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                <title>Political Shift - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Political Shift RSS Feed</description>
                
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                <title>केरल में ढहा लेफ्ट का आखिरी किला, आजादी के बाद पहली बार पूरे देश से वामपंथ का सूपड़ा साफ</title>
                                    <description><![CDATA[केरल विधानसभा चुनाव के रुझानों में कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ बहुमत की ओर है। केरल में वामपंथ की सरकार गिरते ही पूरे देश से लेफ्ट का शासन समाप्त हो जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/the-last-fort-of-left-collapsed-in-kerala-for-the/article-52631"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kerala-election-results.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा मोड़ आता दिख रहा है जिसने दशकों पुरानी राजनीतिक परंपराओं को झकझोर दिया है। केरल विधानसभा चुनाव की मतगणना के जो प्रारंभिक रुझान सामने आए हैं, वे वामपंथी खेमे के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। राज्य की जनता ने इस बार सत्ता परिवर्तन की ओर कदम बढ़ाते हुए कांग्रेस समर्थित यूडीएफ को बड़ी बढ़त दिलाई है। शुरुआती आंकड़ों में यूडीएफ 90 से अधिक सीटों पर अपनी पकड़ बनाए हुए है, जबकि एलडीएफ का आंकड़ा 40 के आसपास सिमटता दिख रहा है। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए भी कुछ सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल होता दिख रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">इस चुनाव की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन खुद अपनी पारंपरिक सीट धर्मदम से पीछे चल रहे हैं। विजयन के अलावा उनके मंत्रिमंडल के लगभग एक दर्जन मंत्री अपनी-अपनी सीटों पर संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। वीना जॉर्ज, एम बी राजेश और वी शिवनकुट्टी जैसे कद्दावर नेताओं का पिछड़ना यह संकेत देता है कि राज्य में वामपंथ के प्रति जनता का मोहभंग हुआ है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख सनी जोसेफ ने इन रुझानों को राज्य की जनता की आवाज बताया है और भरोसा जताया है कि उनकी गठबंधन सरकार 100 से अधिक सीटों के साथ शानदार वापसी करेगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">केरल के ये रुझान केवल एक राज्य के चुनाव परिणाम नहीं हैं, बल्कि यह वामपंथी राजनीति के अस्तित्व से जुड़ी खबर है। आजादी के बाद से ही भारतीय राजनीति में लेफ्ट का अपना एक विशेष स्थान रहा है। हालांकि, वक्त के साथ इनका दायरा सिमटता गया। साल 2011 में पश्चिम बंगाल में 34 साल पुराने शासन का अंत हुआ और 2018 में त्रिपुरा भी इनके हाथ से निकल गया। केरल अब तक इनका एकमात्र मजबूत गढ़ बना हुआ था, लेकिन वर्तमान स्थिति बताती है कि अब वहां भी बदलाव की बयार बह चुकी है। यदि केरल से भी लेफ्ट की विदाई होती है, तो यह स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा कि किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं होगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 13:11:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल में खिला कमल: बीजेपी के वो 5 अचूक दांव जिनसे ढह गया ममता का किला</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत के पीछे रहे वे 5 बड़े वादे जिन्होंने टीएमसी के गढ़ को ढहा दिया। जानिए कैसे घुसपैठ और विकास के मुद्दों ने बदली बंगाल की तस्वीर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/lotus-blossomed-in-bengal-those-5-surefire-moves-of-bjp/article-52628"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/west-bengal-election-results-2021-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">पश्चिम बंगाल के चुनावी गलियारों से जो रुझान और नतीजे सामने आ रहे हैं, उन्होंने भारतीय राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस, जो पिछले डेढ़ दशक से बंगाल की सत्ता पर काबिज थी, इस बार भारतीय बीजेपी की सुनियोजित रणनीति के सामने टिक नहीं पाई। प्रदेश की जनता ने इस बार बदलाव के पक्ष में अपना मत दिया है। बीजेपी की इस अप्रत्याशित सफलता के पीछे वे पांच प्रमुख वादे रहे हैं, जिनका तोड़ टीएमसी के पास नहीं था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">बीजेपी ने अपने चुनावी अभियान में घुसपैठ के मुद्दे को सबसे ऊपर रखा। पार्टी ने साफ तौर पर कहा कि बंगाल की सुरक्षा के लिए अवैध नागरिकों की पहचान करना अनिवार्य है। सीमावर्ती जिलों में रहने वाले लोगों के लिए यह एक संवेदनशील विषय था, जिसे बीजेपी ने राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ दिया। स्थानीय निवासियों के बीच यह संदेश प्रभावी रहा कि उनके संसाधनों और अधिकारों पर बाहरी लोगों का कब्जा हो रहा है। इस वादे ने सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले मतदाताओं को बीजेपी की ओर मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">बीजेपी ने चुनावी घोषणापत्र में जनकल्याणकारी योजनाओं का जो खाका पेश किया, उसने ग्रामीण और गरीब तबके को काफी आकर्षित किया। विशेष रूप से महिलाओं के लिए हर महीने 3000 रुपए की आर्थिक सहायता और बेरोजगार युवाओं के लिए समान राशि का भत्ता देने के वादे ने गेम चेंजर की भूमिका निभाई। केंद्र की योजनाओं को राज्य में बिना किसी बाधा के लागू करने की बात ने लोगों में यह विश्वास जगाया कि डबल इंजन की सरकार उनके जीवन स्तर को सुधार सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर जनता में उपजी नाराजगी को बीजेपी ने बखूबी पहचाना। आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसी घटनाओं ने प्रशासन की छवि पर गहरे घाव किए थे। इसके जवाब में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक मॉडल का उदाहरण देते हुए वादा किया कि अपराधियों और सिंडिकेट चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गुंडागर्दी को खत्म करने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आश्वासन ने मध्यम वर्ग और शहरी आबादी का भरोसा जीतने में मदद की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">भ्रष्टाचार बंगाल की राजनीति का एक कड़वा सच रहा है। बीजेपी ने टीएमसी के 'सिंडिकेट राज' पर सीधा हमला बोला और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने का वचन दिया। पार्टी ने वादा किया कि सत्ता में आते ही उन सभी बिचौलियों पर लगाम कसी जाएगी जो आम जनता के हक का पैसा डकार जाते हैं। इस मुद्दे ने उन युवाओं और ईमानदार करदाताओं को प्रभावित किया जो लंबे समय से व्यवस्था में सुधार की राह देख रहे थे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">कभी उद्योगों का गढ़ रहा बंगाल पिछले कुछ दशकों में पिछड़ गया था। बीजेपी ने बंद पड़ी मिलों को फिर से खोलने और नए निवेश को लाने का विजन पेश किया। उन्होंने यह बात दोहराई कि बिना उद्योगों के राज्य का विकास संभव नहीं है। युवाओं को पलायन से रोकने के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम दिलाने जैसे वादों ने समाज के उत्पादक वर्ग को एक नई उम्मीद दी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 12:25:02 +0530</pubDate>
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