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                <title>UDF - दैनिक जागरण</title>
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                <title>केरल में किसे मिलेगी कमान? कांग्रेस में CM के लिए इन 3 नेताओं की सबसे ज्यादा चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[केरल कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला और वीडी सतीशन के नाम चर्चा में हैं। विधायकों की राय पर रिपोर्ट सौंपी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/who-will-get-the-command-in-kerala-these-3-leaders/article-52930"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t153354.370.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरखाने चर्चा अब खुलकर सामने आने लगी है। शुक्रवार को पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को सौंप दी। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट तैयार करने से पहले पर्यवेक्षकों ने राज्य के कांग्रेस विधायकों से अलग-अलग बातचीत की और उनकी राय जानी। इस पूरी कवायद के बाद अब पार्टी नेतृत्व के सामने तीन बड़े नाम उभरकर आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा केसी वेणुगोपाल की हो रही है। सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">करीब 40 से ज्यादा विधायक उनके पक्ष में बताए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर उन्हें संगठन और दिल्ली नेतृत्व दोनों के बीच मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है। हालांकि मामला इतना सीधा भी नहीं दिख रहा। वे राहुल गांधी के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं और यही वजह है कि पार्टी हाईकमान उन्हें राज्य की राजनीति में भेजने को लेकर सावधानी बरत सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व इस बार ऐसा चेहरा सामने लाना चाहता है जो संगठन और गठबंधन दोनों को साथ लेकर चल सके। इसी कारण दूसरे विकल्पों पर भी गंभीरता से चर्चा हो रही है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमेश चेन्निथला का नाम भी दौड़ में बना हुआ है। उनके समर्थन में 20 से ज्यादा विधायकों का झुकाव बताया जा रहा है। चेन्निथला लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पार्टी के पुराने तथा अनुभवी नेताओं में उनकी गिनती होती है। वहीं विपक्ष के नेता वीडी सतीशन को लेकर भी कांग्रेस और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">UDF <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोगी दलों के बीच सकारात्मक माहौल बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार </span>IUML, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल कांग्रेस (जोसेफ गुट) और </span>RSP <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे सहयोगी दल सतीशन के नाम पर सहमति जता रहे हैं। उनका मानना है कि उन्होंने विपक्ष के नेता के तौर पर सरकार के खिलाफ आक्रामक भूमिका निभाई और जमीनी मुद्दों पर सक्रियता दिखाई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व किसी जल्दबाजी में नजर नहीं आ रहा। पार्टी पहले विधायकों की राय</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गठबंधन सहयोगियों का रुख और आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहती है। ऐसा कहा जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली में और बैठकों का दौर चल सकता है। केरल में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस इस बार ऐसा चेहरा चुनना चाहती है जो पार्टी को सीधे सत्ता की लड़ाई में मजबूत स्थिति में ला सके। इसी वजह से मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन लगातार जारी है और अंतिम फैसला हाईकमान के स्तर पर ही होने की संभावना मानी जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:43:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>केरल में ढहा लेफ्ट का आखिरी किला, आजादी के बाद पहली बार पूरे देश से वामपंथ का सूपड़ा साफ</title>
                                    <description><![CDATA[केरल विधानसभा चुनाव के रुझानों में कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ बहुमत की ओर है। केरल में वामपंथ की सरकार गिरते ही पूरे देश से लेफ्ट का शासन समाप्त हो जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/the-last-fort-of-left-collapsed-in-kerala-for-the/article-52631"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kerala-election-results.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा मोड़ आता दिख रहा है जिसने दशकों पुरानी राजनीतिक परंपराओं को झकझोर दिया है। केरल विधानसभा चुनाव की मतगणना के जो प्रारंभिक रुझान सामने आए हैं, वे वामपंथी खेमे के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। राज्य की जनता ने इस बार सत्ता परिवर्तन की ओर कदम बढ़ाते हुए कांग्रेस समर्थित यूडीएफ को बड़ी बढ़त दिलाई है। शुरुआती आंकड़ों में यूडीएफ 90 से अधिक सीटों पर अपनी पकड़ बनाए हुए है, जबकि एलडीएफ का आंकड़ा 40 के आसपास सिमटता दिख रहा है। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए भी कुछ सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल होता दिख रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">इस चुनाव की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन खुद अपनी पारंपरिक सीट धर्मदम से पीछे चल रहे हैं। विजयन के अलावा उनके मंत्रिमंडल के लगभग एक दर्जन मंत्री अपनी-अपनी सीटों पर संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। वीना जॉर्ज, एम बी राजेश और वी शिवनकुट्टी जैसे कद्दावर नेताओं का पिछड़ना यह संकेत देता है कि राज्य में वामपंथ के प्रति जनता का मोहभंग हुआ है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख सनी जोसेफ ने इन रुझानों को राज्य की जनता की आवाज बताया है और भरोसा जताया है कि उनकी गठबंधन सरकार 100 से अधिक सीटों के साथ शानदार वापसी करेगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">केरल के ये रुझान केवल एक राज्य के चुनाव परिणाम नहीं हैं, बल्कि यह वामपंथी राजनीति के अस्तित्व से जुड़ी खबर है। आजादी के बाद से ही भारतीय राजनीति में लेफ्ट का अपना एक विशेष स्थान रहा है। हालांकि, वक्त के साथ इनका दायरा सिमटता गया। साल 2011 में पश्चिम बंगाल में 34 साल पुराने शासन का अंत हुआ और 2018 में त्रिपुरा भी इनके हाथ से निकल गया। केरल अब तक इनका एकमात्र मजबूत गढ़ बना हुआ था, लेकिन वर्तमान स्थिति बताती है कि अब वहां भी बदलाव की बयार बह चुकी है। यदि केरल से भी लेफ्ट की विदाई होती है, तो यह स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा कि किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं होगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 13:11:26 +0530</pubDate>
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