<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/lpg-price/tag-11648" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>LPG Price - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/11648/rss</link>
                <description>LPG Price RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>प्याज-टमाटर की महंगाई से बढ़ा रसोई का खर्च, जून में वेज और नॉनवेज थाली हुई महंगी</title>
                                    <description><![CDATA[टमाटर, प्याज, खाद्य तेल और एलपीजी के बढ़ते दामों ने बढ़ाई थाली की लागत, मौसम की मार से दालों के और महंगे होने की आशंका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a4f5123bca60/article-58278"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gold-price-today-(11).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देशभर में आम लोगों की रसोई पर महंगाई का असर लगातार गहराता जा रहा है। जून 2026 के दौरान घर में तैयार होने वाली वेज और नॉनवेज दोनों तरह की थाली पहले के मुकाबले महंगी हो गई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह टमाटर, प्याज, खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतें हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जून महीने में एक औसत वेज थाली की लागत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर 28.4 रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में इसकी कीमत 28.1 रुपये थी। वहीं नॉनवेज थाली की कीमत में भी 6 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते आने वाले महीनों में दालों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे घरेलू बजट पर और दबाव बढ़ने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्रिसिल की 'राइस रोटी रेट (RRR)' रिपोर्ट में बताया गया है कि सब्जियों और रसोई से जुड़े जरूरी सामानों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने थाली की लागत बढ़ा दी है। खासतौर पर टमाटर और प्याज की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर हर घर की रसोई पर पड़ा है। इसके अलावा खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर महंगे होने से खाना बनाने की कुल लागत भी बढ़ गई है। दूसरी ओर, पहले आलू की कीमतों में आई गिरावट से जो राहत मिली थी, उसका असर अब लगभग खत्म हो चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर मई 2026 और जून 2026 की तुलना करें तो भी महंगाई का असर साफ दिखाई देता है। एक महीने के भीतर वेज थाली की कीमत में 4 प्रतिशत और नॉनवेज थाली की लागत में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान टमाटर के दाम 17 प्रतिशत, प्याज के दाम 8 प्रतिशत और आलू के दाम 5 प्रतिशत बढ़े हैं। सब्जियों की कीमतों में इस बढ़ोतरी ने घरेलू खर्च को प्रभावित किया है। वहीं पोल्ट्री सेक्टर में सप्लाई कम होने से ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में भी लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भी भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर पुशन शर्मा के अनुसार मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका असर खाद्य तेल और एलपीजी की कीमतों पर पड़ा है। सालाना आधार पर दोनों की कीमतों में लगभग 10-10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यही वजह है कि घरेलू रसोई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सब्जियों की बात करें तो टमाटर सबसे अधिक महंगा हुआ है। जून 2025 में टमाटर जहां करीब 32 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वहीं जून 2026 में इसकी कीमत बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। यानी एक साल में टमाटर करीब 31 प्रतिशत महंगा हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी और मार्च के दौरान अधिक तापमान रहने के कारण गर्मियों की फसल की बुआई और रोपाई प्रभावित हुई, जिससे उत्पादन कम हुआ और कीमतें बढ़ गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्याज की कीमतों में भी सालाना आधार पर लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि नई रबी फसल की आवक से बाजार में कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सीमित सप्लाई के कारण कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। दूसरी ओर आलू की नई फसल आने से इसकी कीमतों में लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे थाली की लागत को कुछ हद तक नियंत्रित रखने में मदद मिली, लेकिन अन्य खाद्य पदार्थों की महंगाई के कारण कुल खर्च फिर भी बढ़ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">नॉनवेज थाली की लागत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह चिकन की कीमतों में आया उछाल है। रिपोर्ट के अनुसार नॉनवेज थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर चिकन का हिस्सा करीब 50 प्रतिशत होता है। जून महीने में भीषण गर्मी के कारण पोल्ट्री फार्मों में पक्षियों की मृत्यु दर बढ़ गई। कई पक्षियों का वजन भी कम हो गया और नए चूजों को पालने की रफ्तार धीमी पड़ गई। इसका सीधा असर सप्लाई पर पड़ा और बाजार में चिकन महंगा हो गया। सालाना आधार पर ब्रॉयलर की कीमतों में लगभग 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में दालों की कीमतें भी आम लोगों की चिंता बढ़ा सकती हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि उड़द और मूंग का शुरुआती स्टॉक पहले से ही कम है। इसके अलावा कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण दालों की फसल को नुकसान पहुंचा है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है और कीमतों में आगे भी तेजी बनी रह सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a4f5123bca60/article-58278</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a4f5123bca60/article-58278</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:13:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/gold-price-today-%2811%29.jpg"                         length="256470"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ 4 सिलेंडर पर मिलेगी ₹300 सब्सिडी</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बीच सरकार का फैसला, उज्ज्वला लाभार्थियों को साल में केवल चार रिफिल पर अतिरिक्त राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-ujjwala-scheme-now-only-4-cylinders-will/article-55370"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ujjwala-scheme.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की करोड़ों महिलाओं से जुड़ी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) में बड़ा बदलाव किया गया है। अब योजना के लाभार्थियों को सालभर में केवल पहले चार एलपीजी सिलेंडरों पर ही 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले यह लाभ नौ सिलेंडरों तक उपलब्ध था। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण यह फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को दुनिया का सबसे सस्ता रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को हुई एक आधिकारिक ब्रीफिंग में पेट्रोलियम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया में बने हालात का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। खास तौर पर एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 46 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका असर भारत पर भी पड़ा क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। वर्तमान में दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी के बाद यह सिलेंडर 642 रुपये में मिल रहा है। हालांकि अब यह अतिरिक्त राहत केवल चार सिलेंडरों तक सीमित रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत अब 1600 रुपये से भी अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से कम कीमत वसूली जा रही है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार हर घरेलू सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है। पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा करीब 41 हजार करोड़ रुपये था। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की मंजूरी दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने यह भी बताया कि सिर्फ एलपीजी ही नहीं बल्कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भी कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मौजूदा हालात में डीजल पर लगभग 30 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब 6 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा बताया जा रहा है। इससे तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन 600 से 700 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। हालांकि सरकार ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई। फरवरी में एलपीजी का सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस लगभग 543 डॉलर प्रति टन था, जो जून तक बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गया। इससे प्रोपेन और ब्यूटेन दोनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई। यही वजह है कि भारत सहित कई देशों में गैस की लागत बढ़ी है। फिर भी सरकार दावा कर रही है कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कई पड़ोसी देशों की तुलना में भारतीय उपभोक्ताओं को काफी कम कीमत पर रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह है कि जहां घरेलू उपभोक्ता लगभग 66 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गैस प्राप्त कर रहे हैं, वहीं होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 3113.50 रुपये में मिल रहा है। यानी उनकी लागत करीब 164 रुपये प्रति किलोग्राम बैठ रही है। कमर्शियल गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार हर महीने स्वतः तय होती हैं और हाल के महीनों में इनमें लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं। सरकार के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी रखी गई और देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं होने दी गई। साथ ही घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई। गैस की खरीद अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी शुरू की गई ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके। उपलब्ध गैस आपूर्ति में घरों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर गैस की चोरी और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए भी निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार ने ओटीपी आधारित डिलीवरी सत्यापन को 90 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके। अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के सामने उपभोक्ताओं को राहत देने और बढ़ती लागत के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-ujjwala-scheme-now-only-4-cylinders-will/article-55370</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-ujjwala-scheme-now-only-4-cylinders-will/article-55370</guid>
                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:29:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/ujjwala-scheme.jpg"                         length="108349"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आज पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं, जानें आपके शहर के लेटेस्ट रेट</title>
                                    <description><![CDATA[17 मई 2026 को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहे। जानें आपके शहर में आज क्या हैं नए रेट और बाजार की पूरी स्थिति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/there-is-no-change-in-the-prices-of-petrol-and/article-53594"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/petrol-diesel-price-today.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Petrol Diesel Price Today:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">17 मई 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर कुछ राहत की खबरें आई हैं। जानकारी के अनुसार आज बड़े शहरों में ईंधन के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में उथल-पुथल के बावजूद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू तेल कंपनियों ने रेट को स्थिर रखने का फैसला किया है। इससे आम लोगों से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक को थोड़ी राहत मिली है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह-सुबह लोग अपने-अपने शहरों में पेट्रोल-डीजल के नए रेट चेक करते नजर आए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने वही पुरानी कीमतें जारी कीं। नई दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोलकाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी दरें वैसी ही रहीं। खबरें हैं कि वर्तमान समय में सरकार और कंपनियां महंगाई के चलते किसी भी बढ़ोतरी से बच रही हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात स्थिर रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रह सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल बाजार पूरी तरह से शांत नहीं है। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आए दिन के बदलाव चिंता का सबब बने हुए हैं। ईरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इजराइल और अमेरिका से जुड़े भू-राजनीतिक हालातों ने सप्लाई में अनिश्चितता बढ़ा दी है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका समय-समय पर सामने आती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वैश्विक तेल बाजार का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। इस वजह से आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना भी बनी हुई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें हर दिन सुबह 6 बजे अपडेट होती हैं और यह प्रक्रिया ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा निर्धारित की जाती है। इसमें अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमत</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर-रुपया विनिमय दर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और टैक्स स्ट्रक्चर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में ईंधन के दामों में फर्क होता है। ट्रांसपोर्ट खर्च और स्थानीय टैक्स भी इस अंतर का एक बड़ा कारण हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो रेट सामने आए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल लगभग 94 रुपये के आसपास और मुंबई में 104 रुपये के ऊपर बना हुआ है। डीजल के दाम भी लगभग स्थिर हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ निजी कंपनियों के फ्यूल स्टेशनों पर हल्की बढ़ोतरी की खबरें आई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कुछ शहरों में उपभोक्ताओं को थोड़ा फर्क महसूस हो सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालात नियंत्रण में हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और रुपये में कमजोरी आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो घरेलू ईंधन दरों पर असर पड़ सकता है। लेकिन फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राहत की बात यह है कि आज कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है और बाजार स्थिर बना हुआ है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/there-is-no-change-in-the-prices-of-petrol-and/article-53594</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/there-is-no-change-in-the-prices-of-petrol-and/article-53594</guid>
                <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:50:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/petrol-diesel-price-today.jpg"                         length="138101"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल घाटा: तेल कंपनियां प्रति लीटर 18 तक नुकसान में</title>
                                    <description><![CDATA[Petrol Diesel Loss के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, LPG पर 80,000 करोड़ का दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/petrol-diesel-losses-oil-companies-incur-losses-of-up-to-rs/article-52390"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/petrol-diesel-loss-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भले ही स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन इससे तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। “पेट्रोल-डीजल लॉस” की स्थिति में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को हर लीटर पेट्रोल पर करीब ₹14 और डीजल पर लगभग ₹18 तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है।</p>
<p>रेटिंग एजेंसी की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, लेकिन घरेलू स्तर पर कीमतें नहीं बढ़ाई गईं। इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे (मार्जिन) पर पड़ा है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव और बढ़ गया है।</p>
<p>नई दिल्ली से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर यह हुआ कि कुछ ही हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर के पार पहुंच गईं। ऐसे में कंपनियों को महंगा कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा है, जबकि उपभोक्ताओं को पुराने रेट पर ईंधन बेचना पड़ रहा है।</p>
<p>27 फरवरी से 30 अप्रैल के बीच इंडियन बास्केट में कच्चे तेल की कीमत करीब 42 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गई। इसी अवधि में ब्रेंट क्रूड और ओपेक बास्केट में भी तेज उछाल दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई चेन में बाधा और भू-राजनीतिक तनाव इस तेजी की मुख्य वजह हैं।</p>
<h5><strong>मिडिल ईस्ट असर</strong></h5>
<p>हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है।इस रूट पर तनाव बढ़ने से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो रही है।ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा सीधे तौर पर तेल की कीमतों को प्रभावित करती है। यही कारण है कि मौजूदा संकट का असर केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी दिख रहा है।</p>
<h5><strong>रसोई और खेती पर असर</strong></h5>
<p>महंगे कच्चे तेल का असर अब आम उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है।LPG सिलेंडर और खाद की लागत में भी तेजी देखी जा रही है। रसोई गैस के मामले में कंपनियों को लागत से कम कीमत पर सिलेंडर बेचना पड़ रहा है, जिससे इस वित्त वर्ष में करीब ₹80,000 करोड़ का अंडर-रिकवरी बोझ बनने का अनुमान है। वहीं, उर्वरक सब्सिडी का खर्च भी बढ़ सकता है, जो पहले तय बजट से काफी अधिक हो सकता है।</p>
<p>विशेषज्ञ बताते हैं कि “अंडर-रिकवरी” का मतलब है कि कंपनियों को उत्पाद तैयार करने या खरीदने में जितनी लागत आती है, उससे कम कीमत पर बेचने से होने वाला अंतर नुकसान के रूप में दर्ज होता है। फिलहाल पेट्रोल, डीजल और LPG तीनों में यही स्थिति बन रही है।</p>
<p>इसका असर CNG और औद्योगिक क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। केमिकल, प्लास्टिक और उर्वरक उद्योगों की लागत बढ़ने से उनका भविष्य दबाव में दिखाई दे रहा है। कुछ एजेंसियों ने इन सेक्टरों के आउटलुक को “नेगेटिव” करार दिया है।सरकार फिलहाल कीमतों को स्थिर रखने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि आम जनता पर महंगाई का सीधा असर न पड़े। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/petrol-diesel-losses-oil-companies-incur-losses-of-up-to-rs/article-52390</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/petrol-diesel-losses-oil-companies-incur-losses-of-up-to-rs/article-52390</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:15:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/petrol-diesel-loss-%281%29.jpg"                         length="253564"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        