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                <title>Cow Protection - दैनिक जागरण</title>
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                <title>इंदौर में ईद पर काजी की अपील, गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करें</title>
                                    <description><![CDATA[नमाजियों ने हाथ उठाकर जताया समर्थन, पानी बचाने और नशे से दूर रहने का संदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a17cb9ba773f/article-54386"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/indore-eid-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में ईद-उल-अजहा के मौके पर सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की एक बार फिर खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। सदर बाजार स्थित ईदगाह में ईद की नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने समाज को एकता, सद्भाव और जिम्मेदारी का संदेश दिया। उन्होंने खुले मंच से गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग रखी, जिसका वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्ण माहौल में ईद की नमाज अदा की गई और लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईदगाह में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग नमाज के लिए पहुंचने लगे थे। नमाज शुरू होने से पहले शहर काजी ने अपने संबोधन में सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि गाय को लेकर समाज में कई तरह की धारणाएं और विवाद देखने को मिलते हैं, लेकिन इसे देश की धरोहर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “गाय को हमसाया कौम के लोग बड़े एहतराम से देखते हैं। मुसलमानों पर यह इल्जाम लगाया जाता है कि वे गाय काटकर खाते हैं। अब लंबे समय से मांग उठ रही है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। हम मांग करते हैं कि गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए, ताकि उसके कटने पर पाबंदी लग सके।”</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">काजी की इस अपील के बाद ईदगाह में मौजूद नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन जताया। वहां मौजूद लोगों ने इसे सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान का संदेश बताया। कई लोगों का कहना था कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक माहौल बनाने में मदद करती है और विभिन्न समुदायों के बीच भरोसा मजबूत होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शहर काजी ने अपने संबोधन में पर्यावरण और जल संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने लोगों से बारिश के पानी को बचाने और उसे जमीन में उतारने की अपील की। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है और इसका समाधान केवल सरकार या प्रशासन के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा, “यह मत सोचिए कि सब सरकार करेगी। प्रशासन आता-जाता रहता है, लेकिन हमें और आपको भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।” काजी ने लोगों से घरों और मोहल्लों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी व्यवस्था अपनाने की सलाह दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं में बढ़ते नशे को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज समाज में सबसे ज्यादा समस्याएं नशे के कारण पैदा हो रही हैं। नशा युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रहा है और परिवारों को तोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि समाज को इस बुराई से मिलकर लड़ना होगा। काजी ने यह भी कहा कि कुछ लोग पैसे के लालच में नशे का कारोबार कर रहे हैं, जिससे नई पीढ़ी प्रभावित हो रही है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और अपने भविष्य पर ध्यान देने की अपील की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर की ईद इस बार एक और वजह से खास रही। यहां दशकों पुरानी परंपरा को एक बार फिर निभाया गया। पिछले 50 सालों से ईद के मौके पर एक हिंदू परिवार शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की जिम्मेदारी निभाता आ रहा है। इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। जब शहर काजी अपने घर से बाहर आए तो हिंदू परिवार के लोगों ने फूलों की माला पहनाकर उनका स्वागत किया और ईद की मुबारकबाद दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद विशेष रूप से सजाई गई बग्घी और कार के जरिए शहर काजी को सम्मानपूर्वक सदर बाजार ईदगाह तक लाया गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। लोगों ने इसे इंदौर की साझा संस्कृति और भाईचारे की मिसाल बताया। पिछले वर्षों में भी यह परंपरा चर्चा का विषय रही है। पिछली ईद पर शहर काजी को विंटेज कार से ईदगाह लाया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईद के मौके पर शहर में सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया। सभी प्रमुख चौराहों, ईदगाहों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया था। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए भी निगरानी रखी गई। अधिकारियों के मुताबिक पूरे शहर में त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से मुलाकात की और भाईचारे का संदेश दिया। बच्चों और युवाओं में खास उत्साह दिखाई दिया। बाजारों में भी दिनभर रौनक बनी रही। ईद के इस मौके पर इंदौर से जो तस्वीर सामने आई, उसने एक बार फिर यह दिखाया कि सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान की भावना आज भी लोगों के बीच मजबूत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 11:44:14 +0530</pubDate>
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                <title>रीवा में गोसेवकों का बड़ा प्रदर्शन, गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत हजारों हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन सौंपा, गोशालाओं की हालत सुधारने पर जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-demonstration-of-cowsevaks-in-rewa-demand-to-give-status/article-52237"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rewa-news-(14)-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>रीवा में सोमवार को गोसेवकों और संत समाज ने ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत संगठित होकर बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। दोपहर करीब 12 बजे शहर में रैली निकालते हुए गोसेवक तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान लगभग 5 हजार लोगों के हस्ताक्षर वाला पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजने की मांग की गई।</p>
<p>यह प्रदर्शन रीवा जिले में संत समाज और विभिन्न गोसेवा संगठनों द्वारा किया गया। आंदोलन का उद्देश्य गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना और गोवंश संरक्षण से जुड़े मुद्दों को सरकार तक पहुंचाना था। गोसेवकों ने शहर भ्रमण के बाद तहसील कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों को औपचारिक रूप से दर्ज कराया।</p>
<p>ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की थी। इसके साथ ही गोशालाओं की खराब स्थिति में सुधार, बेसहारा गोवंश के संरक्षण, चारा-पानी की पर्याप्त व्यवस्था और बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।</p>
<p><strong>संत समाज और गोसेवकों की राय</strong><br />अभियान से जुड़े देवेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा है। उन्होंने कहा कि देशभर में इस मांग को लेकर जनसमर्थन तेजी से बढ़ रहा है और सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।</p>
<p>कुसुम सिंह ने गोशालाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि कई स्थानों पर व्यवस्था बेहद कमजोर है। उन्होंने कहा कि बेसहारा गोवंश सड़कों पर भटक रहा है, जिससे दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में सरकार को ठोस नीति बनाकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए।</p>
<p>बृजेंद्र पांडेय ने कहा कि गोसेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर कर इस अभियान का समर्थन किया है, जो जनभावनाओं को दर्शाता है।</p>
<p><strong>प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन</strong><br />गोसेवकों ने प्रशासन से अपील की कि ज्ञापन को गंभीरता से लिया जाए और इसे उच्च स्तर तक भेजा जाए। उन्होंने मांग की कि इस विषय पर जल्द निर्णय लेकर गोवंश संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।फिलहाल प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर आगे कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जबकि गोसेवक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:54:07 +0530</pubDate>
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