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                <title>Devotees - दैनिक जागरण</title>
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                            <item>
                <title>काल भैरव मंदिर में VIP दर्शन से 45 दिनों में ₹3.09 करोड़ की आय, श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ बनी बड़ी वजह</title>
                                    <description><![CDATA[₹500 की शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मंदिर प्रबंधन को मिली रिकॉर्ड आय, महाकाल मंदिर के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव धाम पहुंच रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-early-darshan-vip-ticket-system-of-%E2%82%B9-500-started/article-57942"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/kal-bhairav-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में शुरू की गई ₹500 की शीघ्र दर्शन (VIP दर्शन) व्यवस्था मंदिर प्रबंधन के लिए आय का बड़ा स्रोत बनकर उभरी है। महज 45 दिनों के भीतर इस व्यवस्था से 3 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये की आय दर्ज की गई है। 20 मई से 3 जुलाई के बीच हुई इस कमाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और दर्शन की सुगम व्यवस्था के लिए शुरू किया गया यह प्रयोग सफल साबित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन के अनुसार, श्री महाकालेश्वर मंदिर के बाद उज्जैन में सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव मंदिर पहुंचते हैं। विशेष रूप से शनिवार, रविवार, अवकाश और धार्मिक पर्वों पर यहां हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इसी बढ़ती भीड़ को व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं को कम समय में दर्शन कराने के उद्देश्य से ₹500 की शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था लागू की गई थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>45 दिनों में तीन करोड़ से अधिक की आय</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 20 मई से 3 जुलाई तक VIP दर्शन टिकटों की बिक्री से कुल 3 करोड़ 9 लाख 27 हजार रुपये की आय हुई। यह आय केवल उन दिनों की है, जब टिकटों का नियमित वितरण हुआ। जिन दिनों अत्यधिक भीड़ के कारण टिकट वितरण रोक दिया गया था, उनकी आय इस आंकड़े में शामिल नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य सामान्य दर्शन व्यवस्था को प्रभावित किए बिना भीड़ का बेहतर प्रबंधन करना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><span>महाकाल के बाद सबसे अधिक श्रद्धालु काल भैरव मंदिर में</span></h3>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधक संध्या मार्कंडेय के अनुसार उज्जैन आने वाले अधिकांश श्रद्धालु श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद काल भैरव मंदिर अवश्य पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा महाकाल के दर्शन तब तक पूर्ण नहीं माने जाते, जब तक श्रद्धालु काल भैरव के दर्शन नहीं करते।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कारण वर्षभर यहां श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या बनी रहती है। विशेष अवसरों और छुट्टियों के दौरान मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखने को मिलती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>अलग प्रवेश मार्ग से कराए जाते हैं शीघ्र दर्शन</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">VIP दर्शन व्यवस्था के तहत टिकट लेने वाले श्रद्धालुओं को अलग प्रवेश मार्ग से मंदिर में प्रवेश कराया जाता है। इससे उन्हें लंबी कतार में खड़े रहने की आवश्यकता नहीं पड़ती और कम समय में दर्शन हो जाते हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। दोनों व्यवस्थाएं अलग-अलग संचालित की जाती हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>प्रतिदिन लाखों रुपये की होती है आय</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन के अनुसार सामान्य दिनों में शीघ्र दर्शन टिकटों से प्रतिदिन लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक की आय होती है। वहीं यदि किसी धार्मिक पर्व, शनिवार, रविवार या अवकाश के कारण श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है तो यह आय बढ़कर 10 से 11 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>भीड़ बढ़ने पर रोकना पड़ता है टिकट वितरण</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">काल भैरव मंदिर का परिसर सीमित क्षमता वाला है। ऐसे में यदि अचानक श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो जाती है तो सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए VIP टिकटों का वितरण अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है। मंदिर प्रशासन ने बताया कि कई बार आधे घंटे या उससे अधिक समय तक टिकट बिक्री बंद रखनी पड़ती है ताकि परिसर में धक्का-मुक्की जैसी स्थिति न बने और सभी श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से दर्शन कर सकें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>अवकाश के दिनों में रहती है सबसे ज्यादा भीड़</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">शनिवार, रविवार, मुहर्रम सहित अन्य सार्वजनिक अवकाशों के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे दिनों में सामान्य दर्शन के साथ-साथ शीघ्र दर्शन टिकटों की मांग भी काफी बढ़ जाती है। हालांकि, अत्यधिक भीड़ होने पर प्रशासन को VIP टिकट जारी करना बंद करना पड़ता है ताकि मंदिर परिसर की क्षमता से अधिक लोगों का प्रवेश न हो। पहले छुट्टियों के दौरान भी टिकट जारी किए जाते थे, लेकिन बाद में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था में बदलाव किया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>धार्मिक पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">उज्जैन में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका सकारात्मक प्रभाव काल भैरव, हरसिद्धि, मंगलनाथ, चिंतामन गणेश और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी देखने को मिल रहा है। बेहतर व्यवस्थाओं और सुविधाओं के कारण श्रद्धालुओं का अनुभव पहले की तुलना में अधिक सहज हुआ है। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिली है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span>व्यवस्था और सुविधाओं पर रहेगा जोर</span></strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मंदिर प्रबंधन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य में भी भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही VIP दर्शन व्यवस्था का संचालन भी पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रहेगा। 45 दिनों में तीन करोड़ रुपये से अधिक की आय यह दर्शाती है कि काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:22:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निर्जला एकादशी पर नर्मदा तटों पर उमड़ी आस्था, 20 हजार श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान</title>
                                    <description><![CDATA[अनूपपुर और अमरकंटक क्षेत्र के घाटों पर सुबह से रही भक्तों की भीड़, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ की सुख-समृद्धि की कामना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/faith-surged-on-the-banks-of-narmada-on-nirjala-ekadashi/article-56903"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nirjala-ekadashi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी पर गुरुवार को अनूपपुर जिले सहित अमरकंटक क्षेत्र के नर्मदा घाटों पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालुओं का घाटों की ओर पहुंचना शुरू हो गया था। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई और नर्मदा तटों पर धार्मिक वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। अनुमान है कि दिनभर में 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन किए, पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और दान करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। यही वजह रही कि अनूपपुर, अमरकंटक और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा तटों पर पहुंचे। कई परिवार सुबह-सुबह ही घाटों पर पहुंच गए थे, जबकि दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु देर रात और भोर के समय ही अमरकंटक पहुंचने लगे थे। घाटों पर महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की अच्छी खासी मौजूदगी देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमरकंटक स्थित रामघाट, कोटितीर्थ कुंड, पुष्कर बांध, आरंडी संगम और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पूरे दिन श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। घाटों पर स्नान के बाद लोगों ने नर्मदा माता की पूजा की और धार्मिक परंपराओं का पालन किया। कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ पहुंचे थे और उन्होंने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। घाटों पर जगह-जगह भजन, कीर्तन और धार्मिक मंत्रोच्चार सुनाई देते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार श्रद्धालु केवल अनूपपुर जिले से ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिलों और राज्यों से भी पहुंचे थे। शहडोल, कोतमा, पुष्पराजगढ़, धनपुरी, बुढार और अनूपपुर के अलावा छत्तीसगढ़ के गौरेला, पेंड्रा, मरवाही, कोरबा, बिलासपुर, मुंगेली और लोरमी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कुछ श्रद्धालु राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी धार्मिक यात्रा पर आए थे। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं ने नर्मदा उद्गम क्षेत्र के दर्शन कर स्वयं को सौभाग्यशाली बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">निर्जला एकादशी के अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर धार्मिक अनुष्ठान भी किए। नर्मदा स्नान के बाद लोगों ने जप, तप और ध्यान किया। मंदिरों में विशेष पूजन कार्यक्रम आयोजित किए गए थे, जिनमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। कई लोगों ने जरूरतमंदों को दान भी दिया और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुण्य अर्जित करने का प्रयास किया। धार्मिक आयोजनों के चलते मंदिर परिसरों में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रमुख घाटों और मंदिर परिसरों में सुरक्षा कर्मी लगातार निगरानी करते रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। घाटों पर लोगों को सुरक्षित स्नान कराने और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए विशेष प्रबंध किए गए थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक आयोजनों के दौरान स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों को भी अच्छी आमदनी होने की उम्मीद रही। घाटों और मंदिरों के आसपास प्रसाद, पूजन सामग्री, फल और अन्य धार्मिक वस्तुओं की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ देखी गई। कई श्रद्धालुओं ने स्थानीय बाजारों से धार्मिक सामग्री खरीदी और पूजा-अर्चना में उसका उपयोग किया। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम रही। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों का मानना है कि वर्तमान समय में खेती-किसानी के काम शुरू होने के कारण कई किसान धार्मिक आयोजनों में शामिल नहीं हो सके। इसके बावजूद नर्मदा तटों पर दिनभर श्रद्धालुओं की अच्छी मौजूदगी बनी रही और धार्मिक उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">निर्जला एकादशी का महत्व केवल व्रत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, श्रद्धा और सेवा का भी पर्व माना जाता है। इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा तटों और मंदिरों में पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं। दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों और पूजा-अर्चना के बाद शाम के समय कई मंदिरों में विशेष आरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। नर्मदा तटों पर गूंजते भजन और आरती के स्वर देर शाम तक धार्मिक वातावरण को जीवंत बनाए रहे। निर्जला एकादशी के इस पर्व ने एक बार फिर अनूपपुर और अमरकंटक क्षेत्र को आस्था और श्रद्धा के रंग में रंग दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:40:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खराब तबीयत के बीच भावुक हुए प्रेमानंद महाराज, बोले- ‘मेरी चिंता छोड़िए, भजन करते रहिए’</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमानंद महाराज ने खराब स्वास्थ्य के बीच भावुक संदेश जारी कर भक्तों से चिंता न करने और भजन-नाम जप में लगे रहने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/premanand-maharaj-became-emotional-amid-ill-health-and-said/article-54218"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/premanand-maharaj-vrindavan-saint-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज इन दिनों खराब सेहत के चलते चर्चा में हैं। उनकी पदयात्रा 17 मई से बंद होने के बाद भक्तों में चिंता की लहर बनी हुई थी। इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेमानंद महाराज ने एक आधिकारिक संदेश जारी किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उन्होंने भावुकता के साथ भक्तों से अपील की है कि वे उनकी चिंता न करें और भजन-नाम जप में लगे रहें। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो के बाद बड़ी संख्या में लोग अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। वीडियो में महाराज बेहद शांत नजर आ रहे हैं और उन्होंने धीमी आवाज में कहा कि उन्हें भक्तों की भीड़ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनका स्वस्थ और खुशहाल जीवन चाहिए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, “<span lang="hi" xml:lang="hi">मैं रहूं या न रहूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलूं या न मिलूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस बारे में चिंता मत करो।</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भक्तों को राधा रानी के आश्रित रहने और नियमित भजन करने की सलाह दी। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में उनकी तबीयत ठीक नहीं रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके चलते उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों और पदयात्राओं से दूरी बना ली है। फिर भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने अपने संदेश में साफ कहा कि भक्त परेशान न हों और जो सेवा वे कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे जारी रखें। उनके वीडियो में भावनाओं से भरा अंदाज कई भक्तों को छू गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कई लोग इसे गुरु-शिष्य के रिश्ते का प्रतीक मान रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि उनका मौन और एकांत केवल व्यक्तिगत साधना नहीं है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भक्तों के लिए भी एक साधना का समय है। महाराज ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">हमारा जो कुछ भी होना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह हो गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब जो हो रहा है वह आप सबके लिए है।</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दौरान उन्होंने बार-बार नाम जप और भक्ति पर जोर दिया। सुनने में आ रहा है कि उनकी पदयात्रा बंद होने के बाद वृंदावन आने वाले कई श्रद्धालु निराश होकर लौटे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि लोग रोजाना उनकी एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में आते थे। इसीलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका यह संदेश भक्तों को सुकून पहुंचाने का एक प्रयास भी माना जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वीडियो वायरल होने के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर भक्त लगातार उनकी जल्दी स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि महाराज का संदेश सुनकर उनकी आंखें नम हो गईं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रेमानंद महाराज हमेशा भक्ति को दिखावे से ऊपर रखते आए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इस बार भी उन्होंने यही बात दोहराई है। इस वक्त उनकी सेहत के बारे में ज्यादा आधिकारिक जानकारी नहीं आई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन भक्त लगातार उनके स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 10:54:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>महाकाल भस्म आरती में दिखा अद्भुत श्रृंगार, चंद्र-त्रिपुंड से सजे बाबा</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकाल मंदिर में 24 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार हुआ। श्रद्धालुओं ने सुबह आरती में शामिल होकर दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/amazing-makeup-seen-in-mahakal-bhasma-aarti-baba-adorned-with/article-54090"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष और आकर्षक श्रृंगार किया गया। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसके बाद गर्भगृह में पूजा-अर्चना की प्रक्रिया शुरू हुई। भस्म आरती में शामिल होने के लिए देर रात से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में पहुंचने लगी थी। सुबह होते-होते पूरा परिसर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के जयकारों से गूंज उठा। बताया जा रहा है कि छुट्टी का दिन होने के कारण बाहर से आने वाले भक्तों की संख्या भी सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा रही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। फिर दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार लगातार चलता रहा। भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित द्रव्यों से बाबा का श्रृंगार किया गया। इस बार मस्तक पर चंद्र और त्रिपुंड अर्पित किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसने श्रृंगार को और दिव्य स्वरूप दे दिया। गर्भगृह में मौजूद श्रद्धालु लगातार भगवान के दर्शन करने की कोशिश करते नजर आए। कई लोग मोबाइल में इस पल को कैद करते भी दिखाई दिए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंदिर प्रशासन लगातार निगरानी करता रहा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रों के बीच ध्यान पूजन हुआ। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर परंपरा अनुसार भस्म रमाई गई। मंदिर के अंदर उस समय का माहौल काफी आध्यात्मिक दिखाई दिया। आरती पूरी होने के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की मालाएं और पुष्प अर्पित किए गए। सुगंधित फूलों से पूरा गर्भगृह महक उठा था। श्रद्धालु नंदी महाराज के दर्शन के लिए भी लंबी कतार में लगे दिखाई दिए। कई भक्त नंदी के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। अधिकारियों के अनुसार सुबह की भस्म आरती शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और दर्शन व्यवस्था भी सामान्य बनी रही। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए गए थे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 11:15:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल: BJP के जीतने के बाद आसनसोल में सालों से बंद दुर्गा मंदिर फिर खुला, लोगों ने जश्न का माहौल</title>
                                    <description><![CDATA[आसनसोल के बस्तिन बाजार में वर्षों से बंद दुर्गा मंदिर खुला। श्रद्धालुओं में खुशी की लहर, इलाके में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बन गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/after-the-victory-of-bjp-in-west-bengal-durga-temple/article-52751"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(54).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल के आसनसोल शहर में सोमवार को उस वक्त माहौल बदल गया जब बस्तिन बाजार इलाके में स्थित श्री-श्री दुर्गामाता चैरिटेबल ट्रस्ट के दुर्गा मंदिर के दरवाजे वर्षों बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां मौजूद लोगों की आंखों में भावनाएं साफ झलक रही थीं। कई श्रद्धालु सीधे मंदिर परिसर में पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मां दुर्गा के जयकारे लगाए और पूजा-अर्चना शुरू कर दी। लंबे समय से बंद पड़े इस धार्मिक स्थल के खुलने को लोगों ने एक भावनात्मक पल की तरह देखा और इसे स्थानीय आस्था की बड़ी जीत बताया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इलाके में अचानक धार्मिक उत्साह का माहौल बन गया। कहीं ढोल-नगाड़ों की आवाज</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कहीं लोग हाथ जोड़कर मां के सामने खड़े नजर आए। बताया जा रहा है कि यह मंदिर कई सालों से किसी न किसी विवाद या प्रशासनिक स्थिति के चलते नियमित रूप से नहीं खुल पा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि साल में सिर्फ दुर्गा पूजा और लक्ष्मी पूजा जैसे खास मौकों पर ही मंदिर के दरवाजे खोले जाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाकी समय यह बंद रहता था। इससे आसपास के श्रद्धालु लगातार असंतोष जताते रहे और लंबे समय से इसे पूरे साल खोलने की मांग भी उठती रही।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम के बाद इस मामले को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में पश्चिम बर्धमान जिले में राजनीतिक बदलाव देखने को मिला</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद मंदिर को लेकर भी नई गतिविधियां शुरू हुईं। जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विजयी उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान यह आश्वासन दिया था कि अगर वे जीतते हैं तो मंदिर को साल भर श्रद्धालुओं के लिए खोलने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं और इसे लोग अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चुनाव परिणाम के बाद मंदिर खुलने की घटना को कई लोग एक संयोग मान रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ इसे लंबे समय से चली आ रही मांगों के पूरा होने के रूप में देख रहे हैं। बताया यह भी जा रहा है कि जीत के बाद कृष्णेंदु मुखर्जी मंदिर पहुंचे और वहां पूजा-अर्चना कर कपाट खुलवाने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद से ही इलाके में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी और मंदिर परिसर में लगातार श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे अपने लिए भावनात्मक क्षण बताया और कहा कि वे इस दिन का वर्षों से इंतजार कर रहे थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर के खुलने के बाद बस्तिन बाजार इलाके में चहल-पहल भी बढ़ गई है। छोटे दुकानदारों से लेकर आसपास के व्यापारियों तक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी को उम्मीद है कि अब नियमित रूप से श्रद्धालुओं की आवाजाही से स्थानीय कारोबार को फायदा मिलेगा। पूजा सामग्री</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फूल-मालाओं और प्रसाद की बिक्री में भी तेजी देखने को मिल रही है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ बुजुर्ग श्रद्धालुओं का कहना है कि यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थान नहीं बल्कि इलाके की पहचान भी रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसके नियमित रूप से खुलने से समुदाय में जुड़ाव और मजबूत होगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे घटनाक्रम पर प्रशासनिक स्तर से अभी विस्तृत बयान सामने नहीं आया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन स्थानीय स्तर पर माहौल पूरी तरह धार्मिक उत्सव जैसा बना हुआ है। लोग इसे एक नई शुरुआत के रूप में देख रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां आस्था और उम्मीद दोनों साथ नजर आ रही हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 13:27:53 +0530</pubDate>
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