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                <title>Bengal Politics - दैनिक जागरण</title>
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                <title>TMC नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार, फालता थाने पर हमले का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश का आरोप, हिंसक प्रदर्शन मामले में पुलिस की कार्रवाई तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-leader-jahangir-khans-wife-arrested-for-attack-on-falta/article-56486"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sarina-bibi-arrested.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जहांगीर खान से जुड़े मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी पत्नी सरीना बीबी को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार सुबह हुई इस गिरफ्तारी के बाद इलाके में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पुलिस का आरोप है कि सरीना बीबी ने फालता पुलिस स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में समर्थकों को इकट्ठा कर विरोध प्रदर्शन कराया था और इसी दौरान पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों पर हमला करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और कानून व्यवस्था बिगाड़ने में उनकी भूमिका सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें डायमंड हार्बर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरा मामला 16 जून को फालता थाने के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। पुलिस के अनुसार जहांगीर खान की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थक बड़ी संख्या में थाने के बाहर जमा हो गए थे। इसी दौरान प्रदर्शन उग्र हो गया और भीड़ ने सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल कानून व्यवस्था बाधित की बल्कि पुलिस हिरासत में मौजूद जहांगीर खान को छुड़ाने की भी कोशिश की। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य वीडियो फुटेज की जांच शुरू की थी। इन्हीं फुटेज के आधार पर कई लोगों की पहचान की गई और अब तक 27 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जहांगीर खान का नाम पिछले कुछ महीनों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। वह दक्षिण 24 परगना जिले के फालता क्षेत्र में टीएमसी के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें टीएमसी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी उनका नाम कई बार चर्चा में आया था। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार की तरह पेश किया था और सार्वजनिक सभाओं में कई बार फिल्म का चर्चित संवाद दोहराया था। इसी वजह से वह स्थानीय स्तर पर काफी चर्चित हो गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि चुनाव के बाद हालात तेजी से बदले। फालता विधानसभा सीट पर मतदान के दौरान गड़बड़ियों के आरोप सामने आए थे। चुनाव आयोग को मतदान रद्द कर दोबारा वोटिंग करानी पड़ी थी। दोबारा मतदान से ठीक पहले जहांगीर खान ने चुनावी मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा ने इस सीट पर बड़ी जीत दर्ज की और उसी समय से जहांगीर खान सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देने लगे। इस बीच उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप भी सामने आए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार फालता थाने में उनके खिलाफ सात अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन मामलों में अवैध वसूली, धमकी देने, लोगों को डराने और महिलाओं को गैंगरेप की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। आरोप लगने के बाद वह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रहे। पुलिस का कहना है कि वह लगातार अपना ठिकाना बदल रहे थे और गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">आखिरकार 8 जून को पश्चिम बंगाल पुलिस ने उन्हें नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक वह देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें राज्य में लाया गया और पूछताछ शुरू की गई। इसके बाद पुलिस ने उन्हें फालता क्षेत्र में कई जगहों पर ले जाकर घटनास्थलों की पहचान कराई। इसी दौरान उनकी सार्वजनिक परेड भी कराई गई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इन वीडियो में जहांगीर खान लोगों के सामने कान पकड़कर और हाथ जोड़कर माफी मांगते दिखाई दिए। एक वीडियो में वह हथकड़ी लगाए नजर आए, जबकि दूसरे वीडियो में उनकी कमर में रस्सी बंधी हुई थी। इन तस्वीरों को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई। विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन का कहना था कि यह जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">फालता थाने पर हुए हमले के बाद राज्य सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए। इसके बाद पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान का अभियान शुरू किया। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं क्योंकि जांच अभी जारी है। हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ जनता का विरोध खुलकर सामने आया है। कहीं नेताओं का घेराव किया गया तो कहीं उन पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगे। ऐसे माहौल में जहांगीर खान और उनकी पत्नी से जुड़ा यह मामला राज्य की राजनीति में नया मोड़ लेकर आया है। सरीना बीबी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि फालता थाने पर हुए हमले और हिंसा में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:55:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>तृणमूल के 20 सांसदों ने पार्टी छोड़ एनसीपीआई में किया विलय</title>
                                    <description><![CDATA[एनसीपीआई में शामिल होकर बगावती सांसदों ने साधा संवैधानिक दांव, भाजपा से सीधा जुड़ाव टालने के पीछे भी रही राजनीतिक रणनीति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/20-trinamool-mps-left-the-party-and-merged-with-ncpi/article-56133"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/trinamool-congress.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय करने के फैसले ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पहली नजर में यह फैसला चौंकाने वाला लग सकता है क्योंकि जिस पार्टी में इन सांसदों ने विलय किया है, वह राष्ट्रीय स्तर पर लगभग अज्ञात राजनीतिक संगठन मानी जाती है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक और कानूनी रणनीति भी जुड़ी हुई बताई जा रही है। तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष एनसीपीआई में विलय का दावा पेश किया। यह संख्या तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसदों के दो-तिहाई से अधिक बताई जा रही है। यही आंकड़ा इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए यह रास्ता चुना, क्योंकि मौजूदा कानूनी व्यवस्था में केवल दो-तिहाई सदस्यों के साथ किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में विलय ही उन्हें अयोग्यता से बचा सकता है। एनसीपीआई की बात करें तो यह पार्टी त्रिपुरा में पंजीकृत है, लेकिन अभी तक राष्ट्रीय राजनीति में उसका कोई बड़ा प्रभाव नहीं रहा है। वर्ष 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सीमित स्तर पर चुनाव लड़ा था और उसे बेहद कम वोट मिले थे। इसके बावजूद अब अचानक यह पार्टी लोकसभा में 20 सांसदों के साथ चर्चा के केंद्र में आ गई है। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बागी सांसदों ने इतनी छोटी पार्टी को ही क्यों चुना। शुरुआत में सांसदों के बीच अलग राजनीतिक समूह बनाने पर भी चर्चा हुई थी। लेकिन दल-बदल कानून की मौजूदा व्यवस्था के तहत ऐसा करना आसान नहीं था। यदि सांसद अलग समूह बनाते तो उन्हें अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता था। यही वजह रही कि उन्होंने विलय का विकल्प चुना।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संविधान की दसवीं अनुसूची यानी एंटी-डिफेक्शन लॉ की पृष्ठभूमि इस फैसले को समझने में अहम भूमिका निभाती है। जब यह कानून 1985 में लागू हुआ था तब इसमें एक-तिहाई विधायकों या सांसदों के समर्थन से अलग समूह बनाने की छूट थी। लेकिन बाद के वर्षों में इस प्रावधान का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ। कई राज्यों और केंद्र की राजनीति में नेताओं ने बार-बार दल बदलकर सरकारों की दिशा बदल दी। इसे देखते हुए वर्ष 2003 में कानून में संशोधन किया गया और अलग समूह बनाने वाली व्यवस्था समाप्त कर दी गई। संशोधन के बाद केवल एक ही रास्ता बचा, जिसमें किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसद या विधायक किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में विलय कर सकते हैं। इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने एनसीपीआई में शामिल होने का फैसला किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पूरी तरह संवैधानिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया। इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पिछले कुछ समय से ऐसी खबरें सामने आती रही थीं कि बागी सांसद भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं। अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे सीधे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। इसके पीछे भी राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तृणमूल कांग्रेस और भाजपा पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से कट्टर प्रतिद्वंद्वी रही हैं। ऐसे में यदि सांसद सीधे भाजपा में शामिल हो जाते तो उनके निर्वाचन क्षेत्रों में इसका नकारात्मक संदेश जा सकता था। दूसरी ओर भाजपा के लिए भी इतने बड़े समूह को सीधे पार्टी संरचना में समायोजित करना आसान नहीं होता। पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भी असंतोष पैदा हो सकता था। एनसीपीआई का विकल्प इस लिहाज से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना गया। यह पार्टी राजनीतिक रूप से छोटी है और उसका संगठनात्मक ढांचा सीमित है। ऐसे में बागी सांसद वहां अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रख सकते हैं। साथ ही वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए को समर्थन देकर केंद्र की राजनीति में अपनी भूमिका भी कायम रख सकते हैं। इस घटनाक्रम का असर केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा। लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ने से एनडीए को भी राजनीतिक लाभ मिल सकता है। विशेष रूप से उन विधेयकों के संदर्भ में, जिनके लिए व्यापक समर्थन की आवश्यकता होती है। माना जा रहा है कि लोकसभा में संख्या बल बढ़ने से सरकार की रणनीतिक स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हो सकती है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना जताई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:09:23 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर बढ़े विरोध के स्वर, सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके गए</title>
                                    <description><![CDATA[धनुरहाट की सरपंच मंदिरा गेन का माफी मांगते वीडियो वायरल, कुछ ही दिनों में तृणमूल नेताओं को निशाना बनाने की कई घटनाएं सामने आईं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/voice-of-protest-against-tmc-leaders-increased-in-west-bengal/article-56123"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घटनाएं लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले तृणमूल युवा नेता सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके जाने और कथित मारपीट की घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ सप्ताह के दौरान राज्य के कई हिस्सों में टीएमसी नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा है। वहीं दूसरी ओर धनुरहाट ग्राम पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह लोगों के बीच हाथ जोड़कर माफी मांगती और भावुक नजर आ रही हैं। सौमित्र बनर्जी को पुलिस सुरक्षा के बीच रानीगंज कोर्ट ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भीड़ ने उन पर अंडे फेंके और धक्का-मुक्की भी की। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और उन्हें सुरक्षित तरीके से अदालत तक पहुंचाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हुआ, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। सौमित्र बनर्जी की गिरफ्तारी बीजेपी नेता रवि केशरी की शिकायत के आधार पर हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बनर्जी ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया था। इसी मामले में उन्हें अदालत में पेश किया जाना था। हालांकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है, जबकि विपक्षी दल इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, दक्षिण 24 परगना जिले के धनुरहाट ग्राम पंचायत क्षेत्र से भी एक अलग लेकिन चर्चित घटना सामने आई है। पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह अपने घर के बाहर जमा लोगों के सामने हाथ जोड़कर खड़ी दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह कान पकड़कर माफी मांगती और भावुक होकर रोती नजर आती हैं। कुछ दृश्य ऐसे भी हैं जिनमें वह घुटनों के बल बैठी हुई दिखाई देती हैं। बताया जा रहा है कि पंचायत से जुड़े किसी स्थानीय विवाद के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके घर के बाहर पहुंच गए थे और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि इस मामले को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन वीडियो ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इसे जनता के बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा है, जबकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि कई घटनाओं को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सोमवार को टीएमसी विधायक और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष भी विरोध का सामना कर चुके हैं। कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान किसी व्यक्ति ने उन पर अंडा फेंक दिया था। घटना के बाद कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि हमलावर भाजपा समर्थक थे। उन्होंने दावा किया कि अंडा उनकी आंख के बेहद करीब से गुजरा और यदि वह समय रहते बचाव नहीं करते तो गंभीर चोट लग सकती थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। राज्य में हाल के दिनों में टीएमसी नेताओं को निशाना बनाने की घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। 28 मई को पार्टी सांसद सौगत रॉय पर उत्तर 24 परगना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अंडे फेंके गए थे। इसके दो दिन बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दौरे के दौरान भी विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां उन पर अंडे और पत्थर फेंके जाने की खबर सामने आई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद जून के पहले सप्ताह से लेकर अब तक कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ इसी तरह की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पूर्व विधायक सनत डे, विधायक मदन मित्रा, पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता, नेता मोहम्मद जसीमुद्दीन और सुजय हाजरा जैसे कई नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में अंडों के साथ टमाटर और अन्य वस्तुएं भी फेंकी गईं। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं राज्य की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और जनता की नाराजगी को दर्शाती हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि चुनावी माहौल और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण विरोध प्रदर्शनों को अधिक आक्रामक रूप मिल रहा है। दूसरी ओर कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नेताओं की सुरक्षा के बावजूद ऐसी घटनाएं बार-बार कैसे हो रही हैं। टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी दल सुनियोजित तरीके से पार्टी नेताओं को बदनाम करने और माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि जनता अपनी नाराजगी लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त कर रही है और इसके लिए सत्तारूढ़ दल को आत्ममंथन करना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:45:30 +0530</pubDate>
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                <title>टीएमसी में बगावत तेज, ममता के करीबी सुदीप बंदोपाध्याय भी बागी खेमे में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल, बागी सांसदों ने लोकसभा में ‘असली टीएमसी’ होने का दावा ठोकने की तैयारी की, स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात संभव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rebellion-in-tmc-intensifies-mamatas-close-friend-sudeep-bandopadhyay-also/article-55921"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-rebellion.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है और पार्टी की शीर्ष नेतृत्व के लिए यह स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। ताजा घटनाक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी और पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के बागी खेमे के साथ खड़े होने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि यह घटनाक्रम टीएमसी के अंदर चल रहे शक्ति संघर्ष को और तेज कर सकता है। विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद संगठन के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा था। अब यह असंतोष खुली बगावत का रूप लेता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि सुदीप बंदोपाध्याय ने बागी सांसदों के साथ बैठकें की हैं और आगे की रणनीति पर चर्चा भी की है। इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सुदीप लंबे समय से ममता बनर्जी के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बागी गुट सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकता है। इस मुलाकात के दौरान बागी सांसद अपने पक्ष को विस्तार से रखने और संसदीय स्तर पर मान्यता की मांग कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो यह टीएमसी के लिए एक बड़ा संस्थागत संकट साबित हो सकता है। लोकसभा में पार्टी की स्थिति और नेतृत्व को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं। बागी खेमे की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि लोकसभा में उनके समूह का नेतृत्व सुदीप बंदोपाध्याय करें। विद्रोही नेताओं का मानना है कि उनके अनुभव और राजनीतिक पकड़ को देखते हुए वे इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा हो सकते हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ सुदीप बंदोपाध्याय की मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। रिपोर्टों के अनुसार इस मुलाकात में टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद थीं। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की खबरों ने भी राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। विपक्षी दल और राजनीतिक पर्यवेक्षक इन बैठकों को बंगाल की राजनीति में संभावित नए समीकरणों के संकेत के रूप में देख रहे हैं। टीएमसी के भीतर असंतोष केवल संसदीय स्तर तक सीमित नहीं है। विधानसभा में भी स्थिति पार्टी नेतृत्व के लिए चिंताजनक बताई जा रही है। खबरों के मुताबिक बड़ी संख्या में विधायक पहले ही हाईकमान के फैसलों पर सवाल उठा चुके हैं। बागी विधायकों ने निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी को नेता के रूप में समर्थन देने का संकेत दिया है। इससे साफ है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मंत्री मानस भूनिया का हाल ही में पार्टी से इस्तीफा देना भी इसी क्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। उनके इस्तीफे के बाद यह संदेश गया कि असंतोष केवल कुछ नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन के विभिन्न स्तरों पर इसकी गूंज सुनाई दे रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि पार्टी नेतृत्व जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाता तो आने वाले समय में और भी नेता खुलकर विरोध का रास्ता अपना सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बागी सांसद जगदीश चंद्र बसूनिया ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप दिया है और वे जल्द ही अपने समूह की ओर से औपचारिक दावा पेश करेंगे। उनका कहना है कि उनका गुट ही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है और इसी आधार पर वे संसदीय मान्यता की मांग करेंगे। इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर टीएमसी समर्थकों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व अभी भी मजबूत स्थिति में है और बागी नेताओं की गतिविधियां संगठन को स्थायी नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगी। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह असंतोष अस्थायी है और समय के साथ स्थिति सामान्य हो जाएगी। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना आसान नहीं है कि विवाद किस दिशा में जाएगा। पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से नाटकीय घटनाक्रमों और तीखे राजनीतिक संघर्षों के लिए जानी जाती रही है। मौजूदा संकट भी उसी परंपरा का हिस्सा माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 17:25:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC में बढ़ी सियासी हलचल, एक और राज्यसभा सांसद ने दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[सुष्मिता देव के इस्तीफे से तृणमूल कांग्रेस को नया झटका, सांसदों और विधायकों की बगावत के बीच ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी सक्रिय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/political-stir-increases-in-tmc-another-rajya-sabha-mp-resigns/article-55548"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sushmita-dev-resignation.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलों का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। पार्टी में लगातार जारी टूट के बीच बुधवार को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और संसद दोनों से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है। पिछले तीन दिनों में यह दूसरा मौका है जब तृणमूल कांग्रेस के किसी राज्यसभा सांसद ने पार्टी से किनारा किया है। इससे पहले 8 जून को सुखेंदु शेखर ने भी पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा देकर राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुष्मिता देव के इस्तीफे ने ऐसे समय में तृणमूल कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है जब पार्टी पहले से ही सांसदों और विधायकों की बगावत का सामना कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष की ओर भी संकेत करता है। हालांकि सुष्मिता देव ने अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत और राजनीतिक कारणों से जुड़ा फैसला बताया है, लेकिन उनके इस कदम के दूरगामी राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में सुष्मिता देव ने कहा कि राज्यसभा की सीट उन्हें पार्टी की ओर से मिली थी, इसलिए पार्टी छोड़ने के साथ उन्होंने संसद की सदस्यता छोड़ना भी उचित समझा। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल वह किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने को लेकर कोई निर्णय नहीं ले रही हैं। भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि अभी वह कुछ समय आराम करना चाहती हैं और अपने परिवार के साथ समय बिताएंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष लगातार बड़ा रूप लेता दिखाई दे रहा है। पार्टी के लोकसभा सांसदों और विधायकों के एक बड़े वर्ग ने अलग रुख अपनाया है। हाल के दिनों में बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ी हलचल तब देखने को मिली जब बड़ी संख्या में विधायकों ने अलग गुट बनाकर अपना नेता चुन लिया। बागी खेमे का दावा है कि उनके साथ और भी विधायक जुड़ सकते हैं। इससे पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">लोकसभा में भी पार्टी की स्थिति चुनौतीपूर्ण होती दिखाई दे रही है। हाल के घटनाक्रमों के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने अलग रुख अपनाया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में कुछ और नेता भी अपना फैसला बदल सकते हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से स्थिति को नियंत्रण में बताने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लगातार हो रहे इस्तीफे और बगावत के संकेत अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इन घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। दिल्ली में अभिषेक बनर्जी की कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच विपक्षी एकजुटता और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। इससे एक दिन पहले ममता बनर्जी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं की बैठक करीब एक घंटे तक चली थी।</p>
<p class="isSelectedEnd"> तृणमूल कांग्रेस फिलहाल दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। एक ओर पार्टी को अपने संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष को संभालना है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका भी मजबूत बनाए रखनी है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व से लगातार हो रही मुलाकातों को विपक्षी राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। पार्टी में टूट के बाद कई राजनीतिक संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। सबसे पहले कानूनी और संवैधानिक लड़ाई की संभावना जताई जा रही है। बागी गुट और मूल नेतृत्व दोनों अपने-अपने दावों को मजबूत करने की कोशिश करेंगे। विधानसभा, चुनाव आयोग और न्यायालयों में इस मामले को लेकर विवाद बढ़ सकता है। साथ ही दल-बदल कानून को लेकर भी कई सवाल खड़े हो सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">यदि बागी नेताओं का प्रभाव बढ़ता है तो राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य के विधानसभा चुनावों पर भी इसका असर पड़ सकता है। कुछ विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि यदि मतभेद और गहरे हुए तो अलग राजनीतिक संगठन या स्थायी गुट के रूप में नई ताकत उभर सकती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि तृणमूल कांग्रेस का भविष्य किस दिशा में जाएगा। पार्टी के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती है, जबकि बागी गुट अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश में जुटा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:29:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य के ठिकानों पर छापा, 80 लाख कैश बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य के घर और ऑफिस पर छापेमारी में 80 लाख रुपये कैश और राहत सामग्री बरामद हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-leader-dipankar-bhattacharyas-premises-raided-80-lakh-cash-recovered/article-54230"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/dipankar-bhattacharya-tmc-leader-raids-₹80-lakh-cash.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में दीपांकर भट्टाचार्य के कुछ ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी की</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद हुए। ये कार्रवाई सोमवार देर रात की गई। सुनने में आया है कि दीपांकर भट्टाचार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहले बादुरिया म्युनिसिपैलिटी के चेयरमैन रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर सरकारी राहत सामग्री के गबन और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इसी वजह से ये छापेमारी की गई। पुलिस ने उनके घर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्टी ऑफिस और एक कंप्यूटर सेंटर की तलाशी ली। कार्रवाई के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आज उन्हें कोर्ट में पेश करने की तैयारी हो रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुरुआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब पुलिस टीम कंप्यूटर सेंटर पहुंची तो वहां ताला लगा था। इसके बाद अधिकारियों को ताला तोड़कर अंदर जाना पड़ा। तलाशी के दौरान अलग-अलग जगहों से बड़ी मात्रा में कैश मिल गया। कुछ सूत्रों का कहना है कि मौके पर बरामद की गई रकम का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिला। पुलिस को राहत सामग्री भी मिली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे कथित तौर पर सरकारी वितरण के लिए रखा गया था। अधिकारियों के मुताबिक पूरे मामले में दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां अब देख रही हैं कि ये रकम कहां से आई और इसका इस्तेमाल किस काम के लिए होना था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार कार्रवाई हो रही है। सरकार बदलने के बाद कई स्थानीय नेताओं और अधिकारियों पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता दिखा है। इस क्रम में यह कार्रवाई भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इलाके में देर रात तक पुलिस की मौजूदगी बनी रही और आसपास के लोग इस मामले पर चर्चा करते रहे। कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि छापेमारी कई घंटों तक चली</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पुलिस टीम लगातार दस्तावेजों की जांच करती रही।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं मुर्शिदाबाद जिले में प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता पुलिस के डीसी रैंक अधिकारी शांतनु सिन्हा बिस्वास के घर पर दोबारा छापेमारी की है। बताया जा रहा है कि ईडी की टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ सुबह उनके घर पहुंची। अधिकारियों ने घर के आस-पास और परिसर में मौजूद तालाब तक की निगरानी की है। सूत्रों के अनुसार घर के चारों ओर लगे </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">कैमरों की भी छानबीन की जा रही है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों मामलों में जांच जारी है और एजेंसियां दस्तावेजों के आधार पर अगली कार्रवाई कर रही हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:19:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शुभेंदु सरकार की अपराधियों पर लगाम! हावड़ा में पुलिस ने कुख्यात अपराधी का अंडरवियर में सड़क पर जुलूस निकाला</title>
                                    <description><![CDATA[हावड़ा में पुलिस ने कुख्यात आरोपी को क्राइम सीन पर ले जाकर सड़क पर घुमाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/shubhendu-governments-control-on-criminals-police-took-out-a-procession/article-54176"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/west-bengal-howrah-suvendu-adhikari-police-action.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल के हावड़ा में पुलिस के एक्शन का एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बवाल मचा हुआ है। इस वीडियो में पुलिस एक कथित कुख्यात अपराधी को सिर्फ अंडरवियर में हाथकड़ी लगाकर सड़कों पर घुमाती नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरोपी आकाश सिंह को पुलिस अलग-अलग क्राइम सीन पर ले गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां पुराने मामलों की जांच की गई और घटनाओं का रिकंस्ट्रक्शन किया गया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हावड़ा के मालीपांचघरा और गोलाबाड़ी थाना क्षेत्र में दर्ज कई मामलों की जांच के लिए पुलिस इसे लेकर निकली थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराध से जुड़े घटनास्थलों पर ले जाकर यह समझने की कोशिश की गई कि वारदात कैसे हुई और इसमें किसकी भूमिका थी। इस दौरान आरोपी को कड़ी सुरक्षा के बीच इलाके में घुमाया गया। इस पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और कई ने वीडियो बना लिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वायरल वीडियो में आरोपी काले रंग के बरमूडे में दिख रहा है। वह कैमरे के सामने यह कहते हुए नजर आता है कि उसे नहीं पता कि उसे क्यों घुमाया जा रहा है और उसने कोई अपराध नहीं किया। हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरोपी पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और पुलिस पुराने मामलों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राज्य में नई सरकार बनने के बाद से अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बातें लगातार हो रही हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाने का भरोसा दिलाया है। इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस की यह कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है। प्रशासनिक स्तर पर इसे अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ लोग सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल के दिनों में हावड़ा में अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। कई इलाकों में अवैध कब्जों और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान भी चल रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार ऑपरेशन चलाए जाएंगे। फिलहाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और मामला चर्चा में बना हुआ है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 17:07:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल में सत्ता बदलते ही एक्शन मोड में सरकार, शुभेंदु अधिकारी ने पहली बैठक में लिए कई बड़े फैसले</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट बैठक में सीमा सुरक्षा, आयुष्मान भारत, भर्ती प्रक्रिया और जनगणना को लेकर बड़े फैसले हुए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/government-in-action-mode-as-soon-as-power-changed-in/article-53211"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t165410.494.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद से राजनीतिक और प्रशासनिक हलचलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो राज्य में चर्चा का विषय बन गए हैं। राज्य सचिवालय में हुई इस बैठक में सीमा सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य योजनाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी नौकरियां और जनगणना जैसे कई मुद्दों पर निर्णय हुए। ऐसी खबरें आ रही हैं कि नई सरकार प्रशासनिक पकड़ को मजबूत करने के लिए जल्दी से फैसले ले रही है। बैठक के बाद की सूचनाओं ने राज्य की राजनीति में और भी गर्माहट ला दी है। खास बात ये है कि कुछ योजनाओं को लागू करने का निर्णय लिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन पर पहले राजनीतिक विवाद होते रहते थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">माना जा रहा है कि भारत-बांग्लादेश सीमा से संबंधित निर्णय सबसे बड़ा है। सरकार ने बीएसएफ को फेंसिंग के लिए जमीन देने की प्रक्रिया को तेज करने का आदेश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह काम अगले 45 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले सीमा क्षेत्रों में फेंसिंग के लिए जमीन हस्तांतरण में काफी मुश्किलें आती रही हैं। अब नई सरकार इसे प्राथमिकता में रख रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव के संकेत हैं। सरकार ने बताया है कि पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू होने जा रही है। पहले यहां </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य साथी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">योजना चल रही थी। नई सरकार का दावा है कि इस योजना के लागू होने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को अस्पतालों में इलाज का लाभ मिलेगा। इसी बैठक में विश्वकर्मा योजना और उज्ज्वला योजना को भी मंजूरी दी गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत कारीगरों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छोटे कामगारों और गरीब परिवारों को सीधा लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक में युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसले हुए। लंबे समय से रुकी भर्ती प्रक्रियाओं को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उम्मीदवारों को पांच साल तक का रिलेक्सेशन देने का फैसला भी किया गया। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भर्ती विवाद और कोर्ट मामलों के कारण हजारों उम्मीदवार प्रभावित हुए थे। नई सरकार इस समस्या को जल्द सुलझाने के संकेत दे रही है। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनगणना की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का निर्णय भी चर्चा में है। सरकार का कहना है कि विकास योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों के लिए सही जनसंख्या आंकड़े आवश्यक हैं। ऐसे में रुकी हुई प्रक्रिया को तुरंत आगे बढ़ाने की बात कही गई है। हालाँकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि पिछले शासन की सभी योजनाएं बंद नहीं होंगी। जिन योजनाओं से जनता को लाभ मिल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें जारी रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर उनमें बदलाव किया जा सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में इस पहली बैठक में कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें दिलीप घोष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्निमित्रा पॉल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निशीथ प्रमाणिक और अन्य नेता शामिल थे। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विभागों का अंतिम बंटवारा अभी नहीं हुआ है। सरकार ने कहा है कि अगले सोमवार को फिर से कैबिनेट बैठक होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विभागों और नई नीतियों पर चर्चा की जाएगी। बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद राज्य की राजनीति में पूर्ण बदलाव आया है। तृणमूल कांग्रेस को इस बार बड़ा नुकसान हुआ है और कई प्रमुख नेताओं की सीटें भी हाथ से निकल गईं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 17:32:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में नई सरकार, CM मोहन यादव बोले- शुरू हुआ सुशासन का नवयुग</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में सुवेन्दु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। डॉ. मोहन यादव ने सुशासन और विकास की बात कही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-government-in-west-bengal-dr-mohan-yadav-said/article-53014"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t180418.213.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">कोलकाता के बिग्रेड परेड ग्राउंड में शनिवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के साथ राज्य में सत्ता परिवर्तन औपचारिक रूप से हो गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में आज से सुशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और विकास के नवयुग की शुरुआत हो गई है। डॉ. यादव ने कहा कि अब पश्चिम बंगाल सच्चे अर्थों में </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">आमार सोनार बांग्ला</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं और पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुबह से ही बिग्रेड परेड ग्राउंड के आसपास लोगों की आवाजाही बढ़ गई थी और समर्थकों में खासा उत्साह देखा गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">शपथ ग्रहण समारोह में पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही नई सरकार के पांच अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण किया। समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी को लेकर पहले से ही राजनीतिक हलकों में चर्चा थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई केंद्रीय मंत्री और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में पहुंचे। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम को लेकर प्रशासन कई दिनों से तैयारी में जुटा था। मंच से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक हर स्तर पर विशेष इंतजाम किए गए थे। समारोह के दौरान भाजपा समर्थकों में उत्साह साफ दिखाई दिया और कई जगह </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">विकास</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">परिवर्तन</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">के नारे भी सुनाई दिए।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और सुवेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल अब अपने पुराने गौरव की ओर लौटेगा। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में राज्य में निवेश</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन और जनकल्याण के नए कीर्तिमान स्थापित होंगे। डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल की जनता और मैदानी कार्यकर्ताओं को भी इस राजनीतिक बदलाव के लिए बधाई दी। राजनीतिक जानकारों की मानें तो राज्य में यह सत्ता परिवर्तन आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है। फिलहाल नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक स्तर पर कई बड़े फैसलों की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं विपक्ष की ओर से भी नई सरकार की नीतियों और फैसलों पर नजर रखी जा रही है। कोलकाता में देर शाम तक राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी रहा और पूरे घटनाक्रम को राज्य की राजनीति में एक बड़े मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:25:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में बनी BJP की पहली सरकार, शुभेंदु अधिकारी बने CM</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी। शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, पीएम मोदी समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bjps-first-government-formed-in-west-bengal-subhendu-adhikari-became/article-52992"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t153851.629.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन बड़ा बदलाव लेकर आया। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बन गई। कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भारी भीड़ जुटी रही। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गृह मंत्री अमित शाह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। राज्यपाल आर. एन. रवि ने शुभेंदु अधिकारी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। लंबे समय से बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस बार चुनावी नतीजों ने पूरी तस्वीर बदल दी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">शुभेंदु अधिकारी के साथ पांच मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें दिलीप घोष</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्निमित्रा पॉल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक कीर्तनिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खुदीराम टुडु और निशीथ प्रमाणिक शामिल हैं। बीजेपी ने कैबिनेट गठन में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। समारोह के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। कई लोग सुबह से ही ब्रिगेड परेड मैदान पहुंचने लगे थे। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग राज्यों से भी पार्टी समर्थक और नेता कोलकाता पहुंचे थे। मंच पर एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री मौजूद रहे। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई नेताओं की मौजूदगी चर्चा में रही।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान बंगाल में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया था और इसका असर नतीजों में साफ दिखा। 2026 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार रिकॉर्ड मतदान हुआ। दोनों चरणों को मिलाकर करीब 92 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि ग्रामीण इलाकों में हुए भारी मतदान ने बीजेपी को फायदा पहुंचाया। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। वहीं नंदीग्राम सीट पर भी उन्होंने मजबूत जीत दर्ज की। मतगणना के दौरान भवानीपुर सीट पर लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आखिर में बीजेपी उम्मीदवार आगे निकल गए।</span></span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">शपथ ग्रहण के बाद शुभेंदु अधिकारी ने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि उनकी सरकार विकास</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग और कानून व्यवस्था को प्राथमिकता देगी। उन्होंने कहा कि बंगाल को नई दिशा देने की कोशिश की जाएगी। वहीं तृणमूल कांग्रेस की ओर से चुनाव परिणामों को लेकर अभी भी राजनीतिक बयानबाजी जारी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे विपक्ष की भूमिका मजबूती से निभाएंगे।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:56:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>शपथ लेते ही जोरासांको पहुंचे शुभेंदु अधिकारी, बोले- अब सभी लोगों का CM हूं</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ लेते ही जोरासांको ठाकुरबाड़ी पहुंचकर रवीन्द्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/as-soon-as-he-took-the-oath-shubhendu-adhikari-reached/article-52995"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t163323.663.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आने के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही अपना पहला संदेश राज्य की जनता को दिया। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने हैं। शुक्रवार को कोलकाता में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। शपथ लेने के तुरंत बाद अधिकारी सबसे पहले रवीन्द्रनाथ टैगोर के पैतृक आवास जोरासांको ठाकुरबाड़ी पहुंचे। वहां उन्होंने कविगुरु को पुष्पांजलि अर्पित की और गीत गाकर श्रद्धांजलि दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने औपचारिक सरकारी कामकाज शुरू करने से पहले यही कार्यक्रम तय किया था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह दिन सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य को नई दिशा देने और विकास की राह पर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब उनकी सरकार की है। अधिकारियों के अनुसार शपथ समारोह के बाद जोरासांको ठाकुरबाड़ी में सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए थे। वहां बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोग भी पहुंचे। शुभेंदु अधिकारी ने कहा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, “<span lang="hi" xml:lang="hi">मैं अब सिर्फ किसी पार्टी का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे बंगाल के लोगों का मुख्यमंत्री हूं।</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है और उनकी सरकार सभी वर्गों के लिए काम करेगी। बंगाल में लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए राजनीतिक माहौल भी काफी गर्म नजर आ रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने स्वामी विवेकानंद का भी जिक्र किया। उन्होंने </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">चरैवेति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चरैवेति</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का उल्लेख करते हुए लोगों से नए बंगाल के निर्माण में सहयोग करने की अपील की। ऐसा कहा जा रहा है कि बीजेपी अब राज्य में संगठन और प्रशासन दोनों स्तर पर तेजी से बदलाव की तैयारी में है। चुनाव नतीजों के बाद भी राज्य में राजनीतिक बयानबाजी जारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अधिकारी ने विपक्ष को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने </span>207 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेसको </span>80 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटें मिलीं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:56:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल में BJP का बड़ा फॉर्मूला, शुभेंदु CM तो 2 डिप्टी CM, एक महिला के उपमुख्यमंत्री बनने की भी चर्चा तेज</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में BJP सरकार गठन को लेकर हलचल तेज है। शुभेंदु अधिकारी के साथ दो डिप्टी CM बनाए जाने की चर्चा, महिला चेहरा भी रेस में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bjps-big-formula-in-bengal-is-betting-on-female-face/article-52936"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t164543.487.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की राजनीति में सरकार गठन को लेकर हलचल काफी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में शनिवार सुबह 11 बजे नए मुख्यमंत्री के तौर पर शुभेंदु अधिकारी शपथ ले सकते हैं। बीजेपी खेमे में अब सबसे ज्यादा चर्चा दो डिप्टी मुख्यमंत्री पदों को लेकर हो रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस बार बीजेपी बंगाल में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए एक महिला चेहरे को भी उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। कोलकाता से लेकर दिल्ली तक नेताओं के बीच लगातार बातचीत चल रही है और अंतिम नामों पर मंथन जारी बताया जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डिप्टी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CM <span lang="hi" xml:lang="hi">पद की रेस में सबसे ज्यादा चर्चा दिलीप घोष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निसिथ प्रमाणिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्निमित्रा पॉल और रुपा गांगुली के नामों की हो रही है। दिलीप घोष को संगठन का मजबूत चेहरा माना जाता है। </span>RSS <span lang="hi" xml:lang="hi">बैकग्राउंड और लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहने का अनुभव उनके पक्ष में माना जा रहा है। वहीं निशिथ प्रमाणिक उत्तर बंगाल में बीजेपी का बड़ा दलित चेहरा माने जाते हैं। राजवंशी समाज में उनकी पकड़ मजबूत बताई जाती है और वह केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि दलित वोट बैंक में बीजेपी को इस बार जबरदस्त फायदा मिला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए नेतृत्व में उसका प्रतिनिधित्व दिखाना जरूरी समझा जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">महिला चेहरों में अग्निमित्रा पॉल और रूपा गांगुली सबसे आगे बताई जा रही हैं। बीजेपी ने इस बार 34 महिलाओं को टिकट दिया था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से 23 उम्मीदवार जीतकर विधानसभा पहुंचीं। पार्टी इसे बड़ा राजनीतिक संदेश मान रही है। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला वोटरों के बीच पकड़ मजबूत करने और ममता बनर्जी के महिला वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति के तहत महिला डिप्टी </span>CM <span lang="hi" xml:lang="hi">का फॉर्मूला सामने आया है। अग्निमित्रा पॉल को बंगाल बीजेपी का आक्रामक और फायरब्रांड चेहरा माना जाता है। फैशन डिजाइनिंग की दुनिया से राजनीति में आईं अग्निमित्रा ने आसनसोल दक्षिण सीट पर बड़ी जीत दर्ज की है। वहीं रूपा गांगुली लंबे समय से महिला मुद्दों को उठाती रही हैं और शहरी के साथ ग्रामीण इलाकों में भी उनकी पहचान मजबूत मानी जाती है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व सामाजिक समीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर अंतिम फैसला ले सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 17:43:25 +0530</pubDate>
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