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                <title>natural disaster - दैनिक जागरण</title>
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                <description>natural disaster RSS Feed</description>
                
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                <title>वेनेजुएला में 39 सेकेंड में दो बड़े भूकंप, 164 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[7.5 और 7.2 तीव्रता के झटकों से 60 सेकेंड तक कांपी धरती, 971 घायल, देश में इमरजेंसी घोषित और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/two-major-earthquakes-in-39-seconds-in-venezuela-164-dead/article-56953"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/venezuela-earthquake.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में बुधवार शाम महज 39 सेकेंड के अंतराल में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। पहले 7.2 तीव्रता का झटका और उसके ठीक एक मिनट के भीतर 7.5 तीव्रता का दूसरा बड़ा झटका दर्ज किया गया। इन दोनों झटकों के बाद करीब 60 सेकेंड तक धरती लगातार हिलती रही, जिससे लोगों में दहशत फैल गई और कई शहरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन भूकंपों का केंद्र पश्चिमी वेनेजुएला के तटीय इलाके के पास बताया जा रहा है, जो राजधानी कराकस से लगभग 290 किलोमीटर दूर है। झटकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसका असर राजधानी कराकस सहित कई बड़े शहरों तक महसूस किया गया। कई इमारतें या तो ढह गईं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। कराकस एयरपोर्ट की छत का हिस्सा गिरने की भी पुष्टि हुई है, जिससे यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। अब तक की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस प्राकृतिक आपदा में 164 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 971 लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई लोग अभी भी लापता हैं और आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे बड़ी संख्या में लोग फंसे हो सकते हैं। रेस्क्यू टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं, लेकिन कई इलाकों में सड़कें टूटने और मलबा जमा होने के कारण पहुंचने में कठिनाई हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भूकंप के बाद कम से कम 20 आफ्टरशॉक्स भी दर्ज किए गए हैं, जिससे लोगों में डर और बढ़ गया है। कई इलाकों में लोग घरों से बाहर निकलकर खुले मैदानों में रात बिताने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। यह भूकंप ऐसे समय में आया जब देश में राष्ट्रीय अवकाश था और लोग ऐतिहासिक स्वतंत्रता दिवस मना रहे थे। इसी कारण अधिकतर लोग अपने घरों में मौजूद थे, जिससे हताहतों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह झटके किसी सामान्य कार्य दिवस पर आते तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी जियोलॉजिकल एजेंसी के अनुमान के अनुसार, इस भूकंप से बड़े पैमाने पर जनहानि की आशंका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 44 प्रतिशत संभावना है कि मृतकों की संख्या 10,000 से अधिक हो सकती है, जबकि 30 प्रतिशत संभावना यह भी जताई गई है कि यह आंकड़ा एक लाख तक पहुंच सकता है। हालांकि ये अनुमान प्रारंभिक हैं और स्थिति की गंभीरता पर लगातार अपडेट जारी किए जा रहे हैं। वेनेजुएला सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। कार्यवाहक राष्ट्रपति ने सभी आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया है और सेना को राहत कार्यों में लगाया गया है। अस्पतालों में घायलों के इलाज के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं और मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भूकंप का सबसे ज्यादा असर ला गुआइरा और आसपास के इलाकों में देखा गया है, जहां कई रिहायशी इमारतें गिर गई हैं। मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक झटके इतने तेज थे कि कुछ ही सेकेंड में इमारतें हिलने लगीं और देखते ही देखते कई ढह गईं। कराकस एयरपोर्ट पर भी स्थिति गंभीर रही, जहां छत का हिस्सा गिरने के बाद यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। धूल और मलबे के कारण एयरपोर्ट संचालन भी प्रभावित हुआ है। कई उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह भूकंप पिछले कई दशकों में इस क्षेत्र का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है। इससे पहले 1900 में 7.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। 126 साल बाद आए इस भयानक झटके ने पूरे देश को झकझोर दिया है। भूकंप के बाद कई शहरों में बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाने और फंसे लोगों को निकालने में जुटे हुए हैं। हालांकि लगातार आफ्टरशॉक्स के कारण बचाव कार्यों में बाधा आ रही है। स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां मिलकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं। राहत शिविर लगाए जा रहे हैं और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 17:48:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का भूकंप, 19 लोगों की मौत, 134 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[मिंदानाओ द्वीप के पास आए शक्तिशाली भूकंप से कई इमारतें ढहीं, सुनामी की लहरें भी दर्ज; राहत और बचाव अभियान जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/78-magnitude-earthquake-hits-philippines-19-dead-134-injured/article-55306"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/philippines-earthquake.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फिलीपींस में सोमवार सुबह आए शक्तिशाली भूकंप ने व्यापक तबाही मचाई है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार 7.8 तीव्रता के इस भूकंप में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 134 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है और कुछ भवन पूरी तरह धराशायी हो गए हैं। भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों और घायलों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी खोज अभियान जारी है। सात लोगों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है, जिनकी तलाश की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह करीब 5 बजकर 7 मिनट पर आया। इसका केंद्र फिलीपींस के मिंदानाओ द्वीप के निकट जमीन से लगभग 35 किलोमीटर नीचे स्थित था। झटके इतने तेज थे कि लोगों की नींद खुल गई और हजारों लोग घबराकर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। कई शहरों और कस्बों में लोगों ने खुले मैदानों और सड़कों पर शरण ली। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ स्थानों पर इमारतें कई सेकंड तक हिलती रहीं और लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।</p>
<p style="text-align:justify;">भूकंप का सबसे ज्यादा असर व्यावसायिक क्षेत्रों में देखने को मिला है। प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक कई दुकानें, कार्यालय और व्यावसायिक भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। कुछ जगहों पर दीवारें गिर गईं, जबकि कई इमारतों में बड़ी दरारें पड़ गई हैं। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित भवनों को खाली कराकर सुरक्षा घेरा बना दिया है। इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीमें संरचनात्मक नुकसान का आकलन कर रही हैं ताकि यह तय किया जा सके कि कौन सी इमारतें उपयोग के लिए सुरक्षित हैं और किन्हें बंद करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलीपींस ज्वालामुखी और भूकंप विज्ञान संस्थान ने बताया कि सोमवार सुबह 11 बजे तक कुल 138 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए। इन झटकों की तीव्रता 1.3 से लेकर 6.7 तक रही। लगातार आ रहे झटकों के कारण लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। कई परिवार अब भी घरों में लौटने से बच रहे हैं और खुले स्थानों पर ही समय बिता रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">भूकंप के बाद सुनामी की आशंका भी पैदा हो गई थी। मिंदानाओ द्वीप के छह अलग-अलग इलाकों में समुद्र के जलस्तर में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार सबसे ऊंची लहर लगभग 1.4 मीटर यानी करीब 4.6 फीट तक पहुंची। हालांकि यह लहरें बड़े पैमाने पर विनाशकारी साबित नहीं हुईं, फिर भी तटीय क्षेत्रों में एहतियात के तौर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। सुनामी की आशंका को देखते हुए इंडोनेशिया और मलेशिया ने भी चेतावनी जारी की थी। बाद में स्थिति सामान्य होने पर इन चेतावनियों को वापस ले लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">राहत एजेंसियां और आपदा प्रबंधन दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। कई स्थानों पर मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास जारी है। अस्पतालों में घायलों का इलाज चल रहा है और अतिरिक्त चिकित्सा दल भी तैनात किए गए हैं। फिलीपींस की नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने कहा है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों से जानकारी जुटाई जा रही है और मौतों के आंकड़ों का आधिकारिक सत्यापन किया जा रहा है। दूरदराज के कुछ इलाकों में संचार और बिजली सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे राहत कार्यों में चुनौतियां सामने आ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलीपींस प्रशांत महासागर के उस क्षेत्र में स्थित है जिसे "रिंग ऑफ फायर" कहा जाता है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय और ज्वालामुखीय क्षेत्रों में गिना जाता है। इसी वजह से यहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां देखने को मिलती हैं। हालांकि इस बार आए भूकंप की तीव्रता काफी अधिक थी, जिसके कारण इसका प्रभाव व्यापक क्षेत्र में महसूस किया गया। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में भी सुरक्षा जांच शुरू कर दी गई है। प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां भोजन, पानी और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 17:59:47 +0530</pubDate>
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                <title>रीवा-यूपी बॉर्डर पर आंधी-तूफान का कहर, चाकघाट में भारी तबाही</title>
                                    <description><![CDATA[तेज हवाओं से उखड़े पेड़ और बिजली खंभे, कई घरों-दुकानों को नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/6a19516a07cb4/article-54487"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/chakghat-storm-(1).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">रीवा जिले के यूपी बॉर्डर से लगे चाकघाट नगर परिषद क्षेत्र में गुरुवार देर रात मौसम ने अचानक ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका तबाही की तस्वीर में बदल गया। तेज आंधी, धूलभरी हवाओं और बारिश के साथ आए तूफान ने मकानों, दुकानों और सड़क किनारे खड़े वाहनों को भारी नुकसान पहुंचाया। रात करीब 11 बजे के बाद अचानक मौसम बदला और तेज हवा चलने लगी। देखते ही देखते हालात इतने बिगड़ गए कि लोगों को घरों के अंदर सुरक्षित जगहों पर छिपना पड़ा।</p>
<p dir="ltr">चाकघाट थाना क्षेत्र और आसपास के इलाकों में कई घरों के टीन शेड हवा में उड़ गए। कहीं दीवारें गिर गईं तो कहीं छतों के ऊपर रखी टीन की चादरें सड़क पर जा गिरीं। कई लोग रात में ही घरों से बाहर निकल आए। तेज हवाओं की आवाज और उड़ती टीन की चादरों से लोगों में डर का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई सालों में उन्होंने इतना तेज तूफान नहीं देखा।</p>
<p dir="ltr">तूफान का असर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी दिखाई दिया। चाकघाट थाने के बाहर लगा भारी-भरकम लोहे का साइन बोर्ड तेज हवा के दबाव में उखड़कर सड़क किनारे गिर पड़ा। यह बोर्ड सड़क पर गिरता तो बड़ा हादसा हो सकता था, लेकिन देर रात ट्रैफिक कम होने की वजह से जनहानि टल गई। बोर्ड गिरने के बाद कुछ देर तक इलाके में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने किसी तरह रास्ता साफ कराया।</p>
<p dir="ltr">बाजार क्षेत्र में भी भारी नुकसान की खबर सामने आई है। कई दुकानों के सामने लगे बोर्ड टूटकर गिर गए। कुछ दुकानों की टीन की छतें पूरी तरह उड़ गईं। सड़क किनारे खड़े दोपहिया और चारपहिया वाहन पेड़ों और टीन शेड की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गए। कई जगह बिजली के खंभे झुक गए और तार टूटकर सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद पूरे इलाके की बिजली व्यवस्था ठप हो गई। देर रात से शुक्रवार सुबह तक कई मोहल्लों में अंधेरा पसरा रहा।</p>
<p dir="ltr">सुबह जब लोग घरों से बाहर निकले तो चारों तरफ तबाही का मंजर दिखाई दिया। कहीं पेड़ सड़क के बीचोंबीच गिरे पड़े थे तो कहीं बिजली के तार बिखरे हुए थे। कई गलियों में टीन शेड और टूटे पेड़ों की वजह से रास्ता बंद हो गया था। लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ इलाकों में पेड़ गिरने से पानी की पाइपलाइन भी प्रभावित हुई है। हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।</p>
<p dir="ltr">स्थानीय लोगों के मुताबिक तूफान इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ परिवारों ने रात पड़ोसियों के घरों में बिताई क्योंकि उनके मकानों की छतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। कई घरों में बारिश का पानी भर गया। बाजार के दुकानदारों का कहना है कि अचानक आए तूफान से हजारों रुपए का नुकसान हुआ है। सुबह से लोग टूटे सामान और उखड़े शेड हटाने में लगे रहे।</p>
<p dir="ltr">गनीमत यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में अब तक किसी के हताहत होने की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि कई लोग मामूली रूप से घायल बताए जा रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राहत की बात यह रही कि देर रात सड़कों पर ज्यादा आवाजाही नहीं थी, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा नुकसान चाकघाट नगर परिषद क्षेत्र और उससे लगे गांवों में हुआ है।</p>
<p dir="ltr">तूफान के बाद स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद और बिजली विभाग की टीमें सुबह से मौके पर पहुंच गईं। जेसीबी मशीनों की मदद से सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने का काम शुरू किया गया। बिजली विभाग के कर्मचारी टूटे खंभों और तारों को ठीक करने में जुटे रहे। कई इलाकों में अस्थायी रूप से बिजली बहाल करने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ स्थानों पर अभी भी आपूर्ति बाधित बनी हुई है।</p>
<p dir="ltr">स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और प्रभावित परिवारों को राहत दी जाए। लोगों का कहना है कि कई गरीब परिवारों के घरों के टीन शेड पूरी तरह उड़ गए हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल सहायता की जरूरत है। कुछ लोगों ने यह भी मांग उठाई कि बरसात से पहले कमजोर बिजली खंभों और पुराने पेड़ों की जांच की जानी चाहिए थी।</p>
<p dir="ltr">मौसम विभाग की ओर से पहले तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई थी, लेकिन लोगों को इस स्तर की तबाही की उम्मीद नहीं थी। प्रशासन हालात सामान्य करने में जुटा हुआ है। वहीं चाकघाट और आसपास के इलाकों में लोग अभी भी डरे हुए हैं। कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर रात में बाहर खुले स्थानों में बैठकर समय बिताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:20:51 +0530</pubDate>
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                <title>लद्दाख भूकंप: लेह में 4.1 तीव्रता के झटके, कोई बड़ा नुकसान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[लद्दाख भूकंप की पुष्टि NCS ने की, सुबह 3:54 बजे आए झटके; गहराई ज्यादा होने से असर सीमित रहा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ladakh-earthquake-tremors-of-41-magnitude-in-leh-no-major/article-52414"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/ladakh-earthquake.jpg" alt=""></a><br /><p>लद्दाख के लेह क्षेत्र में गुरुवार तड़के भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र  के अनुसार, यह भूकंप 30 अप्रैल 2026 को सुबह 3:54 बजे आया और इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.1 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र लेह के पास स्थित था, जबकि इसकी गहराई करीब 150 किलोमीटर बताई गई है। गहराई अधिक होने के कारण झटकों का असर सतह पर सीमित रहा और किसी बड़े नुकसान की सूचना सामने नहीं आई। स्थिति पूरी तरह सामान्य है और प्रशासन अलर्ट पर है।</p>
<p>भूकंप के झटके उस समय महसूस हुए जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। कई लोगों की नींद अचानक टूट गई और वे घरों से बाहर निकल आए। हालांकि झटके हल्के थे, इसलिए किसी तरह की भगदड़ या गंभीर स्थिति नहीं बनी। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि अब तक किसी जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p>राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भूकंप की पुष्टि की।भूकंप का केंद्र 36.722 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 74.456 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। वैज्ञानिकों का कहना है कि भूकंप की गहराई ज्यादा होने से इसकी ऊर्जा सतह तक कम पहुंची, जिससे इसका प्रभाव सीमित रहा।</p>
<p>लद्दाख और आसपास का इलाका भूकंप के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों का टकराव है। भूवैज्ञानिकों के मुताबिक, इन प्लेटों के लगातार दबाव के कारण जमीन के अंदर ऊर्जा जमा होती रहती है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर निकलती है।</p>
<p>इस क्षेत्र में पहले भी कई बार हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं। यही वजह है कि प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां यहां हमेशा सतर्क रहती हैं और लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं।मौजूदा भूकंप से किसी तरह का बुनियादी ढांचा प्रभावित नहीं हुआ है। सड़क, बिजली और संचार सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।भूकंप के बाद प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी रखी गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 15:06:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>जापान में 6.1 तीव्रता का भूकंप, होक्काइडो में झटके; तटीय इलाकों में सुनामी का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[USGS और जापान की एजेंसी ने की पुष्टि, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह; नुकसान सीमित, कोई जनहानि नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/61-magnitude-earthquake-in-japan-tremors-in-hokkaido-danger-of/article-52184"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/japan-earthquake.jpg" alt=""></a><br />
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<p>जापान के उत्तरी क्षेत्र होक्काइडो में सोमवार को 6.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भूकंप का केंद्र साराबेत्सु के पास बताया गया है और इसकी गहराई करीब 81 किलोमीटर रही। झटकों के बाद तटीय क्षेत्रों में सुनामी का खतरा पैदा हो गया, जिसके चलते प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।</p>
<p>जापान की जियोफिजिक्स एजेंसी और यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने भूकंप की पुष्टि की है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, हालांकि कुछ इमारतों और घरों को हल्का नुकसान पहुंचा है। भूकंप के झटके आसपास के इलाकों में भी महसूस किए गए, जिससे लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए।</p>
<p>भूकंप के तुरंत बाद प्रशासन ने होक्काइडो के तटीय क्षेत्रों के लिए चेतावनी जारी की। अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर लोगों को समुद्र तट से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और यदि खतरा कम होता है तो अलर्ट वापस लिया जा सकता है।</p>
<p>जापान भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है, जहां अक्सर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। देश ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में आता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि अधिक रहती है। इसी कारण यहां छोटे-बड़े भूकंप आम बात हैं, लेकिन कभी-कभी इनका प्रभाव गंभीर भी हो सकता है।</p>
<p>मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के भूकंपों के बाद सुनामी का खतरा बढ़ जाता है, खासकर तब जब केंद्र समुद्र के करीब हो। हालांकि इस बार भूकंप की गहराई अधिक होने के कारण बड़े पैमाने पर नुकसान की संभावना कम बताई जा रही है।</p>
<p>स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और राहत व बचाव दल तैयार रखे गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने के प्रयास जारी हैं।</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 11:04:15 +0530</pubDate>
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