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                <title>Social Movement - दैनिक जागरण</title>
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                <title>जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन जारी, वांगचुक की तबीयत बिगड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर 11वें दिन धरना, भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की हालत बिगड़ी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/cjp-protest-continues-at-jantar-mantar-wangchuks-health-deteriorated/article-57487"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cjp-protest-jantar-mantar.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन मंगलवार को लगातार 11वें दिन भी जारी रहा। नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे इस प्रदर्शन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कार्यकर्ता और छात्र संगठन शामिल हैं। धरना स्थल पर माहौल लगातार तनावपूर्ण लेकिन शांतिपूर्ण बना हुआ है, जहां प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इसी बीच आंदोलन का एक बड़ा चेहरा बने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत भूख हड़ताल के दौरान बिगड़ने की जानकारी सामने आई है। बताया गया कि उनका ब्लड शुगर स्तर गिरकर 66 तक पहुंच गया, जो सामान्य से कम माना जाता है। वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं। मेडिकल टीम की निगरानी में उनका ब्लड प्रेशर 117/60, ऑक्सीजन स्तर 96 और पल्स रेट 92 दर्ज किया गया है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं में उनकी तबीयत को लेकर चिंता का माहौल है।</p>
<p>CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है और समर्थकों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई लोगों को पहचान पत्र नहीं होने के कारण अंदर प्रवेश से रोका गया, जिससे समर्थकों में नाराजगी बढ़ी है। हालांकि मौके पर स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहा है। इस बीच AISA के छह छात्र नेता भी आंदोलन में शामिल हुए हैं और उन्होंने भूख हड़ताल का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को दोहराया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर चल रहा है। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि राजस्थान के एक पैरामेडिकल परीक्षा का पेपर भी जयपुर में लीक हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या व्यापक स्तर पर मौजूद है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। वहीं प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनकी मांगें पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक हैं और वे किसी भी तरह की हिंसा के खिलाफ हैं।</p>
<p>जानकारी के अनुसार सोनम वांगचुक इससे पहले भी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं और कई दिनों तक जेल में भी रहे हैं। उनके समर्थन में देशभर से लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी जुड़ रहे हैं। CJP का यह आंदोलन 20 जून से शुरू हुआ था और तब से लगातार विभिन्न शहरों में इसका विस्तार हो रहा है। संगठन का दावा है कि लाखों लोग उनकी मांगों का समर्थन कर रहे हैं और यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज किया जाएगा। जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है और आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि उनकी मांगों पर जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 11:03:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बिलासपुर में अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम बनाने की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[नागरिक सुरक्षा मंच सहित कई संगठनों का धरना, विकास में पिछड़ेपन का आरोप, चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/demand-to-make-arpa-par-area-a-separate-municipal-corporation/article-57043"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर में अरपा पार सरकंडा क्षेत्र को अलग नगर निगम का दर्जा देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आई। गुरुवार को नागरिक सुरक्षा मंच सहित कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अरपा पार क्षेत्र की आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद विकास और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। इसी असंतोष के बीच बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अलग नगर निगम बनाने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित तिवारी ने कहा कि यह मांग पिछले तीन दशकों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका आरोप था कि हर चुनाव के समय स्थानीय स्तर पर वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में उन पर अमल नहीं होता। उन्होंने 2023 विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय स्थानीय विधायक ने अरपा पार क्षेत्र को प्राथमिकता देने की बात कही थी, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अब जनता “जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा” जैसे अभियानों के जरिए अपनी आवाज को और मजबूत करेगी। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि सरकंडा और अरपा पार क्षेत्र में तेजी से शहरीकरण हुआ है, लेकिन इसके अनुपात में विकास कार्य नहीं हो पाए हैं। कई लोगों का कहना था कि सड़क, जल आपूर्ति, सफाई व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं में लगातार कमी महसूस की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी इस क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भीड़ में मौजूद लोगों का कहना था कि जब तक अलग नगर निगम का गठन नहीं होता, तब तक स्थानीय समस्याओं का समाधान प्रभावी तरीके से नहीं हो पाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आंदोलन को लेकर मंच के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत 10 जुलाई को मानव श्रृंखला बनाने की घोषणा की गई है। इसके बाद दूसरे चरण में मशाल जुलूस निकाला जाएगा और यदि मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो 15 अगस्त से आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाया जा रहा है क्योंकि वर्षों से लगातार मांग के बावजूद कोई समाधान सामने नहीं आया है। उनका आरोप है कि क्षेत्र की उपेक्षा के कारण लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। धरना प्रदर्शन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नेता मौजूद रहे, जिनमें श्याम मोहन दुबे, गौरव तिवारी, देवेंद्र मिश्रा, दिलीप पाटिल, रामकुमार यादव, अमित सोनकर, अजय कापसे, कमल साहू और अन्य लोग शामिल थे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम का दर्जा दिया जाए ताकि प्रशासनिक कामकाज में तेजी आए और स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में दूर-दराज के क्षेत्रों तक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाता, जिससे आम जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि अरपा पार क्षेत्र में कुल 24 वार्ड शामिल हैं, जो वर्तमान नगर निगम व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी आबादी और क्षेत्रफल के बावजूद अलग प्रशासनिक इकाई नहीं होने से विकास कार्यों में बाधाएं आती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि अलग नगर निगम का गठन होता है तो योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी और तेज होगा। साथ ही नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:19:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रीवा में गोसेवकों का बड़ा प्रदर्शन, गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत हजारों हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन सौंपा, गोशालाओं की हालत सुधारने पर जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-demonstration-of-cowsevaks-in-rewa-demand-to-give-status/article-52237"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rewa-news-(14)-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>रीवा में सोमवार को गोसेवकों और संत समाज ने ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत संगठित होकर बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। दोपहर करीब 12 बजे शहर में रैली निकालते हुए गोसेवक तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान लगभग 5 हजार लोगों के हस्ताक्षर वाला पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजने की मांग की गई।</p>
<p>यह प्रदर्शन रीवा जिले में संत समाज और विभिन्न गोसेवा संगठनों द्वारा किया गया। आंदोलन का उद्देश्य गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना और गोवंश संरक्षण से जुड़े मुद्दों को सरकार तक पहुंचाना था। गोसेवकों ने शहर भ्रमण के बाद तहसील कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों को औपचारिक रूप से दर्ज कराया।</p>
<p>ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की थी। इसके साथ ही गोशालाओं की खराब स्थिति में सुधार, बेसहारा गोवंश के संरक्षण, चारा-पानी की पर्याप्त व्यवस्था और बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।</p>
<p><strong>संत समाज और गोसेवकों की राय</strong><br />अभियान से जुड़े देवेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा है। उन्होंने कहा कि देशभर में इस मांग को लेकर जनसमर्थन तेजी से बढ़ रहा है और सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।</p>
<p>कुसुम सिंह ने गोशालाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि कई स्थानों पर व्यवस्था बेहद कमजोर है। उन्होंने कहा कि बेसहारा गोवंश सड़कों पर भटक रहा है, जिससे दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में सरकार को ठोस नीति बनाकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए।</p>
<p>बृजेंद्र पांडेय ने कहा कि गोसेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर कर इस अभियान का समर्थन किया है, जो जनभावनाओं को दर्शाता है।</p>
<p><strong>प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन</strong><br />गोसेवकों ने प्रशासन से अपील की कि ज्ञापन को गंभीरता से लिया जाए और इसे उच्च स्तर तक भेजा जाए। उन्होंने मांग की कि इस विषय पर जल्द निर्णय लेकर गोवंश संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।फिलहाल प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर आगे कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जबकि गोसेवक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:54:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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