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                <title>Social Reform - दैनिक जागरण</title>
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                <title>मध्य प्रदेश में यूसीसी ड्राफ्ट अंतिम चरण में, लिव-इन पंजीकरण अनिवार्य प्रस्ताव पर विवाद तेज</title>
                                    <description><![CDATA[विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में समान कानून लागू करने की तैयारी, लिव-इन संबंधों और बच्चों के अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस गर्म]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/controversy-intensifies-over-mandatory-live-in-registration-proposal-in-ucc-draft/article-56256"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/uniform-civil-code.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा दिए हैं। प्रस्तावित ड्राफ्ट अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान पारिवारिक कानून व्यवस्था लागू करना है, जिससे विवाह, तलाक, भरण-पोषण, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक स्पष्ट और समान कानूनी ढांचा तैयार किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति ने इस ड्राफ्ट पर व्यापक स्तर पर कार्य किया है। सात सदस्यीय इस समिति ने प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद स्थापित किया है। इसके साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी आम जनता से सुझाव लिए जा रहे हैं, जिसमें लोगों से सरल प्रश्नों के माध्यम से उनकी राय प्राप्त की जा रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तावित कानून व्यापक जनभागीदारी के आधार पर तैयार हो।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित यूसीसी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को सभी धर्मों के लिए समान बनाने की दिशा में प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के पर्सनल लॉ अलग-अलग हैं, जिसके कारण कई बार कानूनी प्रक्रियाओं में असमानता और जटिलता देखने को मिलती है। सरकार का मानना है कि एक समान कानून लागू होने से इन जटिलताओं में कमी आएगी और न्याय व्यवस्था अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी ड्राफ्ट में विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत ऐसे संबंधों में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण या घोषणा को आवश्यक बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे संबंधों में रहने वाले व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। यदि ऐसे संबंधों से बच्चे पैदा होते हैं, तो उन्हें संपत्ति और भरण-पोषण से जुड़े सभी कानूनी अधिकार प्रदान करने का प्रावधान प्रस्तावित है, जिससे उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का यह भी कहना है कि यह कानून पूरी तरह से जेंडर समानता पर आधारित होगा। पुरुष और महिला दोनों को पारिवारिक कानूनों में समान अधिकार और जिम्मेदारियां दी जाएंगी। संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार और विवाह संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार का भेदभाव समाप्त करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही तलाक की प्रक्रिया को भी सभी धर्मों के लिए एक समान कानूनी ढांचे के तहत लाने की योजना है, जिससे सभी नागरिकों को एक समान प्रक्रिया का लाभ मिल सके। प्रस्तावित यूसीसी को संविधान के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, जिसमें धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार का मानना है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत समानता का अधिकार और अनुच्छेद 44 के तहत समान नागरिक संहिता का मार्गदर्शन इस कानून का आधार है। इसी कारण इसे एक आधुनिक और सुधारात्मक कानून के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति द्वारा तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट में यह भी ध्यान रखा गया है कि समाज के विभिन्न वर्गों की संवेदनशीलताओं का सम्मान किया जाए और किसी भी प्रकार की असमानता या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। इसी कारण व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और आम नागरिकों की राय शामिल की गई है। राज्य सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से नागरिकों को एक समान और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था प्राप्त होगी, जिससे पारिवारिक विवादों में कमी आने की संभावना है। साथ ही न्याय प्रणाली पर बोझ कम होगा और मामलों का निपटारा अधिक तेजी से हो सकेगा। यह पहल समाज में एकरूपता और समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि सरकार इस दिशा में पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ रही है और आगामी विधानसभा सत्र में इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सुधारात्मक कदम समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में एक अधिक संगठित और समान कानूनी व्यवस्था स्थापित हो सके। मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और यह प्रस्ताव राज्य में एक बड़े कानूनी और सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
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</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:37:11 +0530</pubDate>
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                <title>उज्जैन में दहेज के खिलाफ मिसाल, सगाई में दूल्हे पक्ष ने लौटाए 25 लाख नकद और 15 तोला सोना</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन दहेज प्रथा के खिलाफ सगाई में दूल्हे पक्ष ने 25 लाख नकद और 15 तोला सोना लौटाया। बड़नगर की यह घटना सामाजिक मिसाल बनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/we-want-a-daughter-in-law-not-dowry-in-ujjain-the-grooms/article-52262"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/ujjain-dowry-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">उज्जैन से आई यह स्टोरी सिर्फ एक सगाई की रस्म तक सीमित नहीं रही, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ सामाजिक संदेश बन गई। बड़नगर के समीप आयोजित एक सगाई समारोह में दूल्हे और उसके परिवार ने लड़की पक्ष की ओर से दिए जा रहे लाखों रुपये और सोने के आभूषण लेने से साफ इनकार कर दिया। समारोह में मौजूद लोगों के सामने दूल्हे के पिता ने कहा कि उन्हें दहेज नहीं, बहू चाहिए। दहेज प्रथा के खिलाफ यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब शादी-ब्याह में बढ़ते खर्च और सामाजिक दबाव पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उज्जैन के इस परिवार के फैसले की चर्चा अब स्थानीय समाज से निकलकर व्यापक स्तर पर हो रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र के बंगरेड गांव से जुड़ा यह मामला रविवार को सामने आया। बड़नगर के पास स्थित लोटस रिजॉर्ट में जितेंद्र सिंह राजावत के बेटे आदर्श दीप राजावत की सगाई देपालपुर के तामलपुर निवासी महेंद्र सिंह पवार की बेटी बिंदिया कुमारी से हो रही थी। सगाई की रस्म के दौरान जब लड़की के पिता टीका करने मंच पर पहुंचे, तब वे अपने साथ करीब 25 लाख रुपये नकद और लगभग 15 तोला सोने के आभूषण लेकर आए थे। सूत्रों के मुताबिक, यह पूरी सामग्री सगाई की पारंपरिक रस्म के तहत दूल्हे पक्ष को दी जानी थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">हालांकि, मंच पर जैसे ही यह सामग्री दूल्हे आदर्श दीप राजावत को देने की कोशिश की गई, उन्होंने और उनके पिता ने इसे लेने से मना कर दिया। परिवार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि दहेज लेना सामाजिक बुराई है और वे इस प्रथा का समर्थन नहीं करते। दूल्हे पक्ष ने सिर्फ सगाई की अंगूठी सम्मान स्वरूप स्वीकार की और उसी अंगूठी के आदान-प्रदान के साथ रस्म पूरी की गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सगाई में बड़ा संदेश</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">समारोह में मौजूद लोगों के अनुसार, दूल्हे पक्ष के इस फैसले ने कुछ क्षणों के लिए माहौल को भावुक कर दिया। पहले इसे औपचारिक संकोच माना गया, लेकिन जब परिवार ने सार्वजनिक रूप से दहेज के विरोध की बात दोहराई, तो कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ इस फैसले का स्वागत किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रिपोर्ट्स के अनुसार, दूल्हे के पिता जितेंद्र सिंह राजावत ने कहा कि शादी रिश्तों का बंधन है, लेन-देन का सौदा नहीं। उन्होंने समाज से अपील की कि दहेज जैसी कुप्रथा को खत्म करने के लिए परिवारों को आगे आना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">जितेंद्र सिंह राजावत क्षत्रिय महासभा के जिला अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में उनके इस सार्वजनिक रुख को सामाजिक स्तर पर और अधिक महत्व के साथ देखा जा रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे, जिनके सामने उन्होंने साफ कहा कि हर परिवार आर्थिक रूप से इतना सक्षम नहीं होता कि शादी में लाखों रुपये और जेवर दे सके। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के सार्वजनिक संदेश सामाजिक व्यवहार में बदलाव की दिशा तय करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सामाजिक असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">उज्जैन में दहेज प्रथा के खिलाफ यह कदम अब चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामाजिक समारोहों में दहेज विरोध की बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं, लेकिन सार्वजनिक मंच पर लाखों रुपये और सोना लौटाना दुर्लभ है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सामाजिक जानकार मानते हैं कि ऐसे उदाहरण दहेज विरोधी कानूनों से आगे बढ़कर सामाजिक चेतना का काम करते हैं। सरकारी अपडेट और सामाजिक अभियानों के बावजूद दहेज प्रथा अब भी कई इलाकों में दबाव का कारण बनी हुई है। ऐसे में उज्जैन की यह घटना उन परिवारों के लिए उदाहरण बन सकती है, जो सामाजिक प्रतिष्ठा के दबाव में अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:32:16 +0530</pubDate>
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