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                <title>Election Results 2026 - दैनिक जागरण</title>
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                <title>केरल में ढहा लेफ्ट का आखिरी किला, आजादी के बाद पहली बार पूरे देश से वामपंथ का सूपड़ा साफ</title>
                                    <description><![CDATA[केरल विधानसभा चुनाव के रुझानों में कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ बहुमत की ओर है। केरल में वामपंथ की सरकार गिरते ही पूरे देश से लेफ्ट का शासन समाप्त हो जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/the-last-fort-of-left-collapsed-in-kerala-for-the/article-52631"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kerala-election-results.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा मोड़ आता दिख रहा है जिसने दशकों पुरानी राजनीतिक परंपराओं को झकझोर दिया है। केरल विधानसभा चुनाव की मतगणना के जो प्रारंभिक रुझान सामने आए हैं, वे वामपंथी खेमे के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। राज्य की जनता ने इस बार सत्ता परिवर्तन की ओर कदम बढ़ाते हुए कांग्रेस समर्थित यूडीएफ को बड़ी बढ़त दिलाई है। शुरुआती आंकड़ों में यूडीएफ 90 से अधिक सीटों पर अपनी पकड़ बनाए हुए है, जबकि एलडीएफ का आंकड़ा 40 के आसपास सिमटता दिख रहा है। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए भी कुछ सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल होता दिख रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">इस चुनाव की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन खुद अपनी पारंपरिक सीट धर्मदम से पीछे चल रहे हैं। विजयन के अलावा उनके मंत्रिमंडल के लगभग एक दर्जन मंत्री अपनी-अपनी सीटों पर संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। वीना जॉर्ज, एम बी राजेश और वी शिवनकुट्टी जैसे कद्दावर नेताओं का पिछड़ना यह संकेत देता है कि राज्य में वामपंथ के प्रति जनता का मोहभंग हुआ है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख सनी जोसेफ ने इन रुझानों को राज्य की जनता की आवाज बताया है और भरोसा जताया है कि उनकी गठबंधन सरकार 100 से अधिक सीटों के साथ शानदार वापसी करेगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">केरल के ये रुझान केवल एक राज्य के चुनाव परिणाम नहीं हैं, बल्कि यह वामपंथी राजनीति के अस्तित्व से जुड़ी खबर है। आजादी के बाद से ही भारतीय राजनीति में लेफ्ट का अपना एक विशेष स्थान रहा है। हालांकि, वक्त के साथ इनका दायरा सिमटता गया। साल 2011 में पश्चिम बंगाल में 34 साल पुराने शासन का अंत हुआ और 2018 में त्रिपुरा भी इनके हाथ से निकल गया। केरल अब तक इनका एकमात्र मजबूत गढ़ बना हुआ था, लेकिन वर्तमान स्थिति बताती है कि अब वहां भी बदलाव की बयार बह चुकी है। यदि केरल से भी लेफ्ट की विदाई होती है, तो यह स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा कि किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं होगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 13:11:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल में BJP की तरफ से कौन बनेगा CM? यहां देखें 5 दिग्गजों के नाम</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों में भाजपा की जीत के संकेत। जानिए सुवेंदु अधिकारी से लेकर दिलीप घोष तक, कौन हैं वो 5 नेता जो बन सकते हैं बंगाल के नए CM।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/who-will-become-cm-from-bjp-in-west-bengal-see/article-52632"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/west-bengal-election-result-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी, इसका चित्र आज साफ होता दिख रहा है। 4 मई 2026 को आ रहे चुनाव परिणामों के शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल में ऐतिहासिक बढ़त बनाते हुए बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है। यदि ये रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो बंगाल में पहली बार श्कमलश् खिलेगा और ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत हो जाएगा। इस बड़ी जीत के साथ ही अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">पश्चिम बंगाल में पिछले एक दशक से अधिक समय से तृणमूल कांग्रेस का एकछत्र राज रहा है, लेकिन 2026 के चुनाव परिणाम एक नई कहानी लिखते नजर आ रहे हैं। भाजपा ने उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल तक अपनी पकड़ मजबूत की है। बहुमत का जादुई आंकड़ा पार करते ही मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के भीतर और बाहर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दिल्ली से लेकर कोलकाता तक उन चेहरों पर नजर है जो इस चुनौतीपूर्ण राज्य की कमान संभाल सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"><strong>सुवेंदु अधिकारी-</strong> मुख्यमंत्री की रेस में सबसे पहला और प्रमुख नाम सुवेंदु अधिकारी का है। ममता बनर्जी के कभी खास रहे सुवेंदु आज उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे हैं। नंदीग्राम के विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने सड़क से सदन तक सरकार को घेरा है। 2021 में ममता बनर्जी को उन्हीं की सीट पर हराने वाले सुवेंदु इस बार भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों जगह से चुनावी मैदान में हैं। उनकी आक्रामक कार्यशैली और जमीनी पकड़ उन्हें इस रेस में सबसे आगे रखती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"><strong>दिलीप घोष-</strong> भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और अनुभवी नेता दिलीप घोष भी इस लिस्ट में मजबूती से बने हुए हैं। आरएसएस के प्रचारक से अपनी यात्रा शुरू करने वाले घोष ने बंगाल में भाजपा को एक मजबूत संगठन के रूप में खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई है। मेदिनीपुर के पूर्व सांसद और खड़गपुर सदर से मौजूदा उम्मीदवार घोष को उनके बेबाक बयानों और कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रियता के लिए जाना जाता है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उन पर भरोसा जता सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"><strong>सुकांत मजूमदार-</strong> बालुरघाट से लगातार दो बार सांसद और वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार भी एक बड़ा चेहरा हैं। पीएचडी धारक और सौम्य स्वभाव के मजूमदार को केंद्रीय नेतृत्व का काफी करीबी माना जाता है। उत्तर बंगाल में भाजपा की सफलता के पीछे उनका बड़ा योगदान रहा है। एक शिक्षित और युवा चेहरे के तौर पर भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपकर राज्य को एक नया विजन देने की कोशिश कर सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"><strong>अग्निमित्रा पॉल-</strong> आसनसोल दक्षिण से विधायक अग्निमित्रा पॉल ने बहुत कम समय में बंगाल की राजनीति में अपनी विशेष पहचान बनाई है। फैशन डिजाइनिंग की दुनिया छोड़ राजनीति में आईं अग्निमित्रा महिला मोर्चा की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। वह अपनी विधानसभा सीट पर काफी सक्रिय रही हैं और पार्टी का एक प्रखर चेहरा बनकर उभरी हैं। अगर पार्टी किसी महिला चेहरे पर दांव लगाना चाहती है, तो अग्निमित्रा एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"><strong>रूपा गांगुली-</strong> मशहूर अभिनेत्री रूपा गांगुली, जिन्हें पूरा देश 'द्रौपदी' के रूप में जानता है, भाजपा की एक और बड़ी उम्मीद हैं। राज्यसभा की पूर्व सांसद और सोनारपुर दक्षिण से उम्मीदवार रूपा गांगुली लंबे समय से बंगाल में भाजपा का चेहरा रही हैं। महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और राज्य के मुद्दों पर उनकी स्पष्ट राय उन्हें इस रेस में शामिल करती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 13:11:19 +0530</pubDate>
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