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                <title>Food Safety - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Food Safety RSS Feed</description>
                
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                <title>महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, स्कूलों के 500 मीटर दायरे में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों की सेहत को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय, नियम तोड़ने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई; राज्यभर में खाद्य जांच व्यवस्था भी होगी मजबूत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-decision-of-maharashtra-government-ban-on-sale-of-sting/article-57786"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/maharashtra-government.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित खानपान को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राज्य के सभी स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में स्थित दुकानों पर <strong>'स्टिंग' (Sting) एनर्जी ड्रिंक</strong> की बिक्री पर रोक लगाने की घोषणा की है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल ने शुक्रवार को विधानसभा में इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार बच्चों में कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के बढ़ते सेवन को लेकर गंभीर है और उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है। सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री नरहरि जिरवाल ने विधानसभा में बताया कि यदि किसी स्कूल परिसर या उसके आसपास के 500 मीटर के दायरे में छात्रों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों अथवा कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक की बिक्री होती पाई जाती है, तो संबंधित दुकानदारों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को ऐसे उत्पादों से दूर रखना है, जिनका अधिक सेवन उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला विधानसभा में उस समय उठा जब विधायक विक्रम पचपुते ने 'स्टिंग' एनर्जी ड्रिंक के सेवन से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर प्रश्न किया। इस दौरान विधायक राहुल कुल और वरुण सरदेसाई ने भी इस विषय पर पूरक प्रश्न पूछे। जवाब देते हुए मंत्री जिरवाल ने कहा कि सरकार ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को स्कूलों के आसपास ऐसे उत्पादों की बिक्री पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने केवल प्रशासनिक अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूल प्राचार्यों और जिला परिषदों को भी इस अभियान में भागीदारी निभाने की अपील की है। यदि किसी स्कूल के आसपास प्रतिबंधित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों की बिक्री होती दिखाई देती है, तो उसकी जानकारी तत्काल खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को देने को कहा गया है। ऐसी शिकायतों पर जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि बच्चों और किशोरों में एनर्जी ड्रिंक का बढ़ता उपयोग चिंता का विषय बनता जा रहा है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कैफीन और अधिक शर्करा वाले पेय पदार्थों का नियमित सेवन बच्चों में नींद की समस्या, बेचैनी, हृदय गति बढ़ने, एकाग्रता में कमी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी कारण सरकार ने एहतियात के तौर पर स्कूलों के आसपास इनकी बिक्री सीमित करने का निर्णय लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा में मंत्री जिरवाल ने राज्य में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की योजना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मुंबई, नागपुर और संभाजीनगर में खाद्य एवं दवा परीक्षण की तीन प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा रायगढ़, नासिक, यवतमाल और पुणे में नई प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत राज्य में 22 अतिरिक्त प्रयोगशालाएं विकसित करने की योजना है। इन प्रयोगशालाओं के शुरू होने से खाद्य और पेय पदार्थों के नमूनों की जांच अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने विधानसभा में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की जांच से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। मंत्री ने बताया कि अप्रैल 2025 से मई 2026 के बीच स्टिंग एनर्जी ड्रिंक के कुल 27 खाद्य नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए। इनमें से 10 नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए। इसके अलावा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच विभिन्न ब्रांडों के एनर्जी ड्रिंक्स के कुल 115 नमूनों की जांच की गई। इनमें 63 नमूने मानक गुणवत्ता के पाए गए, जबकि एक नमूना सब-स्टैंडर्ड और छह नमूने मिसब्रांडेड घोषित किए गए। शेष नमूनों की जांच अभी जारी है।  खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में नियमित जांच और सख्त निगरानी आवश्यक है। विशेष रूप से ऐसे उत्पाद, जिनका उपयोग बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर करते हैं, उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं का विस्तार कर रही है, ताकि संदिग्ध उत्पादों की जांच समय पर हो सके और आवश्यक कार्रवाई की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के इस फैसले को बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शिक्षा संस्थानों के आसपास जंक फूड, तंबाकू उत्पादों और अब कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर नियंत्रण की पहल को स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी सकारात्मक मान रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित करने के लिए स्कूल परिसर और उसके आसपास का वातावरण सुरक्षित होना आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>फ्रोजन फूड सेहत के लिए कितना सही? जानिए फायदे, नुकसान और कितनी मात्रा में खाना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रोजन फूड पूरी तरह नुकसानदायक नहीं होता, लेकिन सही चुनाव, सीमित मात्रा और संतुलित आहार के साथ इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/know-how-frozen-food-is-good-for-health-its-advantages/article-57447"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/frozen-food.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में फ्रोजन फूड लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। कामकाजी लोग हों, छात्र हों या फिर छोटे परिवार, समय बचाने के लिए फ्रोजन फूड का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। बाजार में फ्रोजन मटर, कॉर्न, सब्जियां, चिकन, फिश, फ्रेंच फ्राइज, रेडी-टू-कुक पराठे, पिज्जा, नगेट्स और कई तरह के पैकेज्ड खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि, अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या फ्रोजन फूड सेहत के लिए सुरक्षित है या नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार इसका जवाब पूरी तरह "हां" या "नहीं" में नहीं दिया जा सकता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि फ्रोजन फूड किस प्रकार का है, उसे कैसे तैयार किया गया है और आप कितनी मात्रा में उसका सेवन करते हैं। फ्रोजन फूड तैयार करने की प्रक्रिया में खाद्य पदार्थों को बहुत कम तापमान पर तेजी से फ्रीज किया जाता है। इस प्रक्रिया से उनमें मौजूद अधिकांश पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। खासतौर पर फ्रोजन फल और सब्जियां कई बार ताजी सब्जियों जितनी ही पौष्टिक हो सकती हैं, क्योंकि इन्हें तोड़ने के तुरंत बाद फ्रीज कर दिया जाता है। इसके विपरीत, बाजार में कई दिनों तक रखी ताजी सब्जियों में कुछ विटामिन धीरे-धीरे कम हो सकते हैं। इसलिए हर फ्रोजन फूड को नुकसानदायक मानना सही नहीं होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">फ्रोजन फूड का सबसे बड़ा फायदा इसकी सुविधा है। व्यस्त जीवनशैली में खाना बनाने का समय कम होने पर यह अच्छा विकल्प बन सकता है। यह लंबे समय तक खराब नहीं होता, जिससे भोजन की बर्बादी भी कम होती है। फ्रोजन सब्जियां पूरे साल उपलब्ध रहती हैं, चाहे उनका मौसम हो या नहीं। इसके अलावा इन्हें साफ करने, काटने और तैयार करने में समय नहीं लगता, जिससे खाना जल्दी बन जाता है। कई लोगों के लिए यह बजट के लिहाज से भी सुविधाजनक साबित होता है। हालांकि सभी फ्रोजन फूड एक जैसे नहीं होते। फ्रोजन मटर, पालक, कॉर्न, मिश्रित सब्जियां और बिना मसाले वाला फ्रोजन चिकन अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माने जाते हैं। दूसरी ओर फ्रोजन पिज्जा, बर्गर पैटी, फ्रेंच फ्राइज, सॉसेज, नगेट्स और अधिक प्रोसेस्ड रेडी-टू-ईट उत्पादों में नमक, चीनी, ट्रांस फैट और प्रिजर्वेटिव की मात्रा काफी अधिक हो सकती है। ऐसे खाद्य पदार्थों का बार-बार सेवन स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अत्यधिक प्रोसेस्ड फ्रोजन फूड खाने से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। इनमें मौजूद अतिरिक्त सोडियम शरीर में पानी रोकता है, जिससे रक्तचाप बढ़ने की संभावना रहती है। कई उत्पादों में संतृप्त वसा और कृत्रिम स्वाद भी मिलाए जाते हैं, जो लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए खरीदारी करते समय पैकेट पर लिखी पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना जरूरी है। कितना फ्रोजन फूड खाना चाहिए, इसका कोई एक निश्चित नियम नहीं है। पोषण विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि आपका आहार संतुलित है तो सप्ताह में एक-दो बार फ्रोजन रेडी-टू-कुक भोजन लेना सामान्य माना जा सकता है। वहीं फ्रोजन सब्जियों और फलों का उपयोग जरूरत के अनुसार नियमित रूप से भी किया जा सकता है, बशर्ते उनमें अतिरिक्त नमक, चीनी या मसाले न मिले हों। कोशिश करें कि आपकी थाली का अधिकांश हिस्सा ताजा और घर में बना भोजन ही हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भी फ्रोजन फूड चुनते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें अधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की बजाय साधारण फ्रोजन सब्जियां, फल या बिना मसाले वाले खाद्य विकल्प देना बेहतर माना जाता है। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी या हृदय संबंधी समस्याएं हैं, उन्हें ज्यादा सोडियम वाले फ्रोजन उत्पादों से बचना चाहिए। फ्रोजन फूड का उपयोग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। एक बार पिघलाए गए खाद्य पदार्थ को दोबारा फ्रीज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है। पैकेट पर लिखी एक्सपायरी डेट जरूर जांचें और उत्पाद को निर्देशानुसार ही स्टोर करें। खाना बनाते समय उसे पूरी तरह पकाना भी आवश्यक है ताकि किसी प्रकार के संक्रमण की संभावना कम हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">यदि आप स्वस्थ जीवनशैली अपनाना चाहते हैं तो फ्रोजन फूड को सुविधा के रूप में देखें, भोजन का स्थायी विकल्प नहीं। ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, दूध, अंडे और घर का बना भोजन अब भी सबसे बेहतर विकल्प माने जाते हैं। फ्रोजन फूड का उपयोग तभी करें जब समय की कमी हो या ताजे विकल्प उपलब्ध न हों। आखिरकार यह कहना गलत होगा कि फ्रोजन फूड हमेशा नुकसानदायक होता है। सही उत्पाद चुनकर, सीमित मात्रा में और संतुलित आहार के साथ इसका सेवन किया जाए तो यह व्यस्त जीवनशैली में उपयोगी साबित हो सकता है। वहीं अत्यधिक प्रोसेस्ड और जंक फ्रोजन फूड का नियमित सेवन लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए खरीदारी करते समय लेबल पढ़ें, पोषण संबंधी जानकारी समझें और अपनी जरूरत के अनुसार समझदारी से चुनाव करें। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली ही अच्छी सेहत की सबसे मजबूत नींव मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:00:50 +0530</pubDate>
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                <title>शिशुकुंज स्कूल मामला: बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद घर-घर पहुंची डॉक्टरों की टीम</title>
                                    <description><![CDATA[लंच के बाद 150 से अधिक छात्रों में दिखे बीमारी के लक्षण, किचन सील; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की निगरानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/shishu-kunj-school-case-team-of-doctors-reached-door-to/article-56784"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/shishukunj-school-indore.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर के प्रतिष्ठित शिशुकुंज स्कूल में छात्रों की तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। स्कूल में लंच करने के बाद 150 से अधिक बच्चों के बीमार पड़ने के मामले ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। घटना के बाद अब डॉक्टरों की टीमें प्रभावित बच्चों के घर-घर जाकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही हैं। शुरुआती जांच में कई बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है और सभी को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।मामला सामने आने के बाद मंगलवार को स्कूल का माहौल सामान्य दिनों से अलग नजर आया। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को घर से टिफिन देकर स्कूल भेजा। कई छात्रों ने स्कूल का भोजन लेने के बजाय घर का बना खाना ही खाना उचित समझा। वहीं कुछ अभिभावकों ने एहतियात के तौर पर बच्चों को स्कूल नहीं भेजा, जिसके चलते उपस्थिति भी अपेक्षाकृत कम रही। स्कूल प्रबंधन ने भी अभिभावकों को ई-मेल भेजकर फिलहाल बच्चों के लिए घर से भोजन भेजने का अनुरोध किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पूरा मामला शनिवार को सामने आया था। स्कूल में दोपहर का भोजन करने के कुछ समय बाद कई बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, कमजोरी, घबराहट और बेचैनी की शिकायत की। धीरे-धीरे प्रभावित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। अभिभावकों को सूचना मिलने के बाद वे बच्चों को अस्पताल और क्लीनिक लेकर पहुंचे। देखते ही देखते यह मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया। प्रभावित छात्रों में बड़ी संख्या चौथी कक्षा तक के बच्चों की बताई जा रही है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल सक्रियता दिखाई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी के निर्देश पर डॉक्टरों की टीम गठित की गई। मंगलवार को टीम ने करीब 30 बच्चों के घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉक्टरों ने बच्चों की स्थिति का आकलन किया और अभिभावकों से बीमारी के लक्षणों तथा वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में अन्य प्रभावित बच्चों के घर भी जाकर जांच की जाएगी ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दिए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित भोजन या पानी के सेवन से ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि बीमारी की वास्तविक वजह का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल डॉक्टर बच्चों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने और स्वास्थ्य पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं। इस घटना के बाद सोमवार को अभिभावकों का गुस्सा भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और पूरे मामले को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कई अभिभावकों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। सोमवार को दोनों विभागों की संयुक्त टीम ने स्कूल परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। करीब चार घंटे तक चली जांच के दौरान किचन और खाद्य भंडारण व्यवस्था की पड़ताल की गई। निरीक्षण के दौरान कुछ खाद्य सामग्री और मसालों की एक्सपायरी डेट समाप्त होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए स्कूल के किचन को सील कर दिया। जांच दल ने किचन से विभिन्न खाद्य पदार्थों और पेय सामग्री के नमूने भी एकत्र किए हैं। इनमें पनीर, दूध, आइसक्रीम, दाल, तैयार भोजन, मसाले और पानी के नमूने शामिल हैं। कुल 23 नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि विभाग को अब तक कई अभिभावकों की ओर से शिकायतें और जानकारी प्राप्त हुई हैं। स्कूल प्रशासन ने भी अस्वस्थ महसूस करने वाले करीब 85 विद्यार्थियों को एहतियातन घर भेजा था। फिलहाल किसी भी बच्चे को अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं पड़ी है और सभी की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। अभिभावक, प्रशासन और स्कूल प्रबंधन यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। तब तक स्वास्थ्य विभाग बच्चों की निगरानी जारी रखेगा और एहतियाती कदम उठाता रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 12:17:20 +0530</pubDate>
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                <title>रीवा में वेज बिरयानी में निकला कीड़ा, स्ट्रीट किचन का लाइसेंस निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[जोमैटो से ऑर्डर की गई बिरयानी में कीड़ा मिलने की शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की छापामार कार्रवाई, किचन में मिली भारी गंदगी और कई अनियमितताएं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/insect-found-in-veg-biryani-in-rewa-license-of-street/article-56170"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रीवा शहर में ऑनलाइन फूड डिलीवरी को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जोमैटो के माध्यम से मंगाई गई वेज बिरयानी में कीड़ा निकलने की शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ताला हाउस क्षेत्र स्थित स्ट्रीट किचन रेस्टोरेंट पर छापा मारा। जांच के दौरान जो हालात सामने आए, उन्होंने न सिर्फ उपभोक्ताओं की चिंताओं को बढ़ा दिया बल्कि शहर में संचालित अन्य फूड आउटलेट्स की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत मिलने के बाद मंगलवार रात अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और रेस्टोरेंट की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में ही कई ऐसी खामियां सामने आईं जिन्हें खाद्य सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन माना गया। अधिकारियों के अनुसार, वेज बिरयानी में कीड़ा मिलने की शिकायत सही पाई गई और इसके बाद प्रतिष्ठान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। विभाग ने तत्काल प्रभाव से स्ट्रीट किचन का फूड लाइसेंस निलंबित कर दिया और संचालन पर रोक लगा दी।</p>
<p style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि रेस्टोरेंट का किचन खुले वातावरण में संचालित हो रहा था। वहां खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी इंतजाम नहीं थे। साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद खराब बताई गई। कई स्थानों पर गंदगी जमा थी और खाद्य सामग्री के रखरखाव में भी लापरवाही दिखाई दी। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में भोजन के दूषित होने और उसमें कीड़े या अन्य अवांछित तत्व पहुंचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रतिष्ठान अपनी व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार नहीं करता, तब तक उसे संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभाग ने रेस्टोरेंट संचालकों को सभी कमियों को दूर करने और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस घटना के बाद शहर के उन लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली है जो नियमित रूप से ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से भोजन मंगाते हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे गुणवत्ता और सुरक्षा की उम्मीद के साथ ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं उनके भरोसे को कमजोर करती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच कलेक्टर के निर्देश पर चलाए जा रहे “मिलावट से मुक्ति अभियान” के तहत मोबाइल फूड लैब की टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की जांच भी की। सिरमौर चौराहा क्षेत्र में मैंगो शेक के नमूने लिए गए, जहां जांच के दौरान यह पाया गया कि कई दुकानों पर आम के वास्तविक गूदे की बजाय फूड कलर, शक्कर का पानी और दूध मिलाकर मैंगो शेक तैयार किया जा रहा था। हालांकि लैब परीक्षण में किसी खतरनाक या हानिकारक रसायन की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इस तरह की मिलावट को लेकर विभाग ने संबंधित कारोबारियों को चेतावनी दी है। अधिकारियों ने कहा कि उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले ऐसे तरीकों पर लगातार नजर रखी जाएगी। दूसरी ओर, इस पूरी कार्रवाई ने खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में सैकड़ों होटल, रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट संचालित हो रहे हैं, जहां समय-समय पर स्वच्छता और खाद्य गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं। लोगों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण होते रहें तो इस तरह की स्थितियों को पहले ही रोका जा सकता है। कई उपभोक्ताओं ने सवाल उठाया है कि क्या विभाग केवल शिकायत मिलने के बाद ही सक्रिय होता है या फिर पूरे शहर में व्यवस्थित और नियमित जांच की कोई स्थायी व्यवस्था भी है। इसके अलावा विभागीय कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पिछले कुछ महीनों में विभिन्न प्रतिष्ठानों से लिए गए खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई सार्वजनिक रूप से साझा की जाए तो उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और खाद्य कारोबारियों पर भी नियमों का पालन करने का दबाव बनेगा। स्ट्रीट किचन रेस्टोरेंट के खिलाफ की गई कार्रवाई को खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:37:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर में होटल अमृतसरी सील, बाथरूम के पास बन रही थी बिरयानी</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की कार्रवाई में भारी गंदगी का खुलासा, 1 लाख रुपए का जुर्माना; वर्षों से बकाया राशि नहीं चुकाने का भी आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/biryani-was-being-made-near-the-bathroom-of-hotel-amritsari/article-56089"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/hotel-amritsari.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र घड़ी चौक स्थित होटल अमृतसरी के खिलाफ नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए होटल को सील कर दिया है। निगम की संयुक्त टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में होटल के भीतर गंभीर स्वच्छता अनियमितताएं सामने आईं। जांच के दौरान ऐसी तस्वीरें और हालात देखने को मिले, जिन्होंने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया। होटल संचालक पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल स्वच्छता नियमों के उल्लंघन के कारण नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित बकाया राशि का भुगतान नहीं करने की वजह से भी की गई है। सोमवार को नगर निगम की टीम जब होटल अमृतसरी पहुंची तो वहां कई तरह की खामियां सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक होटल परिसर में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब थी। कई जगह कचरा जमा मिला और भोजन तैयार करने वाले क्षेत्र में भी स्वच्छता के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि बिरयानी और अन्य खाद्य सामग्री बाथरूम से सटे स्थान पर रखी गई थी। इसके अलावा सड़क किनारे अस्थायी तरीके से किचन संचालित किए जाने के भी प्रमाण मिले। अधिकारियों ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि होटल प्रबंधन को पहले भी कई बार नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें साफ-सफाई सुधारने, बकाया राशि जमा करने और नियमों के अनुरूप संचालन करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन बार-बार चेतावनी के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। ऐसे में निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए होटल को सील करने का फैसला लिया। अधिकारियों के अनुसार यदि भविष्य में होटल दोबारा शुरू करना है तो उसे सभी नियमों का पालन करते हुए आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करनी होंगी। जांच में यह भी सामने आया कि होटल अमृतसरी पर नगर निगम का कई वर्षों से बकाया चल रहा था। निगम की ओर से कई बार भुगतान के लिए नोटिस भेजे गए, लेकिन प्रबंधन ने राशि जमा नहीं की। इसके बाद राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग, बाजार शाखा और नगर निवेश विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई। इसी क्रम में होटल को सील किया गया और जुर्माना लगाया गया। अधिकारियों का कहना है कि निगम राजस्व की वसूली और नियमों के पालन को लेकर अब और सख्ती बरतेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">होटल पर कार्रवाई के साथ-साथ नगर निगम ने शहर के अन्य बाजार क्षेत्रों में भी व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया। गोलबाजार, मालवीय रोड और आसपास के प्रमुख कारोबारी इलाकों में दुकानों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान 17 दुकानों में गंदगी, कचरा प्रबंधन में लापरवाही और स्वच्छता नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए। इन दुकानदारों पर कुल 18 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण जारी रहेंगे। इसी अभियान के तहत नगर निवेश विभाग ने सड़क पर अतिक्रमण कर व्यवसाय चलाने वाले दुकानदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की। करीब 25 दुकानदारों से सड़क बाधा शुल्क के रूप में लगभग 50 हजार रुपए वसूले गए। कई स्थानों पर सड़क पर रखा सामान हटाया गया और कुछ मामलों में सामान जब्त भी किया गया। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल रहे। कार्रवाई के दौरान राजस्व, स्वास्थ्य, बाजार और नगर निवेश विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि शहर में खाद्य प्रतिष्ठानों, होटल, रेस्टोरेंट और बाजार क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाएगी ताकि लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर समय-समय पर सख्त जांच जरूरी है। खासकर ऐसे प्रतिष्ठानों में जहां बड़ी संख्या में लोग भोजन करने पहुंचते हैं। वहीं निगम अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से अन्य होटल और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी नियमों का पालन करने का संदेश जाएगा। होटल अमृतसरी को सील कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। नगर निगम ने साफ कर दिया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:27:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>राजगढ़ सांसद का बड़ा दावा: 4 साल में 27 बच्चों को हुआ ब्लड कैंसर, खाने में मिलावट पर जताई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[राजगढ़ में सांसद रोडमल नागर ने नकली दूध और मिलावट को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कॉलोनी में 27 बच्चों में ब्लड कैंसर का दावा करते हुए स्वास्थ्य पर खतरे की बात कही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-claim-of-rajgarh-mp-27-children-got-blood-cancer/article-52745"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(51).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजगढ़ में मंगलवार रात एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा सांसद रोडमल नागर ने नकली दूध और मिलावट को लेकर जो बयान दिया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने माहौल को गंभीर बना दिया। उन्होंने मंच से कहा कि गांवों और शहरों में बढ़ती मिलावट और जहरीले खानपान की वजह से नई पीढ़ी की सेहत पर बड़ा संकट खड़ा हो रहा है। अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया कि उनकी ही कॉलोनी में पिछले चार साल में 27 बच्चों को ब्लड कैंसर हो गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसे उन्होंने बेहद भयावह स्थिति बताया। हालांकि यह दावा उन्होंने अपने अनुभव और जानकारी के आधार पर मंच से रखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके पीछे के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक चिकित्सा पुष्टि नहीं की गई है। कार्यक्रम के दौरान मंच पर राजगढ़ विधायक अमर सिंह यादव और मोहनपुरा-कुंडालिया सिंचाई परियोजना के प्रशासक विकास राजोरिया भी मौजूद रहे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सांसद ने अपने भाषण में नकली दूध और सब्जियों में हो रही कथित मिलावट पर खास चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज गांव-गांव में लालच के चलते ऐसा कारोबार बढ़ रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ईमानदार पशुपालक भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर कहीं भी नकली दूध तैयार होने की जानकारी मिले तो उसे छिपाने की बजाय प्रशासन तक पहुंचाया जाए। उनके अनुसार यह जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं बल्कि समाज की भी है। उन्होंने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">अगर कहीं भी नकली दूध बन रहा है तो बिना नाम बताए मुझे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विधायक अमर सिंह यादव को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलेक्टर या एसपी को जानकारी दें।</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आज की सब्जियों में भी बदलाव आ गया है और लौकी जैसी सामान्य सब्जी में भी इंजेक्शन लगाए जाने की बातें सामने आती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। मूंग दाल जैसी पौष्टिक मानी जाने वाली चीजें भी अब शुद्ध नहीं रहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा उनका कहना था।</span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सांसद ने खेती में बढ़ते रासायनिक उपयोग को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि किसान उत्पादन बढ़ाने के दबाव में जरूरत से ज्यादा यूरिया और रासायनिक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जमीन की सेहत खराब हो रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाब में जिस तरह खेती के गलत तरीकों और अत्यधिक रसायनों के इस्तेमाल का असर जमीन पर पड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे ठीक होने में दशकों लग गए। उन्होंने आशंका जताई कि अगर यही स्थिति रही तो हमारी जमीन भी आने वाले 10 सालों में बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। उनके अनुसार यह सिर्फ खेती का मुद्दा नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर सवाल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर अभी से ध्यान देने की जरूरत है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-claim-of-rajgarh-mp-27-children-got-blood-cancer/article-52745</link>
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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 11:43:57 +0530</pubDate>
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