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                <title>Biodiversity - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Biodiversity RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मासूम आंखों वाला फिलीपींस टार्सियर क्यों माना जाता है दुनिया का सबसे नाजुक जीव?</title>
                                    <description><![CDATA[बड़ी-बड़ी आंखों और मासूम चेहरे वाला फिलीपींस टार्सियर जितना आकर्षक दिखता है, उतना ही संवेदनशील भी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अत्यधिक तनाव और कैद की स्थिति में यह खुद को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/why-is-the-innocent-eyed-philippines-tarsier-considered-the-most-delicate/article-58314"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/philippine-tarsier.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दुनिया में ऐसे कई जीव हैं, जो अपनी अनोखी बनावट और व्यवहार के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। इन्हीं में से एक है फिलीपींस टार्सियर (Philippine Tarsier)। यह नन्हा प्राइमेट अपनी बड़ी-बड़ी गोल आंखों, छोटे शरीर और मासूम चेहरे के कारण दुनिया के सबसे प्यारे जीवों में गिना जाता है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं और पहली नजर में इसे देखने वाला लगभग हर व्यक्ति इसकी मासूमियत का दीवाना हो जाता है। लेकिन इस छोटे से जीव की जिंदगी जितनी खूबसूरत दिखती है, उतनी ही नाजुक भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलीपींस टार्सियर मुख्य रूप से फिलीपींस के बोहोल, समर, लेयटे और मिंदानाओ जैसे द्वीपों के घने जंगलों में पाया जाता है। इसका शरीर बेहद छोटा होता है और इसकी लंबाई लगभग 8 से 16 सेंटीमीटर तक होती है। हालांकि इसकी पूंछ शरीर से भी लंबी हो सकती है, जिससे यह पेड़ों पर आसानी से संतुलन बना पाता है। इसका वजन सामान्यतः 100 से 150 ग्राम के बीच होता है, लेकिन अपनी फुर्ती और छलांग लगाने की क्षमता के कारण यह जंगल में आसानी से शिकार कर लेता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस जीव की सबसे खास पहचान इसकी विशाल आंखें हैं। किसी भी स्तनधारी की तुलना में उसके शरीर के अनुपात में टार्सियर की आंखें सबसे बड़ी मानी जाती हैं। यदि इंसानों में भी ऐसा अनुपात होता तो हमारी आंखों का आकार लगभग एक संतरे जितना होता। इसकी आंखें इतनी बड़ी होती हैं कि वे अपनी आंखों को घुमा नहीं सकते। इस कमी को पूरा करने के लिए टार्सियर अपना सिर लगभग 180 डिग्री तक दोनों दिशाओं में घुमा सकता है, जिससे वह आसपास की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखता है। टार्सियर पूरी तरह निशाचर जीव है। दिन के समय यह पेड़ों की शाखाओं और घनी पत्तियों के बीच आराम करता है, जबकि रात में भोजन की तलाश में निकलता है। इसका भोजन मुख्य रूप से कीड़े-मकोड़े, टिड्डे, झींगुर, मकड़ियां, छिपकलियां और छोटे पक्षी होते हैं। यह अपने लंबे पैरों की मदद से एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कई मीटर लंबी छलांग लगा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया और कई वेबसाइटों पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि टार्सियर हल्का सा शोर सुनते ही "आत्महत्या" कर लेता है। हालांकि वैज्ञानिक इस दावे को पूरी तरह सही नहीं मानते। विशेषज्ञों के अनुसार, यह जीव अत्यधिक संवेदनशील होता है और तेज आवाज, लगातार फ्लैश लाइट, भीड़, बार-बार छूने या कैद जैसी परिस्थितियों में गंभीर तनाव का शिकार हो सकता है। ऐसे तनावपूर्ण हालात में कुछ टार्सियर खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, सिर को बार-बार किसी कठोर सतह से टकराते हैं या अत्यधिक घबराहट के कारण उनकी मौत भी हो सकती है। इसलिए यह कहना कि हर तेज आवाज पर वह आत्महत्या कर लेता है, वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। सही बात यह है कि अत्यधिक तनाव और अनुचित वातावरण उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसी वजह से वन्यजीव विशेषज्ञ लोगों से अपील करते हैं कि यदि जंगल में कभी टार्सियर दिखाई दे तो उसके पास शोर न करें, फ्लैश कैमरे का इस्तेमाल न करें और उसे छूने की कोशिश भी न करें। कई पर्यटक केवल तस्वीर लेने के लिए उसके बेहद करीब पहुंच जाते हैं, जिससे यह छोटा जीव डर जाता है और उसका प्राकृतिक व्यवहार प्रभावित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलीपींस सरकार ने टार्सियर के संरक्षण के लिए कई विशेष कदम उठाए हैं। बोहोल द्वीप पर टार्सियर संरक्षण केंद्र बनाए गए हैं, जहां पर्यटकों के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। यहां तेज आवाज करना, फ्लैश फोटोग्राफी करना और जानवर को छूना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इन नियमों का उद्देश्य टार्सियर को तनाव से बचाना और उसके प्राकृतिक आवास की रक्षा करना है। टार्सियर की संख्या धीरे-धीरे घट रही है। इसके पीछे जंगलों की कटाई, अवैध शिकार, पर्यटन का बढ़ता दबाव और प्राकृतिक आवास का नष्ट होना प्रमुख कारण हैं। यही वजह है कि इसके संरक्षण पर लगातार जोर दिया जा रहा है। यदि समय रहते इसके आवास और जीवनशैली की रक्षा नहीं की गई, तो भविष्य में यह दुर्लभ जीव और अधिक संकट में पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">टार्सियर केवल एक आकर्षक जीव नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कीड़ों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करता है और जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में भूमिका निभाता है। वैज्ञानिक भी इसकी अनोखी शारीरिक संरचना और व्यवहार का लगातार अध्ययन कर रहे हैं, ताकि इसके बारे में और अधिक जानकारी जुटाई जा सके। फिलीपींस टार्सियर हमें यह भी सिखाता है कि प्रकृति के सबसे छोटे और मासूम दिखने वाले जीव भी बेहद संवेदनशील होते हैं। उनकी सुरक्षा केवल कानूनों से नहीं, बल्कि लोगों की जागरूकता और जिम्मेदार व्यवहार से संभव है। यदि हम वन्यजीवों का सम्मान करें, उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखें और उन्हें अनावश्यक तनाव से बचाएं, तो आने वाली पीढ़ियां भी इस अद्भुत और प्यारे जीव को उसकी प्राकृतिक दुनिया में देख सकेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 16:38:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कूनो नेशनल पार्क में दिखी दुर्लभ कैराकल बिल्ली, दशकों बाद वापसी से वन्यजीव विशेषज्ञ उत्साहित</title>
                                    <description><![CDATA[श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण के दौरान कैद हुई दुर्लभ कैराकल, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/wildlife-experts-excited-by-the-return-of-rare-caracal-cat/article-55077"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kuno-national-park.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पर्यावरण प्रेमियों, वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षण से जुड़े अधिकारियों को उत्साहित कर दिया है। वर्षों बाद दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल की मौजूदगी कूनो में दर्ज की गई है। कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण के दौरान कैद हुई इस दुर्लभ प्रजाति की तस्वीरों ने यह संकेत दिया है कि कूनो का पारिस्थितिकी तंत्र लगातार मजबूत हो रहा है और यहां वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण विकसित हो रहा है। लंबे समय से इस प्रजाति के दर्शन न होने के कारण इसे लेकर चिंताएं जताई जाती रही थीं, लेकिन अब इसकी वापसी ने संरक्षण प्रयासों को नई उम्मीद दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामने आई इस जानकारी को राज्य सरकार ने भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए खुशी व्यक्त की और कहा कि प्रकृति ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन के प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कूनो नेशनल पार्क में कैमरा ट्रैप के दौरान कैराकल का दिखाई देना कई वर्षों बाद इस क्षेत्र में उसकी वापसी का संकेत है। मुख्यमंत्री के अनुसार यह केवल एक वन्यजीव की मौजूदगी नहीं बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के बेहतर होने का प्रमाण भी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कैराकल एक बेहद दुर्लभ और शर्मीली जंगली बिल्ली मानी जाती है। इसकी पहचान इसके लंबे पैरों, तेज शिकार क्षमता और कानों के ऊपर मौजूद काले बालों के गुच्छों से होती है। भारत में कभी यह प्रजाति कई हिस्सों में पाई जाती थी, लेकिन बदलते पर्यावरण, प्राकृतिक आवास के नुकसान और मानवीय हस्तक्षेप के कारण इसकी संख्या लगातार घटती चली गई। यही वजह है कि वन्यजीव विशेषज्ञ लंबे समय से इसके संरक्षण को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। कूनो में इसकी मौजूदगी दर्ज होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि यहां का जंगल और घासभूमि क्षेत्र इस प्रजाति के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण नियमित निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा था। इसी दौरान कैराकल की तस्वीरें रिकॉर्ड हुईं। प्रारंभिक अध्ययन के अनुसार यह क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से मौजूद वन्यजीव गतिविधियों का हिस्सा हो सकती है। हालांकि इसके व्यवहार, संख्या और आवागमन के बारे में अधिक जानकारी जुटाने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी क्षेत्र में कैराकल जैसी संवेदनशील प्रजाति दिखाई देती है तो यह उस इलाके के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का सकारात्मक संकेत माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में कूनो नेशनल पार्क लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। विशेष रूप से प्रोजेक्ट चीता के तहत अफ्रीकी चीतों को यहां लाए जाने के बाद इस पार्क की पहचान और बढ़ी है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण प्रयोग के रूप में देखा गया। अब कैराकल की मौजूदगी ने इस धारणा को और मजबूत किया है कि कूनो केवल चीतों के पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई अन्य वन्यजीव प्रजातियों के लिए भी सुरक्षित आवास के रूप में विकसित हो रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रोजेक्ट चीता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का प्रभाव केवल चीतों तक सीमित नहीं है बल्कि इससे पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ मिल रहा है। बेहतर संरक्षण, वन प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था के कारण विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार हुआ है। इससे जैव विविधता को भी मजबूती मिली है। किसी दुर्लभ प्रजाति की वापसी केवल संयोग नहीं होती। इसके पीछे वर्षों की संरक्षण नीति, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास शामिल होते हैं। कूनो में कैराकल का दिखाई देना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भविष्य में और भी दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण को लेकर नई संभावनाएं खुल सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कूनो नेशनल पार्क में कैराकल की मौजूदगी ने वन्यजीव जगत में नई चर्चा शुरू कर दी है। आने वाले समय में विशेषज्ञ इस प्रजाति की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और यह समझने का प्रयास करेंगे कि इसका आवास कितना विस्तृत है। लेकिन इतना तय है कि दशकों बाद मिली यह झलक मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संकेत बनकर सामने आई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:44:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल में आज बड़े आयोजन, सीएम की बैठकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर नजर, जानें और कहां-क्या होगा खास</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में आज सांस्कृतिक आयोजन, IBCA प्री-समिट, सीएम मोहन यादव की समीक्षा बैठक और व्यापारी कल्याण बोर्ड चर्चा में रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/keep-an-eye-on-the-big-events-cms-meetings-and/article-53933"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mohan-yadav-bhopal-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोपाल में गुरुवार का दिन काफी व्यस्त रहने वाला है। प्रशासनिक गतिविधियां</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक कार्यक्रम और कई बड़े सरकारी इवेंट्स पूरे शहर में हो रहे हैं। सुबह से ही शहर के विभिन्न हिस्सों में तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं कला और संस्कृति से जुड़े आयोजन भी लोगों को अपनी ओर खींचेंगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कंटेम्परेरी डांस वर्कशॉप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुभाष एक्सीलेंस स्कूल में सुबह </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">8<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे से कंटेम्परेरी डांस वर्कशॉप होने जा रही है। इस बार इसकी थीम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एमबीबीएस</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">रखी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ युवा प्रतिभागी आधुनिक नृत्य शैली का प्रदर्शन करेंगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">माह का प्रदर्श</span>'</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दोपहर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">12<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे मानव संग्रहालय में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">माह का प्रदर्श</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">छाया चर्मपुतलीः राम</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदर्शनी शुरू होगी। यह प्रदर्शनी पारंपरिक छाया कठपुतली कला पर आधारित है और दर्शकों को आकर्षित कर रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">73<span lang="hi" xml:lang="hi"> शलाका चित्र प्रदर्शनी</span></span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनजातीय संग्रहालय की लिखन्दरा दीर्घा में </span>73<span lang="hi" xml:lang="hi"> शलाका चित्र प्रदर्शनी भी लगेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विभिन्न कलाकृतियों का प्रदर्शन होगा। इससे कला प्रेमियों और विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा होने की संभावना है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">IBCA) <span lang="hi" xml:lang="hi">के प्री-समिट इवेंट का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम भारतीय वानिकी प्रबंधन संस्थान (</span>IIFM) <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑडिटोरियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल में हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इसमें जैव विविधता संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिग कैट संवर्धन और खासतौर पर चीता संरक्षण पर चर्चा होगी। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक डिजिटल पोर्टल लॉन्च करने और संरक्षण पर आधारित फिल्मों के प्रदर्शन की भी योजना है। सरकार का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से लोगों में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह और प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार भी मौजूद रहेंगे। आयोजन स्थल पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए गए हैं और सुबह से ही प्रशासनिक अमला तैयारियों में जुटा हुआ है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मैराथन समीक्षा बैठक का दूसरा दिन भी जारी रहेगा। बुधवार को छह विभागों की समीक्षा के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खाद्य और आयुष विभागों की प्रगति पर चर्चा होगी। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री अधिकारियों से विभागीय योजनाओं की स्थिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लक्ष्य पूर्ति और भविष्य की कार्ययोजना पर सीधा संवाद कर रहे हैं। मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों की गतिविधियां सुबह से बढ़ गई हैं। इसी बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य सरकार ने व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन किया है। मुख्यमंत्री स्वयं इसके अध्यक्ष होंगे। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बोर्ड का उद्देश्य व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार को बढ़ावा देना और प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मजबूत करना है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जागरण इवेन्ट</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 09:43:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>एमपी में 150 साल बाद लौटी जंगली भैंसें, सीएम मोहन यादव ने कान्हा में छोड़ी 4 भैंसें</title>
                                    <description><![CDATA[कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों की वापसी, एमपी सरकार की बड़ी पहल। असम से लाए गए 4 भैंसे, इकोसिस्टम को मिलेगा लाभ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/wild-buffaloes-returned-to-mp-after-150-years-cm-mohan/article-52276"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/kanha-national-park-wild-buffalo.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले स्थित कान्हा क्षेत्र में करीब डेढ़ सदी बाद जंगली भैंसों की वापसी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुपखार रेंज में चार जंगली भैंसों को बाड़े में छोड़कर पुनर्स्थापन योजना की शुरुआत की। ये भैंसे असम के काजीरंगा क्षेत्र से लगभग 2,000 किलोमीटर की दूरी तय कर यहां लाई गई हैं। इन भैंसों में तीन मादा और एक नर किशोर शावक शामिल है, जिन्हें विशेष निगरानी में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री सुबह करीब 9:15 बजे सुपखार पहुंचे और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 9:30 बजे औपचारिक रूप से भैंसों को छोड़ा गया। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">जानकारी के मुताबिक, 1960 और 1970 के दशक तक इस क्षेत्र में जंगली भैंसों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, लेकिन बाद में वे धीरे-धीरे समाप्त हो गए। अब लगभग 150 साल बाद उनकी वापसी को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से ऐतिहासिक माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यह परियोजना ‘कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसा पुनर्स्थापन योजना</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;" xml:lang="en-us">’</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">के तहत शुरू की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से इकोसिस्टम की एक महत्वपूर्ण कड़ी फिर से जुड़ सकेगी, जिससे प्राकृतिक संतुलन बेहतर होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की पहचान को भी नया आयाम देगी। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में कान्हा में गैंडे लाने की भी तैयारी चल रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">केंद्र सरकार के सहयोग से विलुप्तप्राय प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे मध्य प्रदेश को ‘टाइगर स्टेट</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;" xml:lang="en-us">’</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">के साथ-साथ ‘व्हाइट बफेलो स्टेट</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;" xml:lang="en-us">’</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">के रूप में पहचान दिलाने की कोशिश है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस परियोजना को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि इससे न केवल वन्यजीवों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि प्राकृतिक आवास भी मजबूत होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:16:23 +0530</pubDate>
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