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                <title>Students - दैनिक जागरण</title>
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                <title>NEET-UG 2027 में बड़ा बदलाव, छह दिन तक होगी परीक्षा; पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड होगा एग्जाम</title>
                                    <description><![CDATA[पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में बड़ा सुधार, देशभर में 1000 से ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे, JEE की तर्ज पर कई दिनों में होगा आयोजन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-change-in-neet-ug-2027-the-exam-will-be-for/article-58290"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/neet-ug-2027.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में वर्ष 2027 से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही परीक्षा एक ही दिन के बजाय कम से कम छह दिनों तक अलग-अलग शिफ्टों में कराई जाएगी। परीक्षा के लिए देशभर में एक हजार से अधिक परीक्षा केंद्र विकसित किए जाएंगे, ताकि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को सुविधाजनक तरीके से परीक्षा दिलाई जा सके। यह बदलाव पिछले वर्षों में सामने आए पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर साल मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और अन्य स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली NEET-UG परीक्षा में लगभग 25 लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं। अब तक यह परीक्षा पूरे देश में एक ही दिन पेन-पेपर मोड में आयोजित की जाती रही है। लेकिन बढ़ती परीक्षार्थियों की संख्या, सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं को देखते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की योजना बनाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई व्यवस्था के तहत परीक्षा इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main की तरह कई दिनों तक आयोजित होगी। अभ्यर्थियों को अलग-अलग तिथियों और शिफ्टों में परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी, जिससे प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। इसके अलावा डिजिटल परीक्षा प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया भी अधिक तेज और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">परीक्षा के लिए देशभर में 1000 से अधिक आधुनिक परीक्षा केंद्र तैयार किए जाएंगे। इन केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी सहायता उपलब्ध रहेगी। परीक्षा केंद्रों का चयन इस तरह किया जाएगा कि अभ्यर्थियों को अपने घर से बहुत दूर यात्रा न करनी पड़े। सरकार और NTA का प्रयास है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के उम्मीदवारों को भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा की समान सुविधा मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">NEET परीक्षा में यह बदलाव वर्ष 2024 में सामने आए पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों के बाद तेज हुए सुधारों का हिस्सा माना जा रहा है। उस समय परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर देशभर में सवाल उठे थे। कई राज्यों से पेपर लीक, फर्जीवाड़े और परीक्षा संचालन में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा करने का फैसला लिया था। शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय पहले से ही कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर विचार कर रहे थे, लेकिन विवाद के बाद इस प्रक्रिया को गति मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष भी NEET-UG परीक्षा चर्चा में रही। वर्ष 2026 में परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इसमें करीब 20 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा के कुछ दिनों बाद गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने लगीं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में अनियमितताओं की सूचना मिली, जिसके बाद मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी गई। जांच के आधार पर 12 मई को परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया और दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की गई। इसके बाद 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने री-एग्जाम की नई तारीख जारी की। मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से कई समस्याओं का समाधान संभव है। प्रश्नपत्र डिजिटल माध्यम से सीधे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचेगा, जिससे प्रिंटिंग, परिवहन और वितरण के दौरान सुरक्षा जोखिम कम होंगे। परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तरों का मूल्यांकन भी तेजी से किया जा सकेगा। हालांकि इसके साथ तकनीकी चुनौतियां भी होंगी, जिनसे निपटने के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना आवश्यक होगा। नई परीक्षा प्रणाली लागू करने के लिए केंद्र सरकार व्यापक स्तर पर तैयारी कर रही है। परीक्षा केंद्रों पर आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम, बिजली की निर्बाध व्यवस्था, बैकअप नेटवर्क, साइबर सुरक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा परीक्षा के दौरान किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी ताकि किसी अभ्यर्थी को नुकसान न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:16:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में 2027 से बदलेगा स्कूलों का शैक्षणिक सत्र, 1 अप्रैल से शुरू होंगी कक्षाएं</title>
                                    <description><![CDATA[CBSE की तर्ज पर लागू होगी नई व्यवस्था, मई-जून में रहेंगी गर्मी की छुट्टियां; समय पर किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल वितरण का लक्ष्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/academic-session-of-schools-will-change-in-chhattisgarh-from-2027/article-58275"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-schools-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा व्यवस्था में वर्ष 2027 से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र के कैलेंडर में परिवर्तन करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी और राज्य बोर्ड से जुड़े स्कूल 16 जून के बजाय हर साल 1 अप्रैल से खुलेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के लिए अधिक समय देना, समय पर पाठ्यक्रम पूरा कराना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। नई व्यवस्था के अनुसार 1 अप्रैल से स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया, किताबों, यूनिफॉर्म और साइकिल का वितरण किया जाएगा। इसके बाद 1 मई से 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां रहेंगी और अवकाश समाप्त होने के बाद नियमित रूप से शैक्षणिक गतिविधियां आगे बढ़ेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार प्रदेश में अब शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू होकर अगले वर्ष 31 मार्च तक चलेगा। यह व्यवस्था देश के प्रमुख शिक्षा बोर्डों, विशेष रूप से सीबीएसई के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप होगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे राज्य बोर्ड और राष्ट्रीय शिक्षा बोर्डों के बीच लंबे समय से चला आ रहा शैक्षणिक अंतर काफी हद तक खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए भी पर्याप्त समय मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में स्कूल हर साल 16 जून से खुलते हैं। स्कूल खुलने के बाद शुरुआती कई सप्ताह तक नए विद्यार्थियों का प्रवेश, पाठ्यपुस्तकों का वितरण, यूनिफॉर्म उपलब्ध कराना, साइकिल और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया चलती रहती है। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ता है। कई स्कूलों में नियमित कक्षाएं जून के अंत या जुलाई से शुरू हो पाती हैं। ऐसे में पाठ्यक्रम पूरा करने में देरी होती है और शिक्षकों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन सभी प्रक्रियाओं को अप्रैल महीने में पूरा करने की योजना बनाई गई है, ताकि छुट्टियों के बाद पढ़ाई बिना किसी रुकावट के शुरू हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें, स्कूल ड्रेस और अन्य आवश्यक सामग्री मिल जाएगी। इससे पढ़ाई की शुरुआत पहले दिन से ही प्रभावी ढंग से हो सकेगी। सरकार का मानना है कि समय पर संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और शैक्षणिक सत्र अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार अब तक सीबीएसई और छत्तीसगढ़ बोर्ड के शैक्षणिक कैलेंडर में लगभग ढाई महीने का अंतर रहता था। जहां सीबीएसई स्कूलों में अप्रैल से पढ़ाई शुरू हो जाती थी, वहीं राज्य बोर्ड के स्कूल जून के मध्य में खुलते थे। इस वजह से दोनों बोर्डों के छात्रों के बीच तैयारी का समय अलग-अलग होता था। विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षा की तैयारी में इसका असर देखा जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह अंतर लगभग समाप्त हो जाएगा और छात्रों को समान शैक्षणिक अवसर मिल सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में पुस्तकों के वितरण का लक्ष्य जून तक रखा जाता है, लेकिन कई बार यह प्रक्रिया जुलाई तक भी पहुंच जाती है। इससे नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है। नई व्यवस्था में कोशिश होगी कि 1 अप्रैल से ही सभी विद्यार्थियों को किताबें और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा दी जाए, ताकि शिक्षण कार्य समय पर शुरू हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा विशेषज्ञ भी इस बदलाव को सकारात्मक कदम मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि अप्रैल में शैक्षणिक सत्र शुरू होता है तो विद्यार्थियों को पूरे वर्ष पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे शिक्षकों को भी पाठ्यक्रम पूरा कराने में सुविधा होगी और परीक्षा से पहले दोहराव तथा अतिरिक्त अभ्यास के लिए समय मिल सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पढ़ाई शुरू होने से बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में भी सुधार देखने को मिल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कुछ अभिभावकों का मानना है कि नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए सरकार को सभी तैयारियां पहले से पूरी करनी होंगी। यदि अप्रैल में स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया है तो किताबों की छपाई, यूनिफॉर्म की आपूर्ति और अन्य व्यवस्थाएं समय से पूरी करनी होंगी। साथ ही स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और आधारभूत सुविधाओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। उनका कहना है कि केवल कैलेंडर बदलने से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को समयबद्ध बनाकर ही इस बदलाव का वास्तविक लाभ मिल सकेगा। नई व्यवस्था में मई और जून के दौरान गर्मी की छुट्टियां पहले की तरह रहेंगी। 1 मई से 15 जून तक विद्यार्थियों को अवकाश मिलेगा। इस दौरान अप्रैल महीने में प्रवेश और शैक्षणिक गतिविधियों की शुरुआत हो चुकी होगी। छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने पर सीधे नियमित पढ़ाई शुरू की जाएगी। इससे शिक्षण कार्य में अनावश्यक देरी नहीं होगी और पूरे शैक्षणिक सत्र का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। राज्य सरकार का मानना है कि यह बदलाव केवल कैलेंडर बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरे शिक्षा तंत्र में समयबद्धता और गुणवत्ता दोनों में सुधार आएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:15:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नसीहत, बोलीं- आत्मनिर्भर बनने के बाद करें शादी, शिक्षा के दौरान जिम्मेदार फैसले लें</title>
                                    <description><![CDATA[AKTU के 24वें दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को जिम्मेदार जीवन, आत्मनिर्भरता और शिक्षा की गुणवत्ता पर दिया संदेश; विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार की भी जरूरत बताई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/governor-anandiben-patels-advice-in-the-convocation-ceremony-was/article-58125"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/anandiben-patel.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">लखनऊ स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के 24वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और जिम्मेदार जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश दिए। अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे जीवन के बड़े फैसले सोच-समझकर लें और पहले अपने भविष्य को मजबूत बनाने पर ध्यान दें। राज्यपाल ने अपने भाषण में कहा कि पढ़ाई के दौरान कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिनका असर केवल संबंधित परिवार पर ही नहीं बल्कि समाज और सरकारी व्यवस्था पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने जीवन से जुड़े फैसलों में जिम्मेदारी और परिपक्वता का परिचय देना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं हैं। उनके अनुसार यदि दो लोग एक-दूसरे को पसंद करते हैं और साथ जीवन बिताना चाहते हैं तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन विवाह का निर्णय तब लेना चाहिए जब दोनों आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाएं। उनका कहना था कि आत्मनिर्भरता से परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाया जा सकता है और जीवन अधिक संतुलित बनता है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक निजी अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उनका बेटा उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहर गया था तो उन्होंने उससे कहा था कि यदि उसे कोई जीवनसाथी पसंद हो तो वह परिवार को बताए, लेकिन सबसे पहले अपने करियर और भविष्य को मजबूत बनाए। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए युवाओं को करियर और शिक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के हजारों विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। कुलाधिपति ने डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल डिग्रियों की व्यवस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से विद्यार्थियों को भविष्य में दस्तावेजों के प्रबंधन में सुविधा मिलेगी। समारोह में शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधियां भी प्रदान की गईं और विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विभिन्न शिक्षण संस्थानों के निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर ऐसी कमियां देखने को मिलीं, जिन्हें समय रहते दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने छात्रावासों की स्थिति, कक्षाओं की संरचना और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कुछ छात्रावासों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था और अध्ययन सामग्री रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं दिखाई दी। इसके अलावा पानी की टंकियों की सुरक्षा और स्वच्छता जैसे मुद्दों की ओर भी उन्होंने ध्यान आकर्षित किया। उनके अनुसार शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की मेस व्यवस्था को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी होनी चाहिए। खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, एक्सपायरी डेट और स्वच्छता जैसे पहलुओं पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उनका मानना था कि स्वस्थ भोजन विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकारी बजट का उपयोग केवल खर्च दिखाने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि उससे विद्यार्थियों को वास्तविक लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि पुस्तकालय, हॉस्टल या अन्य सुविधाएं ऐसी जगह बनाई जाएं जहां उनका उपयोग करना ही कठिन हो, तो इससे संसाधनों का उद्देश्य पूरा नहीं होता। इसलिए योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में व्यावहारिक सोच अपनाना जरूरी है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने देश की रक्षा क्षमता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर बन रहा है और पहले जिन सैन्य उपकरणों का आयात किया जाता था, अब देश उनके निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसे देश की तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">दीक्षांत समारोह के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिनकी राज्यपाल ने सराहना की। कार्यक्रम में शामिल छात्र-छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रक्रिया भी है। समारोह का मुख्य संदेश यही रहा कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता, अनुशासन और जिम्मेदार निर्णय किसी भी युवा के सफल भविष्य की मजबूत नींव होते हैं। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने करियर, परिवार और समाज के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं तथा देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:11:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में स्कूलों की एक समान टाइमिंग की मांग, शिक्षा सचिव को भेजा गया पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने शनिवार को हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी मॉर्निंग शिफ्ट लागू करने की मांग उठाई, कहा- अलग-अलग समय से पढ़ाई और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/letter-sent-to-education-secretary-demanding-uniform-timing-of-schools/article-58069"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-schools.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के संचालन समय को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर राज्य के सभी सरकारी स्कूलों की टाइमिंग एक जैसी करने की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में प्राथमिक, माध्यमिक और हायर सेकेंडरी स्कूल अलग-अलग समय पर संचालित हो रहे हैं, जिससे न केवल शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी लगातार दिक्कतें सामने आ रही हैं। संगठन ने विशेष रूप से शनिवार के दिन हायर सेकेंडरी स्कूलों को भी मॉर्निंग शिफ्ट में संचालित करने का सुझाव दिया है ताकि पूरे शिक्षा तंत्र में समान व्यवस्था लागू हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन के अनुसार राज्य में युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) और संकुल व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकांश प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को हायर सेकेंडरी स्कूलों से जोड़ा गया है। इसके कारण एक ही परिसर या संकुल के अंतर्गत कई स्तर के विद्यालय संचालित हो रहे हैं। लेकिन अलग-अलग समय पर स्कूल खुलने और बंद होने से समन्वय में परेशानी आ रही है। शिक्षकों, प्राचार्यों और कर्मचारियों को एक साथ बैठकर योजनाएं बनाने, समीक्षा बैठकें करने और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल कक्षाओं में पढ़ाने तक सीमित नहीं रह गई है। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, ऑनलाइन पोर्टलों पर जानकारी दर्ज करना, परीक्षा संबंधी कार्य, छात्रवृत्ति प्रक्रिया, वित्तीय दस्तावेज तैयार करना, कार्यालयीन रिकॉर्ड का संधारण और अन्य प्रशासनिक कार्य भी करने पड़ते हैं। इसके अलावा समय-समय पर संकुल स्तर और विभागीय बैठकों में भी शामिल होना आवश्यक होता है। अलग-अलग स्कूलों की अलग-अलग टाइमिंग होने के कारण इन सभी कार्यों को समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण बन जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन का मानना है कि यदि शनिवार को हायर सेकेंडरी स्कूलों को भी सुबह की पाली में संचालित किया जाए और सभी सरकारी स्कूलों का समय समान कर दिया जाए तो शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्यों के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। इससे बैठकें आयोजित करना, लंबित रिपोर्ट तैयार करना, अगले सप्ताह की शैक्षणिक योजना बनाना और विभागीय निर्देशों का पालन करना अधिक व्यवस्थित तरीके से संभव होगा। संगठन का कहना है कि इस बदलाव से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि शैक्षणिक व्यवस्था और अधिक सुव्यवस्थित होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोगों का भी मानना है कि एक समान समय व्यवस्था से विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है। संकुल व्यवस्था के तहत कई कार्यक्रम संयुक्त रूप से आयोजित किए जाते हैं, जिनमें अलग-अलग विद्यालयों के शिक्षक और विद्यार्थी शामिल होते हैं। यदि सभी स्कूलों की टाइमिंग एक जैसी होगी तो ऐसे कार्यक्रमों का संचालन आसान होगा और अनावश्यक समय की बर्बादी भी नहीं होगी। साथ ही विभागीय निरीक्षण, प्रशिक्षण कार्यक्रम और समीक्षा बैठकें भी अधिक प्रभावी ढंग से आयोजित की जा सकेंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि कई बार अलग-अलग समय के कारण प्राचार्यों और शिक्षकों को अतिरिक्त समय तक स्कूल में रुकना पड़ता है। इससे कार्य का दबाव बढ़ता है और नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। संगठन का कहना है कि यदि पूरे राज्य में एक समान समय व्यवस्था लागू की जाती है तो कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और विद्यालय प्रबंधन को भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:54:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर के स्कूलों में बिना किताबों के पढ़ाई, नए शिक्षा सत्र के 15 दिन बाद भी नहीं पहुंचीं पाठ्य पुस्तकें</title>
                                    <description><![CDATA[70 और 80 जीएसएम कागज विवाद, टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी देरी बनी वजह। जिला शिक्षा अधिकारी ने जल्द वितरण का भरोसा दिया, लाखों छात्र अब भी नई किताबों का इंतजार कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/studying-without-books-in-bilaspur-schools-text-books-did-not/article-57950"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-schools.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नया शिक्षा सत्र शुरू हुए दो सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सरकारी स्कूलों के हजारों विद्यार्थियों को अब तक नई पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। स्कूलों में नियमित रूप से कक्षाएं लग रही हैं, शिक्षक पढ़ाई भी करवा रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में छात्र बिना किताबों के ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कई बच्चे पुराने नोट्स, पिछले सत्र की किताबों या शिक्षकों द्वारा ब्लैकबोर्ड पर लिखाए गए पाठ के सहारे अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। शिक्षा सत्र की शुरुआत में ही किताबों की अनुपलब्धता ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार इस बार किताबों के वितरण में देरी का मुख्य कारण कागज की गुणवत्ता को लेकर चला विवाद, टेंडर प्रक्रिया में विलंब और प्रशासनिक स्तर पर हुई तकनीकी दिक्कतें हैं। पाठ्य पुस्तक निगम से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष 70 जीएसएम और 80 जीएसएम कागज के उपयोग को लेकर लंबे समय तक निर्णय नहीं हो सका। इसी वजह से किताबों की छपाई निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो पाई और वितरण प्रक्रिया भी प्रभावित हो गई। इसका सीधा असर स्कूलों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों पर दिखाई दे रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिलासपुर जिले में करीब तीन लाख विद्यार्थियों के लिए नए शिक्षा सत्र में लगभग 15 लाख पाठ्य पुस्तकों की आवश्यकता है। कक्षा के अनुसार प्रत्येक छात्र को तीन से छह किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को तीन से चार पुस्तकें, मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों को लगभग पांच और हाईस्कूल स्तर पर छह तक किताबें दी जाती हैं। राज्य सरकार की योजना के तहत कक्षा पहली से दसवीं तक पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। इन पुस्तकों की छपाई और स्कूलों तक वितरण की जिम्मेदारी पाठ्य पुस्तक निगम की होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार नया सत्र शुरू होने से पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि सभी स्कूलों में समय पर किताबें पहुंच जाएंगी। कुछ समय पहले बिलासपुर दौरे पर आए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि नए सत्र की शुरुआत से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं और विद्यार्थियों तक किताबें समय पर पहुंचाई जाएं। हालांकि जमीनी स्थिति इससे अलग दिखाई दे रही है। जिले के कई सरकारी और कुछ निजी विद्यालयों में अब तक विद्यार्थियों को पूरी पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बिना किताबों के पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें फिलहाल पुराने नोट्स या पिछले साल की पुस्तकों से पढ़ने को कहा गया है। कई बच्चों ने बताया कि शिक्षक बोर्ड पर पाठ लिखवाकर पढ़ाई करा रहे हैं, लेकिन किताबें नहीं होने से घर पर दोबारा पढ़ाई करने में परेशानी होती है। जिन विद्यार्थियों के पास पुराने संस्करण की किताबें भी नहीं हैं, उन्हें सहपाठियों की मदद लेनी पड़ रही है। इससे पढ़ाई की गति भी प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अभिभावकों ने भी इस स्थिति पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब शिक्षा विभाग को पहले से स्कूल खुलने की तारीख की जानकारी थी, तो किताबों की छपाई और वितरण की प्रक्रिया समय रहते पूरी कर लेनी चाहिए थी। उनका मानना है कि शिक्षा सत्र के शुरुआती दिनों में ही पढ़ाई की मजबूत नींव रखी जाती है। यदि इसी समय विद्यार्थियों को जरूरी अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं होगी तो इसका असर पूरे सत्र की पढ़ाई पर पड़ सकता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार इस बार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के नए दिशा-निर्देशों के कारण भी प्रकाशन प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ा। पहले विभाग 70 जीएसएम कागज पर किताबें छपवाता था, लेकिन इस बार 80 जीएसएम कागज पर छपाई का प्रस्ताव सामने आया। बाद में इस पर यह तर्क दिया गया कि मोटे कागज से किताबों का वजन बढ़ जाएगा और बच्चों के स्कूल बैग अधिक भारी हो जाएंगे। इस मुद्दे पर आपत्तियां आने के बाद प्रस्ताव में संशोधन करना पड़ा, जिससे टेंडर प्रक्रिया दोबारा प्रभावित हुई और किताबों की छपाई में अपेक्षा से अधिक समय लग गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसएम यानी ग्राम प्रति वर्ग मीटर, कागज की मोटाई और वजन मापने का मानक होता है। 70 जीएसएम कागज सामान्य रूप से कॉपियों और पुस्तकों में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि 80 जीएसएम कागज अधिक मजबूत और बेहतर गुणवत्ता वाला माना जाता है। हालांकि इसकी मोटाई अधिक होने से किताबों का कुल वजन भी बढ़ जाता है। यही वजह रही कि इस मुद्दे पर लंबे समय तक विचार-विमर्श चलता रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल ने कहा है कि पाठ्य पुस्तक निगम से नई किताबें जिले में पहुंच चुकी हैं और उनका वितरण जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों सहित अन्य विद्यालयों में भी अगले दो से तीन दिनों के भीतर किताबें पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। निजी स्कूलों के लिए भी जल्द वितरण शुरू होने की बात कही गई है। हर नए शिक्षा सत्र की शुरुआत में विद्यार्थियों को समय पर किताबें उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होता है। शुरुआती दिनों में पढ़ाई का आधार मजबूत किया जाता है और यदि इसी दौरान अध्ययन सामग्री उपलब्ध न हो तो सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऐसे में विभाग के लिए जरूरी है कि भविष्य में टेंडर, छपाई और वितरण की पूरी प्रक्रिया पहले से तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाए ताकि विद्यार्थियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:24:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिना इंटरनेट और मोबाइल के बढ़ रहा जनरल नॉलेज, गांव की दीवारें बनीं बच्चों की पाठशाला</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर के ग्राम पंचायत सेलर में विद्यार्थियों के लिए अनोखी पहल शुरू की गई है। स्कूल जाने वाले रास्ते की दीवारों पर सामान्य ज्ञान के प्रश्न लिखे जा रहे हैं, ताकि बच्चे रोज पढ़ते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/general-knowledge-is-increasing-without-internet-and-mobile-village-walls/article-57211"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/general-knowledge.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत सेलर में शिक्षा को लेकर एक अनोखी पहल शुरू की गई है, जिसकी चर्चा अब आसपास के इलाकों में भी होने लगी है। यहां बच्चों के जनरल नॉलेज को मजबूत बनाने के लिए स्कूल के रास्ते की दीवारों को ही खुली पाठशाला में बदल दिया गया है। गांव के सरपंच धनंजय सिंह के नेतृत्व में स्कूल से मुख्य गुड्डी तक की दीवारों पर सामान्य ज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न लिखे गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी रोजाना स्कूल आते-जाते इन प्रश्नों को पढ़ें और बिना अलग से समय निकाले सामान्य ज्ञान की तैयारी करते रहें। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें किसी प्रकार की सरकारी राशि का उपयोग नहीं किया जा रहा, बल्कि पूरा कार्य ग्रामीणों के जनसहयोग से किया जा रहा है। ग्राम पंचायत का मानना है कि आज के समय में लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा में सामान्य ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में यदि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही इतिहास, भूगोल, विज्ञान, भारतीय संविधान, खेल, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं की जानकारी मिलती रहे तो आगे चलकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में काफी मदद मिलेगी। इसी सोच के साथ गांव में दीवार लेखन का यह अभियान शुरू किया गया है। विद्यार्थी रोज जब स्कूल जाएंगे और लौटेंगे तो इन प्रश्नों पर उनकी नजर पड़ेगी। धीरे-धीरे यही जानकारी उनकी याददाश्त का हिस्सा बन जाएगी और पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि भी बढ़ेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस अभियान को केवल एक बार का प्रयोग बनाकर नहीं छोड़ा गया है। पंचायत ने पहले से ही इसकी आगे की योजना भी तैयार कर ली है। तय किया गया है कि हर 60 दिन बाद दीवारों पर लिखे पुराने प्रश्न हटाकर उनकी जगह नए प्रश्न लिखे जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को लगातार नई जानकारी मिलती रहेगी और वे एक ही विषय तक सीमित नहीं रहेंगे। हर दो महीने में अलग-अलग विषयों के प्रश्न लिखे जाने से बच्चों का ज्ञान लगातार बढ़ेगा और उन्हें देश-दुनिया से जुड़ी नई जानकारियां भी मिलती रहेंगी। पंचायत ने इस पहल को और प्रभावी बनाने के लिए प्रतियोगिता का भी रास्ता चुना है। प्रत्येक दो माह बाद कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए सामान्य ज्ञान की परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। पंचायत का मानना है कि पुरस्कार मिलने से बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी और वे नियमित रूप से पढ़ाई के लिए प्रेरित होंगे। इससे केवल अच्छे अंक लाने की सोच नहीं बल्कि सीखने की आदत भी विकसित होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस अभियान में केवल पंचायत ही नहीं बल्कि पूरा गांव सहयोग कर रहा है। स्कूल विकास समिति के अध्यक्ष, समिति के सदस्य, शिक्षक और गांव के कई गणमान्य नागरिक इसमें सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। दीवारों पर प्रश्न लिखने से लेकर उन्हें समय-समय पर बदलने तक का पूरा काम जनसहयोग से किया जा रहा है। पंचायत का कहना है कि भविष्य में गांव के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल लिखे जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। सरपंच धनंजय सिंह का कहना है कि यदि विद्यार्थी प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी सामान्य ज्ञान की जानकारी भी हासिल करते रहें तो 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते उनके पास हजारों महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह होगा। इससे वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिक आत्मविश्वास के साथ शामिल हो सकेंगे। उनका मानना है कि पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि गांव का वातावरण भी सीखने वाला बन जाए तो बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षकों का भी कहना है कि बच्चों के लिए यह पहल काफी उपयोगी साबित होगी। सामान्य तौर पर विद्यार्थी सामान्य ज्ञान को अलग विषय मानकर कम महत्व देते हैं, लेकिन जब वही जानकारी रोज रास्ते में दिखाई देगी तो उसे पढ़ना उनकी आदत बन जाएगी। बार-बार एक ही प्रश्न देखने और पढ़ने से याददाश्त मजबूत होती है और बिना किसी अतिरिक्त दबाव के सीखने की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है। यह तरीका खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के उन विद्यार्थियों के लिए अधिक फायदेमंद हो सकता है, जिनके पास इंटरनेट या डिजिटल संसाधनों की सीमित पहुंच है। सामान्य ज्ञान केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। यह व्यक्तित्व विकास, तार्किक सोच और जागरूक नागरिक बनने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश, संविधान, विज्ञान, पर्यावरण और समसामयिक घटनाओं की जानकारी बच्चों को समाज और दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है। ऐसे प्रयास ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। ग्राम पंचायत सेलर की यह पहल अब दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। कम संसाधनों में शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने का यह मॉडल दिखाता है कि यदि स्थानीय स्तर पर इच्छाशक्ति और जनसहयोग हो तो बड़े बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में यदि अन्य पंचायतें भी इस तरह के प्रयास अपनाती हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उनकी तैयारी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:39:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुर्ग यूनिवर्सिटी में 11 साल बाद शुरू होगी यूटीडी, जुलाई से पीजी पढ़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[फिजिक्स, केमिस्ट्री समेत पांच विषयों में होगी शुरुआत, नई बिल्डिंग का लोकार्पण अब भी बाकी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/utd-will-start-pg-studies-in-durg-university-after-11/article-57216"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/durg-university.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय अब केवल परीक्षा आयोजित करने और परिणाम घोषित करने वाली संस्था नहीं रहेगा। करीब 11 साल बाद विश्वविद्यालय में पहली बार यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) की शुरुआत होने जा रही है। नए शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालय परिसर में सीधे स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर की पढ़ाई शुरू होगी। इसके लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथेमेटिक्स, बॉटनी और जूलॉजी जैसे पांच विषयों को मंजूरी मिल चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जुलाई से कक्षाएं शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। प्रवेश प्रक्रिया के बाद विद्यार्थियों के लिए नियमित अध्ययन और शोध का नया अध्याय शुरू होगा। लंबे समय से इस पहल का इंतजार किया जा रहा था, जिसे अब आखिरकार अमलीजामा पहनाया जा रहा है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की स्थापना अप्रैल 2015 में हुई थी। स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय का मुख्य कार्य संबद्ध कॉलेजों की परीक्षाएं आयोजित करना, परिणाम जारी करना और प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित रहा। विश्वविद्यालय परिसर में सीधे पढ़ाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां यूटीडी शुरू नहीं हो सका था। अब पहली बार विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर में ही उच्च शिक्षा और शोध का अवसर मिलेगा। कुलपति प्रो. संजय तिवारी के अनुसार विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। इसी दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिन पांच विषयों का प्रस्ताव भेजा था, उन्हें स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथेमेटिक्स, बॉटनी और जूलॉजी शामिल हैं। इन सभी विषयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई जुलाई से शुरू होगी। इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमित कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे दुर्ग और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होने से छात्रों को समय और खर्च दोनों की बचत होगी। विश्वविद्यालय ने केवल पारंपरिक विषयों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है। कुलपति प्रो. तिवारी ने बताया कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) से आठ नए प्रोफेशनल कोर्स को भी मंजूरी मिल चुकी है। इनमें एमबीए, एमसीए और फिनटेक जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा राज्य सरकार के विजन डॉक्यूमेंट को ध्यान में रखते हुए सप्लाई चेन मैनेजमेंट, ब्लॉकचेन मैनेजमेंट और ट्रैवल एंड टूरिज्म जैसे रोजगार आधारित कोर्स शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है। इन कोर्सों का उद्देश्य छात्रों को बदलते रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य में विशेष शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाने की योजना बना रहा है। रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई) से स्पेशल बीएड प्रोग्राम शुरू करने का प्रस्ताव अंतिम चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान समय में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में स्पेशल बीएड प्रशिक्षित शिक्षकों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए विश्वविद्यालय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेशल एजुकेशन स्थापित करना चाहता है। राज्य सरकार से अनुमति मिलने के बाद इस दिशा में काम शुरू किया जाएगा। यूटीडी शुरू करने की योजना नई नहीं है। करीब आठ वर्ष पहले इसके लिए प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर सहित कुल 64 पदों को स्वीकृति मिल चुकी थी। हालांकि विभिन्न प्रशासनिक कारणों से नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और यूटीडी शुरू नहीं हो पाया। अब जब विश्वविद्यालय में नियमित पढ़ाई शुरू होने जा रही है तो इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की उम्मीद भी बढ़ गई है। इससे न केवल विश्वविद्यालय में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति होगी, बल्कि शोध और अकादमिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि विश्वविद्यालय की नई बिल्डिंग पूरी तरह तैयार होने के बावजूद अब तक उसका औपचारिक लोकार्पण नहीं हो पाया है। इसी कारण शुरुआती दौर में पढ़ाई और प्रायोगिक कक्षाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। कुलपति ने बताया कि इस संबंध में शासकीय वीवाईटी साइंस कॉलेज के साथ एमओयू किया गया है। जिन विषयों के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की आवश्यकता होगी, वहां विद्यार्थियों को सहयोगी कॉलेजों की लैब सुविधाओं का उपयोग कराया जाएगा। विश्वविद्यालय परिसर में भी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए कुछ प्रायोगिक कार्य कराए जाएंगे ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। प्रशासन का कहना है कि रूसा योजना के तहत सहयोगी कॉलेजों में प्रयोगशालाओं और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं को पहले ही मजबूत किया जा चुका है। इसका लाभ सीधे विद्यार्थियों को मिलेगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि यूटीडी की शुरुआत से केवल नियमित पढ़ाई ही नहीं, बल्कि शोध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। प्री-पीएचडी परीक्षा पहले ही शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में रिसर्च को विश्वविद्यालय की प्राथमिकता बनाया जाएगा। साथ ही मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित करने की भी योजना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:39:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>30 जून से शुरू होगी बीटेक काउंसिलिंग, 34 इंजीनियरिंग कॉलेजों की 11,514 सीटों पर मिलेगा प्रवेश</title>
                                    <description><![CDATA[डीटीई ने जारी किया विस्तृत शेड्यूल, प्रवेश तीन चरणों में होंगे; इस बार अधिकतम आयु सीमा हटाई गई, मूल निवासी प्रमाण पत्र रहेगा अनिवार्य]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/btech-counseling-will-start-from-june-30-admission-will-be/article-57208"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-btech-counselling.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने का सपना देख रहे विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग प्रक्रिया 30 जून से शुरू होने जा रही है। तकनीकी शिक्षा संचालनालय (डीटीई) ने इसके लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। इस वर्ष राज्य के 34 इंजीनियरिंग कॉलेजों की कुल 11,514 सीटों पर प्रवेश तीन चरणों में किए जाएंगे। अभ्यर्थियों को प्रत्येक चरण में अलग-अलग ऑनलाइन पंजीयन करना होगा। इस बार प्रवेश प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव अधिकतम आयु सीमा को समाप्त करना है, जिससे पहले की तुलना में अधिक अभ्यर्थियों को आवेदन करने का अवसर मिलेगा। डीटीई के अनुसार पहले चरण की ऑनलाइन काउंसिलिंग के लिए पंजीयन 30 जून से शुरू होकर 6 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। पहले चरण की मेरिट सूची 7 जुलाई को जारी की जाएगी। यदि किसी अभ्यर्थी को मेरिट सूची में कोई त्रुटि दिखाई देती है तो वह 8 जुलाई तक दावा या आपत्ति दर्ज करा सकेगा। सभी आपत्तियों का निराकरण करने के बाद 10 जुलाई को सीट आवंटन और परिणाम घोषित किए जाएंगे। जिन विद्यार्थियों को सीट आवंटित होगी, उन्हें 11 जुलाई से 15 जुलाई के बीच संबंधित कॉलेज में जाकर प्रवेश की औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। जो विद्यार्थी पहले चरण में सीट प्राप्त नहीं कर पाएंगे या बेहतर विकल्प की तलाश में होंगे, उन्हें दूसरे चरण में भाग लेने का अवसर मिलेगा। दूसरे चरण के लिए ऑनलाइन पंजीयन 17 जुलाई से 21 जुलाई तक होंगे। इसके बाद 22 जुलाई को मेरिट सूची जारी की जाएगी और 23 जुलाई तक दावा-आपत्ति दर्ज करने का समय मिलेगा। संशोधित सूची के आधार पर 25 जुलाई को सीट आवंटन और परिणाम जारी होंगे। चयनित अभ्यर्थियों को 26 जुलाई से 30 जुलाई के बीच संबंधित कॉलेज में प्रवेश लेना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यदि दो चरणों की काउंसिलिंग पूरी होने के बाद भी सीटें रिक्त रहती हैं तो संस्था स्तर की काउंसिलिंग आयोजित की जाएगी। इसके लिए 1 अगस्त से 6 अगस्त तक पंजीयन किए जाएंगे। संस्था स्तर की मेरिट सूची 9 अगस्त को प्रकाशित होगी। इसके बाद अभ्यर्थियों को 10 अगस्त को सुबह 10 बजे संबंधित संस्था में उपस्थित होकर प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होना होगा। प्रवेश की यह प्रक्रिया 13 अगस्त को दोपहर 1 बजे तक चलेगी। यदि इसके बाद भी कुछ सीटें खाली रहती हैं तो 13 अगस्त दोपहर 1:30 बजे से 14 अगस्त शाम 5:30 बजे तक मेरिट के आधार पर अंतिम प्रवेश का अवसर दिया जाएगा। तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक चरण में किसी भी पाठ्यक्रम के लिए केवल एक ऑनलाइन आवेदन ही मान्य होगा। यदि कोई अभ्यर्थी पहले चरण में प्रवेश ले चुका है और बाद में दूसरे चरण की काउंसिलिंग में भाग लेकर नई सीट प्राप्त करता है, तो पहले चरण में लिया गया प्रवेश स्वतः निरस्त माना जाएगा। इससे विद्यार्थियों को बेहतर कॉलेज या शाखा चुनने का अवसर मिलेगा, लेकिन उन्हें आवेदन प्रक्रिया और सीट चयन के दौरान पूरी सावधानी बरतनी होगी। संस्था स्तर की काउंसिलिंग में भी कुछ विशेष नियम लागू किए गए हैं। अभ्यर्थी केवल एक संस्था का चयन कर सकेंगे, हालांकि उसी संस्था में उपलब्ध सभी ब्रांचों का विकल्प भरने की सुविधा मिलेगी। केवल संस्था स्तर की काउंसिलिंग के लिए आवेदन करने से पहले लिया गया प्रवेश स्वतः समाप्त नहीं होगा। पुराना प्रवेश तभी निरस्त माना जाएगा जब अभ्यर्थी नई संस्था में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर लेगा। इससे विद्यार्थियों को अंतिम चरण तक बेहतर विकल्प तलाशने की सुविधा मिलेगी। इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव अधिकतम आयु सीमा को हटाना है। पहले बीटेक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित थी, लेकिन अब यह शर्त समाप्त कर दी गई है। इससे वे अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकेंगे जो किसी कारणवश पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू नहीं कर पाए थे। आयु सीमा हटाने से उच्च शिक्षा के अवसर अधिक लोगों तक पहुंचेंगे और इच्छुक अभ्यर्थियों को नया मौका मिलेगा। हालांकि राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए मूल निवासी प्रमाण पत्र अनिवार्य रहेगा। डीटीई ने स्पष्ट किया है कि बिना मूल निवासी प्रमाण पत्र के किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसलिए आवेदन करने वाले सभी विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें ताकि काउंसिलिंग के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:39:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कक्षा 5वीं-8वीं की पुनर्परीक्षा शुरू, केंद्रों पर छपेंगे प्रश्नपत्र</title>
                                    <description><![CDATA[23 जून तक चलेगी पुनर्परीक्षा, मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण और अनुपस्थित विद्यार्थियों को मिला दूसरा मौका; गोपनीयता के लिए अपनाई गई नई व्यवस्था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/re-examination-of-class-5th-8th-started-question-papers-will-be-printed/article-56110"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/class-5-re-exam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य शिक्षा केंद्र के निर्देशानुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए कक्षा 5वीं और 8वीं की पुनर्परीक्षाएं मंगलवार से शुरू हो गई हैं। यह परीक्षा 23 जून तक चलेगी और इसमें वे विद्यार्थी शामिल होंगे जो मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहे थे या किसी कारणवश परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे। शिक्षा विभाग का कहना है कि पुनर्परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को एक और अवसर देना है ताकि वे अपनी शैक्षणिक प्रगति जारी रख सकें और अगली कक्षा में प्रवेश के लिए पात्र बन सकें। प्रदेशभर में जन शिक्षा केंद्र स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सभी केंद्रों पर सुबह 10 बजे से परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा के पहले दिन कई केंद्रों पर विद्यार्थी समय से पहले पहुंच गए। स्कूलों में भी परीक्षा को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। शिक्षकों और प्राचार्यों को पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए थे कि वे पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों से संपर्क बनाए रखें और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करें। इसके लिए कई स्थानों पर शिक्षकों ने विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से सीधे संपर्क कर परीक्षा की जानकारी दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बार पुनर्परीक्षा को लेकर सबसे बड़ा बदलाव प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली में किया गया है। परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने और प्रश्नपत्र लीक जैसी संभावित घटनाओं को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब प्रश्नपत्र पहले से मुद्रित होकर केंद्रों तक नहीं पहुंचेंगे। इसके बजाय परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले केंद्राध्यक्ष ऑनलाइन पोर्टल से प्रश्नपत्र डाउनलोड करेंगे और उसी केंद्र पर उनकी प्रिंटिंग कराई जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और गोपनीयता दोनों सुनिश्चित की जा सकेंगी। जिला परियोजना समन्वयकों को इस पूरी प्रक्रिया का नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है कि सभी परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल माध्यम से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था से अनावश्यक देरी और सुरक्षा संबंधी जोखिम कम होंगे। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई व्यवस्था को देखते हुए परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी संसाधनों की विशेष तैयारी की गई है। प्रत्येक केंद्र पर कम से कम दो कंप्यूटर या लैपटॉप, दो कार्यशील प्रिंटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी, पर्याप्त मात्रा में ए-4 आकार के कागज और टोनर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो। कई जिलों में बैकअप व्यवस्था भी तैयार रखी गई है, जिससे किसी उपकरण के खराब होने पर तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा संचालन को लेकर तकनीकी सुधारों पर लगातार काम किया जा रहा है। डिजिटल माध्यमों के उपयोग से न केवल प्रशासनिक कार्य आसान हुए हैं, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने में भी मदद मिली है। इस बार अपनाई गई नई व्यवस्था उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विभाग को उम्मीद है कि इससे प्रश्नपत्रों की गोपनीयता को लेकर उठने वाले सवालों पर भी रोक लगेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अवसर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्य परीक्षा में किसी कारण से सफलता हासिल नहीं कर पाने वाले छात्र अब बेहतर तैयारी के साथ दोबारा परीक्षा दे रहे हैं। कई विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें पुनर्परीक्षा का मौका मिलने से आत्मविश्वास बढ़ा है और वे बेहतर परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं। अभिभावकों ने भी इस व्यवस्था का स्वागत किया है और कहा है कि इससे बच्चों को अपनी गलतियों को सुधारने का एक और अवसर मिलता है। स्कूलों में परीक्षा को लेकर विशेष अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्राध्यक्षों को समय पर प्रश्नपत्र डाउनलोड करने, प्रिंटिंग प्रक्रिया की निगरानी करने और परीक्षा शुरू होने तक गोपनीयता बनाए रखने के लिए कहा गया है। वहीं शिक्षकों को परीक्षा कक्षों में निष्पक्ष वातावरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों के अनुसार किसी भी तरह की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। प्रदेश में हजारों विद्यार्थी इस पुनर्परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी और ड्रॉपआउट की संभावना भी कम होगी। विभाग ने विद्यार्थियों से समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने और परीक्षा से संबंधित सभी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:52:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत, शाला प्रवेश उत्सव आज से</title>
                                    <description><![CDATA[27 जून तक चलेगा अभियान, विद्यार्थियों को मिलेंगी मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल; स्कूलों में तिलक लगाकर किया गया स्वागत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/school-entrance-festival-starts-from-today-in-chhattisgarh/article-56104"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-school-reopening.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत सोमवार से हो गई। गर्मी की लंबी छुट्टियों के बाद प्रदेशभर के सरकारी और निजी स्कूलों में एक बार फिर बच्चों की चहल-पहल लौट आई। स्कूलों के गेट सुबह से ही विद्यार्थियों की आवाजाही से गुलजार नजर आए। कहीं बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया तो कहीं उन्हें फूल, चॉकलेट और नई किताबें भेंट कर नए सत्र की शुभकामनाएं दी गईं। राज्य सरकार की ओर से शुरू किए गए शाला प्रवेश उत्सव के साथ इस बार शिक्षा से वंचित बच्चों को स्कूलों तक लाने और नामांकन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह अभियान 16 जून से 27 जून तक चलेगा, जबकि 30 जून को राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्कूल खुलने के पहले दिन उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। सुबह-सुबह स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर पहुंचे बच्चे अपने दोस्तों और शिक्षकों से मिलकर उत्साहित दिखाई दिए। कई स्कूलों में शिक्षकों ने प्रवेश द्वार पर ही बच्चों का स्वागत किया। पहली बार स्कूल पहुंचे छोटे बच्चों के लिए यह दिन खास रहा। नए बैग, नई किताबें और नए माहौल को लेकर उनमें उत्सुकता साफ दिखाई दे रही थी। कई अभिभावक भी अपने बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचे और उनके साथ इस नई शुरुआत का हिस्सा बने। राज्य सरकार की ओर से इस सत्र में भी विद्यार्थियों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के छात्रों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म दी जाएंगी। वहीं पात्र विद्यार्थियों को साइकिल वितरण योजना का लाभ भी मिलेगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना और स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति को कम करना है। अधिकारियों के अनुसार सभी जिलों में सामग्री वितरण की तैयारी पहले ही पूरी कर ली गई थी ताकि बच्चों को सत्र की शुरुआत से ही आवश्यक संसाधन मिल सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धमतरी जिले में भी नए शिक्षा सत्र का शुभारंभ उत्साह और उल्लास के साथ हुआ। गोकुलपुर प्राथमिक शाला में सुबह राज्य गीत और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। विद्यालय पहुंचे बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया और उन्हें चॉकलेट वितरित की गई। स्कूल परिसर में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल रहा। बच्चों ने अपने नए साथियों और शिक्षकों से परिचय किया और विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। कई बच्चे लंबे अवकाश के बाद अपने दोस्तों से मिलकर बेहद खुश नजर आए। शिक्षकों का कहना है कि लगभग दो महीने की छुट्टियों के बाद बच्चों को फिर से पढ़ाई की लय में लाना आसान नहीं होता। इसी को ध्यान में रखते हुए स्कूल खुलने से पहले व्यापक तैयारियां की गई थीं। कक्षाओं की साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं को व्यवस्थित किया गया। कई स्कूलों में परिसर की रंगाई-पुताई और मरम्मत का काम भी कराया गया ताकि विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण मिल सके। पहले दिन बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल के नियमों और अनुशासन के बारे में भी जानकारी दी गई। शाला प्रवेश उत्सव का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को स्कूलों से जोड़ना है जो किसी कारणवश शिक्षा से दूर हैं। शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम गांव-गांव जाकर ऐसे बच्चों की पहचान कर रही है। शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है। अभियान के दौरान अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा और बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से नामांकन दर बढ़ाने में मदद मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्कूल खुलने को लेकर खास उत्साह देखा गया। कई गांवों में बच्चों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। कुछ स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। स्थानीय समुदाय और जनप्रतिनिधियों ने भी स्कूल पहुंचकर विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनाना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 30 जून को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्कूल शिक्षा मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों को भी प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:20:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>NEET री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक, केंद्र का बड़ा कदम</title>
                                    <description><![CDATA[21 जून को होने वाली NEET UG पुनर्परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए 22 जून तक टेलीग्राम की सेवाएं सीमित, मैसेज एडिटिंग फीचर पर भी रोक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a30ed62179ec/article-56056"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/neet-ug-2026-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले केंद्र सरकार ने एक बड़ा और असाधारण फैसला लिया है। राष्ट्रीय परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। यह रोक 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। बताया जा रहा है कि यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69A के तहत उठाया गया है। सरकार का मानना है कि परीक्षा से जुड़ी भ्रामक सूचनाओं, कथित पेपर लीक और फर्जी दावों को रोकने के लिए यह कार्रवाई जरूरी है। NEET UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। लाखों छात्र हर वर्ष इस परीक्षा में शामिल होते हैं और इसके नतीजों पर उनके भविष्य की दिशा तय होती है। ऐसे में परीक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की अफवाह, गलत सूचना या फर्जी दस्तावेज छात्रों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने परीक्षा के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अतिरिक्त निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर कई बार ऐसे दावे सामने आए, जिनमें परीक्षा शुरू होने या समाप्त होने के बाद पुराने संदेशों को एडिट करके उन्हें पेपर लीक का सबूत बताने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि कुछ मामलों में मैसेज एडिटिंग फीचर का इस्तेमाल करके मूल टाइमस्टैम्प को बरकरार रखा गया और बाद में सामग्री बदल दी गई। इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम फैलता है और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगते हैं। इसी कारण टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर को भी एक निर्धारित अवधि तक सीमित करने का निर्देश दिया गया है। जानकारी के मुताबिक भारत में पहले से पोस्ट किए गए संदेशों को एडिट करने की सुविधा 30 जून 2026 तक बंद रखने को कहा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे किसी भी तरह के फर्जी सबूत तैयार करने की आशंका कम होगी और जांच एजेंसियों को भी वास्तविक तथ्यों की पुष्टि करने में आसानी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि इस फैसले के बाद छात्रों, शिक्षकों और टेलीग्राम का नियमित उपयोग करने वाले लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों का कहना है कि परीक्षा सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे उन लाखों यूजर्स को भी असुविधा होगी जो शिक्षा, व्यवसाय और व्यक्तिगत संवाद के लिए इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। दूसरी ओर परीक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कदम सीमित अवधि और विशेष उद्देश्य के लिए उठाया गया है, तो इससे परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता मजबूत हो सकती है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 21 जून को आयोजित की जाएगी और परीक्षा से जुड़ी सभी आधिकारिक सूचनाएं केवल अधिकृत माध्यमों से ही जारी की जाएंगी। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेशों के बजाय आधिकारिक वेबसाइट और अधिसूचनाओं पर ध्यान दें। डिजिटल युग में परीक्षा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। एक ओर तकनीक परीक्षा प्रबंधन को आसान बनाती है, वहीं दूसरी ओर गलत सूचना और साइबर दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ जाती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:24:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>16 जून से खुलेंगे स्कूल, निजी स्कूलों को अब तक नहीं मिली किताबें</title>
                                    <description><![CDATA[नए सत्र की तैयारी अधूरी, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने शिक्षा सचिव को लिखा पत्र]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/schools-will-open-from-june-16-private-schools-have-not/article-55292"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/school-reopen-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गर्मी की छुट्टियों के बाद प्रदेश के स्कूल 16 जून से दोबारा खुलने जा रहे हैं, लेकिन नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले ही पाठ्यपुस्तकों को लेकर चिंता बढ़ गई है। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि अब तक उन्हें नई किताबों की आपूर्ति नहीं हो सकी है, जबकि स्कूल खुलने में कुछ ही दिन बाकी हैं। इस स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर जल्द से जल्द पुस्तक वितरण का शेड्यूल जारी करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि समय रहते किताबें उपलब्ध नहीं कराई गईं तो हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई नए सत्र की शुरुआत में ही प्रभावित हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">निजी स्कूल प्रबंधन का आरोप है कि पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा सरकारी स्कूलों में किताबों की आपूर्ति का काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन निजी स्कूलों के लिए अब तक कोई स्पष्ट व्यवस्था सामने नहीं आई है। स्कूल संचालकों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी विद्यार्थी और अभिभावक स्कूल खुलने से पहले किताबों की उपलब्धता को लेकर सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन उनके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। ऐसे में नए सत्र की तैयारी प्रभावित हो रही है और कई स्कूलों को अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे काम चलाने की आशंका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, स्कूल खुलने के बाद विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ाई शुरू करानी होती है। इसके लिए पाठ्यपुस्तकों का समय पर मिलना बेहद जरूरी है। यदि किताबें देर से पहुंचती हैं तो शुरुआती सप्ताहों में पढ़ाई का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। कई निजी स्कूलों ने पहले ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली है और कक्षाओं के संचालन की तैयारी कर ली है, लेकिन किताबों की अनुपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि सरकारी और निजी स्कूलों के बीच पुस्तक वितरण की व्यवस्था में अंतर दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार सरकारी स्कूलों को संकुल स्तर पर ही किताबें पहुंचाई जा रही हैं, जिससे वहां वितरण प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो गई है। दूसरी ओर निजी स्कूलों को पाठ्यपुस्तक निगम के डिपो से स्वयं किताबें प्राप्त करनी होंगी। इससे समय, संसाधन और अतिरिक्त खर्च का बोझ स्कूल प्रबंधन पर पड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों में स्थित निजी स्कूलों को किताबें लेने के लिए 150 से 200 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ सकती है। दूरदराज के इलाकों में संचालित स्कूलों के लिए यह व्यवस्था और भी कठिन साबित हो सकती है। स्कूल संचालकों के अनुसार किताबों के परिवहन में लगने वाला समय और लागत दोनों बढ़ जाएंगे। साथ ही यदि एक ही समय में बड़ी संख्या में स्कूल डिपो पहुंचते हैं तो वहां भी अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्कूल प्रबंधन का मानना है कि किताबों की उपलब्धता केवल स्कूलों की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर विद्यार्थियों और अभिभावकों पर पड़ता है। कई परिवार पहले से ही नए सत्र की तैयारी में स्कूल फीस, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री पर खर्च कर रहे हैं। ऐसे में यदि किताबें समय पर नहीं मिलतीं तो उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अभिभावकों का भी कहना है कि स्कूल खुलने के बाद बच्चों को पढ़ाई शुरू करने के लिए किताबों की आवश्यकता होती है और इसमें किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग पर निजी स्कूलों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि यदि सरकारी स्कूलों के लिए पुस्तक वितरण की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जा सकती है तो निजी स्कूलों के लिए भी समान व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि निजी स्कूलों के लिए अलग से वितरण शेड्यूल जारी किया जाए और जरूरत पड़ने पर संकुल स्तर पर ही किताबें उपलब्ध कराई जाएं ताकि स्कूलों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हमेशा महत्वपूर्ण होती है। शुरुआती दिनों में ही पाठ्यक्रम की नींव रखी जाती है और यदि इस दौरान आवश्यक सामग्री उपलब्ध न हो तो पढ़ाई की गति प्रभावित होती है। खासकर प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए किताबों की उपलब्धता बेहद जरूरी मानी जाती है।  निजी स्कूल प्रबंधन शिक्षा विभाग के जवाब का इंतजार कर रहा है। स्कूल खुलने में अब बहुत कम समय बचा है और ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग कब तक पुस्तक वितरण का शेड्यूल जारी करता है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो नए सत्र की शुरुआत में ही हजारों विद्यार्थियों को किताबों के बिना पढ़ाई करनी पड़ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:46:33 +0530</pubDate>
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