<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/dollar-rate/tag-11649" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Dollar Rate - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/11649/rss</link>
                <description>Dollar Rate RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रुपया ऑल टाइम लो: डॉलर 95.20 पर, महंगाई बढ़ने का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[डॉलर की मजबूती और वैश्विक तनाव के बीच रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, इम्पोर्ट महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-all-time-low-dollar-at-9520-danger-of-inflation/article-52400"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rupee-all-time-low.jpg" alt=""></a><br /><p>गुरुवार को भारतीय मुद्रा बाजार में बड़ा झटका देखने को मिला, जब रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 95.20 के स्तर पर पहुंच गया। यह अब तक का इसका सबसे निचला स्तर है।रुपये में यह गिरावट वैश्विक आर्थिक दबाव, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की वजह से आई है। बताया जा रहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे, तो रुपया और कमजोर होकर 98 के स्तर तक भी पहुंच सकता है।</p>
<p>नई दिल्ली में वित्तीय बाजार से जुड़े पिछले कुछ महीनों से रुपये पर दबाव बना हुआ था, लेकिन अप्रैल के अंतिम सप्ताह में इसमें तेज गिरावट आई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों 90 की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर से नीचे गया था और उसके बाद से लगातार गिरावट का ट्रेंड बना हुआ है। मौजूदा गिरावट को वैश्विक ऊर्जा संकट और व्यापारिक अनिश्चितता से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<h5><strong>गिरावट के कारण</strong></h5>
<p>मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।इससे भारत का आयात बिल बढ़ा और रुपये पर दबाव आया।विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ता है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती भी रुपये की गिरावट का बड़ा कारण मानी जा रही है।</p>
<h5><strong>आम लोगों पर असर</strong></h5>
<p>रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है।आयातित वस्तुएं और सेवाएं महंगी होने की आशंका है।आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित सामान की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही विदेश यात्रा, पढ़ाई और डॉलर में भुगतान करने वाली सेवाएं भी महंगी हो जाएंगी।</p>
<p>महंगाई के मोर्चे पर भी चिंता बढ़ गई है। अगर डॉलर मजबूत बना रहता है, तो खुदरा महंगाई दर में उछाल आ सकता है, जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-all-time-low-dollar-at-9520-danger-of-inflation/article-52400</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-all-time-low-dollar-at-9520-danger-of-inflation/article-52400</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:34:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/rupee-all-time-low.jpg"                         length="194188"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        