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                <title>Infrastructure - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Infrastructure RSS Feed</description>
                
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                <title>धंसी सड़क की जांच में खुली बड़ी गड़बड़ी, दो इंजीनियर निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[कबीरधाम में पीएम जनमन योजना की सड़क की गुणवत्ता जांच में तकनीकी खामियां सामने आईं, भारी वाहनों के संचालन और मॉनिटरिंग में लापरवाही को माना गया नुकसान की बड़ी वजह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-flaw-revealed-in-investigation-of-sunken-road-two-engineers/article-58382"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/surajpur-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनाई गई सड़क के धंसने की शिकायत आखिरकार सही साबित हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के दौरान सड़क की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी खामियां सामने आईं। इसके बाद निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दलदली मेन रोड से खारिया होते हुए अगरी तक बनाई गई इस सड़क के कई हिस्सों में धंसने और क्षतिग्रस्त होने की शिकायत स्थानीय लोगों द्वारा लगातार की जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति का निरीक्षण किया। सड़क की गुणवत्ता का सही आकलन करने के लिए कोर कटिंग सहित विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए गए। जांच में पाया गया कि सड़क का अधिकांश निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप था, लेकिन कुछ तकनीकी कमियों और क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों के संचालन के कारण सड़क को नुकसान पहुंचा।</p>
<p style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान सामने आया कि जिस सड़क पर केवल 10 से 12 टन क्षमता तक के वाहनों के संचालन की अनुमति थी, वहां 60 से 70 टन तक वजन वाले रेत परिवहन करने वाले भारी वाहनों का लगातार आवागमन हो रहा था। सड़क की डिजाइन इतनी अधिक भार क्षमता के लिए तैयार नहीं की गई थी। भारी वाहनों के दबाव के कारण सड़क की सतह और अंदरूनी संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे सड़क धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई। तकनीकी जांच में यह भी पाया गया कि सड़क के किनारों यानी शोल्डर का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार नहीं किया गया था। कॉम्पैक्शन परीक्षण में कई स्थानों पर शोल्डर की मजबूती तय मानकों से कम मिली। निर्धारित 100 प्रतिशत कॉम्पैक्शन के मुकाबले कुछ हिस्सों में यह केवल 95 प्रतिशत और एक स्थान पर 94.68 प्रतिशत पाया गया। इसके अलावा एक पुलिया के एप्रोच क्षेत्र में बैकफिलिंग का कार्य भी मानकों के अनुरूप नहीं मिला। बारिश के दौरान इसी हिस्से से पानी सड़क की निचली परत तक पहुंच गया, जिससे सड़क की संरचना कमजोर हो गई और कई स्थानों पर धंसाव की स्थिति बन गई।</p>
<p style="text-align:justify;">निरीक्षण के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में लापरवाही बरतने के आरोप में सहायक अभियंता सौरभ देशमुख और उप अभियंता जे. रितेश नायडू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं कार्यपालन अभियंता (ईई) संतोष कुमार ठाकुर के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उनके निलंबन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क के जिन हिस्सों में नुकसान हुआ है, उन्हें पूरी तरह हटाकर दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए। साथ ही पूरी सड़क के शोल्डर को भी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:14:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मालवा को विकास की नई रफ्तार, 5,017 करोड़ की उज्जैन-जावरा फोरलेन परियोजना का होगा भूमि पूजन</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे 98.73 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन का शुभारंभ, 35 लाख लोगों और 62 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को भी मिलेगी मजबूती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-pace-of-development-for-malwa-bhoomi-pujan-of-5017/article-58373"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-jaora-greenfield-fourlane.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में आधारभूत संरचना के विकास को नई गति देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को 5,017 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क परियोजना का भूमि पूजन करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद मालवा क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। साथ ही व्यापार, उद्योग, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को भी इसका व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। करीब 98.73 किलोमीटर लंबी यह आधुनिक फोरलेन सड़क उज्जैन को सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगी। इससे प्रदेश के पश्चिमी हिस्से की कनेक्टिविटी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मालवा क्षेत्र के आर्थिक विकास और निवेश को नई दिशा देने वाली आधारभूत परियोजना साबित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सड़क का निर्माण मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) द्वारा किया जाएगा। परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए दो वर्ष का लक्ष्य तय किया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लोगों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। सड़क के दोनों ओर आधुनिक यातायात सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे भविष्य की बढ़ती ट्रैफिक जरूरतों को भी आसानी से पूरा किया जा सके। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना उज्जैन दक्षिण, घट्टिया, नागदा-खाचरौद, आलोट और जावरा विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इसके दायरे में आने वाले लगभग 62 गांवों के लोगों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध होगी। अनुमान है कि करीब 35 लाख नागरिक इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क मिलने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस परियोजना को प्रदेश के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सड़क सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और तेज यातायात सुविधा उपलब्ध होगी। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी और उज्जैन की पहुंच पहले से अधिक आसान हो जाएगी। परियोजना के अंतर्गत केवल फोरलेन सड़क का निर्माण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग सुविधाओं का भी समावेश होगा। इसमें तीन रेल ओवरब्रिज, नौ बड़े पुल, 26 मध्यम पुल तथा 417 पुलियों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा जावरा बायपास पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे इंटरचेंज से महू-नीमच फोरलेन तक दोनों ओर सर्विस रोड विकसित की जाएगी। इससे स्थानीय यातायात और लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही अलग-अलग सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">नई सड़क बनने से किसानों को सबसे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचाने में समय कम लगेगा और परिवहन लागत में भी कमी आएगी। बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण फल, सब्जी और अन्य कृषि उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके साथ ही डेयरी, बागवानी और कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क मिलने से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और नए उद्योगों के लिए निवेश का वातावरण मजबूत होगा। मालवा क्षेत्र पहले से ही कृषि, उद्योग और व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। आधुनिक परिवहन सुविधाओं के जुड़ने से यहां औद्योगिक गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है। छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बाजार तक आसान पहुंच मिलने से प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।पर्यटन क्षेत्र को भी इस परियोजना से नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। उज्जैन विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। सड़क संपर्क बेहतर होने से महाकाल लोक, श्री महाकालेश्वर मंदिर और आसपास के अन्य धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक होगा। इससे होटल, परिवहन, पर्यटन सेवाओं और स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:29:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिजली कटौती पर हाईकोर्ट की सख्ती, कहा- सिर्फ योजना नहीं, जनता को जमीन पर राहत दिखनी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[बार-बार बिजली गुल होने पर शासन ने पेश किया एक्शन प्लान, हाईकोर्ट ने प्रगति रिपोर्ट मांगी; अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-courts-strictness-on-power-cuts-said-not-just/article-58286"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-power-cut.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बारिश और आंधी-तूफान के दौरान बिलासपुर में लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और बिजली विभाग के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया गया है और कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट होने के बजाय स्पष्ट कहा कि केवल कागजों पर योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। जब तक उनका असर जमीन पर दिखाई नहीं देगा और आम लोगों को वास्तविक राहत नहीं मिलेगी, तब तक ऐसे दावों का कोई खास महत्व नहीं रहेगा। कोर्ट ने प्रशासन को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देने और प्रगति रिपोर्ट शपथ पत्र के साथ पेश करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से ऊर्जा सचिव और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक ने अपना जवाब अदालत में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिलासपुर शहर की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य स्तर पर बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें नौ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों के तहत बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की योजना तैयार की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल यह पूरा मामला बिलासपुर में कुछ दिनों पहले हुई भारी बारिश और तेज आंधी के बाद सामने आया था। शहर के कई हिस्सों में पूरी रात बिजली आपूर्ति बाधित रही। हालात ऐसे थे कि वीवीआईपी क्षेत्र माने जाने वाले कलेक्ट्रेट और सिविल लाइन जैसे इलाकों में भी लंबे समय तक बिजली नहीं रही। इससे आम लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हुए। स्थानीय लोगों ने लगातार बिजली गुल रहने, बार-बार फॉल्ट आने और विभाग की धीमी कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई थी। इस घटना के बाद मीडिया में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका के रूप में मामले की सुनवाई शुरू की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े सुधार प्रस्तावित हैं। शहर में अब पुराने और क्षतिग्रस्त सीमेंट के बिजली खंभों की जगह लोहे के पोल लगाए जाएंगे, ताकि तेज हवा या अन्य कारणों से बार-बार खंभे गिरने की समस्या कम हो सके। इसके अलावा जहां नए बिजली पोल लगाए जाएंगे, वहां भी स्टील के खंभों का ही उपयोग किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे बिजली आपूर्ति अधिक सुरक्षित और स्थायी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का तेजी से समाधान करने और बढ़ते लोड को नियंत्रित करने के लिए शहर में दो नए सप्लाई जोन बनाने की योजना भी तैयार की गई है। मंगला और कोनी क्षेत्रों को नए सप्लाई जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण एवं सामान्य विकास योजना के तहत करीब 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से ऐसे क्षेत्रों में खुले बिजली तार हटाकर कवर्ड केबल बिछाई जाएगी, जहां बार-बार फॉल्ट की समस्या सामने आती रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि शहर में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए नए सब-स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक मुख्य सब-स्टेशन और दो 33/11 केवी क्षमता वाले नए सब-स्टेशन बनाने के लिए जिला प्रशासन से भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। वहीं पेड़ों की शाखाओं से बिजली लाइनों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए अतिरिक्त स्काईलिफ्ट वाहन तैनात किए जाएंगे। विभाग में तकनीकी कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्तियों की प्रक्रिया भी शुरू करने की जानकारी अदालत को दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से भी शपथ पत्र पेश किया गया। निगम आयुक्त ने बताया कि मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए विकास भवन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। यहां अधिकारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। निगम ने यह भी बताया कि अप्रैल 2026 से ही शहर के सभी आठ जोनों में नालियों की सफाई और गाद निकालने का अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्य की जियो-टैग्ड तस्वीरें भी अदालत में प्रस्तुत की गई हैं। जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए 14 विशेष वाहनों का बेड़ा भी चौबीसों घंटे तैयार रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इन सभी दावों के बावजूद हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर बनाई गई योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए। यदि बारिश के दौरान फिर बिजली गुल होती है या सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनती है, तो इसका अर्थ होगा कि योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं हुआ। अदालत ने निर्देश दिया कि मानसून के पूरे दौर में बिजली आपूर्ति यथासंभव निर्बाध रखी जाए और किसी भी शिकायत का तत्काल समाधान किया जाए। डिवीजन बेंच ने नगर निगम आयुक्त और ऊर्जा सचिव को निर्देश दिया है कि वे शपथ पत्र के साथ विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि अब तक घोषित योजनाओं पर कितना काम हुआ है और जनता को उसका क्या लाभ मिला है। अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल योजनाएं बनाकर फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका असर शहर की व्यवस्था में साफ दिखाई देना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:13:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>दशकों पुराना नर्मदा जल विवाद खत्म, चार राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता; अमित शाह बोले- पानी का लाभ पूरे देश को मिलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान ने सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े वित्तीय विवाद पर वन-टाइम सेटलमेंट समझौते पर किए हस्ताक्षर, वर्षों से लंबित भुगतान और दावों का हुआ अंतिम निपटारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4dd35b49837/article-58133"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narmada-water-dispute.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">नई दिल्ली में मंगलवार को देश के सबसे लंबे समय से चले आ रहे अंतरराज्यीय जल विवादों में से एक नर्मदा जल विवाद का महत्वपूर्ण समाधान सामने आया। सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत, मुआवजा और विभिन्न राज्यों के बीच वित्तीय दावों को लेकर वर्षों से चल रही खींचतान आखिरकार समाप्त हो गई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ परियोजना से जुड़े सभी लंबित वित्तीय मामलों के अंतिम निपटारे का रास्ता साफ हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए। बैठक में केंद्र सरकार और चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाधान को सहकारी संघवाद की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जल किसी एक राज्य की संपत्ति नहीं बल्कि पूरे देश की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि पानी चाहे किसी भी राज्य में उपयोग हो, उसका लाभ अंततः भारत के किसानों और नागरिकों को ही मिलता है। उनके अनुसार राज्यों के बीच सहयोग की भावना से ही देश के संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव है और यही विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमित शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने और वर्षों पुराने विवादों को समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद केवल एक विचार नहीं बल्कि व्यवहार में दिखाई देने वाला मॉडल बन चुका है। कई राज्यों में बेहतर समन्वय के कारण जल विवादों सहित अन्य जटिल मामलों का समाधान तेजी से हो रहा है। सरदार सरोवर परियोजना देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देश्यीय नदी परियोजनाओं में गिनी जाती है। इस परियोजना से गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान को सिंचाई, पेयजल तथा बिजली उत्पादन के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिला है। लाखों किसानों को सिंचाई सुविधा मिली है जबकि अनेक शहरों और गांवों में पेयजल की उपलब्धता भी बेहतर हुई है। राजस्थान के कई सूखा प्रभावित क्षेत्रों तक नर्मदा का पानी पहुंचने के बाद खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि परियोजना के निर्माण के दौरान लागत, पुनर्वास, मुआवजा और हिस्सेदारी को लेकर चारों राज्यों के बीच लंबे समय तक मतभेद बने रहे। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसलों के बाद भी कई वित्तीय दावे लंबित थे, जिन पर लगातार चर्चा चल रही थी। अब वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए इन सभी विवादों को समाप्त करने पर सहमति बनी है। समझौते के बाद हालांकि मध्य प्रदेश को आर्थिक दृष्टि से अपेक्षित लाभ नहीं मिला। राज्य सरकार ने सरदार सरोवर बांध के कारण प्रभावित भूमि और मुआवजे के आधार पर लगभग 7,669 करोड़ रुपये का दावा किया था। लेकिन नए समझौते के अनुसार मध्य प्रदेश को उल्टे गुजरात सरकार को लगभग 550 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। इस पहलू को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2019 में सरदार सरोवर बांध पहली बार अपनी पूर्ण क्षमता तक भरने के बाद मध्य प्रदेश के डूब क्षेत्र का वास्तविक आकलन सामने आया। पहले जहां 178 गांव प्रभावित बताए गए थे, वहीं बाद में यह संख्या बढ़कर 192 गांव हो गई। डूब क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि जलमग्न हुई, जिससे प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण बन गया था। इसी आधार पर मध्य प्रदेश ने संशोधित मुआवजे की मांग रखी थी। गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर अन्य अंतरराज्यीय जल विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हरियाणा-राजस्थान जल विवाद और किशाऊ बांध परियोजना जैसे मामलों में भी सहमति बनी है। उनका कहना था कि राज्यों के बीच विवाद जितनी जल्दी समाप्त होंगे, उतनी ही तेजी से विकास परियोजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:13:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चंडीगढ़ दौरे की तैयारियां तेज, पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए ₹2 करोड़ का टेंट प्रस्तावित</title>
                                    <description><![CDATA[17 जुलाई के संभावित दौरे से पहले प्रशासन ने एक दिन में आठ टेंडर जारी किए, रेलवे और अन्य परियोजनाओं के उद्घाटन की तैयारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/preparations-for-chandigarh-tour-intensified-tent-worth-%E2%82%B9-2-crore/article-58051"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pm-modi-chandigarh-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 जुलाई को प्रस्तावित चंडीगढ़ दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। कार्यक्रम का आयोजन पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) परिसर में प्रस्तावित है और इसके लिए प्रशासन के विभिन्न इंजीनियरिंग विभागों ने एक ही दिन में आठ अलग-अलग टेंडर जारी किए हैं। इनमें सबसे बड़ा टेंडर करीब 2.02 करोड़ रुपये का है, जो कार्यक्रम स्थल पर टेंट और अस्थायी व्यवस्थाएं तैयार करने के लिए निकाला गया है। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम को लेकर सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से दौरे का अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन संभावित यात्रा को देखते हुए सभी आवश्यक इंतजाम पहले से किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम स्थल पर लगभग छह हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में वाटरप्रूफ जर्मन हैंगर लगाया जाएगा। जुलाई में बारिश की संभावना को देखते हुए इस विशेष टेंट की व्यवस्था की जा रही है ताकि मौसम का असर कार्यक्रम पर न पड़े। पूरे पंडाल को आरामदायक बनाए रखने के लिए 600 टन क्षमता का एयर कंडीशनिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं आधुनिक मानकों के अनुरूप की जा रही हैं। आयोजन स्थल पर वीआईपी मेहमानों और प्रधानमंत्री के लिए अलग एयर कंडीशनड लाउंज, बैठक व्यवस्था और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">टेंडर दस्तावेजों के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर करीब 2200 सोफे, 300 कुर्सियां, लगभग 70 हजार वर्ग फीट कारपेट, 65 हजार वर्ग फीट बैरिकेडिंग, 20 वाटर कूलर और 24 पोर्टेबल टॉयलेट लगाने की तैयारी की गई है। इसके अलावा मंच, फर्नीचर, प्रवेश और निकास मार्ग तथा अन्य अस्थायी ढांचों की भी व्यवस्था होगी। प्रशासन का कहना है कि कार्यक्रम में आने वाले आमंत्रित अतिथियों, अधिकारियों और अन्य लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखा जा रहा है। अधिकांश टेंडर शॉर्ट नोटिस पर जारी किए गए हैं ताकि चयनित एजेंसियां समय रहते काम शुरू कर सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा और बिजली व्यवस्था को लेकर भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। कार्यक्रम स्थल पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 125 केवीए क्षमता वाले 11 जनरेटर, 250 केवीए क्षमता वाले 28 जनरेटर और एक 500 केवीए डीजी सेट लगाया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आठ हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा एलईडी लाइटिंग, फायर सेफ्टी उपकरण, बैरिकेडिंग और लगभग चार हजार रंग-बिरंगे गमलों से पूरे परिसर को सजाया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सभी विभागों के बीच समन्वय बनाकर तैयारियों की नियमित समीक्षा की जा रही है ताकि कार्यक्रम में किसी तरह की बाधा न आए।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संभावित दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण भी प्रस्तावित है। कार्यक्रम के दौरान पीजीआई और पंजाब विश्वविद्यालय से जुड़े अहम प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय रेलवे की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित कालका, मोहाली, अंब अंदौरा और आनंदपुर साहिब रेलवे स्टेशनों का भी वर्चुअल लोकार्पण किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन स्टेशनों का आधुनिकीकरण यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। स्टेशन परिसरों में आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ स्थानीय संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">रेलवे का कहना है कि अमृत भारत स्टेशन योजना केवल भवनों के नवीनीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन केंद्र के रूप में विकसित करना है। इस योजना के तहत देशभर में 1300 से अधिक रेलवे स्टेशनों का चरणबद्ध तरीके से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। अब तक 172 से अधिक स्टेशनों का निर्माण या पुनर्विकास कार्य पूरा किया जा चुका है। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक स्टेशनों से यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा और स्थानीय व्यापार, पर्यटन तथा आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>रेलवे अधिकारियों ने सोमवार को प्रस्तावित लोकार्पण वाले सभी स्टेशनों का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। संबंधित विभागों को अंतिम रूप से सभी कार्य समय पर पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय कला, विरासत और वास्तुकला को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इन स्टेशनों को क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का प्रयास किया गया है। प्रशासन और रेलवे दोनों का कहना है कि जैसे ही प्रधानमंत्री कार्यालय से आधिकारिक कार्यक्रम की पुष्टि होगी, तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>LNG सप्लाई फिर हुई सामान्य, सरकार ने हटाए सभी आपातकालीन प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से शिपमेंट बहाल होने के बाद केंद्र का बड़ा फैसला, उद्योगों को मिलेगी राहत और गैस आपूर्ति होगी सुचारु]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/lng-supply-normal-again-government-removed-all-emergency-restrictions/article-57903"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lng-supply-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति एक बार फिर सामान्य हो गई है। केंद्र सरकार ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चले सैन्य संघर्ष के दौरान लागू किए गए ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद देश के औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि एलएनजी का सबसे अधिक उपयोग उद्योगों, बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण और कई अन्य औद्योगिक गतिविधियों में किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गैस एवं तेल के जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के बाद आपातकालीन प्रतिबंधों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में गैस की आपूर्ति स्थिर है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से भारत के लिए एलएनजी कार्गो फिर से नियमित रूप से पहुंच रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के चलते फरवरी के अंत में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है। हालात बिगड़ने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत आने वाले एलएनजी कार्गो को रोक दिया था या उन्हें अन्य देशों की ओर मोड़ दिया था। इस संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ लागू किया था। इसका उद्देश्य सीमित उपलब्ध गैस का प्राथमिकता के आधार पर वितरण सुनिश्चित करना और आवश्यक क्षेत्रों में आपूर्ति बनाए रखना था।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी सप्लाई से जुड़े प्रतिबंध हटाना सरकार का तीसरा बड़ा निर्णय माना जा रहा है। इससे पहले सरकार ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने के बाद दो अन्य आपातकालीन फैसले भी वापस ले चुकी है। पहले फैसले के तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया था कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन अधिक करें ताकि घरेलू जरूरतें पूरी की जा सकें। अब इस निर्देश को समाप्त कर दिया गया है। दूसरे फैसले में बल्क उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री पर लगाई गई सीमा भी समाप्त कर दी गई है। सरकार का कहना है कि अब ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और किसी प्रकार की अतिरिक्त पाबंदी की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा। देश में कई उद्योग प्राकृतिक गैस पर आधारित उत्पादन प्रणाली का उपयोग करते हैं। गैस की कमी के दौरान कई कंपनियों को उत्पादन लागत बढ़ने, वैकल्पिक ईंधन अपनाने और उत्पादन घटाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अब नियमित आपूर्ति बहाल होने से उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और कई उद्योगों का संचालन पहले की तरह सुचारु रूप से हो सकेगा। इससे बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, स्टील, सिरेमिक, कांच, टेक्सटाइल और अन्य गैस आधारित उद्योगों को राहत मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी रास्ते से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल और गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। देश अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विदेशों से खरीदता है। इनमें से बड़ी मात्रा पश्चिम एशिया के देशों से आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। विशेष रूप से कतर से आने वाली एलएनजी का अधिकांश परिवहन स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते ही होता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक कदम उठाए थे। विभिन्न देशों से ईंधन आयात के विकल्प तलाशे गए, घरेलू भंडार का उपयोग किया गया और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण किया गया। एलएनजी आपूर्ति सामान्य होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आने की उम्मीद है। उद्योगों के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे गैस की उपलब्धता बेहतर होगी और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान को मिली तीन बड़ी विकास परियोजनाएं, PM मोदी बोले- ऊर्जा संकट से भारत मजबूती से उबरा</title>
                                    <description><![CDATA[बालोतरा में देश की आधुनिक रिफाइनरी राष्ट्र को समर्पित, जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का लोकार्पण और जयपुर मेट्रो फेज-2 की आधारशिला; प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भर भारत पर रखा जोर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rajasthan-got-three-big-development-projects-pm-modi-said/article-57869"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान को विकास और आधारभूत ढांचे से जुड़ी तीन बड़ी परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने बालोतरा के पचपदरा में देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरी का उद्घाटन किया, जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का लोकार्पण किया और जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना की वर्चुअल आधारशिला रखी। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने वैश्विक परिस्थितियों के बीच उत्पन्न हुए बड़े ऊर्जा संकट का सफलतापूर्वक सामना किया और बेहतर प्रबंधन के कारण आम नागरिकों पर उसका बोझ कम पड़ने दिया।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध और अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही थी। यदि समय पर प्रभावी रणनीति नहीं बनाई जाती, तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत करीब 2 हजार रुपये तक पहुंच सकती थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने समय पर निर्णय लेकर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखा, जिसके कारण देश में गैस सिलेंडर की कीमतों को नियंत्रित रखने में सफलता मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संकट के दौरान भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक संबंध देश के लिए बड़ी ताकत बनकर उभरे। उन्होंने बताया कि पहले भारत लगभग 25 से 26 देशों से ईंधन आयात करता था, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए यह संख्या बढ़ाकर करीब 40 देशों तक पहुंचाई गई। इससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित नहीं हुई और देश की जरूरतों को लगातार पूरा किया जा सका। उन्होंने कहा कि भारत ने कठिन समय में भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर दुनिया के सामने एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अप्रैल से जून के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए तेल विपणन कंपनियों को लगभग 75 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि यह राशि इतनी बड़ी थी कि इससे एक नई रिफाइनरी का निर्माण किया जा सकता था। सरकार ने यह आर्थिक भार स्वयं वहन किया ताकि आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पचपदरा रिफाइनरी केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा, पेट्रोकेमिकल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और राज्य में औद्योगिक निवेश के नए अवसर विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राजस्थान को देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में और मजबूत बनाएगी। प्रधानमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा सरकार केवल परियोजनाओं की घोषणा नहीं करती, बल्कि उन्हें समय पर पूरा भी करती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल शिलान्यास करना नहीं, बल्कि जनता को परियोजनाओं का लाभ पहुंचाना है। पचपदरा रिफाइनरी इसका बड़ा उदाहरण है, जो अनेक चुनौतियों के बावजूद निर्धारित दिशा में आगे बढ़ी और आज राष्ट्र को समर्पित की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने रिफाइनरी में कुछ महीने पहले हुई दुर्घटना का भी उल्लेख किया और कहा कि उस घटना के बाद परियोजना से जुड़े इंजीनियरों, विशेषज्ञों और कर्मचारियों ने तेज गति से काम कर सभी चुनौतियों को पार किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नया भारत कठिन परिस्थितियों से घबराता नहीं, बल्कि चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता रखता है। यही आत्मविश्वास विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने राजस्थान और गुजरात के बीच नर्मदा जल परियोजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और राजस्थान में वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थीं, तब दोनों राज्यों ने बिना किसी विवाद के नर्मदा का पानी राजस्थान तक पहुंचाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति क्षेत्रवाद या टकराव की नहीं, बल्कि सहयोग और राष्ट्रहित की राजनीति है। आज राजस्थान के अनेक गांवों तक नर्मदा का पानी पहुंच रहा है, जिससे लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले प्रधानमंत्री सुबह जोधपुर पहुंचे, जहां उन्होंने नए एयरपोर्ट टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। उन्होंने आधुनिक सुविधाओं से लैस टर्मिनल का निरीक्षण किया और क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत बनाने वाली 'उड़ान-2.0' योजना की शुरुआत भी की। इसके बाद वे बालोतरा पहुंचे, जहां रिफाइनरी के कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर विशेषज्ञों से तकनीकी जानकारी ली। उन्होंने परियोजना की कार्यप्रणाली, उत्पादन क्षमता और भविष्य की योजनाओं की भी समीक्षा की। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। रिफाइनरी परिसर में बनाए गए विशाल डोम में हजारों लोगों ने जनसभा में भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:20:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी आज करेंगे पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन, राजस्थान को मिलेंगी तीन बड़ी विकास परियोजनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[बालोतरा में जनसभा को भी संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री, जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का लोकार्पण और जयपुर मेट्रो फेज-2 की आधारशिला भी रखेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-will-inaugurate-pachpadra-refinery-today-rajasthan-will-get/article-57812"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tarot-horoscope-4-july-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान के दौरे पर हैं, जहां वे राज्य को तीन महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण बालोतरा जिले की बहुप्रतीक्षित पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन है। लंबे समय से इस परियोजना का इंतजार किया जा रहा था और अब इसके शुरू होने के साथ ही प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रधानमंत्री दोपहर करीब 12 बजे पचपदरा पहुंचेंगे और लगभग दो घंटे तक कार्यक्रम में शामिल रहेंगे। इस दौरान वे रिफाइनरी परियोजना का निरीक्षण करेंगे, अधिकारियों से जानकारी लेंगे और इसके बाद एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे। प्रशासन के अनुसार प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के जवान तैनात किए गए हैं। रिफाइनरी परिसर और आसपास के पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, अधिकारियों और स्थानीय लोगों के शामिल होने की संभावना है। पचपदरा रिफाइनरी को राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं में गिना जा रहा है और इससे क्षेत्र में रोजगार, निवेश तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान केवल रिफाइनरी का उद्घाटन ही नहीं होगा, बल्कि जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का लोकार्पण भी किया जाएगा। इसके अलावा जयपुर मेट्रो के फेज-2 परियोजना की आधारशिला भी वर्चुअल माध्यम से रखी जाएगी। माना जा रहा है कि इन परियोजनाओं से राज्य के परिवहन और आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी। पचपदरा रिफाइनरी परिसर में जनसभा के लिए विशेष डोम तैयार किया गया है, जिसमें करीब पांच हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। आयोजन स्थल पर पेयजल, चिकित्सा, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी इंतजाम किया गया है। प्रशासन ने कार्यक्रम को देखते हुए यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए हैं ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में भी कार्यक्रम को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार करीब 400 कार्यकर्ता गुलाब सर्किल से साइकिल और ऊंटगाड़ी के माध्यम से रैली निकालते हुए रिफाइनरी परिसर तक पहुंचेंगे। इस आयोजन को स्थानीय संस्कृति और विकास के प्रतीक के रूप में भी प्रस्तुत किया जा रहा है। कार्यक्रम में आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि उद्घाटन से पहले मौसम ने प्रशासन की तैयारियों को कुछ देर के लिए प्रभावित जरूर किया। शुक्रवार शाम पचपदरा क्षेत्र में तेज हवा के साथ बारिश हुई, जिससे कार्यक्रम स्थल के आसपास लगाए गए कई होर्डिंग और बैनर क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ बड़े पोस्टर जमीन पर गिर गए, जबकि कई जगह सजावट को भी नुकसान पहुंचा। इसके बाद रात और शनिवार सुबह से ही कर्मचारियों और मजदूरों ने मरम्मत का काम तेज कर दिया। प्रशासन का कहना है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त कर दी गईं। गौरतलब है कि इसी वर्ष 20 अप्रैल को पचपदरा रिफाइनरी के क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (सीडीयू) और वैक्यूम डिस्टिलेशन यूनिट (वीडीयू) में आग लग गई थी। यह घटना उस समय हुई थी जब अगले ही दिन प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन प्रस्तावित था। आग लगने के बाद उद्घाटन कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था और सुरक्षा तथा तकनीकी जांच पूरी होने के बाद नई तारीख तय की गई। अब सभी आवश्यक परीक्षण पूरे होने के बाद परियोजना का उद्घाटन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की समीक्षा के बाद ही रिफाइनरी को संचालन के लिए तैयार घोषित किया गया है। प्रदेश सरकार का मानना है कि इस परियोजना से न केवल पश्चिमी राजस्थान में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी बल्कि हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल और जयपुर मेट्रो फेज-2 जैसी परियोजनाएं भी राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 10:40:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-जापान शिखर सम्मेलन शुरू, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग सहयोग को मिलेगी नई रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[मोदी-ताकाइची वार्ता में सेमीकंडक्टर, औद्योगिक निवेश, सप्लाई चेन और मध्य प्रदेश के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर बढ़ सकती है साझेदारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-japan-summit-begins-investment-and-manufacturing-cooperation-will-get-new/article-57512"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-japan-summit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और जापान के बीच 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन की शुरुआत ऐसे समय हुई है, जब दोनों देश आर्थिक सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच होने वाली उच्चस्तरीय वार्ता पर उद्योग जगत, निवेशकों और राज्यों की भी विशेष नजर है। माना जा रहा है कि इस बैठक में व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, रक्षा उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए फैसले सामने आ सकते हैं। इन संभावित समझौतों का असर केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य प्रदेश जैसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक राज्यों को भी इसका बड़ा लाभ मिल सकता है। भारत और जापान पिछले कई वर्षों से विशेष रणनीतिक साझेदार रहे हैं। दोनों देशों ने विनिर्माण, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा और आधुनिक औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार सहयोग बढ़ाया है। इस बार का शिखर सम्मेलन भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और एशिया में नए औद्योगिक केंद्रों के उभरने के बीच भारत जापानी कंपनियों के लिए सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य बनकर सामने आया है। ऐसे में नई निवेश योजनाओं और औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणा की संभावना भी जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जापानी कंपनियों की खास रुचि हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रहती है। यदि शिखर सम्मेलन के दौरान इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनती है तो मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना की संभावना मजबूत हो सकती है। इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय उद्योगों को वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर मिलेगा। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण आज पूरी दुनिया की प्राथमिकता बने हुए हैं। भारत सरकार भी इस क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। जापान इस क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। यदि दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और निवेश बढ़ता है तो मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर और संबंधित उद्योगों को भी नई गति मिल सकती है। इससे राज्य में तकनीकी कौशल आधारित रोजगार का विस्तार होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सप्लाई चेन को मजबूत करना भी इस शिखर सम्मेलन का प्रमुख विषय माना जा रहा है। कोविड महामारी के बाद दुनिया भर की कंपनियां उत्पादन और आपूर्ति के लिए नए विकल्प तलाश रही हैं। भारत इस समय वैश्विक कंपनियों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। मध्य प्रदेश की भौगोलिक स्थिति देश के मध्य में होने के कारण लॉजिस्टिक्स और परिवहन के लिहाज से काफी अनुकूल मानी जाती है। एक्सप्रेस-वे, फ्रेट कॉरिडोर, रेलवे नेटवर्क और आधुनिक औद्योगिक पार्क राज्य को निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी बना रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हरित ऊर्जा और स्वच्छ तकनीक भी भारत-जापान सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बनते जा रहे हैं। जापान की कंपनियां ऊर्जा दक्ष तकनीक, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी निर्माण और पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक समाधान विकसित करने में अग्रणी हैं। यदि इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ता है तो मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिल सकती है। राज्य पहले ही सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विदेशी निवेश केवल नई फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहता बल्कि इससे स्थानीय छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिलता है। नई कंपनियों के आने से सहायक उद्योग विकसित होते हैं, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होती है और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। साथ ही आधुनिक तकनीक और वैश्विक गुणवत्ता मानकों का लाभ भी घरेलू उद्योगों तक पहुंचता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और जापान के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी का एक बड़ा प्रभाव कौशल विकास पर भी देखने को मिल सकता है। जापानी कंपनियां प्रशिक्षित मानव संसाधन को प्राथमिकता देती हैं। ऐसे में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और स्किल डेवलपमेंट सेंटरों में नए सहयोग कार्यक्रम शुरू होने की संभावना है। इससे मध्य प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। यदि शिखर सम्मेलन के दौरान निवेश, तकनीक और औद्योगिक सहयोग से जुड़े प्रस्तावों को अंतिम रूप मिलता है तो इसका लाभ आने वाले वर्षों में पूरे भारत के साथ-साथ मध्य प्रदेश को भी मिलेगा। राज्य के औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और निवेश अनुकूल वातावरण के कारण जापानी कंपनियों के लिए यहां नई परियोजनाओं की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ विनिर्माण क्षेत्र में भी नई ऊर्जा का संचार हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:44:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अगस्त में खुलेगा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का अहम हिस्सा, एमपी से मुंबई तक सफर होगा और तेज</title>
                                    <description><![CDATA[वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर पूरा होने की तैयारी, मध्य प्रदेश के उद्योग, किसानों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/an-important-part-of-delhi-mumbai-expressway-will-open-in-august/article-57318"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/delhi-mumbai-expressway.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा अहम हिस्सा अब जल्द ही आम लोगों के लिए खुल सकता है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो 31 अगस्त तक वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है। इस हिस्से के शुरू होने के बाद मध्य प्रदेश से मुंबई तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का रास्ता पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इससे न सिर्फ यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और कृषि क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना की प्रगति की जानकारी देते हुए कहा कि वडोदरा से मुंबई तक का महत्वपूर्ण कॉरिडोर जल्द पूरा होने वाला है। अभी तक इसी हिस्से का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा था। एक्सप्रेसवे के अधिकांश हिस्से तैयार होने के बावजूद मुंबई तक निर्बाध हाई-स्पीड यात्रा संभव नहीं थी। अब इस कमी के दूर होने के बाद पूरे कॉरिडोर की उपयोगिता काफी बढ़ जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल है। यह करीब 1,350 से 1,400 किलोमीटर लंबा एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है, जो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ता है। इस एक्सप्रेसवे को आधुनिक तकनीक और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाकर 12 लेन तक की जा सकती है। मध्य प्रदेश के लिए यह परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक्सप्रेसवे राज्य के रतलाम, मंदसौर और झाबुआ जिलों से होकर गुजरता है। अभी तक मुंबई की दिशा में अंतिम कनेक्टिविटी पूरी नहीं होने से माल परिवहन और लंबी दूरी की यात्रा में अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही थी। वडोदरा-मुंबई सेक्शन चालू होने के बाद यह स्थिति बदल जाएगी और राज्य को सीधा फायदा मिलने लगेगा। सबसे बड़ा लाभ व्यापार और उद्योग जगत को मिलने की संभावना है। मध्य प्रदेश के औद्योगिक शहर इंदौर, पीथमपुर और देवास से तैयार होने वाला औद्योगिक सामान पहले की तुलना में कम समय में मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक पहुंच सकेगा। इससे निर्यात करने वाली कंपनियों की परिवहन लागत घटेगी और समय की भी बचत होगी। तेज और बेहतर कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। कृषि क्षेत्र के लिए भी यह एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। मालवा क्षेत्र से फल, सब्जियां, अनाज और अन्य कृषि उत्पाद बड़ी मात्रा में देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जाते हैं। मुंबई जैसे बड़े बाजार तक कम समय में कृषि उत्पाद पहुंचने से उनकी गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। परिवहन लागत कम होने का सीधा असर किसानों की आय पर भी पड़ सकता है। पर्यटन और आम यात्रियों के लिए भी यह परियोजना राहत लेकर आएगी। दिल्ली से मुंबई और मध्य प्रदेश से महाराष्ट्र की ओर जाने वाले लोगों का सफर पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और आरामदायक होगा। एक्सप्रेसवे पर नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था होने के कारण ट्रैफिक बाधाएं कम रहेंगी और यात्रा का समय काफी घट जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है। इस पर वाहनों की निर्धारित गति 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक रखी गई है। मार्ग पर आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, सर्विस रोड, इमरजेंसी सहायता, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली और पर्यावरण अनुकूल निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया है। एक्सप्रेसवे के किनारे भविष्य में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की भी संभावना जताई जा रही है। करीब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली यह परियोजना देश के सबसे बड़े सड़क बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रमों में शामिल है। इसका उद्देश्य केवल यात्रा को आसान बनाना नहीं बल्कि देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों को तेज परिवहन नेटवर्क से जोड़ना भी है। सरकार का मानना है कि इससे निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर शुरू होने के बाद दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे अपनी पूरी क्षमता के साथ उपयोग में आ सकेगा। मध्य प्रदेश के उद्योग, व्यापार, परिवहन और कृषि क्षेत्र को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। यदि निर्धारित समय के अनुसार अगस्त के अंत तक यह हिस्सा चालू हो जाता है, तो आने वाले महीनों में लाखों यात्रियों और हजारों व्यवसायों के लिए यात्रा और माल परिवहन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और किफायती हो जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:56:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फायर सेफ्टी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- टेंडर नहीं, जमीन पर कब दिखेगा काम</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फायर सुरक्षा व्यवस्था पर जताई नाराजगी, सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी, जिला प्रशासन ने भी जांच अभियान तेज किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a3e422ac159a/article-57027"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-high-court-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड के बाद देशभर में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की अग्निशमन व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि केवल टेंडर जारी करने या योजनाओं की जानकारी देने से काम नहीं चलेगा। लोगों की सुरक्षा के लिए जमीन पर वास्तविक काम दिखाई देना चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीद से जुड़े सभी टेंडरों की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत की इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक व्यवस्था भी सक्रिय नजर आने लगी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वर्षों से फायर सेफ्टी को मजबूत बनाने की बातें हो रही हैं, लेकिन कई योजनाएं अब भी कागजों तक सीमित दिखाई देती हैं। यदि टेंडर जारी हो चुके हैं तो यह भी बताया जाना चाहिए कि वर्क ऑर्डर कब जारी हुए और काम किस स्तर तक पहुंचा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती। दरअसल यह मामला तब चर्चा में आया जब हाल ही में मोपका क्षेत्र में स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब स्टेशन और आसपास की दुकानों में आग लगने की घटना सामने आई। इस घटना के बाद मीडिया रिपोर्टों में राज्य की फायर सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को प्रमुखता से उठाया गया। इन्हीं खबरों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। अदालत ने राज्य शासन से शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब भी तलब किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य में करीब 72.70 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहनों और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा 16 नए फायर स्टेशन स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है। हालांकि कई जिलों में अब तक फायर स्टेशन के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है, जिसके कारण परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। अदालत ने इस जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि केवल योजनाओं और टेंडर की जानकारी पर्याप्त नहीं है। आम लोगों को सुरक्षा तभी मिलेगी जब ये परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देंगी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2020 में कई नए फायर स्टेशन बनाने की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन वर्षों बाद भी कई स्थानों पर जमीन का चयन नहीं हो पाया। राज्य के कुछ जिलों में भूमि उपलब्ध करा दी गई है और वहां निर्माण के लिए धनराशि भी जारी की जा चुकी है, जबकि कई अन्य जिलों में अब तक जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। अदालत ने इस देरी पर भी चिंता जताई और शासन से स्पष्ट समयसीमा बताने को कहा है। हाईकोर्ट की सख्ती के बीच जिला प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने शहर के सभी कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल, व्यावसायिक परिसरों और बहुमंजिला इमारतों की व्यापक जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए जिला स्तर और अनुविभाग स्तर पर अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया गया है। प्रत्येक समिति की अध्यक्षता संबंधित एसडीएम करेंगे, जबकि पुलिस, नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और अन्य विभागों के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशासन ने इन समितियों को दस दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित संस्थानों में फायर एनओसी है या नहीं, आपातकालीन निकासी मार्ग मौजूद हैं या नहीं और आग लगने की स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं या नहीं। यदि किसी भवन में गंभीर लापरवाही पाई जाती है तो पहले सुधार के निर्देश दिए जाएंगे और निर्देशों का पालन नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में नगर निगम ने शहर के छह कोचिंग संस्थानों की जांच भी की थी। जांच में एक संस्थान में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता पाया गया, जिसके बाद उसे सील कर दिया गया। अन्य पांच संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा ताकि किसी भी संस्थान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी न हो। जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि संबंधित विभागों के पास शहर में संचालित कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला इमारतों की पूरी और अद्यतन सूची उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने फायर विभाग के रिकॉर्ड और फायर ऑडिट को जांच का मुख्य आधार बनाने का फैसला किया है। जिन संस्थानों ने अब तक फायर एनओसी नहीं ली है या जिनका फायर ऑडिट लंबित है, वहां विशेष रूप से निरीक्षण किया जाएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अग्नि सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। आम लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकार को इसके लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी, जब राज्य सरकार को फायर उपकरणों की खरीद, नए फायर स्टेशन निर्माण और अन्य लंबित कार्यों की अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 15:02:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>90 करोड़ से बना अत्याधुनिक बांस घाट श्मशान, संचालन ईशा फाउंडेशन को सौंपा</title>
                                    <description><![CDATA[पटना के बांस घाट श्मशान में आधुनिक सुविधाओं के साथ अंतिम संस्कार की व्यवस्था, सरकार ने संचालन ईशा फाउंडेशन को दिया, शुल्क और लीज को लेकर भी चर्चा तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/state-of-the-art-bamboo-ghat-cremation-operation-built-with-rs-90-crores/article-57012"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/patna-bans-ghat.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पटना के गंगा तट स्थित बांस घाट श्मशान घाट को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कर नया स्वरूप दिया गया है। करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना को अब संचालन के लिए ईशा फाउंडेशन को सौंप दिया गया है। सरकार की ओर से यह जिम्मेदारी बिना किसी शुल्क के दी गई है। हालांकि यहां अंतिम संस्कार की सेवा निशुल्क नहीं होगी। उपलब्ध व्यवस्थाओं के अनुसार अंतिम संस्कार कराने वाले लोगों को 3500 से 5000 रुपये तक का खर्च वहन करना पड़ सकता है। वहीं शहर के अन्य सरकारी श्मशान घाटों पर पारंपरिक व्यवस्था के तहत काफी कम शुल्क लिया जाता है। इसी वजह से इस परियोजना और इसकी संचालन व्यवस्था को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है। करीब 4.5 एकड़ क्षेत्र में फैले इस आधुनिक श्मशान घाट का निर्माण पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से कराया गया है। पहले यहां का श्मशान परिसर काफी छोटा था, लेकिन अब इसे विस्तार देकर आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है। परिसर में एक समय में 18 शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई है। इसके लिए इलेक्ट्रिक शवदाह गृह, आधुनिक वुड क्रीमेशन ओवन और पारंपरिक चिता स्थल तीनों प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं और आवश्यकता के अनुसार विकल्प चुन सकें। श्मशान परिसर में चार आधुनिक इलेक्ट्रिक ओवन लगाए गए हैं, जिनमें कम समय में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इसके अलावा छह विशेष वुड क्रीमेशन ओवन भी तैयार किए गए हैं, जिनमें पारंपरिक चिता की तुलना में कम लकड़ी का उपयोग होता है और प्रदूषण भी कम फैलता है। वहीं आठ पारंपरिक चिता स्थलों की भी व्यवस्था रखी गई है, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुविधाओं को देखते हुए यहां आने वाले लोगों के लिए दो वातानुकूलित प्रतीक्षालय भी बनाए गए हैं। शवों को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक मोर्चरी रूम तैयार किया गया है, जिसमें फ्रीजर की व्यवस्था उपलब्ध है। परिसर के भीतर अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाली सभी आवश्यक सामग्री के लिए अलग दुकानें बनाई गई हैं। यहां कफन, पूजन सामग्री, लकड़ी, घी, कपूर, अगरबत्ती और अन्य जरूरी सामान एक ही स्थान पर उपलब्ध रहेगा, जिससे परिजनों को अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा। इस परियोजना का एक प्रमुख आकर्षण मोक्ष द्वार और बैकुंठ द्वार हैं। लगभग 42 फीट ऊंचे इन दोनों प्रवेश और निकास द्वारों पर कांस्य से निर्मित ओम का प्रतीक स्थापित किया गया है। परिसर के भीतर दो कृत्रिम जलाशय भी बनाए गए हैं, जहां अस्थि विसर्जन और स्नान की व्यवस्था की गई है। इन तालाबों में पाइपलाइन के माध्यम से गंगा का जल पहुंचाया जाता है ताकि सीधे नदी में भीड़ और प्रदूषण दोनों को कम किया जा सके। दोनों जलाशयों के बीच भगवान शिव की भव्य प्रतिमा भी स्थापित की गई है, जो पूरे परिसर को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करती है। श्मशान की दीवारों पर जीवन, मृत्यु और मानव जीवन के विभिन्न चरणों को दर्शाती कलात्मक पेंटिंग बनाई गई हैं। राजा हरिश्चंद्र की कथा सहित कई धार्मिक और प्रेरणादायक चित्रों को भी उकेरा गया है। प्रशासन का कहना है कि इन चित्रों का उद्देश्य शोकाकुल परिवारों को जीवन के दर्शन और मानवीय मूल्यों का संदेश देना है। परिसर में हजारों पौधे लगाए गए हैं और हरियाली विकसित की गई है ताकि वातावरण शांत और स्वच्छ बना रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए यहां ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। लोग वेबसाइट या व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे। इसके साथ ही मुक्ति रथ की बुकिंग और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन जैसी सुविधाएं भी एकीकृत की जा रही हैं। इससे अंतिम समय में परिजनों को होने वाली परेशानियों को कम करने का प्रयास किया गया है इसी बीच राज्य सरकार ने पटना के दीघा क्षेत्र में बिहार का पहला एलपीजी आधारित शवदाह गृह विकसित करने की योजना भी शुरू कर दी है। इस परियोजना का संचालन भी ईशा फाउंडेशन के सहयोग से किया जाएगा। इसके लिए लगभग 2.11 एकड़ जमीन 33 वर्ष की लीज पर नाममात्र एक रुपये में उपलब्ध कराई गई है। यहां एलपीजी आधारित आधुनिक फर्नेस लगाए जाएंगे, जिनमें पारंपरिक धार्मिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अंतिम संस्कार कराया जाएगा। इसके अलावा मुंगेर जिले के तारापुर क्षेत्र में भी ईशा फाउंडेशन को करीब 15.01 एकड़ जमीन 99 वर्ष की लीज पर एक रुपये के प्रतीकात्मक शुल्क पर देने का प्रस्ताव सामने आया है। सरकार के अनुसार इस भूमि पर सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों से जुड़ा परिसर विकसित किया जाएगा। हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक पक्ष इसे आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के रूप में देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सरकारी भूमि और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल उठा रहा है। बिहार सरकार का कहना है कि राज्य में कुल 40 आधुनिक शवदाह गृह विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से कई का निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही उन्हें आम लोगों के लिए शुरू किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को अधिक सम्मानजनक, स्वच्छ, पर्यावरण अनुकूल और व्यवस्थित बनाना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 14:29:09 +0530</pubDate>
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