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                <title>Forex Market - दैनिक जागरण</title>
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                <title>डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती, 58 पैसे की तेज बढ़त</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल में गिरावट और शेयर बाजार की मजबूती से रुपये ने शुरुआती कारोबार में 94.60 का स्तर छुआ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-strengthened-by-58-paise-against-dollar/article-55956"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indian-rupee-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">15 जून 2026, सोमवार की सुबह विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने मजबूत शुरुआत की और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 58 पैसे की तेजी दर्ज की। शुरुआती कारोबार में रुपया 94.70 पर खुला और थोड़ी ही देर में बढ़त दिखाते हुए 94.60 के स्तर पर पहुंच गया। यह मजबूती पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले उल्लेखनीय मानी जा रही है और इसे वैश्विक बाजारों में बने सकारात्मक माहौल का परिणाम बताया जा रहा है। मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, रुपये की इस तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट मानी जा रही है, जो अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद देखने को मिली। लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के खत्म होने की खबर ने वैश्विक बाजारों में स्थिरता लाई है, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को फायदा मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू स्तर पर भी बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत शुरुआत की, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ा। विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी बढ़ने और फंड फ्लो में सुधार होने से डॉलर की मांग में थोड़ी कमी आई, जिससे भारतीय मुद्रा को सहारा मिला। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में खरीदारी के चलते बाजार में भरोसा बढ़ा और इसका असर मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दिया। फॉरेक्स डीलरों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स में कमजोरी भी रुपये की मजबूती का एक प्रमुख कारण है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई है और सुरक्षित निवेश की मांग घट गई है। ऐसे में निवेशक जोखिम वाले बाजारों की ओर लौट रहे हैं, जिससे एशियाई मुद्राओं को मजबूती मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में नरमी से आयात बिल कम होता है और चालू खाते के घाटे पर दबाव घटता है। इससे रुपये पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और उसकी स्थिरता बढ़ती है। यही कारण है कि तेल बाजार में गिरावट के साथ रुपये में तेजी देखी जा रही है। आने वाले दिनों में रुपये की दिशा वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं और विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है, तो रुपये में और मजबूती देखी जा सकती है। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वैश्विक आर्थिक संकेतक भी रुपये की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुद्रा बाजार में कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों की भावना सकारात्मक बनी हुई है। वैश्विक शांति संकेतों के कारण जोखिम का माहौल कम हुआ है और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह बढ़ा है। इससे रुपये को मजबूती मिल रही है और अल्पकालिक रूप से यह रुझान जारी रह सकता है। यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि मुद्रा बाजार में अस्थिरता हमेशा बनी रहती है। किसी भी अप्रत्याशित अंतरराष्ट्रीय घटना या आर्थिक डेटा के कारण रुपये में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। 15 जून 2026 का दिन भारतीय रुपये के लिए सकारात्मक शुरुआत लेकर आया है। वैश्विक बाजारों में सुधार, कच्चे तेल की गिरती कीमतें और घरेलू शेयर बाजारों की मजबूती ने मिलकर रुपये को समर्थन दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:41:12 +0530</pubDate>
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                <title>रुपया ऑल टाइम लो: डॉलर 95.20 पर, महंगाई बढ़ने का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[डॉलर की मजबूती और वैश्विक तनाव के बीच रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, इम्पोर्ट महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-all-time-low-dollar-at-9520-danger-of-inflation/article-52400"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rupee-all-time-low.jpg" alt=""></a><br /><p>गुरुवार को भारतीय मुद्रा बाजार में बड़ा झटका देखने को मिला, जब रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 95.20 के स्तर पर पहुंच गया। यह अब तक का इसका सबसे निचला स्तर है।रुपये में यह गिरावट वैश्विक आर्थिक दबाव, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की वजह से आई है। बताया जा रहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे, तो रुपया और कमजोर होकर 98 के स्तर तक भी पहुंच सकता है।</p>
<p>नई दिल्ली में वित्तीय बाजार से जुड़े पिछले कुछ महीनों से रुपये पर दबाव बना हुआ था, लेकिन अप्रैल के अंतिम सप्ताह में इसमें तेज गिरावट आई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों 90 की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर से नीचे गया था और उसके बाद से लगातार गिरावट का ट्रेंड बना हुआ है। मौजूदा गिरावट को वैश्विक ऊर्जा संकट और व्यापारिक अनिश्चितता से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<h5><strong>गिरावट के कारण</strong></h5>
<p>मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।इससे भारत का आयात बिल बढ़ा और रुपये पर दबाव आया।विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ता है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती भी रुपये की गिरावट का बड़ा कारण मानी जा रही है।</p>
<h5><strong>आम लोगों पर असर</strong></h5>
<p>रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है।आयातित वस्तुएं और सेवाएं महंगी होने की आशंका है।आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित सामान की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही विदेश यात्रा, पढ़ाई और डॉलर में भुगतान करने वाली सेवाएं भी महंगी हो जाएंगी।</p>
<p>महंगाई के मोर्चे पर भी चिंता बढ़ गई है। अगर डॉलर मजबूत बना रहता है, तो खुदरा महंगाई दर में उछाल आ सकता है, जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:34:22 +0530</pubDate>
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