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                <title>Kerala Politics - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Kerala Politics RSS Feed</description>
                
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                <title>केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा, राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने और भाजपा द्वारा दोबारा उम्मीदवार न बनाए जाने के बाद यह फैसला सामने आया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/resignation-of-union-minister-george-kurien-decision-after-the-end/article-56698"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/george-korean.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हालांकि इस्तीफे के पीछे की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। 65 वर्षीय कुरियन मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था और भाजपा ने हालिया राज्यसभा चुनाव में उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd">जॉर्ज कुरियन अगस्त 2024 से मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य थे। भाजपा संगठन में उनकी पहचान लंबे समय से दक्षिण भारत, विशेषकर केरल में पार्टी के प्रमुख चेहरों में रही है। राजनीतिक हलकों में उनके इस्तीफे को आगामी संगठनात्मक और मंत्रिमंडलीय बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में संपन्न केरल विधानसभा चुनावों में भाजपा के अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने को भी इस घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में 140 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को केवल तीन सीटों पर जीत मिली थी, जबकि पार्टी ने राज्य में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाया था।</p>
<h3>केरल में भाजपा का चेहरा</h3>
<p class="isSelectedEnd">जॉर्ज कुरियन केरल के प्रमुख ईसाई संप्रदाय सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से जुड़े रहे हैं। वे वर्षों तक टीवी डिबेट्स और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाजपा का पक्ष रखने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के केरल दौरों के दौरान कुरियन अक्सर उनके भाषणों का मलयालम में अनुवाद करते दिखाई देते थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना केरल के ईसाई समुदाय के बीच भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा था।</p>
<h3>राज्यसभा चुनाव से संकेत</h3>
<p class="isSelectedEnd">18 जून को 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हुए थे। इनमें अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। भाजपा ने 4 जून को अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, जिसमें जॉर्ज कुरियन और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मौका नहीं दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों नेताओं के टिकट कटने के बाद से ही केंद्र सरकार में संभावित फेरबदल की अटकलें तेज हो गई थीं। अब कुरियन के इस्तीफे ने इन चर्चाओं को और बल दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि भाजपा आने वाले महीनों में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर नई रणनीति के तहत बदलाव कर सकती है। दक्षिण भारत में पार्टी के प्रदर्शन और विस्तार को लेकर भी नेतृत्व नए सिरे से समीक्षा कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इससे पहले तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई के इस्तीफे ने भी दक्षिण भारत की राजनीति में हलचल पैदा की थी। ऐसे में जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा भाजपा की दक्षिण भारत रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>फिलहाल भाजपा नेतृत्व की ओर से कुरियन की भविष्य की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जारी है कि पार्टी उन्हें संगठन में नई जिम्मेदारी दे सकती है। केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा अब राष्ट्रीय राजनीति और भारत समाचार अपडेट में प्रमुख चर्चा का विषय बन गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:04:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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                <title>वीडी सतीशन बनेंगे केरल के नए सीएम, जानें क्यों चुना गया?</title>
                                    <description><![CDATA[केरल में बड़ा सियासी बदलाव संभव, वीडी सतीशन के नाम पर सीएम पद के लिए लगभग सहमति। कांग्रेस में अंदरूनी हलचल तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/vd-satheesan-will-become-the-new-cm-of-kerala-know/article-53330"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t122817.792.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा बदलाव चर्चा में है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इस दौरान सबसे ज्यादा ध्यान वीडी सतीशन पर जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि केरल के नए मुख्यमंत्री बनने के लिए चर्चा में हैं। खबरों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस आलाकमान ने उनके नाम पर लगभग सहमति बना ली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आधिकारिक घोषणा जल्द हो सकती है। जैसे ही यह खबर सामने आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्टी ने अभी तक कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अंदरूनी चर्चाओं में सतीशन का नाम सामने आया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांग्रेस नेतृत्व लंबे समय से केरल में एक ऐसे नेता की तलाश में था जो संगठन को मजबूत रख सके और विधानसभा में विपक्ष की भूमिका को प्रभावशाली तरीके से निभा सके। इस संदर्भ में वीडी सतीशन का नाम सामने आया है। वे पिछले कुछ वर्षों से केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य कर रहे हैं और सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर अपनी राय रख चुके हैं। पार्टी के भीतर उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर जुड़े रहते हैं और स्थानीय मुद्दों को मजबूती से उठाते हैं। यही कारण है कि आलाकमान ने उन पर भरोसा दिखाने में कदम बढ़ाया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पार्टी के सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल में कांग्रेस को एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत थी जो युवा कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चल सके और मौजूदा राजनीतिक हालात में मजबूत चुनौती पेश कर सके। वीडी सतीशन इस मापदंड पर काफी हद तक फिट नजर आते हैं। संगठन में उनकी स्वीकार्यता बढ़ रही है और कई वरिष्ठ नेता भी उनके नाम पर सहमति जता चुके हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी कुछ स्तर पर चर्चा और सलाह-मशविरा बाकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन माहौल स्पष्ट रूप से उनके पक्ष में बनता दिख रहा है। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में हुई बैठकों में उनके नाम पर गंभीरता से विचार किया गया।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वीडी सतीशन केरल के नए मुख्यमंत्री बनते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह कांग्रेस की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा। इससे पार्टी में नई ऊर्जा आने की संभावना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर जब केरल में राजनीतिक मुकाबला लगातार कड़ा रहा है। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विरोधी दल भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और अपने स्तर पर रणनीतियों में बदलाव पर विचार कर रहे हैं। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी की निगाहें कांग्रेस आलाकमान की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कुछ घंटों या दिनों में स्थिति स्पष्ट कर सकती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 12:48:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>केरल में किसे मिलेगी कमान? कांग्रेस में CM के लिए इन 3 नेताओं की सबसे ज्यादा चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[केरल कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला और वीडी सतीशन के नाम चर्चा में हैं। विधायकों की राय पर रिपोर्ट सौंपी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/who-will-get-the-command-in-kerala-these-3-leaders/article-52930"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t153354.370.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरखाने चर्चा अब खुलकर सामने आने लगी है। शुक्रवार को पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को सौंप दी। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट तैयार करने से पहले पर्यवेक्षकों ने राज्य के कांग्रेस विधायकों से अलग-अलग बातचीत की और उनकी राय जानी। इस पूरी कवायद के बाद अब पार्टी नेतृत्व के सामने तीन बड़े नाम उभरकर आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा केसी वेणुगोपाल की हो रही है। सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">करीब 40 से ज्यादा विधायक उनके पक्ष में बताए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर उन्हें संगठन और दिल्ली नेतृत्व दोनों के बीच मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है। हालांकि मामला इतना सीधा भी नहीं दिख रहा। वे राहुल गांधी के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं और यही वजह है कि पार्टी हाईकमान उन्हें राज्य की राजनीति में भेजने को लेकर सावधानी बरत सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व इस बार ऐसा चेहरा सामने लाना चाहता है जो संगठन और गठबंधन दोनों को साथ लेकर चल सके। इसी कारण दूसरे विकल्पों पर भी गंभीरता से चर्चा हो रही है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमेश चेन्निथला का नाम भी दौड़ में बना हुआ है। उनके समर्थन में 20 से ज्यादा विधायकों का झुकाव बताया जा रहा है। चेन्निथला लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पार्टी के पुराने तथा अनुभवी नेताओं में उनकी गिनती होती है। वहीं विपक्ष के नेता वीडी सतीशन को लेकर भी कांग्रेस और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">UDF <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोगी दलों के बीच सकारात्मक माहौल बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार </span>IUML, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल कांग्रेस (जोसेफ गुट) और </span>RSP <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे सहयोगी दल सतीशन के नाम पर सहमति जता रहे हैं। उनका मानना है कि उन्होंने विपक्ष के नेता के तौर पर सरकार के खिलाफ आक्रामक भूमिका निभाई और जमीनी मुद्दों पर सक्रियता दिखाई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व किसी जल्दबाजी में नजर नहीं आ रहा। पार्टी पहले विधायकों की राय</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गठबंधन सहयोगियों का रुख और आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहती है। ऐसा कहा जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली में और बैठकों का दौर चल सकता है। केरल में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस इस बार ऐसा चेहरा चुनना चाहती है जो पार्टी को सीधे सत्ता की लड़ाई में मजबूत स्थिति में ला सके। इसी वजह से मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन लगातार जारी है और अंतिम फैसला हाईकमान के स्तर पर ही होने की संभावना मानी जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:43:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केरल में ढहा लेफ्ट का आखिरी किला, आजादी के बाद पहली बार पूरे देश से वामपंथ का सूपड़ा साफ</title>
                                    <description><![CDATA[केरल विधानसभा चुनाव के रुझानों में कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ बहुमत की ओर है। केरल में वामपंथ की सरकार गिरते ही पूरे देश से लेफ्ट का शासन समाप्त हो जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/the-last-fort-of-left-collapsed-in-kerala-for-the/article-52631"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kerala-election-results.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा मोड़ आता दिख रहा है जिसने दशकों पुरानी राजनीतिक परंपराओं को झकझोर दिया है। केरल विधानसभा चुनाव की मतगणना के जो प्रारंभिक रुझान सामने आए हैं, वे वामपंथी खेमे के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। राज्य की जनता ने इस बार सत्ता परिवर्तन की ओर कदम बढ़ाते हुए कांग्रेस समर्थित यूडीएफ को बड़ी बढ़त दिलाई है। शुरुआती आंकड़ों में यूडीएफ 90 से अधिक सीटों पर अपनी पकड़ बनाए हुए है, जबकि एलडीएफ का आंकड़ा 40 के आसपास सिमटता दिख रहा है। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए भी कुछ सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल होता दिख रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">इस चुनाव की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन खुद अपनी पारंपरिक सीट धर्मदम से पीछे चल रहे हैं। विजयन के अलावा उनके मंत्रिमंडल के लगभग एक दर्जन मंत्री अपनी-अपनी सीटों पर संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। वीना जॉर्ज, एम बी राजेश और वी शिवनकुट्टी जैसे कद्दावर नेताओं का पिछड़ना यह संकेत देता है कि राज्य में वामपंथ के प्रति जनता का मोहभंग हुआ है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख सनी जोसेफ ने इन रुझानों को राज्य की जनता की आवाज बताया है और भरोसा जताया है कि उनकी गठबंधन सरकार 100 से अधिक सीटों के साथ शानदार वापसी करेगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">केरल के ये रुझान केवल एक राज्य के चुनाव परिणाम नहीं हैं, बल्कि यह वामपंथी राजनीति के अस्तित्व से जुड़ी खबर है। आजादी के बाद से ही भारतीय राजनीति में लेफ्ट का अपना एक विशेष स्थान रहा है। हालांकि, वक्त के साथ इनका दायरा सिमटता गया। साल 2011 में पश्चिम बंगाल में 34 साल पुराने शासन का अंत हुआ और 2018 में त्रिपुरा भी इनके हाथ से निकल गया। केरल अब तक इनका एकमात्र मजबूत गढ़ बना हुआ था, लेकिन वर्तमान स्थिति बताती है कि अब वहां भी बदलाव की बयार बह चुकी है। यदि केरल से भी लेफ्ट की विदाई होती है, तो यह स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा कि किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं होगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 13:11:26 +0530</pubDate>
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