा बैठकों में वित्त विभाग से लाड़ली बहना और किसान सम्मान जैसी डीबीटी योजनाओं को स्थायी रोजगार से जोड़ने का मॉडल मांगा जाएगा। कृषि विभाग के साथ मंडी शुल्क में और राहत देने तथा किसानों के लिए बिजली सब्सिडी आधारित सिंचाई योजनाओं पर चर्चा होगी। सरकार अग्निवीर योजना से जुड़े युवाओं को राज्य की सरकारी भर्तियों में आरक्षण देने के प्रस्ताव पर भी विचार करेगी। गृह विभाग से लंबे समय से लंबित पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन और प्रमुख मंदिरों में होमगार्ड पदों के सृजन की स्थिति पर जवाब मांगा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा जेलों और मंडियों को शहरों से बाहर स्थानांतरित करने, सार्वजनिक भूमि के पुनर्विकास, बीएचईएल भोपाल की भूमि उपयोग रणनीति, यूनियन कार्बाइड की जमीन के उपयोग, सार्वजनिक पार्कों में पीपीपी मॉडल पर खेल और मनोरंजन सुविधाएं विकसित करने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं। सरकार का मानना है कि विभागीय समीक्षा केवल प्रगति रिपोर्ट लेने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि अगले ढाई वर्षों के विकास रोडमैप को अंतिम रूप देने का आधार भी बनेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, निवेश, पर्यटन, रोजगार, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुधारों पर लिए जाने वाले फैसले राज्य की विकास दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 10:53:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चांदी ₹3,420 चढ़कर ₹2.29 लाख किलो पहुंची, सोना ₹1,371 उछलकर ₹1.43 लाख पर</title>
                                    <description><![CDATA[जून में बड़ी गिरावट के बाद सोने-चांदी में फिर तेजी, इस साल अब तक सोना करीब ₹10 हजार महंगा जबकि निवेशकों की नजर आगे की चाल पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/silver-rose-by-%E2%82%B9-3420-and-reached-%E2%82%B9-229-lakh/article-57713"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gold-price-today-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को एक बार फिर तेजी देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर 1,371 रुपये बढ़कर 1,43,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। वहीं चांदी भी मजबूत बढ़त के साथ 3,420 रुपये महंगी होकर 2,29,000 रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई। पिछले महीने लगातार गिरावट के बाद आई इस तेजी ने सर्राफा बाजार में फिर से हलचल बढ़ा दी है। कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में सुधार और निवेशकों की बढ़ती खरीदारी का असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दे रहा है। हालांकि बाजार के जानकार अभी इसे स्थायी तेजी मानने से बच रहे हैं और उनका कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों के आधार पर कीमतों में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बीते महीने जून में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। 31 मई को 10 ग्राम सोने का भाव 1,56,463 रुपये था, जो जून के आखिर तक घटकर 1,43,380 रुपये पर आ गया। यानी एक महीने में सोना 13,083 रुपये सस्ता हुआ था। इसी तरह चांदी की कीमत 2,63,350 रुपये प्रति किलो से घटकर 2,29,293 रुपये रह गई थी। इस दौरान चांदी में 34,057 रुपये प्रति किलो की बड़ी गिरावट देखने को मिली। लंबे समय बाद आई इस गिरावट से आभूषण खरीदने वालों को राहत मिली थी, लेकिन अब जुलाई की शुरुआत में फिर तेजी लौटने से बाजार का माहौल बदलता नजर आ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि अगर पूरे वर्ष 2026 की बात करें तो सोना अभी भी साल की शुरुआत के मुकाबले काफी महंगा बना हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोने का भाव लगभग 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर करीब 1.43 लाख रुपये हो चुका है। यानी इस साल अब तक सोने की कीमत में लगभग 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर चांदी की कीमतों में सालभर के दौरान ज्यादा बढ़त नहीं दिखी है। वर्ष के अंत में चांदी लगभग 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जबकि फिलहाल यह करीब 2.29 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस साल जनवरी में सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड ऊंचाई भी छुई थी। 29 जनवरी को सोने की कीमत 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी, जबकि चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया था। उसके बाद मुनाफावसूली, वैश्विक बाजार में बदलाव और निवेशकों की रणनीति बदलने से दोनों धातुओं की कीमतों में लगातार गिरावट आई। अब जुलाई की शुरुआत में आई तेजी को बाजार नई दिशा के संकेत के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक परिस्थितियां सोने-चांदी की कीमतों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। इसी तरह औद्योगिक मांग बढ़ने पर चांदी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिलती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">निवेश करने वाले लोगों को केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए। सोना और चांदी दोनों ही लंबे समय के निवेश माने जाते हैं और इनमें समय-समय पर उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। यदि कोई व्यक्ति निवेश या आभूषण खरीदने की योजना बना रहा है तो उसे रोजाना के भाव पर नजर रखने के साथ बाजार की दिशा को भी समझना चाहिए। त्योहारी सीजन और शादी-ब्याह के मौसम में मांग बढ़ने से कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है। ज्वेलर्स भी ग्राहकों को सोना खरीदते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं। सबसे पहले हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि खरीदा गया सोना निर्धारित शुद्धता का है। इसके अलावा खरीदारी से पहले उस दिन के सोने के भाव की पुष्टि विश्वसनीय स्रोतों से कर लेना भी जरूरी है क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत अलग-अलग होती है। ग्राहकों को बिल जरूर लेना चाहिए और मेकिंग चार्ज व अन्य शुल्क की भी स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:08:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीथमपुर एसईजेड फेज-2 में ₹2,246 करोड़ के निवेश को मंजूरी, 20 हजार करोड़ निर्यात का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[फार्मा कंपनियों के बड़े निवेश से औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगी नई रफ्तार, करीब 1,900 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/approval-of-investment-of-%E2%82%B9-2246-crore-in-pithampur-sez/article-57716"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pithampur-sez.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर को एक बार फिर बड़ी निवेश सौगात मिली है। पीथमपुर विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के दूसरे चरण में कुल 2,246 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। इन निवेशों के जरिए प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPIDC) के अनुसार इन परियोजनाओं के शुरू होने से करीब 1,900 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि अगले पांच वर्षों में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। निवेश प्रस्तावों को डेवलपमेंट कमिश्नर, एसईजेड की अध्यक्षता में आयोजित स्वीकृति समिति की वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली बैठक में मंजूरी दी गई। सभी नई परियोजनाएं पीथमपुर एसईजेड फेज-2 में स्थापित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता और निर्यात गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक हिमांशु प्रजापति ने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं का सबसे बड़ा हिस्सा फार्मास्युटिकल सेक्टर से जुड़ा है। कई प्रमुख दवा कंपनियां अपने उत्पादन का विस्तार करने के साथ नई इकाइयों की स्थापना भी करेंगी। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि अत्याधुनिक तकनीक, आधुनिक विनिर्माण और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि फार्मा उद्योग में बढ़ता निवेश प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्वीकृत प्रस्तावों में प्रमुख दवा कंपनी अजंता फार्मा का विस्तार शामिल है। कंपनी अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नई सुविधाओं का विकास करेगी। इसके अलावा फेलिक्स जेनेरिक्स और शंकर न्यूट्रिकॉन जैसी कंपनियां भी पीथमपुर एसईजेड में नई उत्पादन इकाइयां स्थापित करेंगी। इन परियोजनाओं के शुरू होने से दवा निर्माण, पैकेजिंग, गुणवत्ता परीक्षण और सप्लाई चेन से जुड़े कई नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उद्योग विभाग का मानना है कि इन कंपनियों के आने से छोटे और मध्यम स्तर के स्थानीय उद्योगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीथमपुर लंबे समय से मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र माना जाता है। यहां पहले से ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, फार्मा, केमिकल और विनिर्माण क्षेत्र की अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां संचालित हैं। बेहतर सड़क संपर्क, विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना और निर्यात के लिए उपलब्ध सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। विशेष आर्थिक क्षेत्र होने के कारण यहां उद्योगों को कई प्रशासनिक और व्यावसायिक सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं, जिससे निवेश आकर्षित करने में मदद मिलती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एमपीआईडीसी का कहना है कि इन नई परियोजनाओं के शुरू होने के बाद पीथमपुर एसईजेड का निर्यात प्रदर्शन भी मजबूत होगा। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में इन इकाइयों से लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया जाएगा। इससे न केवल प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। निर्यात बढ़ने से प्रदेश की औद्योगिक पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक स्तर पर फार्मास्युटिकल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में यदि मध्य प्रदेश में आधुनिक दवा निर्माण इकाइयों का विस्तार होता है तो इसका सीधा लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा। नई इकाइयों के शुरू होने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, तकनीकी विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इसके साथ ही परिवहन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रयास कर रही है। निवेशकों को सरल प्रक्रियाएं, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार नई परियोजनाएं स्वीकृत हो रही हैं। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश आने से प्रदेश में रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों को भी नई संभावनाएं मिलेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:06:21 +0530</pubDate>
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                <title>भारत दौरे पर जापान की पीएम सानाए ताकाइची, राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सानाए ताकाइची आज व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर चर्चा करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/grand-welcome-at-rashtrapati-bhavan-for-japanese-pm-sanae-takaichi/article-57629"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sanae-takaichi-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के तीन दिवसीय भारत दौरे की औपचारिक शुरुआत गुरुवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में हुई, जहां उनका पूरे सम्मान के साथ स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे और उन्होंने जापान की प्रधानमंत्री का स्वागत किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद सानाए ताकाइची की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे भारत और जापान के बीच रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/_japan-pm.jpg" alt="_Japan PM" width="1366" height="900"></img></p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अपने दौरे के दूसरे दिन सानाए ताकाइची प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता में निवेश, व्यापार, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, ऑटोमोबाइल उद्योग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए कई नए समझौतों पर भी बातचीत हो सकती है।= इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा आर्थिक सहयोग को नई गति देना माना जा रहा है। भारत और जापान के बीच व्यापार और निवेश लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश अब इसे अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी में हैं। इसी उद्देश्य से जापान के 150 से अधिक उद्योगपति भारत-जापान बिजनेस फोरम में हिस्सा लेंगे। इस मंच पर दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधि नए निवेश, औद्योगिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कई नई निवेश परियोजनाओं का रास्ता साफ हो सकता है। इस यात्रा के दौरान सबसे अधिक चर्चा भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की संभावित व्यवस्था को लेकर हो रही है। दोनों देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए भारतीय रुपए और जापानी येन में सीधे भुगतान की व्यवस्था विकसित करने पर काम कर रहे हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो पहली बार दोनों देशों के बीच व्यापार का भुगतान बिना अमेरिकी डॉलर के सीधे स्थानीय मुद्राओं में किया जा सकेगा। इससे विदेशी मुद्रा विनिमय की लागत कम होगी और व्यापारिक लेनदेन पहले की तुलना में अधिक तेज और आसान हो जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोल सकेंगी और उन्हीं के माध्यम से रुपए और येन में लेनदेन कर पाएंगी। इससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए तीसरे देश की बैंकिंग प्रणाली या अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता नहीं होगी।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/japan-pm-india-visit.jpg" alt="JAPAN PM INDIA VISIT" width="1366" height="1002"></img></p>
<p style="text-align:justify;">भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की दिशा में पहले भी सहमति बन चुकी है। वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले दस वर्षों के साझा विजन दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। उसी दौरान भुगतान प्रणाली को मजबूत करने और स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी थी। अब दोनों देश उस योजना को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आर्थिक मोर्चे पर जापान भारत के सबसे महत्वपूर्ण निवेशकों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 27.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में जापान ने भारत में अरबों डॉलर का निवेश किया है और अगले दस वर्षों में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश का लक्ष्य तय किया गया है। यह निवेश मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, हाई-टेक रक्षा उद्योग, डिजिटल तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र में किया जाएगा। वर्तमान में भारत में लगभग 1400 जापानी कंपनियां सक्रिय हैं। इनमें से बड़ी संख्या विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी हुई है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना दोनों देशों के सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है, जिसमें जापानी शिनकानसेन तकनीक और वित्तीय सहयोग का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्रों में भी जापानी कंपनियां भारत में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं। दोनों देश क्वाड समूह के सदस्य हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा नियम आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने जैसे विषय भी इस यात्रा के दौरान प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:16:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों से प्रतिबंध हटाए, रक्षा और निर्यात क्षेत्र को मिल सकती है नई मजबूती</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिबंध हटने के बाद वैश्विक कारोबार, रक्षा आपूर्ति, हाई-टेक निर्यात और भारत-अमेरिका औद्योगिक सहयोग को मिलने की उम्मीद नई गति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/america-lifts-sanctions-from-four-indian-companies-defense-and-export/article-57513"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/us-sanctions-removed.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए हैं। इस फैसले को भारतीय उद्योग, रक्षा उत्पादन और निर्यात क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे न केवल संबंधित कंपनियों के लिए वैश्विक कारोबार के नए अवसर खुलेंगे, बल्कि भारत की उभरती हुई विनिर्माण क्षमता और रक्षा क्षेत्र को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी। ऐसे समय में जब भारत वैश्विक सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, यह निर्णय दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को और गति दे सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका द्वारा प्रतिबंध हटाने के बाद संबंधित भारतीय कंपनियां अब अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों में पहले की तुलना में अधिक सहजता से भाग ले सकेंगी। विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग, निवेश, उपकरणों की खरीद, वित्तीय लेनदेन और निर्यात से जुड़े कई काम आसान होने की संभावना है। उद्योग जगत का मानना है कि इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी और वे वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति को और विस्तार दे सकेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">रक्षा क्षेत्र के दृष्टिकोण से भी इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। भारत पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा निर्यात को भी लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। आधुनिक रक्षा उपकरण, एयरोस्पेस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म, विशेष मशीनरी और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में भारतीय कंपनियां लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। प्रतिबंध हटने के बाद इन कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी की संभावनाएं और मजबूत हो सकती हैं। रक्षा उद्योग में किसी भी कंपनी के लिए तकनीकी सहयोग और आपूर्ति नेटवर्क तक आसान पहुंच बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब प्रतिबंध हटते हैं तो विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्त परियोजनाओं, अनुसंधान, उत्पादन और निर्यात के अवसर बढ़ जाते हैं। इससे नई तकनीकों का आदान-प्रदान भी आसान होता है और भारतीय उद्योगों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन करने में मदद मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार भी पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे कार्यक्रमों के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई गई है। रक्षा उत्पादन में नई कंपनियों के प्रवेश, तकनीकी निवेश और निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए कई नीतिगत सुधार भी किए गए हैं। ऐसे में अमेरिका का यह फैसला भारतीय उद्योगों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने वाला माना जा रहा है। निर्यात क्षेत्र पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। भारत आज इंजीनियरिंग उत्पाद, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, विशेष रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और रक्षा उपकरणों के निर्यात में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। यदि भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में बेहतर पहुंच मिलती है तो देश के कुल निर्यात में भी वृद्धि की संभावना मजबूत होगी। इससे विदेशी मुद्रा आय बढ़ने के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फैसला वैश्विक निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत है। किसी देश की कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटने से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है और वे दीर्घकालिक निवेश के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं। इसका लाभ संबंधित कंपनियों के साथ-साथ पूरे औद्योगिक क्षेत्र को मिल सकता है। नई साझेदारियां बनने से तकनीकी नवाचार और उत्पादन क्षमता दोनों में वृद्धि होने की संभावना रहती है। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है। सूचना प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। ऐसे में प्रतिबंध हटाने का यह निर्णय व्यापक रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को भी नई गति दे सकता है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर विकसित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने की दिशा में काम कर रही हैं और भारत एक विश्वसनीय उत्पादन केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। बेहतर नीतिगत वातावरण, मजबूत बुनियादी ढांचा, कुशल मानव संसाधन और बढ़ती घरेलू मांग भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बना रही है। ऐसे में अमेरिकी निर्णय से भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मजबूत हो सकती है। यदि प्रतिबंध हटने के बाद व्यापारिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और निर्यात गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ती हैं तो इसका सकारात्मक प्रभाव आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा। रक्षा विनिर्माण, उच्च तकनीक उत्पादन और वैश्विक निर्यात नेटवर्क में भारत की भागीदारी बढ़ने से औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:44:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची भारत दौरे पर, मोदी संग शिखर वार्ता में कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और स्थानीय मुद्राओं में कारोबार जैसे विषयों पर दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण फैसलों की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/many-important-issues-will-be-discussed-in-the-summit-with/article-57511"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-japan-summit.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और जापान के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची बुधवार को तीन दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंच रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला आधिकारिक भारत दौरा है, जिसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, सप्लाई चेन, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्रालय के अनुसार यह दौरा 1 से 3 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान दोनों देशों के बीच चल रही विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। माना जा रहा है कि बैठक में आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ नई तकनीकों, औद्योगिक निवेश और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को लेकर भी सकारात्मक प्रगति हो सकती है। दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ भी प्रधानमंत्री स्तर पर मुलाकात का कार्यक्रम प्रस्तावित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी भी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देश ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत व्यापारिक भुगतान सीधे भारतीय रुपये और जापानी येन में किया जा सकेगा। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में औपचारिक व्यापारिक भुगतान प्रणाली स्थापित होगी। इससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम होगी और व्यापारिक लेनदेन पहले की तुलना में अधिक आसान तथा किफायती बन सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपये और येन में भुगतान कर सकेंगी। इससे विदेशी मुद्रा विनिमय की अतिरिक्त लागत कम होगी और भुगतान प्रक्रिया भी तेज होगी। व्यापारिक समुदाय का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच कारोबार करने वाली कंपनियों को समय और धन दोनों की बचत होगी। साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की यह पहल नई जरूर है, लेकिन इसकी नींव पहले ही रखी जा चुकी थी। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले दस वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उस समय भी भुगतान प्रणाली को सरल बनाने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर सहमति बनी थी। अब उसी दिशा में ठोस कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही विशेष रुपया वोस्त्रो अकाउंट की व्यवस्था शुरू कर चुका है, जिसके माध्यम से कई देशों के साथ रुपये में व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार के अनुसार वर्तमान में 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम करना और भारतीय रुपये के वैश्विक उपयोग को बढ़ावा देना है। जापान भी एशियाई देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है और भारत के साथ यह सहयोग उसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और जापान के आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच लगभग 27.5 अरब डॉलर का व्यापार दर्ज किया गया। इसी अवधि में जापान ने भारत में करीब 3.2 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश किया। जापान ने अगले दस वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने का लक्ष्य भी तय किया है। वर्तमान में भारत में लगभग 1400 जापानी कंपनियां कार्यरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना है, जिसमें जापान की शिनकानसेन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, ऑटोमोबाइल, डिजिटल टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत भारत और जापान ने वर्ष 2025 में सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में विशेष रणनीतिक संवाद भी शुरू किया था। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, क्वाड सहयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी महत्वपूर्ण संदेश देगा। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:44:02 +0530</pubDate>
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