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                <title>Financial Security - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Financial Security RSS Feed</description>
                
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                <title>भारत सरकार के सचिव विवेक अग्रवाल FATF के उपाध्यक्ष बने</title>
                                    <description><![CDATA[मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था में भारत को मिली बड़ी जिम्मेदारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/vivek-aggarwal-secretary-to-the-government-of-india-became-the/article-56489"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/fatf-vice-president.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। भारत सरकार में सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का उपाध्यक्ष चुना गया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर में आतंकवाद की फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय गतिविधियों को लेकर निगरानी बढ़ाई जा रही है। विदेश मंत्रालय ने इस चयन को भारत के लिए बड़ी सफलता बताते हुए कहा है कि इससे वैश्विक वित्तीय सुरक्षा के क्षेत्र में देश की भूमिका और मजबूत होगी। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ भारत द्वारा वर्षों से उठाए जा रहे मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक मजबूती मिलेगी। विवेक अग्रवाल 1994 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में संस्कृति मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। प्रशासनिक सेवा में उन्हें तीन दशक से अधिक का अनुभव है। अपने लंबे करियर में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। वित्तीय प्रशासन, कर व्यवस्था, आर्थिक अपराध और नीतिगत मामलों में उनकी गहरी समझ मानी जाती है। इससे पहले वह वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सरकारी तंत्र में उनकी पहचान एक अनुभवी और प्रभावी अधिकारी के रूप में रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">FATF को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण अंतर-सरकारी संस्थाओं में गिना जाता है। यह संस्था वैश्विक स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद की फंडिंग और अन्य वित्तीय अपराधों पर निगरानी रखने का काम करती है। FATF विभिन्न देशों के लिए मानक और दिशा-निर्देश तय करती है ताकि वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग रोका जा सके। संस्था समय-समय पर सदस्य देशों और अन्य देशों की व्यवस्थाओं का मूल्यांकन भी करती है। जिन देशों की व्यवस्था कमजोर पाई जाती है, उन्हें ग्रे लिस्ट या ब्लैक लिस्ट में शामिल किया जा सकता है। FATF के फैसलों का असर वैश्विक निवेश, बैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार विवेक अग्रवाल का उपाध्यक्ष चुना जाना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और प्रभाव का भी प्रमाण है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आतंकवाद की फंडिंग रोकने और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह मुद्दा उठाता रहा है कि आतंकवाद को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। इसी कारण FATF जैसी संस्था में भारत की सक्रिय भूमिका लगातार बढ़ती गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">विवेक अग्रवाल का FATF से जुड़ाव नया नहीं है। वह पहले भी FATF में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर चुके हैं। इसके अलावा वह फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) के निदेशक भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की निगरानी, आर्थिक अपराधों की जांच और वित्तीय खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। अधिकारियों का मानना है कि FATF के कामकाज की गहरी समझ और अंतरराष्ट्रीय अनुभव उनकी नई जिम्मेदारी में काफी मददगार साबित होगा। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दुनिया तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन बैंकिंग, क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल एसेट्स के बढ़ते उपयोग ने वित्तीय सुरक्षा के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कई देशों में डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर अवैध लेनदेन और धन शोधन के मामले सामने आए हैं। FATF इन नए जोखिमों से निपटने के लिए लगातार नए मानक तैयार कर रही है। भारत भी डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। ऐसे में FATF के नेतृत्व में भारत की भागीदारी बढ़ने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत पिछले कई वर्षों से सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाता रहा है। भारत का कहना है कि आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोकना आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी संदर्भ में FATF की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। जून 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद FATF ने भी इस घटना की निंदा की थी और सभी देशों से आतंकवाद की फंडिंग रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की थी। उसके बाद भारत ने FATF के समक्ष पाकिस्तान को दोबारा ग्रे लिस्ट में शामिल करने का औपचारिक अनुरोध भी किया था। भारत का आरोप रहा है कि सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क को आर्थिक सहायता मिलती है और इस पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है। ऐसे में FATF के नेतृत्व ढांचे में भारत की बढ़ती भूमिका को रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय ने भी विवेक अग्रवाल को मिली इस जिम्मेदारी पर खुशी जताई है। मंत्रालय का कहना है कि दुनिया के 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों के बीच भारत की विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है। यह चयन इस बात का संकेत है कि वैश्विक संस्थाओं में भारत की भागीदारी अब पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हो चुकी है। आने वाले समय में FATF के मंच पर भारत की सक्रिय भूमिका वैश्विक वित्तीय पारदर्शिता, मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई और आतंकवाद की फंडिंग रोकने के प्रयासों को नई दिशा दे सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:55:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>साइबर ठगी पर सख्ती: बार-बार बैंक खाते खुलवाने वालों पर रहेगी पुलिस की नजर</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर में बैंकों और पुलिस की बैठक में बड़े फैसले, फर्जी खातों, संदिग्ध लेन-देन और साइबर अपराधों पर लगाम कसने की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/strict-action-on-cyber-fraud-police-will-keep-an-eye/article-55521"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cyber-fraud-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देशभर में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच रायपुर पुलिस ने बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब ऐसे लोगों पर विशेष नजर रखी जाएगी जो अलग-अलग बैंकों में बार-बार खाते खुलवा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि साइबर ठगी के कई मामलों में ऐसे खातों का इस्तेमाल किया जाता है जिनके जरिए ठगी की रकम को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह भेज दिया जाता है। इसी खतरे को देखते हुए बैंक अधिकारियों और पुलिस के बीच हुई अहम बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों का उद्देश्य साइबर अपराधियों के नेटवर्क को कमजोर करना और ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में आयोजित इस बैठक में विभिन्न राष्ट्रीय और निजी बैंकों के नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों, संदिग्ध लेन-देन और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले गए खातों पर विस्तार से चर्चा हुई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है और अधिकांश मामलों में अपराधी ऐसे खातों का उपयोग करते हैं जिनकी निगरानी समय पर नहीं हो पाती। कई बार एक व्यक्ति अलग-अलग बैंकों में कई खाते खुलवा लेता है और ठगी की रकम को लगातार ट्रांसफर करके जांच एजेंसियों को भ्रमित करने की कोशिश करता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में पुलिस ने बैंक अधिकारियों से ऐसे खाताधारकों की पहचान करने और उनकी जानकारी समय-समय पर साझा करने का आग्रह किया। अधिकारियों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही संदिग्ध गतिविधियों की पहचान हो जाए तो करोड़ों रुपए की साइबर ठगी को रोका जा सकता है। पुलिस का मानना है कि बैंकिंग सिस्टम और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय प्रत्येक बैंक में लीगल नोडल अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रहा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि कई बार जांच के दौरान जरूरी दस्तावेज और बैंकिंग जानकारी प्राप्त करने में देरी हो जाती है, जिससे कार्रवाई प्रभावित होती है। यदि हर बैंक में कानूनी मामलों के लिए एक समर्पित अधिकारी नियुक्त किया जाता है और उसके लिए स्थायी मोबाइल नंबर जारी किया जाता है, तो जांच एजेंसियों को समय पर जानकारी मिल सकेगी। इससे मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। पुलिस ने निर्देश दिए कि सभी बैंक शाखाओं में कैमरों की स्थिति स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए और मुख्य प्रवेश द्वार के साथ-साथ पिछले हिस्सों को भी निगरानी दायरे में लाया जाए। अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज जांच का महत्वपूर्ण आधार बनती है। ऐसे में कैमरों की गुणवत्ता और कवरेज क्षेत्र को बेहतर बनाना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में साइबर ठगी के शिकार लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। बैंकों को निर्देश दिए गए कि यदि कोई ग्राहक ठगी की शिकायत लेकर बैंक पहुंचता है तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी जाए। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल के बारे में भी जानकारी देने को कहा गया है। सभी बैंक शाखाओं में हेल्पलाइन नंबर का प्रमुखता से प्रदर्शन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर लोग तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नए बैंक खातों को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश सामने आए हैं। पुलिस ने मोबाइल नंबर और पहचान दस्तावेजों का गहन सत्यापन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके अलावा कॉर्पोरेट खातों के मामले में खाता खुलने के लगभग 15 दिन बाद दोबारा पते का सत्यापन करने का सुझाव दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया से फर्जी कंपनियों और संदिग्ध खातों की पहचान करना आसान होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में संदिग्ध ट्रांजेक्शन यानी असामान्य वित्तीय लेन-देन की निगरानी को भी प्राथमिकता दी गई। बैंकों से कहा गया है कि यदि किसी खाते में असामान्य गतिविधि दिखाई देती है तो तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं और जरूरत पड़ने पर पुलिस को सूचना दी जाए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर कम समय में बड़ी संख्या में ट्रांजेक्शन करते हैं, जिससे उनके नेटवर्क का पता लगाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:29:20 +0530</pubDate>
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                <title>क्रेडिट कार्ड खो गया या चोरी हो गया? तुरंत करें ये काम, वरना मिनटों में हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[क्रेडिट कार्ड खो जाए या चोरी हो जाए तो तुरंत ब्लॉक करें, ट्रांजैक्शन चेक करें, बैंक में शिकायत दर्ज करें और FIR जरूर कराएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/if-your-credit-card-is-lost-or-stolen-do-this/article-52656"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/credit-card-tips.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">क्रेडिट कार्ड खो जाए या चोरी हो जाए तो इसे हल्के में लेना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। आज के डिजिटल दौर में कार्ड सिर्फ प्लास्टिक का टुकड़ा नहीं, सीधे आपके बैंकिंग सिस्टम का रास्ता है। ऐसे में क्रेडिट कार्ड गायब होते ही पहला काम घबराना नहीं, बल्कि तुरंत एक्शन लेना है। जरा सी देरी आपके खाते, लिमिट और डिजिटल पहचान तीनों पर भारी पड़ सकती है। कई बार लोग कार्ड मिलने की उम्मीद में इंतजार करते रहते हैं, लेकिन यही चूक बाद में महंगी पड़ती है। क्रेडिट कार्ड खो गया है तो सबसे पहले उसे तुरंत ब्लॉक कराना जरूरी है। बैंक के मोबाइल ऐप, नेट बैंकिंग या कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके यह काम फौरन किया जा सकता है। जितनी जल्दी कार्ड ब्लॉक होगा, उतना कम रिस्क रहेगा। कई बैंक अस्थायी ब्लॉक का विकल्प भी देते हैं, लेकिन अगर कार्ड चोरी का शक है तो सीधे परमानेंट ब्लॉक ही बेहतर माना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">कार्ड ब्लॉक होने के बाद अगला जरूरी काम है अपने हर ट्रांजैक्शन पर नजर डालना। SMS, ईमेल अलर्ट और बैंक ऐप की हिस्ट्री तुरंत चेक करें। यह देखना जरूरी है कि कार्ड खोने के बाद कोई अनधिकृत भुगतान तो नहीं हुआ। शुरुआती जानकारी में कई बार छोटी रकम के ट्रांजैक्शन दिखते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यहीं से बड़ा फ्रॉड शुरू होता है। अगर कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक में डिस्प्यूट दर्ज करें। अधिकारियों के अनुसार ज्यादातर बैंकों में जीरो या लिमिटेड लायबिलिटी का प्रावधान होता है, लेकिन इसका फायदा तभी मिलता है जब ग्राहक समय पर शिकायत दर्ज कराए। बैंक को मौखिक नहीं, लिखित शिकायत देना ज्यादा सुरक्षित रहता है। शिकायत नंबर लेना जरूरी है, क्योंकि आगे विवाद की स्थिति में यही सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनता है। आखिरी बार कार्ड कहां इस्तेमाल किया था, यह भी याद करें और बैंक स्टेटमेंट से मिलान करें।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">क्रेडिट कार्ड चोरी हुआ है तो सिर्फ कार्ड ब्लॉक कर देना काफी नहीं माना जाता। अपने सभी डिजिटल पेमेंट अकाउंट्स, UPI ऐप, ईमेल और बैंकिंग पासवर्ड भी तुरंत बदलें। कार्ड डिटेल लीक होने का मतलब सिर्फ एक कार्ड का खतरा नहीं, पूरी डिजिटल प्रोफाइल पर रिस्क हो सकता है। PIN बदलें, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें और सेव्ड कार्ड डिटेल्स हटाएं। इसके बाद नया कार्ड जरूर अप्लाई करें, ताकि नया नंबर और नया CVV जारी हो सके। बैंकिंग जानकार मानते हैं कि पुराना कार्ड बंद होने के बाद नया कार्ड लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। अगर मामला चोरी का है तो नजदीकी थाने में FIR दर्ज कराना भी जरूरी है। FIR की कॉपी बैंक विवाद, इंश्योरेंस क्लेम और किसी भी कानूनी जांच में काम आती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 17:04:42 +0530</pubDate>
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