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                <title>Global Oil Route - दैनिक जागरण</title>
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                <title>होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रम्प की नई धमकी, ओमान और ईरान को चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ओमान और ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर किसी का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-new-threat-on-hormuz-strait-warning-to-oman-and/article-54432"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/donald-trump1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर सख्त बयान देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। ईरान को चेतावनी देने के बाद अब ट्रम्प ने ओमान को भी निशाने पर लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट किसी एक देश की जागीर नहीं है और यदि किसी ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण करने की कोशिश की तो अमेरिका कठोर कार्रवाई करेगा। व्हाइट हाउस में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में किसी भी देश द्वारा इस रास्ते को नियंत्रित करने की कोशिश वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रम्प ने कहा, “हम इस क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है और यहां हर देश के जहाजों को गुजरने का अधिकार है। ईरान इसे अपने प्रभाव में लेना चाहता है, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। ओमान को भी बाकी देशों की तरह नियमों का पालन करना होगा। यदि कोई आक्रामक रवैया अपनाया गया तो अमेरिका जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।” ट्रम्प के बयान के बाद वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह चेतावनी सिर्फ ईरान के लिए नहीं बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए बड़ा संदेश है। खासकर ऐसे समय में जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले ट्रम्प ने कहा था कि ईरान को लग रहा था कि अमेरिका बातचीत से पीछे हट जाएगा, लेकिन अब तेहरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव को समझ चुका है और अब वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी चुनावों को लेकर उन पर कोई दबाव नहीं है। ट्रम्प ने कहा, “ईरान को लगा था कि चुनावी माहौल में मैं कमजोर पड़ जाऊंगा, लेकिन मुझे चुनाव की कोई परवाह नहीं है। अमेरिका की सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता सबसे पहले है।”</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच ईरानी मीडिया में यह दावा किया गया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर एक शुरुआती समझौता ड्राफ्ट तैयार हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रस्तावित समझौते में होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बहाल करने और अमेरिकी सैन्य गतिविधियां कम करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि व्हाइट हाउस ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि दोनों देशों के बीच किसी भी तरह का आधिकारिक समझौता नहीं हुआ है। व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्ट्स को “फर्जी और मनगढ़ंत” बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं। दक्षिणी लेबनान में इजराइल द्वारा किए गए ताजा हवाई हमलों में कई लोगों की मौत की खबर सामने आई है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 31 लोगों की जान गई जबकि दर्जनों घायल हुए हैं। लगातार हो रहे हमलों से इलाके में भय का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। इजराइल ने दावा किया है कि उसने गाजा में हमास के एक बड़े कमांडर मोहम्मद ओदेह को हवाई हमले में मार गिराया है। बताया जा रहा है कि यह हमला कई महीनों की खुफिया निगरानी के बाद किया गया। हालांकि हमास की ओर से अभी इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, ईरान ने जुलाई 2025 से हिरासत में रखे गए 10 भारतीय नाविकों को रिहा कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के लंबे कूटनीतिक प्रयासों के बाद इन नाविकों की रिहाई संभव हो सकी। सभी नाविक सुरक्षित बताए जा रहे हैं और जल्द भारत लौटेंगे। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका का सख्त रुख आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति को और अधिक प्रभावित कर सकता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल परिवहन का रास्ता इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। यदि यहां किसी तरह का सैन्य टकराव बढ़ता है तो इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। वहीं ईरान और उसके सहयोगी देशों के साथ बढ़ता तनाव इस क्षेत्र को एक बार फिर बड़े संकट की ओर ले जाता दिखाई दे रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 14:09:12 +0530</pubDate>
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                <title>मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ेगा तनाव, ट्रंप के सख्त रुख से ईरान-अमेरिका टकराव गहरा हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट में तनाव फिर बढ़ा। ट्रंप ने कहा ईरान ने पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई, शांति प्रस्ताव पर संदेह से अमेरिका-ईरान टकराव गहरा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tension-will-increase-again-in-the-middle-east-iran-america-conflict/article-52662"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/middle-east-crisis-donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है और साफ संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन फिलहाल नरमी के मूड में नहीं है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पिछले कई दशकों में जो किया है, उसकी “पर्याप्त कीमत</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> अभी तक नहीं चुकाई है। यही बयान अब मिडिल ईस्ट में नई बेचैनी की वजह बन गया है। हालात ऐसे वक्त में बिगड़ते दिख रहे हैं जब तेहरान की तरफ से नया शांति प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि अमेरिका उसे आसानी से मानने वाला नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह ईरान की ओर से आए नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें फिलहाल यह नहीं लगता कि यह अमेरिका के लिए स्वीकार्य होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच पहले से तनाव चरम पर है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर टकराव लगातार बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थ के जरिए 14 सूत्री प्रस्ताव भेजा है, जिसमें युद्ध खत्म करने, प्रतिबंध हटाने, नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य दबाव कम करने की मांग की गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह प्रस्ताव युद्धविराम बढ़ाने से ज्यादा सीधे टकराव खत्म करने पर केंद्रित है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">उधर ईरान की तरफ से भी रुख नरम नहीं दिख रहा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी (IRGS) ने साफ कहा है कि अब अमेरिका के पास फैसले की गुंजाइश काफी सीमित बची है। तेहरान से जुड़े हलकों में यह संदेश दिया जा रहा है कि दबाव की राजनीति अब ज्यादा देर नहीं चल सकती। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने रविवार को कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। उनका कहना था कि युद्ध से पहले जैसी स्थिति अब लौटने वाली नहीं है। यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है और यहां तनातनी का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">इसी बीच खाड़ी क्षेत्र से आ रही खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है। रविवार को होर्मुज के पास एक कार्गो शिप पर हमले की खबर सामने आई, जिसने समुद्री सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए। क्षेत्र में पहले ही जहाजों की आवाजाही प्रभावित है और अमेरिका ने फंसे जहाजों को निकालने के लिए नई समुद्री योजना का संकेत दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका होर्मुज में फंसे जहाजों को “फ्री</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> कराने में मदद करेगा। हालांकि इस योजना को ईरान ने सीधे चुनौती की तरह देखा है। ऐसे में समुद्र, तेल और सैन्य दबाव तीनों मोर्चों पर तनाव एक साथ बढ़ता दिख रहा है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">कूटनीतिक स्तर पर बातचीत पूरी तरह टूटी नहीं है, लेकिन जमीन पर हालात भरोसेमंद नहीं लग रहे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी से बातचीत की है। ओमान पहले भी अमेरिका-ईरान संवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। इसके बावजूद जिस तरह दोनों तरफ से बयान आ रहे हैं, उससे यही लग रहा है कि बातचीत फिलहाल सिर्फ औपचारिकता भर रह गई है। मिडिल ईस्ट में जंग की आशंका अभी टली नहीं है, बल्कि हालात बता रहे हैं कि आने वाले कुछ दिन और ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 17:04:35 +0530</pubDate>
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