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                <title>Election 2026 - दैनिक जागरण</title>
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                <title>PoK में भड़का विरोध, पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन तेज</title>
                                    <description><![CDATA[महंगाई और प्रशासनिक मुद्दों से शुरू हुआ प्रदर्शन अब राजनीतिक टकराव में बदला, हजारों लोग सड़कों पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pok-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7--%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%9C/article-57486"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pok-protest-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
<div class="min-h-8 text-message relative flex w-full flex-col items-end gap-2 text-start break-words whitespace-normal outline-none keyboard-focused:focus-ring [.text-message+&amp;]:mt-1">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और कई इलाकों में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। मंगलवार को रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में हजारों की संख्या में लोग जमा हुए और उन्होंने पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ खुलकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और लंबे समय से उन्हें बुनियादी सुविधाओं, आर्थिक राहत और राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। भीड़ में शामिल लोगों का कहना था कि महंगाई और प्रशासनिक लापरवाही ने जीवन को मुश्किल बना दिया है और अब स्थिति असहनीय होती जा रही है। कई जगहों पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जबकि स्थानीय लोगों के बीच नाराजगी और गहरी होती जा रही है।</p>
<p>यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (<span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Jammu Kashmir Awami Action Committee</span></span>) के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संगठन के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर (<span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Shaukat Nawaz Mir</span></span>) को उनके दो साथियों के साथ धीरकोट क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है, जिसके बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार ने उनके बारे में जानकारी देने वाले के लिए 1 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की थी, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है। इसके साथ ही JAAC के 600 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग इलाकों से हिरासत में लिए जाने की खबरें हैं। कई जगहों पर छापेमारी और गिरफ्तारी के बाद स्थानीय स्तर पर गुस्सा फैल गया है और छोटे शहरों से लेकर कस्बों तक विरोध की लहर देखी जा रही है। सरकार पर आरोप है कि वह आंदोलन को दबाने के लिए सख्त कानूनों का इस्तेमाल कर रही है, जिसमें आतंकवाद विरोधी धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए ये कदम जरूरी थे, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव कम होने की बजाय और बढ़ता दिख रहा है।</p>
<p>प्रदर्शन की शुरुआत भले ही महंगाई, खाद्य संकट और स्थानीय प्रशासनिक समस्याओं से हुई थी, लेकिन अब यह पूरी तरह राजनीतिक रूप ले चुका है और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष का रूप बन गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जरूरी सामान की सप्लाई बाधित की जा रही है और लोगों पर दबाव बनाने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगाई गई है, जिससे बाहरी दुनिया तक जानकारी नहीं पहुंच पा रही है। कई इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित होने से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि हाल के दिनों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कुछ लोगों की मौतें हुई हैं, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसी बीच राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है क्योंकि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बयान में रावलकोट और मीरपुर के लोगों को लेकर टिप्पणी की गई थी, जिसके बाद विरोध और तेज हो गया। आने वाले दिनों में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में राजनीतिक हलचल और बढ़ने की संभावना है। इस समय PoK में स्थिति बेहद अस्थिर बनी हुई है और हर तरफ अनिश्चितता का माहौल देखा जा रहा है।</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 11:03:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा दांव, भूपेश बघेल को झारखंड का पर्यवेक्षक बनाया</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने भूपेश बघेल और अजय शर्मा को चुनाव पर्यवेक्षक बनाकर जिम्मेदारी सौंपी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-bet-of-congress-before-rajya-sabha-elections-bhupesh-baghel/article-55086"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhupesh-baghel.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर ही मतभेदों की खबरें सामने आने लगी हैं। इसी बीच कांग्रेस हाईकमान ने बड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्टी नेता अजय शर्मा को झारखंड राज्यसभा चुनाव का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। कांग्रेस के इस फैसले को चुनावी रणनीति और गठबंधन के भीतर समन्वय बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झारखंड में बदलते हालात के बीच अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी सौंपना कांग्रेस की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही झारखंड की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए दोनों सीटों पर सत्तापक्ष गठबंधन की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। हालांकि उम्मीदवारों के चयन को लेकर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच अलग-अलग रुख सामने आने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने कुछ दिन पहले ही प्रणव झा को राज्यसभा के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था। पार्टी के इस फैसले के बाद गठबंधन सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी दोनों सीटों पर अपनी दावेदारी जताने के संकेत दिए, जिससे राजनीतिक समीकरण अचानक बदलते नजर आने लगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा की दोनों सीटों को लेकर सहयोगी दलों के बीच सहमति बनाने की प्रक्रिया अभी पूरी तरह आसान नहीं दिख रही है। कांग्रेस का मानना है कि गठबंधन में उसकी भूमिका और योगदान को देखते हुए उसे उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा भी अपने संगठनात्मक और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर सीटों पर दावा मजबूत कर रहा है। ऐसे माहौल में कांग्रेस द्वारा भूपेश बघेल को पर्यवेक्षक बनाना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भूपेश बघेल लंबे समय से कांग्रेस संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े रहे हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक अभियानों का नेतृत्व किया था। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनका अनुभव झारखंड में राज्यसभा चुनाव से जुड़े मुद्दों को सुलझाने और विधायकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद करेगा। उनके साथ अजय शर्मा को भी पर्यवेक्षक बनाया गया है, जो संगठनात्मक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">झारखंड में राज्यसभा चुनाव का गणित भी काफी दिलचस्प माना जा रहा है। विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल है, जिससे दोनों सीटों पर उसकी जीत की संभावना मजबूत दिखाई देती है। लेकिन उम्मीदवारों को लेकर यदि सहयोगी दलों के बीच सहमति नहीं बनती है तो राजनीतिक संदेश अलग जा सकता है। यही वजह है कि कांग्रेस नेतृत्व इस चुनाव को केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं बल्कि गठबंधन की एकजुटता की परीक्षा के रूप में भी देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्यसभा चुनाव अक्सर संख्या बल के आधार पर तय होते हैं, लेकिन कई बार इनके जरिए गठबंधन की आंतरिक स्थिति भी सामने आ जाती है। झारखंड में भी यही स्थिति बनती दिखाई दे रही है। कांग्रेस और जेएमएम दोनों सार्वजनिक रूप से गठबंधन को मजबूत बताते रहे हैं, लेकिन उम्मीदवार चयन को लेकर उभरे मतभेदों ने नई चर्चाओं को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच बातचीत और राजनीतिक बैठकों का दौर तेज हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रणव झा को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया है। पार्टी इसे संगठन के लिए सकारात्मक कदम बता रही है। वहीं जेएमएम के रुख ने यह संकेत दिया है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं हुई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पर्यवेक्षकों की नियुक्ति का उद्देश्य केवल चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करना नहीं बल्कि सहयोगी दलों के साथ संवाद बनाए रखना भी हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं क्योंकि इनके जरिए राष्ट्रीय राजनीति में राज्य का प्रतिनिधित्व तय होता है। इस बार भी चुनाव को लेकर राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ मैदान में नजर आ रहे हैं। कांग्रेस की ओर से भूपेश बघेल और अजय शर्मा की नियुक्ति ने चुनावी माहौल को और रोचक बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर जारी चर्चा किस दिशा में आगे बढ़ती है और अंततः उम्मीदवारों तथा समर्थन को लेकर क्या फैसला सामने आता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:12:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ममता आवास के बाहर BJP कार्यकर्ताओं ने लगाया ‘जय श्री राम’ नारा</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में BJP बढ़त के बीच ममता बनर्जी के आवास के बाहर कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/bjp-workers-raised-jai-shri-ram-slogan-outside-mamtas-residence/article-52639"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mamata-banerjee-house-jai-shri-ram-slogan.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में BJP की बढ़त और जीत के दावों के बीच कोलकाता से एक वीडियो सामने आया है, जिसने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। वीडियो में कुछ BJP कार्यकर्ता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर पहुंचकर ‘जय श्री राम</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">’</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> के नारे लगाते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि रुझानों में BJP को बढ़त मिलने के बाद कार्यकर्ता जश्न में सड़कों पर उतर आए और इसी दौरान कुछ लोग कोलकाता स्थित सीएम आवास के बाहर भी पहुंच गए। वहां कुछ देर तक नारेबाजी हुई, जिससे इलाके में हलचल बढ़ गई। पुलिस मौके पर पहले से तैनात थी और उसने तुरंत स्थिति संभालने की कोशिश की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">वीडियो में दिख रहा है कि BJP कार्यकर्ता सड़क किनारे खड़े होकर ‘जय श्री राम</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">’</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> के नारे लगा रहे हैं। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की और समझाइश देकर आगे बढ़ाया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हालात तनावपूर्ण जरूर हुए, लेकिन किसी तरह की झड़प या टकराव की खबर नहीं है। फिर भी इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। पश्चिम बंगाल में ‘जय श्री Ram’ का नारा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पिछले कुछ सालों में एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी बन चुका है। BJP इसे खुलकर इस्तेमाल करती रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी का इसके साथ टकराव कई बार खुलकर सामने आ चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">ममता बनर्जी और ‘जय श्री राम</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">’</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> नारे को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुका है। साल 2021 में कोलकाता में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान जब मंच के सामने बैठे कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">’</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> के नारे लगाए थे, तब ममता बनर्जी नाराज हो गई थीं। उस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे। ममता ने मंच से कहा था कि सरकारी कार्यक्रम की गरिमा होनी चाहिए और किसी को बुलाकर उसका अपमान नहीं किया जाना चाहिए। विरोध जताते हुए उन्होंने भाषण देने से इनकार कर दिया था। यह मामला उस वक्त काफी चर्चा में रहा था और BJP ने इसे राजनीतिक तौर पर खूब उठाया था।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">इससे पहले 2019 में भी पूर्वी मेदिनीपुर में ऐसा ही एक मामला सामने आया था। ममता बनर्जी का काफिला चंद्रकोणा इलाके से गुजर रहा था, तभी सड़क किनारे खड़े कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Calibri, sans-serif;">’</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> के नारे लगाए। बताया जाता है कि ममता बनर्जी उस वक्त गाड़ी से उतर गई थीं और उन्होंने इस पर नाराजगी जताई थी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 14:14:58 +0530</pubDate>
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