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                <title>Government Jobs - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Government Jobs RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में NOC विवाद, हाईकोर्ट ने 120 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीति शास्त्र के सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति पर उठे सवाल, उच्च शिक्षा सचिव और सीजीपीएससी को पूरे मामले की जांच कर तय समय में निर्णय लेने के निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/noc-controversy-in-assistant-professor-recruitment-high-court-asked-for/article-58488"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-high-court-(10).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितता के मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच कर 120 दिनों के भीतर उचित निर्णय लिया जाए। मामला राजनीति शास्त्र विषय में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति से जुड़ा है, जहां आरोप लगाया गया है कि हरियाणा सरकार में पहले से कार्यरत एक उम्मीदवार को आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बिना ही नियुक्ति दे दी गई। इस मामले को लेकर रायगढ़ निवासी अली हसन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब उच्च शिक्षा सचिव और सीजीपीएससी को पूरे रिकॉर्ड की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी। माना जा रहा है कि यह फैसला भविष्य की सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता अली हसन ने अपनी याचिका में बताया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2019 में राजनीति शास्त्र विषय के सहायक प्राध्यापक के 59 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्ष 2021 में अंतिम चयन सूची प्रकाशित की गई, जिसमें अली हसन को अनारक्षित वर्ग की प्रतीक्षा सूची में पहला स्थान मिला। चयन सूची का अध्ययन करने के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि मुख्य चयन सूची में शामिल रंजन तिवारी पहले से हरियाणा सरकार के उच्चतर शिक्षा निदेशालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। इसके बाद अली हसन ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत हरियाणा सरकार से संबंधित जानकारी मांगी। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार रंजन तिवारी 13 फरवरी 2020 से हरियाणा के महेंद्रगढ़ स्थित शासकीय महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवा दे रहे थे। याचिका में दावा किया गया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में नियुक्ति के लिए अपने वर्तमान नियोक्ता से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया था और न ही उसे प्रस्तुत किया गया। इसके बावजूद 29 अप्रैल 2022 को उनकी नियुक्ति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भाटापारा, जिला बलौदाबाजार में कर दी गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह नियुक्ति सेवा नियमों और भर्ती प्रक्रिया की शर्तों के विपरीत है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थानों में कार्यरत अभ्यर्थियों के लिए नई नियुक्ति स्वीकार करने से पहले संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होता है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि किसी भी कर्मचारी की सेवा स्थिति स्पष्ट रहे और नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। याचिका में यह भी कहा गया कि भर्ती नियमों के अनुसार यदि कोई अभ्यर्थी गलत जानकारी देता है या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है और उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी संभव है। मामले को मजबूत करने के लिए याचिकाकर्ता ने भाटापारा शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी। कॉलेज प्रशासन ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि रंजन तिवारी ने 23 मई 2022 को कार्यभार ग्रहण किया था, लेकिन उनके कार्यालय रिकॉर्ड में नियोक्ता का अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। इस तथ्य को अदालत ने भी गंभीरता से लिया। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकल पीठ में हुई। अदालत ने तत्काल नियुक्ति रद्द करने का आदेश नहीं दिया, बल्कि उच्च शिक्षा सचिव और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और उपलब्ध दस्तावेजों, सेवा नियमों तथा संबंधित तथ्यों के आधार पर 120 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लें। हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सरकारी नियुक्तियों में नियमों का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी चूक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस आदेश के बाद अब सभी की निगाहें जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि जांच में याचिकाकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो नियुक्ति पर प्रभाव पड़ सकता है और प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों के अधिकारों पर भी निर्णय लिया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:50:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MP के 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, नई याचिका की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[2005 से 2009 के बीच भर्ती शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट दिलाने की कवायद तेज, स्कूल शिक्षा विभाग ने कानूनी राय लेने के बाद नई याचिका दायर करने की तैयारी शुरू की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/government-will-go-to-supreme-court-to-get-relief-from/article-57917"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-tet,.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 70 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (Teacher Eligibility Test-TET) की अनिवार्यता से राहत दिलाने के लिए राज्य सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में नई कानूनी रणनीति तैयार कर ली है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक सप्ताह के भीतर शीर्ष अदालत में नई याचिका दायर की जा सकती है। यह मामला वर्ष 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए शिक्षकों से जुड़ा है। सरकार का कहना है कि इन शिक्षकों का चयन तत्कालीन व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से हुआ था। ऐसे में वर्षों से सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों को दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>विधि विभाग से ली गई कानूनी सलाह</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग ने इस मामले में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी विस्तृत कानूनी राय ली है। कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि नए तथ्यों और तर्कों के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय में राहत की मांग की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि विभाग नई याचिका में उन सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को शामिल करेगा, जिनके आधार पर इन शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट मिल सके। सरकार की प्रस्तावित याचिका का सबसे महत्वपूर्ण आधार यह होगा कि वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों ने पहले ही एक कठिन और प्रतिस्पर्धात्मक चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इन शिक्षकों की नियुक्ति व्यापमं द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा और निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर हुई थी। सरकार का कहना है कि जब उम्मीदवार पहले ही योग्यता सिद्ध कर चुके हैं और वर्षों से सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे हैं, तब उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए कहना व्यावहारिक नहीं है। विभाग का मानना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव और कार्यक्षमता को भी कानूनी प्रक्रिया में महत्व मिलना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><span><strong>70 हजार शिक्षकों पर टिकी हैं उम्मीदें</strong></span></h2>
<p style="text-align:justify;">इस मामले का असर प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों पर पड़ने वाला है। यदि सुप्रीम कोर्ट सरकार की दलीलों को स्वीकार कर लेता है तो इन शिक्षकों को TET परीक्षा से स्थायी राहत मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं यदि राहत नहीं मिलती है तो संबंधित शिक्षकों को भविष्य में पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रदेशभर के शिक्षक इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>कई वर्षों से चल रहा है विवाद</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर विवाद नया नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से TET को अनिवार्य बनाया गया था। हालांकि, इससे पहले भर्ती हो चुके हजारों शिक्षकों के मामले में लगातार यह सवाल उठता रहा कि क्या पहले से चयनित और लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर भी यह नियम समान रूप से लागू होना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर पहले भी न्यायालयों में कानूनी लड़ाई लड़ी गई थी और अब राज्य सरकार फिर से इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाने की तैयारी कर रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>शिक्षकों का पक्ष भी मजबूत माना जा रहा</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">शिक्षक संगठनों का कहना है कि संबंधित शिक्षकों ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्ति प्राप्त की थी। इसके बाद वर्षों तक उन्होंने सरकारी स्कूलों में सेवाएं दी हैं और लाखों विद्यार्थियों को शिक्षित किया है। शिक्षकों का तर्क है कि सेवा के इतने लंबे अनुभव के बाद दोबारा पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता उनके साथ अन्याय होगा। उनका यह भी कहना है कि भर्ती के समय लागू नियमों के आधार पर ही उनकी नियुक्ति हुई थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि इतने बड़े स्तर पर शिक्षकों को TET से जुड़ा विवाद झेलना पड़ता है तो इसका असर स्कूल शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। प्रदेश में पहले से ही कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवा पर कानूनी अनिश्चितता बनी रहती है तो शिक्षण कार्य प्रभावित हो सकता है। इसी कारण सरकार भी इस विवाद का स्थायी समाधान चाहती है ताकि शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था दोनों में स्थिरता बनी रहे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>एक सप्ताह में दायर हो सकती है नई याचिका</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई याचिका लगभग तैयार है। कानूनी दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में इसे दायर कर दिया जाएगा। याचिका में व्यापमं की चयन प्रक्रिया, शिक्षकों की सेवा अवधि, अनुभव, भर्ती नियमों और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:41:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पांच मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई। याचिका में भर्ती नियमों के उल्लंघन का दावा किया गया है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया और पूर्व की गई भर्तियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/high-court-bans-direct-recruitment-of-deans-in-medical-colleges/article-57740"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-medical-college-dean.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों में डीन पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने 18 मई 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश 30 जून को जस्टिस विशाल धागत की एकलपीठ ने सुनाया। अदालत के इस अंतरिम फैसले के बाद संबंधित भर्ती प्रक्रिया फिलहाल स्थगित हो गई है और अब सरकार को भर्ती नियमों के अनुरूप अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। यह मामला रीवा के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. मनोज इंदुलकर द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिका में दावा किया गया कि मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा भर्ती नियम, 2023 के अनुसार डीन का पद शत-प्रतिशत पदोन्नति से भरा जाना निर्धारित है। ऐसे में इन पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करना नियमों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एल.सी. पाटनी ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि जब सेवा नियम स्पष्ट रूप से पदोन्नति का प्रावधान करते हैं, तब प्रत्यक्ष भर्ती की प्रक्रिया शुरू करना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। इन दलीलों पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत ने भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला सुनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट के इस आदेश का सीधा असर प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों पर पड़ेगा। इनमें नए मेडिकल कॉलेज बुधनी, छतरपुर और दमोह के अलावा दो अन्य कॉलेज भी शामिल हैं, जहां डीन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी। इन संस्थानों में प्रशासनिक नेतृत्व की नियुक्ति अब न्यायालय के अंतिम निर्णय तक प्रभावित रह सकती है। नए मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए डीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया रुकने से विभाग को वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखनी पड़ सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर एसोसिएशन (पीएमटीए) ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का स्वागत किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीया ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा सेवा भर्ती नियमों में डीन का पद पूरी तरह पदोन्नति का पद निर्धारित किया गया है। इसके बावजूद सरकार ने सीधी भर्ती का रास्ता अपनाया, जो नियमों की भावना के अनुरूप नहीं था। उनका कहना है कि वरिष्ठ शिक्षकों को उनके अनुभव और सेवा के आधार पर पदोन्नति का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतिम सुनवाई में भी अदालत सेवा नियमों को ध्यान में रखते हुए निर्णय देगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले को और दिलचस्प बनाने वाली बात यह है कि इसी बीच सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 30 जून को सभी विभागों को पदोन्नति प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन के विधिक अभिमत के आधार पर जारी किए गए। विधिक राय में कहा गया कि पदोन्नति नियम-2025 पर किसी भी न्यायालय द्वारा अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है। इसलिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित कर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि ऐसी सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। ऐसे में एक ओर सरकार पदोन्नति प्रक्रिया जारी रखने की बात कर रही है, जबकि दूसरी ओर चिकित्सा शिक्षा विभाग में डीन पदों पर सीधी भर्ती को लेकर न्यायिक विवाद खड़ा हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद वर्ष 2024 में हुई डीन की सीधी नियुक्तियां भी चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। प्रदेश के 13 ऑटोनॉमस मेडिकल कॉलेजों में डीन के पदों को दो वर्ष पहले वैधानिक कारणों का हवाला देकर शासकीय घोषित किया गया था। इसके बाद नए मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए कुल 19 डीन पदों पर सीधी भर्ती की गई थी। वर्तमान में इनमें से दो पद रिक्त बताए जा रहे हैं, जबकि तीन नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने वाले हैं। इन्हीं पांच रिक्त पदों को भरने के लिए 18 मई 2026 को नया भर्ती विज्ञापन जारी किया गया था। अब अदालत द्वारा इस विज्ञापन पर रोक लगाए जाने के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि यदि सेवा नियमों में वास्तव में पदोन्नति का ही प्रावधान है, तो पहले की गई सीधी नियुक्तियों की वैधानिक स्थिति क्या होगी। हालांकि इस संबंध में अभी अदालत ने कोई टिप्पणी नहीं की है और यह विषय भविष्य की सुनवाई में सामने आ सकता है। अब इस मामले में राज्य सरकार को निर्धारित समय सीमा के भीतर हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना होगा। सरकार यह स्पष्ट करेगी कि किन परिस्थितियों और कानूनी आधार पर डीन पदों के लिए सीधी भर्ती का निर्णय लिया गया। इसके बाद अदालत दोनों पक्षों की दलीलों और सेवा भर्ती नियमों का परीक्षण करेगी। यदि अदालत यह मानती है कि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो भर्ती प्रक्रिया में व्यापक बदलाव संभव हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 09:58:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्यप्रदेश में 2548 आंगनबाड़ी पदों पर भर्ती, 12वीं पास स्थानीय महिलाओं से 13 जुलाई तक आवेदन</title>
                                    <description><![CDATA[महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के रिक्त पदों पर ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी और आवेदन केवल एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/recruitment-for-2548-anganwadi-posts-in-madhya-pradesh-applications-from/article-57708"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-anganwadi-recruitment.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने राज्यभर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सहायिका के कुल 2548 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग की ओर से जारी सूचना के अनुसार, इनमें 781 पद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 1767 पद आंगनबाड़ी सहायिका के हैं। इच्छुक और पात्र महिलाएं 13 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित होगी और आवेदन केवल एमपी ऑनलाइन के निर्धारित चयन पोर्टल के जरिए ही स्वीकार किए जाएंगे। विभाग ने साफ कर दिया है कि किसी भी प्रकार का ऑफलाइन आवेदन मान्य नहीं होगा। इस भर्ती का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संबंधित गांव या शहरी वार्ड की स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, भर्ती पारदर्शी और निर्धारित नियमों के तहत की जाएगी। जिन गांवों या शहरी वार्डों में पद रिक्त हैं, केवल वहीं की स्थायी निवासी महिलाएं आवेदन करने की पात्र होंगी। यदि कोई महिला किसी दूसरे गांव या दूसरे वार्ड की निवासी है तो वह उस पद के लिए आवेदन नहीं कर सकेगी। विभाग का मानना है कि स्थानीय महिलाओं की नियुक्ति से आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन अधिक प्रभावी होगा और बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा धात्री माताओं तक सरकारी योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से पहुंच सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आवेदन करने वाली अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं कक्षा उत्तीर्ण निर्धारित की गई है। यदि किसी अभ्यर्थी ने किसी अन्य राज्य या बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास की है तो उसकी अंकसूची तभी मान्य होगी, जब उसे माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की समकक्षता सूची में शामिल किया गया हो। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवेदन के दौरान सभी आवश्यक प्रमाणपत्र और दस्तावेज पीडीएफ प्रारूप में ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा। दस्तावेजों की जांच के बाद ही आवेदन को अंतिम रूप से स्वीकार किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आयु सीमा को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। एक जनवरी 2026 की स्थिति में आवेदिका की आयु कम से कम 18 वर्ष और अधिकतम 35 वर्ष होनी चाहिए। आयु प्रमाण के लिए 10वीं कक्षा की अंकसूची या उससे संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य रहेगा। आवेदन के दौरान दी गई जानकारी का सत्यापन बाद की प्रक्रिया में किया जाएगा। यदि किसी अभ्यर्थी द्वारा गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं तो उसका आवेदन निरस्त किया जा सकता है और नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होने के कारण अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क भी डिजिटल माध्यम से जमा करना होगा। आवेदन के लिए 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी अलग से देय होगा। आवेदन जमा करने के बाद यदि किसी प्रकार की त्रुटि रह जाती है तो विभाग ने उसमें सुधार का अवसर भी दिया है। अभ्यर्थी 15 जुलाई तक अपने आवेदन पत्र में आवश्यक संशोधन कर सकेंगी। इसके बाद किसी भी प्रकार का परिवर्तन स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि आवेदन भरने से पहले सभी दिशा-निर्देश ध्यानपूर्वक पढ़ लें और दस्तावेजों की जांच कर लें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य के विभिन्न जिलों में रिक्त पदों की संख्या अलग-अलग है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, धार जिले में सबसे अधिक 112 पद खाली हैं, जिनमें 30 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 82 सहायिका के पद शामिल हैं। इसके अलावा रतलाम में 93, विदिशा में 92, बैतूल में 91, राजगढ़ में 89, छिंदवाड़ा में 86 और सागर जिले में 72 पदों पर भर्ती की जाएगी। अन्य जिलों में भी रिक्त पदों के अनुसार नियुक्तियां की जाएंगी। विभाग का कहना है कि सभी पदों के लिए चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर पूरी की जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनका मुख्य कार्य बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, टीकाकरण कार्यक्रमों में सहयोग, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाना होता है। इसी कारण विभाग स्थानीय महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है ताकि समुदाय के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:07:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की सीमा हटेगी, सीएम ने ड्राफ्ट निरस्त किया</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विवादित प्रस्तावित नियम वापस लेने के निर्देश दिए, अब दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों को अपात्र ठहराने वाला प्रावधान हटाकर नया मसौदा तैयार किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-limit-of-two-children-for-government-jobs-in-madhya/article-55515"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-government-jobs.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर बड़ा फैसला लेते हुए दो बच्चों की सीमा संबंधी विवादित प्रावधान को वापस लेने का निर्णय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 के उस प्रस्तावित मसौदे को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को शासकीय सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रावधान शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद सामान्य प्रशासन विभाग को तत्काल प्रभाव से ड्राफ्ट हटाने और संशोधित प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार के इस कदम को लाखों युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से इस प्रस्तावित नियम को लेकर प्रदेशभर में चर्चा चल रही थी। विभिन्न सामाजिक संगठनों, कर्मचारी संगठनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच इस प्रावधान को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। कई लोगों का मानना था कि यह नियम बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए अवसर सीमित कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग ने 6 जून 2026 को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 का प्रारूप जारी किया था। इस मसौदे में यह प्रावधान शामिल किया गया था कि जिन उम्मीदवारों की दो से अधिक जीवित संतान होंगी, उन्हें सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जा सकता है। जैसे ही यह प्रस्ताव सार्वजनिक हुआ, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई वर्गों ने इसे कठोर और विवादास्पद कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे जनसंख्या नियंत्रण से जोड़कर समर्थन भी किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे मामले की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि सरकार को विभिन्न पक्षों से सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मौजूदा ड्राफ्ट को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और इसे सरकारी पोर्टल से हटाया जाए। साथ ही नया संशोधित मसौदा तैयार किया जाए, जिसमें दो बच्चों की अधिकतम सीमा से जुड़ा प्रावधान शामिल न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">भोपाल में प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर काफी चर्चा रही। अधिकारियों के अनुसार सरकार का उद्देश्य ऐसा नियम बनाना है जो व्यावहारिक हो और व्यापक जनहित को ध्यान में रखे। इसी वजह से नए प्रारूप पर दोबारा काम किया जाएगा। माना जा रहा है कि विभाग जल्द ही संशोधित मसौदा सार्वजनिक कर सकता है, जिस पर फिर से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन युवाओं पर पड़ेगा जो आने वाले समय में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित नियम लागू होने की स्थिति में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की पात्रता प्रभावित हो सकती थी। ऐसे में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अभ्यर्थियों के बीच राहत का माहौल देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वर्तमान में कार्यरत कई सरकारी कर्मचारी भी इस प्रस्ताव को लेकर चिंतित बताए जा रहे थे। कर्मचारियों के बीच यह आशंका थी कि भविष्य में सेवा संबंधी नियमों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया था, लेकिन प्रस्ताव सामने आने के बाद चर्चाओं का दौर लगातार जारी था। अब ड्राफ्ट वापस लिए जाने के बाद इन आशंकाओं पर भी विराम लग गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार ने जनभावनाओं और विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया है। हाल के वर्षों में कई राज्यों में दो बच्चों की नीति को लेकर अलग-अलग प्रकार की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में इसे लेकर कानूनी और सामाजिक बहस भी सामने आई है। मध्य प्रदेश में भी प्रस्तावित नियम के सार्वजनिक होते ही इसी तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अनुसार नया मसौदा तैयार करते समय भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवहारिक बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी वर्ग के साथ अनावश्यक भेदभाव जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि संशोधित प्रारूप तैयार करने से पहले सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जाए। मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस फैसले को राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता भी काफी हद तक समाप्त हो गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:06:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>CGPSC भर्ती घोटाले में फिर बड़ी कार्रवाई: परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के घर रेड</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर, दुर्ग और भिलाई में जांच एजेंसियों की छापेमारी से मचा हड़कंप, भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/big-action-again-in-cgpsc-recruitment-scam-raid-at-the/article-54868"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cgpsc-scam-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य की चर्चित भर्ती अनियमितता मामले में जांच एजेंसियों ने रायपुर, दुर्ग और भिलाई सहित कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की है। इस कार्रवाई के केंद्र में परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जेके ध्रुव और राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलखो के निवास शामिल रहे। सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई ने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार जांच टीम ने रायपुर स्थित परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के निवास पर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। वहीं भिलाई सेक्टर-10 स्थित रिटायर्ड आईएएस जेके ध्रुव के घर पर भी अधिकारियों की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों का परीक्षण किया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए संबंधित परिसरों के बाहर पुलिस बल भी तैनात किया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">CGPSC भर्ती घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस दौरान आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के मानकों का पालन नहीं किया गया और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों तथा करीबी उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि चयन प्रक्रिया के दौरान कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ देकर डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी एसपी और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां दिलाई गईं। इससे हजारों योग्य और प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होने की आशंका जताई गई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>प्रश्नपत्र लीक और पक्षपात के आरोप</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार तत्कालीन आयोग पदाधिकारियों पर परीक्षा गोपनीयता भंग करने और प्रश्नपत्र लीक करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया। आरोपों के अनुसार कुछ उम्मीदवारों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाए गए, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिला। जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान किन-किन स्तरों पर नियमों की अनदेखी हुई और किन अधिकारियों की इसमें भूमिका रही।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पूर्व अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों पर जांच का दायरा</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दायरे में केवल अधिकारी ही नहीं बल्कि चयनित अभ्यर्थी भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या चयन प्रक्रिया में शामिल कुछ अभ्यर्थियों को विशेष लाभ दिया गया था। भिलाई स्थित पूर्व राजभवन सचिव अमृत खलखो के निवास पर भी जांच जारी है। जांच अधिकारी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड का परीक्षण कर रहे हैं। एजेंसियों का उद्देश्य पूरे मामले की परत-दर-परत जांच कर तथ्यों को सामने लाना है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पिछले वर्ष हुई थीं कई गिरफ्तारियां</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">CGPSC भर्ती घोटाले की जांच के दौरान पहले भी कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पिछले वर्ष सितंबर में आयोग से जुड़े कई अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और चयनित उम्मीदवार शामिल थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है। अब तक प्राप्त दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>योग्य अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की कोशिश</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों ने लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई थी। मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जांच एजेंसियों को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए थे। सार्वजनिक सेवा आयोग जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच से न केवल दोषियों की जिम्मेदारी तय होगी बल्कि भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने में भी मदद मिलेगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>जांच से खुल सकते हैं नए तथ्य</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ताजा छापेमारी के दौरान जुटाए गए दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जांच को नई दिशा दे सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियां जब्त किए गए दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:01:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एमपी में भर्ती नियम बदलने की तैयारी, अब एक स्कोर कार्ड से कई नौकरियों में मिलेगा मौका</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश सरकार ईएसबी और पीएससी भर्ती नियमों में बदलाव करने जा रही है। अब पात्रता परीक्षा और स्कोर कार्ड सिस्टम से भर्तियां होंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/preparation-to-change-recruitment-rules-in-mp-now-one-score/article-53943"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mp-recruitment-rules.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश सरकार सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव लाने जा रही है। इसके तहत</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग और मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हम ईएसबी भी कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">के भर्ती नियमों का एक नया ड्राफ्ट तैयार किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी प्रस्ताव के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब अधिकांश सरकारी भर्तियां कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से होंगी। नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने की योजना है। सरकार ने इन नियमों पर 5 जून तक आम लोगों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभ्यर्थियों और संबंधित संस्थाओं से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की खबर के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच चर्चा बढ़ गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रस्तावित नियमों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भर्ती प्रक्रिया अब </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">पात्रता परीक्षा</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">स्कोर कार्ड सिस्टम</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">के आधार पर चलेगी। इसका मतलब यह है कि उम्मीदवारों को हर भर्ती के लिए अलग-अलग प्रारंभिक परीक्षा नहीं देनी होगी। ईएसबी हर साल तीन प्रकार की पात्रता परीक्षाएं आयोजित करेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें सामान्य पात्रता परीक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी पात्रता परीक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और शिक्षक पात्रता परीक्षा शामिल होंगी। अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अभ्यर्थी निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें स्कोर कार्ड दिया जाएगा। इस स्कोर कार्ड की मदद से उम्मीदवार विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे। सामान्य और तकनीकी पात्रता परीक्षा का स्कोर कार्ड दो साल तक मान्य रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों की पात्रता जीवनभर के लिए मानी जाएगी। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नौकरी के लिए आवेदन करते समय स्कोर कार्ड की वैधता सीमित अवधि तक होगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से भर्ती प्रक्रिया और भी पारदर्शी और सरल होगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे परीक्षाओं की संख्या भी कम हो सकती है। ड्राफ्ट में परीक्षा पैटर्न के बारे में भी जानकारी दी गई है। सामान्य पात्रता परीक्षा में 100 प्रश्न होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सामान्य ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करंट अफेयर्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गणित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लॉजिकल रीजनिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा विश्लेषण और कंप्यूटर ज्ञान से संबंधित होंगे। तकनीकी पात्रता परीक्षा में भी 100 प्रश्न होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इनमें से 75 प्रश्न संबंधित तकनीकी विषय से पूछे जाएंगे। इस बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा नियम 2026 का प्रारूप भी जारी कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विभाग की वेबसाइट पर इसका ड्राफ्ट उपलब्ध है। इच्छुक व्यक्ति और संस्थाएं 5 जून 2026 तक ई-मेल और ऑनलाइन माध्यम से सुझाव भेज सकते हैं। इसके बाद आए सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 10:48:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में युवाओं को मिली बड़ी राहत! सरकार ने बढ़ा दी नौकरियों में उम्र सीमा, जानें डिटेल</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ा दी है। ग्रुप A से D तक नई एज लिमिट लागू होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-relief-to-the-youth-in-west-bengal-government-increased/article-53665"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/west-bengal-government-jobs-age-limit-recruitment-rules-cm-suvendu-adhikari.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को बड़ी राहत दी है। राज्य के वित्त विभाग ने हाल ही में एक नई अधिसूचना जारी की है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विभिन्न सरकारी पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने का फैसला लिया गया है। ये कदम लंबे समय से अभ्यर्थियों की आयु सीमा बढ़ाने की मांग को देखते हुए उठाया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन उम्मीदवारों के लिए जो भर्ती प्रक्रिया की देरी और परीक्षाओं के टलने के कारण आयु सीमा पार कर चुके थे। अब इस फैसले से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों के लिए फिर से आवेदन करने का मौका मिलेगा। नई व्यवस्था 11 मई 2026 से लागू होगी। इसके लिए वित्त विभाग ने वेस्ट बंगाल सर्विसेज (रेजिंग ऑफ एज-लिमिट) रूल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1981 में संशोधन किया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस अधिसूचना के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलग-अलग ग्रुप के पदों के लिए नई अधिकतम आयु सीमा तय की गई है। ग्रुप </span>‘A’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के पदों के लिए अब उम्मीदवार 41 वर्ष तक आवेदन कर सकेंगे। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां पहले से अधिक आयु सीमा लागू है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां वही पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी। ग्रुप </span>‘B’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 44 वर्ष कर दी गई है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रुप </span>‘C’ <span lang="hi" xml:lang="hi">और ग्रुप </span>‘D’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की नौकरियों के लिए अब उम्मीदवार 45 वर्ष तक आवेदन कर सकेंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पब्लिक सर्विस कमीशन यानी </span>PSC <span lang="hi" xml:lang="hi">के दायरे से बाहर होने वाली कई भर्तियों में भी यही नई आयु सीमा लागू होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें राज्य के वैधानिक निकाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी कंपनियां और स्थानीय निकायों की नौकरियां शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सरकारी सेवा में मौका देना है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राज्य में हाल ही में सत्ता परिवर्तन के बाद कई बड़े प्रशासनिक फैसले लिए जा रहे हैं। 2026 में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज की और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। चुनाव में बीजेपी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों पर सिमट गई। इस राजनीतिक बदलाव के बाद सरकार भर्ती और प्रशासनिक ढांचे में सुधार की बात कर रही है। माना जा रहा है कि सरकारी नौकरियों में आयु सीमा बढ़ाने का फैसला भी इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। इस फैसले के बाद राज्य के लाखों नौकरी अभ्यर्थियों में राहत और उत्साह का माहौल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि कई उम्मीदवार ऐसे थे जिनकी उम्र भर्ती प्रक्रिया के लंबे खिंचाव के कारण निकल चुकी थी या निकलने वाली थी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 11:50:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल में सत्ता बदलते ही एक्शन मोड में सरकार, शुभेंदु अधिकारी ने पहली बैठक में लिए कई बड़े फैसले</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट बैठक में सीमा सुरक्षा, आयुष्मान भारत, भर्ती प्रक्रिया और जनगणना को लेकर बड़े फैसले हुए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/government-in-action-mode-as-soon-as-power-changed-in/article-53211"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t165410.494.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद से राजनीतिक और प्रशासनिक हलचलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो राज्य में चर्चा का विषय बन गए हैं। राज्य सचिवालय में हुई इस बैठक में सीमा सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य योजनाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी नौकरियां और जनगणना जैसे कई मुद्दों पर निर्णय हुए। ऐसी खबरें आ रही हैं कि नई सरकार प्रशासनिक पकड़ को मजबूत करने के लिए जल्दी से फैसले ले रही है। बैठक के बाद की सूचनाओं ने राज्य की राजनीति में और भी गर्माहट ला दी है। खास बात ये है कि कुछ योजनाओं को लागू करने का निर्णय लिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन पर पहले राजनीतिक विवाद होते रहते थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">माना जा रहा है कि भारत-बांग्लादेश सीमा से संबंधित निर्णय सबसे बड़ा है। सरकार ने बीएसएफ को फेंसिंग के लिए जमीन देने की प्रक्रिया को तेज करने का आदेश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह काम अगले 45 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले सीमा क्षेत्रों में फेंसिंग के लिए जमीन हस्तांतरण में काफी मुश्किलें आती रही हैं। अब नई सरकार इसे प्राथमिकता में रख रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव के संकेत हैं। सरकार ने बताया है कि पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू होने जा रही है। पहले यहां </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य साथी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">योजना चल रही थी। नई सरकार का दावा है कि इस योजना के लागू होने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को अस्पतालों में इलाज का लाभ मिलेगा। इसी बैठक में विश्वकर्मा योजना और उज्ज्वला योजना को भी मंजूरी दी गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत कारीगरों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छोटे कामगारों और गरीब परिवारों को सीधा लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक में युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसले हुए। लंबे समय से रुकी भर्ती प्रक्रियाओं को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उम्मीदवारों को पांच साल तक का रिलेक्सेशन देने का फैसला भी किया गया। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भर्ती विवाद और कोर्ट मामलों के कारण हजारों उम्मीदवार प्रभावित हुए थे। नई सरकार इस समस्या को जल्द सुलझाने के संकेत दे रही है। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनगणना की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का निर्णय भी चर्चा में है। सरकार का कहना है कि विकास योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों के लिए सही जनसंख्या आंकड़े आवश्यक हैं। ऐसे में रुकी हुई प्रक्रिया को तुरंत आगे बढ़ाने की बात कही गई है। हालाँकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि पिछले शासन की सभी योजनाएं बंद नहीं होंगी। जिन योजनाओं से जनता को लाभ मिल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें जारी रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर उनमें बदलाव किया जा सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में इस पहली बैठक में कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें दिलीप घोष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्निमित्रा पॉल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निशीथ प्रमाणिक और अन्य नेता शामिल थे। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विभागों का अंतिम बंटवारा अभी नहीं हुआ है। सरकार ने कहा है कि अगले सोमवार को फिर से कैबिनेट बैठक होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विभागों और नई नीतियों पर चर्चा की जाएगी। बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद राज्य की राजनीति में पूर्ण बदलाव आया है। तृणमूल कांग्रेस को इस बार बड़ा नुकसान हुआ है और कई प्रमुख नेताओं की सीटें भी हाथ से निकल गईं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 17:32:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल में अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन, स्थायी नियुक्ति की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल प्रदर्शन में अतिथि शिक्षकों ने नियमितीकरण और वेतन वृद्धि सहित कई मांगें उठाईं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/demonstration-of-guest-teachers-in-bhopal-demand-for-permanent-appointment/article-52342"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-bhopal-news-(2)-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एमपी की राजधानी भोपाल में आज अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन उस समय तेज हो गया, जब सैकड़ों शिक्षक अंबेडकर पार्क में एकत्र होकर अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जताने लगे। स्कूल अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में प्रदेशभर से आए शिक्षकों ने नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और सेवा सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाया। संगठन के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि वर्षों से काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के साथ अब और अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बता दें,यह प्रदर्शन लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान की दिशा में दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि चुनाव के दौरान सरकार और नेताओं ने कई वादे किए थे, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस अमल नहीं हुआ। इससे शिक्षकों के बीच असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अतिथि शिक्षकों की प्रमुख मांगें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अतिथि शिक्षकों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं। इनमें नियमितीकरण, मानदेय में वृद्धि और अनुभव आधारित लाभ प्रमुख हैं।इसके अलावा, शिक्षकों ने विभागीय परीक्षा आयोजित करने, वार्षिक अनुबंध लागू करने और शिक्षक भर्ती में बोनस अंक देने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि इन मांगों को पूरा किए बिना शिक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सरकार पर सवाल</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधे सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब वे विधायक थे, तब अतिथि शिक्षकों के पक्ष में आवाज उठाई थी, लेकिन अब मुख्यमंत्री बनने के बाद इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए।प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि पहले भी कई बार इस मुद्दे पर राजनीतिक समर्थन मिला, लेकिन अब वही नेता चुप हैं। इससे शिक्षकों में निराशा बढ़ी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>स्थायी रोजगार की मांग</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ वेतन या अनुबंध का मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा सवाल है।संयुक्त मोर्चा के अन्य पदाधिकारियों के मुताबिक, कई शिक्षक वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिल रहा। ऐसे में सरकार को जल्द निर्णय लेकर उनका भविष्य सुरक्षित करना चाहिए।फिलहाल सरकार की ओर से इस प्रदर्शन पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, माना जा रहा है कि बढ़ते दबाव के बीच सरकार को जल्द ही कोई निर्णय लेना पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 14:07:11 +0530</pubDate>
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