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                <title>School Education - दैनिक जागरण</title>
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                <description>School Education RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में 2027 से बदलेगा स्कूलों का शैक्षणिक सत्र, 1 अप्रैल से शुरू होंगी कक्षाएं</title>
                                    <description><![CDATA[CBSE की तर्ज पर लागू होगी नई व्यवस्था, मई-जून में रहेंगी गर्मी की छुट्टियां; समय पर किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल वितरण का लक्ष्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/academic-session-of-schools-will-change-in-chhattisgarh-from-2027/article-58275"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-schools-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा व्यवस्था में वर्ष 2027 से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र के कैलेंडर में परिवर्तन करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी और राज्य बोर्ड से जुड़े स्कूल 16 जून के बजाय हर साल 1 अप्रैल से खुलेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के लिए अधिक समय देना, समय पर पाठ्यक्रम पूरा कराना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। नई व्यवस्था के अनुसार 1 अप्रैल से स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया, किताबों, यूनिफॉर्म और साइकिल का वितरण किया जाएगा। इसके बाद 1 मई से 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां रहेंगी और अवकाश समाप्त होने के बाद नियमित रूप से शैक्षणिक गतिविधियां आगे बढ़ेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार प्रदेश में अब शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू होकर अगले वर्ष 31 मार्च तक चलेगा। यह व्यवस्था देश के प्रमुख शिक्षा बोर्डों, विशेष रूप से सीबीएसई के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप होगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे राज्य बोर्ड और राष्ट्रीय शिक्षा बोर्डों के बीच लंबे समय से चला आ रहा शैक्षणिक अंतर काफी हद तक खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए भी पर्याप्त समय मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में स्कूल हर साल 16 जून से खुलते हैं। स्कूल खुलने के बाद शुरुआती कई सप्ताह तक नए विद्यार्थियों का प्रवेश, पाठ्यपुस्तकों का वितरण, यूनिफॉर्म उपलब्ध कराना, साइकिल और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया चलती रहती है। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ता है। कई स्कूलों में नियमित कक्षाएं जून के अंत या जुलाई से शुरू हो पाती हैं। ऐसे में पाठ्यक्रम पूरा करने में देरी होती है और शिक्षकों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन सभी प्रक्रियाओं को अप्रैल महीने में पूरा करने की योजना बनाई गई है, ताकि छुट्टियों के बाद पढ़ाई बिना किसी रुकावट के शुरू हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें, स्कूल ड्रेस और अन्य आवश्यक सामग्री मिल जाएगी। इससे पढ़ाई की शुरुआत पहले दिन से ही प्रभावी ढंग से हो सकेगी। सरकार का मानना है कि समय पर संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और शैक्षणिक सत्र अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार अब तक सीबीएसई और छत्तीसगढ़ बोर्ड के शैक्षणिक कैलेंडर में लगभग ढाई महीने का अंतर रहता था। जहां सीबीएसई स्कूलों में अप्रैल से पढ़ाई शुरू हो जाती थी, वहीं राज्य बोर्ड के स्कूल जून के मध्य में खुलते थे। इस वजह से दोनों बोर्डों के छात्रों के बीच तैयारी का समय अलग-अलग होता था। विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षा की तैयारी में इसका असर देखा जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह अंतर लगभग समाप्त हो जाएगा और छात्रों को समान शैक्षणिक अवसर मिल सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में पुस्तकों के वितरण का लक्ष्य जून तक रखा जाता है, लेकिन कई बार यह प्रक्रिया जुलाई तक भी पहुंच जाती है। इससे नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है। नई व्यवस्था में कोशिश होगी कि 1 अप्रैल से ही सभी विद्यार्थियों को किताबें और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा दी जाए, ताकि शिक्षण कार्य समय पर शुरू हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा विशेषज्ञ भी इस बदलाव को सकारात्मक कदम मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि अप्रैल में शैक्षणिक सत्र शुरू होता है तो विद्यार्थियों को पूरे वर्ष पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे शिक्षकों को भी पाठ्यक्रम पूरा कराने में सुविधा होगी और परीक्षा से पहले दोहराव तथा अतिरिक्त अभ्यास के लिए समय मिल सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पढ़ाई शुरू होने से बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में भी सुधार देखने को मिल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कुछ अभिभावकों का मानना है कि नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए सरकार को सभी तैयारियां पहले से पूरी करनी होंगी। यदि अप्रैल में स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया है तो किताबों की छपाई, यूनिफॉर्म की आपूर्ति और अन्य व्यवस्थाएं समय से पूरी करनी होंगी। साथ ही स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और आधारभूत सुविधाओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। उनका कहना है कि केवल कैलेंडर बदलने से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को समयबद्ध बनाकर ही इस बदलाव का वास्तविक लाभ मिल सकेगा। नई व्यवस्था में मई और जून के दौरान गर्मी की छुट्टियां पहले की तरह रहेंगी। 1 मई से 15 जून तक विद्यार्थियों को अवकाश मिलेगा। इस दौरान अप्रैल महीने में प्रवेश और शैक्षणिक गतिविधियों की शुरुआत हो चुकी होगी। छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने पर सीधे नियमित पढ़ाई शुरू की जाएगी। इससे शिक्षण कार्य में अनावश्यक देरी नहीं होगी और पूरे शैक्षणिक सत्र का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। राज्य सरकार का मानना है कि यह बदलाव केवल कैलेंडर बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरे शिक्षा तंत्र में समयबद्धता और गुणवत्ता दोनों में सुधार आएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:15:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में स्कूलों की एक समान टाइमिंग की मांग, शिक्षा सचिव को भेजा गया पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने शनिवार को हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी मॉर्निंग शिफ्ट लागू करने की मांग उठाई, कहा- अलग-अलग समय से पढ़ाई और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/letter-sent-to-education-secretary-demanding-uniform-timing-of-schools/article-58069"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-schools.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के संचालन समय को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर राज्य के सभी सरकारी स्कूलों की टाइमिंग एक जैसी करने की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में प्राथमिक, माध्यमिक और हायर सेकेंडरी स्कूल अलग-अलग समय पर संचालित हो रहे हैं, जिससे न केवल शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी लगातार दिक्कतें सामने आ रही हैं। संगठन ने विशेष रूप से शनिवार के दिन हायर सेकेंडरी स्कूलों को भी मॉर्निंग शिफ्ट में संचालित करने का सुझाव दिया है ताकि पूरे शिक्षा तंत्र में समान व्यवस्था लागू हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन के अनुसार राज्य में युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) और संकुल व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकांश प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को हायर सेकेंडरी स्कूलों से जोड़ा गया है। इसके कारण एक ही परिसर या संकुल के अंतर्गत कई स्तर के विद्यालय संचालित हो रहे हैं। लेकिन अलग-अलग समय पर स्कूल खुलने और बंद होने से समन्वय में परेशानी आ रही है। शिक्षकों, प्राचार्यों और कर्मचारियों को एक साथ बैठकर योजनाएं बनाने, समीक्षा बैठकें करने और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल कक्षाओं में पढ़ाने तक सीमित नहीं रह गई है। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, ऑनलाइन पोर्टलों पर जानकारी दर्ज करना, परीक्षा संबंधी कार्य, छात्रवृत्ति प्रक्रिया, वित्तीय दस्तावेज तैयार करना, कार्यालयीन रिकॉर्ड का संधारण और अन्य प्रशासनिक कार्य भी करने पड़ते हैं। इसके अलावा समय-समय पर संकुल स्तर और विभागीय बैठकों में भी शामिल होना आवश्यक होता है। अलग-अलग स्कूलों की अलग-अलग टाइमिंग होने के कारण इन सभी कार्यों को समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण बन जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन का मानना है कि यदि शनिवार को हायर सेकेंडरी स्कूलों को भी सुबह की पाली में संचालित किया जाए और सभी सरकारी स्कूलों का समय समान कर दिया जाए तो शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्यों के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। इससे बैठकें आयोजित करना, लंबित रिपोर्ट तैयार करना, अगले सप्ताह की शैक्षणिक योजना बनाना और विभागीय निर्देशों का पालन करना अधिक व्यवस्थित तरीके से संभव होगा। संगठन का कहना है कि इस बदलाव से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि शैक्षणिक व्यवस्था और अधिक सुव्यवस्थित होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोगों का भी मानना है कि एक समान समय व्यवस्था से विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है। संकुल व्यवस्था के तहत कई कार्यक्रम संयुक्त रूप से आयोजित किए जाते हैं, जिनमें अलग-अलग विद्यालयों के शिक्षक और विद्यार्थी शामिल होते हैं। यदि सभी स्कूलों की टाइमिंग एक जैसी होगी तो ऐसे कार्यक्रमों का संचालन आसान होगा और अनावश्यक समय की बर्बादी भी नहीं होगी। साथ ही विभागीय निरीक्षण, प्रशिक्षण कार्यक्रम और समीक्षा बैठकें भी अधिक प्रभावी ढंग से आयोजित की जा सकेंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि कई बार अलग-अलग समय के कारण प्राचार्यों और शिक्षकों को अतिरिक्त समय तक स्कूल में रुकना पड़ता है। इससे कार्य का दबाव बढ़ता है और नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। संगठन का कहना है कि यदि पूरे राज्य में एक समान समय व्यवस्था लागू की जाती है तो कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और विद्यालय प्रबंधन को भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:54:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>MP के 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, नई याचिका की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[2005 से 2009 के बीच भर्ती शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट दिलाने की कवायद तेज, स्कूल शिक्षा विभाग ने कानूनी राय लेने के बाद नई याचिका दायर करने की तैयारी शुरू की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/government-will-go-to-supreme-court-to-get-relief-from/article-57917"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-tet,.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 70 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (Teacher Eligibility Test-TET) की अनिवार्यता से राहत दिलाने के लिए राज्य सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में नई कानूनी रणनीति तैयार कर ली है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक सप्ताह के भीतर शीर्ष अदालत में नई याचिका दायर की जा सकती है। यह मामला वर्ष 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए शिक्षकों से जुड़ा है। सरकार का कहना है कि इन शिक्षकों का चयन तत्कालीन व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से हुआ था। ऐसे में वर्षों से सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों को दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>विधि विभाग से ली गई कानूनी सलाह</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग ने इस मामले में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी विस्तृत कानूनी राय ली है। कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि नए तथ्यों और तर्कों के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय में राहत की मांग की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि विभाग नई याचिका में उन सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को शामिल करेगा, जिनके आधार पर इन शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट मिल सके। सरकार की प्रस्तावित याचिका का सबसे महत्वपूर्ण आधार यह होगा कि वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों ने पहले ही एक कठिन और प्रतिस्पर्धात्मक चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इन शिक्षकों की नियुक्ति व्यापमं द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा और निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर हुई थी। सरकार का कहना है कि जब उम्मीदवार पहले ही योग्यता सिद्ध कर चुके हैं और वर्षों से सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे हैं, तब उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए कहना व्यावहारिक नहीं है। विभाग का मानना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव और कार्यक्षमता को भी कानूनी प्रक्रिया में महत्व मिलना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><span><strong>70 हजार शिक्षकों पर टिकी हैं उम्मीदें</strong></span></h2>
<p style="text-align:justify;">इस मामले का असर प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों पर पड़ने वाला है। यदि सुप्रीम कोर्ट सरकार की दलीलों को स्वीकार कर लेता है तो इन शिक्षकों को TET परीक्षा से स्थायी राहत मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं यदि राहत नहीं मिलती है तो संबंधित शिक्षकों को भविष्य में पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रदेशभर के शिक्षक इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>कई वर्षों से चल रहा है विवाद</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर विवाद नया नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से TET को अनिवार्य बनाया गया था। हालांकि, इससे पहले भर्ती हो चुके हजारों शिक्षकों के मामले में लगातार यह सवाल उठता रहा कि क्या पहले से चयनित और लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर भी यह नियम समान रूप से लागू होना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर पहले भी न्यायालयों में कानूनी लड़ाई लड़ी गई थी और अब राज्य सरकार फिर से इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाने की तैयारी कर रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>शिक्षकों का पक्ष भी मजबूत माना जा रहा</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">शिक्षक संगठनों का कहना है कि संबंधित शिक्षकों ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्ति प्राप्त की थी। इसके बाद वर्षों तक उन्होंने सरकारी स्कूलों में सेवाएं दी हैं और लाखों विद्यार्थियों को शिक्षित किया है। शिक्षकों का तर्क है कि सेवा के इतने लंबे अनुभव के बाद दोबारा पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता उनके साथ अन्याय होगा। उनका यह भी कहना है कि भर्ती के समय लागू नियमों के आधार पर ही उनकी नियुक्ति हुई थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि इतने बड़े स्तर पर शिक्षकों को TET से जुड़ा विवाद झेलना पड़ता है तो इसका असर स्कूल शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। प्रदेश में पहले से ही कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवा पर कानूनी अनिश्चितता बनी रहती है तो शिक्षण कार्य प्रभावित हो सकता है। इसी कारण सरकार भी इस विवाद का स्थायी समाधान चाहती है ताकि शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था दोनों में स्थिरता बनी रहे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>एक सप्ताह में दायर हो सकती है नई याचिका</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई याचिका लगभग तैयार है। कानूनी दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में इसे दायर कर दिया जाएगा। याचिका में व्यापमं की चयन प्रक्रिया, शिक्षकों की सेवा अवधि, अनुभव, भर्ती नियमों और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:41:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NCERT की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ इमरजेंसी अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[NEP 2020 के तहत पाठ्यक्रम में बदलाव, लोकतंत्र की चुनौतियों, मीडिया की भूमिका और नागरिक भागीदारी पर भी दिया गया विशेष जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/emergency-chapter-included-for-the-first-time-in-ncerts-class/article-56870"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ncert.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में पहली बार 1975-77 के आपातकाल यानी इमरजेंसी से जुड़ा अलग सेक्शन शामिल किया है। नई पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में इस दौर को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। शिक्षा क्षेत्र में इस बदलाव को नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत किए जा रहे व्यापक पाठ्यक्रम सुधारों का हिस्सा माना जा रहा है। हाल ही में देश में इमरजेंसी लागू होने के 50 वर्ष पूरे होने के बीच यह बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है। NCERT के अधिकारियों के अनुसार, कक्षा 9 के विद्यार्थियों को अब भारतीय लोकतंत्र के विकास, उसकी चुनौतियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को अधिक व्यापक तरीके से समझाया जाएगा। नई किताब में इमरजेंसी को केवल एक ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं के महत्व को समझने के संदर्भ में भी प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि 1970 के दशक के शुरुआती वर्षों में देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर लोगों के बीच असंतोष बढ़ रहा था। कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुस्तक के अनुसार जून 1975 में देश में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई थी। इस दौरान कई मौलिक अधिकारों पर प्रभाव पड़ा, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और विभिन्न राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। किताब में यह भी उल्लेख किया गया है कि उस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर व्यापक बहस हुई। छात्रों को इस दौर के राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों से परिचित कराने के लिए घटनाओं को सरल भाषा में समझाया गया है। नई पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को भी विस्तार से शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों को संगठित कर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जन आंदोलन का नेतृत्व किया। बिहार और गुजरात में हुए आंदोलनों का उल्लेख करते हुए पुस्तक यह समझाने का प्रयास करती है कि लोकतंत्र में जनभागीदारी और शांतिपूर्ण विरोध की क्या भूमिका होती है। छात्रों को यह भी बताया गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की राय और सहभागिता महत्वपूर्ण स्थान रखती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुस्तक में 1977 के आम चुनावों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। इसमें बताया गया है कि इमरजेंसी समाप्त होने के बाद चुनाव कराए गए और मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग करते हुए सरकार के पक्ष और विपक्ष में फैसला सुनाया। पुस्तक इस प्रक्रिया को लोकतंत्र की मजबूती और चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता का उदाहरण बताती है। साथ ही यह भी समझाया गया है कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन का अधिकार अंततः जनता के हाथ में होता है। इमरजेंसी के अलावा नई किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद आधुनिक चुनौतियों को भी शामिल किया गया है। इनमें फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएं, सामाजिक असमानता, क्षेत्रवाद, गरीबी, लैंगिक भेदभाव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी समस्याओं पर चर्चा की गई है। NCERT का मानना है कि छात्रों को केवल ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वर्तमान समय की चुनौतियों और नागरिक जिम्मेदारियों के बारे में भी जागरूक करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से पुस्तक में कई नए विषय जोड़े गए हैं। पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का विशेष सेक्शन भी पुस्तक का हिस्सा बनाया गया है। इस खंड का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से मजबूत होता है। इसमें मतदान, सामाजिक जिम्मेदारी, सार्वजनिक संवाद और संवैधानिक मूल्यों के महत्व को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अध्याय छात्रों में लोकतांत्रिक चेतना विकसित करने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई पुस्तक में मीडिया की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसमें मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए उसकी जिम्मेदारियों और महत्व को समझाया गया है। पुस्तक के अनुसार मीडिया न केवल सूचना पहुंचाने का माध्यम है, बल्कि यह जनता की आवाज को सामने लाने और शासन व्यवस्था को जवाबदेह बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है। छात्रों को यह भी बताया गया है कि सूचना के स्रोतों का सही मूल्यांकन करना और फेक न्यूज की पहचान करना आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। भारतीय लोकतंत्र के विशाल स्वरूप को समझाने के लिए पुस्तक में चुनावी आंकड़ों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ी जानकारी भी दी गई है। इसमें 2024 के आम चुनावों के दौरान देश में 96 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं का उल्लेख किया गया है। साथ ही देशभर में फैले मतदान केंद्रों और चुनावी प्रक्रिया की व्यापकता को भी समझाया गया है। स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पंचायतों और स्थानीय निकायों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। गुजरात और त्रिपुरा की पंचायतों के उदाहरणों के जरिए यह बताया गया है कि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र कैसे काम करता है और उसमें महिलाओं की भागीदारी किस तरह बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 12:16:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कक्षा 5वीं-8वीं की पुनर्परीक्षा शुरू, केंद्रों पर छपेंगे प्रश्नपत्र</title>
                                    <description><![CDATA[23 जून तक चलेगी पुनर्परीक्षा, मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण और अनुपस्थित विद्यार्थियों को मिला दूसरा मौका; गोपनीयता के लिए अपनाई गई नई व्यवस्था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/re-examination-of-class-5th-8th-started-question-papers-will-be-printed/article-56110"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/class-5-re-exam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य शिक्षा केंद्र के निर्देशानुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए कक्षा 5वीं और 8वीं की पुनर्परीक्षाएं मंगलवार से शुरू हो गई हैं। यह परीक्षा 23 जून तक चलेगी और इसमें वे विद्यार्थी शामिल होंगे जो मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहे थे या किसी कारणवश परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे। शिक्षा विभाग का कहना है कि पुनर्परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को एक और अवसर देना है ताकि वे अपनी शैक्षणिक प्रगति जारी रख सकें और अगली कक्षा में प्रवेश के लिए पात्र बन सकें। प्रदेशभर में जन शिक्षा केंद्र स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सभी केंद्रों पर सुबह 10 बजे से परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा के पहले दिन कई केंद्रों पर विद्यार्थी समय से पहले पहुंच गए। स्कूलों में भी परीक्षा को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। शिक्षकों और प्राचार्यों को पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए थे कि वे पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों से संपर्क बनाए रखें और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करें। इसके लिए कई स्थानों पर शिक्षकों ने विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से सीधे संपर्क कर परीक्षा की जानकारी दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बार पुनर्परीक्षा को लेकर सबसे बड़ा बदलाव प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली में किया गया है। परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने और प्रश्नपत्र लीक जैसी संभावित घटनाओं को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब प्रश्नपत्र पहले से मुद्रित होकर केंद्रों तक नहीं पहुंचेंगे। इसके बजाय परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले केंद्राध्यक्ष ऑनलाइन पोर्टल से प्रश्नपत्र डाउनलोड करेंगे और उसी केंद्र पर उनकी प्रिंटिंग कराई जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और गोपनीयता दोनों सुनिश्चित की जा सकेंगी। जिला परियोजना समन्वयकों को इस पूरी प्रक्रिया का नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है कि सभी परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल माध्यम से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था से अनावश्यक देरी और सुरक्षा संबंधी जोखिम कम होंगे। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई व्यवस्था को देखते हुए परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी संसाधनों की विशेष तैयारी की गई है। प्रत्येक केंद्र पर कम से कम दो कंप्यूटर या लैपटॉप, दो कार्यशील प्रिंटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी, पर्याप्त मात्रा में ए-4 आकार के कागज और टोनर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो। कई जिलों में बैकअप व्यवस्था भी तैयार रखी गई है, जिससे किसी उपकरण के खराब होने पर तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा संचालन को लेकर तकनीकी सुधारों पर लगातार काम किया जा रहा है। डिजिटल माध्यमों के उपयोग से न केवल प्रशासनिक कार्य आसान हुए हैं, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने में भी मदद मिली है। इस बार अपनाई गई नई व्यवस्था उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विभाग को उम्मीद है कि इससे प्रश्नपत्रों की गोपनीयता को लेकर उठने वाले सवालों पर भी रोक लगेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अवसर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्य परीक्षा में किसी कारण से सफलता हासिल नहीं कर पाने वाले छात्र अब बेहतर तैयारी के साथ दोबारा परीक्षा दे रहे हैं। कई विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें पुनर्परीक्षा का मौका मिलने से आत्मविश्वास बढ़ा है और वे बेहतर परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं। अभिभावकों ने भी इस व्यवस्था का स्वागत किया है और कहा है कि इससे बच्चों को अपनी गलतियों को सुधारने का एक और अवसर मिलता है। स्कूलों में परीक्षा को लेकर विशेष अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्राध्यक्षों को समय पर प्रश्नपत्र डाउनलोड करने, प्रिंटिंग प्रक्रिया की निगरानी करने और परीक्षा शुरू होने तक गोपनीयता बनाए रखने के लिए कहा गया है। वहीं शिक्षकों को परीक्षा कक्षों में निष्पक्ष वातावरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों के अनुसार किसी भी तरह की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। प्रदेश में हजारों विद्यार्थी इस पुनर्परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी और ड्रॉपआउट की संभावना भी कम होगी। विभाग ने विद्यार्थियों से समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने और परीक्षा से संबंधित सभी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:52:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत, शाला प्रवेश उत्सव आज से</title>
                                    <description><![CDATA[27 जून तक चलेगा अभियान, विद्यार्थियों को मिलेंगी मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल; स्कूलों में तिलक लगाकर किया गया स्वागत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/school-entrance-festival-starts-from-today-in-chhattisgarh/article-56104"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-school-reopening.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत सोमवार से हो गई। गर्मी की लंबी छुट्टियों के बाद प्रदेशभर के सरकारी और निजी स्कूलों में एक बार फिर बच्चों की चहल-पहल लौट आई। स्कूलों के गेट सुबह से ही विद्यार्थियों की आवाजाही से गुलजार नजर आए। कहीं बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया तो कहीं उन्हें फूल, चॉकलेट और नई किताबें भेंट कर नए सत्र की शुभकामनाएं दी गईं। राज्य सरकार की ओर से शुरू किए गए शाला प्रवेश उत्सव के साथ इस बार शिक्षा से वंचित बच्चों को स्कूलों तक लाने और नामांकन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह अभियान 16 जून से 27 जून तक चलेगा, जबकि 30 जून को राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्कूल खुलने के पहले दिन उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। सुबह-सुबह स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर पहुंचे बच्चे अपने दोस्तों और शिक्षकों से मिलकर उत्साहित दिखाई दिए। कई स्कूलों में शिक्षकों ने प्रवेश द्वार पर ही बच्चों का स्वागत किया। पहली बार स्कूल पहुंचे छोटे बच्चों के लिए यह दिन खास रहा। नए बैग, नई किताबें और नए माहौल को लेकर उनमें उत्सुकता साफ दिखाई दे रही थी। कई अभिभावक भी अपने बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचे और उनके साथ इस नई शुरुआत का हिस्सा बने। राज्य सरकार की ओर से इस सत्र में भी विद्यार्थियों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के छात्रों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म दी जाएंगी। वहीं पात्र विद्यार्थियों को साइकिल वितरण योजना का लाभ भी मिलेगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना और स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति को कम करना है। अधिकारियों के अनुसार सभी जिलों में सामग्री वितरण की तैयारी पहले ही पूरी कर ली गई थी ताकि बच्चों को सत्र की शुरुआत से ही आवश्यक संसाधन मिल सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धमतरी जिले में भी नए शिक्षा सत्र का शुभारंभ उत्साह और उल्लास के साथ हुआ। गोकुलपुर प्राथमिक शाला में सुबह राज्य गीत और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। विद्यालय पहुंचे बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया और उन्हें चॉकलेट वितरित की गई। स्कूल परिसर में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल रहा। बच्चों ने अपने नए साथियों और शिक्षकों से परिचय किया और विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। कई बच्चे लंबे अवकाश के बाद अपने दोस्तों से मिलकर बेहद खुश नजर आए। शिक्षकों का कहना है कि लगभग दो महीने की छुट्टियों के बाद बच्चों को फिर से पढ़ाई की लय में लाना आसान नहीं होता। इसी को ध्यान में रखते हुए स्कूल खुलने से पहले व्यापक तैयारियां की गई थीं। कक्षाओं की साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं को व्यवस्थित किया गया। कई स्कूलों में परिसर की रंगाई-पुताई और मरम्मत का काम भी कराया गया ताकि विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण मिल सके। पहले दिन बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल के नियमों और अनुशासन के बारे में भी जानकारी दी गई। शाला प्रवेश उत्सव का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को स्कूलों से जोड़ना है जो किसी कारणवश शिक्षा से दूर हैं। शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम गांव-गांव जाकर ऐसे बच्चों की पहचान कर रही है। शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है। अभियान के दौरान अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा और बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से नामांकन दर बढ़ाने में मदद मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्कूल खुलने को लेकर खास उत्साह देखा गया। कई गांवों में बच्चों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। कुछ स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। स्थानीय समुदाय और जनप्रतिनिधियों ने भी स्कूल पहुंचकर विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनाना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 30 जून को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्कूल शिक्षा मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों को भी प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:20:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हर स्कूल में थिएटर विषय होना चाहिए, बोले एनएसडी निदेशक</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में चितरंजन त्रिपाठी ने कला और शिक्षा के रिश्ते पर रखी बात, कहा- चिंटू की प्रतिभा को भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए जितनी पिंटू के अंकों को]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/nsd-director-said-theater-should-be-a-subject-in-every/article-55321"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nsd-director.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने कहा है कि देश की शिक्षा व्यवस्था में थिएटर को केवल एक अतिरिक्त गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे स्कूल शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। जयपुर में आयोजित थिएटर वर्कशॉप ‘कोलाज ऑफ किलकारी’ के समापन समारोह में उन्होंने कला, संगीत और रंगमंच के महत्व पर विस्तार से बात की। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और समाज के उस नजरिए की भी चर्चा की, जिसमें अक्सर अकादमिक उपलब्धियों को कला और रचनात्मक प्रतिभा से अधिक महत्व दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों, शिक्षकों और रंगकर्मियों को संबोधित करते हुए त्रिपाठी ने एक काल्पनिक उदाहरण के जरिए अपनी बात समझाई। उन्होंने कहा कि लगभग हर स्कूल में दो तरह के बच्चे होते हैं। एक वह छात्र जो पढ़ाई में बहुत अच्छे अंक लाता है और दूसरा वह जो पढ़ाई के साथ-साथ संगीत, अभिनय, चित्रकला या किसी अन्य कला में असाधारण प्रतिभा रखता है। उन्होंने इन दोनों छात्रों को प्रतीकात्मक रूप से ‘पिंटू’ और ‘चिंटू’ का नाम दिया। उनके अनुसार समाज और स्कूल व्यवस्था अक्सर पिंटू को ज्यादा महत्व देती है, क्योंकि अच्छे अंकों को सफलता का पैमाना मान लिया गया है। दूसरी ओर चिंटू की प्रतिभा को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता, जबकि वह कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय क्षमता रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चितरंजन त्रिपाठी ने कहा कि यह विडंबना तब और स्पष्ट दिखाई देती है जब स्कूलों में कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित होता है। किसी मंत्री, सांसद, अधिकारी या विशेष अतिथि के आने पर अचानक उन बच्चों की जरूरत महसूस होती है जो गाना गा सकते हैं, नाटक कर सकते हैं या मंच संचालन कर सकते हैं। तब वही छात्र, जिन्हें सामान्य दिनों में केवल अतिरिक्त गतिविधियों तक सीमित समझा जाता है, कार्यक्रम का केंद्र बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समय के लिए इन बच्चों को सम्मान मिलता है, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होते ही वे फिर से उसी स्थिति में पहुंच जाते हैं जहां उनकी प्रतिभा को मुख्यधारा का हिस्सा नहीं माना जाता।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में यह सोच बदलने की जरूरत है। कला, संगीत और रंगमंच केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। थिएटर बच्चों में आत्मविश्वास विकसित करता है, संवाद कौशल को मजबूत बनाता है और उन्हें समाज तथा जीवन को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखने की क्षमता देता है। उनके अनुसार मंच पर कोई बच्चा जब किसान, सैनिक, शिक्षक, राजा या आम नागरिक की भूमिका निभाता है तो वह केवल अभिनय नहीं कर रहा होता, बल्कि वह जीवन के विभिन्न अनुभवों को समझने की प्रक्रिया से गुजर रहा होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान चितरंजन त्रिपाठी ने राजस्थान में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए जाने की मांग का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एक रंगकर्मी के रूप में उनकी इच्छा है कि देश के हर राज्य में एनएसडी का एक क्षेत्रीय केंद्र हो। इससे स्थानीय कलाकारों को बेहतर प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे और उन्हें रंगमंच की शिक्षा के लिए दिल्ली आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने माना कि राजस्थान जैसी सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भूमि में ऐसे केंद्र की संभावनाएं काफी मजबूत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी नए केंद्र की स्थापना केवल इच्छा से संभव नहीं है। इसके लिए भूमि, भवन, वित्तीय संसाधन, तकनीकी सुविधाएं और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होती है। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और सहमति भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि एनएसडी का निदेशक होने के नाते वह कोई ऐसा वादा नहीं करना चाहते जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर हो, लेकिन व्यक्तिगत रूप से वह इस पहल का समर्थन करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">त्रिपाठी ने भारतीय रंगमंच की ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में नाट्यकला की जड़ें हजारों वर्ष पुरानी हैं। भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में भी रंगमंच को समाज के मानसिक और सांस्कृतिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में नाटक केवल मनोरंजन का साधन नहीं था, बल्कि समाज को शिक्षित करने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने का माध्यम भी था। उनका मानना है कि रंगमंच तनाव और अवसाद को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनएसडी की गतिविधियों पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस वर्ष देशभर में 92 शहरों में थिएटर कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। पहले गर्मी की छुट्टियों में सीमित संख्या में कार्यशालाएं होती थीं, लेकिन अब इसका दायरा काफी बढ़ चुका है। इन कार्यशालाओं में केवल रंगकर्मियों को ही नहीं, बल्कि ट्रांसजेंडर समुदाय, वरिष्ठ नागरिकों, जेल बंदियों, झुग्गी बस्तियों के बच्चों और समाज के अन्य वंचित वर्गों को भी शामिल किया जा रहा है। उनका उद्देश्य रंगमंच को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में नाट्यकला को पंचम वेद का दर्जा प्राप्त था, लेकिन समय के साथ इसे केवल अतिरिक्त गतिविधि तक सीमित कर दिया गया। उनके अनुसार अब समय आ गया है कि थिएटर को फिर से मुख्यधारा में लाया जाए और शिक्षा व्यवस्था में उसे वह स्थान दिया जाए जिसका वह हकदार है। उनका मानना है कि यदि स्कूलों में थिएटर को विषय के रूप में शामिल किया जाए तो इससे केवल कलाकार ही नहीं, बल्कि बेहतर और संवेदनशील नागरिक भी तैयार होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:04:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>CBSE 12th Result 2026 जारी, 85.20% छात्र हुए पास, ऐसे करें चेक</title>
                                    <description><![CDATA[CBSE 12th Result 2026 घोषित, 85.20% छात्र पास। जानें रिजल्ट चेक करने का तरीका वेबसाइट, UMANG ऐप और डिजिलॉकर से।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/cbse-12th-result-2026-released-8520-students-passed-check-this/article-53270"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t142353.547.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CBSE <span lang="hi" xml:lang="hi">12वीं का रिजल्ट 2026 आखिरकार आ गया है और छात्रों के चेहरे पर राहत साफ नजर आ रही है। सीबीएसई बोर्ड ने परिणाम को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपलोड कर दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे छात्र आसानी से अपने स्कोरकार्ड देख सकते हैं। जिन लोगों ने परीक्षा दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो </span>cbse.gov.in <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>results.cbse.nic.in <span lang="hi" xml:lang="hi">पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। सुबह से वेबसाइट पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक देखने को मिला और कई बार पेज खुलने में थोड़ी दिक्कत हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बाद में सिस्टम सामान्य हो गया। छात्र लगातार अपने रोल नंबर डालकर रिजल्ट देखने की कोशिश कर रहे थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस साल का कुल पास प्रतिशत 85.20% है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पिछले साल की तुलना में बेहतर माना जा रहा है। बोर्ड के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों ने इस बार अच्छा प्रदर्शन किया है और कई स्कूलों के शानदार नतीजे आए हैं। रिजल्ट जारी होते ही स्कूलों में हलचल बढ़ गई और टीचर्स ने छात्रों को बधाई संदेश भेजने शुरू कर दिए। लंबे समय से छात्र-छात्राएं इस रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे और जैसे ही परिणाम की घोषणा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई छात्रों ने अपने भविष्य की योजनाओं को लेकर खुशी जताई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन लोगों ने जो कॉलेज एडमिशन की तैयारी कर रहे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ क्षेत्रों में पास प्रतिशत में थोड़ा सुधार भी देखने को मिला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विस्तृत आधिकारिक डेटा बाद में जारी किया जाएगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रिजल्ट चेक करने की प्रक्रिया इस बार काफी आसान रखी गई है। छात्रों को सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">cbse.gov.in <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>results.cbse.nic.in <span lang="hi" xml:lang="hi">पर जाना है और वहां दिए गए </span>CBSE <span lang="hi" xml:lang="hi">12</span>th Result <span lang="hi" xml:lang="hi">लिंक पर क्लिक करना है। इसके बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें अपना रोल नंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जन्म तिथि और रजिस्ट्रेशन डिटेल्स भरनी होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और फिर उनका स्कोरकार्ड स्क्रीन पर आ जाता है। कई छात्र मोबाइल से भी रिजल्ट देख रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि वेबसाइट मोबाइल फ्रेंडली है और आसानी से खुल जाती है। इसके अलावा</span>, UMANG <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐप के जरिए भी छात्र अपना रिजल्ट देख सकते हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें लॉगिन करने के बाद </span>CBSE <span lang="hi" xml:lang="hi">सेक्शन में जाकर मार्कशीट डाउनलोड की जा सकती है। डिजिलॉकर पर भी स्कोरकार्ड उपलब्ध है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां स्कूल द्वारा दिए गए एक्सेस कोड और रोल नंबर की मदद से रजिस्ट्रेशन करना होता है। ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद छात्र अपने दस्तावेज डाउनलोड कर सकते हैं और भविष्य के लिए सेव भी कर सकते हैं। कई स्कूलों ने छात्रों को सलाह दी है कि वो ऑनलाइन कॉपी के साथ-साथ हार्ड कॉपी भी सुरक्षित रखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि कॉलेज एडमिशन में इसकी जरूरत पड़ेगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 14:24:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>CG Board Result 2026: कल दोपहर 2:30 बजे जारी होंगे 10वीं-12वीं के रिजल्ट, ऐसे देख सकेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[CG Board Result 2026 कल 29 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे जारी होगा। 10वीं-12वीं के 5.66 लाख छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर रोल नंबर से रिजल्ट देख सकेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cg-board-result-2026-will-be-released-tomorrow-at-230/article-52286"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-board-result-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) 29 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित करेगा। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इसकी आधिकारिक जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की है। CG Board Result 2026 का इंतजार कर रहे 10वीं और 12वीं के करीब 5.66 लाख छात्र-छात्राओं का इंतजार अब खत्म होने वाला है। बोर्ड के अनुसार, परिणाम जारी होते ही विद्यार्थी मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर रोल नंबर दर्ज कर अपना रिजल्ट देख सकेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">माध्यमिक शिक्षा मंडल के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में कुल 5,66,320 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था। इनमें हाईस्कूल यानी 10वीं के 3,20,535 और हायर सेकेंडरी यानी 12वीं के 2,45,785 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। इस बार भी 10वीं के परीक्षार्थियों की संख्या 12वीं के मुकाबले अधिक रही। अनुपात के हिसाब से हाईस्कूल में हायर सेकेंडरी की तुलना में करीब 31 फीसदी ज्यादा विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कैसे देखें रिजल्ट?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र CGBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रोल नंबर दर्ज कर परिणाम देख सकेंगे। बोर्ड ने छात्रों से अपील की है कि वेबसाइट पर केवल आधिकारिक लिंक का ही उपयोग करें और किसी अनधिकृत प्लेटफॉर्म से बचें। परिणाम के साथ मार्कशीट का डिजिटल प्रारूप भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे छात्र आगे की प्रक्रिया के लिए डाउनलोड कर सकेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, बोर्ड ने रिजल्ट प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सुचारु रखने के लिए सर्वर और ऑनलाइन व्यवस्था को अपडेट किया है, ताकि एक साथ बड़ी संख्या में लॉगिन होने पर भी छात्रों को परेशानी न हो। परिणाम घोषित होने के बाद मेरिट लिस्ट, पास प्रतिशत और टॉपर्स की जानकारी भी जारी की जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पिछले साल छत्तीसगढ़ बोर्ड के परिणामों में छात्राओं ने बेहतर प्रदर्शन किया था। इस बार भी लड़कियों और लड़कों के पास प्रतिशत को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में 10वीं में करीब 3.23 लाख और 12वीं में 2.38 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जबकि इस बार 12वीं के परीक्षार्थियों की संख्या बढ़ी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस बार 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण करीब 1400 छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। हालांकि कुल पंजीयन पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ा। बोर्ड ने पहले ही साफ कर दिया था कि उपस्थिति नियम में ढील नहीं दी जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे परिणाम को संतुलित दृष्टिकोण से लें। अच्छे अंक आने पर आगे की तैयारी पर ध्यान दें और उम्मीद से कम अंक मिलने पर निराश न हों।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 18:36:31 +0530</pubDate>
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